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बड़ा गणपति फ्लाईओवर का काम फिर रफ्तार में, आधी बाधा हटी; दिसंबर तक पूरी लाइन शिफ्ट करने का लक्ष्य

इंदौर  लंबे समय से बाधाओं में उलझे बड़ा गणपति फ्लाईओवर के निर्माण की राह अगले वर्ष तक ही साफ हो पाएगी। चौराहे पर आ रही सीवरेज और पानी की लाइन को हटाने का काम जारी है। फ्लाईओवर में सबसे बड़ी अड़चन बन रही 500 मीटर लंबी सीवरेज लाइन शिफ्टिंग के लिए अब तक 250 मीटर की नई लाइन डाली जा चुकी है। शेष 250 मीटर लंबी लाइन डालने का काम दिसंबर तक पूरा होगा। ऐसे में नए साल से फ्लाईओवर का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा बड़ा गणपति चौराहा पर बनाए जा रहे फ्लाईओवर का निर्माण एक साल से अधिक की देरी के बावजूद शुरू नहीं हो पाया है। चौराहे पर आ रही लाइन को हटाने में देरी के कारण सिंहस्थ से पहले फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करना चुनौती होगा। सीवरेज लाइन हटने के बाद चौराहे पर ही 100 से 150 मीटर लंबी पानी की लाइन भी हटाई जाएगी। दोनों लाइनें हटने के बाद ही फ्लाईओवर के फाउंडेशन का काम शुरू किया जा सकेगा। बड़ा गणपति चौराहा पर 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा फ्लाईओवर बनाया जाना है। यह अंतिम चौराहे की तरफ से शुरू होकर जिंसी की ओर उतरेगा। इसकी लागत करीब 24 करोड़ रुपये है। हालांकि चौराहे पर आ रही ड्रेनेज और पानी की लाइन को हटाने में ही करीब 10 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। आइडीए यह राशि नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है। पिलर की डिजाइन में कर रहे बदलाव फ्लाईओवर की राह में सिर्फ यूटिलिटी लाइनें ही नहीं, बल्कि मेट्रो का राइट आफ वे भी नई चुनौती बन गया है। राइट आफ वे की चौड़ाई बढ़ने के कारण फ्लाईओवर के पिलर की डिजाइन नए सिरे से तैयार की जा रही है। रिवाइज डिजाइन इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। डिजाइन में बदलाव के कारण करीब 1.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसकी स्वीकृति आइडीए बोर्ड बैठक में दी जा चुकी है। करीब एक लाख वाहनों की राह होगी आसान आइडीए के सर्वे में बड़ा गणपति चौराहे पर पीक आवर्स में सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव सामने आया है। एयरपोर्ट रोड से आने वाले वाहनों का भी यहां भारी दबाव रहता है। फ्लाईओवर बनने के बाद एक लाख से अधिक वाहनों को रोजाना राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटकी परियोजना में अब पहले जमीन के नीचे की बाधाएं हटाई जा रही हैं, उसके बाद ही ऊपर फ्लाईओवर खड़ा करने का काम शुरू होगा।

पंजाब चुनाव से पहले ‘नशे’ पर सियासी घमासान, पार्टियों की रणनीति क्या? जानें पूरा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। 17 सितंबर को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में मात्र छह माह का समय रह जाएगा और सितंबर माह का यही वह पखवाड़ा है, जब न सिर्फ दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पार्टियां, बल्कि पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और रफ्तार देने की योजनाएं घोषित कर चुके हैं। सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी चुनावी मोड में शिफ्ट हो चुकी है और न सिर्फ पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियां की जा रही हैं, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के चेहरे मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा हलकों में कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं। 'नशा' रहेगा सभी चुनावी पार्टियों का मुद्दा चुनावी तैयारियों के दौरान ही करीब सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का केंद्र बिंदु नशे का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में आने के बाद से ही लगातार पंजाब में युद्ध नशे के विरुद्ध नाम से अभियान चला रही है और समय-समय पर इसके आंकड़े पेश करके अपने द्वारा किए जा रहे काम का क्रेडिट ले रही है। 18 सितंबर को BJP करेगी चुनावी शंखनाद राष्ट्रीय फलक पर बात करें तो बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खात्मा करने के बाद अब उनका मिशन देश में नशे की समस्या को खत्म करना है और भाजपा द्वारा पंजाब में अपने चुनावी शंखनाद के लिए 18 सितंबर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता के लिए यात्राओं व रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की जा चुकी है। सचिन पायलट ने भी खोला मोर्चा वहीं, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट अपना पहला पंजाब दौरा 15 सितंबर को शुरू करने जा रहे हैं और दौरे के पहले ही दिन नशे के मामले में आत्महत्या करने वाले तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह को मुद्दा बनाकर न सिर्फ रोष मार्च व प्रदर्शन का एलान किया है, बल्कि कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का भी प्रोग्राम दिया गया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने पहले ही दिन से सभी नेताओं को एक मंच पर दिखाकर कांग्रेस की एकजुटता का भी प्रदर्शन कराएंगे। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी खुद व अपने सभी समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करके एकजुटता का संकेत दे दिया है।

हिमाचल सरकार पर सिकंदर कुमार का बड़ा हमला, बोले- केंद्र की मदद बंद होते ही ठप हो जाएगा काम

लाहौल-स्पीति   हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच वित्तीय सहायता को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार ने राज्य सरकार पर पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया है कि पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने हिमाचल में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार लगातार आरोप लगा रही है कि केंद्र से उसे पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है और इसे उठाए लगभग एक साल हो गया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "अगर केंद्र सरकार अपना समर्थन बंद कर दे, तो राज्य सरकार एक दिन भी काम नहीं कर पाएगी। ये बताइए, किस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने राज्य का साथ नहीं दिया? हर मामले में, जिसमें हमारे राज्य को प्रभावित करने वाली आपदा भी शामिल है, केंद्र ने मदद की है।" सांसद ने कहा कि पिछले 10 सालों में हुए विकास कार्यों को अगर देखा जाए तो केंद्र ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा, "पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। पिछले 10 सालों में केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में हालात और विकास की दिशा, दोनों को बदल दिया है।" केंद्र के सहयोग को गिनाते हुए सिकंदर कुमार ने कहा कि सड़क, रेल, स्वास्थ्य और शिक्षा, हर सेक्टर में बीते 10 सालों में अभूतपूर्व काम हुए हैं। उन्होंने कहा, "रोड इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर देखो, आप हेल्थ देखो, आप एजुकेशन देखो, हर एक सेक्टर में ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय कार्य 10 वर्षों में हुए हैं। हमें तो केंद्र सरकार का आभारी होना चाहिए।" कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि जब प्रदेश में 35 वर्ष कांग्रेस ने राज किया और केंद्र में 55 से 60 वर्ष इन्होंने राज किया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, यह मुझे एक हजार रुपये का कोई प्रोजेक्ट बता दें जो केंद्र की तत्कालीन सरकार ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को दिया हो।" सांसद सिकंदर कुमार ने कहा कि आपदा के समय भी केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल का साथ दिया है, चाहे वह आर्थिक पैकेज हो या राहत सामग्री। राज्य सरकार को आरोप लगाने की बजाय केंद्र के सहयोग के लिए आभार जताना चाहिए।

मैहर के पोड़ी केंद्र में किसानों की भीड़, 53 लाख से ज्यादा मछली के बीज बिके; 2027 तक 2.50 करोड़ का लक्ष्य

मैहर  एशिया के सबसे बड़े मैहर जिले में स्थित पोड़ी मत्स्य बीज सेंटर में इस वर्ष अच्छे परिणाम सामने हैं. कलेक्टर मैहर विदिशा मुखर्जी के निर्देशन में जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी में मछली बीज उत्पादन एवं वितरण का कार्य निरंतर किया जा रहा है. जिसका असर इस बार देखने को मिला है और 53 लाख से अधिक मछली के बीज की बिक्री की गई है।  पोड़ी में अलग अलग प्रकार के मिलते हैं मत्स्य बीज मैहर जिले के पोड़ी केंद्र पर इस वर्ष मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज (मिक्स फ्राई) का उत्पादन कर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इन क्षेत्रों पर इस तरह के बीजों की बिक्री ज्यादा देखी जा रही है. जिसके फल स्वरूप आस पास के लोगों द्वारा इस प्रजाति की खेती ज्यादा की जाती है मैहर से लगे हुए कई जिलों में इसकी खेती चल रही है इसके साथ साथ उत्पादन भी चल रहा है।  2.50 करोड़ का लक्ष्य पोड़ी में स्थित शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र में वर्ष 2026-27 के लिए 2.50 करोड़ मत्स्य बीज की बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मत्स्य बीज की बिक्री अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ की गई है. अब तक लगभग 53 लाख 28 हजार मत्स्य बीज की बिक्री की जा चुकी है. विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किए जाने की संभावना है. वर्ष 2025-26 में केंद्र को 2.25 करोड़ मत्स्य बीज बिक्री का लक्ष्य निर्धारित गया था।  सहायक संचालक मत्स्य तरुण कांत पटेल एवं सहायक मत्स्य अधिकारी स्वरांजन सिंह बघेल ने बताया कि, ''केंद्र पर तैयार किए जा रहे मिक्स फ्राई में मुख्य रूप से कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति के मछली बीज शामिल हैं. इन बीजों को निर्धारित शासकीय दर पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया जाता है. किसान इन मछली बीजों को खरीदकर अपने तालाबों एवं पोखरों में संचय करते हैं।  अलग-अलग जिले से कृषक पहुंच रहे मैहर शासकीय मत्स्य उत्पादन केंद्र पोड़ी की मछली बीज की मांग जिले के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों सागर, दमोह, पन्ना, रीवा, मऊगंज एवं जबलपुर तक है. यहां से मत्स्य पालक एवं खरीदार मछली बीज क्रय करने के लिए केंद्र पहुंच रहे हैं. जहां उन्हें बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. खरीदार द्वारा चालान के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाता है. बिक्री के समय मत्स्य बीज अंतरण प्रमाण-पत्र की पर्ची भी जारी की जाती है, जिसमें मछली बीज की प्रजाति, संख्या, निर्धारित दर एवं कुल राशि का विवरण दर्ज रहता है. इस व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य बीज के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है जिससे कि आसानी से किसानों को मत्स्य बीज उपलब्ध हो। 

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच शक्ति प्रदर्शन, चन्नी ने किया शामिल होने का ऐलान; पायलट करेंगे नेतृत्व

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि वह मंगलवार को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है। कांग्रेस की ओर से आज मंगलवार सुबह 11 बजे सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय से आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च निकाला जाएगा। कांग्रेस गुलजार सिंह की मौत के मामले में चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से पंजाब में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सवाल किया था और इसके बाद उन्हें मानसिक दबाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। एक साथ दिखेंगे पंजाब कांग्रेस के नेता इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर लंबे समय बाद देखने को मिल सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आएंगे। इसके अलावा पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल होंगे। पायलट ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। पंजाब की राजनीति में इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एकजुटता और ताकत का बड़ा इम्तिहान पिछले लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के बीच गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहे हैं। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन यह संदेश देने का अवसर होगा कि पार्टी अब मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कांग्रेस की वास्तविक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का भी संकेत मिलने की उम्मीद है।  

यूपी के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ाई के साथ होगी बागवानी की पढ़ाई, 49 स्कूलों को ₹20 हजार की मदद

 बांदा  अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।     बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।     स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।     पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा। पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा बांदा     07     05 चित्रकूट     07     02 हमीरपुर     16     04 महोबा     06     02 कुल     36     13

महिलाओं के समर्थन में खुलकर बोलीं नायला ग्रेवाल, कहा- एक-दूसरे का साथ देना बेहद जरूरी

मुंबई   'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम कर चुकीं अभिनेत्री नायला ग्रेवाल ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती हैं, जो समाज से जुड़े जरूरी सवाल उठाएं। उनका मानना है कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सिनेमा में लगातार जगह मिलनी चाहिए। बातचीत में नायला ने कहा कि फिल्मों में जब महिलाओं की जिंदगी, उनकी परेशानियों और उनके अधिकारों से जुड़ी बातें सामने आती हैं, तो उन पर समाज में बातचीत भी शुरू होती है। आईएएनएस से बात करते हुए नायला ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े मुद्दे मेरे लिए काफी मायने रखते हैं। मैं इस विषय को लेकर खुद काफी जागरूक हूं और ऐसी फिल्म में काम करना चाहती हूं, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों को विस्तार से दिखाए। पिछले कुछ सालों में इस तरह की फिल्मों की संख्या में थोड़ी कमी आई है और अब पहले की तरह महिलाओं से जुड़े जरूरी विषयों पर पर्याप्त फिल्में देखने को नहीं मिल रही हैं।''  नायला ने इस दौरान 'थप्पड़' फिल्म की को-स्टार तापसी पन्नू की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम करने का मौका मिला। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी ने घरेलू हिंसा और एक थप्पड़ के जरिए रिश्ते में सम्मान और बराबरी जैसे मुद्दों को सामने रखा था। तापसी ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की है।'' अभिनेत्री ने तापसी की आने वाली फिल्म 'गांधारी' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''यह फिल्म बच्चों की तस्करी जैसे मुद्दे पर बात करती है और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की अहमियत बताती है। मैं खुद भी ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं, जो इस सोच को आगे बढ़ाएं और लोगों को इन मुद्दों के बारे में सोचने पर मजबूर करें।'' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए नायला ने महिलाओं की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ''महिलाओं को दूसरी महिलाओं का साथ देना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। अगर महिलाएं ही एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करेंगी, तो फिर इस बदलाव की शुरुआत कौन करेगा। मेरी नजर में यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की बात नहीं है बल्कि समाज में महिलाओं के लिए बेहतर माहौल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।'' अभिनेत्री ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों पर फिल्म बनाने से पहले सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के बारे में सोचना सही नहीं है। ऐसी कहानियों की अहमियत उनकी कमाई से कहीं ज्यादा होती है। यह सवाल नहीं होना चाहिए कि फिल्म में कौन सा बड़ा पुरुष स्टार है या फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमा पाएगी। अगर कहानी जरूरी है, तो उसे सामने आना चाहिए।''

त्योहारी सीजन में यात्रियों को बड़ी राहत, भोपाल होकर गुजरेंगी स्पेशल ट्रेनें; IRCTC की एडवाइजरी जारी

भोपाल  आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल से तीन राज्यों के बीच दो जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला हुआ है। भारतीय रेलवे के इस कदम से त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म सीट प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।   ट्रेनों के मार्ग और फेरों का विवरण रेलवे द्वारा घोषित विशेष ट्रेनों में पहली ट्रेन पुणे और गोरखपुर के बीच संचालित होगी। यह ट्रेन अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक दोनों दिशाओं में कुल 44 फेरे लगाएगी। वहीं दूसरी विशेष ट्रेन मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच चलाई जाएगी, जो अक्तूबर से नवंबर के दौरान कुल 43 फेरे पूरे करेगी। ये दोनों ट्रेनें अपने मार्ग में इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी स्टेशन से अपना रिजर्वेशन करवा सकते हैं।   टिकट बुकिंग और सीटों की स्थिति त्योहारों के समय यात्रा के लिए एडवांस टिकट बुकिंग की व्यवस्था यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू होती है। सुबह 8 बजे जैसे ही टिकट बुकिंग विंडो खुलती है, एक मिनट के अंदर ही सीटें वेटिंग में पहुंच जाती हैं। यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही दो जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार रेलवे प्रशासन त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। आईआरसीटीसी की सलाह यात्रियों को फर्जी एजेंटों से बचाने के लिए रेलवे ने सलाह दी है कि टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' एप से ही बुक करें। किसी भी अनधिकृत दलाल या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं, क्योंकि उनसे लिया गया टिकट अवैध माना जा सकता है। बुकिंग के समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज करें ताकि ट्रेन के समय और प्लेटफॉर्म की सटीक जानकारी एसएमएस पर मिलती रहे।   वेबसाइट पर अकाउंट रजिस्टर करके यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद यात्रियों का नाम, उम्र तथा सीट की प्राथमिकता दर्ज करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करें। भुगतान पूरा होने के बाद ई-टिकट ईमेल और एसएमएस पर प्राप्त हो जाएगा।  

UN में भारत की बढ़ेगी ताकत! वीटो पावर को लेकर रूस-चीन के बाद महासचिव का बड़ा बयान

नईदिल्ली  दुनिया की राजनीति में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है और अब इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े मंच पर भी सुनाई दे रही है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है. तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है. ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए. सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है. यानी जिस स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार की मांग भारत लंबे समय से करता रहा है, उसे अब एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है. मामला यहीं खत्म नहीं होता. ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है. दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है. ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है।  वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बनने की बात कही थी. गुटेरेस ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा ताकत मिलेगी या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के साथ वीटो का अधिकार भी मिलेगा? संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत की मांग को बताया अहम, दुनिया बदलने की दी दलील एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुरक्षा परिषद के विस्तार को समय की जरूरत बताया. उनका कहना था कि मौजूदा संस्थागत ढांचा उस दुनिया को नहीं दर्शाता जिसमें हम आज रह रहे हैं. 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब वैश्विक शक्ति संतुलन अलग था. आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है. गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।  रूस-चीन ने भी भारत के लिए खोला बड़ा रास्ता ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया. घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है. इसमें सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने की बात कही गई. साथ ही विकासशील देशों की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. चीन और रूस ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मामलों में ज्यादा बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए. खासकर सुरक्षा परिषद में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है. भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन खुद सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है।  भारत को अभी वीटो नहीं मिला, लेकिन रास्ता जरूर मजबूत हुआ यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. गुटेरेस ने यह ऐलान नहीं किया है कि भारत को तत्काल वीटो अधिकार मिलने जा रहा है. सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग का समर्थन जरूर किया गया है. मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका. इन पांचों के पास वीटो अधिकार है. यह व्यवस्था 1945 में सुरक्षा परिषद की स्थापना के समय से चली आ रही है. भारत अगर भविष्य में स्थायी सदस्य बनता है तो वीटो का सवाल अलग से तय होगा. फिलहाल बड़ा घटनाक्रम यह है कि भारत की दावेदारी को वैश्विक दक्षिण, ब्रिक्स और अब संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की तरफ से भी मजबूत समर्थन मिलता दिख रहा है।  PM मोदी ने कहा- वैश्विक दक्षिण सिर्फ नियम मानने वाला नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि विकासशील देशों को सिर्फ बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं रहना चाहिए. उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. गुटेरेस के बयान को इसी दिशा में देखा जा रहा है. उनका कहना था कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में वैश्विक संस्थाओं में भी संतुलन और समानता दिखाई देनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में सुधार इसी बड़े बदलाव का हिस्सा हो सकता है।  गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर गाजा तक दुनिया के सामने रखी चुनौती     संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सिर्फ सुरक्षा परिषद सुधार की बात नहीं की. उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है. लेकिन इसका फायदा फिलहाल कुछ कंपनियों और कुछ देशों तक ज्यादा सीमित है. अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की खाई आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता की खाई को और बढ़ा सकती है. उन्होंने विकासशील देशों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने की भी बात की।      गुटेरेस ने जलवायु न्याय का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने विकसित देशों से अपने वादे पूरे करने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने गाजा, मध्य पूर्व, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति की जरूरत बताई. उनका कहना था कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।  क्या भारत को मिलेगा वीटो? अब पूरी दुनिया की नजर इस सवाल पर भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है. अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है. ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी … Read more

हॉर्मुज संकट में भारत ने बदली रणनीति, सोलर के साथ गैस से बिजली उत्पादन में 80% उछाल

नई दिल्ली एक तरफ यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हॉर्मुज पर फिर तनाव बढ़ गया है. ऐसे में दुनियाभर को फिर गैस और बिजली की टेंशन सताने लगी है. लेकिन इसी बीच भारत ने अब बिजली के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है, जिससे बिजली का प्रोडक्शन बढ़ा है. देशभर में सितंबर की शुरुआत से बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. खासकर शाम के समय जब लोग काम से घर लौटते हैं, तब बिजली की खपत अचानक से बढ़ जाती है. इसी समय सोलर पावर का प्रोडक्शन भी कम हो जाता है, जिससे बिजली की कमी और बढ़ जाती है. इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनियां अब गैस से चलने वाले पावर प्लांट्स का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. 1 से 9 सितंबर के बीच गैस आधारित बिजलीघरों ने 1,088.64 मिलियन यूनिट बिजली बनाई. पिछले साल इसी अवधि में प्रोडक्शन 603.70 मिलियन यूनिट था. यानी एक साल में गैस से बिजली प्रोडक्शन करीब 80 फीसदी बढ़ गया है।  बिजली की जरूरत ने बढ़ाई चिंता सितंबर में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस बनी हुई है. ऐसे में घरों और कारोबारों में बिजली की खपत बढ़ी है. 9 सितंबर को देश में बिजली की अधिकतम मांग 267 गीगावॉट तक पहुंच गई. इस दौरान रात में करीब 7.7 गीगावॉट बिजली की कमी दर्ज हुई. अगले दिन यानी 10 सितंबर को मांग और बढ़कर 269 गीगावॉट हो गई. हालांकि, उस दिन बिजली की कमी घटकर करीब 6.1 गीगावॉट रह गई. शाम के समय यह समस्या इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि सूरज ढलने के साथ सोलर पावर का प्रोडक्शन तेजी से कम हो जाता है. दूसरी तरफ घरों में पंखे, एसी, लाइट और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।  गैस प्लांट से कैसे मिल रही मदद? गैस से चलने वाले बिजलीघरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जरूरत के हिसाब से जल्दी चालू किया जा सकता है और इनका प्रोडक्शन भी तेजी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है. यही वजह है कि बिजली की अचानक बढ़ी मांग के समय ये प्लांट काफी काम आते हैं. देश में गैस आधारित बिजली प्रोडक्शन की कुल कैपेसिटी करीब 20.1 गीगावॉट है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल शाम के समय बिजली की कमी को संभालने के लिए करीब 4.5 से 5.5 गीगावॉट गैस आधारित बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है।  कोयला और हाइड्रो से नहीं मिल रही पूरी मदद बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच कोयला आधारित पावर प्लांट भी लगभग अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं. ऐसे में उनसे अचानक और ज्यादा बिजली पैदा करवाना आसान नहीं है. वहीं, बारिश की कमी का असर हाइड्रो पावर यानी पानी से बनने वाली बिजली पर भी पड़ा है. दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाकों में जलाशयों का जलस्तर कम है. इससे आने वाले दिनों में हाइड्रो पावर का प्रोडक्शन और घटने की आशंका है. ऐसे में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने के लिए गैस पावर की भूमिका और अहम हो गई है।  महंगी गैस के बावजूद बढ़ी खरीद बिजली बनाने वाली कंपनियों ने गैस की खरीद भी बढ़ा दी है. 1 से 10 सितंबर के बीच पावर सेक्टर की ओर से स्पॉट मार्केट में 30,53,300 MMBtu से ज्यादा नेचुरल गैस खरीदी गई. पिछले साल इसी अवधि में खरीद करीब 3,75,000 MMBtu थी. हालांकि, इस दौरान गैस की कीमत भी काफी बढ़ी. औसत स्पॉट गैस कीमत पिछले साल के 1,013 रुपये प्रति MMBtu से बढ़कर 2,420 रुपये प्रति MMBtu हो गई. यानी कीमत में करीब 139 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके बावजूद बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए गैस प्लांट्स का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।