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ट्रेनों की लंबी वेटिंग खत्म करने रेलवे का फैसला, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में बढ़ी सुविधा

रायपुर. रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोरबा-अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में अस्थायी रूप से एक अतिरिक्त एसी-3 कोच जोड़ने का फैसला किया है। इससे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने में राहत मिलेगी। रेलवे के अनुसार, गाड़ी संख्या 18237 कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 21 से 24 मई तथा 26 से 29 मई 2026 तक अतिरिक्त एसी-3 कोच लगाया जाएगा। वहीं गाड़ी संख्या 18238 अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 23 से 26 मई और 28 से 31 मई 2026 तक यह सुविधा उपलब्ध रहेगी। यात्रियों को मिलेगी राहत रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त कोच जुड़ने से अधिक यात्रियों को कन्फर्म बर्थ मिल सकेगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी। गर्मी के मौसम और छुट्टियों के चलते ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

खजुराहो 47.4°C पर पहुंचा, मोबाइल पर इमरजेंसी हीटवेव अलर्ट जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश इस वक्त भीषण गर्मी की चपेट में है। प्रदेश के कई शहर भट्‌ठी की तरह तप रहे हैं और सूरज की तेज तपिश ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। बुधवार को प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा गर्मी बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल इलाके में दर्ज की गई। खजुराहो बना प्रदेश का सबसे गर्म शहर खजुराहो में अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह इस सीजन ही नहीं, बल्कि मई महीने का अब तक का सबसे ज्यादा तापमान माना जा रहा है। इससे पहले 29 अप्रैल 1993 को यहां 46.9 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। खजुराहो देश का दूसरा और दुनिया का चौथा सबसे गर्म शहर भी रहा। देश में सिर्फ बांदा इससे ज्यादा गर्म रहा, जहां 48.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। राजधानी भोपाल में भी गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है। यहां तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि इंसानों के साथ अब जानवर भी गर्मी से बेहाल होने लगे हैं। वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को राहत देने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। शेर, बाघ और तेंदुओं के हाउस में कूलर, पर्दे और ग्रीन नेट लगाए गए हैं, जबकि बाड़ों में लगातार पानी भरा जा रहा है। वहीं भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। सतना, रीवा, मैहर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर जिलों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया है। लोगों के मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश भेजकर धूप से बचने, जरूरी सावधानी बरतने और बिना जरूरत बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। भोपाल में भीषण गर्मी का असर अब जानवरों पर भी दिखाई देने लगा है। शहर का तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया है। गुरुवार सुबह से ही तेज गर्मी का दौर रहा और सुबह 11:30 बजे तक पारा 38 डिग्री दर्ज किया गया। ऐसे में वन विहार नेशनल पार्क ने जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। वन विहार में शेर, बाघ और तेंदुओं के हाउस की खिड़कियों पर पर्दे और ग्रीन नेट लगाई गई है, ताकि धूप और गर्म हवा का असर कम हो। बाड़ों में पानी की होद लगातार भरी जा रही है, जहां टाइगर पानी में अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। वन विहार के डायरेक्टर विजय कुमार ने बताया कि हाउस में कूलर लगाए गए हैं। जानवरों को साल्ट लिक्स और मिनरल मिक्चर भी दिया जा रहा है। वहीं हिरण, सांभर और अन्य खुले में घूमने वाले जानवरों के लिए हरा चारा और पर्याप्त पानी की व्यवस्था की गई है। भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए सतना, रीवा, मैहर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर जिले में आपातकालीन अलर्ट जारी किया गया है। ज्यादातर लोगों के मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश पहुंचा, जिसमें धूप से बचने, जरूरी सावधानी बरतने और बिना जरूरत बाहर न निकलने की सलाह दी गई। चेतावनी- दोपहर 12 से 3 बजे तक बाहर न निकलें प्रदेश में पिछले 2 दिन से भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में मौसम विभाग ने दोपहर में घरों से बाहर नहीं निकलने की चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने कहा कि दोपहर 12 से 3 बजे तक ज्यादा असर रहेगा। ऐसे में लोग जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकले। किन शहरों में सबसे ज्यादा गर्मी? खजुराहो – 47.4°C नौगांव – 46.6°C दमोह – 46°C मंडला – 45.6°C सतना – 45.3°C मुरैना – 45°C इन शहरों में पारा 44 डिग्री के पार पहुंचा रीवा सागर दतिया टीकमगढ़ रायसेन नरसिंहपुर उमरिया  बड़े शहरों का हाल जबलपुर – 44.9°C ग्वालियर – 44.3°C भोपाल – 42.6°C उज्जैन – 42°C इंदौर – 41.1°C

गर्मी में बच्चों की सेहत का ख्याल: डाइट में शामिल करें ये ठंडक देने वाले फूड्स

 गर्मियों में तापमान बढ़ते ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए की सेहत का बहुत ख्याल रखना पड़ता है. जैसे-जैसे सूरत की किरणें आग बरसाना शुरू करती हैं, वैसे-वैसे ही इसका असर बच्चों पर देखने को मिलने लगता है. तेज धूप, उमस और गर्म हवाओं की वजह से बच्चे जल्दी थकने लगते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं और कई बार उनके शरीर में पानी की कमी भी होने लगती है. बाहर खेलते-कूदते समय उनका शरीर बहुत जल्दी ही डिहाइड्रेट होता है, इसलिए इस मौसम में उनकी डाइट सही होना बेहद जरूरी है. ऐसे में माता-पिता की सबसे बड़ी टेंशन ये होती है कि आखिर बच्चों को क्या खिलाया जाए. अगर आप भी प्रचंड गर्मी में बच्चों के लिए ऐसा डाइट चार्ट ढूंढ रहे हैं, जो उन्हें एनर्जी दे, उनके शरीर को ठंड रखे और उनके शरीर में पानी की बिल्कुल भी कमी न होने दे तो ये खबर आपके लिए है. आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो गर्मियों में बच्चों की डाइट में शामिल करना हर माता-पिता के लिए जरूरी है. तरबूज: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज का आता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. इसे खाने से बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होती और उन्हें ताजगी महसूस होती है. साथ ही इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. खीरा: खीरा भी गर्मियों में खाना बहुत अच्छा माना जाता है. ये न केवल बड़ों के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी हेल्दी होता है. इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसे सलाद या हल्के नमक के साथ स्नैक की तरह उनकी डाइट में शामिल किया जा सकता है. दही चावल: आप बच्चों की डाइट में दही और चावल भी शामिल कर सकते हैं. दही और चावल का कॉम्बिनेशन तपती गर्मी में काफी राहत देता है. ये पेट को ठंडा रखता है और पाचन भी बेहतर बनाता है. बच्चों को ये खाने में टेस्टी भी लगता है और उनके पेट के लिए हल्वा भी रहता है. नारियल पानी: गर्मी में बच्चे जब खेलते हैं तो उनके शरीर से खूब पसीने बहते हैं, जिसकी वजह से जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं और वो डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं. नारियल पानी इनकी कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो बच्चों को एक्टिव बनाए रखते हैं और पानी की कमी भी पूरी करते हैं. छाछ: छाछ पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और खाना भी आसानी से पचता है. इसमें कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छे होते हैं. नींबू पानी: आप अपने बच्चों को नींबू पानी भी दे सकते हैं. नींबू पानी बनाकर रख लें और जब भी वो बाहर से खेलकर या स्कूल से वापस आएं तो उन्हें पिला दें. गर्मी में बच्चों के लिए शानदार ड्रिंक है. इसमें विटामिन सी होता है जो शरीर को तरोताजा रखने में मदद करता है. इसे हल्का मीठा बनाकर बच्चों को आसानी से दिया जा सकता है. गुलकंद: गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकंद शरीर की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसे दूध में मिलाकर बच्चों को दिया जा सकता है. ये पेट को भी आराम पहुंचाता है. बेल का शरबत: बेल का फल शरीर को ठंडक देने के लिए जाना जाता है. इसका शरबत बच्चों को गर्मी और लू से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही ये पेट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. टमाटर: लिस्ट में आखिरी नाम टमाटर का है. इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसे सलाद के रूप में बच्चों की डाइट में शामिल किया जा सकता है. ये शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है.

11 हजार से ज्यादा बच्चों को मनचाहे स्कूल में मिला मुफ्त दाखिला, ऑनलाइन लॉटरी पूरी

11 हजार से अधिक बच्चों को मिला मनचाहे विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश के लिए द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया संपन्न भोपाल  शिक्षा का अधिकार अधिनियम अंतर्गत द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी की प्रकिया बुधवार को संपन्न हो गई। इसमें 11 हजार 485 बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश मिला। इस लॉटरी प्रक्रिया में उन बच्‍चों को शामिल किया गया था, जिन्‍हें प्रथम चरण की लॉटरी में उनकी पसंद के स्‍कूल आवंटित नहीं हो सके थे। ऐसे बच्‍चों को निजी विद्यालयों की रिक्‍त सीटों के अनुरूप द्वितीय चरण की लॉटरी के लिए अपनी वरीयता अंकित करते हुए आवेदन करने का एक और अवसर प्रदान किया गया था। द्वितीय चरण की लॉटरी में बच्‍चों को उनकी चुनी गई वरीयता के आधार पर निजी विद्यालयों में सीट का आवंटन  20 मई को ऑनलाइन लॉटरी की स्वचालित कंप्यूटर प्रक्रिया द्वारा किया गया। संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह द्वारा द्वितीय चरण की ऑनलाइन लॉटरी का बटन क्लिक किया गया। नर्सरी कक्षा में 7 हजार 599, केजी 1 में 2 हजार 747 और कक्षा 1 में 1 हजार 139 बच्‍चों का दाखिला हुआ। इस अवसर पर संचालक राज्‍य शिक्षा केंद्र हरजिंदर सिंह ने लॉटरी में चयनित बच्चों को उनकी पसंद का स्कूल आवंटित होने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्‍होंने पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था निर्मित करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग और मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्‍ट्रानिक्‍स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन टीम की प्रशंसा भी की। इस वर्ष आरटीई के तहत लॉटरी के लिए दस्तावेज सत्यापन के उपरांत 1 लाख 80 हजार 875 बच्चे पात्र चयनित हुए थे, जिनमें से 1 लाख 6 हजार से अधिक बच्‍चों को शाला आवंटन प्राप्‍त हुआ था। इसके उपरांत 97 हजार 052 बच्‍चों के द्वारा चयनित स्‍कूलों में प्रवेश लिया जा चुका है। आज आयोजित हुई द्वितीय चरण की लॉटरी में 11 हजार 485 और बच्‍चों को उनकी पसंद के निजी विद्यालयों में प्रवेश आवंटन प्राप्‍त हुआ है। इस प्रकार इस वर्ष सत्र 2026-27 में आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश आवंटन प्राप्‍त करने वाले विद्यार्थियों की संख्‍या 1 लाख 17 हजार 400 से अधिक हो गई है। पोर्टल पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं आवंटन पत्र द्वितीय चरण की लॉटरी में जिन बच्‍चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्‍क प्रवेश प्राप्‍त हुआ है, उनके अभिभावक आरटीई पोर्टल www.rteportal.mp.gov.in पर जाकर आवंटन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।ऑनलाइन लॉटरी में जिनके स्कूलों का आवंटन हुआ है, उन्हें उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस माध्‍यम से भी सूचना दी जा रही है। बच्चे उन्‍हें आवंटित स्कूलों में 20 मई से 10 जून, 2026 तक जाकर प्रवेश ले सकेंगे। इन बच्चों की फीस सरकार द्वारा नियमानुसार सीधे स्कूल के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। इस अवसर पर राज्‍य शिक्षा केंद्र की आरटीई नियंत्रक सुकिरण कुशवाह, प्रशासक डॉ. राकेश दुबे और तकनीकी सहयोगी विभाग मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि नितीन तुरकर, राम यादव सहित अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे। 

अंडा, चिकन या मटन: किसका प्रोटीन सबसे जल्दी पचता है? जानें सही जवाब

नॉन-वेजिटेरियन लोग प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए अपनी डाइट में अंडा, चिकन या मटन को शामिल करते हैं. कई लोग दिन भर में 10-20 अंडे, 500-800 ग्राम चिकन मटन खा लेते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन आपका पेट सबसे जल्दी और आसानी से पचा पाता है? दरअसल, डाइजेशन के मामले में हर प्रोटीन का असर शरीर पर अलग होता है लेकिन अक्सर लोग ज्यादा प्रोटीन के चक्कर में ऐसा फूड चुन लेते हैं जिसे पचाने में पेट को भारी मेहनत करनी पड़ती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन सोर्स सबसे जल्दी पचता है. अंडे के प्रोटीन को समझें हेल्थलाइन के मुताबिक, जब बात सबसे जल्दी और पूरी तरह से पचने वाले प्रोटीन की आती है तो अंडा इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर में अंडे को 1.0 रेटिंग मिली है जो सबसे बेस्ट मानी जाती है. इसका मतलब है कि अंडे का प्रोटीन खाने के बाद शरीर इसे बहुत तेजी से और आसानी से तोड़कर अवशोषित कर लेता है. 1 पूरे अंडे को पचने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है. चिकन ब्रेस्ट अंडे के बाद चिकन तेजी से डाइजेस्ट होता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकन ब्रेस्ट में फैट की मात्रा बहुत कम यानी न के बराबर होती है. लीन मीट होने की वजह से पेट को इसे ब्रेकडाउन करने में अधिक समय नहीं लगता. मटन की तुलना में चिकन काफी हल्का होता है और इसका प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर भी लगभग 1.0 के करीब होता है. यदि आपका डाइजेशन थोड़ा कमजोर भी है तो भी उबला या ग्रिल्ड चिकन पेट पर भारी नहीं पड़ता. चिकन को पूरी तरह पचने में 2.5 से 3.5 घंटे का समय लगता है. मटन पचने में लगती है देरी मटन यानी रेड मीट प्रोटीन का एक बहुत ही रिच सोर्स है लेकिन इसे पचाना सबसे मुश्किल काम है. डाइजेशन टाइमलाइन रिपोर्ट बताती है कि हाई-फैट और कॉम्प्लेक्स मॉलिक्यूल्स वाले रेड मीट जैसे मटन को पूरी तरह पचने में काफी लंबा समय लगता है. मटन में सैचुरेटेड फैट और डेंस मसल्स फाइबर्स होते हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए पेट के एसिड और एंजाइम्स को कई घंटों तक लगातार काम करना पड़ता है. इसलिए रात के समय मटन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. मटन या रेड मीट को पचने में 4 से 6 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है.

CM रेखा गुप्ता समेत मंत्री घर से कर रहे काम, सचिवालय में पसरा सन्नाटा

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी बुधवार को वर्क फ्रॉम होम पर रहे। सिर्फ जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारी ही दिल्ली सचिवालय में नजर आए। सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ था। सीएम रेखा गुप्ता बुधवार को खुद वर्क फ्रॉम होम पर रहीं। सिविल लाइंस स्थित जनसेवा सदन के अपने आवास से ही उन्होंने हाइब्रिड मॉडल में बैठकें की। ईंधन बचाने के मकसद से दिल्ली सरकार ने सप्ताह में दो दिन बुधवार व शनिवार को वर्क फ्रॉम होम रखा है। हालांकि इससे जरूरी सेवा से जुड़े कर्मचारियों को बाहर रखा गया है '2 दिन WFH रखें उद्योगपति' सीआईआई दिल्ली स्टेट काउंसिल की बैठक में दिल्ली के पर्यटन, स्किल डिवेलपमेंट, इवेट इंडस्ट्री और उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न नीति विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने अपनी चिंताओं और सुझावों को रखा। इस दौरान दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन और आयोजन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार साझा किए। कपिल मिश्रा ने करते हुए उद्योग जगत से सप्ताह में दो या तीन दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की अपील की। सिविल लाइंस स्थित आवास से CM ने हाइब्रिड मॉडल में बैठकें की दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि बुधवार को वर्क फ्रॉम होने के कारण सीएम और मंत्री ने घर से ही काम किया। सीएम ने व्यय-वित्त समिति की बैठक की, जिसमें ज्यादातर अधिकारी घर से ऑनलाइन शामिल हुए। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बुधवार को अपने घर से ऑनलाइन बैठकें कीं। सीएम रेखा गुप्ता ने सरकार के अलावा निजी कंपनियों से भी सप्ताह में एक से दो दिन वर्क फ्रॉम होम करने की अपील की है।  

शमी का पौधा: घर में लगाने से दूर होते हैं वास्तु दोष और बढ़ती है समृद्धि

 हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शमी का पौधा बहुत ही शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इस पवित्र पौधे में कर्मफल दाता शनि का वास होता है, जो कि भगवान शिव का भी प्रिय है. मान्यता है कि यह पौधा घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है, जिसके रहते नकारात्मक ऊर्जा भी घर से कोसों दूर रहती है. इस पौधे की लकड़ियों का उपयोग अग्नि में किया जाता है ताकि घर का वातावरण शुद्ध रहे और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर घर की शमी के पौधे को सही दिशा लगाए जाए तो यह जातक मालामाल भी कर देता है. वास्तु के अनुसार शमी का सही स्थान 1. इसे घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना शुभ माना जाता है. 2. अगर बाहर निकलते समय यह दाईं ओर पड़े, तो और भी अच्छा फल देता है. 3. उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. 4. यह पौधा घर के आसपास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. मान्यता है कि जहां शमी का पौधा हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं और घर का माहौल शांत रहता है. धन और तरक्की से जुड़ा है शमी का पौधा वास्तु के अनुसार, शमी का पौधा घर में धन आकर्षित करने वाला माना जाता है. 1. घर में इसे लगाने से आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं. 2. यह नकारात्मक ऊर्जा को रोककर घर में मां लक्ष्मी जी के आगमन करवाता है. 3. जिन लोगों को कर्ज या पैसों की दिक्कत हो, उनके लिए यह खास लाभकारी माना जाता है. शनिवार के दिन शमी के पौधे के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से रुका हुआ धन मिलने और आय के नए रास्ते खुलने की मान्यता है. घर में कहां रखना चाहिए शमी का पौधा? वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के अंदर नहीं रखना चाहिए. इस पौधा को छत या बालकनी में रखना ज्यादा शुभ माना जाता है. इसकी सबसे अच्छी और लाभकारी दिशा दक्षिण मानी जाती है. इसके अलावा, इसको शनिवार के दिन ही लगाना चाहिए और सूरज के सामने इसे भूलकर भी ना रखें. शनि दोष और शमी का उपाय ज्योतिष में शमी का संबंध शनिदेव से बताया गया है. शमी की पूजा करने से शनि का प्रभाव शांत होता है. साढ़ेसाती या ढैय्या में राहत मिल सकती है. इसलिए, हर शनिवार की शाम को इसके पास दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है.

गर्मी में ठंडक का शाही उपाय: घर पर बनाएं केसर-पिस्ता शरबत

गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए लोग अक्सर मार्केट में मिलने वाले पैक्ड जूस या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में अगर आप बिना चीनी के कुछ बेहद शाही, पौष्टिक और रिफ्रेशिंग ट्राई करना चाहते हैं तो घर पर बनाएं केसर-पिस्ता का यह खास शरबत. 2 हजार रुपये किलो मिलने वाले प्रीमियम केसर और पिस्ता से तैयार यह होममेड ड्रिंक आपके शरीर को अंदर से AC जैसी ठंडक देगी. यह न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि डायबिटीज के मरीजों और वेट लॉस करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन समर ड्रिंक है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और क्विक रेसिपी.केसर-पिस्ता शरबत रेसिपी केसर-पिस्ता शरबत बनाने की सामग्री पिस्ता: 1/2 कप (बिना नमक वाले) केसर के धागे: 15-20 (एक चम्मच गुनगुने पानी या दूध में भीगे हुए) दूध: 1 लीटर (लो-फैट या टोंड) हरी इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच भीगा हुआ बादाम गोंद (Almond Gum): 2 चम्मच (वैकल्पिक, एक्स्ट्रा ठंडक के लिए) मीठे के लिए नेचुरल विकल्प: 1/2 कप धागे वाली मिश्री का पाउडर या शहद/स्टीविया (स्वादानुसार) बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का तरीका सबसे पहले पिस्ता को 2 से 3 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद उनका छिलका उतार लें. छिले हुए पिस्ता को मिक्सी के जार में डालें और थोड़े से ठंडे दूध के साथ पीसकर एकदम स्मूथ और बारीक पेस्ट बना लें. अब एक भारी तले वाले बर्तन में दूध को उबलने के लिए रखें. जब दूध में एक उबाल आ जाए, तो आंच धीमी कर दें और इसमें तैयार किया हुआ पिस्ता का पेस्ट मिला दें. दूध को लगातार चलाते हुए 5-7 मिनट तक पकाएं. अब इसमें भीगा हुआ केसर (रंग और खुशबू के लिए) और हरी इलायची पाउडर डालें. अगर आप धागे वाली मिश्री का इस्तेमाल कर रहे हैं (जो पेट के लिए ठंडी होती है) तो इस स्टेज पर मिला लें. अगर शहद या स्टीविया का उपयोग कर रहे हैं तो दूध के पूरी तरह ठंडा होने के बाद मिलाएं. जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे रूम टेम्परेचर पर आने दें. इसके बाद शरबत को 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. सर्विंग ग्लास में बर्फ के टुकड़े और भीगा हुआ बादाम गोंद डालें. ऊपर से चिल्ड केसर-पिस्ता शरबत डालकर ठंडे-ठंडे स्वाद का आनंद लें.

पश्चिमी यूपी में लू का प्रकोप, नौतपा से पहले ही झुलसाने लगी गर्मी

मेरठ यूपी के मेरठ में तेज धूप और लू ने लोगों को झुलसा दिया है। सूरज निकलते ही सुबह से ही आसमान से आग बरसती महसूस हो रही है। बुधवार को दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ता गया। दोपहर तक हालात इतने खराब हो गए कि सड़क और बाजारों में सन्नाटा रहा। तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन रहा। 25 मई से गर्मी का प्रकोप नौतपा शुरू होने से पारा और बढ़ेगा। वहीं, जिलाधिकारी ने भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग इन दिनों भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। सुबह से ही ऐसा महसूस होने लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही हो। लू के थपेड़ शरीर को झुलसा रहे हैं।  नौतपा का भी 25 मई से आगाज हो जाएगा, ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आसमान से आग बरसेगी। 29 मई को एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। बुधवार का दिन सीजन में सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि वर्तमान में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कहा कि पश्चिमी हवाओं के प्रभाव और साफ आसमान के चलते गर्मी में और इजाफा हो रहा है।    दोपहर के समय लू चलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही काफी कम देखने को मिल रही है। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग सिर और चेहरे को ढककर ही निकले। पिछले पांच दिन का तापमान 16 मई- 39.6 17 मई- 41.3 18 मई- 42.4 19 मई- 43.6 20 मई – 44.0 गर्मी और लू के कारण 23 मई तक स्कूलों में अवकाश मेरठ में बढ़ती गर्मी और लू के मद्देनजर जिलाधिकारी वीके सिंह ने 21 से 23 मई तक प्री-प्राइमरी से कक्षा दस तक के सभी बोर्डों के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। जिलाधिकारी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।   भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है। अत्यधिक गर्मी के दौरान बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें। पर्याप्त पानी और सावधानियों का ध्यान रखने को कहा गया है। सहारनपुर : 12 साल का टूटा रिकॉर्ड, 44 डिग्री पर पहुंचा पारा सहारनपुर जनपद में गर्मी का 12 साल का रिकॉर्ड टूट गया। बीते 12 वर्षों में 20 मई को अधिकतम तापमान 42 डिग्री से ऊपर नहीं गया था। बुधवार को अधिकतम तापमान 44 व न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ में भी अधिकतम तापमान 44 डिग्री पर पहुंच गया। बागपत में 43, मुजफ्फरनगर में 42, शामली में 42 और बिजनौर में 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।    

चार युगों की अवधारणा: कितनी लंबी है कलयुग की वास्तविक अवधि?

हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. इस हिसाब से देखा जाए तो अभी कलयुग का बहुत छोटा हिस्सा ही बीता है और इसका लंबा समय बाकी है. सबसे प्रचलित मान्यता मान्यता के अनुसार, चारों युगों की अवधि इस प्रकार है जैसे सतयुग 17,28,000 वर्ष, त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष, द्वापर युग 8,64,000 वर्ष और कलयुग 4,32,000 वर्ष. इस गणना के अनुसार कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष मानी जाती है. यही कारण है कि इसे एक बहुत लंबा और धीरे-धीरे बदलने वाला युग माना गया है, जिसमें समय के साथ धर्म और नैतिकता का ह्रास होता जाता है. 1250 वर्ष वाली मान्यता कुछ पौराणिक मान्यताओं में युगों की अवधि को बहुत छोटे पैमाने पर भी समझाया गया है. इस मत के अनुसार हर युग की अवधि लगभग 1250 वर्ष होती है और इस तरह चारों युगों का पूरा चक्र केवल 5000 वर्षों में पूरा हो जाता है. इस दृष्टिकोण में युगों को प्रतीकात्मक रूप में देखा जाता है, जहां बदलाव अपेक्षाकृत तेजी से होते हैं. कुछ विद्वानों, जैसे परमहंस राजनारायण जी, ने युगों की अवधि को एक अलग तरीके से समझाया है. उनके अनुसार सतयुग 1200 वर्ष, त्रेता 2400 वर्ष, द्वापर 3600 वर्ष और कलयुग 4800 वर्ष का होता है. इस मत में युगों को मानव आधारित समय से जोड़ा गया है, न कि देवताओं के समय से. इससे यह समझने की कोशिश की गई है कि युगों की गणना को अधिक व्यावहारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है. वैदिक और ज्योतिष दृष्टिकोण वैदिक ग्रंथों में “युग” शब्द का अर्थ हमेशा लाखों वर्षों की अवधि नहीं रहा है. कई जगह इसे समय, काल या दिन-रात के रूप में भी प्रयोग किया गया है. वहीं ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी को राशि मंडल का एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 25,920 वर्ष लगते हैं, जिसे कुछ विद्वान एक युग चक्र के रूप में भी देखते हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग काल और विद्वानों के अनुसार युग की परिभाषा बदलती रही है. कलयुग का अंत और भगवान कल्कि हिंदू धर्म के अनुसार जब कलयुग में पाप, अधर्म, झूठ और अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान विष्णु का अंतिम अवतार, यानी कल्कि अवतार, प्रकट होगा. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए अवतार लेंगे और पृथ्वी से अधर्म का नाश करेंगे. उनके आगमन के साथ ही कलयुग समाप्त हो जाएगा और एक बार फिर से सतयुग की शुरुआत होगी, जिसे सत्य और धर्म का युग माना जाता है.