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इस्लामाबाद 10 दिनों से लॉकडाउन में, पाकिस्तान की जनता बोली – आवाम को मिल रही बददुआ

इस्लामाबाद जंग अमेरिका-ईरान-इजराइल का है, पाकिस्तान ने रास्ता इधर का बंद कर दिया है. सारी आवाम बददुआ देती है, ये देखो न सब बंद पड़ा है, सारा आवाम बेरोजगार पड़ा है, महंगाई और गुरबत है, मुजाकरात (बातचीत) करें या न करें पाकिस्तान आवाम पे रहम करें।  इस्लामाबाद के फिदाउल्ला ईरान वार्ता की बात सुनकर ही भड़क उठते हैं, और पाकिस्तानी हुक्मरानों पर खरी-खोटी सुनाने में तनिक भी परहेज नहीं करते हैं. ईरान वार्ता की आस में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पिछले 10 दिनों से लॉकडाउन की स्थिति में है. इस्लामाबाद में सड़के बंद हैं, बाजार ठप पड़े हैं, और चारों ओर सुरक्षा बलों का पहरा है. संभावित शांति वार्ता और हाई-प्रोफाइल दौरों की अटकलों के चलते शहर की सड़कों पर पाबंदियां लगा दी गई हैं।  महंगाई से जूझ रही पाकिस्तान की गरीब जनता का कामकाज इस सिक्योरिटी लॉकडाउन की वजह से ठप हो गया है. और कमाई का सारा रास्ता बंद हो गया है। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत की अनिश्चितता के बीच सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अघोषित लॉकडाउन है।  हालात से परेशान स्थानीय निवासी मोहम्मद साबिर ने कहा, "आवाम तो परेशान है न महंगाई की वजह से कभी बोल रहे हैं ट्रंप आ रहा है, इधर पाकिस्तान कभी बोल रहे हैं कि ईरानी सदर आ रहा है, भाई आए मुजाकरात करें खत्म करे, जब-जब वो नही आएंगे, पाकिस्तान की आवाम किधर जाए बेचारे, वो तो भूखे मरते रहेंगे, न कोई कारोबार है न कोई काम है, मुज़ाकरात करें मसले-मसाइल खत्म करें, अब यही सुन रहे हैं की अब आज आ रहे हैं, कल आ रहे हैं, ना कोई काम है, हम परेशान हैं।  पूरे इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा हुआ है. पाकिस्तानी राजधानी की सड़कें कई दिनों से खाली पड़ी हैं, दुकानें बंद हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी रोक दिया गया है. अधिकारियों और दफ़्तरों में काम करने वालों से घर से ही काम करने को कहा गया है, जबकि मज़दूरों के पास कोई काम नहीं बचा है. सड़कों पर सिर्फ़ सेना और पुलिस की वर्दी पहने लोग ही नज़र आ रहे हैं।  कई लोगों को ऐसा लग रहा है जैसे वे फिर से महामारी के दौर में लौट आए हों. लोगों के लिए ये बेहद सख़्त और अनिश्चित काल तक चलने वाली पाबंदियाँ अब परेशानी और आर्थिक तंगी का सबब बन गई हैं।  इस्लामाबाद और उसके पड़ोसी शहर रावलपिंडी में काम करने वाले कई मज़दूर, जो फ़्लैट का किराया देने में असमर्थ थे, उन्हें शनिवार को एक सरकारी आदेश के बाद बिना किसी सूचना के उनके हॉस्टल से निकाल दिया गया। इसके चलते हज़ारों लोगों को आनन-फ़ानन में रहने के लिए कोई दूसरी जगह ढूंढनी पड़ी।  लग रहा है पिंजरे में कैद हैं सुरक्षा के दृष्टिकोण इस्लामाबाद के कई इलाके खाली कर दिए गए हैं. इस्लामाबाद के एक सरकारी अस्पताल, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हेल्थ ऑफिसर अरीज अख्तर कहती हैं कि उन हजारों लोगों में से एक थीं जिन्हें उनके कमरों से बाहर निकाल दिया गया था. उन्होंने कहा, "शनिवार को बहुत अफरा-तफरी मची थी मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरा गांव यहां से सिर्फ़ तीन घंटे की ड्राइव की दूरी पर है. लेकिन बहुत से लोग जो दूर के शहरों और प्रांतों से आए थे, उन्हें अपने सहकर्मियों, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिन्नतें करनी पड़ीं कि जब तक अमेरिका-ईरान बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे उन्हें अपने यहां रहने दें।  द गार्जियन से बातचती में अख्तर ने बताया कि जैसे-जैसे बातचीत में देरी होती गई उनकी निराशा भी बढ़ती गई. पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद होने का मतलब है कि वह शहर वापस नहीं जा पा रही हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिंजरे में रह रहे हों." "हम काम पर वापस नहीं जा सकते. मेरे जैसे बहुत से लोग फ्लैट का किराया नहीं दे सकते, इसीलिए हम हॉस्टल में रहते हैं।  वार्ता को लेकर अनिश्चितता इस्लामाबाद में वार्ता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को ही कहा है कि अगले 72 घंटे में वार्ता को लेकर अच्छी खबर आ सकती है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्लान बदल गया और ईरान भी फैसला टाल रहा है. पाकिस्तानी सरकार ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, लेकिन इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अगर वार्ताएं आगे बढ़ती हैं या रद्द होती हैं तो स्थिति में बदलाव आ सकता है, लेकिन फिलहाल शहर में तनाव और परेशानी जारी है।   

‘हिन्दू तो हिन्दू है, किसी भी मंदिर में जा सकता है’; जस्टिस नागरत्ना का अहम बयान

तिरुवनंतपुरम केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़े ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ में आज (गुरुवार, 23 अप्रैल को) आठवें दिन भी सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान आज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि, “एक हिंदू आखिरकार तो हिंदू ही है और वह किसी भी मंदिर में जा सकता है।” दरअसल, मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली ये संविधान पीठ इस बात पर विचार कर रही है कि क्या धार्मिक संप्रदाय अपने विशिष्ट रीति-रिवाजों के आधार पर दूसरों को मंदिर में प्रवेश से रोक सकते हैं। इस पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। संविधान पीठ न्यायिक समीक्षा के दायरे, अनुच्छेद 25 , 26 और अनुच्छेद 14 के बीच संतुलन ,'संवैधानिक नैतिकता' की भूमिका और धार्मिक मामलों में जनहित याचिकाओं की स्वीकार्यता से संबंधित प्रमुख सवालों की जांच कर रही है। हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए और मंदिरों को संप्रदाय की रेखाओं पर एकदूसरों को बाहर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा अलगाव अंततः संप्रदाय को ही कमजोर करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत में भले ही पूजा के विभिन्न रूप (जैसे शैव या वैष्णव) प्रचलित हों और वे संरक्षित हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक हिंदू दूसरे संप्रदाय के मंदिर में नहीं जा सकता। एक हिंदू, आखिरकार हिंदू ही होता है जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा, “कोई भी हिंदू किसी भी मंदिर में जा सकता है। एक तरीका है 'संप्रदाय'… मंदिर शैव, वैष्णव या श्री वैष्णव पूजा पद्धति का पालन करता है। कम से कम दक्षिण भारत में तो ऐसा ही होता है। ये ही वहाँ की प्रचलित प्रथाएँ हैं। इसलिए, इसे एक 'संप्रदाय' कहा जाता है। अब, अगर पूजा की पद्धति शैव प्रकार की है, तो वैष्णव संप्रदाय के लोग यह नहीं कह सकते कि इसे वैष्णव पद्धति के अनुसार ही होना चाहिए; क्योंकि उन दोनों पूजा पद्धतियों में अंतर होता है… इसलिए, पूजा के उस विशिष्ट स्वरूप को संरक्षण प्राप्त है। इसका किसी 'संगठन' के होने या न होने से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा होना जरूरी नहीं है। एक हिंदू, आखिरकार हिंदू ही होता है। वह किसी भी मंदिर में जा सकता है।” 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' और व्यक्तिगत विचार सुनवाई के दौरान एक रोचक मोड़ तब आया जब वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कांग्रेस नेता शशि थरूर के एक लेख का हवाला दिया। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ज्ञान और ज्ञान के स्रोतों का स्वागत है, लेकिन "व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी" से नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि अदालत सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों का सम्मान करती है, लेकिन "व्यक्तिगत राय केवल व्यक्तिगत राय होती है।" सामाजिक सुधार में राज्य की भूमिका न्यायालय ने सामाजिक सुधारों के संदर्भ में राज्य की शक्ति पर भी चर्चा की। पीठ ने टिप्पणी की कि राज्य कोई अजनबी या विदेशी संस्था नहीं है, बल्कि वह लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। अगर जनता किसी सामाजिक बुराई को सुधारना चाहती है, तो राज्य के पास उस शक्ति का प्रयोग करने का अधिकार है। जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत सामाजिक सुधार के लिए बनाया गया कानून धार्मिक संप्रदाय के अधिकारों पर प्रभावी हो सकता है। संविधान पीठ के सामने प्रमुख कानूनी प्रश्न क्या हैं? इस नौ सदस्यीय संविधान पीठ के सामने सात मुख्य प्रश्न हैं, जिनमें शामिल हैं: -संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा क्या है? -अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदायों के अधिकार) के बीच क्या संबंध है? -क्या 'नैतिकता' शब्द में 'संवैधानिक नैतिकता' भी शामिल है? -क्या कोई व्यक्ति जो उस संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उसकी प्रथाओं को चुनौती दे सकता है? -संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत किसी धार्मिक प्रथा की न्यायिक समीक्षा का दायरा और विस्तार क्या है? -संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (b) में प्रयुक्त अभिव्यक्ति "हिंदुओं के वर्ग" का क्या अर्थ है? दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं कर सकते वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणुगोपाल ने इस मामले के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस फैसले का असर देश के लगभग 1.5 अरब लोगों पर पड़ेगा और दुनिया भर के संवैधानिक विद्वान इसकी समीक्षा करेंगे। उन्होंने धर्म के मामलों में राज्य के बढ़ते हस्तक्षेप पर भी चिंता व्यक्त की। फिलहाल सुनवाई जारी है और इसका परिणाम भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन को नई दिशा देगा। बुधवार को शीर्ष अदालत ने कहा था कि धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं से उत्पन्न होने वाले मुद्दों पर निर्णय देते समय सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता है लेकिन न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि वह ऐसी प्रथाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं कर सकता।

FASTag फ्रॉड में सावधानी बरतें, NHAI की चेतावनी: छोटी गलती भी पड़ सकती है महंगी

नई दिल्ली FASTag ऐनुअल पास को लेकर बड़ा फ्रॉड हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। फास्टैग ऐनुअल पास से जुड़ा यह स्कैम फर्जी वेबसाइट्स के जरिए किया जा रहा है। इसमें जालसाज यूजर्स को ऑफिशियल प्लेटफार्म्स जैसे दिखने वाले फर्जी पोर्टल्स पर पेमेंट करने के लिए कहते हैं। चिंता की बात यह है कि ये फर्जी वेबसाइट्स पेड एडवर्टाइजमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की ट्रिक्स से गूगल जैसे सर्च इंजन के रिजल्ट्स में टॉप पर आती हैं। अथॉरिटी ने यूजर्स से फाइनेंशियल लॉस से बचने के लिए FASTag से जुड़ी सर्विसेज के लिए केवल वेरिफाइड चैनल्स पर ही भरोसा करने की सलाह दी है। यूजर्स को नहीं मिलता कोई कन्फर्मेशन इन वेबसाइट्स पर पहुंचने पर यूजर्स से मोबाइल नंबर, वीइकल रेजिस्ट्रेशन इन्फर्मेशन और पेमेंट क्रीडेंशियल्स जैसी सेंसिटिव इन्फर्मेशन को एंटर करने के लिए कहा जाता है। हालांकि, इंटरफेस देखने में असली लगता है, लेकिन पेमेंट स्कैमर्स के अकाउंट में चला जाता है। कई मामलों में यूजर्स को या तो कोई कन्फर्मेशन नहीं मिलता या उन्हें नकली रसीद पकड़ा दी जाती हैं और उनके पास कोई वैलिड FASTag नहीं रह जाता। असली और नकली वेबसाइट्स को पहचान पाना मुश्किल इससे पहले यह चेतावनी गृह मंत्रालय के Indian Cyber Crime Coordination Centre ने जारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि कैसे जालसाज नैशनल हाइवे यूजर्स को निशाना बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। सलाह में इस बात पर जोर दिया गया है कि ये स्कैम अधिक सोफिस्टिकेटेड होते जा रहे हैं, जिससे यूजर्स के लिए पहली नजर में असली और नकली वेबसाइट्स के बीच अंतर कर पाना मुश्किल हो गया है। FASTag धोखाधड़ी से खुद के ऐसे रखें सेफ NHAI ने यूजर्स को ऐसी धोखाधड़ी से सेफ रहने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है, जिसमें सबसे पहला FASTag ऐनुअल पास सर्विस का यूज हमेशा Rajmargyatra ऐप जैसे ऑफिशियल सोर्स से करना है। इसके अलावा आप नीचे बताई गई बातों को भी ध्यान में रखें: – ऑनलाइन स्रच करते समय स्पॉन्सर्ड लिंक या अनजान एडवर्टाइजमेंट पर क्लिक करने से बचें। – कोई भी पर्सनल या पेमेंट डीटेल एंटर करने से पहले वेबसाइट URL की दोबारा जांच करें। – OTP, कार्ड डीटेल या लॉगिन क्रिडेंशियल जैसे सेंसिटिव इन्फर्मेशन कभी भी शेयर न करें। – अगर कोई वेबसाइट संदिग्ध लगे या गैर-जरूरी परमिशन मांगे, तो तुरंत उस वेबसाइट को बंद कर दें।

भारत करेगा ₹75,272 करोड़ की बड़ी डिफेंस डील, जर्मनी से आएगी दुनिया की सबसे साइलेंट सबमरीन टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली/बर्लिन भारत और जर्मनी के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी डील होने जा रही है. यह डील 8 अरब डॉलर (करीब 75,272 करोड़ रुपये) की है और अगले 90 दिनों के अंदर इस पर फाइनल मुहर लग सकती है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के बाद इसकी जानकारी दी है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत में छह एडवांस सबमरीन बनाई जाएंगी. भारत सरकार वर्तमान में इस एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी कदम उठा रही है. राजनाथ सिंह इस समय जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।  भारत और जर्मनी की सबसे बड़ी डिफेंस डील क्या है? भारत और जर्मनी के बीच होने वाला यह समझौता डिफेंस सेक्टर में एक नया इतिहास रचने जा रहा है. 8 अरब डॉलर यानी करीब 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की यह डील सबमरीन के निर्माण से जुड़ी है. जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कील शहर में राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद भरोसा जताया कि अगले तीन महीनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. यह पहली बार होगा जब जर्मनी अपनी सबमरीन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी किसी गैर-यूरोपीय देश को ट्रांसफर करेगा. इस डील के लिए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच पहले ही चर्चा हो चुकी है।  भारतीय नौसेना की ताकत कैसे बढ़ेगी? इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल छह सबमरीन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड साथ मिलकर काम करेंगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद कील में स्थित TKMS की शिपयार्ड फैसिलिटी का दौरा किया. वहां उन्होंने टाइप 212 क्लास की सबमरीन की वर्किंग और उसकी क्षमताओं का जायजा लिया. यह सबमरीन अपनी साइलेंट ऑपरेटिंग क्षमता और मारक क्षमता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इनके आने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।  डिफेंस रोडमैप से दोनों देशों को क्या मिलेगा? सिर्फ सबमरीन ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप पर भी साइन किए हैं. इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य डिफेंस इक्विपमेंट का साथ मिलकर विकास और प्रोडक्शन करना है. भारत और जर्मनी अब हाई-टेक टेक्नोलॉजी पर मिलकर काम करेंगे. इसमें संयुक्त ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे अहम हिस्से भी शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन की ट्रेनिंग के लिए भी एक समझौता हुआ है. राजनाथ सिंह ने बर्लिन में पिस्टोरियस के साथ क्षेत्रीय और ग्लोबल सुरक्षा चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की है।  क्या यह डील चीन और पाकिस्तान के लिए चुनौती है? हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए भारत के लिए अपनी अंडरवाटर ताकत बढ़ाना बहुत जरूरी है. वर्तमान में भारत की सबमरीन फ्लीट को अपडेट करने की जरूरत है. जर्मनी के साथ यह डील इसी कमी को पूरा करेगी. यह समझौता न केवल भारत की सुरक्षा को पुख्ता करेगा, बल्कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा देगा. दोनों देशों ने सैन्य संबंधों को अपनी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार बताया है. इससे भविष्य में भारत की निर्भरता अन्य देशों से कम होगी और अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने में मदद मिलेगी। 

अमेरिका का ईरानी टैंकर पर धावा, हिंद महासागर में 3 जहाजों की घेराबंदी के बाद तनाव बढ़ा

तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव अब समुद्र के बीच खुली ताकत की लड़ाई में बदलता जा रहा है. ईरान के जहाज चकमा देकर होर्मुज को पार कर रहे हैं. लेकिन अब ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने एशियाई समुद्री इलाकों में ईरान के कम से कम तीन तेल टैंकरों को रोक लिया है और उन्हें उनके रास्ते से हटा दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये जहाज भारत, मलेशिया और श्रीलंका के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद थे. अमेरिकी सेना ने इन्हें इंटरसेप्ट कर उनकी दिशा बदल दी, जिससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका अब ईरान के तेल व्यापार को पूरी तरह रोकने की रणनीति पर काम कर रहा है।  इन टैंकरों में ‘डीप सी’, ‘सेविन’ और ‘डोरेना’ शामिल हैं. ‘डीप सी’ एक बड़ा सुपरटैंकर है, जो आंशिक रूप से कच्चे तेल से भरा हुआ था और आखिरी बार मलेशिया के तट के पास देखा गया था. वहीं ‘सेविन’ नाम का छोटा टैंकर अपनी क्षमता का करीब 65 प्रतिशत तेल लेकर चल रहा था  भारत के करीब ईरानी जहाज पर अमेरिका का एक्शन रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अहम जहाज ‘डोरेना’ बताया जा रहा है, जो करीब 20 लाख बैरल कच्चे तेल से पूरी तरह भरा हुआ था. यह जहाज चार दिन पहले भारत के दक्षिणी तट के पास देखा गया था, जिसके बाद अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत ने उसे हिंद महासागर में एस्कॉर्ट करते हुए अपनी निगरानी में ले लिया. इसके अलावा ‘डेर्या’ नाम के एक और ईरानी टैंकर को भी रोके जाने की खबर है. यह जहाज भारत में अपना तेल उतार नहीं सका था, क्योंकि ईरानी तेल खरीदने की अमेरिकी छूट खत्म हो चुकी थी।  होर्मुज में अमेरिका ने बनाई दीवार! अमेरिका ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को और कड़ा कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अब तक 29 जहाजों को वापस लौटने या दिशा बदलने के लिए मजबूर किया जा चुका है. यह पूरी कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही तनाव का केंद्र बना हुआ है. ईरान ने भारत आ रहे एक जहाज को कब्जे में ले लिया. वहीं ईरान के तेल टैंकर अमेरिका को चकमा देकर होर्मुज से निकल रहे हैं। 

हुमायूं कबीर पर हमला, सुवेंदु सरकार को दौड़ाकर पीटा, बंगाल में जगह-जगह हिंसा की वारदातें

 कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है. एक तरफ मतदाता भारी संख्या में पोलिंग बूथों पर पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य के विभिन्न हिस्सों से आगजनी, मारपीट और तोड़फोड़ के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, सिलिगुड़ी और मालदा में जमकर बवाल हो रहा है. मुर्शिदाबाद में उपद्रवियों ने हुमायूं कबीर की कार पर लाठी और ईंटों से हमला किया।  मुर्शिदाबाद के नौदा में उस समय हड़कंप मच गया जब AJUP प्रमुख और रेजीनगर से उम्मीदवार हुमायूं कबीर के काफिले पर उपद्रवियों ने ईंटों और लाठियों से हमला कर दिया. इस दौरान टीएमसी और एजेयूपी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी झड़प हुई. कबीर की पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई. उन्होंने इस हमले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।  कूचबिहार में केंद्रीय बलों का एक्शन कूचबिहार के तूफानगंज इलाके में मतदान के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई. स्थिति को नियंत्रण से बाहर होता देख वहां तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों ने मोर्चा संभाला. सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज कर और भीड़ को खदेड़कर स्थिति को तितर-बितर किया. आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व मतदाताओं को डराने का प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद जवानों को बल प्रयोग करना पड़ा।  मुर्शिदाबाद-कूचबिहार में बवाल दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज (Kumarganj) विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई है. यहाँ के भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थकों ने हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि सुवेंदु सरकार को सूचना मिली थी कि एक विशेष बूथ पर 'बूथ जैमिंग' की जा रही है. जब वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, तो उन पर लाठियों और घूंसों से हमला किया गया. सुवेंदु सरकार ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में टीएमसी के गुंडों ने उन्हें पीटा।  मालदा में हंगामा मालदा के मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र में बालुआचारा हाई स्कूल स्थित मतदान केंद्र के बाहर EVM में खराबी आने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. चुनाव आयोग के अधिकारी के पहुंचने में देरी होने पर वोटर भड़क गए और उन्होंने अधिकारी को घेर लिया और बंधक सा बना लिया. कई मतदाता अफसर की बांह पकड़कर उन्हें खींचते हुए और उनके साथ हाथापाई करते हुए दिखाई दिए।  तृणमूल कैंप ऑफिस में तोड़फोड़ मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब तृणमूल कांग्रेस के ही दो गुट आपस में भिड़ गए. यह विवाद इतना बढ़ गया कि राज्य के निवर्तमान मंत्री ताज़मुल हुसैन के पैतृक गांव बांगरुआ (बूथ संख्या 200 और 201) में टीएमसी के एक चुनावी कैंप ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की गई।  हरिश्चंद्रपुर-I ब्लॉक पंचायत समिति में टीएमसी के नेता स्वपन अली ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मंत्री ताजमुल हुसैन और उनके समर्थक खुलेआम कांग्रेस पार्टी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं. स्वपन अली का आरोप है कि मंत्री के ही निर्देश पर उनके समर्थकों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर टीएमसी के कैंप ऑफिस पर हमला किया, पार्टी के झंडे फाड़े और बैनरों को क्षतिग्रस्त कर दिया।  सिलीगुड़ी में भिड़े TMC और बीजेपी कार्यकर्ता भिड़े सिलीगुड़ी के जगदीश चंद्र विद्यापीठ स्थित बूथ संख्या 26/237 पर वोटिंग के बीच मतदान केंद्र के बाहर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं के बीच अचानक बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते यह विवाद गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी।  घटना के वक्त इलाके से बीजेपी उम्मीदवार शंकर घोष भी मौके पर मौजूद थे. केंद्र पर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया. सुरक्षा बलों की मुस्तैदी की वजह से प्रिय घटना टल गई और मतदान की प्रक्रिया को फिर से सुचारू रूप से शुरू कराया जा सका।  '5 स्पेशल ट्रेनों से वोटर लाए गए' आसनसोल उत्तर सीट से टीएमसी प्रत्याशी मलय घटक ने दावा किया कि वोटिंग से एक दिन पहले रात में पांच विशेष ट्रेनें राज्य में पहुंची हैं, जिनमें से चार गुजरात और एक मध्य प्रदेश से आई हैं. बिहार से भी बसों के जरिए बाहरी लोगों को लाया गया है. उनकी टीम ने इन बसों और संदिग्ध गतिविधियों के फोटो और अन्य सबूत जुटाए हैं. मामले की शिकायत चुनाव आयुक्त से की गई है।  गाड़ी में EVM मिलने का दावा जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में ईवीएम को लेकर विवाद हो गया. श्रीपुर इलाके में एक सड़क किनारे ढाबे के पास खड़ी एक गाड़ी में ईवीएम मिलने का आरोप सामने आया है, जिससे चुनावी माहौल गरमा गया. स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना था कि 'ऑन इलेक्शन ड्यूटी- जमुरिया AC 279' लिखी गाड़ी में कई रिजर्व EVM रखी हुई थीं, लेकिन मौके पर कोई सुरक्षा कर्मी नहीं था। 

बद्रीनाथ के द्वार खुले वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ, पूरा धाम गूंज उठा जयकारों से

  चमोली विश्व प्रसिद्ध चारधाम में शुमार भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान से खोल दिए गए हैं. भगवान बदरी विशाल के कपाट सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर 6 महीने के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए. इस मौके पर बदरीनाथ मंदिर को करीब 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया. जिससे धाम की छटा देखते ही बन रही है. इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।  सुबह 6:15 बजे खुले बदरीनाथ धाम के कपाट:बता दें कि गुरुवार यानी 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दर्शनों के लिए खोल दिए गए हैं. कपाट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर 'जय बदरी विशाल' के जयकारों से गूंज उठा. इस मौके पर हजारों लोग कपाट खुलने के साक्षी बने. जो भगवान बदरी विशाल के दर्शन और खास पल के साक्षी बन कर खुद को भाग्यशाली मानते दिखे. कपाट खुलते ही भक्तों की लाइन दर्शनों के लिए लग गई हैं. खुद सीएम धामी बदरीनाथ में मौजूद हैं।  आस्था, भक्ति और श्रद्धा से जुड़े चारधाम यात्रा का आगाज:वहीं, अब बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा 2026 पूरी तरीके से सुचारू हो गई है. गौर हो कि सबसे पहले यानी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए थे. जिसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट भी खोले गए. इसके साथ ही अब आस्था, भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है. चारधाम यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह श्रद्धालुओं में देखने को मिल रहा है।  बदरीनाथ धाम में तमाम व्यवस्थाएं जुटाई गई हैं. बदरी केदारनाथ मंदिर समिति से लेकर पुलिस ने सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद की है. ताकि, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. चमोली एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने चारधाम यात्रा ड्यूटी में तैनात पुलिस बल को भीड़ नियंत्रण के साथ यात्रियों के साथ 'अतिथि देवो भवः' एवं उत्तराखंड पुलिस की थीम 'मित्रता, सेवा, सुरक्षा' की भावना के अनुरूप व्यवहार करने को कहा है. ताकि, श्रद्धालु उत्तराखंड से पॉजिटिव अनुभव लेकर लौटें।  क्यों कहा जाता है बदरीनाथ धाम को भू यानी धरती का बैकुंठ?बता दें कि भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम चमोली जिले में अलकनंदा नदी तट पर स्थित है. जो हिंदुओं के प्रमुख और अहम तीर्थ स्थलों में ये एक है. यह मंदिर समुद्र तल से करीब 3,133 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है. जो देश के चारधाम (बदरीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम) के अलावा यह छोटे चारधाम (उत्तराखंड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ) में भी से एक है।  बदरीनाथ धाम को भू बैकुंठ यानी धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है. यहां मंदिर परिसर में 15 मूर्तियां हैं. जिनमें सबसे प्रमुख भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची काले पत्थर (शालिग्राम) की प्रतिमा है. बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु ध्यान मग्न मुद्रा में विराजमान हैं. जबकि, भगवान विष्णु के प्रतिमा के बगल में कुबेर जी, लक्ष्मी जी और नारायण जी की मूर्तियां है।  बदरीधाम में बदरी नारायण के 5 स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है. भगवान विष्णु के इन 5 रूपों को 'पंच बदरी' के नाम से भी जाना जाता है. बदरीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा अन्य चार बद्रियों के मंदिर भी चमोली जिले में ही स्थित हैं. बदरीनाथ पांचों मंदिरों में से मुख्य एवं अहम है. इसके अलावा योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, वृद्ध बदरी और आदिबदरी शामिल हैं।  दक्षिण भारत से आते हैं बदरीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी: माना जाता है कि भगवान नारायण यानी विष्णु को समर्पित बदरीनाथ मंदिर को आदि गुरु शंकराचार्य ने चारों धाम (बदरीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम) में से एक के रूप में स्थापित किया था. यह मंदिर 3 भागों में बंटा हुआ है. जिसमें गर्भगृह, दर्शन मंडप और सभामंडप शामिल हैं. शंकराचार्य व्यवस्था के तहत बदरीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से आते हैं। 

E85 पेट्रोल आ रहा है भारत में, गाड़ियों में 85% एथेनॉल का होगा इस्तेमाल, तैयारी जोरों पर

  नई दिल्ली E85 Blended Petrol: पश्चिमी एशिया में युद्ध का तनाव है, तेल महंगा है, दुनिया भर ही निगाहें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हैं. सबको बस एक फिकर है अगले पल क्या होगा. इसी बीच अब देश के पेट्रोल की कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. अभी तक E20 फ्यूल (20% एथेनॉल वाला पेट्रोल) की चर्चा हो रही थी, लेकिन अब सीधा E85 की तैयारी हो रही है. मतलब पेट्रोल में पेट्रोल कम और एथेनॉल ज्यादा. या यूं कहें कि, भारत में अब गाड़ी फ्यूल पर नहीं बल्कि शराब पर दौड़ेगी. सरकार अब ऐसा फ्यूल लाने की तैयारी में है, जो कारों को चलाएगा भी और देश की तेल पर निर्भरता भी घटाएगा. सवाल ये है कि क्या आपकी गाड़ी इस नए बदलाव के लिए तैयार है? आइये विस्तार से जानते हैं पूरा मामला-  सरकार जल्द जारी करेगी ड्राफ्ट  ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार बहुत जल्द E85 फ्यूल को लेकर ड्राफ्ट नियम जारी कर सकती है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि, इस पर सरकार के भीतर सहमति बन चुकी है और मार्केट लेवल पर भी तैयारी शुरू हो गई है. शुरुआती टेस्टिंग भी की जा चुकी है, जिससे यह साफ है कि योजना अब जमीन पर उतरने के काफी करीब है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक E85 को एक अलग फ्यूल ग्रेड के रूप में पेश किया जाएगा. यह मौजूदा E20 पेट्रोल से अलग होगा. अभी E20 में एथेनॉल की मात्रा लगभग 27% तक जा सकती है, जबकि E85 में यह सीधे 85% तक होगी।  तेल संकट के बीच बड़ी तैयारी पूरी दुनिया इस समय तेल संकट का सामना कर रही है, खासकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है, ऐसे में E85 जैसे फ्यूल से आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है. सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि, पिछले एक दशक से एथेनॉल ब्लेंडिंग के चलते भारत करोड़ों बैरल कम तेल मंगा रहा है।  पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च में अपने एक बयान में कहा था कि, "एक दशक पहले तक पेट्रोल में केवल 1-2% तक एथेनॉल ब्लेंडिंग करते थें. लेकिन अब हम पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहे हैं, जिसके कारण सालाना करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम पेट्रोल इंपोर्ट करना पड़ रहा है।  एथेनॉल क्यों है खास एथेनॉल देश में ही गन्ना, मक्का और अनाज से बनाया जाता है. यह एक रिन्यूएबल फ्यूल है और पेट्रोल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है. यही वजह है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फ्लेक्स-फ्यूल कार का इस्तेमाल कर चुके हैं और उन्होंने 100% एथेनॉल पर चलने वाली कार को देश को दिखाया था. वो लगातार वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहनों के निर्माण पर जोर देते रहे हैं।  E85 के लिए चाहिए खास इंजन E85 फ्यूल का इस्तेमाल हर गाड़ी में नहीं किया जा सकता. इसके लिए खास तरह के इंजन यानी फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) की जरूरत होती है. सामान्य पेट्रोल इंजन में अगर E85 इस्तेमाल किया जाए तो इससे इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं, परफॉर्मेंस गिर सकती है और गाड़ी स्टार्ट होने में भी दिक्कत आ सकती है।  इतना ही नहीं, E85 फ्यूल के लिए पेट्रोल पंप पर अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. इसके लिए अलग नोजल और स्टोरेज सिस्टम की जरूरत होगी, ताकि E20 और E85 दोनों को अलग-अलग रखा जा सके. क्योंकि E85 फ्यूल के बाजार में आने से पहले इससे चलने वाले वाहनों का बाजार में होना जरूरी है. ऐसे में सरकार E20 फ्यूल की बिक्री तत्काल नहीं बंद करेगी, बल्कि इसे फेज्ड मैनर में हटाया जाएगा।  कब से चल रही है तैयारी भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग की योजना करीब एक दशक से चल रही है. नीति आयोग ने 2021 में अपनी रोडमैप रिपोर्ट में E85 का जिक्र किया था. इसके अलावा 2016 में ही E85 और E100 फ्यूल के लिए नोटिफिकेशन जारी किया जा चुका था. 2022 में सरकार ने E5 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के टेस्ट नियम भी तय किए थे।  E85 फ्यूल से देश को कई फायदे मिल सकते हैं. इससे कच्चे तेल का आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि एथेनॉल की मांग बढ़ेगी. हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की माइलेज थोड़ा कम हो सकता है. वाहन निर्माता कंपनियों को तेजी से नए इंजन तैयार करने होंगे और तेल कंपनियों को नए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना पड़ेगा. साथ ही ग्राहकों को भी सही जानकारी देना जरूरी होगा ताकि वे गलती से E85 फ्यूल को सामान्य गाड़ियों में इस्तेमाल न करें।  कुल मिलाकर, E85 फ्यूल भारत के ऑटो और एनर्जी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाएगा, लेकिन इसके सफलता पूर्वक लागू होने के लिए सरकार, कंपनियों और आम लोगों सभी की तैयारी जरूरी होगी।   

महीने में 2 बार सैलरी मिलेगी, सरकार का नया कदम, जानें पूरी जानकारी और गणित

काठमांडू  खर्च बढ़ाने और देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नेपाल की नई बालेंद्र शाह सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर बड़ा फैसला किया है. ताजा जानकारी के मुताबिक हर सरकारी कर्मियों को अब से हर दो हफ्ते में सैलरी दी जाएगी।  फाइनेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों ने इस संबंध में  बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने  इस बारे में फ़ैसला लिया और जरूरी इंतजाम करने के लिए फाइनेंशियल कंट्रोलर जनरल ऑफिस को एक लेटर भेजा है. नए नियम के अनुसार, कर्मचारियों की मौजूदा महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा और हर दो हफ्ते में इसे दिया जाएगा. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी बांटने का निर्देश दिया है।  वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मकसद यह पक्का करना है कि कर्मचारियों को समय पर पेमेंट मिले, जिससे खर्च बढ़ेगा और इकॉनमी में नई जान आएगी. कंट्रोलर जनरल के ऑफिस के एक अधिकारी ने इस बात को कन्फर्म किया है कि मंत्रालय से एक सर्कुलर मिला है और यह फैसला जल्द ही लागू किया जाएगा।  सिलसिलेवार समझें सैलरी का पूरा गणित     भारत के पड़ोसी देश नेपाल में अब से हर सरकारी कर्मचारियों को 15-15 दिन सैलरी दी जाएगी.     इसका मतलब महीने की सैलरी को दो हिस्सों में बांटा जाएगा.     इसके पीछे सरकार का उद्देश्य देश की इकॉनमी को मजबूत करना है.     इसके पीछे मार्केट खर्च को बढ़ाने की कोशिश भी है.     कानूनी बदलाव की भी जरूरत हो सकती है.  अब जानते हैं सरकार ने क्यों लिया यह फैसला     काफी समय से नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी धीमी चल रही है.     नेपाल की नई सरकार का मानना है कि महीने में दो बार सैलरी मिलने से लोगों के पास पैसा जल्दी-जल्दी पहुंचेगा और वे लोग इसे खर्च भी करेंगे.     खर्च बढ़ने से बाजार में सामानों की डिमांड बढ़ेगी।      रुपयों का फ्लो तेजी से होगा.     इससे इकॉनमी की स्थिति सुधरेगी. यह भी जानें पहले सैलरी महीने में एक बार आती थी. नए नियम के मुताबिक अब हर 15 दिन पर सैलरी आया करेगी. ऐसे समझिए, जैसे नेपाल में किसी सरकारी कर्मचारी की महीने की सैलरी 50 हजार है, तो 15-15 दिन पर उसे 25-25 हजार रुपये मिलेंगे।  अन्य देशों में भी लागू है सैलरी का यह नियम नेपाल ऐसा पहला देश नहीं है, जहां हर 15 दिन पर सैलरी मिला करेगी. अन्य देशों जैसे- अमेरिका में भी हर सरकारी कर्मचारी को हफ्ते में 2 बार सैलरी दी जाती है. इसके अलावा कनाडा में भी सैलरी का यह नियम लागू है. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में भी कुछ सेक्टर्स में हर 15 दिन में सैलरी दी जाती है. वहीं, मैक्सिको में भी यह नियम फॉलो किया जाता है। 

माता वैष्‍णो देवी में चांदी के चढ़ावे का खेल, ₹520 करोड़ फिसले, कैंसर का खतरा भी सामने आया

कटरा   माता वैष्‍णो देवी के दरबार में चढ़ने वाली चांदी में बड़ा खेल हो गया है. इस खेल की वजह से माता वैष्‍णो देवी श्राइन बोर्ड के हाथ 520 करोड़ रुपए आते-आते रह गए है. इतना ही नहीं, चांदी के इस खेल के बीच एक ऐसी साजिश भी खुलासा हुआ है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जुड़ा हुआ है. दरअसल, बीते दिनों माता के दरबार में श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाई गई चांदी को गलाने के लिए सरकारी टकसाल में भेजा गया था।  श्राइन बोर्ड की तरफ से भेजी गई चांदी करीब 20 टन रही होगी. वहीं इस चांदी को लेकर सरकारी टकसाल से जो खबर सामने आई, वह सभी को चौंकाने के लिए काफी थी. टकसाल की तरह से श्राइम बोर्ड को बताया गया कि उनकी तरफ से भेजी गई 20 टन चांदी में से करीब 5 से 6 फीसदी ही चांदी है. बाकी कैडमियम, लोहा और जिंक जैसे धातु हैं. बोर्ड को अनुमान था कि इस 20 टन चांदी से उन्‍हें करीब 550 करोड़ रुपए मिलेंगे. लेकिन, असल में चांदी सिर्फ 30 करोड़ की ही निकली।  चांदी के सिक्‍कों में मिली कैंसर देने वाली धातु     इस मामले की जांच में यह भी सामने आया कि इन नकली चांदी के सिक्‍कों को बनाने के लिए जिन धातुओं का इस्‍तेमाल किया गया था, उसमें एक धातु ऐसी थी जो कैंसर जैसी बीमारी पैदा कर सकती है।      दरअसल, माता वैष्‍णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु दरबार में चढ़ाने के लिए अपने साथ चांदी के छत्र या सिक्‍के लेकर आते हैं. माना जा रहा है ये नकली चांदी के सिक्‍के श्रद्धालुओं ने यात्रा मार्ग या कटरा स्थित दुकानों से खरीदे थे।      टकसाल में चांदी को गलाते समय पता चला कि इन सिक्‍कों को कैडियम, जिंक और आयरन मिलाकर बनाए गए थे. इसमें चांदी तो सिर्फ नाम मात्र की थी. टकसाल में 550 करोड़ रुपए की चांदी में सिर्फ 30 करोड़ रुपए की ही चांदी निकली।      कैडमियम चांदी जैसी दिखने वाली एक जहरीली औद्योगिक धातु है, जो बिल्‍कुल चांदी की तरह दिखती है. वहीं सिक्‍कों में आयरन का इस्‍तेमाल वजन बढ़ाने के लिए किया जाता था. वहीं, जिंक का इस्‍तेमाल लागत को कम करने के लिए किया जाता है।      कैडमियम एक कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ है, जिस पर ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड (बीआईएस) ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है. कैडमियम को पिघलाने पर जहरीला धुआं निकलता है, जो फेफड़ों और किडनी के लिए नुकसान दायक है।      सेहत को होने वाले नुकसान को देखते हुए टकसाल ने इस चढ़ावे वाली चांदी को पिघलाने से मना कर दिया था. टकसाल स्‍टाफ ने ज्‍यादा चांदी वाले टुकड़ों को हाथ से अलग करने में लगभग तीन महीने का समय लगा था।  धोखाधड़ी से बचने के लिए श्रद्धालु किन बातों का ध्‍यान रख सकते हैं? चांदी की शुद्धता के लिए बीआईएस ने 999 और 925 कोड निर्धारित किया है. इसके अलावा 6 अंकों वाला एचयूआईडी नंबर भी चांदी में दर्ज होता है. आप एचयूआईडी कोड को बीआईएस के ‘BIS Care App’ में डालकर ज्‍वैलर की जानकारी और शुद्धता के बारे में जानक सकते हैं. इसके अलावा, किसी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए छत्र और सिक्कों को केवल कटरा, अर्धकुंवारी या भवन में स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक दुकानों से ही खरीदें।