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अफगानिस्तान की धरती से निकला कृष्ण-बलराम का प्राचीन प्रमाण, खुदाई में मिले 2000 साल पुराने सिक्कों की कहानी

काबुल  अगर आपसे कहें कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की सबसे प्राचीन छवियों में से एक भारत के किसी मंदिर में नहीं, बल्कि हजारों मील दूर अफगानिस्तान की वादियों में, एक विदेशी ग्रीक (यूनानी) राजा के सिक्कों पर मिली है तो क्या आप यकीन करेंगे? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह इतिहास की वो जीती-जागती हकीकत है जिसने पूरी दुनिया के इतिहासकारों और पुरातत्वविदों को हैरान कर दिया है. आज हम आपको ले चलते हैं 2200 साल पीछे के उस दौर में, जहां ग्रीक और भारतीय संस्कृति का ऐसा मिलन हुआ, जिसकी गवाही आज भी चांदी के ये दुर्लभ सिक्के दे रहे हैं।  ऐ-खानम की खुदाई में वो रहस्यमयी सिक्का बात 180 ईसा पूर्व के आसपास की है. मध्य एशिया का बैक्ट्रिया (जो आज का अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान का इलाका है), पूरब और पश्चिम के व्यापार और विचारों का सबसे बड़ा चौराहा हुआ करता था. वहां राज करता था एक यूनानी-बैक्ट्रियन राजा अगाथोक्लीज (King Agathocles) . अफगानिस्तान के ऐ-खानम में जब पुरातत्वविदों ने खुदाई की, तो जमीन के सीने से चांदी के चौकोर सिक्के निकले. जब इतिहासकारों ने इन सिक्कों को साफ करके गौर से देखा, तो उनके होश उड़ गए।  एक तरफ हलधर बलराम: सिक्के के एक पहलू पर एक दिव्य आकृति उकेरी गई थी, जिसके बाएं हाथ में हल और दाएं हाथ में मूसल था. ये कोई और नहीं, बल्कि हमारे हलधर बलराम थे।  दूसरी तरफ चक्रधारी कृष्ण: सिक्के को पलटते ही नजर आए छह तीलियों वाले सुदर्शन चक्र को थामे स्वयं भगवान वासुदेव कृष्ण।  देवी सुभद्रा की भी मौजूदगी: इतना ही नहीं, कुछ सिक्कों पर उनकी बहन देवी सुभद्रा का भी अंकन मिला यानी वही पावन त्रिमूर्ति जिसे आज हम पुरी के जगन्नाथ धाम में पूजते हैं।  यूनानी राजा की भक्ति राजा अगाथोक्लीज ने इन सिक्कों पर जो कारीगरी करवाई थी, वो उस दौर के सांस्कृतिक तालमेल की सबसे खूबसूरत मिसाल है. सिक्के के एक तरफ ग्रीक भाषा थी, तो दूसरी तरफ आम भारतीय जनमानस की भाषा यानी ब्राह्मी लिपि में प्राकृत. कहीं-कहीं खरोष्ठी लिपि का भी इस्तेमाल हुआ।  भगवान के वस्त्र और मुद्राएं विशुद्ध भारतीय थीं, जबकि उनके सिर का मुकुट और जूते यूनानी प्रभाव दर्शा रहे थे. जरा सोचिए, एक विदेशी शासक अपने राज्य में वैधता और जनता का दिल जीतने के लिए भारतीय देवताओं की शरण में जा रहा था।    कश्मीर से लेकर विदिशा तक जुड़ती कड़ियां यह कोई इकलौता वाकया नहीं था. इतिहास के पन्ने पलटें तो कई ऐसे सबूत मिलते हैं जो बताते हैं कि कृष्ण-बलराम की भक्ति उस दौर में सीमाओं के पार फैल चुकी थी. प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित चिलास (कश्मीर) में पत्थरों पर उकेरे गए विशाल चित्र मिले हैं, जहां कुषाण शैली के चोगे पहने दो पुरुष हल और चक्र थामे नजर आते हैं. साथ में खरोष्ठी लिपि में उनके नाम दर्ज हैं।    विदिशा का गरुड़ स्तंभ (मध्य प्रदेश): शुंग काल में आए यूनानी राजदूत हेलियोडोरस ने विदिशा में एक विशाल स्तंभ बनवाया और खुद को गर्व से 'परम भागवत' (वासुदेव कृष्ण का अनन्य भक्त) घोषित किया।  मेगस्थनीज की डायरी: यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने भी अपनी किताब 'इंडिका' में लिखा था कि शूरसेन (मथुरा) के लोग जिस देवता की पूजा करते हैं, वे यूनान के 'हेराक्लीज' जैसे पराक्रमी हैं जो सीधे तौर पर भगवान कृष्ण का ही संदर्भ था। 

न्यूजीलैंड में फिर चलेगा रोहित-विराट का बल्ला? सैंटनर बोले- दोनों को रोकना होगी बड़ी चुनौती

मुंबई  टीम इंडिया के लिए न्यूजीलैंड में इस साल न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी जमीं पर पांच वनडे मैचों की सीरीज एक तरह अगले साल मिशन 2027 यानी फिफ्टी-फिफ्टी वर्ल्ड की तैयारियों का काउंट डाउन (उल्टी गिनती) शुरू होने जैसा है. इस सीरीज में निश्चित तौर पर रोहित और विराट सबसे बड़े स्टार होंगे. हाल ही में BCCI ने रोहित को लेकर स्थिति साप कर दी है. करोड़ों भारतीयों को भरोसा है कि  इस बार रोहित और विराट दोनों ही कीवयों के लिए खासा सिरदर्द साबित होंगे. लेकिन न्यूजीलैंड कप्तान मिचेल सेंटर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।   सेंटनर ने कहा, 'यह एक बड़ी चुनौती होने जा रही है. वे अभी भी बहुत शानदार खिलाड़ी हैं, जैसा कि हम लंबे समय से देखते आ रहे हैं. वे वनडे खेल के उस्ताद खिलाड़ी हैं उन्होंने अतीत में न्यूजीलैंड की कुछ पिचों को काफी पसंद किया है. उम्मीद है, इस बार ऐसा नहीं होगा.' सेंटर ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य भारत के खिलाफ सीरीज जीतना है.  सेंटनर बोले 'पहले चीजें पहले आती हैं. आप अपने घर में भारत के खिलाफ सीरीज जीतना चाहते हैं, जो एक शानदार बात होगी. इसके बाद यह देखना होगा कि अगले साल अक्टूबर तक टीम का संयोजन कैसा दिखता है।  'भारतीय युवाओं के लिए यह बड़ा चैलेंज होगा' साल 2024 में जब भारत को उसकी जमीं पर 3-0 से हराया था, तो यह भारतीय क्रिकेट पर एक बड़ा प्रहार था  इस नतीजे ने भारत के अपने घर में 12 साल और 18 सीरीजों से चले आ रहे अजेय टेस्ट रिकॉर्ड को खत्म कर दिया था.  भारतीय टेस्ट टीम में हो रहे बदलावों के बीच, सेंटनर का मानना है कि न्यूजीलैंड में दो टेस्ट मैचों की यह सीरीज कुछ नए खिलाड़ियों के लिए कठिन साबित हो सकती है.  पुणे में दूसरे टेस्ट में 7/53 और 6/104 विकेट लेकर सीरीज में जीत पक्की करने वाले सेंटनर ने उस दौरे को याद करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि हमने पहले भी इस बारे में बात की है कि परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बिठाना जरूरी है. एक नए कलेवर वाली भारतीय टीम के लिए,शायद यह पहली बार होगा जब कुछ खिलाड़ी न्यूजीलैंड में लाल गेंद (क्रिकेट) खेल रहे होंगे. यहां जहां की पिचें उनके लिए थोड़ी अलग होंगी.वे गेंद को उनके घर की तुलना में थोड़ा ज्यादा हरकत (मूवमेंट) कराएंगे।  भारत की 'बेहद संतुलित' टीम हालांकि, सेंटनर को लगता है कि भारत की मौजूदा टेस्ट टीम मजबूत और संतुलित है. उन्होंने टीम को "हर तरह से संतुलित" बताया और कहा कि यह "अच्छी तरह से तैयार हो रही है."  सेंटनर ने कहा, 'यदि आप उनकी टीम को देखें, तो यह एक बहुत ही संतुलित टीम है।  आप जसप्रीत बुमराह को गेंदबाजी आक्रमण में वापस लाते हैं, आपके पास मोहम्मद सिराज हैं, उछाल के साथ प्रसिद्ध कृष्णा हैं. आपके पास स्पिन गेंदबाजी के लिए रवींद्र जडेजा और मानव सुथार हैं. आपके पास संभवतः एक चौथा तेज गेंदबाज भी है. यह बहुत अच्छी तरह से आकार ले रही है. मुझे लगता है कि यह एक शानदार सीरीज होने जा रही है. पारंपरिक रूप से, वर्ष के उस समय न्यूजीलैंड में पिचें थोड़ी बहुत मदद कर सकती हैं।  केवल दो टेस्ट ही क्यों? जब सेंटनर से पूछा गया कि भारत-न्यूजीलैंड सीरीज में केवल दो टेस्ट मैच ही क्यों हैं, तो उन्होंने न्यूजीलैंड के छोटे टेस्ट सीरीज खेलने के इतिहास और वित्तीय कारकों की ओर इशारा किया. न्यूजीलैंड कप्तान ने कहा,  'लंबे समय से न्यूजीलैंड दो मैचों की सीरीज खेलता आया है. इसमें जाहिर तौर पर पैसों का पहलू भी शामिल है. मुझे पता है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने में काफी खर्चा आता है. समय का भी मामला है. सफेद गेंद का क्रिकेट न्यूजीलैंड में भीड़ लाता है. इससे पैसा आता है. इसीलिए मुझे लगता है कि यह 10 (सीमित ओवर) और 2 (टेस्ट) का बंटवारा है.' हालांकि, सेंटनर ने कहा कि भारत के खिलाफ खेलना, भले ही वह केवल दो टेस्ट मैचों की सीरीज ही क्यों न हो, न्यूजीलैंड के लिए हमेशा एक बड़ा अवसर होता है। 

डॉलर को चुनौती दे रहा BRICS, 90% व्यापार अब सदस्य देशों की अपनी करेंसी में; क्या बदल रही है ग्लोबल इकॉनमी?

 नई दिल्ली रूस ने BRICS में भारत की अध्यक्षता और उसके दौरान हुए नतीजों की तारीफ की है. रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस के 90 फीसदी भुगतान नेशनल करेंसी यानी संबंधित देशों की अपनी मुद्रा में हो रहे हैं।  पेस्कोव ने कहा कि इसका मकसद डीडॉलराइजेशन नहीं है, बल्कि भुगतान के तरीकों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश अपनी नेशनल करेंसी का इस्तेमाल विदेश नीति के एक टूल के तौर पर कर रहे हैं।  BRICS में बढ़ रहा सहयोग पेस्कोव ने कहा कि BRICS में सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम हो रहा है, जिनमें मानवीय सहयोग और आर्थिक सहयोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि रूस BRICS की सदस्यता का विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।  इसके साथ ही BRICS सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहयोग का मैकेनिज्म विकसित कर रहा है. इसमें ड्रग्स और नशीले पदार्थों से निपटने के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग शामिल है. BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है।  भारत को बताया रणनीतिक साझेदार भारत को लेकर पेस्कोव ने कहा कि भारत रूस का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देश अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी ज्यादातर भुगतान नेशनल करेंसी में किए जा रहे हैं।  यूक्रेन जंग को लेकर पेस्कोव ने कहा कि रूस इसे रोकने की कोशिश कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है. उन्होंने 2014 की घटनाओं का जिक्र करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों पर रूस को हटाने के लिए तख्तापलट की साजिश का आरोप लगाया।  पेस्कोव ने कहा कि रूस शांति के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करता है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जंग खत्म कराने की कोशिशों का भी स्वागत किया. हालांकि, पेस्कोव ने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन को रूस की रणनीतिक हार के लिए उकसा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस ऐसा होने नहीं देगा। 

ग्रेटर नोएडा में जाम से मिलेगी राहत, हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है।  ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है।  प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है।  लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी।  इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।  मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे।  GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।  कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है।   

Quick Commerce में बड़ा उलटफेर! Blinkit को टक्कर देने तेजी से बढ़ रहा Flipkart Minutes

 नई दिल्ली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसकी मदद से लोग घर बैठे कोई भी सामान आसानी से मंगा सकते हैं. अब तो कई प्लेटफॉर्म 10 मिनट के अंदर सामान पहुंचाने का दावा करते हैं. कस्टमर्स भी इस सर्विस को काफी पसंद कर रहे हैं।  फास्ट कॉमर्स में भी कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है. इसी बीच स्विस फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी UBS की एक रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लिपकार्ट मिनट्स तेजी से आगे बढ़ रहा है और कुछ मामलों में Blinkit के काफी करीब पहुंच चुका है. आइए जानते हैं कि Minutes को कहां से सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है।  जानिए रिपोर्ट में क्या कहा गया है फास्ट कॉमर्स में ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स तक पहुंचने के लिए डार्क स्टोर्स की संख्या बढ़ाना बहुत जरूरी है. फ्लिपकार्ट मिनट्स ने अब 1,000 से ज्यादा डार्क स्टोर्स का नेटवर्क तैयार कर लिया है. ये करीब 130 शहरों में फैले हुए हैं. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स तक सामान जल्दी पहुंचाना है।  इसके अलावा एवरेज ऑर्डर वैल्यू के मामले में भी मिनट्स, ब्लिंकिट के काफी करीब पहुंच चुका है. अगर स्मार्टफोन की खरीद को हटा दें तो फ्लिपकार्ट मिनट्स की एवरेज ऑर्डर वैल्यू करीब 500 से 530 रुपये के बीच है. वहीं ब्लिंकिट की यह वैल्यू करीब 518 रुपये है।  मोबाइल फोन से मिल रहा है ज्यादा फायदा जब मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स के ऑर्डर्स की बात आती है तो एवरेज ऑर्डर वैल्यू और ज्यादा बढ़ जाती है. इस कैटेगरी में Flipkart को पहले से काफी एक्सपीरियंस है. इसी वजह से स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी में मिनट्स को फायदा मिल रहा है।  पुराने स्टोर्स की परफॉर्मेंस और बेहतर फ्लिपकार्ट मिनट्स के हर स्टोर पर रोज करीब 800 से 1,000 ऑर्डर्स मिल रहे हैं. वहीं पुराने और मैच्योर स्टोर्स में रोजाना करीब 1,200 से 1,500 ऑर्डर्स तक पहुंच रहे हैं. इससे पता चलता है कि फास्ट कॉमर्स ऐप्स की डिमांड कितनी तेजी से बढ़ रही है. करीब 60 फीसदी डिमांड मेट्रो शहरों से आती है. हालांकि अब छोटे शहरों में भी फास्ट कॉमर्स की ग्रोथ देखने को मिल रही है।  जानिए Flipkart Minutes का अगला कदम क्या होगा फ्लिपकार्ट मिनट्स आने वाले समय में अपने डार्क स्टोर्स की संख्या और बढ़ा सकता है. कंपनी अगले साल के मिड तक करीब 1,000 और डार्क स्टोर्स खोलने की तैयारी कर रही है. इससे उसकी बैकएंड कैपेसिटी और बढ़ सकती है. डार्क स्टोर्स बढ़ने से कंपनी ज्यादा कस्टमर्स तक पहुंच सकेगी और आने वाले समय में ज्यादा ऑर्डर्स को जल्दी डिलीवर कर पाएगी। 

पंजाब चुनाव को लेकर BJP का मेगा प्लान, मोदी-शाह और नितिन नवीन बढ़ाएंगे सियासी हलचल

 चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय शेष है और भाजपा ने प्रदेश में अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सितंबर और अक्टूबर में अपने शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित कार्यक्रमों को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अक्टूबर में तीन दिन पंजाब में रह सकते हैं। हालांकि, अभी दौरे की तारीख तय नहीं हुई है। पार्टी का प्रयास है कि उनके कार्यक्रम को अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आसपास केंद्रित किया जाए। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री पहले दिन माझा क्षेत्र के कई विधानसभा क्षेत्रों से रोड शो के माध्यम से गुजर सकते हैं। उनके रात्रि विश्राम के लिए राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय पर विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की जनसभा को लेकर भी पार्टी में मंथन चल रहा है। भाजपा के कुछ नेता बठिंडा अथवा पटियाला में जनसभा कराने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क में हैं। बठिंडा से पटियाला तक रोड शो की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मिलकर दौरे की अंतिम रूपरेखा तैयार करेगा। केंद्र की घोषणाओं पर भी मंथन प्रधानमंत्री के दौरे को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी स्तर पर यह आकलन किया जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब के लिए किन योजनाओं, परियोजनाओं या घोषणाओं की घोषणा कर सकती है। इसके साथ ही जनता के समक्ष रखे जाने वाले संभावित वादों पर भी मंथन शुरू हो गया है। 18 सितंबर से नशे और कानून-व्यवस्था के खिलाफ यात्रा इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 18 सितंबर को पठानकोट से पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर यात्रा की शुरुआत करेंगे। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में नशे और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। 19 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी यात्राएं निकाली जाएंगी। इन यात्राओं की संभावित शुरुआत श्री केसगढ़ साहिब, तलवंडी साबो और फाजिल्का से किए जाने पर विचार चल रहा है। यात्रा के दौरान बाइक रैली भी निकाली जाएगी। पार्टी की योजना इन यात्राओं को प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की है। यात्राओं का समापन जालंधर में प्रस्तावित है। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी रैली को संबोधित कर सकते हैं। उनकी रैली 29 या 30 सितंबर को होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि तारीख अभी अंतिम नहीं है। यात्राओं के नेतृत्व के लिए एक दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्रियों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में यात्रा के कार्यक्रम, तीन अन्य शहरों से निकलने वाली यात्राओं और अमित शाह की रैली की तारीख पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। बैठक में प्रदेश प्रभारी डा सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश संगठन मंत्री मंथरी श्रीनिवासुलु के शामिल होने की संभावना है। अमित शाह के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।

परीक्षा में नकल पर DAVV का सख्त एक्शन, मोबाइल की जांच के लिए बनेगी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन कमेटी

 इंदौर  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में नकल प्रकरणों की जांच अब नई व्यवस्था के जरिए की जाएगी। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों से जब्त किए गए मोबाइल महीनों तक बंद पड़े रहने से उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती हैं। ऐसे में अनुचित संसाधनों की जांच समिति के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह रहती है कि मोबाइल में यह पता नहीं चल पाता कि विद्यार्थी ने परीक्षा के दौरान कितने प्रश्नों के उत्तर फोन देखकर लिखे थे। इससे नकल प्रकरणों पर उचित निर्णय लेने में देरी होती है। अब इस समस्या से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अलग से मोबाइल जांच समिति बनाएगा। कार्यपरिषद ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। विश्वविद्यालय में सालभर स्नातक और स्नातकोत्तर की 780 से अधिक वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाएं होती हैं। इनमें औसतन 250 से 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। कई मामलों में विद्यार्थियों के पास गाइड, पाठ्यपुस्तक या अन्य सामग्री के पन्ने मिलते हैं। इन पन्नों के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा में किस तरह नकल की गई। इसलिए ऐसे मामलों में निर्णय लेना अपेक्षाकृत आसान होता है। फोन में क्या देखा, कितने सवालों के जवाब मिले सबसे ज्यादा परेशानी मोबाइल से जुड़े मामलों में आती है। परीक्षा केंद्र से जब्त मोबाइल विश्वविद्यालय में जांच होने तक लंबे समय तक बंद रखे जाते हैं। इस दौरान बैटरी खत्म हो जाती है। मोबाइल चालू नहीं होने पर समिति यह देख नहीं पाती कि विद्यार्थी ने फोन में क्या देखा और उससे कितने सवालों के जवाब लिखे। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि परीक्षा में मोबाइल लेकर आना ही नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद यदि प्रश्नपत्र हल करते समय किसी विद्यार्थी के पास मोबाइल मिलता है तो उड़नदस्ता या केंद्राध्यक्ष नकल प्रकरण बनाता है। इसी को देखते हुए नई समिति बनाई जा रही है। नई समिति का काम सिर्फ जब्त मोबाइल की तुरंत जांच कर नकल से जुड़े तथ्य जुटाना होगा। इससे प्रकरणों की जांच में तेजी आएगी।

MP को मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी की सौगात, बैतूल-खंडवा फोरलेन से अहमदाबाद-वड़ोदरा तक आसान होगी राह

इंदौर  बैतूल से खंडवा के बीच फोरलेन प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है. यह प्रोजेक्ट इंदौर और नागपुर के बीच की दूरी को बेहद कम कर देगा. दोनों शहरों के बीच का सफर 6 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह परियोजना बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है, जिससे मध्य प्रदेश की गुजरात और महाराष्ट्र से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी. इस फोरलेन के बनने से नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली, नांदेड़ जैसे शहर कनेक्ट होंगे. वहीं गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी. इसलिए यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के लिए अहम है, क्योंकि आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए गेमचेंजर बनेगा।  इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में होगा बैतूल से खंडवा फोरलेन बनने से सबसे बड़ा फायदा इंदौर नागपुर रूट पर होगा. केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट दस्तावेज में इस कॉरिडोर को इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ने वाली कड़ी बताया गया है. इंदौर से पहले सीधे बैतूल तक का सफर होगा. इसके बाद बैतूल से नागपुर का सफर तय किय जाएगा. पहले इंदौर से नागपुर जाने में 13 से 14 घंटे का समय लगता था. क्योंकि पूरा रूट 2 लेन हाईवे था. यह नया मार्ग सीधे नेशनल NH-47, NH-753 और NH-52 जैसी बड़ी सड़कों को आपस में इंटरलिंक करदेगा. इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को इस अपग्रेडेशन से सीधी मदद मिलेगी. इस फोरलेन के बनने से पूरा मार्ग एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो जाएगा. जिससे इंदौर से नागपुर का सफर 6 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. इसलिए इंदौर से नागपुर और दक्षिण भारत के बीच का सफर भी बेहद आसान हो जाएगा।  एमपी की गुजरात और महाराष्ट्र तक कनेक्टिविटी     मध्य प्रदेश: बैतूल खंडवा फोरलेन हाईवे से इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी जैसे शहर सीधे कनेक्ट हो जाएंगे.      महाराष्ट्र: नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों के लिए भी राह आसान हो जाएगी.      गुजरात: इस प्रोजेक्ट से एमपी के खंडवा का सीधा कनेक्शन अहमदाबाद, वड़ोदरा जैसे बड़े शहरों से भी हो जाएगा.  मध्य प्रदेश के शहरों को फायदा यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के भीतर एक मजबूत कनेक्टिविटी जाल तैयार करेगा, क्योंकि इससे एमपी के कई बड़े शहर आपस में कनेक्ट होंगे. बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक खंडवा होते हुए इंदौर और भोपाल की तरफ बेहद आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सकेगा. खंडवा, खरगोन और बड़वानी: निमाड़ अंचल के ये तीनों प्रमुख जिले इस हाईवे के जरिए सीधे बैतूल और छिंदवाड़ा से कनेक्ट हो जाएंगे।  सिंहस्थ-2028 में भी फायदा बैतूल-खंडवा-जुलवानिया फोरलेन से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो जाएगी. उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के आयोजन के हिसाब से यह प्रोजेक्ट अहम साबित होगा. क्योंकि उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से प्रबंधित करने में मदद करेगा. जिससे सिंहस्थ में महाराष्ट्र और गुजरात की तरफ से आने वाले यात्रियों को इस फोरलेन का फायदा होगा. इसलिए यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।  बैतूल-खंडवा फोरलेन को केंद्र की मंजूरी  बैतूल से खंडवा के बीच बनने वाले इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने जून 2026 में मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 4415.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. जिसकी कुल दूरी 233.653 किलोमीटर होगी. फिलहाल इसे 4 लेन में विकसित किया जाएगा. जबकि भविष्य में इसे 6 लेन बनाने की योजना है. ताजा अपडेट के मुताबिक नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है. जिसे मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. जनवरी 2027 से इसका काम शुरू होने की संभावना है. खास बात यह है कि सभी ब्लैक स्पॉट्स खत्म होंगे, जिससे गाड़ियां 100 किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी. वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2029 के अंत तक या 2030 की शुरुआत में यह हाईवे पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। 

8th Pay Commission पर बड़ा सवाल, पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्टर का फायदा मिलेगा या नहीं? PM मोदी को पत्र

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग के लागू होने का केंद्रीय सरकारी कर्मचारी जितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उतना ही इंतजार देशभर के पेंशनर्स को भी है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए 10 महीने से ज्‍यादा समय हो गया है और आयोग इस बीच काफी सारी एक्‍सरसाइज कर चुका है. फिलहाल देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकों का दौर जारी है।  इस बीच पेंशनर्स के एक संघ रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने 8th Pay Commission के ToR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस के एक बिंदु पर आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है।  क्‍या पुराने पेंशनर्स को नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ? रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने मंगलवार, 7 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है. संघ को आशंका है कि OPS यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम के तहत आने वाले पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ नहीं मिलेगा. एसोसिएशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन की मांग की है. संगठन के अनुसार , करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें पेंशन संशोधन का लाभ मिलेगा या नहीं।  8th CPC के ToR में किस बात को लेकर है आपत्ति?  संघ की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के ToR के प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर है. उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन, NPS और UPS का उल्लेख है, लेकिन पुराने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है।  एसोसिएशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के ToR में 'revision of pre-retirement pension' का स्पष्ट उल्लेख था. संगठन ने छठे और 5वें वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख होने का दावा किया है।  वित्त मंत्री और वित्त सचिव को भी भेजा पत्र  एसोसिएशन ने वित्त मंत्री और वित्त सचिव को पहले पत्र भेजे जाने की बात कही है. संगठन के मुताबिक, अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।  एसोसिएशन ने मांग की है कि ToR में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन/फैमिली पेंशन के संशोधन पर भी सिफारिश का लाभ देगा।  जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक सरकार से प्रेस रिलीज या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने ये पत्र प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त सचिव और DoPPW के सचिव को भी भेजा है।  पेंशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, यहां दूर करें कन्‍फ्यूजन    इस मसले पर कुछ जानकारों से बात की और मसले को समझने का प्रयास किया कि क्‍या वाकई ये डर वाजिब है. अगर हां तो सरकार या आयोग आगे क्‍या कर सकता है. 8वें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन में ToR में प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर संघ शंका में है. रिटायर्ड एम्‍प्‍लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव साधु सिंह से बात करने की कोशिश की, जो खबर लिखे जाने तक नहीं हो पाई है. फिर हमने दूसरे एक्‍सपर्ट्स से समझने की कोशिश की।  ऐसे मामलों के एक एक्‍सपर्ट ने समझाया कि आपत्ति क्‍यों है… उन्‍होंने कहा, ' 2(e) में लिखा है- Review the structure of Death-cum-Retirement Gratuity and Pension including NPS/UPS and outside NPS for the employees… यानी प्रावधान में पेंशन, ग्रेच्युटी, NPS/UPS और NPS के बाहर के कर्मचारियों का उल्लेख है, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि इसमें 'existing pensioners' यानी मौजूदा पेंशनर्स, pre-2026 retirees यानी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मी, 'family pensioners' या 'revision of pre-retirement pension' जैसी स्पष्ट भाषा नहीं है. इसी को लेकर को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से ToR संशोधन की मांग की है।  8वें वेतन आयोग के ToR को लेकर NDTV ने AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल से समझना चाहा. उन्‍होंने इसी ToR में 2(f) के तीसरे प्‍वाइंट का जिक्र किया, जिसमें लिखा है- The Unfunded cost of non-Contributory Pension Schemes…'.  डॉ पटेल ने समझाया कि Unfunded Non Contributed के अंदर बिना कंट्रीब्‍यूशन वाले पेंशनर्स यानी NPS/UPS के अलावा वाले पुराने पेंशनर्स भी आ जाते हैं. दूसरी बात कि अगर 2(e) में पुराने पेंशनर्स का जिक्र नहीं है तो पुराने वर्किंग एम्‍प्‍लॉईज का भी अलग से जिक्र नहीं है. तो इसका मतलब ये न समझा जाए कि वे भी फिटमेंट फैक्‍टर के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। 

इजरायल चुनाव में नेतन्याहू पिछड़े, गादी आइजनकोट की याशार पार्टी को बढ़त; सर्वे में 25 सीटें

तेल अवीव इजरायल में आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सर्वे के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. सोमवार को जारी एक ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं तो पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की याशार पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है. सर्वे में नेतन्याहू की जीत-हार को लेकर भी बड़े दावे सामने आ रहे हैं।  सर्वे में याशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह सर्वे इजरायल के मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन पोलिंग संस्थान मिडगैम ने चैनल 12 के लिए किया है. पिछले सर्वे के मुकाबले याशार को एक सीट का फायदा हुआ है, जबकि लिकुड की दो सीटें कम हुई हैं. इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं।  विपक्षी गठबंधन को बहुमत से ज्यादा सीटों का अनुमान सर्वे के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की टुगेदर पार्टी को 13 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि, यह उसके हालिया सर्वे में सबसे कम आंकड़ा है और पिछली बार के मुकाबले पार्टी को दो सीटों का नुकसान हुआ है।  यायर गोलान की अगुवाई वाली डेमोक्रेट्स पार्टी 11 सीटों पर बनी हुई है. वहीं एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी को 8 सीटें मिलने का अनुमान है. यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म पार्टी को भी 8 और आर्येह डेरी की शास पार्टी को 7 सीटें मिल सकती हैं।  बेजलेल स्मोट्रिच और मोशे फेइग्लिन की अगुवाई वाले राइट-विंग धार्मिक जियोनिज्म और जेहुत गठबंधन को 6 सीटें मिलने का अनुमान है. ओफर विंटर की अमचा यिसराइल को 4 सीटें मिल सकती हैं।  इजरायल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को 7 और मंसूर अब्बास की यूनाइटेड अरब लिस्ट को 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट और अवी माओज की नोआम यिसराइल समेत कई पार्टियां 3.25 फीसदी के चुनावी थ्रेशोल्ड को पार करती नहीं दिख रही हैं।  पीएम पद की पसंद में भी आइजनकोट आगे राजनीतिक गुटों की बात करें तो विपक्षी खेमे को कुल 68 सीटें मिलने का अनुमान है. इनमें 57 सीटें यहूदी पार्टियों और 11 सीटें अरब पार्टियों की हैं. नेतन्याहू के खेमे को 52 सीटें मिलने का अनुमान है. स्मोट्रिच और विंटर की पार्टियों के चुनावी थ्रेशोल्ड पार करने से नेतन्याहू के खेमे को दो सीटों का फायदा हुआ है।  इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में मौजूदा सर्वे के आंकड़े विपक्ष को बढ़त देते हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए गठबंधन की तस्वीर अहम होगी प्रधानमंत्री पद के लिए भी नेतन्याहू पिछड़ते दिख रहे हैं. सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 35 फीसदी लोग रहे. यानी आइजनकोट को नेतन्याहू पर 7 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली।  यह सर्वे ऐसे समय आया है जब 27 अक्टूबर के आम चुनाव के लिए पार्टियों ने अपनी उम्मीदवार सूची जमा कर दी है. आइजनकोट ने बेनेट की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है. वहीं ओफर विंटर ने भी स्मोट्रिच की पार्टी के साथ जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।