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अमेरिका को बना रहे थे निशाना! पंचकूला के फेक कॉल सेंटर से 21 आरोपी दबोचे

पंचकूला. पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने सेक्टर-2 मार्केट स्थित एक कार्यालय में छापेमारी कर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान 21 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-2 मार्केट में स्थित एक कार्यालय से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठगी की जा रही है। सूचना के आधार पर सोमवार देर रात साइबर थाना टीम ने छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नवदीप, अक्षय टिक्कू, रजा और अंकुर कपूर को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। मौके से 19 कंप्यूटर, 3 लैपटॉप, 11.30 लाख रुपये नकद, 3 वॉकी-टॉकी, 16 हेडसेट, 2 वाई-फाई राउटर, एक नोट गिनने की मशीन, 3 पीओएस मशीनें और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को अमेजन कस्टमर केयर अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों को विभिन्न बहानों में उलझाकर उनके क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे और बाद में खातों से रकम निकाल लेते थे। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि कॉल सेंटर का संचालन अमेरिकी समय के अनुसार किया जाता था। कार्यालय शाम करीब 7 बजे खुलता था और रात 3 बजे तक गतिविधियां चलती थीं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाया और धोखाधड़ी की कुल रकम कितनी है। मामले में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

तेज आंधी और बारिश को लेकर पंजाब में चेतावनी जारी, बठिंडा में गर्मी ने तोड़े रिकॉर्ड

अमृतसर. पंजाब में अभी बारिशों का दौर थमा नहीं है। 3 जून से मौसम में बदलाव शुरू होने की संभावना है, जबकि पांच जून तक राज्य के कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार चार जून को सबसे अधिक जिलों में चेतावनी जारी की गई है। सोमवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में लगभग 2.9 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद तापमान सामान्य से करीब 4.2 डिग्री सेल्सियस नीचे बना रहा। राज्य का सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और निचले स्तर की हवाओं के प्रभाव से आगामी दिनों में मौसम सक्रिय रहेगा। इससे गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। बठिंडा को छोड़ सभी शहरों का तापमान 40 से नीचे सोमवार को राज्य का सबसे अधिक तापमान बठिंडा क्षेत्र में 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पठानकोट में 37.4, बठिंडा शहर में 37.0, फरीदकोट में 37.0, फिरोजपुर में 36.7, अमृतसर में 36.3, चंडीगढ़ में 36.0, पटियाला में 35.8, लुधियाना में 35.6, गुरदासपुर में 34.5, मोहाली में 34.8, रूपनगर में 33.9 और नवांशहर में 32.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में बादल, तेज हवाएं और हल्की बारिश के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। जानें कैसा रहेगा पंजाब का मौसम 2 जून : पूरे पंजाब में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने की संभावना है। अधिकांश जिलों के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं है। हालांकि कुछ स्थानों पर बादल छाए रह सकते हैं और शाम के समय मौसम में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है। 3 जून : अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, लुधियाना, मोगा, फिरोजपुर, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, बठिंडा, मानसा, बरनाला और संगरूर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 4 जून : मौसम विभाग ने अधिकांश जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फरीदकोट, मुक्तसर, फाजिल्का, बठिंडा, मानसा, मोगा, बरनाला, संगरूर और लुधियाना सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश भी हो सकती है। जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब जिलों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। 5 जून : मौसम की गतिविधियां कुछ कम हो जाएंगी। गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, फाजिल्का, मुक्तसर और बठिंडा के कुछ हिस्सों में गरज-चमक तथा तेज हवाओं की संभावना बनी रहेगी। बाकी अधिकांश जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है।

मधुमक्खियों के जानलेवा हमले से दहला धमतरी, सास ने गंवाई जान, दामाद घायल

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आया है, जहां सास और दामाद पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इस हमले में सास की मौत हो गई और दामाद घायल हो गया है। यह घटना दुगली थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, पाल गांव में रहने वाली रामवती आज अपने दामाद के साथ सराई बिनने के लिए जंगल की ओर गई थी। इसी दौरान दोनों पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। घटना के बाद दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां रामवती की मौत हो गई और उसका दामाद घायल बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले ही स्टील सिटी दुर्ग भिलाई के एक सब्जी फार्म हाउस में मधुमक्खियों ने हमला कर दिया. इस हमले में 60 साल के एक मजदूर की जान चली गई. घटना मंगलवार की है, जब अचानक छत्ता गिरने से भड़की मधुमक्खियों ने खेत में काम कर रहे मजदूरों पर हमला कर दिया. मृतक की पहचान रमेश भोई के रूप में हुई है, जो मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे. फार्म हाउस में काम कर रहे मजदूरों के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे तेज हवा चल रही थी. इसी दौरान पेड़ पर लगा मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता अचानक टूटकर नीचे गिर गया. छत्ता गिरते ही मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और आसपास काम कर रहे मजदूरों पर झुंड बनाकर हमला कर दिया.स्थिति बिगड़ते देख अन्य मजदूर मौके से भागने में सफल रहे. रमेश भोई शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण तेजी से भाग नहीं सके और मधुमक्खियों के हमले का शिकार हो गए. देखते ही देखते वे गंभीर रूप से घायल हो गए.

CBSE रिवैल्यूएशन पोर्टल में तकनीकी खामी, आवेदन के दौरान छात्रों को हो रही दिक्कत

नई दिल्ली सीबीएसई बोर्ड की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। चार दिन के लंबे इंतजार के बाद जब पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन पोर्टल एक्टिव हुआ तो छात्र खुशी से फूले नहीं समाए, लेकिन उनकी खुशी बहुत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। पोर्टल लॉन्च होने के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर शिकायतें आने लगी, लेकिन अब बोर्ड ने वापस से पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। हालांकि, कुछ समय पहले अधिकांश छात्रों को अपने सभी लॉगिन विवरण अपलोड करने के बाद स्क्रीन फ्रीज होने की समस्या का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही कुछ छात्रों ने आॅनलान पाई गई गलतियों का वीडियो भी शेयर किया है। वहीं, कुछ ने तो पोर्टल पर लॉगिन को लेकर शिकायतें दर्ज की है। दरअसल, सीबीएसई की ओर से 12वीं क्लास की कॉपियों के लिए पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल आज यानी मंगलवार से फिर से ओपन कर दिया गया है। जिन छात्रों ने री-इवैल्यूएशन के लिए स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था और उनको कॉपी में अंकों की गड़बड़ी है वे अब कॉपी को रीचेक करवाने के लिए आॅनलाइन माध्यम से फॉर्म भर सकते हैं। एप्लीकेशन फॉर्म भरने की लास्ट डेट 6 जून 2026 तय की गई है। 10-12 बार ट्राई क‍िया पर नहीं खुल रहा पोर्टल सीबीएसई की एक छात्रा की मां ने बताया कि उनकी बेटी कॉमर्स की छात्रा है. उन्होंने 10 से 12 बार लॉग‍िन करने की कोश‍िश की, कैप्चा कोर्ड भरने के बाद पेज क्रैश हो जाता है।  स्कैन कॉपी या फिजिकल कॉपी? पेज नंबर को लेकर छात्रों का कन्फ्यूजन हुआ दूर सीबीएसई 12वीं पुनर्मूल्यांकन का फॉर्म भरते समय छात्रों के सामने एक नया तकनीकी असमंजस खड़ा हो गया है. छात्र लगातार पूछ रहे हैं कि री-इवैल्युएशन फॉर्म में उन्हें 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' का पेज नंबर लिखना है या उनकी 'मूल (फिजिकल) उत्तर पुस्तिका' का? उदाहरण के लिए, यदि कोई उत्तर डिजिटल कॉपी में पेज 7 पर है और असल कॉपी में पेज 4 पर, तो क्या भरें? सीबीएसई के नियमों और पूर्व मूल्यांकन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छात्रों को फॉर्म में स्कैन की गई डिजिटल कॉपी (Scanned Copy Page Number) का ही पेज नंबर लिखना चाहिए. इसकी वजह यह है कि जो परीक्षक आपकी कॉपी की दोबारा जांच करेगा, उसके सामने आपकी फिजिकल कॉपी नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर वही 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' होगी. अगर आप स्कैन कॉपी के अनुसार पेज नंबर (जैसे- पेज 7) लिखेंगे, तो परीक्षक को उस विवादित उत्तर या 'अनचेक्ड सवाल' तक तुरंत पहुंचने में आसानी होगी. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी गफलत से बचने के लिए स्कैन की गई पीडीएफ (PDF) के पेज नंबर को ही आधार बनाएं.  एक-एक नंबर के लिए मची है जंग, छात्र बोले- हमारे साथ मत खेलो कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए यह पुनर्मूल्यांकन कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) सहित देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए दशमलव के अंकों की भी भारी अहमियत होती है. ऐसे में सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों या परीक्षकों की लापरवाही के कारण जिन छात्रों के 5 से 10 नंबर कम हुए हैं, उनका पूरा साल और करियर दांव पर लग गया है. छात्र बोर्ड से त्वरित न्याय की गुहार लगा रहे हैं।  फीस…25 से 100 रुपए अगर कोई छात्र किसी एक प्रश्न को रीचेक करवाने के लिए आवेदन करेगा तो उसे 25 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके अलावा पूरी कॉपी का पुनर्मूल्यांकन/ री-टोटलिंग करवाने के लिए 100 रुपए फीस जमा करनी होगी। सीबीएसई ने साझा की डिटेल इधर, सीबीएसई ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा की है। सीबीएसई ने लिखा- प्रिय विद्यार्थियों, मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल अब सक्रिय हो गया है। अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया के चरण-दर-चरण निर्देशो के लिए कृपया वीडियो को ध्यानपूर्वक देखें। पोर्टल लिंक: https://postresult.cbseit.in/pvr/  अगले साल से डिजीलॉकर रखेंगे कॉपियां इधर, दावार किया जा रहा है कि सीबीएसई बोर्ड अगले साल से बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। इसमें स्टूडेंट्स को सीधे डिजीलॉकर पर रिजल्ट के साथ ही स्कैन की हुई कॉपी भी उपलब्ध करवा दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य पूरी परीक्षा के लिए पारदर्शिता और स्टूडेंट के बीच भरोसा बनाने का है। 

महिला-बाल कल्याण योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए कड़े निर्देश

महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहन और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव योजनाओं के क्रियान्वयन में जनभागीदारी और जबावदेही करें सुनिश्चित पोषण स्तर सुधार की गतिविधियों में विभिन्न विभाग मिलकर करें कार्य निजी अस्पतालों और संस्थाओं का भी लिया जाए सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक से अधिक जन भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं का अधिक से अधिक प्रचार हो। बच्चों और महिलाओं में पोषण स्तर को बेहतर करने के लिए संचालित गतिविधियों में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित निजी अस्पतालों और संस्थाओं को भी जोड़ा जाए। इस दिशा में अन्य राज्यों और प्रदेश के जिलों में हो रहे सफल नवाचारों को अपनाने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही मैदानी स्तर पर बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करें और लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश सोमवार को मंत्रालय में हुई महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की बनाएं कार्ययोजना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन औद्योगिक इकाइयों में महिला कर्मियों की संख्या अधिक है, उन इकाइयों में कामकाजी महिलाओं के लिए पीपीपी मोड पर हॉस्टल निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में बताया गया कि देवास, नर्मदापुरम, झाबुआ और सिंगरौली में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ हो गया है। प्रताड़ित महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पांढुर्णा, मऊगंज, मैहर, पेटलावद-झाबुआ, इंदौर के लसूड़िया और सांवेर एवं धार के मनावर और पीथमपुर में वन स्टॉप सेन्टर स्वीकृत किए गए हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन अंतर्गत 51 जिला स्तरीय और 01 राज्य स्तरीय हेल्प सेंटर के माध्यम से 66 हजार से अधिक बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई। जोखिम ग्रस्त बच्चों की मैपिंग के लिए 13 जिलों में प्रक्रिया जारी है। 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित किया गया विद्यारंभ समारोह बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 5 से 6 आयु वर्ग के 9 लाख 28 हजार बच्चों के लिए विद्यारंभ आयोजित कर उन्हें विद्यारंभ प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया और बच्चों का शाला में सुगम प्रवेश सुनिश्चित किया गया। प्रदेश के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सराहना मिली है। बाल देखरेख संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बैठक में बताया गया कि सक्षम आंगनवाड़ी उन्नयन के अंतर्गत प्रदेश में एक साथ 12 हजार 670 मिनी केंद्रों को मुख्य आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत कर मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बना है। इस प्रकार की पहल में मध्यप्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से मई 2026 तक प्रदेश की 01 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र बहनों को 47 हजार 775 करोड़ रुपये से अधिक की मासिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मई 2026 तक 15 लाख 84 हजार बालिकाओं का पंजीयन कर 537 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की गई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल म.प्र. बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में दर्ज 15 लाख 51 हजार गर्भवती महिलाओं को 798 करोड़ 68 लाख रूपये से अधिक का भुगतान किया गया। इस योजना के क्रियान्वयन में पिछले ढाई साल से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को बीमा योजना से लाभान्वित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पोषण स्तर में सुधार के लिए किये जा रहे नवाचारों की जानकारी भी दी गई। बैठक में सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती जी.वी. रश्मि सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

शिक्षा क्षेत्र में योगी सरकार की पहल का असर, बदल रही बच्चों की तकदीर

योगी सरकार की शिक्षा क्रांति से बदल रही बच्चों की तकदीर जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने जेईई और बोर्ड परीक्षाओं में लहराया सफलता का परचम योगी सरकार में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना सफलता का आधार, सफल विद्यार्थियों को मंत्री असीम अरुण ने दी बधाई लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने जेईई मेंस, जेईई एडवांस्ड और बोर्ड परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। योगी सरकार की निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी की व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। इस साल 11 विद्यार्थी जेईई मेंस में सफल रहे समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मिर्जापुर (मड़िहान) स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय को डॉ. अरुण कुमार तिवारी ट्रस्टी एक्स नवोदयन फाउंडेशन और टाटा एआईजी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के सीएसआर सहयोग से जेईई/नीट की निःशुल्क तैयारी हेतु 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया गया है। इस वर्ष कुल 11 विद्यार्थी जेईई मेंस में सफल रहे। इनमें मड़िहान की छात्राओं दामिनी पटेल, अंवाला वर्मा, सृष्टि, शिवानी और रागिनी ने जेईई मेंस में सफलता प्राप्त की, जबकि प्रीति ने जेईई एडवांस्ड के लिए भी क्वॉलीफाई किया। साथ ही प्रीति और दामिनी आईआईटी  मंडी के बीबीए व एमबीए कार्यक्रम के लिए भी शॉर्टलिस्ट हुईं। वहीं मेहरौना (देवरिया) के विकास यादव और अंकित सिंह, तीरगांव (बाराबंकी) के अभिषेक मिश्रा, जोगियाटप्पा भानपुर (बस्ती) के अमित कुमार व परसिया (मिर्जापुर) के ऋषिकेश भारती ने भी जेईई मेंस में बाजी मारी। बोर्ड परीक्षाओं में रहा दबदबा,  हुआ सम्मान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बोर्ड परीक्षाओं में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के छात्रों का दबदबा देखने को मिला है। यूपी बोर्ड से संबद्ध जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय निडौरी (गाजियाबाद) की छात्राओं अंजलि पुंडीर और अंशिका ने जनपद स्तर पर क्रमशः चौथा और छठा स्थान प्राप्त किया। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 31 हजार और 21 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र व मेडल देकर कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा और सीडीओ कुमार सौरभ द्वारा सम्मानित किया गया। सफल विद्यार्थियों को मंत्री असीम अरुण ने दी बधाई समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक प्रतिभाशाली छात्र को आगे बढ़ने का अवसर देना है। सर्वोदय विद्यालयों की यह सफलता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार और सामाजिक समावेशन की नीति की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य को नई दिशा देगी। 103 आवासीय विद्यालय गढ़ रहे नए भारत के निर्माता प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 103 आवासीय सर्वोदय विद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध करा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा-केंद्रित नीतियों के कारण इन विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को वह अवसर मिल रहे हैं जो कभी केवल बड़े शहरों और महंगी कोचिंग संस्थानों तक सीमित थे। यही कारण है कि आज सर्वोदय विद्यालयों से निकलने वाले छात्र आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

योग में बना नया इतिहास, 35 हजार विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक साथ कर रचा विश्व रिकॉर्ड

35 हजार से अधिक छात्रों, प्राध्यापकों ने सामूहिक योग कर बनाया विश्व रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मालवांचल यूनिवर्सिटी में आयोजित हुआ योग महोत्सव इंदौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के अंतर्गत देशभर में आयोजित किए जा रहे योग महोत्सव एवं काउंटडाउन कार्यक्रमों की श्रृंखला की शुरूआत हो गई है।  नेमावर रोड़ स्थित मालवांचल यूनिवर्सिटी इंदौर में सामूहिक योग महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के योगगुरू एवं एस. व्यासा यूनिवर्सिटी के कुलगुरू पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार, नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संस्थान के डायरेक्टर सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. मयंक भदोरिया, डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा सहित अमलतास तथा इंडेक्स समूह संस्थानों के छात्र, नागरिक और सामाजिक संगठन आदि शामिल हुए। कार्यक्रम में मालवांचल एवं अमलतास यूनिवर्सिटी के 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने सामूहिक योग कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। विद्यार्थियों के साथ योगगुरू पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार, नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संस्थान के डायरेक्टर सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. मयंक भदोरिया ने भी सामूहिक योग किया। इस मौके पर अपने संबोधन में योगगुरू पद्मडॉ. एस. आर. नागेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योग के प्रति रूचि और आस्था के चलते योग आज पूरी दुनिया में फैल गया है। भारत में 30 करोड़ लोग आज से जुड़े हैं और यह संख्या दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल है और इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। हमें पूरे मध्यप्रदेश के नागरिकों को योग से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में योग पाठ्यक्रम को शामिल किया जाए। इस बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक बड़ा योग का कार्यक्रम कलकता में किया जाएगा। योग केवल आसन नहीं है बल्कि एक जीवन पद्धति है। योग करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्ष 2015 से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन विश्व स्तर पर निरंतर विस्तार प्राप्त कर रहा है। आज यह दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है और लाखों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व दिए गए संदेश में कहा गया कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा का वह अमूल्य उपहार है जिसने सम्पूर्ण विश्व को समरसता और स्व से समष्टि तक की यात्रा का मार्ग दिखाया है। आज योग दुनिया के करोड़ों लोगों के सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है। शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ मन को स्थिरता, बुद्धि को स्पष्टता और जीवन को उद्देश्य प्रदान करने वाली योग एक जीवन पद्धति है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम "योग फॉर हेल्दी एजिंग" है। योग हमें हर आयु में शारीरिक सक्रियता, मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर उनके बीमारियों से बचाव और लड़ने में मदद करता है। प्राचार्य श्रीमती रेशमा खुराना ने बताया कि आज का यह योग महोत्सव संस्थान के 11 जोन में एक साथ किया गया, जिसमें मालवांचल, अमलतास एवं इंडेक्स संस्थान के 35 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने सामूहिक योग किया। कार्यक्रम में योगगुरु पद्मडॉ. एच. आर. नागेन्द्र की उपस्थिति में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मालवांचल यूनिवर्सिटी के प्रमुख भदोरिया को योग का विश्व रिकॉर्ड बनने पर प्रमाण-पत्र भेंट किया गया। इस मौके पर संस्थान के प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: सहायता राशि से आसान हुई खेती

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: सहायता राशि से आसान हुई खेती करूहानार के चुन्नूलाल साहू को बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में मिल रही मदद  रायपुर   प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मुंगेली जिले के किसानों के लिए सहारा बन रही है। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को खेती-किसानी में बड़ी राहत प्रदान कर रही है। लोरमी विकासखंड के ग्राम करूहानार निवासी किसान चुन्नूलाल साहू ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली 06 हजार रुपये की सहायता राशि खेती-किसानी के कार्यों में काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस राशि से बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में जरूरी खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हुआ है।       किसान श्री साहू ने बताया कि उन्हें अब तक योजना की 22 किश्तों का लाभ प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही यह योजना किसानों के लिए संबल बन गई है। समय पर मिलने वाली राशि से खेती की तैयारी में सुविधा होती है और कृषि कार्यों में आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

नैनो उर्वरकों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा-कृषक छेदीलाल

नैनो उर्वरकों के उपयोग से बेहतर उत्पादन और मृदा स्वास्थ्य को मिल रहा बढ़ावा-कृषक छेदीलाल मुख्यमंत्री के सुशासन में किसानों को समय पर मिल रही कृषि आदान सामग्री रायपुर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है। ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है।            मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं। आधुनिक खेती से समृद्ध हो रहे कृषक छेदीलाल           पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे। नैनो उर्वरकों के चमत्कारी परिणाम            कृषक उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है। मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार           उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

तकनीक आधारित शिक्षा से छात्रों के लिए खुलेंगे नए अवसरों के द्वार : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

तकनीक आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को मिलेंगे नए अवसर : उच्च शिक्षा मंत्री परमार उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए इंदौर में आयोजित हुआ ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’ उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा के डिजिटल भविष्य पर हुआ मंथन मंत्री परमार ने किया समिट का शुभारंभ भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग द्वारा  इंदौर के मेरियट होटल में “डिजी100x मध्यप्रदेश समिट” का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण समिट का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा, आर.आर. कन्हेरे सहित प्रदेश के विभिन्न शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समिट का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल मूल्यांकन तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का सशक्त उपकरण भी है। मंत्री परमार ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा उन्हें बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तेलुगू, तमिल, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार तथा डिजिटल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तकनीक को अपनाना आवश्यक है। जब तकनीकी विशेषज्ञ, विश्वविद्यालय और शासन मिलकर योजनाओं का स्वरूप तैयार करते हैं, तब शिक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग उच्च शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा। मंत्री परमार ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल इवैल्यूएशन) प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा शासन के प्रतिनिधियों से इस विषय पर व्यापक विमर्श कर व्यवहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होगा, परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस कार्यशाला को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा के अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश को देखते हुए इसे 40:60 करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की सतत शैक्षणिक सहभागिता और कक्षा आधारित सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्व मिलेगा। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई आधारित तकनीकों से परिचित कराने के लिए महाविद्यालयों में एआई से संबंधित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को एआई टूल्स के रचनात्मक, नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। समिट में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली, डेटा आधारित प्रबंधन तथा तकनीक आधारित कौशल विकास जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि डिजिटल संसाधनों और नवाचारों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालय प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में साझा कार्ययोजना तैयार करना था। समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, विद्यार्थी-केंद्रित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।