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CM हेमंत ने 160 नवनियुक्त डॉक्टर्स को दिए नियुक्ति पत्र, कही खास बातें

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में 160 सहायक प्राध्यापकों, दंत चिकित्सकों एवं चिकित्सा पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर सोरेन ने कहा कि धरती पर 'भगवान' के रूप में आपकी नियुक्ति हो रही है। आपसे इस राज्य की गरीब, कमजोर और असहाय जनता को काफी आशा और उम्मीदें हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपनी सेवा भावना से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत और बेहतर करेंगे। सोरेन ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य संरचना मजबूत करने की दिशा में चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति एक बड़ा कदम है। आप अपने व्यवहार और प्रभाव से मरीजों को काफी हद तक बेहतर माहौल दे सकते हैं सोरेन ने नवनियुक्त चिकित्सा पदाधिकारियों से कहा कि आपने अपने करियर के रूप में स्वास्थ्य के क्षेत्र को चुना है। आपको बेहतर भविष्य बनाने के लिए आगे भी कई अवसर मिलेंगे। मेरा मानना है कि स्वास्थ्य एक ऐसा क्षेत्र है, जहां आपकी सेवाएं काफी मायने रखती है। आप जिस सोच के साथ इस क्षेत्र में आए हैं, वैसे में यहां की गरीब और असहाय जनता के प्रति आपकी संवेदनाएं होनी चाहिए। इतना ही नहीं, यथार्थ में संवेदनाएं दिखनी भी चाहिए, ताकि इसका लाभ यहां के लोगों को मिल सके। सोरेन ने कहा कि हमारे पास संसाधन सीमित है, लेकिन इन सीमित संसाधनों के बीच भी करने के लिए काफी कुछ है, बस इसके लिए उसे करने का जुनून होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को जितना इलाज की जरूरत है, उतना ही आपकी संवेदना और सेवा की भी। आप अपने व्यवहार और प्रभाव से मरीजों को काफी हद तक बेहतर माहौल दे सकते हैं। सोरेन ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नित्य नई चुनौतियां आ रही हैं। इसके लिए चिकित्सा के क्षेत्र बेहतर करने के लिए निरंतर अनुसंधान भी हो रहे हैं। इस दिशा में चिकित्सकों की काफी अहम भूमिका है। सरकार ने भी एक ऐसी व्यवस्था बनाई है, जिसमें आप सभी का सहयोग लेकर स्वास्थ्य संरचना को मजबूत करना है, ताकि लोगों को बेहतर इलाज के लिए संसाधन और सुविधाएं मिल सके। कोविड-19 ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था सोरेन ने कहा कि आज नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं। लोग अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। मेरा मानना है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी समस्याएं मनुष्य द्वारा ही पैदा की जा रही है। ऐसे में इसका समाधान भी हम सभी को मिलकर करना है। मुख्यमंत्री ने इस सिलसिले में कोविड-19 का जिक्र करते हुए कहा कि इस बीमारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। इस बीमारी की न कोई दवा थी और न ही कोई इलाज, लेकिन हमारी सरकार बेहतर प्रबंधन के जरिए इस चुनौती से निपटने में कामयाब रही। सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग से कहा कि वह स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य के अलग-अलग इलाकों में पदस्थापित चिकित्सकों के कार्यों और सेवाओं का आकलन कर बेहतर कार्य करने वालों को सम्मानित किए जाने की परंपरा शुरू करे। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अपना बेहतर देने के लिए प्रेरित होंगे। सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में 160 चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इनमें जेपीएससी द्वारा नियुक्त 54 सहायक प्राध्यापक, एनएचएम के द्वारा अनुबंध पर नियुक्त 55 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी, 38 चिकित्सा पदाधिकारी तथा 13 दंत चिकित्सक शामिल हैं। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अभियान निदेशक , एनएचएम शशशि प्रकाश झा, एमडी, जेएमएचआईडीपी अबु इमरान एवं स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ नेहा अरोड़ा मौजूद थीं।  

भोपाल मेट्रो ट्रायल सफल, CMRS टीम ने की जांच; दिवाली से पहले शुरू हो सकती है सेवा

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो को जल्द से जल्द दौड़ाए जाने की कवायद तेज हो गई हैं। आम यात्रियों के लिए कमर्शियल ट्रेवलिंग शुरू करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम ने खुद यात्रा करके सुरक्षा मानकों की जांच की।  सीएमआरएस कमिश्नर जनक कुमार गर्ग सुभाषनगर स्थित मेट्रो डिपो पहुंचें। सीएमआरएस कमिश्नर ने टीम के साथ यहां पर करीब 3 घंटे तक निरीक्षण किया और मेट्रो में सवार हुए। उनके साथ मेट्रो एमडी एस कृष्ण चैतन्य भी मौजूद रहे। इस दौरान गर्ग ने प्राथमिकता में शामिल कॉरिडोर के 6.22 किलोमीटर रूट तक सफर किया। यह रूट सुभाष नगर से एम्स तक का है। इस निरीक्षण के दौरान वे और उनकी टीम सुभाषनगर स्टेशन पर करीब 30 मिनट और एम्स स्टेशन पर सवा घंटे रुकी। क्या हैं सीएमआरएस दरअसल, किसी भी रेल लाइन या मेट्रो रेल को आम लोगों के लिए प्रारंभ करने से पूर्व सीएमआरएस की जांच आवश्यक होती है। इस टीम की जांच में 'हरी झंडी' मिलने के बाद आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ना यानी कमर्शियल सफर की शुरुआत होती है। इस जांच टीम के अफसर ट्रैक के नट-बोल्ट, सिग्नल, इंट्री-एग्जिट गेट, डिपो सहित सुरक्षा के लिहाज से हर पक्ष की बारीकी से जांच की जाती है। टीम के लौटने के बाद मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही भोपाल में मेट्रो रन प्रारंभ होगा। पीएम मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी बताया जा रहा है कि इस महीने के अंत तक सीएमआरएस की 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। पूरी संभावना है कि वे भोपाल मेट्रो में सफर भी करें। आपको बता दें कि 31 मई को मोदी ने इंदौर मेट्रो को भोपाल से हरी झंडी दिखाई थी।     सीएमआरएस की टीम ने 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाई     अचानक ब्रेक लगाकर की सुरक्षा जांच, कंट्रोल रूम का रिस्पांस जांचा     मेट्रो मेन लाइन, स्टेशन का निरीक्षण बाकी, सप्ताहभर बाद फिर जांच 2010 का सपना होगा साकार मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग के नेतृत्व में टीम ने सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो को 90 किमी प्रतिघंटे की फुल स्पीड में दौड़ाया। सीएमआरएस सर्टिफिकेट मिलते ही मेट्रो यात्रियों को लेकर दौडने को तैयार हो जाएगी। 2010 से ही शहरवासियों को मेट्रो में सवारी का दिखाया जा रहा सपना अब पूरा होने को है। निरीक्षण के बाद टीम शाम को रवाना हो गई। अभी मेन लाइन, स्टेशन की जांच बोटगी। टीम ने अत्याधुनिक ट्रेन सेट। सिस्टम के अलावा नट बोल्ट, स्टेशन, सिग्नल आदि की जांच की। मेट्रो के दूसरे फेस में भी काम तेज भोपाल मेट्रो का उद्देश्य यात्रियों के सफर को आसान बनाना है। साथ ही शहर को एक आधुनिक, कुशल शहरी केंद्र के रूप में आकार देना है। भोपाल मेट्रो के पहले चरण का काम पूरा होने के बाद दूसरे चरण को लेकर काम तेजी से चल रहा है। इसका दूसरा चरण भदभदा चौराहे से रत्नागिरी चौराहे तक लगभग 15 किमी लंबा होगा। इसमें 14 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। इस पर भी तेजी से काम चल रहा है। सितंबर में सीएमआरएस का निरीक्षण गुरुवार को सीएमआरएस की टीम ने तीन कोच वाली मेट्रो ट्रेन यानी रोलिंग स्टॉक में यात्री सुरक्षा, सुविधा और ऊर्जा दक्षता की जांच की। इसमें सीसीटीवी की निगरानी, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, वातानुकूलित कोच, चार्जिग पॉइंट और वास्तविक समय यात्री सूचना प्रणाली की सुविधा को जांचा गया। इनकी टेस्टिंग की गयी। तीन माह में दो बड़ी जांच जुलाई में आयी थी आरडीएसओ की टीम 9 जुलाई से 21 जुलाई तक 13 दिन मेट्रो ट्रेन के ऑसिलेशन और इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस का लखनऊ की रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन यानी आरडीएसओ ने परीक्षण किया था। टीम ने 90 किमी प्रतिघंटा पर ट्रेन दौड़ाई थी। इमरजेंसी ब्रेक लगाया हर स्टेशन, ट्रैक के बीच मेट्रों के ऑसिलेशन यानि कंपन को मापा गया था। उस समय परीक्षण में मेट्रो की राइड क्वालिटी, स्थिरता, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस, और सम्पूर्ण रोलिंग स्टॉक का मूल्यांकन रिकॉर्ड किया गया था। परीक्षण से रोलिंग स्टॉक यानी ट्रेन की सुरक्षा. विश्वसनीयता और दक्षता के उच्चतम मानकों की स्थिति पता चलती है। तकनीकी सवाल-जवाब भी हुए सीएमआरएस टीम ने मेट्रो के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियर्स से मेट्रो ऑपरेशन के तकनीकी पक्षों से जुड़े सवाल जवाब किए। सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या होता है? स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स, रोलिंग स्टॉक की तैयारियों के साथ ही ऑपरेशन के लिए डिपो के सिस्टम से जुड़े सवाल जवाब किए गए। इसका बकायदा प्रजेंटेशन भी लिया गया। इस अवसर पर एमडी मेट्रो एस कृष्ण चैतन्य, निदेशक सिस्टम अरुण कुमार श्रीवास्तव, निदेशक प्रोजेक्ट अजय गुप्ता व अन्य टीम सदस्य उपस्थित रहे। ऑपरेशन कंट्रोल को परखा सुभाष नगर डिपो इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच में ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर को देखा गया। ट्रेन संचालन, विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा प्रणालियों की केंद्रीकृत निगरानी. डिपो में मेंटेनेंस बे, स्टेबलिंग लाइन, रिपेयर बे के साथ आग लगने की स्थितियों की पहचान कर अग्निशमन सहित अन्य सुरक्षा प्रणालियों को परखा गया। तेज रफ्तार में ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम की जांच सीएमआरएस ने डिपो में मेट्रो के रैक की जांच करने के दौरान ड्राइवर से इसे एम्स तक ले चलने का कहा। मेट्रो ट्रेन डिपो से सुभाष नगर स्टेशन पहुंची और 90 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाने का आदेश दिया। तेज रफ्तार ट्रेन देखकर आंबेडकर ब्रिज से गुजरने वाले रूककर देखने लगे। ट्रेन तेज गति से दौड़ी और फिर अचानक रूक गयी। कभी मध्यम गति में चली। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे से एक घंटे तक पांच रैक को इसी तरह दौड़ाया गया। ऐसा रैक की गति और इसके ब्रेकिंग सिस्टम की जांच के लिए किया की टीम ने भी इसी तरह ब्रेकिंग सिस्टम की जांच की थी। मेट्रो के अंदर से ही सीएमआरएस जनक कुमार ने वहां दर्ज आपातकालीन नंबर पर कॉल किया। कंट्रोल रूम में इसे किसी तरह अटेंड किया जाता है। कॉल लगता भी है या नहीं इसे देखा।

2 से 12 अक्टूबर तक पचमढ़ी में कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर, राहुल और खरगे बताएंगे जीत की रणनीति

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस के 71 जिलाध्यक्षों को पचमढ़ी में आवासीय प्रशिक्षण (residential training) दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन आगामी 2 से 12 अक्टूबर तक किया जाएगा। इस खास ट्रेनिंग शिविर में लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी उपस्थित होंगे। इस दस दिन के कार्यक्रम में राहुल गांधी दो दिन तक जिला अध्यक्षों को मार्गदर्शन देंगे। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं को आने वाली चुनावी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके। वहीं, इस प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शमिल होंगे। राहुल गांधी जिला अध्यक्षों से करेंगे संवाद     सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसदराहुल गांधी इस कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्षों के साथ न केवल सार्वजनिक रूप से संवाद करेंगे, बल्कि वे उनसे व्यक्तिगत (one-to-one) बातचीत भी करेंगे। इस बातचीत में वे जिला अध्यक्षों से उनके जिलों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। यह संवाद कांग्रेस को आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत रणनीति तैयार करने में मदद करेगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे भी आएंगे इस प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल होंगे। संभावित कार्यक्रम के मुताबिक, खरगे इस शिविर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस प्रशिक्षण शिविर में जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, कांग्रेस ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के नेशनल हेड सचिन राव, मप्र के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल होंगे। अध्यक्षों से खुद चर्चा करेंगे राहुल गांधी सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ट्रेनिंग के दौरान जिला अध्यक्षों को न केवल संबोधित करेंगे, बल्कि, जिला अध्यक्षों से वन टू वन बातचीत भी करेंगे। जिला अध्यक्षों से उनके जिले की सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ट्रेनिंग के दौरान जिलाध्यक्षों को न केवल संबोधित करेंगे, बल्कि उनसे वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे. इस दौरान जिलाध्यक्षों से उनके जिले की सामाजिक, राजनीतिक हालातों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विचार विमर्श करेंगे. इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस के कई बड़े-बड़े नेता जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, कांग्रेस ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के नेशनल हेड सचिन राव, एमपी के प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहेंगे.  ट्रेनिंग में क्या क्या होगा? मिली जानकारी के मुताबिक, इस दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान जिलाध्यक्षों के सुबह उठने से लेकर रात तक सोने तक का मिनट-टू-मिनट का प्रोग्राम निश्चित किया गया है. बता दें कि रोजाना सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 से 8 बजे तक चलेगा. इसके अलावा, सुबह के समय में सैर, योग, ध्यान जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी. इस प्रशिक्षण का मकसद आगामी समय में होने वाले नगरीय निकाय, पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर पूरा रोडमैप तैयार किया जाएगा.      मध्यप्रदेश कांग्रेस के 71 जिलाध्यक्षों को पचमढ़ी में 2-12 अक्टूबर तक आवासीय प्रशिक्षण मिलेगा, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल होंगे।     राहुल गांधी जिला अध्यक्षों से एक व्यक्तिगत संवाद करेंगे और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा करेंगे।     कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जैसे जयराम रमेश, पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत, और सचिन राव भी इस प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा होंगे।     इस ट्रेनिंग में पार्टी कार्यकर्ताओं को ब्लॉक, मंडल, वार्ड, ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन बनाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।     पचमढ़ी को शांति और आरामदायक माहौल के कारण इस प्रशिक्षण के लिए चुना गया है, जो शहर की हलचल से दूर है। जिले में कैडर मैनेजमेंट से लेकर 4 चुनावों तक के लिए तैयार होंगे पचमढ़ी में होने वाली ट्रेनिंग में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को अपने जिले में ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर, वार्ड, ग्राम पंचायत और बूथ लेवल तक संगठन बनाने के बारे में बताया जाएगा। आगामी समय में होने वाले नगरीय निकाय, पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर कैसे रणनीति बनाना है, इसका पूरा रोडमैप बताया जाएगा। अब जानिए दस दिन की ट्रेनिंग में क्या होगा प्रशिक्षण शिविर में दस दिन की ट्रेनिंग में जिला अध्यक्षों के सुबह उठने से लेकर रात तक सोने का मिनट टू मिनट का प्रोग्राम तय किया गया है। प्रतिदिन सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 7-8 बजे तक चलेगा। इसमें सुबह की सैर, योग और ध्यान जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी। जिले में कार्यकारिणी से लेकर, ब्लॉक, मंडलम, सेक्टर, वार्ड, ग्राम पंचायत और बूथ स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का चयन कैसे करना है। पार्टी के दिग्गज नेता बताएंगे। पचमढ़ी को क्यों चुना? शहरों की भागदौड़ से दूर एकांत में सतपुड़ा की वादियों के शांत माहौल में दस दिनों तक जिला अध्यक्षों और बाहर से आने वाले विषय विशेषज्ञों और दिग्गजों के रुकने के लिए फाइव स्टार रेटिंग वाले होटल मौजूद हैं। बडे़ नेताओं के आने के लिए भोपाल नजदीकी एयरपोर्ट है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेता हेलिकॉप्टर के जरिए सीधे पहुंच सकेंगे। वहीं जिला अध्यक्षों और प्रदेश के नेताओं को पचमढ़ी तक पहुंचने के लिए ट्रेन और आसान सड़क रूट है। ऐसे में नेताओं को पहुंचने और रुकने में आसानी होगी। भविष्य की चुनावी तैयारी पर ध्यान केंद्रित इस विशेष ट्रेनिंग में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों को संगठनात्मक स्तर पर कार्य करने की पूरी जानकारी दी जाएगी। पचमढ़ी में होने वाली इस ट्रेनिंग में कार्यकर्ताओं को ब्लॉक, मंडल, सेक्टर, वार्ड, ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक संगठन बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही आगामी नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव, और 2028 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव के लिए रणनीतियाँ तैयार की जाएंगी। जानें इस दस दिन के प्रशिक्षण में क्या होगा? प्रशिक्षण शिविर में प्रत्येक दिन का कार्यक्रम सुबह 7 बजे से लेकर रात 7-8 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसमें जिला अध्यक्षों को पूरे दिन के लिए एक विस्तृत शेड्यूल मिलेगा। इसमें सुबह की सैर, योग, और ध्यान जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। इसके अलावा, इस प्रशिक्षण में कार्यकारिणी से लेकर ब्लॉक, मंडल, सेक्टर, वार्ड, ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का चयन कैसे करना है, इस पर भी … Read more

रामशंकर कठेरिया का सियासी कनेक्शन, BJP की दलित नेता पर नजर: यूपी अध्यक्ष पद की संभावनाएं

लखनऊ  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में लगातार देरी हो रही है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में अध्यक्ष का चुनाव पहले होगा और उसके बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पर मुहर लगेगी। इस बीच यूपी भाजपा अध्यक्ष को लेकर भी कयास जोरों पर हैं। शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस मसले पर कुछ भी कहा नहीं जा रहा है, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच कई नामों पर चर्चा है। चर्चा है कि पार्टी की ओर से किसी ब्राह्मण, ओबीसी या फिर दलित नेता के नाम पर मुहर लग सकती है। लेकिन पूरा जोर इस बात पर है कि ऐसे लीडर पर सहमति बनाई जाए, जो वैचारिक रूप से मजबूत हो और आरएसएस के बैकग्राउंड वाला हो। ऐसे ही एक नेता रामशंकर कठेरिया का नाम भी फिलहाल चर्चा में है। उनकी दावेदारी इसलिए मजबूत मानी जा रही है क्योंकि वह यूपी में गुटबाजी से परे हैं और इटावा के रहने वाले दलित नेता हैं। वह इटावा के सांसद रहे हैं और फिलहाल किसी अहम जिम्मेदारी से दूर हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर संगठन को मजबूत किया जा सकता है। उनके पक्ष में यह है कि वह इटावा के ही रहने वाले हैं, जहां से समाजवादी पार्टी का उभार हुआ था। इटावा, मैनपुरी, एटा समेत आसपास के कई जिलों को सपा का गढ़ माना जाता है। इसलिए यदि वह यादव बेल्ट में संगठन को मजबूत करते हैं तो बड़ी सफलता होगी। इसके अलावा पूरे प्रदेश में नैरेटिव को मजबूत करने में भी सफलता मिलेगी। सपा की ओर से पीडीए का दांव चला जा रहा है। लोहियावादियों और आंबेडकरवादियों को वह साथ लाना चाहती है। ऐसी स्थिति में भाजपा चाहेगी कि दलित लीडर को मौका देकर सपा के प्रचार को कमजोर किया जाए। कठेरिया के पक्ष में यह बात भी है कि वह 13 सालों तक आरएसएस के प्रचारक रहे हैं। दलित चेतना पर उनका लंबा अध्ययन रहा है और वह हिंदी के प्रोफेसर के तौर पर आगरा में पढ़ा चुके हैं। इस तरह इटावा से लेकर आगरा तक वह मजबूत उपस्थिति रखते हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ पूर्वी यूपी से हैं तो वहीं डिप्टी सीएम केशव मौर्य प्रयाग क्षेत्र से आते हैं। इसके अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लखनऊ का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस लिहाज से कठेरिया को बनाकर भाजपा यादव बेल्ट में सेंध मारना चाहेगी। उनके पास संगठन का अनुभव भी है क्योंकि वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। केंद्र सरकार में राज्य मंत्री भी वह थे। फिलहाल उनके अनुभव के लिहाज से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर उन्हें बिठा सकती है।

रांची में नए SSP की सख्त शुरुआत: रातों-रात इलाकों का निरीक्षण और दिए कड़े आदेश

रांची  झारखंड की रांची राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से नए एसएसपी राकेश रंजन ने पदभार ग्रहण करते ही कड़ी सक्रियता दिखाई है। रंजन ने देर रात बिना किसी सूचना के शहर के विभिन्न संवेदनशील इलाकों का औचक निरीक्षण किया। इस पखवाड़े में पुलिसिंग की कड़ी समीक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एसएसपी रंजन ने बिरसा चौक, मेन रोड, हरमू बायपास रोड और अरगोड़ा चौक जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों से सीधे संवाद स्थापित कर सुरक्षा के वर्तमान स्तर और पुलिस बल की तैनाती की स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली। उनकी यह अचानक निगरानी पुलिस विभाग में हड़कंप मचा गई, क्योंकि किसी भी अधिकारी या जवान को इससे पूर्व सूचना नहीं थी। इस औचक निरीक्षण के दौरान एसएसपी ने कानून व्यवस्था बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए साफ शब्दों में पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि अपराध नियंत्रण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे अपराधी कितना भी प्रभावशाली समूह का संरक्षण प्राप्त क्यों न हो, पुलिस को बिना दबाव के सख्त कार्रवाई करनी होगी। रंजन ने यह भी कहा कि अपराधियों के खिलाफ पुलिस को पूरी कठोरता के साथ कदम उठाने चाहिए ताकि शहर में शांति और सुरक्षा बनी रह सके।  

नाटो प्रमुख का दावा: पीएम मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन युद्ध का अगला कदम

नई दिल्ली पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के प्रभावों पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से भारत ने  रूस से उसकी यूक्रेन स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांगा है. नाटो चीफ ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगा गए टैरिफ की वजह से रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है. रूटे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर  पुतिन से बात कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर सीएनएन से बात करते हुए रूटे ने कहा कि भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर हो रहा है. भारत की ओर से पुतिन से बात की जा रही है. पीएम मोदी रूस से यूक्रेन पर अपनी रणनीति स्पष्ट करने को कह रहे हैं क्योंकि भारत को टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर टैरिफ लगाया गया है. अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन के खिलाफ रूस को मदद मिल रही है. ट्रंप ने इस दौरान नाटो देशों से भी चीन पर टैरिफ लगाने को कहा था कि ताकि रूस का तेल कम खरीदा जा सके.

संविधान के प्रहरी का संदेश: हिंदू समाज को कमतर आंकना स्वीकार नहीं – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को दी गई चुनौतियों पर विचार करते समय सावधानी बरतेगा। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ 1956 अधिनियम के तहत उत्तराधिकार के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, 'हिंदू समाज की जो संरचना पहले से मौजूद है, उसे कमतर मत कीजिए। एक अदालत के रूप में, हम आपको सावधान कर रहे हैं। एक हिंदू सामाजिक संरचना है और आप इसे गिरा नहीं सकते… हम नहीं चाहते कि हमारा फैसला किसी ऐसी चीज को नष्ट दे जो हजारों सालों से चली आ रही है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि महिलाओं के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 'सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच संतुलन' होना चाहिए। पीठ ने व्यापक मुद्दों पर विचार किए जाने तक समाधान की संभावना तलाशने के लिए संबंधित पक्षों को उच्चतम न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनौती दिए गए प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं। सिब्बल ने कहा कि महिलाओं को केवल परंपराओं के कारण समान उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि यह 'समुचित ढंग से तैयार किया गया' अधिनियम है और आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता 'सामाजिक ढांचे को नष्ट' करना चाहते हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष विचारणीय मुद्दा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 है, जो बिना वसीयत के या बिना वसीयत के मरने वाली हिंदू महिलाओं की संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करती है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, जब किसी हिंदू महिला की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके माता-पिता से पहले उसके पति के उत्तराधिकारियों को मिलती है।

रोहिणी आचार्य के आरोपों पर संजय यादव का बयान, जानें क्या कहा तेजस्वी के विश्वासपात्र ने

पटना पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सियासी गलियारे में कई बातें चल रही है। अब तक केवल इस मामले में पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने प्रतिक्रिया दी थी। अब राजद के सांसद, तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव रोहिणी आचार्य के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि रोहिणी दीदी ने जो कहा, उसका संदर्भ हम सब भली-भांति समझते हैं। पार्टी पूरी तरह से एकजुट है, और किसी प्रकार का कोई भ्रम या मतभेद नहीं है। राजद में किसी तरह की गलतफहमी नहीं है। 'भाजपा को हराना और इस सरकार को उखाड़ फेंकना ही लक्ष्य' संजय यादव ने रोहिणी दीदी ने जो त्याग और बलिदान दिया है, उसे भाजपा और टोलर्स कभी नहीं समझ सकते हैं। उन्होंने जितना महान बलिदान दिया, उसे भी भाजपा के लोग नहीं समझ पाए हैं। जो लोग भ्रम फैलना चाहते हैं, उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। पार्टी और लालू परिवार पूरी तरह से एकजुट है। सबका एक ही लक्ष्य है कि भाजपा को हराना और इस सरकार को उखाड़ फेंकना। जल्दी ही जनता भाजपा और उनके सहयोगियों को जवाब दे दी। 'भ्रम फैला रही भाजपा, बिहार सब जानता है' संजय यादव ने कहा कि संजय यादव एक समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्हें पार्टी अध्यक्ष द्वारा एक जिम्मेदारी सौंपी गई है, जैसे कई और कार्यकर्ताओं को दी गई है। भाजपा चाहती है कि भ्रम फैले, लेकिन बिहार लोकतंत्र की जननी है। बिहार ने हमेशा लोकतंत्र को मजबूती दी है, और यह कभी नहीं सहेगा कि लोकतंत्र को चुनाव आयोग के जरिये कुचला जाए। संजय यादव ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि भाजपा को सबसे ज्यादा डर बिहार से है, क्योंकि यह एकमात्र राज्य है जहां उन्हें आज तक मुख्यमंत्री नहीं मिला। इसीलिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कभी दस-दस हजार रुपये बांट रहे हैं, कभी तीन-तीन बार प्रभारी बदल रहे हैं। इससे साफ है कि उन्हें बिहार को लेकर कितनी चिंता है। जानिए, रोहिणी ने क्या-क्या पोस्ट लिखा था 18 सितंबर को रोहिणी आचार्य ने कहा था कि वह लालू-तेजस्वी की जगह लेने की कोशिश करने वालों को देखना पसंद नहीं करती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर आलोक कुमार के पोस्ट को शेयर किया था। इसके बाद संजय यादव के खिलाफ लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी आचार्य ने जो शेयर किया है, उसमें लिखा है कि फ्रंट सीट सदैव शीर्ष के नेता-नेतृत्वकर्त्ता के लिए चिन्हित होती है और उनकी अनुपस्थिति में भी किसी को उस सीट पर नहीं बैठना चाहिए। वैसे अगर "कोई" अपने आप को शीर्ष नेतृत्व से भी ऊपर समझ रहा है, तो अलग बात है। 19 सितंबर को रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को जीवनदान देने वाला फोटो-वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जो जान हथेली पर रखते हुए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने का जज्बा रखते हैं, बेखौफी-बेबाकी-खुद्दारी तो उनके लहू में बहती है.."। इधर, इस पोस्ट के कुछ ही घंटे बाद रोहिणी ने एक और पोस्ट किया। उसमें उन्होंने लिखा कि मैंने एक बेटी व बहन के तौर पर अपना कर्त्तव्य एवं धर्म निभाया है और आगे भी निभाती रहूंगी। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, न मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। मेरे लिए मेरा आत्म-सम्मान सर्वोपरि है। रोहिणी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

अमित शाह आज पटना में करेंगे रणनीतिक बैठक, धर्मेंद्र प्रधान सहित कई नेता शामिल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने अपने चुनावी अभियान की रफ्तार तेज कर दी है. इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम चंपारण जिले के कुमारबाग पहुंच रहे हैं. यहां वे इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑडिटोरियम में चंपारण और सारण संभाग के 10 संगठनात्मक जिलों के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. उसके बाद पटना में 40 नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे. जिसमें बिहार भाजपा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल होंगे. कार्यक्रम की रूपरेखा अमित शाह शुक्रवार दोपहर 2 बजे कुमारबाग पहुंचेंगे और शाम 4 बजे तक वहां रहेंगे. इस दौरान वे बेतिया-बगहा, रक्सौल, ढाका, मोतिहारी, गोपालगंज, सीवान उत्तर-दक्षिण और छपरा समेत 10 जिलों के 294 कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. बैठक में सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधायक, विधान परिषद सदस्य, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष, प्रभारी और कोर कमेटी सदस्य सहित संगठन के अहम पदाधिकारी शामिल होंगे. सुरक्षा के कड़े इंतजाम गृह मंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. कुमारबाग इंजीनियरिंग कॉलेज के खेल मैदान में अस्थायी हेलीपैड बनाया गया है. स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. शाम को पटना में अहम बैठक कार्यकर्ता संवाद के बाद अमित शाह बेतिया से पटना रवाना होंगे. यहां भाजपा प्रदेश कार्यालय में वे प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय स्तर के 40 वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन करेंगे. इस बैठक में बिहार चुनाव के प्रभारी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहेंगे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल के मुताबिक, इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और रणनीति पर गहन चर्चा होगी. 

बीजेपी को बड़ा झटका, मिर्धा परिवार के तेजपाल ने थामा कांग्रेस का हाथ

नागौर राजस्थान की राजनीति में मिर्धा परिवार का नाम हमेशा ही एक सियासी तूफान के पर्याय के रूप में लिया जाता रहा है। मारवाड़ के इस जाट बहुल इलाके में मिर्धा वंश की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कभी कांग्रेस को मजबूत करने वाले नाथूराम मिर्धा के वारिस आज भाजपा की ओर झुकते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने अपने 500 से अधिक समर्थकों के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया और भाजपा में शामिल हो गए। देर रात प्रगतिशील संगठन (कांग्रेस समर्थित) का दामन थाम लिया। यह कदम 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए दृश्यों की याद दिला रहा है, जब तेजपाल ने गठबंधन प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल के खिलाफ खुला विद्रोह किया था। लेकिन अब, ज्योति मिर्धा के खिलाफ पार्टी के संगठन की गुटबाजी के चलते उन्होंने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया। यह घटना नागौर की सियासत को एक नया आयाम दे रही है। तेजपाल मिर्धा, जो खींवसर विधानसभा क्षेत्र से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे, ने उस समय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मैदान संभाला था। बेनीवाल, जो आरएलपी के संस्थापक हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में नागौर से जीते थे, ने ज्योति मिर्धा को हराया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-आरएलपी गठबंधन के तहत बेनीवाल को ही टिकट मिला, जिससे मिर्धा परिवार में खलबली मच गई। तेजपाल ने तब खुलेआम बेनीवाल के खिलाफ प्रचार किया और ज्योति मिर्धा का समर्थन किया। परिणामस्वरूप, अप्रैल 2024 में कांग्रेस ने तेजपाल सहित तीन नेताओं—सुखराम डोडवाडिया और भंवराराम सूबका—को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। निष्कासन के ठीक बाद, 12 अप्रैल 2024 को तेजपाल मिर्धा के आह्वान पर कुचेरा नगरपालिका के 21 पार्षदों, 8 पूर्व पार्षदों और 7 पंचायत समिति सदस्यों ने सामूहिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। लगभग 400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने त्यागपत्र सौंपे, जिससे नागौर में कांग्रेस की नींव हिल गई। तेजपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "नागौर में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 8 में से 4 सीटें जीतीं। लोकसभा में भी हमारी स्थिति मजबूत थी, फिर आरएलपी से गठबंधन क्यों? हनुमान बेनीवाल कांग्रेस को तोड़ने का हथियार मात्र हैं।" एक साल बाद, तेजपाल ने फिर वही रास्ता चुना है। देर रात राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कांग्रेस पार्टी से निष्कासित तेजपाल को दुबारा पार्टी में शामिल कर लिया। डोटासरा ने उन्हें पार्टी में शामिल करते हुए धन्यवाद दिया। तेजपाल ने कहा कि दिन का भटका रात को घर वापिस आ जाना कोई बड़ी बात नहीं है। उनका मकसद परिवार की एकजुटता और ज्योति मिर्धा के प्रति वफादारी था। तेजपाल के साथ उनके 500 समर्थक भी भाजपा से वापिस कांग्रेस में शामिल हो गए, जो कुचेरा और आसपास के इलाकों में मिर्धा परिवार की मजबूत पकड़ को दर्शाता है। तेजपाल खुद कुचेरा नगरपालिका के दो बार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं, और खींवसर में उनका प्रभाव निर्विवाद है। यह घटना मिर्धा परिवार की जटिल सियासी यात्रा का एक और अध्याय जोड़ती है। स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा, जिन्हें राजस्थान में 'बाबा' के नाम से जाना जाता है, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और किसान नेता थे। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता थे, जिन्होंने 1977 के लोकसभा चुनाव में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की एकमात्र सीट नागौर से जीती थी। नाथूराम की विरासत पर चलते हुए उनकी पोती डॉ. ज्योति मिर्धा 2009 में नागौर से कांग्रेस सांसद बनीं। लेकिन 2023 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा का दामन थाम लिया। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में शामिल होते हुए ज्योति ने कहा था कि "कांग्रेस गलत दिशा में जा रही है, राष्ट्र निर्माण में अवसर कम हैं।" भाजपा ने उन्हें तुरंत प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया और 2023 विधानसभा तथा 2024 लोकसभा में नागौर से टिकट दिया। ज्योति के इस कदम के बाद मिर्धा परिवार के अन्य सदस्यों ने भी भाजपा की ओर कदम बढ़ाए। मार्च 2024 में ज्योति के चाचा रिछपाल मिर्धा और उनके बेटे विजयपाल मिर्धा (डेगाना विधायक) ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। ज्योति ने इसे अपनी सफलता बताया, यह कदम भाजपा को और मजबूत करेगा। लेकिन परिवार में सब कुछ सुगम नहीं चला। अप्रैल 2024 में रिछपाल के भाजपा जॉइन करने के बावजूद तेजपाल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर परिवार के साथ में डटे रहने का फैसला किया था। अब तेजपाल का वापिस कांग्रेस में आना परिवार की एकजुटता को मजबूत करने का संकेत नहीं दे रहा हैं। हालांकि, नागौर के भाजपा संगठन में मिर्धा परिवार और स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाजी चरम पर है। ज्योति मिर्धा को टिकट मिलने के बाद से ही संगठन के पुराने नेताओं में असंतोष पनप रहा है। मिर्धा परिवार की प्रभुत्व की कोशिशों से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता नाराज हैं। सूत्र बताते हैं कि ज्योति और संगठन के बीच खींचतान तेज हो गई है। हाल ही में नवंबर 2024 के विधानसभा उपचुनावों से पहले नागौर और सवाई माधोपुर से 14 कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर भी ज्योति की भूमिका प्रमुख रही, लेकिन संगठन ने इसे अपनी जीत बताया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा, "भाजपा डर दिखाकर तोड़ रही है।" स्थानीय लोग कयास लगा रहे हैं कि यह अंत नहीं है। ज्योति मिर्धा और भाजपा संगठन के बीच जारी तनाव के चलते रिछपाल मिर्धा समेत अन्य परिवारजन फिर से कांग्रेस की ओर कभी लौट सकते हैं। एक स्थानीय किसान नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मिर्धा परिवार की राजनीति हमेशा उतार-चढ़ाव वाली रही है। नाथूराम बाबा की विरासत किसानों की आवाज है, लेकिन आज सत्ता की होड़ में बंट गई है। नागौर जिले के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से 3 पर मिर्धा परिवार का कब्जा रहा है—खींवसर, डेगाना और नागौर। 2023 चुनावों में ही चार मिर्धाओं ने मैदान संभाला था: तेजपाल (कांग्रेस, खींवसर), विजयपाल (कांग्रेस, डेगाना), हरेंद्र (कांग्रेस, नागौर) और ज्योति (भाजपा, नागौर)। यह घटना न केवल कांग्रेस को मजबूत कर रही है, बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा पर असर डालेगी। कुचेरा जैसे छोटे शहरों में तेजपाल का प्रभाव विकास कार्यों से जुड़ा है—सड़कें, पानी की आपूर्ति और किसान योजनाओं … Read more