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SC ने पूर्व आबकारी आयुक्त को दी बेल, कुछ शर्तों के साथ मिली राहत

रायपुर  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 25 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को करोड़ों रुपये के कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुप एम. पंचोली की पीठ ने राहत प्रदान करते हुए कहा कि इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना है.  अदालत ने मुख्य मामले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले, दोनों में ही निरंजन दास को जमानत दी है. अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि कथित तौर पर 'किंगपिन' बताए जा रहे निरंजन दास ने राज्य में अन्य सह-आरोपियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से आबकारी नीति बनाने में भूमिका निभाई थी.  मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि दास को इन मामलों में क्रमशः 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने अन्य सह-आरोपियों की तरह ही दास पर भी कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल अदालती सुनवाई व जांच में शामिल होने के लिए ही राज्य में आ सकेंगे.  हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वे बाद में इन शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते हैं. इससे पहले 1 मार्च को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इसी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी जमानत दे दी थी. इस पूरे मामले में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 17 जनवरी 2024 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आपराधिक पहलुओं की जांच शुरू की थी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) 11 अप्रैल 2024 को मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है.  ईडी के अनुसार, भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान साल 2019 से 2023 के बीच इस घोटाले को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी दुकानों पर अवैध शराब सप्लाई कर वसूली की गई. केंद्रीय एजेंसी ने इस घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 2,883 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है.

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, भारत सतर्क; मेडिकल सहायता भी भेजी गई

नई दिल्ली वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था।  संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला ('बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।  भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने 'अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं।  भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।  देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।  कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें।  इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन बेहद खतरनाक इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

सरेंडर नक्सलियों की सूचना पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा बलों ने पकड़ी माओवादियों की हथियार निर्माण यूनिट

रायपुर  नक्सल मोर्चे पर मुस्तैद सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ एक और बड़ी और रणनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। गढ़चिरौली पुलिस ने नक्सलियों के एक गुप्त और अत्याधुनिक हथियार निर्माण कारखाने का पर्दाफाश करते हुए जंगल में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और मशीनों को बरामद कर नष्ट कर दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरी सफलता हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली बेहद सटीक और खुफिया जानकारी के बाद हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा बलों पर होने वाले कई बड़े हमलों को समय रहते टाल दिया गया है। माओवादियों से पूछताछ में खुलासा दरअसल, माओवादी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और विभिन्न हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जंगलों में जमीन के नीचे हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। इस बड़ी साजिश का खुलासा तब हुआ जब 16 मई 2026 को ' ऑपरेशन अंतिम प्रहार ' के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने स्वीकार किया कि बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में हथियार बनाने का एक गुप्त ठिकाना सक्रिय है, जहां भारी मात्रा में खतरनाक उपकरण जमीन के नीचे दबाकर रखे गए हैं। बीडीडीएस टीम ने घेरा जंगल सटीक इनपुट मिलते ही गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। 21 मई 2026 को विशेष अभियान दल गढ़चिरौली, प्राणहिता और बम निरोधक दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 22 मई को सुरक्षा बलों ने बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र के उत्तर दिशा में स्थित जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया। बीडीडीएस के जवानों ने जब आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और तकनीकी उपकरणों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन के नीचे छुपाए गए हथियारों के इस बड़े कारखाने का पता चला। सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार तराशने वाली लेथ मशीन से लेकर बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल और जनरेटर तक बरामद किए हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की हथियार सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचा है।

नोवाक जोकोविच ने रचा इतिहास, फ्रेंच ओपन के पहले मैच में फेडरर का रिकॉर्ड टूटा

पेरिस   टेनिस का बड़ा ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट 'फ्रेंच ओपन' 24 मई को पहले राउंड के मैचों के साथ शुरू हो गया. सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविच पहले राउंड में अपना पहला सेट गंवाने के बाद शानदार वापसी की. उन्होंने फ्रांसीसी खिलाड़ी जियोवानी एम्पेटशी पेरिकार्ड के खिलाफ 5-7, 7-5, 6-1 और 6-4 से शानदार जीत दर्ज की।  जोकोविच 2016, 2021 और 2023 में फ्रेंच ओपन जीतने के बाद अब अपना चौथा फ्रेंच ओपन खिताब जीतने का लक्ष्य बना रहे हैं. गौरतलब है कि 2023 यूएस ओपन के बाद से उन्होंने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता है, लेकिन वे सेमीफाइनल और फाइनल तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।  जोकोविच ने मैच जीतने से पहले ही कोर्ट पर उतरकर इतिहास रच दिया था. 39 साल के इस खिलाड़ी ने रोजर फेडरर का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास की किताबों में अपना नाम दर्ज करा लिया. 24 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता जोकोविच ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में 82वीं बार हिस्सा ले रहे है, जो की एक रिकॉर्ड उपस्थिति है. जबकि फ्रेंच ओपन में यह उनकी 22वीं उपस्थिति है।  जोकोविच ने रचा इतिहास सर्बियाई टेनिस स्टार ने अब पुरुषों की श्रेणी में किसी ग्रैंड स्लैम के 'मेन ड्रॉ' में सबसे ज्यादा बार हिस्सा लेने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. पुरुषों के सिंगल्स खिलाड़ियों में, उन्होंने ग्रैंड स्लैम के राउंड ऑफ 128, राउंड ऑफ 64, राउंड ऑफ 32, राउंड ऑफ 16, क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में सबसे ज्यादा बार खेला है. जोकोविच के नाम अब ग्रैंड स्लैम के मेन ड्रॉ में 82 बार हिस्सा लेने का रिकॉर्ड है, जबकि फेडरर के नाम 81 बार हिस्सा लेने का रिकॉर्ड दर्ज है।  जोकोविच का फ्रेंच ओपन में नया कीर्तिमान इसके अलावा जोकोविच अब रोलांड गैरोस (फ्रेंच ओपन) में सबसे ज्यादा बार हिस्सा लेकर संयुक्त रूप से पहले स्थान पर पहुंच गए हैं. इससे पहले इस नंबर पर फ्रेंच स्टार रिचर्ड गैस्केट थे. जिन्हों 22 बार रोलांड गैरोस टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुके हैं. अब जोकोविच भी 22 बार इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।  सर्बियाई खिलाड़ी के नाम पहले से ही रोलांड गैरोस में सबसे ज्यादा पुरुषों के सिंगल्स मैच खेलने का रिकॉर्ड है, उन्होंने 119 मैच खेले हैं. उन्होंने 2025 के टूर्नामेंट के दौरान राफेल नडाल के रिकॉर्ड (116) को पीछे छोड़ दिया. इस टूर्नामेंट में उनका सफर सेमीफाइनल में जानिक सिनर से हार के साथ खत्म हुआ था। 

कोर्ट का बड़ा फैसला: बहू की मौत के बाद सास को मिलेगा 18 लाख रुपये हर्जाना

बिलासपुर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी मनीषा ठाकुर की अदालत ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 22 वर्षीय विवाहिता अंजनी ध्रुव की मृत्यु पर उसके परिजनों के पक्ष में 18,03,720 रुपये का क्लेम अवार्ड पारित किया है। घटना 16 दिसंबर 2023 की है, जब ग्राम भिलाई (मस्तुरी) निवासी अंजनी अपने पति चोलाराम ध्रुव के साथ मोटर साइकिल पर पीछे बैठकर अस्पताल जा रही थी। भिलाई पुल के पास पति ने वाहन को तेजी व लापरवाही से चलाया, जिससे गिरकर अंजनी की मौत हो गई। थाना मस्तुरी में आरोपी पति के खिलाफ मर्ग दर्ज था। बीमा कंपनी ने मृतिका की लापरवाही और चालक के पास वैध लाइसेंस न होने की दलीलें दीं, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पति के पास वर्ष 2035 तक वैध लाइसेंस मौजूद था। आय का पुख्ता प्रमाण न होने पर कोर्ट ने श्रमायुक्त की न्यूनतम मजदूरी दर से ₹10,100 मासिक आय तय की। चूंकि मृतिका पति के साथ पृथक रहती थी, इसलिए कोर्ट ने जेठ-जेठानी को आश्रित न मानकर केवल सास (कमला बाई) को मुख्य आश्रित माना। वित्तीय सुरक्षा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि जेठ-जेठानी व उनके बच्चों को स्नेह हानि के एवज में कुल 1,92,000 रुपए नगद दिए जाएंगे। वहीं, मुख्य आश्रित (सास) की राशि का 30% हिस्सा 3 वर्ष के लिए बैंक में फिक्स रहेगा, ताकि उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहे और रकम सुरक्षित रहे। शेष 70% राशि तत्काल ट्रांसफर होगी।  

पंजाब फतह की तैयारी में BJP, हरियाणा CM सैनी को कमान देने के पीछे क्या रणनीति?

चंडीगढ़  भाजपा के लिए, किसी भी चुनाव की जमीनी तैयारी चुनावी अभियान के आधिकारिक आगाज से काफी पहले ही शुरू हो जाती है. यह उन कई राज्यों में देखा जा चुका है, जहां चुनाव होने वाले थे और अब पंजाब की बारी है. एक ऐसा राज्य जहां इस भगवा दल को ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरने के लिए संघर्ष करना पड़ा है, वहां 2027 के चुनावों के लिए जमीनी तैयारी शुरू हो चुकी है।    दशकों तक, भाजपा ने पंजाब में अपने पुराने क्षेत्रीय सहयोगी, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पीछे रहकर जूनियर पार्टनर की भूमिका निभाना चुना. लेकिन अब जब अकाली अलग हो चुके हैं, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) बढ़ते सत्ता-विरोधी रुझान का सामना कर रही है, और कांग्रेस अंदरूनी कलह में उलझी हुई है, तो भाजपा को सालों बाद पंजाब में अपना सबसे बेहतरीन मौका दिखाई दे रहा है. भाजपा के इस महत्वाकांक्षी अभियान की कमान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी संभाल रहे हैं, जो पंजाब में बीजेपी के एक प्रमुख राजनीतिक सेतु के रूप में उभर रहे हैं।  हरियाणा के मुख्यमंत्री 2025 से लगभग हर हफ़्ते पंजाब का दौरा कर रहे हैं और 2026 के बाद से इन दौरों की संख्या और बढ़ गई है. सैनी के इन दौरों को BJP की उस मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद अपने कार्यकर्ताओं को मज़बूत करना और 2027 के विधानसभा चुनावों में ज़्यादा सीटें जीतना है. बीजेपी के पास फिलहाल 117 सदस्यों वाली पंजाब विधानसभा में सिर्फ दो सीटें हैं, और राज्य से उसका कोई भी लोकसभा सांसद नहीं है।  बीजेपी ने सैनी को क्यों चुना? यह माना जाता है कि पंजाब में भाजपा के पास बड़े चेहरों की कमी है, लेकिन इस अभियान के लिए नायब सिंह सैनी को ही क्यों चुना गया? हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी समुदाय से आते हैं जो पंजाब में काफी प्रभावशाली है, और उनकी मां एक गैर-जट सिख हैं. पंजाबी सैनी की मातृभाषा है, और उन्हें पंजाब में भीड़ को धाराप्रवाह पंजाबी में संबोधित करते हुए सुना जा सकता है।  पंजाब विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया, "भाजपा के पंजाब संपर्क अभियान के लिए नायब सिंह सैनी को आगे करना एक सही रणनीति है." कुमार ने आगे कहा, "सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं और 2020 के किसान आंदोलन से उनका कोई संबंध नहीं रहा है. इसके अलावा, सैनी को एक बाहरी व्यक्ति के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि उन्हें भाजपा के लिए एक राजनीतिक सेतु के रूप में देखा जा रहा है।  गैर-जट मतदाताओं को एकजुट करने का भाजपा का प्रयास पंजाब में चुनाव जीतने के लिए भाजपा दो चीज़ों पर ध्यान दे रही है एक तो सही संदेश देना और दूसरा जातियों का सही तालमेल बिठाना. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 'सैनी' समाज से हैं, जो एक पिछड़ी जाति है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में इस समाज के काफी लोग रहते हैं, खासकर पंजाब के दोआबा इलाके में. दोआबा क्षेत्र को पंजाब के "एनआरआई हब" के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यहां राज्य के अप्रवासी भारतीयों की सबसे बड़ी आबादी रहती है और यह दलित राजनीति का एक प्रमुख केंद्र है।  सैनी की मां, कुलवंत कौर, एक गैर-जट सिख हैं, और पंजाब में हरियाणा के मुख्यमंत्री को अक्सर भगवा पगड़ी पहने और धाराप्रवाह पंजाबी बोलते हुए देखा जाता है. सैनी के पंजाब संपर्क अभियान में भगवा पगड़ी एक निरंतर हिस्सा रही है. मुख्यमंत्री जब भी पंजाब में होते हैं, उन्हें इसे पहने हुए देखा जाता है. यह छवि सैनी के बारे में एक ऐसी धारणा बनाती है कि वे कोई बाहरी नहीं बल्कि यहीं के हैं।  प्रोफेसर कुमार ने यह बताते हुए कि भाजपा उन्हें पंजाब संपर्क अभियान के लिए एक स्वाभाविक विकल्प क्यों मानती है, कहा, "सैनी राजनीतिक रूप से 'बाहर से लाए गए' लगे बिना हिंदू और सिख दोनों सामाजिक हलकों में आसानी से घुल-मिल सकते हैं। " कई समाचार रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा की व्यापक रणनीति पंजाब में भी "हरियाणा मॉडल" को दोहराने की है. भगवा दल जिस मॉडल पर काम कर रहा है, वह जट सिख राजनीति के पारंपरिक दबदबे को दरकिनार करने का प्रयास करते हुए, गैर-जट अन्य पिछड़ा वर्ग, दलितों और उच्च जाति के हिंदू मतदाताओं का एक गठबंधन तैयार करने का मॉडल है।  इसी फॉर्मूले की बदौलत भाजपा ने 2024 के हरियाणा चुनाव में जीत हासिल की थी, जबकि वह राज्य राजनीतिक रूप से जट-बहुल माना जाता है. पंजाब के जातीय समीकरण को देखते हुए, गैर-जट मतदाताओं को एकजुट करने की यह रणनीति भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. राज्य की आबादी में ओबीसी समुदायों की हिस्सेदारी लगभग 31% है, जबकि दलितों की आबादी करीब 32% है. किसी भी भारतीय राज्य की तुलना में इन दोनों समुदायों की आबादी का अनुपात यहां सबसे अधिक है।  भाजपा का मानना है कि यदि वह खत्री और अरोड़ा जैसे उच्च जाति के हिंदू मतदाताओं के साथ-साथ इन वर्गों को भी सफलतापूर्वक एकजुट करने में कामयाब रहती है, तो पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सत्ता के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकती है।  इस रणनीति के लिए नायब सिंह सैनी ही सबसे उपयुक्त क्यों हैं? भाजपा के गैर-जट सामाजिक गठबंधन के प्रयास के लिए सैनी सबसे सटीक पसंद हैं. साल 2025 से, सैनी ने कई सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है, वंचित अनुसूचित जाति समूहों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की है, गुरुद्वारों के दर्शन किए हैं, और ओबीसी व दलित समुदायों से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं. अप्रैल में, उन्होंने चंडीगढ़ में पंजाब के धानक समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी, जहां बेरोजगारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।  इसके साथ ही, भाजपा ने बड़ी सूझबूझ से सैनी की छवि एक साफ-सुथरी प्रतिष्ठा वाले और मृदुभाषी प्रशासक के रूप में तैयार की है. पंजाब ने ऐतिहासिक रूप से उन नेताओं को नकारा है जिन्हें बाहरी माना जाता था या जिन्हें राज्य में ऊपर से थोपा गया था, और भाजपा का मानना है कि पंजाब के साथ सैनी का सांस्कृतिक जुड़ाव पार्टी को इस जाल से बचने … Read more

ट्विशा मामले में नया मोड़, राज्य सरकार बोली- जांच में बाधा डाल रहीं सास

भोपाल   ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया इस केस को सनसनीखेज बनाने से बचें। मीडिया परिजनों का इंटरव्यू नहीं चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका निष्पक्ष जांच जरूरी है। सच ये है कि लड़की की जान गई है। मीडिया को बयान देने से बचे पीड़ित और आरोपी के परिवार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित परिवार और आरोपी परिवार दोनों के परिवार वालों से अपील करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं ताकि चल जांच पर किसी तरह का कोई प्रभाव न पड़े। सॉलिसिटर जनरल बोले- जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी सॉलिसिटर जनरल (SG) ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा कि ट्विशा केस की जांच आज ही CBI अपने हाथ में लेगी। इस बीच ट्विशा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने FIR दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गिरिबाला को तुरंत जमानत कैसे? रसूख से जांच में बाधा… ट्विशा केस में सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं और सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित परिवार से मीडिया में या सार्वजनिक मंचों पर बयान न देने की अपील की है. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरिबाला अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि उन्हें तुरंत जमानत कैसे मिल गई।  सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBI आज ही मामले की जांच अपने पास ले लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर ले लिया. CJI सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि CBI तुरंत और निष्पक्ष जांच करेगी।  निष्पक्ष हो जांच: SC अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे ये मौत खुदकुशी हो या फिर कोई अन-नेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मौत), हर हाल में इस पूरे मामले की तह तक जाकर एक निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस वक्त मीडिया और आम जनता के बीच चल रही किसी भी तरह की अटकलों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं।  सरकार के फैसले की सराहना अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात भी सामने आई कि आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में ये नैरेटिव (विमर्श) सेट किया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले की सराहना की है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।  'जांच में सहयोग नहीं कर रही गिरिबाला' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अब तक पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं, लेकिन वह लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने तुरंत ही जमानत भी मिल गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के लिए उनसे जब उनका मोबाइल मांगा गया तो उन्होंने इस को लेकर भी परेशानियां खड़ी कीं।  साथ ही ट्विशा के वकील ने कहा कि ट्विशा की सास मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में कॉल डिटेल्स भी दे रही हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इन बातों को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों (आरोपी-पीड़ित) के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वो मीडिया में बयान देने के बजाय अपने बयानों को सीधे जांच एजेंसी के पास रिकॉर्ड कराएं।  'परिवार आना चाहिए आगे' शीर्ष अदालत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा और दुख से गुजरना पड़ता है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवारों को सही वक्त पर अपनी बेटियों के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर उनके साथ सुरक्षित रहे।  'प्री-जज नहीं बनाना चाहती कोर्ट' चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और आम जनता से इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से पूरी तरह दूर रहने की अपील की. सीजेआई ने कहा, 'हम चाहते हैं कि लोग देश की इस सबसे प्रीमियर जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा रखें. अदालत अभी उन मुद्दों के परिणाम पर कोई पहले से राय (प्री-जज) नहीं बनाना चाहती है, जिनकी जांच होना अभी बाकी है।  परिवार दायर कर सकता है ट्रांसफर याचिका इसके अलावा ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि वह इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता के लिए इसे मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग कर सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और वो इसके लिए किसी भी समय स्थानांतरण याचिका दायर कर सकते हैं।  आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं।  क्या है मामला बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल के घर की छत पर फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी … Read more

सुप्रीम कोर्ट की NTA को फटकार, NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले हुए नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) से कोई सबक नहीं सीखा है. साथ ही, मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कराने के लिए टेस्टिंग एजेंसी की जगह एक मज़बूत और स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की अर्जी पर केंद्र, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और सीबीआई से जवाब मांगा है।  यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच के सामने आया. बेंच ने निर्देश दिया कि अर्जी की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा दूसरी पार्टियों को भी दी जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो नीट एग्जाम कराने के लिए जिम्मेदार है, से कहा कि वह 2024 में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के पालन पर गुरुवार तक एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि, यह दुख की बात है कि, उन्होंने (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने अपना सबक नहीं सीखा है. यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट के समझ आ चुका है. एक कमेटी, एक मॉनिटरिंग कमेटी थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें मान लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए कमेटी द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे।  बेंच ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की वकील तन्वी दुबे के जरिए फाइल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी एक जैसे मामलों को एक साथ जोड़ रहा है. मेडिकल बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह नीट यूजी कराने के लिए एनटीए को पुनर्गठन करने या उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली लाने का निर्देश दे. कोर्ट ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज़्यादा छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है।  मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए एनटीए ने 3 मई को जो अंडरग्रेजुएट स्तर का नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) लिया था, उसे 12 मई को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था, जिसकी अब सीबीआई जांच कर रही है। 

अब एयरपोर्ट पर नहीं बना सकेंगे रील, रायपुर समेत देशभर में DGCA के नए नियम लागू

 रायपुर  एयरपोर्ट परिसर में रील, वीडियो और फोटो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने वालों के लिए अब सख्ती बढ़ा दी गई है। रायपुर समेत देश के बड़े एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ते रील कल्चर और सुरक्षा संबंधी शिकायतों के बाद डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन (DGCA) और ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी (BCAS) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में शूटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित नई गाइडलाइन के तहत एयरपोर्ट के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में फोटो, वीडियो और रील बनाना पूरी तरह बैन रहेगा। सुरक्षा जांच क्षेत्र, विमान पार्किंग एरिया और यात्रियों को विमान तक ले जाने वाले जोन में कैमरा चलाने पर कार्रवाई की जाएगी। डीजीसीए ने इसे सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना है। अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा होल्ड एरिया, जहां सीआइएसएफ यात्रियों और सामान की जांच करती है, वहां किसी भी प्रकार की वीडियो शूटिंग या फोटोग्राफी कानूनी अपराध मानी जाएगी। विमान के पास वीडियो शूटिंग पर रोक विमान खड़े होने वाले क्षेत्र, रनवे से जुड़े हिस्सों और बस से विमान तक जाने वाले रास्तों में रुककर वीडियो या फोटो बनाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से विमान संचालन और मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होते हैं और सुरक्षा जोखिम बढ़ता है। उड़ान के दौरान सीमित छूट डीजीसीए के निर्देशों के अनुसार यात्री टेकआफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान अपनी सीट से सामान्य फोटो या वीडियो ले सकते हैं। ऐसा कोई उपकरण या तरीका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिससे विमान संचालन प्रभावित हो। केबिन क्रू यदि कैमरा बंद करने का निर्देश देता है तो उसका पालन करना अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्रों में वीडियो या रील बनाते पाए जाने पर सीआइएसएफ द्वारा फोन या रिकार्डिंग उपकरण जब्त किया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विमान अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। साथ ही उसे अनरूली पैसेंजर घोषित कर तीन महीने से लेकर दो साल या उससे अधिक समय तक हवाई यात्रा से प्रतिबंधित किया जा सकता है। प्रोफेशनल शूटिंग के लिए अनुमति जरूरी यदि कोई व्यक्ति विज्ञापन, फिल्म या प्रोफेशनल ब्लाग के लिए एयरपोर्ट परिसर में शूटिंग करना चाहता है तो उसे डीजीसीए और संबंधित एयरपोर्ट अथारिटी से पहले अनुमति लेनी होगी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना अनिवार्य रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहुंचे दिल्ली, रेखा गुप्ता संग शहरी विकास मुद्दों पर हुई अहम बैठक

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दिल्ली दौरे पर हैं. अपने व्यस्त दिल्ली दौरे पर सीएम ने आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से मुलाकात की. ये मुलाकात वैसे तो सौजन्य मुलाकात रही, लेकिन दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच कई अहम विषयों पर भी चर्चा हुई।  विष्णु देव साय की सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता के साथ सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर अहम चर्चा की. दोनों की ये मुलाकात सीएम रेखा गुप्ता के आवास पर हुई. मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में चल रही योजनाओं को लेकर भी चर्चा की. मुलाकात के दौरान जनहित, सुशासन, शहरी विकास और सार्वजनिक सुविधाओं में विस्तार और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई. मुलाकात के दौरान सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता को छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी दी. सीएम साय ने रेखा गुप्ता को बताया कि कैसे हम जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए छत्तीसगढ़ की जनता को लाभ पहुंचा रहे हैं।  सुशासन, जनहित और शहरी विकास के मुद्दों पर चर्चा मुलाकात के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने देश के विकास में अपने-अपने राज्यों की अहम भूमिका और आपसी सहयोग पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं के बीच समसायमिक मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया गया है. सीएम विष्णु देव साय ने सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात के दौरान उनको छत्तीसगढ़िया संस्कृति से जुड़ी कई भेंट भी गिफ्ट किए।  विकास योजनाओं पर सरकार का फोकस बीते दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर थे. अमित शाह ने छत्तीसगढ़ और बस्तर में चल रहे विकास के कार्यों को लेकर साय सरकार की तारीफ की थी. छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद के खत्म होने के ऐलान के बाद से छत्तीसगढ़ लगातार विकास योजनाओं पर फोकस करने में लगा है. सीएम कई मंचों से खुद ये कह चुके हैं कि वो बस्तर के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।