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पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच शक्ति प्रदर्शन, चन्नी ने किया शामिल होने का ऐलान; पायलट करेंगे नेतृत्व

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि वह मंगलवार को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है। कांग्रेस की ओर से आज मंगलवार सुबह 11 बजे सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय से आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च निकाला जाएगा। कांग्रेस गुलजार सिंह की मौत के मामले में चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से पंजाब में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सवाल किया था और इसके बाद उन्हें मानसिक दबाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। एक साथ दिखेंगे पंजाब कांग्रेस के नेता इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर लंबे समय बाद देखने को मिल सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आएंगे। इसके अलावा पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल होंगे। पायलट ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। पंजाब की राजनीति में इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एकजुटता और ताकत का बड़ा इम्तिहान पिछले लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के बीच गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहे हैं। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन यह संदेश देने का अवसर होगा कि पार्टी अब मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कांग्रेस की वास्तविक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का भी संकेत मिलने की उम्मीद है।  

यूपी के पीएमश्री विद्यालयों में पढ़ाई के साथ होगी बागवानी की पढ़ाई, 49 स्कूलों को ₹20 हजार की मदद

 बांदा  अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी। मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे। बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।     बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।     स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।     पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा। पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा बांदा     07     05 चित्रकूट     07     02 हमीरपुर     16     04 महोबा     06     02 कुल     36     13

महिलाओं के समर्थन में खुलकर बोलीं नायला ग्रेवाल, कहा- एक-दूसरे का साथ देना बेहद जरूरी

मुंबई   'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम कर चुकीं अभिनेत्री नायला ग्रेवाल ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती हैं, जो समाज से जुड़े जरूरी सवाल उठाएं। उनका मानना है कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सिनेमा में लगातार जगह मिलनी चाहिए। बातचीत में नायला ने कहा कि फिल्मों में जब महिलाओं की जिंदगी, उनकी परेशानियों और उनके अधिकारों से जुड़ी बातें सामने आती हैं, तो उन पर समाज में बातचीत भी शुरू होती है। आईएएनएस से बात करते हुए नायला ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े मुद्दे मेरे लिए काफी मायने रखते हैं। मैं इस विषय को लेकर खुद काफी जागरूक हूं और ऐसी फिल्म में काम करना चाहती हूं, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों को विस्तार से दिखाए। पिछले कुछ सालों में इस तरह की फिल्मों की संख्या में थोड़ी कमी आई है और अब पहले की तरह महिलाओं से जुड़े जरूरी विषयों पर पर्याप्त फिल्में देखने को नहीं मिल रही हैं।''  नायला ने इस दौरान 'थप्पड़' फिल्म की को-स्टार तापसी पन्नू की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, ''मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 'थप्पड़' जैसी फिल्म में काम करने का मौका मिला। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी ने घरेलू हिंसा और एक थप्पड़ के जरिए रिश्ते में सम्मान और बराबरी जैसे मुद्दों को सामने रखा था। तापसी ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की है।'' अभिनेत्री ने तापसी की आने वाली फिल्म 'गांधारी' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''यह फिल्म बच्चों की तस्करी जैसे मुद्दे पर बात करती है और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की अहमियत बताती है। मैं खुद भी ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं, जो इस सोच को आगे बढ़ाएं और लोगों को इन मुद्दों के बारे में सोचने पर मजबूर करें।'' इसी बात को आगे बढ़ाते हुए नायला ने महिलाओं की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ''महिलाओं को दूसरी महिलाओं का साथ देना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। अगर महिलाएं ही एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करेंगी, तो फिर इस बदलाव की शुरुआत कौन करेगा। मेरी नजर में यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की बात नहीं है बल्कि समाज में महिलाओं के लिए बेहतर माहौल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।'' अभिनेत्री ने कहा, ''महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों पर फिल्म बनाने से पहले सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के बारे में सोचना सही नहीं है। ऐसी कहानियों की अहमियत उनकी कमाई से कहीं ज्यादा होती है। यह सवाल नहीं होना चाहिए कि फिल्म में कौन सा बड़ा पुरुष स्टार है या फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमा पाएगी। अगर कहानी जरूरी है, तो उसे सामने आना चाहिए।''

त्योहारी सीजन में यात्रियों को बड़ी राहत, भोपाल होकर गुजरेंगी स्पेशल ट्रेनें; IRCTC की एडवाइजरी जारी

भोपाल  आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान रेल यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल से तीन राज्यों के बीच दो जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाने का फैसला हुआ है। भारतीय रेलवे के इस कदम से त्योहारों के मौसम में घर जाने वाले लोगों को कन्फर्म सीट प्राप्त करने में काफी सुविधा मिलेगी। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आईआरसीटीसी ने यात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी भी जारी की है।   ट्रेनों के मार्ग और फेरों का विवरण रेलवे द्वारा घोषित विशेष ट्रेनों में पहली ट्रेन पुणे और गोरखपुर के बीच संचालित होगी। यह ट्रेन अक्तूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर नवंबर तक दोनों दिशाओं में कुल 44 फेरे लगाएगी। वहीं दूसरी विशेष ट्रेन मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच चलाई जाएगी, जो अक्तूबर से नवंबर के दौरान कुल 43 फेरे पूरे करेगी। ये दोनों ट्रेनें अपने मार्ग में इटारसी, भोपाल, बीना, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी स्टेशन से अपना रिजर्वेशन करवा सकते हैं।   टिकट बुकिंग और सीटों की स्थिति त्योहारों के समय यात्रा के लिए एडवांस टिकट बुकिंग की व्यवस्था यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले शुरू होती है। सुबह 8 बजे जैसे ही टिकट बुकिंग विंडो खुलती है, एक मिनट के अंदर ही सीटें वेटिंग में पहुंच जाती हैं। यात्रियों को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही दो जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार रेलवे प्रशासन त्योहारों के दौरान यात्रियों को सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। आईआरसीटीसी की सलाह यात्रियों को फर्जी एजेंटों से बचाने के लिए रेलवे ने सलाह दी है कि टिकट केवल आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या 'आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट' एप से ही बुक करें। किसी भी अनधिकृत दलाल या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं, क्योंकि उनसे लिया गया टिकट अवैध माना जा सकता है। बुकिंग के समय केवल अपना चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज करें ताकि ट्रेन के समय और प्लेटफॉर्म की सटीक जानकारी एसएमएस पर मिलती रहे।   वेबसाइट पर अकाउंट रजिस्टर करके यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। इसके बाद यात्रियों का नाम, उम्र तथा सीट की प्राथमिकता दर्ज करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करें। भुगतान पूरा होने के बाद ई-टिकट ईमेल और एसएमएस पर प्राप्त हो जाएगा।  

UN में भारत की बढ़ेगी ताकत! वीटो पावर को लेकर रूस-चीन के बाद महासचिव का बड़ा बयान

नईदिल्ली  दुनिया की राजनीति में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है और अब इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े मंच पर भी सुनाई दे रही है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है. तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है. ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए. सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है. यानी जिस स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार की मांग भारत लंबे समय से करता रहा है, उसे अब एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला है. मामला यहीं खत्म नहीं होता. ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है. दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है. ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है।  वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला बनने की बात कही थी. गुटेरेस ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र में ज्यादा ताकत मिलेगी या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के साथ वीटो का अधिकार भी मिलेगा? संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भारत की मांग को बताया अहम, दुनिया बदलने की दी दलील एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सुरक्षा परिषद के विस्तार को समय की जरूरत बताया. उनका कहना था कि मौजूदा संस्थागत ढांचा उस दुनिया को नहीं दर्शाता जिसमें हम आज रह रहे हैं. 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब वैश्विक शक्ति संतुलन अलग था. आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है. गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए. उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।  रूस-चीन ने भी भारत के लिए खोला बड़ा रास्ता ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया. घोषणा-पत्र में संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जरूरत बताई गई है. इसमें सुरक्षा परिषद को ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने की बात कही गई. साथ ही विकासशील देशों की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. चीन और रूस ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों को अंतरराष्ट्रीय मामलों में ज्यादा बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए. खासकर सुरक्षा परिषद में उनकी भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है. भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन खुद सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है।  भारत को अभी वीटो नहीं मिला, लेकिन रास्ता जरूर मजबूत हुआ यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. गुटेरेस ने यह ऐलान नहीं किया है कि भारत को तत्काल वीटो अधिकार मिलने जा रहा है. सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग का समर्थन जरूर किया गया है. मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका. इन पांचों के पास वीटो अधिकार है. यह व्यवस्था 1945 में सुरक्षा परिषद की स्थापना के समय से चली आ रही है. भारत अगर भविष्य में स्थायी सदस्य बनता है तो वीटो का सवाल अलग से तय होगा. फिलहाल बड़ा घटनाक्रम यह है कि भारत की दावेदारी को वैश्विक दक्षिण, ब्रिक्स और अब संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की तरफ से भी मजबूत समर्थन मिलता दिख रहा है।  PM मोदी ने कहा- वैश्विक दक्षिण सिर्फ नियम मानने वाला नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि विकासशील देशों को सिर्फ बनाए गए नियमों का पालन करने वाला नहीं रहना चाहिए. उन्हें नियम बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. गुटेरेस के बयान को इसी दिशा में देखा जा रहा है. उनका कहना था कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में वैश्विक संस्थाओं में भी संतुलन और समानता दिखाई देनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में सुधार इसी बड़े बदलाव का हिस्सा हो सकता है।  गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर गाजा तक दुनिया के सामने रखी चुनौती     संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सिर्फ सुरक्षा परिषद सुधार की बात नहीं की. उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले वर्षों में विकास की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकती है. लेकिन इसका फायदा फिलहाल कुछ कंपनियों और कुछ देशों तक ज्यादा सीमित है. अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की खाई आय, अवसर, सुरक्षा और संप्रभुता की खाई को और बढ़ा सकती है. उन्होंने विकासशील देशों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने की भी बात की।      गुटेरेस ने जलवायु न्याय का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने विकसित देशों से अपने वादे पूरे करने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने गाजा, मध्य पूर्व, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति की जरूरत बताई. उनका कहना था कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।  क्या भारत को मिलेगा वीटो? अब पूरी दुनिया की नजर इस सवाल पर भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है. अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है. ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी … Read more

हॉर्मुज संकट में भारत ने बदली रणनीति, सोलर के साथ गैस से बिजली उत्पादन में 80% उछाल

नई दिल्ली एक तरफ यूएस और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से हॉर्मुज पर फिर तनाव बढ़ गया है. ऐसे में दुनियाभर को फिर गैस और बिजली की टेंशन सताने लगी है. लेकिन इसी बीच भारत ने अब बिजली के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है, जिससे बिजली का प्रोडक्शन बढ़ा है. देशभर में सितंबर की शुरुआत से बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है. खासकर शाम के समय जब लोग काम से घर लौटते हैं, तब बिजली की खपत अचानक से बढ़ जाती है. इसी समय सोलर पावर का प्रोडक्शन भी कम हो जाता है, जिससे बिजली की कमी और बढ़ जाती है. इस स्थिति से निपटने के लिए बिजली कंपनियां अब गैस से चलने वाले पावर प्लांट्स का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. 1 से 9 सितंबर के बीच गैस आधारित बिजलीघरों ने 1,088.64 मिलियन यूनिट बिजली बनाई. पिछले साल इसी अवधि में प्रोडक्शन 603.70 मिलियन यूनिट था. यानी एक साल में गैस से बिजली प्रोडक्शन करीब 80 फीसदी बढ़ गया है।  बिजली की जरूरत ने बढ़ाई चिंता सितंबर में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस बनी हुई है. ऐसे में घरों और कारोबारों में बिजली की खपत बढ़ी है. 9 सितंबर को देश में बिजली की अधिकतम मांग 267 गीगावॉट तक पहुंच गई. इस दौरान रात में करीब 7.7 गीगावॉट बिजली की कमी दर्ज हुई. अगले दिन यानी 10 सितंबर को मांग और बढ़कर 269 गीगावॉट हो गई. हालांकि, उस दिन बिजली की कमी घटकर करीब 6.1 गीगावॉट रह गई. शाम के समय यह समस्या इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि सूरज ढलने के साथ सोलर पावर का प्रोडक्शन तेजी से कम हो जाता है. दूसरी तरफ घरों में पंखे, एसी, लाइट और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है।  गैस प्लांट से कैसे मिल रही मदद? गैस से चलने वाले बिजलीघरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जरूरत के हिसाब से जल्दी चालू किया जा सकता है और इनका प्रोडक्शन भी तेजी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है. यही वजह है कि बिजली की अचानक बढ़ी मांग के समय ये प्लांट काफी काम आते हैं. देश में गैस आधारित बिजली प्रोडक्शन की कुल कैपेसिटी करीब 20.1 गीगावॉट है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल शाम के समय बिजली की कमी को संभालने के लिए करीब 4.5 से 5.5 गीगावॉट गैस आधारित बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है।  कोयला और हाइड्रो से नहीं मिल रही पूरी मदद बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच कोयला आधारित पावर प्लांट भी लगभग अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं. ऐसे में उनसे अचानक और ज्यादा बिजली पैदा करवाना आसान नहीं है. वहीं, बारिश की कमी का असर हाइड्रो पावर यानी पानी से बनने वाली बिजली पर भी पड़ा है. दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाकों में जलाशयों का जलस्तर कम है. इससे आने वाले दिनों में हाइड्रो पावर का प्रोडक्शन और घटने की आशंका है. ऐसे में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने के लिए गैस पावर की भूमिका और अहम हो गई है।  महंगी गैस के बावजूद बढ़ी खरीद बिजली बनाने वाली कंपनियों ने गैस की खरीद भी बढ़ा दी है. 1 से 10 सितंबर के बीच पावर सेक्टर की ओर से स्पॉट मार्केट में 30,53,300 MMBtu से ज्यादा नेचुरल गैस खरीदी गई. पिछले साल इसी अवधि में खरीद करीब 3,75,000 MMBtu थी. हालांकि, इस दौरान गैस की कीमत भी काफी बढ़ी. औसत स्पॉट गैस कीमत पिछले साल के 1,013 रुपये प्रति MMBtu से बढ़कर 2,420 रुपये प्रति MMBtu हो गई. यानी कीमत में करीब 139 फीसदी का इजाफा हुआ. इसके बावजूद बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए गैस प्लांट्स का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। 

मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर स्थानीय निकाय देगा मकान की मंजूरी, T&CP से मिली राहत

भोपाल / इंदौर  मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाने की अनुमति अब स्थानीय निकाय के स्तर पर ही मिल सकेगी। इसके लिए T&CP से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। स्वीकृत लैंड यूज वाले प्लॉट का नक्शा नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद 30 दिन में मंजूर कर सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगते थे।  500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर प्रक्रिया होगी सरल महापौर भार्गव ने कहा कि संशोधन से 500 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अधिक सरल और सुगम होगी। इससे आम नागरिकों को निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है। विकास की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव से नागरिकों को सुविधा मिलेगी और शहरों में विकास की गति भी बढ़ेगी। साथ ही बेहतर शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस निर्णय को जनसुविधा और सुगम विकास की दिशा में स्वागतयोग्य पहल बताया। मुख्यमंत्री और मंत्री का जताया आभार पुष्यमित्र भार्गव ने इस संशोधन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिए गए ऐसे फैसले नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। डिजिटल दस्तावेज ही होंगे मान्य मध्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में अब घर या अन्य भवन बनाने की अनुमति लेना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने बिल्डिंग परमिशन के लिए कई विभागों से अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। अब हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग समेत कई मामलों में आवेदकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए यह बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों के साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। कई विभागों की NOC से मिली राहत नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग एवं गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल और बिजली विभाग से मांगी जाने वाली कई प्रकार की NOC की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदकों को स्वयं NOC लाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजेगा। विभाग को 21 दिन के भीतर अपनी अनापत्ति या आपत्ति देनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन मामलों में अब भी NOC जरूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में जरूरी होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य मामलों में इनकी जरूरत नहीं होगी। पर्यावरण और फायर नियमों में भी स्पष्टता निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में लेनी होगी, जहां वास्तव में पेड़ काटे जाने हों। अग्निशमन (फायर) अनापत्ति के नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू रहेंगे। नियमों में 5 बड़े बदलाव     दायरा: छूट 500 वर्गमीटर (5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर ही लागू होगी।     T&CP की अनुमति खत्म: भवन निर्माण के लिए T&CP से अलग ‘डेवलपमेंट परमिशन’ लेने की जरूरत नहीं होगी।     मंजूरी का अधिकार: नक्शा पास करने और निर्माण की अनुमति देने का अधिकार स्थानीय निकाय-नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास होगा।     अनिवार्य शर्त: प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान (मास्टर प्लान) के मुताबिक होना जरूरी है।     प्रक्रिया: सरकार ने 28 अगस्त को संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर 5 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है। इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमतियों की प्रक्रिया फिर शुरू होने की उम्मीद मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव की पृष्ठभूमि इंदौर की भवन अनुमति से जुड़ी समस्या रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था। बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा समेत एक दर्जन से अधिक इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे। यहां पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन अनुमति दी जाती थी, लेकिन जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लग गई। इसके बाद इन इलाकों में मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई। नए नियम से इंदौर समेत प्रदेश के ऐसे भूखंड मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

लद्दाख बॉर्डर पर चीन को झटका! LAC पर कम हुई PLA की तैनाती, भारत की पकड़ हुई मजबूत

 नई दिल्ली भारत-चीन सीमा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में उत्तरी सीमाओं पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में बड़ी कमी देखी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के सामने अपनी तैनाती घटाई है और अब उत्तरी सीमाओं और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में करीब 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के बराबर बल तैनात हैं।  रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तरफ से सभी LAC सेक्टर में सेना की तैनाती मजबूत बनी हुई है. भारतीय सेना किसी भी उभरती चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सही स्थिति में है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-चीन के बीच सकारात्मक राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर हालात में ज्यादा स्थिरता आई है।  चीन के साथ फिर शुरू हुआ सैन्य संवाद रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत भी फिर शुरू हुई है. इसमें अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक भी शामिल है. दोनों देशों के बीच सैन्य बातचीत के जरिए सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और तनाव कम करने की कोशिश जारी है।  इसके अलावा PLA के साथ बॉर्डर पर्सनल मीटिंग यानी BPM भी सभी सेक्टर में जारी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बैठकों का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा है और इनके जरिए दोनों पक्षों से जुड़े मुद्दों को उठाया और सुलझाया जा रहा है।  ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षमताओं की समीक्षा रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की मल्टी-डोमेन क्षमता, इंटेलिजेंस में बढ़त, तकनीकी ताकत और तीनों सेनाओं की संयुक्त ऑपरेशनल तैयारी को दिखाया।  ऑपरेशन के बाद सेना ने अपनी क्षमताओं और कमियों की समीक्षा भी की. इसके बाद फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग, तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा जॉइंटनेस और नई तकनीकों पर फोकस बढ़ाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय सेना अपनी तैयारी और क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है।  डिफेंस मिनस्ट्री की सालाना रिपोर्ट में क्या है, बड़ी बातें     भारत और चीन के बीच प्रगाढ़ हो रहे रिश्तों के बीच ही भारतीय रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट आई है।     वित्त वर्ष 2025-26 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सेनाओं की तैनाती में काफी कमी देखी गई।     इसमें LAC के साथ वाले इलाकों और पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में 10-10 'कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड' आकार की सेनाएं तैनात थीं।     इसका मतलब है कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली LAC पर लगभग 45,000-50,000 चीनी सैनिक थे, और इतनी ही संख्या पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में भी थी।     रिपोर्ट के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की 10 अतिरिक्त ब्रिगेड उसके पारंपरिक ट्रेनिंग इलाकों में तैनात हैं। 2020 में टकराव, तक लद्दाख सीमा पर तैनात थे 60000 चीन सैनिक: रिपोर्ट हालांकि MoD की यह रिपोर्ट इस महीने जारी की गई है, लेकिन इसे अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर मौजूदा तनाव के दौर से पहले तैयार किया गया था। उस तनाव के कारण अतिरिक्त सैनिकों को आगे के इलाकों में तैनात करना पड़ा था। 2020 के सीमा संकट के दौरान, लद्दाख सीमा पर लगभग 60,000 चीनी सैनिक तैनात थे। रिपोर्ट में भारतीय तैनाती का जिक्र नहीं है। अरुणाचल में टकराव के बाद कितने बदले हालात सालाना रिपोर्ट में अरुणाचल की स्थिति का खास तौर पर जिक्र नहीं है, लेकिन कहा गया है कि LAC के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत और अच्छी स्थिति में है, और वह किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने के बाद के महीनों में, अरुणाचल के कम से कम दो इलाकों में सीमा पर तनाव हुआ है, जिसके चलते आगे तैनात सैनिकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। लगातार जारी है बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स तनाव के बाद स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (विशेष प्रतिनिधि) स्तर की बातचीत हुई, और उसके बाद मतभेदों को सुलझाने के लिए इस महीने की शुरुआत में कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीनी स्तर पर, टकराव के मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी सेक्टरों में PLA के साथ सौहार्दपूर्ण और दोस्ताना माहौल में 'बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स' (सीमा कर्मियों की बैठकें) जारी हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर रिपोर्ट में क्या है? 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बनी रिपोर्ट में भारतीय सशस्त्र बलों के सफल हमलों का जिक्र है, जिन्होंने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट किया और वहां की सेना को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ऑपरेशन के दौरान ड्रोन और एंटी-ड्रोन उत्पाद उपलब्ध कराने में भारतीय उद्योग की क्षमता में कमी थी, जिसे अब तेजी से विकास करके दूर किया जा रहा है।

चंडीगढ़ में सोलर एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, 8000 घरों की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट, ₹78 हजार तक सब्सिडी

चंडीगढ़  शहर को वर्ष 2030 तक मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में प्रशासन ने निजी घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का अभियान तेज कर दिया है।चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने मार्च 2027 तक शहर के आठ हजार निजी घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभी तक प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 1433 निजी घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब दो हजार लोगों ने अपने स्तर पर संयंत्र स्थापित किए हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए क्रेस्ट की ओर से शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और सोलर प्लांट लगाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है। 12 सूचीबद्ध विक्रेता लोगों को संयंत्र की क्षमता और स्थापना संबंधी जानकारी दे रहे हैं। पंजाब एंड सिंध बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि ऋण संबंधी सवालों का जवाब दे रहे हैं। सरकारी भवनों पर पहले ही पूरा हुआ लक्ष्य चंडीगढ़ देश के उन शुरुआती शहरों में शामिल है, जहां सभी पात्र सरकारी भवनों और मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। शहर के 6366 सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं। करीब 1400 सरकारी मकानों में बिजली खपत नेट-जीरो स्तर तक पहुंच गई है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है और इनसे सालाना करीब 2.35 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक 148 लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य हो चुके हैं। योजना में तीन किलोवाट तक के घरेलू सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। पात्र लोगों को छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। 97 नगर निगम भवनों पर लगेगा सोलर प्लांट क्रेस्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से रेंट-ए-रूफ योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। वहीं नगर निगम के 97 भवनों, जिनमें सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं, पर सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेस्ट का समझौता हो चुका है। चंडीगढ़ फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-39 वाटरवर्क्स में उत्तर भारत का सबसे बड़ा 2.5 मेगावाट पीक क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले ही शुरू किया जा चुका है। अब तीन मेगावाट क्षमता का एक और फ्लोटिंग प्लांट तैयार है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। सूर्य घर योजना में क्या मिलेगा     तीन किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।     छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा।     क्रेस्ट की ओर से विक्रेता चयन और तकनीकी सहायता।     सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।     शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।     आवेदन के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।