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छात्रा के सुझाव पर बड़ा बदलाव! IRCTC की नई वेबसाइट से टिकट बुकिंग होगी और तेज व आसान

मुंबई  IRCTC वेबसाइट पर ट्रेन टिकट बुकिंग आसान होने वाली है. रेलवे के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जल्द ही बड़ा बदलाव होगा. लॉगिन और तकनीकी खामियां दूर होंगी, जिसका फायदा करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि 15 जुलाई तक आईआरसीटीसी वेबसाइट का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया जाएगा. पीक ऑवर्स और सुबह के समय तत्काल टिकट बुकिंग भी आसान होगी. इससे सर्वर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा. और यह सब कुछ आसान हुआ है, जयपुर की लाभिषा मीणा के सुझावों की वजह से. छात्रा ने खुद ही रेल मंत्री के सामने टिकट बुकिंग में आने वाली परेशानियों को रखा था. इसके बाद रेलवे ने वेबसाइट में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है।  यूजर फ्रेंडली होगी रेलवे की वेबसाइट रेलवे मंत्रालय के अनुसार, 15 जुलाई को लॉन्च होने वाली इस नई वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक तेज, सरल और भरोसेमंद बनाना है. सबसे बड़ा बदलाव यूजर इंटरफ़ेस में किया जा रहा है, जिसे बेहद यूजर-फ्रेंडली बनाया जाएगा. इसके अलावा, वेबसाइट की कुल प्रतिक्रिया क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा रहा है।  इस बदलाव की कहानी हाल ही में जयपुर से शुरू हुई. जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT Jaipur) में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और छात्रों के बीच सीधा संवाद कार्यक्रम हुआ. तभी इंजीनियरिंग छात्रा लाभिषा मीणा ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर टिकट बुकिंग की परेशानियों के बारे में बताया. छात्रा ने बताया कि वेबसाइट की धीमी गति और बार-बार आने वाले जटिल कैप्चा के कारण आम यात्रियों को कितनी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. विशेष रूप से पीक ऑवर्स और तत्काल बुकिंग के दौरान वेबसाइट का सर्वर ठप हो जाता है, जिससे आम नागरिक टिकट बुक करने से वंचित रह जाते हैं।  नई वेबसाइट के लिए छात्रा से मांगे थे सुझाव शिकायत को सुनने के बाद रेल मंत्री ने तुरंत निर्देश दिए कि 30 दिनों के भीतर ही IRCTC के डिजिटल प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाया जाए. रेल मंत्री के इस त्वरित संज्ञान और कड़े निर्देशों के बाद रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया. नतीजा यह हुआ कि अगले ही दिन रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रा लाभिषा मीणा के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की. उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों ने न केवल छात्रा की चिंताओं को गहराई से समझा, बल्कि प्रस्तावित नई वेबसाइट के प्रोटोटाइप को साझाकर उस पर छात्रा से सुझाव भी मांगे।  PNR स्टेटस से रिफंड तक यात्रियों को मिलेगा फायदा  प्रशासन की प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए छात्रा लाभिषा मीणा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि मेरी शिकायत पर अगले ही दिन अधिकारियों ने संपर्क कर नई वेबसाइट के प्रोटोटाइप पर सुझाव मांगे. मैं इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड का आभार जताती हूं. यह देखकर अच्छा लगा कि नागरिकों की प्रतिक्रिया को इतनी गंभीरता से लिया जा रहा है. नए डिजिटल प्लेटफॉर्म में जटिल कैप्चा के जाल को आसान या समाप्त किया जाएगा, जिससे यात्रियों का बहुमूल्य समय बचेगा. साथ ही, पीएनआर स्टेटस जांचने, रिफंड की स्थिति देखने और अन्य यात्री सेवाओं तक पहुंच को बेहद सुगम और त्वरित बनाया जा रहा है। 

महिला प्रशिक्षुओं की सेहत पर असर, BSAP ने 16 किलोमीटर दौड़ अस्थायी रूप से बंद की

रोहतास. बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस 2 (BSAP 2) में प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु सिपाहियों की दौड़ गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। वहीं 16 किलो मीटर दौड़ के दौरान रविवार को बीमार हुई महिला सिपाही निशा कुमारी को उपचार के बाद बीसैप के अधिकारियों के अनुरोध पर बीएचयू वाराणसी रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनका इलाज बीएचयू में चल रहा है। डीजी ने मौसम को देखते हुए द‍िया आदेश बीसैप दो के अधिकारियों के अनुसार इस घटना और पांच दिन पूर्व दौड़ के दौरान बेहोश हुए एक प्रशिक्षु सिपाही की इलाज के क्रम में मौत की घटना के बाद महानिदेशक प्रशिक्षण ने आदेश दिया है।  प्रशिक्षुओं की सत्रांत परीक्षा में शामिल 16 किलोमीटर की दौड़ परीक्षा पर रोक लगा दी है। यह रोक गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप से प्रशिक्षुओं को आए दिन बीमार होने के बाद ली गई है। प्रशिक्षण की अन्य सभी गतिविधियां पूर्ववत जारी रहेगी। जानकारी के अनुसार तबीयत खराब होने के बाद निशा कुमारी को नारायण मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें उपचार किया गया। एक सिपाही को क‍िया गया रेफर  इसके अलावा अस्पताल में मरीज का सीटी स्कैन समेत अन्य आवश्यक जांचें की गईं। डॉक्टरों के मुताबिक मरीज को बार-बार बेहोशी आ रही थी और उन्होंने पेट में तेज दर्द की शिकायत भी की थी। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार उन्हें बेहतर इलाज के लिए बनारस रेफर कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षु महिला सिपाही निशा कुमारी को पहले से ही छाती में गांठ की शिकायत थी। पूर्व से स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही यह घोषणा कर दी गई थी कि जिन अभ्यर्थियों को इस प्रकार की कोई भी स्वास्थ्य संबंधी या गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें प्रशिक्षण में शामिल नहीं किया जाएगा। मह‍िला स‍िपाही की तबीयत में सुधार  इस संबंध में डीएसपी रवि भूषण ने बताया कि मौसम की तल्‍खी को देखते हुए 16 किलोमीटर की दौड़ को तत्‍काल प्रभाव से स्‍थगित करने का आदेश आया है। मौसम अनुकूल होने के बाद इस पर पुनर्विचार कर दौड़ आयोजित की जाएगी। अन्य प्रशिक्षण एवं परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी। जहां तक प्रशिक्षु महिला सिपाही निशा कुमारी का प्रश्न है, वह अभी बनारस में उपचाराधीन हैं। उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

पहली रोटी गाय और आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाने के पीछे क्या है धार्मिक और वास्तु महत्व?

वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा में रसोई घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारी सेहत, समृद्धि और मानसिक शांति से होता है. रसोई में बनने वाली रोटी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह घर की ऊर्जा को भी तय करती है. रोटी बनाते, सेकते और सर्व करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है. वहीं शास्त्रों के अनुसार, जहां पहली रोटी गाय की निकाली जाती है, वहीं आखिरी रोटी कुत्ते की निकाली जाती है. चलिए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या नियम है. पहली रोटी गाय के लिए क्यों? हिंदू धर्म के मुताबिक, गाय व गौ माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है. मतलब की गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है. पहली रोटी (जिसे 'गोग्रास' कहते हैं) गाय को खिलाने से घर में सुख, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है. इससे वास्तु दोष भी दूर होते हैं. आखिरी रोटी कुत्ते के लिए क्यों? ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुत्ते को मुख्य रूप से भैरव बाबा की सवारी और राहु-केतु का प्रतीक माना जाता है. आखिरी रोटी पर थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर या सामान्य रूप से कुत्ते को खिलाने से कुंडली में राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव और शनि दोष (साढ़ेसाती या ढैय्या) शांत होते हैं. वहीं, माना जाता है कि कुत्ता घर पर आने वाली अदृश्य बाधाओं और संकटों को अपने ऊपर ले लेता है. ध्यान रखने योग्य कुछ अन्य जरूरी नियम अग्नि ग्रास (चूल्हे की रोटी) कई घरों में पहली रोटी बनाने से पहले आटे का एक छोटा सा हिस्सा तोड़कर चूल्हे या अग्नि देव को समर्पित किया जाता है, जिसे अग्नि ग्रास कहते हैं. इसके बाद पहली पूरी रोटी गाय की निकाली जाती है. अतिथियों और पक्षियों का स्थान गाय और कुत्ते के अलावा, भोजन का एक हिस्सा पक्षियों (कौवे) और चींटियों के लिए भी निकालने का विधान है, जिसे 'पंचबलि कर्म' कहा जाता है. बासी या बची-कुची रोटी न दें अक्सर लोग सबसे छोटी, जली हुई या बची हुई आखिरी रोटी कुत्ते को देते हैं. वास्तु के अनुसार ऐसा करने से बचना चाहिए. आखिरी रोटी भी पूरी और साफ-सुथरी होनी चाहिए.

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से बड़ा भंडाफोड़, बठिंडा में सोलर कैमरे के जरिए हो रही थी निगरानी

बठिंडा. बठिंडा में पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने एक ऐसे संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिस पर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा संवेदनशील जानकारी विदेशों में बैठे देश विरोधी तत्वों तक पहुंचाने का आरोप है। मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार मामला थाना थर्मल क्षेत्र में दर्ज प्राथमिकी संख्या 66, दिनांक 9 जून 2026 से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता कानून और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सोलर ऊर्जा आधारित कैमरा किया इंस्टॉल जांच के दौरान सामने आया कि बठिंडा-मलोट मार्ग पर अंबुजा फैक्ट्री के सामने सरकारी बिजली के खंभे पर मार्च महीने में एक सोलर ऊर्जा आधारित कैमरा लगाया गया था। इस कैमरे में सक्रिय सिम कार्ड लगा हुआ था, जिसके माध्यम से दूर बैठकर लाइव निगरानी की जा रही थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि कैमरे को बेहद सुनियोजित तरीके से ऐसे स्थान पर स्थापित किया गया था, जहां से राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। राजस्थान तक रख रहा था आरोपित नजर प्रारंभिक जांच में पता चला है कि राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर सीमा क्षेत्रों की ओर जाने वाले सैन्य वाहनों, सुरक्षा बलों की आवाजाही और अन्य संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य था। एकत्र की गई वीडियो फुटेज कथित तौर पर पाकिस्तान और कनाडा में बैठे देश विरोधी तत्वों तथा उनके एजेंटों तक पहुंचाई जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ज्योति यादव बैंस के निर्देश पर विशेष जांच टीमें गठित की गईं। पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र की सहायता से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का काम किया। अमृतसर से हुई गिरफ्तारियां जांच के दौरान 10 जून को अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव सराए निवासी 40 वर्षीय अशोक सिंह को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ के आधार पर आगे कार्रवाई करते हुए 14 जून को उसी गांव के 22 वर्षीय अकासदीप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में दो अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता भी सामने आई है। मामले में कुल चार लोगों को नामजद किया है। इनमें से दो गिरफ्तार हैं, जबकि दो आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। तार इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़ने के संकेत मिले जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है और इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। साथ ही, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क के माध्यम से अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी विदेशों तक पहुंचाई गई।

जनता की शिकायतों का अंबार, CM हेल्पलाइन 1076 पर 15 हजार से अधिक शिकायतें; बिजली-भूमि विवाद टॉप पर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन 1076 आम जनता के लिए शासन तक अपनी शिकायतें पहुंचने का सशक्त माध्यम बन रही है. हेल्पलाइन शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर शिकायतों की संख्या 15 हजार के आंकड़े को पार कर गई है. सबसे ज्यादा शिकायतें नगरीय सुविधाओं, बिजली और जमीन से जुड़ी हुई है. 13 जून तक 15,434 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं.  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से संबंधित 2,470 शिकायतें आई हैं. इनमें नामांतरण, सीमांकन और भू-अभिलेख संबंधी शिकायतें प्रमुख हैं. वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से जुड़ी 2,058 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याएं शामिल हैं. सीएम हेल्पलाइन पर ऊर्जा विभाग से संबंधित 1,921 शिकायतें दर्ज की गई हैं. इनमें बिजली आपूर्ति, ट्रांसफॉर्मर और विद्युत कनेक्शन से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 1,509 मामलों के साथ-साथ खाद्य विभाग से जुड़ी 1,235 शिकायतें भी हेल्पलाइन पर दर्ज हुई हैं. खाद्य विभाग की शिकायतों में राशन कार्ड और पात्रता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं.लगभग हर दूसरी शिकायत जमीन, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी है.

सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी – अरुण साव

सड़कों और पुलों के निर्माण की धीमी गति पर बिफरे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, 2 ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त  8 को कारण बताओ नोटिस, 2 ठेकेदारों पर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया बस्तर में निरीक्षण और समीक्षा बैठकों में जताई थी गहरी नाराजगी, लापरवाह और काम में देरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के दिए थे निर्देश सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी – अरुण साव रायपुर.   उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव द्वारा सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले 8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं पूर्व में दो ठेकेदारों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया गया है।  लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को भी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर केशलूर के पास बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज में काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स के अनुरूप नहीं होने पर ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।     उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पिछले सप्ताह चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान अपने चारों विभागों के कार्यों का निरीक्षण कर गहन समीक्षा की थी। उन्होंने निरीक्षण और बैठकों के दौरान सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में लापरवाही, देरी और अनुबंध के अनुसार अपेक्षित तेजी नहीं लाने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलों के काम पिछड़ने पर दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार मेसर्स गुप्ता कन्सट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी द्वारा भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, कोंडागांव के घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और बड़े राजपुर विकासखंड के पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी कबीरधाम जिले के बांटीपथरा से कुई (दमगढ़) मार्ग में हॉफ नदी पर भी उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कर रही है। चारों कार्यस्थलों पर कंपनी का काम अपेक्षित गति से काफी पीछे है। विभाग ने कांकेर के आमाबेड़ा-सेमर गांव सड़क पर नेरूल नदी तथा बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग में डुमरीकेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के कार्य में लेट-लतीफी पर ठेकेदार निर्भय राम साहू का पंजीयन आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद इन दोनों ठेकेदारों के काम की गति असंतोषजनक है।   लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण व सुधार कार्य की धीमी गति पर ठेकेदार पंकज हालदार को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के उत्तर का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है। प्रमुख अभियंता ने सुकमा में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग तथा केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क के कार्य में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर ठेकेदार आशीष भदौरिया को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है।    सड़कों के निर्माण में लेट-लतीफी पर इन ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी विभाग ने कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बी.एम.एस. प्रोजेक्ट, कोंडागांव में हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी और जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एस.के. अरोरा को कार्यों में धीमी प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कार्यस्थलों पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं होने पर सुकमा के चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के ठेकेदार के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन तथा भेज्जी-चिंतागुफा सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार के. मोहन रेड्डी एवं गोविन्द्र सिंह देशमुख को लोक निर्माण विभाग के सुकमा संभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।     ”सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी प्रकार की लेट-लतीफी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों के पूरे नहीं होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को तेजी से पूरे कर बेहतर कनेक्टीविटी सुनिश्चित करने पर जोर है। वहां काम कर रहे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार निर्धारित प्रगति तथा माइलस्टोन्स पूरे करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है।“ – अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री

होर्मुज से आगे की कहानी: US-Iran समझौते से भारत को मिल सकते हैं दो बड़े आर्थिक फायदे

 नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है और स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होंगे। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापार फिर से शुरू करने का एलान भी शामिल है। होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातकों में से एक है। ऐसे में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कम होने, माल ढुलाई का खर्च घटने और महंगाई का दबाव कम होने से उसे फायदा होगा। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? ईरान और ओमान के बीच के इस संकरे जलमार्ग से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है और खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए निर्यात का मुख्य रास्ता है। ये सभी देश भारत को ऊर्जा की सप्लाई करने वाले अहम देश हैं। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की वजह से इस स्ट्रेट से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट आई। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि दोबारा खुलने और तनाव कम होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता आने और भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए हालात बेहतर होने की संभावना है। तेल की कीमतों में आई गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता कर लिया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही हो सकेगी। डोनल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, "मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!" युद्धविराम की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेल के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई। युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बाद ग्लोबल ऑयल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। भारत को सबसे बड़ा फायदा तेल में भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसमें खाड़ी क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समझौता लागू होता है और ईरानी तेल फिर से बाजार में आता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है. इसका सीधा असर दुनिया के बाकी देशों के साथ-साथ भारत पर पड़ेगा. पहले समझें की भारत को क्या फायदा होगा।      पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम होगा.     महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.     भारत का तेल आयात बिल घटेगा.     देशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी. भारत के लिए सबसे अच्छी खबर क्या है? रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलेगी. साथ ही 25 अरब डॉलर की फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी करने पर भी सहमति बनी है. भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह व्यापार लगभग बंद हो गया था. खास बात ये है कि ईरान से तेल का व्यापार डॉलर में न होकर रुपये में होता था. अब अगर प्रतिबंध धीरे-धीरे हटते हैं तो भारत फिर से ईरानी क्रूड खरीद सकता है. इससे भारत को सस्ता तेल मिल सकता है।  चाबहार पोर्ट को मिलेगी नई जान इस डील का दूसरा बड़ा असर भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है. ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत ने भारी निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देती है. अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी आने से चाबहार पर अमेरिकी दबाव कम हो सकता है. इससे भारत को पोर्ट के विस्तार, नए निवेश और व्यापार बढ़ाने में आसानी होगी. इसके साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भी तेजी आने की उम्मीद है।  समझौते में क्या-क्या हुआ?     रॉयटर्स के मुताबिक अंतिम ड्राफ्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.     ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलेगा.     अमेरिका 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा.     अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा.     ईरान को तेल बेचने की अनुमति मिलेगी.     25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियां जारी की जाएंगी.     ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.     यूरेनियम एनरिचमेंट और परमाणु कार्यक्रम पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी.   मई के मध्य तक सरकार ने रिटेल कीमतों में नहीं किया था बदलाव इससे पेट्रोल और डीजल बनाने की लागत बढ़ गई, लेकिन सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, ताकि पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के दौरान रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके। विधानसभा चुनावों के बाद बढ़े तेल के दाम विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 7.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जबकि सीएनजी के दाम 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए। एलपीजी की कीमतों में भी दो किस्तों में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 89 रुपये की बढ़ोतरी की गई। कीमतें बढ़ने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि रिटेल कीमतें लागत से कम हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में नरमी और स्ट्रेट के फिर से खुलने के साथ, ये धीरे-धीरे कम हो जाएंगी।

घर संभालना भी ‘काम’ है! सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से गृहिणियों के श्रम के मूल्यांकन पर चर्चा तेज

भोपाल सर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में "घरेलू देखभाल की हानि" नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की। टीसर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में "घरेलू देखभाल की हानि" नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की। विवाद क्या था? यह फैसला पंजाब में एक मोटर दुर्घटना के दावे से संबंधित अपील पर आया है। नवंबर 2001 में एक सड़क दुर्घटना में रेशमा नाम की महिला की मृत्यु के बाद, उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संपर्क किया। दिसंबर 2003 में, न्यायाधिकरण ने ₹2.42 लाख का मुआवजा दिया। इससे असंतुष्ट होकर परिवार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील की। ​​दिसंबर 2024 में, उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹8.43 लाख कर दी, साथ ही दावा याचिका दायर करने की तारीख से 7.5% की दर से ब्याज भी लगाया। न्यायालय ने कहा कि यदि राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर बढ़कर 9% प्रति वर्ष हो जाएगी, और यदि भुगतान में छह महीने से अधिक की देरी होती है, तो यह 12% प्रति वर्ष हो जाएगी। मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होकर परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।  सुबह की पहली चाय से लेकर रात के अंतिम काम तक, करोड़ों भारतीय गृहिणियां बिना वेतन, बिना छुट्टी और बिना किसी औपचारिक मान्यता के लगातार काम करती हैं। खाना बनाना, बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखभाल, घर का बजट संभालना, परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और भावनात्मक सहारा बनना—ये ऐसे कार्य हैं जिन पर पूरे परिवार की नींव टिकी होती है। इसके बावजूद देश की आर्थिक व्यवस्था में इन कार्यों को लगभग अदृश्य माना जाता है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को राष्ट्रनिर्माता बताते हुए उनके श्रम को आर्थिक मूल्य देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या गृहिणियों के अवैतनिक श्रम को देश की जीडीपी और आर्थिक गणनाओं में शामिल किया जाना चाहिए। जीडीपी में क्यों नहीं दिखता गृहिणियों का योगदान?     सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश में होने वाली आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन करता है, लेकिन इसमें केवल वही कार्य शामिल होते हैं जिनमें पैसों का लेन-देन होता है। यही कारण है कि यदि कोई महिला अपने परिवार के लिए भोजन तैयार करती है तो उसका आर्थिक मूल्य नहीं गिना जाता, लेकिन वही भोजन किसी होटल या रेस्टोरेंट में तैयार हो तो वह जीडीपी का हिस्सा बन जाता है।     इसी तरह यदि कोई बेटी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करती है तो उसका योगदान आर्थिक आंकड़ों में दर्ज नहीं होता, जबकि किसी अस्पताल या केयर सेंटर द्वारा दी गई वही सेवा जीडीपी में शामिल हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह बड़ी खामी है जिसके कारण महिलाओं के घरेलू श्रम का वास्तविक मूल्य सामने नहीं आ पाता। भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी अनदेखी सब्सिडी     विकास विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह के अनुसार भारत का विकास मॉडल करोड़ों महिलाओं द्वारा दिए जा रहे मुफ्त श्रम पर आधारित है। उनका कहना है कि देश की लाखों गृहिणियां ऐसी सेवाएं दे रही हैं जिनके लिए यदि पेशेवर कर्मचारी रखे जाएं तो भारी आर्थिक खर्च आएगा।     एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में गृहिणियों के अवैतनिक श्रम का आर्थिक मूल्य देश की जीडीपी का लगभग 15 से 17 प्रतिशत तक हो सकता है। यह योगदान कई बड़े आर्थिक क्षेत्रों के बराबर या उनसे अधिक माना जाता है। इसके बावजूद गृहिणियों को आधिकारिक रूप से "आर्थिक रूप से निष्क्रिय" श्रेणी में रखा जाता है। समय का सबसे बड़ा निवेश महिलाएं कर रही हैं     भारत सरकार के टाइम-यूज सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय महिलाएं प्रतिदिन औसतन सात घंटे घरेलू कार्यों में लगाती हैं। इसके विपरीत पुरुष औसतन केवल एक घंटा घरेलू कार्यों के लिए देते हैं।     यह अंतर केवल श्रम का नहीं बल्कि अवसरों का भी है। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी, व्यवसाय, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के अवसरों से दूर रह जाती हैं। यही कारण है कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है। घरेलू श्रम के तीन बड़े स्तंभ     गृहिणियों का योगदान केवल खाना बनाने तक सीमित नहीं है।     भोजन और पोषण     परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की व्यवस्था करना।     बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल     शिक्षा, स्वास्थ्य, भावनात्मक समर्थन और सुरक्षा सुनिश्चित करना।     घर का प्रबंधन     सफाई, बजट, खरीदारी, समय प्रबंधन और दैनिक आवश्यकताओं का संचालन करना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी सेवाओं के लिए अलग-अलग पेशेवर कर्मचारी नियुक्त किए जाएं तो प्रति परिवार कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह या उससे अधिक का खर्च आ सकता है। दुनिया के कई देशों ने दी है मान्यता     घरेलू श्रम को औपचारिक मान्यता देने के प्रयास दुनिया के कई देशों में किए गए हैं।     स्वीडन में बच्चों और परिवार की देखभाल में बिताए गए वर्षों के आधार पर महिलाओं को पेंशन क्रेडिट दिया जाता है। इससे उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत होती है।     कनाडा नियमित सर्वेक्षणों के माध्यम से घरेलू … Read more

बाजार में जश्न का माहौल! लगातार 4 पॉजिटिव संकेतों से आई जबरदस्त उछाल, अब नजर अगली बड़ी खबर पर

 नई दिल्ली कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, सेंसेक्स 860 अंक और निफ्टी 260 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन महीने से जारी संघर्ष आखिरकार समाप्त होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो गया है. फिलहाल बाजार में तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं, जिसने निवेशकों के सेंटिमेंट को सुधार दिया है. वहीं, बाजार अब 5वीं बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है।  आइए एक-एक कर जानते हैं कि बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण हैं.. 1. होर्मुज का खुलना पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज रूट बाधित चल रहा था. रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की घोषणा के बाद, इस रूट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया गया है. वैश्विक व्यापार के लिए यह इस साल की सबसे बड़ी राहत है. दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है, इसके खुलने से सप्लाई चेन ठप होने का डर पूरी तरह खत्म हो गया है. जिसने भारतीय बाजार में चौतरफा लिवाली को बढ़ावा दिया है।  2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट होर्मुज संकट टलने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गई हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. इससे देश का आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में आएगा।  3. डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड मजबूती कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स के सुस्त पड़ने से भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है. रुपया मजबूत होकर 94.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. रुपये की इस मजबूती से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में फिर से लौट आया है, क्योंकि इससे उन्हें करेंसी डेप्रिसिएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) का जोखिम कम हो जाता है. साथ ही, आयात होने वाली जरूरी वस्तुओं की लागत घटने से घरेलू स्तर पर महंगाई को रोकने में मदद मिलेगी।  4. बॉन्ड टैक्स कटौती से FII की बिकवाली थमी घरेलू मोर्चे पर सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा बॉन्ड मार्केट पर टैक्स ढांचे में किए गए हालिया सुधार और कटौती का बड़ा असर दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, लेकिन बॉन्ड टैक्स में राहत मिलने के बाद फिक्स्ड इनकम और इक्विटी मार्केट दोनों में विदेशी फंड्स का आउटफ्लो न के बराबर रह गया है. FIIs अब आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग कर रहे हैं।  अब इस एक खबर का इंतजार (भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील) बाजार में आई इस शुरुआती तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें उस पांचवें और सबसे निर्णायक ट्रिगर पर टिकी हैं, जो इस रैली को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के अंतिम मसौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है।  ट्रेड डील से बाजार को क्या उम्मीद? इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग सामान पर लगने वाली भारी ड्यूटी को कम किया जाना है, जिससे भारतीय कंपनियों को वियतनाम और मेक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ा एडवांटेज मिलेगा। 

नगर निगम की बड़ी पहल, ड्रेन और नालों की सफाई पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च

पानीपत  आगामी दिनों में मानसून को देखते हुए नगर निगम पानीपत और जिला प्रशासन ने शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम ने वार्ड-1 से 26 तक बरसात के दौरान जमा होने वाले पानी की निकासी के लिए डीजल इंजन और माउंटेड पंप उपलब्ध कराने, उनके संचालन और रखरखाव के लिए 55.28 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। इसके तहत आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न क्षेत्रों में पंप लगाकर जलभराव वाले स्थानों से पानी निकाला जाएगा। नगर निगम ने ऐसे 20 से अधिक स्थान चिन्हित किए हैं। इसके अलावा निगम ने मानसून से पहले शहर की प्रमुख ड्रेनों, नालों और जल निकासी तंत्र की सफाई का विशेष अभियान चलाया है। ड्रेन नंबर-1, नोहरा ड्रेन तथा अन्य बड़े नालों से सिल्ट और कचरा निकालने के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की लागत से सफाई कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश शुरू होने से पहले सभी प्रमुख ड्रेनों की सफाई पूरी कर ली जाए ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो। इन 3 पाइंट पर ध्यान देने की बड़ी जरूरत है 1. ड्रेन-1 व नालों की सफाई : शहर की जीवन रेखा ड्रेन-1 को माना जाता है। इसकी सफाई अब तक शुरू नहीं हुई है। जगह-जगह कचरा भरा पड़ा है। हालांकि इसकी सफाई समेत अन्य के लिए नगर निगम ने टेंडर जारी किया है, लेकिन सफाई का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। 2. मुख्य सीवर लाइन की सफाई और मरम्मत आधे से ज्यादा शहर की सीवर निकासी संजय चौक से बबैल नाका और यहां से सेक्टर-29 पार्ट-2 से होते हुए मुख्य लाइन पर निर्भर है। इसकी सफाई और मरम्मत का काम अभी चल रहा है। बरसतों से पहले काम पूरा नहीं हुआ तो शहर में जलभराव होगा। 3. संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें भी आयोजित की हैं। जिनमें जलभराव संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। हाइवे और शहर के संवेदनशील इलाकों में निर्माणाधीन नालों के कार्य को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया है। इन कामों में ढील रही तो बरसात के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। – निगम और प्रशसान के बेहतर काम करने के दावे नगर निगम और जिला प्रशासन ने आगामी मानसून सीजन में शहर को जलभराव की गंभीर समस्या से बचाने के लिए इस बार व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू करने का दावा किया हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है मुख्य फोकस ड्रेनों की सफाई, नेशनल हाइवे के अधूरे नालों की कनेक्टिविटी और वैज्ञानिक तरीके से गाद के निस्तारण पर है।  प्रशासन द्वारा की गई मुख्य तैयारियां 1. प्रमुख ड्रेनों और नालों की सफाई : नगर निगम ने मानसून से पहले शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले प्रमुख ड्रेनों की सफाई के लिए 1.5 करोड़ का बजट आवंटित कर टेंडर जारी किए हैं। इसके तहत ड्रेन नंबर-1, ड्रेन नंबर-2 और नोहरा ड्रेन की जेसीबी मशीनों और विशेष उपकरणों से युद्ध स्तर पर सफाई कराई जाएगी। 2. वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण : इस बार के टेंडर में प्रशासन ने एक विशेष और नया प्रावधान जोड़ा है। ड्रेनों से निकाले जाने वाले कचरे और सिल्ट को सड़कों के किनारे छोड़ने के बजाय स्वच्छ भारत मिशन के नियमों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए सरकार द्वारा निर्धारित 550 प्रति टन की दर से कचरा उठान की व्यवस्था की गई है। निकाले गए कचरे को तुरंत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए शहर से दूर भैंसवाल रोड की तरफ डंप किया जा रहा है ताकि बारिश में यह गाद दोबारा बहकर नालों में न चली जाए। 3. एनएचएआई के साथ समन्वय और हाइवे वाटरलॉगिंग पर फोकस शहर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे जीटी रोड पर जलभराव एक बड़ी समस्या रहा है। इसे लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम कमिश्नर डा. पंकज यादव ने एनएचएआई को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि हाइवे के साथ बन रहे सभी निर्माणाधीन और अधूरे नालों का काम मानसून से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। – प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व नोडल अधिकारी : मेयर नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार फील्ड में उतरकर ड्रेन सफाई कार्य का निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील और निचले इलाकों की सूची तैयार कर वहां अतिरिक्त मोबाइल पंप और डीजल जनरेटर सेट तैनात करने की योजना बनाई गई है। – कोमल सैनी, मेयर नगर निगम।