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MP Power Generating Company का महा-रिकॉर्ड, 600 दिन बिना रुके चलती रही अमरकंटक यूनिट

चचाई पॉवर प्लांट का महा-रिकॉर्ड लगातार 600 दिनों से चल रही है अमरकंटक की यह यूनिट मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी इतिहास में पहली बार अमरकंटक मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन चचाई की 210 मेगावॉट क्षमता वाली यूनिट ने लगातार 600 दिनों तक बिना किसी बाधा के निरंतर बिजली उत्पादन करने का एक अभूतपूर्व महा-रिकॉर्ड स्थापित किया है। कंपनी के इतिहास में आज तक किसी भी जनरेटिंग यूनिट ने इतने लंबे समय तक बिना बंद हुए उत्पादन नहीं किया है। प्लांट की यह ऐतिहासिक यात्रा 1 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई थी, जो आज भी सफलतापूर्वक निरंतर जारी है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्लांट के नेतृत्व और पूरी तकनीकी टीम को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने विश्वास जताया है कि अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन भविष्य में भी उत्कृष्टता की इस भावना को बनाए रखेगा और राज्य की प्रगति के लिए सफलता के कई नए कीर्तिमान गढ़ेगा। प्रदर्शन के बेमिसाल आंकड़े इस असाधारण संचालन अवधि के दौरान यूनिट ने तकनीकी और कार्यकुशलता के मोर्चे पर नए मानदंड स्थापित किए हैं। प्लांट उपलब्धता कारक 98.81% दर्ज किया गया, जो इसकी निरंतर उपलब्धता को दर्शाता है। प्लांट लोड फैक्टर 95.6% के बेहद उच्च स्तर पर रहा, जो बेहतरीन बिजली उत्पादन क्षमता का प्रमाण है। सहायक बिजली खपत मात्र 9.28% रही, जिससे बिजली की बचत और कार्यकुशलता प्रमाणित होती है। कुशल नेतृत्व और टीम के समर्पण का परिणाम बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी तकनीकी खराबी, ग्रिड ट्रिपिंग या फोर्स आउटेज के थर्मल प्लांट को चलाना एक असाधारण तकनीकी चुनौती होती है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय सूक्ष्म और सटीक योजना, मजबूत प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (निवारक रखरखाव) प्रथाओं, लगातार की जा रही कड़ी डिजिटल निगरानी और चचाई प्लांट की ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस टीम के कुशल नेतृत्व और अटूट समर्पण को दिया है। मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को मिला सीधा लाभ इस उल्लेखनीय उपलब्धि से न केवल अमरकंटक पॉवर स्टेशन का नाम देश के अग्रणी बिजली घरों में शामिल हुआ है, बल्कि इससे मध्यप्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिली है। यूनिट के लगातार चालू रहने से राज्य को बिना किसी रुकावट के निरंतर और सस्ती बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी मजबूती मिली है। यह रिकॉर्ड प्रदर्शन अब मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग के अन्य बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मानदंड का काम करेगा।  

कांग्रेस से दूरी बनाकर चलेंगे CM विजय? तमिलनाडु राजनीति में नए समीकरणों के संकेत

चेन्नई मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार बनाई जरूर है, लेकिन उनका इरादा कुछ और ही लगता है. विजय जल्दी से जल्दी अपने बूते सरकार चलाना चाहते हैं. और यह गठबंधन साथियों, खास तौर पर कांग्रेस, के लिए काफी चिंता वाली बात हो सकती है।  एक तरफ विजय लोक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं, और ऐन उसी वक्त विरोधी खेमे में बगैर बुलडोजर के ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई चल रही होती है. विजय के सलाहकारों की टीम देश भर के नेताओं से सीखने और उस पर अमल करने की रणनीति पर काम कर रही है।  मुख्यमंत्री ने सहकारी बैंकों से लिए गए किसानों के 50,000 रुपये तक के फसल लोन माफ कर दिए हैं. सरकारी ऐलान के अनुसार, जिन बड़े किसानों ने सहकारी बैंकों से फसल लोन लिया है, उन्हें भी 5 हजार रुपये की राहत दिए जाने की बात है।  राज्यसभा में डेब्यू, और उपचुनावों की तैयारी तमिलनाडु में 18 जून को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होना है. तमिलनाडु की मेलम विधानसभा सीट से चुन लिए जाने के बाद सीवी शनमुगम ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मुख्यमंत्री विजय उसी सीट के जरिए टीवीके की राज्यसभा में एंट्री करना चाहते हैं।  चर्चा है कि टीवीके में रिटायर्ड आईएएस अफसर यू सगायम को राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा रहा है. तमिलनाडु में यू सगायम ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए मशहूर रहे हैं. उनकी ईमानदारी के कई किस्से सुनाए जाते हैं।  खास बात यह है कि यू सगायम ऐसे अफसर हैं जिनका 28 साल की सेवा में 25 बार ट्रांसफर हुआ. यू सगायम को राज्यसभा भेज कर मुख्यमंत्री थलपति विजय तमिलनाडु की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वो क्या करना चाहते हैं, और ऐसा करने से उनके पहले की डीएमके और एआईएडीएमके सरकारें अपने आप निशाने पर आ जाती हैं।  राज्यसभा के साथ ही टीवीके नेतृत्व की नजर तमिलनाडु की चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं. एक सीट तो मुख्यमंत्री विजय ने ही खाली की है, जबकि तीन सीटें टीवीके में शामिल होने वाले विधायकों के AIADMK छोड़ने से खाली हुई हैं।  AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया. मरगथम कुमारवेल मदुरंतकम सीट से, पी सत्यभामा धारापुरम सीट से और एस जयकुमार पेरुनदुरई सीट से AIADMK के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. धारापुरम और पेरुनदुरई को AIADMK का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जबकि मदुरंतकम चेन्नई के पास महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है।  यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब सीवी शनमुगम के नेतृत्व में टीवीके सरकार को समर्थन देने वाले 25 विधायकों में से कुछ के कैबिनेट में शामिल होने पर बातचीत चल रही थी. लेकिन, वाम दलों, वीसीके और टीवीके के ही कुछ नेताओं के दबाव में अचानक यह प्लान ड्रॉप कर दिया गया।  इस्तीफा देने वाले विधायक अब टीवीके के चुनाव निशान सीटी पर फिर से मैदान में उतरेंगे. उपचुनाव जीतने के बाद वे टीवीके के विधायक बन जाएंगे, और उसके बाद किसी भी गठबंधन साथी को कोई आपत्ति नहीं होगी – खास बात यह है कि सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है।  कांग्रेस और टीवीके का साथ कब तक तीन विधायकों का इस्तीफा तो ट्रेलर लगता है. जननायगन के समानांतर विजय की सियासी पिक्चर अभी बाकी है. टीवीके के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कम से कम 7 से 8 विधायक अभी आने वाले दिनों में ऐसे ही इस्तीफा दे सकते हैं।  टीवीके के पास फिलहाल 107 विधायक हैं. टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं, जिनमें मुख्यमंत्री विजय की जीती हुई दो सीटें शामिल थीं. विजय ने अपनी एक सीट खाली कर दी थी. अब अगर उपचुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल होती है, तो टीवीके के पास 111 सीटें हो जाएंगी. तमिलनाडु में बहुमत का आंकड़ा 118 है. टीवीके सरकार को कांग्रेस की पांच विधायकों का समर्थन हासिल है।  अगर उपचुनाव घोषित होने से पहले और विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो जाते हैं, तो टीवीके को सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी. सबसे ज्यादा 5 सीटों वाली कांग्रेस से छुटकारा पाना आसान हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके के सीनियर नेताओं का मानना है कि विजय जैसे करिश्माई नेता के इर्द-गिर्द बनी पहली पीढ़ी की राजनीतिक पार्टी चुनाव के बाद बने सहयोगी दलों पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रह सकती।  एक सीनियर टीवीके नेता का कहना है, अगर ये सीटें साथ में जाती हैं, तो बात बहुत मायने रखती है. जब लोगों को लगता है कि सरकार खुद को स्थिर कर रही है, तो जनता के बीच माहौल बदलने लगता है।  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की रणनीति जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला से काफी हद तक मिलती जुलती लगती है. हालांकि, दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरण में थोड़ा फर्क भी है. उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. विजय ने कांग्रेस के साथ चुनाव बाद गठबंधन किया है।  कांग्रेस ने चुनाव से पहले तो उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया था, लेकिन सरकार में शामिल नहीं हुई. उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. धीरे धीरे गठबंधन रस्मअदायगी भर रह गया. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के 6 विधायक हैं. कहने को तो कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी की वही स्थिति है जैसी तमिलनाडु की पिछली डीएमके सरकार में थी।  ऐसा ही एक उदाहरण दिल्ली में मिलता है. 2013 में अरविंद केजरीवाल भी बहुमत के आंकड़े से पिछड़ गए थे. पहली बार सरकार बनाने के लिए केजरीवाल ने कांग्रेस का सपोर्ट लिया था, लेकिन अपने बूते सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना पड़ा, विजय तमिलनाडु में ये सब पहले ही कर लेना चाहते हैं।  क्या टीवीके नेता थलपति विजय का ताजा एक्शन बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' जैसा है? देखा जाए तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके के राजनीतिक सपोर्ट लेने की शुरुआत गठबंधन की कोशिश के रूप में हुई थी. जिसमें AIADMK … Read more

Ferrari ने लॉन्च की अपनी पहली EV ‘Luce’, लग्जरी डिजाइन और फ्यूचरिस्टिक लुक चर्चा में

मुंबई  प्रीमियम स्पोर्ट्स कार निर्माता कंपनी Ferrari ने अपनी पहली फुली इलेक्ट्रिक प्रोडक्शन कार Ferrari Luce को आधिकारिक तौर पर पेश कर दिया है. इस कार को कंपनी ने रोम में प्रदर्शित किया, जो कंपनी के इतिहास में सबसे बड़े बदलावों में से एक है, क्योंकि कंपनी अब EV स्पेस में एंट्री कर रही है और इसके साथ पेट्रोल और हाइब्रिड मॉडल भी ऑफर कर रही है।  खास बात यह है कि Ferrari Luce न सिर्फ़ कंपनी की पहली EV है, बल्कि कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक चार-दरवाज़ों वाली कार और पांच सीटों वाली पहली प्रोडक्शन कार है. इसे पूरी तरह से नए प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है, जो इस कार को मौजूदा कम्बशन-इंजन आर्किटेक्चर को अपनाने के बजाय खास तौर पर इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है।  कंपनी का कहना है कि इसके फुली इलेक्ट्रिक सेटअप ने इंजीनियरों को अपनी पारंपरिक स्पोर्ट्स कारों की तुलना में ज़्यादा केबिन स्पेस, बेहतर प्रैक्टिकैलिटी और अलग ड्राइविंग लेआउट वाली कार बनाने में मदद की।  नई Ferrari Luce की बैटरी और पावर आउटपुट इस कार को पावर इसके चारों व्हील्स पर लगाई गईं चार इलेक्ट्रिक मोटर से मिलती है. ये चारों मोटर कुल मिलाकर 1,050 hp का पावर आउटपुट देती हैं, जबकि Ferrari का दावा है कि लॉन्च कंट्रोल मोड में व्हील टॉर्क 11,500 Nm तक पहुंच जाता है. परफॉर्मेंस के आंकड़े काफी हद तक Ferrari के ही हैं. यह कार 0-100 km/h की स्पीड 2.5 सेकंड में पकड़ सकती है, 0-200 km/h 6.8 सेकंड में, और इसकी टॉप स्पीड 310 km/h से ज़्यादा है।  चार-मोटर सेटअप से Ferrari हर पहिये पर टॉर्क को अलग से कंट्रोल कर सकती है. कंपनी के मुताबिक, इससे स्टेबिलिटी, कॉर्नरिंग प्रिसिजन और ट्रैक्शन बेहतर होता है, खासकर तेज़ एक्सेलरेशन और हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान. Ferrari Luce में रियर-व्हील स्टीयरिंग और Ferrari F80 हाइपरकार से लिया गया एक्टिव सस्पेंशन सेटअप भी मिलता है।  इस इलेक्ट्रिक कार में 122 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जिसे पूरी तरह से मारानेलो में डिज़ाइन, टेस्ट और असेंबल किया गया है. कंपनी का कहना है कि बैटरी 350 kW तक की चार्जिंग स्पीड को सपोर्ट करती है और लगभग 20 मिनट में 70 kWh चार्ज रिकवर कर सकती है. कंपनी का दावा है कि इसकी ड्राइविंग रेंज 530 km से ज़्यादा है।  कंपनी का कहना है कि डेवलपमेंट के दौरान थर्मल मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया गया था. Ferrari Luce में एक कॉम्प्लेक्स कूलिंग सिस्टम है, जिसे बैटरी टेम्परेचर को मैनेज करने, चार्जिंग परफॉर्मेंस बनाए रखने और बार-बार हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान लगातार पावर डिलीवरी पक्का करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि इस सिस्टम को ट्रैक के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर बनाया गया है।  कंपनी ने Ferrari Luce के लिए एक नया साउंड सिस्टम भी बनाया है. इंजन की आर्टिफिशियल आवाज़ इस्तेमाल करने के बजाय, Ferrari इलेक्ट्रिक मोटर और ड्राइवट्रेन से पैदा होने वाले नैचुरल वाइब्रेशन और फ्रीक्वेंसी को बढ़ाती है. कंपनी के मुताबिक, ड्राइव मोड और थ्रॉटल इनपुट के हिसाब से आवाज़ बदलती है, जिससे ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय ज़्यादा फीडबैक मिलता है।  नई Ferrari Luce का डिजाइन कार के डिज़ाइन की बात करें तो Ferrari Luce कंपनी के मौजूदा मॉडल्स से बहुत अलग दिखती है. यह प्रोजेक्ट LoveForm के साथ मिलकर बनाया गया था, जो एप्पल के पूर्व डिज़ाइन चीफ़ सर जॉनी आइव और डिज़ाइनर मार्क न्यूसन के क्रिएटिव ग्रुप का हिस्सा है. कार में स्मूद ग्लास-हैवी प्रोफ़ाइल, फ्लोटिंग एयरोडायनामिक एलिमेंट्स, और किसी भी प्रोडक्शन Ferrari रोड कार में लगाया गया, अब तक का सबसे बड़ा व्हील सेटअप है, जिसमें 23-इंच के फ्रंट और 24-इंच के रियर व्हील्स हैं।  Ferrari का कहना है कि नई Ferrari Luce को बनाने में एयरोडायनामिक्स का बड़ा रोल रहा है. कार में एक्टिव एयरोडायनामिक ग्रिल, मूवेबल एयरो सरफेस और एक एक्टिव राइड-हाइट सिस्टम है, जो ज़्यादा स्पीड पर कार के अगले हिस्से को नीचे करके एफिशिएंसी और एयरफ्लो को बेहतर बनाता है।  नई Ferrari Luce का इंटीरियर कार के केबिन की बात करें तो, इसमें फिजिकल स्विच को सैमसंग डिस्प्ले के साथ डेवलप किए गए OLED डिस्प्ले के साथ जोड़ा गया है. कंपनी का कहना है कि उसने खास फंक्शन के लिए फिजिकल कंट्रोल को जानबूझकर बनाए रखा है, ताकि गाड़ी चलाते समय कार का इस्तेमाल आसान हो सके. Ferrari में पैनोरमिक ग्लास रूफ, पावर्ड सीट्स, 21-स्पीकर ऑडियो सिस्टम और किसी भी मौजूदा फेरारी की तुलना में बड़ा लगेज एरिया भी है। 

पर्यावरण पर बड़ा खतरा, नई स्टडी में खुलासा- हिमालयी क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में

नई दिल्ली  एक स्टडी में पाया गया है कि केवल एक दशक में PM प्रदूषण 20 फीसदी ये ज्यादा बढ़ गया है। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इतना ही नहीं, मैदानों से निकलने वाला प्रदूषण अब हिमालय तक भी पहुंच रहा है। कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट ने यह स्टडी की है, जिसे 'एटमॉस्फेरिक एनवायरनमेंट' जर्नल में प्रकाशित करवाया गया है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि अभी तक देश में बायोमास जलाने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। अध्ययन से पता चला है कि थर्मल पावर प्लांट, बायोमास जलने और शहरी ठोस कचरा जलने से लगातार होने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण की स्थिति गंभीर होते जा रही है। यह गंगा के मैदान, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के 25 सालों के डेटा पर आधारित एक सैटेलाइट स्टडी है। हिमालय तक कैसे पहुंच रहा प्रदूषण स्टडी में बताया गया है कि मैदानों में हो उत्सर्जन हो रहा है, वह सीधे हिमालय में एरोसोल की मात्रा को प्रभावित कर रहा है। एरोसोल वातावरण में धूल, कालिख और रासायनिक बूंदों जैसे सूक्ष्म ठोस या तरल कणों के सस्पेंशन को कहते हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली का प्रदूषण हिमालय की पश्चिमी और मध्य श्रेणियों तक पहुंच रहा है और बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदूषण पूर्वी हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे पता चलता है कि पहाड़ों की हवा में भी अब वायु प्रदूषण घुल चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े हालांकि अध्ययन में ये पाया गया कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में पार्टिकुलेट मैटर के स्तरों में मापने योग्य सुधार देखने को मिले। लेकिन ये राज्य अभी भी अभी भी कार्बनयुक्त एयरोसोल के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। स्टडी से पता चला कि जो कार्बन प्रदूषण 2000–2009 के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तरी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में केंद्रित था, वह 2020–2024 तक पूरे पश्चिम बंगाल, बिहार, बांग्लादेश और असम, मेघालय और त्रिपुरा तक फैल गया। अगर हिमालय न होता तो फिर क्या होता…  अगर हिमालय न होता तो भारत कैसा होता? जवाब सीधा है कि उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश शीत रेगिस्तान होते। पंजाब और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति न होती और मध्य भारत में इतनी गर्मी होती कि वहां पर रहने लायक कुछ भी न होता।  यूरेशिया टेक्टॉनिक प्लेट खिसकने से विशाल समुद्र टेथिस से हिमालय की उत्पत्ति हुई और भारत का वो भूगोल बना जिसमें आज एक अरब 33 करोड़ लोग रहते हैं।  इस विशाल टेथिस समुद्र का प्रतिनिधित्व अब केवल लेह से 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित पेंगोंग झील करती है। जो तीस प्रतिशत भारत क्षेत्र में है और बाकी का सत्तर फीसद चीन में। लाखों सालों की प्रक्रिया से जब हिमालय का निर्माण हुआ तो उससे तीन प्राकृतिक और भौगोलिक परिघटनायें हुई। जिससे भारत रहने योग्य बना। ये तीन परिघटनायें थीं- 1. मानसून बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न होता है और साउथ वेस्ट होते हुये हिमालय से टकराता है। बादल हिमालय से टकराकर लौटते हैं और जिससे उत्तरी भारत समेत राजस्थान तक जमकर बारिश होती है। इससे उत्तरी भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत को नई आक्सीजन मिलती है। जीवन खुशहाल रहता है।  इस बारिश से तमाम नदियां, जल धारायें, जंगल और भूजल रिचार्ज होते हैं। अगर हिमालय नहीं होता तो ये मानसून के बादल सीधे पश्चिमी चीन होते हुये मंगोलिया से रूस के साइबेरिया में दाखिल हो जाता। मतलब, भारत में जो जून 21 या 22 तारीख को मानसून आता है और सितंबर आखिरी तक रहता है। वो केवल भारत के ऊपर से गुजरते वक्त कुछ बारिश करता और आगे निकल जाता। जिससे मध्य भारत का भूजल रिचार्ज नहीं होता और हिमालय की नदियों में पानी कम रहता। मसलन, जिन इलाकों में नहरों के जरिये खरीफ की फसलें होती हैं। वहां कुछ नहीं होता।  2. हर साल जनवरी और फरवरी माह में उत्तरी ध्रुव से साइबेरिया होते हुये बर्फीली हवायें मंगोलिया पहुंचती हैं और वहां से चीन के शिंझियांग और तिब्बत होते हुये भारत में दाखिल होती। जिससे साइबेरिया, मंगोलिया और चीन के शिनझिंगया, गिनगाई, गानसू और तिब्बत की तरह हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शीत मरूस्थल होते। लेकिन हिमालय होते हुये ये चीन से लौट जाती है। जिस कारण चीन का गोबी मरूस्थल का निर्माण हुआ और आज वो पर्यावरण के हिसाब से शून्य है।  3. मानसून के अलावा पश्चमी, मध्य और उत्तर भारत में बारिश का एक मुख्य जरिया भू-मध्य सागर से उठने वाले पिश्चमी विक्षोभ का है। जो हर साल अपने साथ यूरोप के नीचे से भू-मध्य सागर से वाष्पीकरण कर बादल विकसित करता है और फिर ये बादल पाकिस्तान से होते हुये हिमालय से टकराते हैं। जिससे जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर को छोड़ (पोस्ट मानसून) भारत में बारिश होती है और हिमालय और इससे लगते कैचमेंट एरिया में बर्फबारी होती है। ग्लेशियर बनते हैं और फिर 12 महीने गंगा, यमुना, ब्रहमापुत्र सरीखी बड़ी नदियों में पानी रहता है। तापमान गर्मी से ठंडा हो जाता है।  कुल मिलाकर हिमालय का हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। इसलिये इसे थर्ड पोल या तीसरा ध्रुव भी कहते हैं। एक प्रमाणिक तथ्य ये भी है कि हिमालय की अगर पूरी बर्फ भी पिघल जाये तो भी हिमालय से निकलने वाली कोई भी नदी नहीं सूखेगी। इसके पीछे मौसम विज्ञान केंद्र का शोध है। असल में, हिमालय के ग्लेशियर नदियों को 12 महीने  पानी नही देते। मसलन, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च में ग्लेश्यिर पूरी तरह से फ्रीज होते हैं। तापमान -20 डिग्री तक हो जाता है। तो ऐसे में फिर गंगा, यमुना, सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में पानी कहां से आता है? मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह बताते हैं कि ये पानी मानसून में विभिन्न जंगलों में स्टोर हुये पानी के जरिये नदियों तक पहुंचता है। उसी तरह से जैसे मध्य भारत में नर्मदा और गोदावरी में 12 महीने पानी रहता है और इन दोनों नदियों में  ग्लेशियर से पानी बिल्कुल भी नहीं आता। मैंने उनसे पूछा कि फिर अगर हिमालय की पूरी बर्फ पिघल जाये तो  क्या होगा? वो बताते हैं फिर होगा ये कि हिमालय क्षेत्र में जबरदस्त गर्मी पड़ेगी … Read more

कम कीमत, जबरदस्त माइलेज! ₹4.99 लाख वाली इस कार के आगे फेल हुईं बड़ी हैचबैक कारें

मुंबई  भारतीय मार्केट में हैचबैक कारों का जलवा हमेशा की तरह बरकरार है। अगर बीते महीने यानी अप्रैल, 2026 में हुई इस सेगमेंट की बिक्री की बात करें तो मारुति सुजुकी वैगनआर (Maruti Suzuki WagonR) ने एक बार फिर नंबर-1 की पोजीशन हासिल कर ली है। मारुति वैगनआर को बीते महीने कुल 18,648 नए ग्राहक मिले। इस दौरान सालाना आधार पर वैगनआर की बिक्री में 39.03 पर्सेंट की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। जबकि ठीक एक साल पहले यानी अप्रैल, 2025 में यह आंकड़ा 13,413 यूनिट्स था। आइए जानते हैं देश की 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक कारों की बिक्री के बारे में विस्तार से। दूसरे नंबर पर रही बलेनो बिक्री की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मारुति सुजुकी बलेनो रही। मारुति बलेनो ने इस दौरान 38.89 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 18,306 यूनिट कारों की बिक्री की है। जबकि तीसरे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट रही। मारुति स्विफ्ट ने इस दौरान सालाना आधार पर 22.18 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ कुल 17,829 यूनिट कारों की बिक्री की। चौथे नंबर पर रही मारुति ऑल्टो दूसरी ओर बिक्री की इस लिस्ट में चौथे नंबर पर मारुति सुजुकी ऑल्टो रही है। मारुति ऑल्टो ने इस दौरान 93.65 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 10,856 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि पांचवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में हुंडई i20 रही। हुंडई i20 ने इस दौरान 59.55 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,624 यूनिट कारों की बिक्री की है। टाटा टियागो को लगा झटका बिक्री की इस लिस्ट में छठे नंबर पर टाटा टियागो रही। टाटा टियागो ने इस दौरान 33.70 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ 5,488 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि सातवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति एस-प्रेसो रही। मारुति एस-प्रेसो ने इस दौरान 617.63 पर्सेंट की रिकॉर्ड तोड़ सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,210 यूनिट कारों की बिक्री की है। आखिरी पोजिशन पर रही अल्ट्रोज बिक्री की इस लिस्ट में आठवें नंबर पर हुंडई i10 नियोस रही। हुंडई i10 नियोस ने 0.29 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 4,149 यूनिट कारों की बिक्री की। वहीं, नौवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टोयोटा ग्लैंजा रही। ग्लैंजा ने इस दौरान 18.68 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ कुल 3,360 यूनिट कारों की बिक्री की है। इसके अलावा, दसवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा अल्ट्रोज रही। अल्ट्रोज ने इस दौरान 19.06 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 2,586 यूनिट कारों की बिक्री दर्ज की है। इतनी है कार की कीमत मारुति सुजुकी वैगनआर में 1.0-लीटर K-सीरीज इंजन और दूसरा 1.2-लीटर इंजन दिया गया है। यह कार 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है। माइलेज के लिए मशहूर यह कार पेट्रोल में लगभग 23.56 से 25.19 किमी/लीटर और CNG वैरिएंट में 33.47 किमी/किग्रा तक का जबरदस्त औसत देती है। भारतीय मार्केट में इसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग 4.99 लाख से शुरू होकर 7.45 लाख रुपये तक जाती है।

Teesta Project में चीन की एंट्री तय? बांग्लादेश ने भारत का इंतजार छोड़ बीजिंग की ओर बढ़ाया कदम

ढाका  बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान जल्द ही अपने पहले विदेश दौरे पर चीन जा सकते हैं। यूं तो तारिक रहमान को शपथ लेने के बाद भारत और भूटान जैसे दूसरे पड़ोसी देशों से भी न्योता मिला था, लेकिन बांग्लादेश के पीएम चीन को अपनी पहली प्राथमिकता बना रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश भारत से पहले चीन को रख कर आखिर हासिल क्या करना चाहता है? इस सवाल का जवाब ढूंढना इतना मुश्किल नहीं है। दरअसल बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी के लिए बेकरार है। वह तीस्ता प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए चीन से गुहार भी लगा चुका है। ऐसे में तारिक रहमान के दौरे का मुख्य एजेंडा भी यही होगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश ने इस महीने की शुरुआत में ही तीस्ता नदी पुनरुद्धार योजना के लिए चीन की आधिकारिक तौर पर मदद मांगी थी। यही नहीं, इसके दो दिन पहले ही बांग्लादेश की तरफ से यह बयान आया था कि सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश जल्द ही चीन का रुख करेगा। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। फंड देने के लिए तैयार चीन अब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री खुद चीन जा रहे हैं। इस यात्रा का असल मकसद तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन से अरबों डॉलर का फंड हासिल करना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पुष्टि की है कि पीएम रहमान जल्द ही चीन का दौरा करेंगे और चीन का 'एक्सिम बैंक' तीस्ता नदी प्रबंधन और बहाली परियोजना को फंड देने के लिए तैयार है। ढाका में मौजूद चीनी राजदूत याओ वेन ने भी कहा है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे। तीस्ता नदी को लेकर क्या है विवाद? पिछले 15 सालों से भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का समझौता लटका हुआ है। दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर का हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार इसका विरोध करती रही। इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ गंगा और कुशियारा पर ही समझौता हुआ है। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है। भारत के लिए क्यों खतरे की घंटी है चीन की फंडिंग? इसके लिए थोड़ा भूगोल समझते हैं। तीस्ता नदी भारत में सिक्किम से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में घुसती है। इसके बाद वह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश इस नदी के पानी के रखरखाव और सूखे से निपटने के लिए एक मेगा-प्रोजेक्ट बनाना चाहता है, जिसमें चीन निवेश करने को बेताब है। इस प्रोजेक्ट में चीनी एंट्री से भारत को बड़ा खतरा है। दरअसल बांग्लादेश का तीस्ता प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थित 'चिकन नेक' कॉरिडोर के बेहद करीब है। ऐसे में युद्ध या तनाव की स्थिति में चीन इस कॉरिडोर के पास बैठकर भारत की लाइफलाइन को काटने की कोशिश कर सकता है।

नर्मदापुरम की बड़ी उपलब्धि, प्रदेश का इकलौता जिला जहां होता है चारों प्रकार का रेशम उत्पादन

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ भोपाल  प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार का रेशम उत्पादित हो रहा है। नर्मदापुरम प्रदेश का पहला जिला है जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। जिले के रेशमी वस्त्र अब फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी बिक रहे हैं। मालाखेड़ी बना रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र जिले का मुख्य रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित है। यहाँ "फार्म से फेब्रिक" तक पूरी प्रक्रिया होती है।     वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ।     32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी दी गई, जबकि 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये मिले।     मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी संचालित है। यहाँ से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को 51.99 लाख रुपये की आय हुई।     मालाखेड़ी में तैयार प्राकृत ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी बिक रहे हैं। पचमढ़ी और मढ़ई में विस्तार     पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम का पौधरोपण कर 500 नग ककून उत्पादन किया जा रहा है।     मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर्यटक रेशम पालन की प्रक्रिया देखने आते हैं। जिले में 28 केंद्र सक्रिय नर्मदापुरम में कुल 16 मलबरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनसे हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 2025 में जिले में मलबरी रेशम ककून उत्पादन 15,426.5 किलोग्राम रहा, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। रेशम से दवाइयाँ भी बन रहीं मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम के धागे से दवाइयाँ और मेडिकल उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध कर यहाँ पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर रेशम केंद्रों के फिर से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जिससे लखपति दीदियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। नर्मदापुरम की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।  

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, भोपाल में ड्रोन कैमरों से हो रही लाइव मॉनिटरिंग

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप पर नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए ड्रोन-माउंटेड कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस हाई-टेक मुहिम की शुरुआत सोमवार से औपचारिक रूप से कर दी गई है। सबसे ज्यादा फोकस एमपी नगर और वीआईपी रोड जैसे भारी ट्रैफिक वाले और संकरे रास्तों पर किया जा रहा है। इन इलाकों में भी बढ़ाई गई चौकसी ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, शहर की करीब एक-तिहाई सड़कें केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण जाम रहती हैं। इसी को देखते हुए ड्रोन सर्विलांस का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब एमपी नगर और वीआईपी रोड के अलावा बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ हिस्सों पर भी ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पहले इन ड्रोन का इस्तेमाल केवल दुर्घटना स्थलों के दस्तावेज़ीकरण के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका उपयोग सीधे नियम तोड़ने वालों की पहचान करने और उनके वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए ई-चालान जेनरेट करने के लिए हो रहा है। कंट्रोल रूम से हो रही है लाइव मॉनिटरिंग अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक महीने तक इसका कड़ा ट्रायल किया गया था। फिलहाल विभाग के पास दो हाई-टेक ड्रोन हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा रहा है। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है। इससे न सिर्फ नो-पार्किंग वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। साथ ही, ये ड्रोन क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को पहचानने में भी मदद करेंगे।

आबकारी नीति के सख्त पालन के निर्देश, उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कलेक्टर्स को दिए आदेश

कलेक्टर्स आबकारी नीति का कड़ाई से कराएं पालन: उप मुख्यमंत्री देवड़ा नियमों का उल्लंघन करने वाली मदिरा दुकानों पर होगी सख्त कार्रवाई भोपाल  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जिलों के कलेक्टर्स को आबकारी व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शासन ने वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा निर्देश दिए हैं कि आबकारी विभाग अब अवैध रूप से संचालित शॉप बार, समय सीमा के उल्लंघन और ओवर रेटिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य व्यापी विशेष अभियान चलाया जाए। नियमों की अनदेखी करने वाले मदिरा ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।  उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश में राजपत्र में प्रकाशित नियमों के अनुसार आबकारी नीति का कड़ाई से पालन कराया जाएं। उन्होंने आबकारी विभाग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने सभी जिला अधिकारियों को बिंदुवार दिशा-निर्देश जारी कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार के इस कदम से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर शिकंजा कसेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि नीतिगत प्रावधानों में प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह 'ऑफ श्रेणी' का घोषित किया गया है, जिसके तहत दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने नियमों के उल्लंघन करने की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन कर औचक निरीक्षण के बाद अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि इसके साथ ही, मदिरा दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और बंद होने के तय वक्त के बाद भी देर रात तक मदिरा की बिक्री किए जाने के मामलों को गंभीरता से लिया गया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें गश्त करेंगी। वहीं, उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने यानी ओवर रेटिंग की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। उन्होंने निर्देशित किया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदिरा की वास्तविक दरों के सत्यापन के लिये दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएं। कोई भी ठेकेदार यदि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ राजपत्र के प्रावधानों के तहत भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाएं। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा है कि प्रदेश के पवित्र घोषित किए गए नगरों और क्षेत्रों में मदिरा की अवैध बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गये हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पूर्व से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब वहां किसी भी प्रकार के शराब के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।  

5 से 21 जून तक BJP का मेगा जनसंपर्क अभियान, प्रबुद्ध और व्यापारियों के सम्मेलन भी होंगे

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 26 मई को 12 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर मध्य प्रदेश भाजपा '12 साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के' अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विशेष जनसंपर्क होगा, जिसमें प्रत्येक जिले में समाज के कम से कम 500 प्रबुद्ध व्यक्तियों (ओपिनियन मेकर्स) से सीधा संपर्क साधा जाएगा। सांसद अपनी लोकसभा की हर विधानसभा में और विधायक अपने क्षेत्र के हर मंडल में एक-एक दिन का समय बिताएंगे। इस दौरान वे मोदी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच रखेंगे। पदाधिकारियों को भी करनी होगी मुलाकात विधायकों, सांसदों से लेकर राष्ट्रीय और प्रदेश पदाधिकारियों को भी ओपिनियन मेकर्स से मुलाकात करनी होगी। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत प्रत्येक मंडल में सघन पौधरोपण किया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। सांसद और विधायक अपने क्षेत्रों में 'प्रगति पथ यात्रा' और 'विकसित भारत संकल्प सम्मेलन' के जरिए जनता से जुड़ेंगे। स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरे की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर होगा समापन 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ अभियान का समापन होगा। इस दौरान पार्टी द्वारा प्रत्येक मंडल में स्थानीय योग अभ्यास समूहों के सहयोग से योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। जहां संभव होगा, वहां 1 सप्ताह का योग प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का समन्वय नंदिता पाठक, राघवेंद्र शर्मा और मानसिंह यादव करेंगे। उपलब्धियों की प्रदर्शनी एवं सभागार बैठकें 15 जून से 18 जून के बीच प्रत्येक जिले में मोदी सरकार की उपलब्धियों पर आधारित 3 दिवसीय प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान ऑन-द-स्पॉट चित्रकला प्रतियोगिता, वॉक्स पॉप वीडियो रिकॉर्डिंग और लाभार्थियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी होंगे। साथ ही जिलों में प्रबुद्धजन और व्यापारी वर्ग की व्यापक उपस्थिति वाली सभागार बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं 19 जून से 20 जून तक किसानों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक जिले में दो स्थानों पर प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं में विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष प्रदर्शन और व्याख्यान दिए जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी अर्चना सिंह और जयपाल सिंह चावड़ा की टोली को सौंपी गई है।