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AI डेवलपमेंट की स्पीड पर छिड़ी बहस, ट्रंप का चीन को बड़ा संदेश; क्या थमेगी रफ्तार?

 नई दिल्ली अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर होड़ लगातार तेज हो रही है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह AI के विकास की रफ्तार को कम करने के पक्ष में नहीं हैं. आयरलैंड के डूनबेग में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका AI के विकास में चीन से आगे है और वह इस बढ़त को बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि AI की वैश्विक दौड़ में जो जीतेगा, वही जीतेगा।  ट्रंप ने माना कि AI के लिए कुछ सुरक्षा नियम यानी गार्डरेल्स जरूरी हो सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी सरकार किस तरह के नियम लाने की तैयारी कर रही है. AI के तेजी से विकास को लेकर चिंता जताने वालों पर ट्रंप ने कहा कि तकनीक को लेकर ऐसा सोचने वाले लोग नकारात्मक सोच रखते हैं।  ट्रंप बोले- AI की रफ्तार नहीं रोकना चाहते ट्रंप का यह बयान AI इंडस्ट्री में विकास की रफ्तार को लेकर चल रही बहस के बीच आया है. एंथ्रोपिक AI के CEO डारियो अमोडेई ने एक दिन पहले कहा था कि AI इंडस्ट्री को विकास की रफ्तार कुछ धीमी करनी चाहिए, ताकि सुरक्षा उपायों को तकनीक के साथ कदम मिलाने का समय मिल सके. एलन मस्क और ओपनAI के CEO सैम ऑल्टमैन भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर सहमति जता चुके हैं।  वहीं, ट्रंप AI से जुड़े डेटा सेंटर के निर्माण के समर्थन में बने हुए हैं. अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियां छोटे शहरों में कंप्यूटिंग डेटा सेंटर का नेटवर्क तैयार कर रही हैं. हालांकि, दोनों पार्टियों के नेता जमीन, पानी, बिजली की बढ़ती जरूरत और महंगे बिजली बिल को लेकर सवाल उठा रहे हैं।  चीन से मुकाबले को लेकर कोई समझौता नहीं ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका AI की रेस में चीन से अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है. इसी वजह से AI की विकास दर कम करने का सवाल अमेरिका के लिए अहम बन गया है. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी कह चुके हैं कि डेमोक्रेट्स को AI को चुनावी मुद्दा बनाना चाहिए।  नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसेट के मुताबिक, इस हफ्ते साइबर और साइंस-टेक्नोलॉजी से जुड़े अधिकारी AI की आगे की रणनीति पर बैठक कर सकते हैं. हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने भी AI के लिए कुछ सेफ्टी मेजर्स की जरूरत मानी है, लेकिन अमेरिका को AI में आगे बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।  इसी बहस के बीच एंथ्रोपिक के पूर्व कर्मचारी जैकब कॉक्सन ने अमेरिका और चीन से मिलकर AI विकास की रफ्तार को जिम्मेदारी से कंट्रोल करने की अपील की है. उनका डर है कि अगर दोनों देश बिना पर्याप्त सुरक्षा के एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में लगे रहे, तो यही AI रेस खतरनाक साबित हो सकती है। 

बुलेट ट्रेन चलाने वाले ड्राइवरों की होगी खास ट्रेनिंग, 2027 में शुरू होगी सेवा; जानें कितनी मिलेगी सैलरी

मुंबई  भारत  की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में आगे बढ़ रही है. इसके साथ ही लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि इसके लिए किस तरह से ड्राइवरों का चयन किया जाएगा. सामान्य लोको पायलट से वह किस तरह अगल होगा और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी. बुलेट ट्रेन का संचालन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के माध्यम से किया जाएगा. ऐसा भी माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन के लिए ड्राइवरों का चयन कड़े मानकों के साथ किया जाएगा. उम्मीदवारों को मेडिकल फिटनेस, अच्छी दृष्टि, तेज प्रतिक्रिया क्षमता और साइकोमेट्रिक टेस्ट से गुरना पड़ सकता है. इसके लिए ट्रेन की संचालन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।  सामान्य ट्रेनों से कितना अलग  बुलेट ट्रेन सामान्य ट्रेन से काफी अलग होता है. इसके आधुनिक टेक्नोलॉजी, हाई स्पीड ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा के भी कई अनिवार्य सुरक्षा के इंतजाम किया गया है, जिसके लिए चयनित उम्मीदवारों को लंबा तकनीकी ट्रेनिंग और प्रैक्टिस कराया जाएगा. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें बुलेट ट्रेन  चलाने की अनुमति मिलेगी।  कितनी होगी सैलरी?  हालांकि, बुलेट ट्रेन ड्राइवरों की सैलरी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. मौजूदा रेलवे के अनुभवी मेल, एक्सप्रेस लोको पायलट कई तरह के भर्तों को मिलाने के बाद से 60 से 90 हजार रुपये होती है. हालांकि, बुलेट ट्रेन के ड्राइवरों को इससे ज्यादा सैलरी मिलने की संभावना है. कई मीडिया रिपोर्ट की माने तो, इनको 40 हजार से लेकर 1, 25,000 रुपये तक की सैलरी मिल सकती है।    कौन बन सकता है ड्राइवर?  भारत में पहली बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी तेज हो गई है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलने वाली इन ट्रेनों के लिए ड्राइवर यानी HSR Pilot की जरूरत होगी. यह जिम्मेदारी सामान्य ट्रेनों के लोको पायलट से अलग और ज्यादा तकनीकी होगी. बुलेट ट्रेन का ड्राइवर बनने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ भारतीय रेलवे या सरकारी मेट्रो में ट्रेन चलाने का कम से कम 3 साल का अनुभव जरूरी रखा गया है. इसका मतलब साफ है कि कोई व्यक्ति सीधे फ्रेशर के तौर पर बुलेट ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता।   

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अर्चना शुक्ला ने बदली पढ़ाई की तस्वीर, कबाड़ से तैयार किए विज्ञान-गणित के मॉडल

भोपाल  पढ़ाई के लिए हमेशा महंगे मॉडल और नई सामग्री की जरूरत नहीं होती। जरूरत है तो सिर्फ नजरिए की। भोपाल के महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी संदीपनी स्कूल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने स्कूल में पड़े कबाड़ को ही बच्चों की पढ़ाई का जरिया बना दिया। कहीं टूटी फॉल्स सीलिंग की टाइल्स विज्ञान के मॉडल में बदल गईं तो कहीं पुराने टायर और खाली पड़ी बेंच से गणित का ऐसा मॉडल तैयार हुआ, जो बच्चों के लिए पढ़ाई से ज्यादा खेल बन गया। डॉ. अर्चना शुक्ला को 2026 का राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी किसी चीज को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि उसे बनाता, छूता, रंगता और उसके साथ प्रयोग करता है, तो सीखना उसके लिए बोझ नहीं रहता। टूटी टाइल्स फेंकी नहीं, विज्ञान की प्रयोगशाला बना दी बारिश के दौरान एक खाली कक्षा की फॉल्स सीलिंग की टाइल्स टूट गई थीं। ये टाइल्स कबाड़ में रखी थीं। डॉ. अर्चना ने इन्हें फेंकने के बजाय बच्चों की रचनात्मकता से जोड़ दिया। हल्की और बोर्ड जैसी इन टाइल्स पर विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए विज्ञान से जुड़े चित्र और मॉडल तैयार किए। इसका मकसद सिर्फ कबाड़ का इस्तेमाल करना नहीं था। बच्चों को परीक्षा में कॉपी पर बनाए जाने वाले चित्रों को रटने के बजाय उन्हें रंगों और रचनात्मक तरीके से तैयार करने का मौका दिया गया। इससे एक तरफ बेकार सामान का इस्तेमाल हुआ और दूसरी तरफ बच्चों की कल्पनाशक्ति भी पढ़ाई से जुड़ गई। मिट्टी और रंगों से विज्ञान, याद करने का तरीका बदला डॉ. अर्चना के अनुसार, जब बच्चा क्ले या मिट्टी से किसी वैज्ञानिक संरचना को खुद बनाता है, तो वह सिर्फ उसे देखता नहीं है। उसे छूता है, आकार देता है, रंग चुनता है और अलग-अलग हिस्सों को समझता है। यानी सीखने में कई तरह की संवेदी गतिविधियां एक साथ जुड़ती हैं। यही वजह है कि विज्ञान जैसे विषय को भी कला से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला समेकित शिक्षा पर जोर दिए जाने के साथ स्कूल में इस तरीके को प्रयोग के रूप में अपनाया गया है। पुराने टायर और बेंच से बना 'गणित का खेल सबसे दिलचस्प प्रयोग गणित को लेकर किया गया। स्कूल में खाली पड़ी बेंच और बच्चों की ओर से लाए गए पुराने टायरों का इस्तेमाल कर ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जिसमें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सवालों को खेल से जोड़ा गया। यह मॉडल स्कूल में बाहर रखा जाता है। सुबह बच्चे आते हैं तो उस पर गणित का सवाल लगा मिलता है। बच्चे उत्सुकता से उसे हल करते हैं और अगली बार के लिए नया सवाल लगा देते हैं। यानी जिस गणित से कई बच्चों को डर लगता है, वही अब उनके लिए रोज का खेल बन गया है। छोटी कक्षाओं की समस्या खोजकर बड़े बच्चों ने बनाया समाधान डॉ. अर्चना का तरीका सिर्फ मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। स्कूल में परियोजना आधारित और समस्या आधारित शिक्षण पर भी काम किया जाता है। विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वे छोटी कक्षाओं में जाकर देखें कि वहां बच्चों को किस विषय में परेशानी आती है। जब विद्यार्थियों ने पाया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को गणित के सवालों में दिक्कत होती है, तो उन्होंने समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की। नतीजा पुराने टायर, खाली बेंच और दूसरे अनुपयोगी सामान से तैयार गणित का मॉडल रहा। यानी यहां बच्चे सिर्फ यह नहीं सीख रहे कि सवाल कैसे हल करना है, बल्कि यह भी सीख रहे हैं कि किसी समस्या का समाधान कैसे खोजा जाता है। अभाव को बनाया रचनात्मकता का मौका डॉ. अर्चना शुक्ला कहती हैं कि उनका उद्देश्य यही रहता है कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई बोझ न बने और वे चीजों को आसानी से याद कर सकें। उनके मुताबिक स्कूल में संसाधनों की कमी को भी रचनात्मकता में बदला जा सकता है। इसी सोच का नतीजा है कि कबाड़ यहां कचरा नहीं, पढ़ाई की सामग्री है; टायर खेल का हिस्सा नहीं, गणित का मॉडल हैं और टूटी टाइल्स बेकार सामान नहीं, विज्ञान समझाने का माध्यम बन गई हैं।  

बड़ा गणपति फ्लाईओवर का काम फिर रफ्तार में, आधी बाधा हटी; दिसंबर तक पूरी लाइन शिफ्ट करने का लक्ष्य

इंदौर  लंबे समय से बाधाओं में उलझे बड़ा गणपति फ्लाईओवर के निर्माण की राह अगले वर्ष तक ही साफ हो पाएगी। चौराहे पर आ रही सीवरेज और पानी की लाइन को हटाने का काम जारी है। फ्लाईओवर में सबसे बड़ी अड़चन बन रही 500 मीटर लंबी सीवरेज लाइन शिफ्टिंग के लिए अब तक 250 मीटर की नई लाइन डाली जा चुकी है। शेष 250 मीटर लंबी लाइन डालने का काम दिसंबर तक पूरा होगा। ऐसे में नए साल से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा बड़ा गणपति चौराहा पर बनाए जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण एक साल से अधिक की देरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है। चौराहे पर आ रही लाइन को हटाने में देरी के कारण सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करना चुनौती होगा। सीवरेज लाइन हटने के बाद चौराहे पर ही 100 से 150 मीटर लंबी पानी की लाइन भी हटाई जाएगी। दोनों लाइनें हटने के बाद ही फ्लाईओवर के फाउंडेशन का काम शुरू किया जा सकेगा। बड़ा गणपति चौराहा पर 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनाया जाना है। यह अंतिम चौराहे की तरफ से शुरू होकर जिंसी की ओर उतरेगा। इसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये है। हालांकि चौराहे पर आ रही ड्रेनेज और पानी की लाइन को हटाने में ही करीब 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। आइडीए यह राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है। पिलर की डिजाइन में कर रहे बदलाव फ्लाईओवर की राह में सिर्फ यूटिलिटी लाइनें ही नहीं, बल्कि मेट्रो का राइट आफ वे भी नई चुनौती बन गया है। राइट आफ वे की चौड़ाई बढ़ने के कारण फ्लाईओवर के पिलर की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है। रिवाइज डिजाइन इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। डिजाइन में बदलाव के कारण करीब 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति आइडीए बोर्ड बैठक में दी जा चुकी है। करीब एक लाख वाहनों की राह होगी आसान आइडीए के सर्वे में बड़ा गणपति चौराहे पर पीक आवर्स में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव सामने आया है। एयरपोर्ट रोड से आने वाले वाहनों का भी यहां भारी दबाव रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद एक लाख से अधिक वाहनों को रोजाना राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटकी परियोजना में अब पहले जमीन के नीचे की बाधाएं हटाई जा रही हैं, उसके बाद ही ऊपर फ्लाईओवर खड़ा करने का काम शुरू होगा।

पंजाब चुनाव से पहले ‘नशे’ पर सियासी घमासान, पार्टियों की रणनीति क्या? जानें पूरा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। 17 सितंबर को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में मात्र छह माह का समय रह जाएगा और सितंबर माह का यही वह पखवाड़ा है, जब न सिर्फ दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पार्टियां, बल्कि पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और रफ्तार देने की योजनाएं घोषित कर चुके हैं। सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी चुनावी मोड में शिफ्ट हो चुकी है और न सिर्फ पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियां की जा रही हैं, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के चेहरे मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा हलकों में कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं। 'नशा' रहेगा सभी चुनावी पार्टियों का मुद्दा चुनावी तैयारियों के दौरान ही करीब सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का केंद्र बिंदु नशे का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में आने के बाद से ही लगातार पंजाब में युद्ध नशे के विरुद्ध नाम से अभियान चला रही है और समय-समय पर इसके आंकड़े पेश करके अपने द्वारा किए जा रहे काम का क्रेडिट ले रही है। 18 सितंबर को BJP करेगी चुनावी शंखनाद राष्ट्रीय फलक पर बात करें तो बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खात्मा करने के बाद अब उनका मिशन देश में नशे की समस्या को खत्म करना है और भाजपा द्वारा पंजाब में अपने चुनावी शंखनाद के लिए 18 सितंबर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता के लिए यात्राओं व रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की जा चुकी है। सचिन पायलट ने भी खोला मोर्चा वहीं, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट अपना पहला पंजाब दौरा 15 सितंबर को शुरू करने जा रहे हैं और दौरे के पहले ही दिन नशे के मामले में आत्महत्या करने वाले तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह को मुद्दा बनाकर न सिर्फ रोष मार्च व प्रदर्शन का एलान किया है, बल्कि कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का भी प्रोग्राम दिया गया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने पहले ही दिन से सभी नेताओं को एक मंच पर दिखाकर कांग्रेस की एकजुटता का भी प्रदर्शन कराएंगे। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी खुद व अपने सभी समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करके एकजुटता का संकेत दे दिया है।

हिमाचल सरकार पर सिकंदर कुमार का बड़ा हमला, बोले- केंद्र की मदद बंद होते ही ठप हो जाएगा काम

लाहौल-स्पीति   हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहायता को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने राज्य सरकार पर पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया है कि पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने हिमाचल में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार लगातार आरोप लगा रही है कि केंद्र से उसे पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है और इसे उठाए लगभग एक साल हो गया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अगर केंद्र सरकार अपना समर्थन बंद कर दे, तो राज्य सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। ये बताइए, किस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य का साथ नहीं दिया? हर मामले में, जिसमें हमारे राज्य को प्रभावित करने वाली आपदा भी शामिल है, केंद्र ने मदद की है।" सांसद ने कहा कि पिछले 10 सालों में हुए विकास कार्यों को अगर देखा जाए तो केंद्र ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा, "पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। पिछले 10 सालों में केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में हालात और विकास की दिशा, दोनों को बदल दिया है।" केंद्र के सहयोग को गिनाते हुए सिकंदर कुमार ने कहा कि सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा, हर सेक्टर में बीते 10 सालों में अभूतपूर्व काम हुए हैं। उन्होंने कहा, "रोड इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, आप हेल्थ देखो, आप एजुकेशन देखो, हर एक सेक्टर में ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय कार्य 10 वर्षों में हुए हैं। हमें तो केंद्र सरकार का आभारी होना चाहिए।" कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि जब प्रदेश में 35 वर्ष कांग्रेस ने राज किया और केंद्र में 55 से 60 वर्ष इन्होंने राज किया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, यह मुझे एक हजार रुपये का कोई प्रोजेक्ट बता दें जो केंद्र की तत्कालीन सरकार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दिया हो।" सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि आपदा के समय भी केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल का साथ दिया है, चाहे वह आर्थिक पैकेज हो या राहत सामग्री। राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग के लिए आभार जताना चाहिए।

मैहर के पोड़ी केंद्र में किसानों की भीड़, 53 लाख से ज्यादा मछली के बीज बिके; 2027 तक 2.50 करोड़ का लक्ष्य

मैहर  एशिया के सबसे बड़े मैहर जिले में स्थित पोड़ी मत्स्य बीज सेंटर में इस वर्ष अच्छे परिणाम सामने हैं. कलेक्टर मैहर विदिशा मुखर्जी के निर्देशन में जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी में मछली बीज उत्पादन एवं वितरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है. जिसका असर इस बार देखने को मिला है और 53 लाख से अधिक मछली के बीज की बिक्री की गई है।  पोड़ी में अलग अलग प्रकार के मिलते हैं मत्स्य बीज मैहर जिले के पोड़ी केंद्र पर इस वर्ष मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज (मिक्स फ्राई) का उत्पादन कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इन क्षेत्रों पर इस तरह के बीजों की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है. जिसके फल स्वरूप आस पास के लोगों द्वारा इस प्रजाति की खेती ज्यादा की जाती है मैहर से लगे हुए कई जिलों में इसकी खेती चल रही है इसके साथ साथ उत्पादन भी चल रहा है।  2.50 करोड़ का लक्ष्य पोड़ी में स्थित शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र में वर्ष 2026-27 के लिए 2.50 करोड़ मत्स्य बीज की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मत्स्य बीज की बिक्री अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ की गई है. अब तक लगभग 53 लाख 28 हजार मत्स्य बीज की बिक्री की जा चुकी है. विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने की संभावना है. वर्ष 2025-26 में केंद्र को 2.25 करोड़ मत्स्य बीज बिक्री का लक्ष्य निर्धारित गया था।  सहायक संचालक मत्स्य तरुण कांत पटेल एवं सहायक मत्स्य अधिकारी स्वरांजन सिंह बघेल ने बताया कि, ''केंद्र पर तैयार किए जा रहे मिक्स फ्राई में मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज शामिल हैं. इन बीजों को निर्धारित शासकीय दर पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है. किसान इन मछली बीजों को खरीदकर अपने तालाबों एवं पोखरों में संचय करते हैं।  अलग-अलग जिले से कृषक पहुंच रहे मैहर शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी की मछली बीज की मांग जिले के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सागर, दमोह, पन्ना, रीवा, मऊगंज एवं जबलपुर तक है. यहां से मत्स्य पालक एवं खरीदार मछली बीज क्रय करने के लिए केंद्र पहुंच रहे हैं. जहां उन्हें बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. खरीदार द्वारा चालान के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है. बिक्री के समय मत्स्य बीज अंतरण प्रमाण-पत्र की पर्ची भी जारी की जाती है, जिसमें मछली बीज की प्रजाति, संख्या, निर्धारित दर एवं कुल राशि का विवरण दर्ज रहता है. इस व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य बीज के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है जिससे कि आसानी से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध हो। 

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच शक्ति प्रदर्शन, चन्नी ने किया शामिल होने का ऐलान; पायलट करेंगे नेतृत्व

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि वह मंगलवार को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है। कांग्रेस की ओर से आज मंगलवार सुबह 11 बजे सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय से आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च निकाला जाएगा। कांग्रेस गुलजार सिंह की मौत के मामले में चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से पंजाब में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सवाल किया था और इसके बाद उन्हें मानसिक दबाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। एक साथ दिखेंगे पंजाब कांग्रेस के नेता इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर लंबे समय बाद देखने को मिल सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आएंगे। इसके अलावा पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल होंगे। पायलट ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। पंजाब की राजनीति में इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एकजुटता और ताकत का बड़ा इम्तिहान पिछले लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के बीच गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहे हैं। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन यह संदेश देने का अवसर होगा कि पार्टी अब मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कांग्रेस की वास्तविक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का भी संकेत मिलने की उम्मीद है।  

यूपी के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ाई के साथ होगी बागवानी की पढ़ाई, 49 स्कूलों को ₹20 हजार की मदद

 बांदा  अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।     बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।     स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।     पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा। पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा बांदा     07     05 चित्रकूट     07     02 हमीरपुर     16     04 महोबा     06     02 कुल     36     13

महिलाओं के समर्थन में खुलकर बोलीं नायला ग्रेवाल, कहा- एक-दूसरे का साथ देना बेहद जरूरी

मुंबई   'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम कर चुकीं अभिनेत्री नायला ग्रेवाल ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती हैं, जो समाज से जुड़े जरूरी सवाल उठाएं। उनका मानना है कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सिनेमा में लगातार जगह मिलनी चाहिए। बातचीत में नायला ने कहा कि फिल्मों में जब महिलाओं की जिंदगी, उनकी परेशानियों और उनके अधिकारों से जुड़ी बातें सामने आती हैं, तो उन पर समाज में बातचीत भी शुरू होती है। आईएएनएस से बात करते हुए नायला ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े मुद्दे मेरे लिए काफी मायने रखते हैं। मैं इस विषय को लेकर खुद काफी जागरूक हूं और ऐसी फिल्म में काम करना चाहती हूं, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों को विस्तार से दिखाए। पिछले कुछ सालों में इस तरह की फिल्मों की संख्या में थोड़ी कमी आई है और अब पहले की तरह महिलाओं से जुड़े जरूरी विषयों पर पर्याप्त फिल्में देखने को नहीं मिल रही हैं।''  नायला ने इस दौरान 'थप्पड़' फिल्म की को-स्टार तापसी पन्नू की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम करने का मौका मिला। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी ने घरेलू हिंसा और एक थप्पड़ के जरिए रिश्ते में सम्मान और बराबरी जैसे मुद्दों को सामने रखा था। तापसी ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की है।'' अभिनेत्री ने तापसी की आने वाली फिल्म 'गांधारी' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''यह फिल्म बच्चों की तस्करी जैसे मुद्दे पर बात करती है और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की अहमियत बताती है। मैं खुद भी ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं, जो इस सोच को आगे बढ़ाएं और लोगों को इन मुद्दों के बारे में सोचने पर मजबूर करें।'' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए नायला ने महिलाओं की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ''महिलाओं को दूसरी महिलाओं का साथ देना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। अगर महिलाएं ही एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करेंगी, तो फिर इस बदलाव की शुरुआत कौन करेगा। मेरी नजर में यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की बात नहीं है बल्कि समाज में महिलाओं के लिए बेहतर माहौल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।'' अभिनेत्री ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों पर फिल्म बनाने से पहले सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के बारे में सोचना सही नहीं है। ऐसी कहानियों की अहमियत उनकी कमाई से कहीं ज्यादा होती है। यह सवाल नहीं होना चाहिए कि फिल्म में कौन सा बड़ा पुरुष स्टार है या फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमा पाएगी। अगर कहानी जरूरी है, तो उसे सामने आना चाहिए।''