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विचाराधीन कैदियों के मामलों की होगी समीक्षा, CG की अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी ने दिए निर्देश

कोंडागांव. जिला स्तर पर लंबे समय से विचाराधीन मामलों में बंद कैदियों को राहत दिलाने की दिशा में समीक्षा की गई. अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी और मॉनिटरिंग सेल की बैठक में पात्र बंदियों के मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई. ऐसे बंदियों के मामलों की समीक्षा की गई, जिन्हें लंबे समय से जमानत का लाभ मिलने के बावजूद शर्तें पूरी करने में परेशानी है. इसके अलावा उन बंदियों के मामलों पर भी ध्यान दिया गया, जो अपनी संभावित अधिकतम सजा की तुलना में पर्याप्त समय जेल में बिता चुके हैं. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अधिकारियों को पात्र मामलों में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए. बैठक में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. मॉनिटरिंग सेल की बैठक में नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने पर भी चर्चा हुई. ग्राम तोतर में मेगा ड्राइव के तहत प्रत्येक सप्ताह कैंप लगाने को लेकर भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया. कैंप के जरिए ग्रामीणों तक विभिन्न विभागों की सेवाएं पहुंचाने की योजना पर चर्चा हुई. बैठक में न्यायिक, पुलिस, प्रशासन और अभियोजन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पात्र बंदियों और ग्रामीणों से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए.

मौतों के बाद भी सागर में खुलेंगी शराब दुकानें! 28 लोगों की जान गई, 100+ गांवों में चलेगा नशामुक्ति अभियान

 सागर  मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हुई। इनको मिलाकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है।इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश हो जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। हालांकि आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल संदिग्ध बाम्बे व्हिस्की और सागर गोल्ड ब्रांड की देसी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। मामले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई है। अब प्रशासन ने तीन स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। इसमें घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई शामिल है। बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के आने का सिलसिला अब थमने लगा है। हालांकि, मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शासन-प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को छापरी, घूरमार और रिछवार सानौधा गांव के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। करीब 13 लोग बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की आइसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग भर्ती हैं। हालांकि कुछ लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। इस बीच, प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शराब किसी अधिकृत डिस्टिलरी से तैयार होकर बाजार में आने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिस्टिलरी स्तर पर तैयार शराब में गड़बड़ी होती तो उसका असर संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता। फिलहाल जांच का फोकस शराब की पैकेजिंग और उसमें मिलावट के स्तर पर है। शराब की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। पिछले दो दिनों में शराब दुकानों, आरोपितों के कब्जे, फैक्ट्री सहित अन्य स्थानों से शराब के करीब 80 नमूने लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नकली शराब की बोतल का ढक्कन ढीला होने और शराब का रंग सामान्य से अलग होता है। मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पर जताया संदेह जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने कहा कि सरकार अभी भी जहरीली शराब से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। प्रशासन द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है। पहले मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी हुई, पोस्टमार्टम में देरी हुई और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होगी या नहीं। कांग्रेस की मांग है कि सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे। भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार मध्यप्रदेश में-राहुल गांधी राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है। उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है। शिकायतों पर क्लीनचिट भारी पड़ी, वेयर हाउस प्रभारी को हटाया सागर में लंबे समय से आबकारी वेयर हाउस की प्रभारी मंजूषा सोनी को मंगलवार देर शाम हटा दिया गया। उनके स्थान पर राम चित्रकार को नया प्रभारी बनाया गया है। दरअसल, पिछले महीने एक शराब ठेकेदार ने बाम्बे व्हिस्की की नकली बोतल देकर उसके मिलावटी होने की आशंका जताई थी। 10-12 दिन उसे रखे रहने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने उसे जांच के लिए वेयर हाउस भेजा। बताया गया है कि एडीओ मंजूषा सोनी ने करीब एक घंटे में केवल बैच नंबर का मिलान कर शराब को पीने योग्य बताते हुए रिपोर्ट भेज दी। अब इसी ब्रांड की शराब से बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में मौतों के बाद क्लीनचिट पर सवाल है। शराब ठेकेदारों का कहना है मंजूषा सोनी 20-22 साल से सागर में ही कार्यरत हैं। राहुल गांधी ने कहा- सरकार जवाब दे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष्य राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर की पोस्ट में लिखा है कि भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्य प्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर जिले में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्य प्रदेश को पता है आगे क्या होगा- कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि यह पहली बार नहीं है। कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। पिछले साल जहरीली कफ सीरप से छोटे बच्चों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। 20 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन जवाबदेही कहां है? उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं, जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो। शिवपुरी में महिलाओं ने शराब की दुकान पर लगाई आग सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद शिवपुरी जिले के अमोला गांव की शराब की दुकान पर महिलाओं ने धावा बोल दिया। उन्होंने बोतलें फेंक जमकर तोड़फोड़ की और दुकान में आग लगा दी। पूरी दुकान जलकर राख हो गई। कर्मचारियों ने भागकर खुद को महिलाओं के आक्रोश से बचाया। सभी महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर पहुंचीं थीं। दरअसल, शराब ठेकेदारों ने जगह-जगह शराब बिक्री के ठिकाने बना दिए हैं। आमोला में ऐसी ही दुकान खोली गई है। इससे गांव में शराब पीकर रोज हंगामा … Read more

कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, 13 दिन बाद सरकार से बनी बात; मांगों पर हुआ समझौता

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के कर्मचारियों और सरकार के बीच पिछले कई दिनों से चल रहा टकराव बुधवार को खत्म हो गया। मुख्य सचिव के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का औपचारिक एलान कर दिया। बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर भी लगभग सहमति बन गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए दोनों पत्र वापस लेने पर भी सहमति बनी है। कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर मंगलवार से सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन शुरू किया था और बाद में हड़ताल को 11 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे पंजाब सिविल सचिवालय समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। सरकार की ओर से भी सख्त रुख अपनाते हुए ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का नियम लागू करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। मुख्य सचिव के साथ हुई बातचीत बुधवार को मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। कर्मचारियों की मांगों पर भी सरकार के साथ लगभग सहमति बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से जारी दोनों पत्रों को वापस लेने का फैसला हुआ है। इस घटनाक्रम से सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा तनाव फिलहाल खत्म हो गया है। कर्मचारियों के हड़ताल वापस लेने के बाद अब सरकारी कार्यालयों में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाएगी। क्या थी मांगें? कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

तुला में शुक्र का गोचर, 59 दिनों तक रहेगा मालव्य राजयोग; इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

 द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को भौतिक सुख, वैभव, सौंदर्य और प्रेम के कारक ग्रह शुक्र अपनी स्वयं की राशि तुला में प्रवेश कर चुके हैं और वे 6 नवंबर 2026 तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र में जब शुक्र अपनी स्वराशि तुला में गोचर करते हैं, तो अत्यंत शुभ 'मालव्य राजयोग' का निर्माण होता है. लगभग 59 दिनों की इस लंबी अवधि में शुक्र देव कई राशियों के जीवन में सुख-समृद्धि, धन-दौलत, व्यापारिक सफलता और आकर्षण लेकर आएंगे. शुक्र के इस गोचर से मुख्य रूप से इन राशियों को सबसे अधिक लाभ और भाग्य का साथ मिलेगा: मिथुन राशि प्रभाव: आपकी राशि के पांचवें (शिक्षा, प्रेम व संतान) भाव में शुक्र का गोचर हो रहा है. फायदा: कला, मीडिया, फैशन या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी. अचानक धन लाभ के योग हैं. प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और संतान पक्ष से कोई खुशखबरी मिल सकती है. तुला राशि प्रभाव: शुक्र आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में विराजमान हैं, जिससे मालव्य राजयोग का सीधा लाभ आपको मिलेगा. फायदा: आपके व्यक्तित्व और आकर्षण में वृद्धि होगी. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. बिजनेस में बड़ी डील क्रैक हो सकती है और पार्टनरशिप के कामों में जबरदस्त मुनाफा होगा. धनु राशि प्रभाव: आपकी राशि के ग्यारहवें (लाभ) भाव में शुक्र का गोचर आर्थिक मजबूती लाएगा. फायदा: आय के नए-नए स्रोत बनेंगे और जमा पूंजी में बढ़ोतरी होगी. लंबे समय से अटकी हुई भौतिक इच्छाएं पूरी होंगी. दोस्तों और नेटवर्किंग के जरिए बड़ा व्यावसायिक फायदा होगा. मकर राशि प्रभाव: आपके दशम (कर्म व करियर) भाव में शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ माना जाता है. फायदा: कार्यक्षेत्र में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे. पदोन्नति, वेतन वृद्धि या मनचाही नौकरी का अवसर मिल सकता है. वरिष्ठ अधिकारियों और महिला सहकर्मियों का पूरा सहयोग मिलेगा. कुंभ राशि प्रभाव: आपके नवम (भाग्य) भाव में शुक्र देव विराजमान रहकर सोए हुए भाग्य को जगाएंगे. फायदा: हर काम में किस्मत का पूरा साथ मिलेगा. लंबी दूरी की सुखद और लाभकारी यात्राएं होंगी. धार्मिक या मांगलिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने के मजबूत योग हैं. शुक्र देव के शुभ प्रभाव बढ़ाने के सरल उपाय – शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं. – अपनी दिनचर्या में स्वच्छता बनाए रखें और हल्के सुगंधित इत्र (Perfume) का प्रयोग करें. – ऊं शुं शुक्राय नमः मंत्र का यथासंभव जाप करें.

19 सितंबर से रेलवे रूट पर बड़ा असर, 42 ट्रेनें रहेंगी कैंसिल; 25 के बदले जाएंगे रास्ते

पुणे पुणे से ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है. सेंट्रल रेलवे 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक पुणे इलाके में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लॉक लेने जा रहा है. इस दौरान 42 ट्रेनें रद्द रहेंगी, 25 ट्रेनों का रूट बदला जाएगा, जबकि कई ट्रेनों को बीच के स्टेशनों से शुरू या खत्म किया जाएगा. इसका असर लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ पुणे की लोकल और डीईएमयू सेवाओं पर भी पड़ेगा।  रेलवे के मुताबिक, हडपसर और घोरपड़ी के बीच तीसरी रेल लाइन को चालू करने के लिए यह मेगा ब्लॉक लिया जा रहा है. इस दौरान पुणे और हडपसर यार्ड में इंजीनियरिंग, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और ओवरहेड इक्विपमेंट से जुड़े काम किए जाएंगे। काम के चलते कुछ रेल लाइनें उपलब्ध नहीं रहेंगी, इसलिए कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या रीशेड्यूल किया जाएगा। ये 42 ट्रेनें रहेंगी रद्द इस मेगा ब्लॉक के दौरान 42 ट्रेनें अलग-अलग तारीखों पर नहीं चलेंगी. इनमें 12169 पुणे-सोलापुर और 12170 सोलापुर-पुणे ट्रेनें 19 से 23 सितंबर और 3-4 अक्टूबर को रद्द रहेंगी।  इसके अलावा 12116, 12115, 12114, 12113, 11041 और 11042 भी तय तारीखों पर रद्द रहेंगी. 4 अक्टूबर को 22105, 22106, 11007, 11008, 11029, 11030, 12127, 12128, 12157, 12158, 11423 और 11424 समेत कई ट्रेनें नहीं चलेंगी।  लोकल और DEMU पर भी असर मेगा ब्लॉक का असर पुणे-दौंड और पुणे-लोनावला के यात्रियों पर भी पड़ेगा. 71407 और 71408 पुणे-दौंड डीईएमयू 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक रद्द रहेंगी. इसके अलावा 71411, 71412, 71404, 71405, 71401, 71402, 71413, 71419 और 71420 अलग-अलग तारीखों पर रद्द रहेंगी. पुणे-लोनावला की 99812, 99818, 99813, 99820 और 99821 सबअर्बन सेवाएं 4 अक्टूबर को रद्द रहेंगी. वहीं 71441 और 71442 अहमदनगर-बीड़ डीईएमयू 5 अक्टूबर को नहीं चलेंगी।  25 ट्रेनों का बदला जाएगा रूट मेगा ब्लॉक के दौरान 25 ट्रेनों को उनके सामान्य रास्ते के बजाय दूसरे रूट से चलाया जाएगा. 12221 पुणे-हावड़ा 19 सितंबर और 3 अक्टूबर को डायवर्ट रूट से चलेगी. वहीं 12222 हावड़ा-पुणे 3 अक्टूबर को मनमाड-इगतपुरी-कल्याण-पनवेल-कर्जत-लोनावला होते हुए पुणे पहुंचेगी. 22159 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-एमजीआर चेन्नई सेंट्रल 19 से 23 सितंबर और 4 अक्टूबर को कल्याण-इगतपुरी-मनमाड-दौंड रूट से चलेगी. 11028 सतारा-दादर 3 अक्टूबर को सतारा-जेजुरी-पुणे-लोणावला रूट से जाएगी. यह ट्रेन सतारा से रात 10.30 बजे रवाना होगी।  कई ट्रेनें रास्ते में होंगी टर्मिनेट कुछ ट्रेनों को उनके तय गंतव्य तक नहीं ले जाकर रास्ते के स्टेशनों पर ही टर्मिनेट किया जाएगा. इसी तरह कुछ ट्रेनें अपने सामान्य शुरुआती स्टेशन की जगह दूसरे स्टेशन से चलेंगी. 22944 इंदौर-दौंड 18 सितंबर से 3 अक्टूबर तक खड़की में टर्मिनेट होगी, जबकि 22943 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक खड़की से दोपहर 3.40 बजे चलेगी. 20495 जोधपुर-हडपसर तय तारीखों पर खड़की में खत्म होगी और 20496 खड़की से शाम 7.40 बजे रवाना होगी।  17014 काजीपेट-हडपसर कुछ तारीखों पर दौंड तक जाएगी, जबकि 3 अक्टूबर को इसका सफर कुर्डुवाडी तक सीमित रहेगा. इसकी वापसी ट्रेन 17013 4 अक्टूबर को कुर्डुवाडी से चलेगी।  इसके अलावा 12158, 11026, 22846, 22172 और 20162 जैसी कुछ ट्रेनें अलग-अलग तारीखों पर दौंड में ही खत्म होंगी. वहीं 12157, 11025, 22845 और 22171 दौंड से शुरू होंगी. इनमें 22845 के दौंड से चलने का समय सुबह 11.52 बजे और 22171 का शाम 4.15 बजे है।  कुछ अन्य सेवाएं भी अपने सामान्य स्टेशन की जगह बदले हुए स्टेशन से शुरू होंगी. इनमें 12939 खड़की से शाम 5.35 बजे, 12493 खड़की से सुबह 11.10 बजे, 11425 जेजुरी से, 20674 सतारा से और 99814 व 99824 शिवाजीनगर से शुरू होने वाली सेवाएं शामिल हैं।  यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस करें चेक अगर आप पुणे, हडपसर, दौंड, लोणावला या आसपास के इलाकों से ट्रेन पकड़ने वाले हैं, तो इस दौरान स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें. सिर्फ ट्रेन नंबर देखकर स्टेशन के लिए न निकलें, क्योंकि आपकी ट्रेन रद्द हो सकती है, उसका रूट बदला हो सकता है या वह किसी दूसरे स्टेशन से चल सकती है. रेलवे ने यात्रियों से Indian Railway Enquiry Portal या NTES ऐप पर अपनी ट्रेन का लेटेस्ट रनिंग स्टेटस और बदली हुई टाइमिंग चेक करने की सलाह दी है। 

पंजाबी इंफ्लुएंसर मंजीत कौर हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, रिंकू का साथी पिंदा पकड़ा गया

चंडीगढ़. पंजाबी इंफ्लुएंसर मंजीत कौर की किडनैपिंग के बाद हत्या के मामले में सेक्टर-34 थाना पुलिस ने मुख्य आरोपित रिंकू के साथी परमिंदर सिंह उर्फ पिंदा (25) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित को वारदात में इस्तेमाल रिंकू की फॉर्च्यूनर कार के साथ सेक्टर-48 की मोटर मार्केट से गिरफ्तार किया। परमिंदर सिंह पंजाब के कपूरथला जिले के खानोवाल का रहने वाला है। उसका खरड़ में इमिग्रेशन का काम था, लेकिन वारदात से कुछ दिन पहले से वह रिंकू के लिए ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। दोनों के बीच दोस्ती भी है। मंजीत कौर को सेक्टर-34 से बुलाने और अगवा करने के दौरान परमिंदर भी रिंकू के साथ था। पुलिस आरोपित को बुधवार को अदालत में पेश करेगी। पुलिस की ओर से उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांगा जाएगा। वहीं, मामले के मुख्य आरोपित रिंकू की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं। फोन कर सेक्टर-34 बुलाने का आरोप मंजीत कौर की मां कांता देवी ने सेक्टर-34 थाना पुलिस को बयान दिया था कि उनकी बेटी को उसके दो जानकार रिंकू और पिंदा ने फोन कर सेक्टर-34 बुलाया था। 3 और 4 जुलाई की रात दोनों आरोपितों ने मंजीत कौर के साथ कथित तौर पर मारपीट की और उसे कार में अगवा कर मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए। आरोपित मंजीत कौर को मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए और वहां एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इसके बाद दोनों आरोपित मौके से फरार हो गए। इसी दौरान मंजीत कौर का एक जानकार वहां पहुंचा और कंबल डालकर आग बुझाई। गंभीर रूप से झुलसे मंजीत कौर को उपचार के लिए मोरिंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया। मंजीत कौर को बाद में मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। वहां कुछ दिनों तक उसका इलाज चला। इसके बाद उसे दोबारा पीजीआई रेफर किया गया। उपचार के दौरान मंजीत कौर की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने अब परमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि वारदात में उसकी क्या भूमिका थी और मुख्य आरोपित रिंकू की घटना के बाद कहां-कहां मौजूदगी रही। पुलिस रिंकू की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार दबिश दे रही है।

बस्तर दशहरा की भव्य तैयारी, 1.22 करोड़ के खर्च का बजट प्रस्ताव तैयार

जगदलपुर. बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा परंपरा इस साल भी भव्यता और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाई जाएगी, लेकिन आयोजन का बजट पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। पाट जात्रा विधान पूरा होने के बाद अब आगे होने वाले विभिन्न विधानों की तैयारियां तेज हो गई हैं। कलेक्टोरेट में बस्तर दशहरा समिति की दो घंटे से अधिक चली बैठक में आयोजन की व्यवस्थाओं के साथ खर्च का खाका भी रखा गया। वर्ष 2026 के लिए 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार 629 रुपए खर्च का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पिछले साल वास्तविक खर्च 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार 663 रुपए रहा था। यानी इस बार करीब 11.14 लाख रुपए ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पारंपरिक रस्मों में उपयोग होने वाले बकरा-सूअर और शराब पर होने वाले खर्च को लेकर रही। प्रस्ताव के अनुसार बकरा-सूअर पर 15.40 लाख रुपए और दशमी सामग्री व शराब पर 4.13 लाख यानी कुल 19.52 लाख का प्रावधान किया है। पिछले साल इन मदों पर करीब 17.75 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस लिहाज से इन मदों का खर्च भी बढ़ा है। टेंपल कमेटी के सचिव एवं तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि बस्तर दशहरा धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत स्वरूप है। बस्तर दशहरा की अलग-अलग रस्मों को पूरा करने के लिए बजट में चावल से लेकर किराना, फल-फूल, भोग सामग्री, कपड़ा और रथ की लकड़ी तक का इंतजाम किया गया है। चावल पर 2.31 लाख, किराना पर 10.98 लाख, विदाई रस्म पर 5.40 लाख और विद्युत सजावट पर 10.61 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। कुश्ती प्रतियोगिता के लिए 9.26 लाख और डीजल के लिए 10.71 लाख रुपए रखे गए हैं। रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, पटाखे और प्रचार- प्रसार पर भी अलग-अलग राशि प्रस्तावित है। इस बार इन मदों पर बड़ा खर्च किए जाने की तैयारी बकरा-सूअर 15.40 लाख, कपड़ा 15.40 लाख, रंगाई-पुताई 11.72 लाख, डीजल 10.71 लाख, विद्युत सजावट 10.61 लाख, किराना 10.98 लाख और कुश्ती 9.26 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। यानी दशहरा की रस्मों के साथ व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च होगा। 75 लाख मिले, लेकिन पुराना भुगतान बाकी 2026 के आयोजन के लिए संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से 25 लाख और कलेक्टर कार्यालय से 50 लाख रुपए मिले हैं। यानी अभी कुल 75 लाख रुपए उपलब्ध हैं। वहीं वर्ष 2025 के वास्तविक खर्च में 36 लाख 39 हजार 663 का अतिरिक्त भुगतान लंबित बताया गया है। 1.22 करोड़ के बजट में ये रस्में होंगी पूरी प्रस्ताव में चावल, किराना, बकरा-सूअर, दशमी सामग्री व शराब, विदाई रस्म, विद्युत सजावट, कुश्ती, वाहन, डीजल, लोहा, फल-फूल व भोग, रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, कपड़ा, पटाखे, प्रचार-प्रसार, लकड़ी चिरान और अन्य सामग्री शामिल हैं।

कुलपति पर लगे आरोपों की होगी जांच, हेमचंद यादव विवि पहुंची उच्चस्तरीय कमेटी

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त वित्तीय, प्रशासनिक एवं मूल्यांकन संबंधी शिकायतों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को शिकायतों से संबंधित नस्तियां, नोटशीट एवं अभिलेख प्रस्तुत करने दिए गए अंतिम अवसर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की मौके पर जांच- पड़ताल की जा रही है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को स्पष्ट समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, और वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है, तो अब जांच समिति स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच कर रही है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना द्वारा 30 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। बताया जाता है कि दुर्ग ग्रामीण के विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलपति के विरुद्ध विभिन्न बिंदुओं को लेकर कलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तत की थी। इसके बाद शिकायतों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय ने 19 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से कुलपति के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं नस्तियां जांच समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 24 अगस्त 2026 तक की समय- सीमा निर्धारित की गई थी। बताया जाता है कि कुलपति की ओर से विभिन्न विभागों से अभिलेख एकत्र करने तथा उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन किए जाने का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 किए जाने का अनुरोध किया गया। हालांकि, निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अपेक्षित दस्तावेज जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई। विधायक ललित चंद्राकर ने की है शिकायत हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं सबंधी शिकायती पत्र राज्यपाल को प्रेषित किया है। पत्र में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा माह मार्च 2026 में लगभग 12 लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्रक्रिया में शासकीय फर्म “संवाद” द्वारा न्यूनतम दर प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा एक निजी फर्म के पक्ष में अर्धशासकीय पत्र जारी कर कार्य आबंटित किए जाने की अनुशंसा की गई। तत्पश्चात उक्त फर्म को ही कार्य प्रदान किया गया तथा लगभग 40 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी किया गया। यह कृत्य शासकीय निविदा प्रक्रिया एवं वित्तीय नियमों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा एमबीए, एमसीए, पीजीडी बीएम सहित 8 नये पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु एआईसीटीसी एवं आरसीआई से निरीक्षण कराया गया, जबकि इसके पूर्व राज्य शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नही की गई। यह तथ्य भी सामने आया है कि एक ही विभागीय सरंचना को परिवर्तित स्वरुप में प्रस्तुत कर विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया गया। नए पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक पुस्तकों की खरीदी में भी गंभीर अनियमितता बरती गई है। कुलपति द्वारा बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के सिर्फ मौखिक निर्देश पर लगभग 40 लाख रुपए मूल्य की 380 पुस्तकें तत्काल खरीद ली गईं। पुस्तकों के मूल्य एवं खरीदी प्रक्रिया दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं। शासकीय नियमों के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पश्चात की जाती है, परंतु कुलपति द्वारा मई माह में ही 5 विषयों हेतु 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग अभी विधिवत अस्तित्व में नहीं हैं तथा उनमें विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में उनके वेतन भुगतान के स्रोत एवं औचित्य की जांच आवश्यक है। कुलपति डॉ. तिवारी विश्वविद्यालय के अनेक महत्वपूर्ण एवं वित्तीय विषयों को कार्यपरिषद के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नहीं करते, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक राशि की खरीदी एवं वित्तीय निर्णयों में कार्यपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह आचरण विश्वविद्यालय अधिनियम एवं प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत प्रतीत होता है।

पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल से सरकारी कामकाज प्रभावित, लुधियाना में हाईवे पर लगा जाम

चंडीगढ़  लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के इस फैसले से आने वाले दिनों में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए नो वर्क नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का आदेश जारी कर दिया। कार्यालयों में होगी जनता को परेशानी साथ ही, ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे आम जनता को परेशानी होती है। बसों के चक्का जाम की चेतावनी  पंजाब रोडवेज, पनबस और पी. आर. टी. से. काट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के साथ 8 सितम्बर को बैठक तय की गई थी, लेकिन मंत्री ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक को 9 सितम्बर तक टाल दिया है। रेशम सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यूनियन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लगातार लंबित रखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 9 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक परिवहन मंत्री के साथ बैठक का समय तय नहीं किया गया तो यूनियन पंजाब में बसों का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देगी। क्यों हो रहा आंदोलन? इसे "अनधिकृत अनुपस्थिति" मान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार ने 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे। कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

WhatsApp ने पुराने Android फोन्स से खत्म किया सपोर्ट, इन मोबाइल्स पर नहीं चलेगा ऐप

नई दिल्ली WhatsApp ने बड़ा ऐलान कर दिया है और बताया है कि कई पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है. Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 8 सितंबर 2026 से पुराने स्मार्टफोन से सपोर्ट बंद किया जा चुका है।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनपर से WhatsApp का सपोर्ट बंद किया जा चुका है. जब  Android 5.0 और 5.1 पर काम करने वाले स्मार्टफोन यूजर्स जैसे ही मैसेजिंग ऐप को ओपन करेंगे, उसको ऐप के अंदर नोटिफिकेशन्स अलर्ट मिलेगा।  जो स्मार्टफोन Android 5.0 और 5.1 पर काम करते हैं, उनके पास एक ऑप्शन है कि वे अपने हैंडसेट को लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) वर्जन के साथ अपडेट कर लें. अगर न्यू अपडेट अवेलेबल नहीं है तो यूजर्स को न्यू हैंडसेट खरीदना चाहिए।  WhatsApp ने अप्रैल में कर दिया था ऐलान WhatsApp ने इस साल अप्रैल में ही ऐलान कर दिया था कि पुराने हैंडसेट से सपोर्ट बंद होने जा रहा है. अब कंपनी ने सपोर्ट बंद कर दिया है. अब वॉट्सऐप मिनिमम एंड्रॉयड 6.0 मार्शमैलो को सपोर्ट करेगा।  भारत  समेत कई देशों में पुराने हैंडसेट मौजूद  Wabetainfo ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत समेत पाकिस्तान, ब्राजील आदि कई देश हैं, जहां पर अभी भी बड़े स्तर पर पुराने डिवाइसों का इस्तेमाल किया जाता है. वे पुराने डिवाइस Android 5 या उससे भी पुराने ओएस वर्जन पर काम करते हैं।  WhatsApp पुराने एंड्रॉयड वर्जन से सपोर्ट क्यों बंद करता है?  WhatsApp लगातार न्यू फीचर्स जारी करता है और हर बार नए फीचर्स कुछ एंड्रॉयड वर्जन के साथ ही कंपेटेबल होते हैं. बहुत से फीचर्स ज्यादा पुराने एंड्रॉयड ओएस पर सपोर्ट नहीं करते हैं. एंड्रॉयड 5.0 या उससे पुराने ओएस से वॉट्सऐप ने सपोर्ट बंद कर दिया है।