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दुर्ग पुलिस महकमे में बदलाव, 11 अफसरों के तबादले के साथ 7 पदस्थापना अपडेट

दुर्ग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रविवार देर रात सीनियर एसपी ने पुलिस विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। इस आदेश के तहत 5 थानों के टीआई और 2 पुलिस चौकियों के प्रभारी सहित कुल 11 पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक— जितेंद्र वर्मा बने भिलाई नगर टीआई रामेंद्र कुमार सिंह को जामुल थाना प्रभारी की जिम्मेदारी बसंत कुमार बघेल अमलेश्वर थाना प्रभारी नियुक्त प्रशांत मिश्रा अब वैशाली नगर टीआई राजेश मिश्रा को भेजा गया रक्षित केंद्र दुर्ग प्रकाशकांत को भी रक्षित केंद्र दुर्ग में पदस्थ किया गया अमित अंदानी बने पुलगांव थाना प्रभारी खेलन साहू को अंजोरा चौकी प्रभारी बनाया गया संतोष साहू साइबर सेल दुर्ग भेजे गए मनोज यादव को भिलाई-3 में पदस्थ किया गया आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। त्योहारी सीजन और कानून-व्यवस्था की तैयारियों को देखते हुए यह तबादले किए गए हैं। पुलिस विभाग का दावा है कि इस कदम से पुलिसिंग की कार्यकुशलता, बेहतर समन्वय और क्षेत्रीय नियंत्रण मजबूत होगा। दुर्ग जिले में यह फेरबदल सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में हादसा — ट्रॉमा सेंटर में लगी आग, सात लोगों की जान गई

जयपुर राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू वार्ड में अचानक आग लगने से 7 मरीजों की मौत हो गई। मृतकों में 3 महिलाएं भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर आग ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू के स्टोर रूम में लगी, जहां मेडिकल पेपर, ब्लड सैंपल ट्यूब्स और आईसीयू से जुड़ा अन्य सामान रखा गया था। आग की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर और सीनियर डॉक्टर ने बताया कि हादसे के समय आईसीयू में कुल 11 मरीज भर्ती थे। वहीं बगल वाले दूसरे आईसीयू में 13 मरीज और थे। आग लगते ही स्टाफ ने तुरंत अलार्म बजाया और मरीजों को शिफ्ट करने की कोशिश की गई लेकिन धुएं और आग की चपेट में आने से 7 मरीजों की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन रोते-बिलखते नजर आए, वहीं कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और तकनीकी टीमों को शॉर्ट सर्किट की पुष्टि के लिए लगाया गया है। सरकार और अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सरकार की प्री-पेड बिजली योजना पर रोक, इंदौर नगर निगम और पुलिस ने नहीं किया अपनाना

इंदौर  सरकार द्वारा शुरू किया गया  प्री-पेड बिजली कनेक्शन सिस्टम खुद सरकारी विभागों के लिए चुनौती बन गया है। अगस्त महीने तक शहर के करीब 1300 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड पर लाना था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी केवल 350 कनेक्शन ही इसमें जोड़े जा सके हैं। खास बात यह है कि नगर निगम और पुलिस प्रशासन जैसे बड़े उपभोक्ता भी अभी तक इस प्रणाली को अपनाने को तैयार नहीं हैं। आधे से ज्यादा विभागों ने कोषालय को न तो बिल भेजे हैं और न ही अग्रिम भुगतान किया है। योजना के तहत मोबाइल की तरह बिजली के लिए भी पहले रिचार्ज करवाने की व्यवस्था की जानी है। शुरुआत में सरकारी दफ्तरों को इसमें शामिल किया गया है, इसके बाद व्यावसायिक और घरेलू कनेक्शनों पर भी यह प्रणाली लागू की जाएगी। बिजली कंपनी की कोशिशें नाकाम, विभागों की बेरुखी बरकरार पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के इंदौर-उज्जैन संभाग में 15 जिले आते हैं। योजना के पहले चरण में इन जिलों के करीब 11 हजार सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड में लाने का लक्ष्य रखा गया था। इंदौर शहर के लगभग 1300 सरकारी कनेक्शन इस सूची में थे, लेकिन अगस्त तक काम पूरा नहीं हो सका। बिजली कंपनी ने कोषालय के माध्यम से दो माह के अग्रिम बिल जमा कराने की व्यवस्था भी बना दी थी, परंतु वास्तविक अमल की रफ्तार बेहद धीमी रही। दिलचस्प बात यह है कि प्री-पेड योजना में सरकारी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की छूट भी दी जा रही है, इसके बावजूद विभागों की अनदेखी जारी है। निजी उपभोक्ताओं के लिए भी भविष्य में यह योजना लागू करने की तैयारी थी, लेकिन शुरुआती चरण की धीमी रफ्तार से अब यह योजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। जिन विभागों का बिजली खर्च ज्यादा, वही कर रहे उपेक्षा वित्त मंत्रालय ने सभी जिलों को अगस्त से पहले दो माह के अग्रिम बिल भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर लगाकर सिस्टम अपग्रेड कर लिया, भुगतान फाइलें भेज दीं, लेकिन कई सरकारी विभागों ने सहयोग नहीं किया। जिन विभागों पर सबसे अधिक बिजली खर्च होता है, उन्हीं की फाइलें अटकी पड़ी हैं। नगर निगम और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। न तो कोषालय को अग्रिम भुगतान की जानकारी दी गई और न ही सहमति पत्र भेजे गए। अस्पताल, थाने और जल प्रदाय जैसी आवश्यक सेवाओं को पहले चरण से फिलहाल बाहर रखा गया था, फिर भी जिन कनेक्शनों को शामिल किया जाना था, वहां भी प्रक्रिया सुस्त है। इंदौर में 7.75 लाख उपभोक्ताओं के लिए तैयारी, पर गति धीमी इंदौर शहर में करीब 7.75 लाख उपभोक्ता हैं और सभी को भविष्य में प्री-पेड सिस्टम में लाने की योजना है। अधिकांश जगहों पर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं और सिस्टम भी अपग्रेड किया जा चुका है। पहले चरण में लगभग 1300 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड मोड पर देना तय था, लेकिन अब तक केवल 350 कार्यालयों ने दो माह का अग्रिम बिल जमा किया है। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता डी.के. गांठें ने बताया कि “कंपनी ने पूरी तैयारी कर ली है, अब विभागों से अपेक्षित सहयोग मिलना बाकी है।” 

परासिया पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी, स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा मांगा; दो मौतें सरकारी रिकॉर्ड से गायब: नाथ का आरोप

छिंदवाड़ा   जहरीले सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले ने पूरे प्रदेश और देश को झकझोर दिया है। प्रशासन की लापरवाही भी खुलकर सामने आई है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि अंतिम संस्कार से पहले किसी भी बच्चे का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। इसी वजह से जिले के मोक्ष धाम से पोस्टमार्टम के लिए 2 साल की बच्ची का शव कब्र से निकालना पड़ा। बच्ची के शव को गड्ढे से बाहर निकाला गया कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन के बाद 2 साल की योगिता ठाकरे की हालत बिगड़ गई थी और नागपुर के गणेश अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन विवाद बढ़ने पर रविवार को प्रशासन की मौजूदगी में शव को कब्र से निकालकर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी; स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा परासिया में 11 बच्चों समेत जिले में 14 बच्चों की मौत प्रतिबंधित कोल्ड्रिफ सिरप पीने से हुई है। इस घटना को लेकर पूरे प्रदेश में हड़कप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जबलपुर का प्रस्तावित दौरा निरस्त कर सोमवार को परासिया दौरे का कार्यक्रम आनन फानन में बनाया गया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव दोपहर 1.40 बजे छिंदवाड़ा हवाई पट्टी पहुंचेंगे। इसके बाद वह हेलीकॉप्टर के जरिए परासिया जाएंगे। दोपहर 1.55 से 3.25 तक परासिया में मृतक बच्चों के स्वजनों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद छिंदवाड़ा लौटकर वह भोपाल के लिए रवाना होंगे। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मृतक बच्चों के स्वजनों से मुलाकात करने पहुंच गए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मांगा स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा जीतू पटवारी ने परासिया पहुंचकर पीड़ित अभिभावकों से मुलाकात की। जीतू पटवारी ने कहा कि इस मामले में डॉक्टर को गिरफ्तार करने से काम नहीं चलेगा। बल्कि इस गंभीर लापरवाही के लिए स्वास्थ्य मंत्री, पीएस को इस्तीफा देना चाहिए। पटवारी ने कहा कि इस मामले में लीपापोती की जा रही है। डॉक्टर का काम दवाई लिखना होता है। अगर इस प्रकार पूरे प्रदेश में दवाई वितरित हुई है तो क्या सब डॉक्टर पर इसी तरह कार्रवाई की जाएगी। जरूरत है कि दवा कंपनी और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। नेता प्रतिपक्ष ने उठाया सवाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार में छिंदवाड़ा के परासिया में हुई बच्चों की मौत के मामले में सरकार पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। जब हमारे विधायक जब धरने पर बैठे तब सरकार जागी। कोई भी प्रतिनिधि सरकार का वहां नहीं पहुंचा। प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये की तत्काल दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए और ड्रग कंट्रोलर पर कार्रवाई होनी चाहिए। 14 स्वजन को 4-4 लाख की सहायता एडीएम धीरेंद्र सिंह ने बताया कि "14 लोगों को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित की गई 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई है। जिसमें 11 बच्चे परासिया के 2 बच्चे छिंदवाड़ा और एक चौरई का है। जबकि अभी 8 बच्चे एडमिट हैं। जिनमें 4 सरकारी अस्पताल में 1 एम्स है, जबकि 3 निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। अभी तक इस मामले की बात करें तो 22 सितंबर को सबसे ये मामले सामने आया था। जहां छिंदवाड़ा के परासिया विकासखंड में मामलू सर्दी जुकाम और बुखार के बाद बच्चों का इलाज कराया गया। जहां कुछ वक्त के बाद उनमें किडनी इंफेक्शन की समस्या आई। छिंदवाड़ा के बाद इन बच्चों को नागपुर में भर्ती कराया गया। जहां जांच में किडनी इंफेक्शन होने की बात सामने आई थी। पहले तीन फिर यह संख्या बढ़ते-बढ़ते 9 पहुंची, इसके बाद शनिवार रात 10 बच्चों की मौत की जानकारी आई। वहीं रविवार यानि 5 अक्टूबर को एडीएम ने 14 बच्चों के मौत की पुष्टि की। मामले में अभी तक कोलड्रिफ और नेक्सट्रो डीएस सिरप को बैन कर दिया गया है।वहीं दिल्ली से इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की टीम दो बार छिंदवाड़ा आकर पानी खाना-पीना सहित सिरप के सैंपल लेकर गई है। आरोपित डॉक्टर गिरफ्तार मामले में पुलिस ने आरोपित डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया है। मामला दर्ज होने से बाद डॉ. प्रवीण सोनी को सस्पेंड कर दिया गया है। डॉक्टर की क्लिनिक के पास ही उनकी पत्नी मेडिकल स्टोर चलाती हैं। जहां से दवाएं खरीदी गई थीं। सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन और डॉक्टर प्रवीण सोनी के खिलाफ परासिया थाने में 3 अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया गया है। बीएनएस की धारा 276, दवा में मिलावट मामले में 1 साल की सजा हो सकती है। वहीं, बीएनएस की धारा 105 में कल्पेबल होमीसाइड मामले में 10 साल की सजा दी जा सकती है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 27 ए मिलावटी ड्रग से मौत के मामले में 10 साल से अधिक या आजीवन जेल की सजा हो सकती है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप तमिलनाडु की कंपनी श्रीसन बनाती है, जिसकी फैक्ट्री कांचीपुरम में है। छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत की खबरों के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने तमिलनाडु से कोल्ड्रिफ की जांच करने को कहा था। जांच में कोल्ड्रिफ सिरप को नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी यानी घटिया क्वालिटी का करार दिया गया। कोल्ड्रिफ में 48.6 फीसदी डाय-इथिलीन ग्लाइकाल मिला जो जहरीला पदार्थ है और इससे किडनी खराब हो सकती है। सांसद नकुल नाथ का आरोप, सरकारी रिकॉर्ड में दो बच्चों की मौत दर्ज नहीं हुई  पूर्व सांसद नकुल नाथ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में व्यक्त किए कि जिले के परासिया क्षेत्र में एक बच्चे को मामूली मौसमी बुखार था। स्वजनों ने डॉक्टर को दिखाया, डॉक्टर ने सिरप दिया। सिरप पीने के बाद बच्चे का पेशाब बंद हुआ, इलाज चलता रहा, लेकिन अंततः उसकी सांसें थम गईं। सवाल उठता है कि पहली ही मौत के बाद जिम्मेदारों ने ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? पहली मृत्यु 4 सितंबर को शिवम (4) की किडनी फेल होने से हुई, लेकिन जवाबदारों ने उस मामले की अनदेखी कर दी । नाथ ने कहा कि जब चार बच्चों को पुन: किडनी फेलियर की वजह से नागपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब किडनी की बायोप्सी से पता चला कि इन बच्चों की मौत का कारण जहरीला कफ सिरप है । उसके बाद भी डाक्टर इसे लिखते रहे और … Read more

भोपाल समेत 20 जिलों में बारिश, अगले दिन मानसून की वापसी पर संशय

भोपाल   मध्य प्रदेश में पिछले 3 दिन से तेज बारिश का दौर चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले 3 दिन में हल्की बारिश का दौर रहेगा। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग ड्राई रहेगा। फिलहाल कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। रविवार को भोपाल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया।  भदभदा और कलियासोत डैम एक-एक गेट खोले  रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 10 से पूरे प्रदेश में मानसून की वापसी मौसम विभाग के अनुसार, अब तक ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम से मानसून विदा हो चुका है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। गुना में सबसे ज्यादा बारिश इस बार गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। 65.6 इंच बारिश दर्ज हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच और धार में 33.6 इंच पानी गिरा है।  एमपी में 24 घंटे के दौरान 21 जिलों में बारिश, रायसेन में 3.7 इंच बरस गया मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान 21 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। रायसेन में सबसे ज्यादा 3.7 इंच पानी गिर गया। भोपाल में ढाई इंच, बैतूल में 2 इंच, बालाघाट के मलाजखंड में 1.8 इंच, श्योपुर-शिवपुरी में 1.7 इंच, सिवनी में डेढ़ इंच, टीकमगढ़ में 1.2 इंच और नर्मदापुरम-दमोह में 1 इंच बारिश हुई। सागर, धार, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, गुना, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, देवास, राजगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर बना रहा। इतनी तेज बारिश की भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर रेंगती हुई चली गाड़ियां रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 1 जून से 5 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

रैगिंग मामले में फंसे DAVV के फाइनल ईयर छात्र, IET करेगा कंपनियों को सूचित

इंदौर  इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (आईईटी) के जूनियर छात्रों से रैगिंग करने के मामले में अब फाइनल ईयर के दो छात्रों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद भंवरकुआं पुलिस जांच में जुटी है। रिपोर्ट में जिन छात्रों के नाम सामने आए हैं, उनमें फाइनल ईयर के दो ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्हें नामी कंपनियों से जाब आफर मिले हैं। संस्थान की प्लेसमेंट सेल अब इस पूरे मामले की जानकारी उन कंपनियों को देने की तैयारी में है, जिन्होंने इन छात्रों को जाब आफर किया है। इस संबंध में कंपनियों को पत्र लिखकर जानकारी देंगे। हालांकि यह भी देखा जाएगा कि विद्यार्थियों का भविष्य पूरी तरह खराब न हो। पत्र भेजने से पहले कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई से चर्चा की जाएगी। करीब दो सप्ताह पहले आईईटी के कुछ सीनियर छात्रों ने फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को कैंपस के बाहर एक कैफे में बुलाया था। वहां उनसे फर्जी जीमेल, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया अकाउंट बनवाकर संस्थान के खिलाफ पोस्ट करने को कहा गया। इसी दौरान कुछ जूनियर्स ने हॉस्टल में तोड़फोड़ भी की। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में यह बात सामने आई कि छात्रों ने नेपाल के जेन-जी आंदोलन की तर्ज पर प्रदर्शन की योजना बनाई थी। रिपोर्ट में दो दर्जन छात्रों पर संदेह एंटी रैगिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब दो दर्जन छात्रों की भूमिका संदिग्ध बताई है। इनमें फर्स्ट ईयर के साथ-साथ थर्ड और फाइनल ईयर के छात्र भी शामिल हैं। फिलहाल भंवरकुआं पुलिस ने होस्टल के सीसीटीवी-डीवीआर तोड़ने के मामले में चार छात्रों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। जबकि रैगिंग प्रकरण की जांच अब भी जारी है। प्लेसमेंट सेल के मुताबिक फाइनल ईयर के जिन दो छात्रों के नाम सामने आए हैं, उन्हें कंपनियों से अच्छे पैकेज पर जाब आफर मिल चुके हैं। अगले साल मई में उन्हें ज्वाइनिंग करनी है। लेकिन नियमानुसार कंपनियों को इससे पहले छात्रों की रिपोर्ट भेजनी होती है। ऐसे में रैगिंग मामले का जिक्र नौकरी पाने वाले छात्रों के रिकार्ड में जोड़ा जा सकता है, जिससे उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है। पुलिस जांच: थर्ड ईयर के छात्र अगले साल नहीं बैठ पाएंगे प्लेसमेंट में     रैगिंग में फाइनल ईयर के कुछ विद्यार्थी लिप्त हैं। इन्हें नौकरियां मिल चुकी हैं। इनके बारे में कंपनियों को पत्र लिखकर बताएंगे, क्योंकि प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है। वैसे विद्यार्थियों का भविष्य खराब न हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा। पत्र भेजने से पहले कुलगुरु से चर्चा करेंगे। – गोविंद माहेश्वरी, प्लेसमेंट ऑफिसर, आईईटी  

सड़कों पर कुत्तों का कहर: गाजियाबाद में रेबीज इंजेक्शन की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी

गाजियाबाद लावारिस कुत्तों के चलते लोगों में दहशत है। गलियों और पार्कों में ये लोगों को काट रहे हैं। जनपद के 80 इलाकों में सबसे अधिक लावारिस कुत्ते हैं। सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने इन इलाकों के लोग सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। जिले में कॉलोनी और सोसाइटी में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। घरों से बाहर निकलते ही कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। शहरी क्षेत्र के लोग इससे निजात दिलाने की निगम अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना 400 मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार जनपद में 80 इलाके ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा कुत्ते काटने के मामले हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र के कैला भट्टा, नंदग्राम, लाल कुआं, बम्हेटा, अकबरपुर-बहरामपुर, गोविन्दपुरम, लोहियानगर, पंचवटी, भाटिया मोड़, जटवाड़ा, साहिबाबाद, अर्थला, शालीमार गार्डन, पसौंड़ा आदि क्षेत्र हैं। इसके अलावा मोदीनगर, लोनी, मुरादनगर, डासना आदि जगह पर भी कुत्ते काटने के मामले बढ़ रहे हैं। रोजाना 400 मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे : स्वास्थ्य केंद्रों में 90 प्रतिशत मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। इस वजह से एआरवी की सबसे ज्यादा खपत कुत्ते काटने के मामलों में ही हो रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 350 से 400 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से बहुत कम मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कुत्ते के काटने से जख्म हो जाता है। यानि कुत्ते काटने से मांस फट जाता है और उससे खून निकलने लगता है। ऐसे मरीज को एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ सीरम लगाया जाता है। यह सुविधा अभी केवल एमएमजी अस्पताल में है। अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन प्रियादर्शी के मुताबिक रोजाना तीन से चार मरीजों को सीरम लगाया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मई महीने में 11008, जून में 11213 और जुलाई में 11213 मरीजों को एआरवी लगाई गई। इस साल जुलाई तक 66923 मरीजों को रेबीज का कवच दिया गया। केवल शहरी क्षेत्र में टीकाकरण और नसबंदी हो रही नगर निगम के दो एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। इसमें एक दिन में लगभग 30 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। नसबंदी के बाद कुत्तों को तीन दिन सेंटर में रखना होता है। इसके बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का नियम है, जहां से उन्हें पकड़ा जाता है। नगर पालिका और नगर पंचायत में लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नहीं हो रहा।

सड़क सुधार की पहल: गुरुग्राम में 12 सेक्टरों की जर्जर सड़कें बनेंगी दोबारा

गुरुग्राम  गुरुग्राम के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुई शहर के 12 प्रमुख सेक्टरों की सड़कों की सूरत बदलने की तैयारी नगर निगम (एमसीजी) ने शुरू कर दी है। निगम ने इन सड़कों को दुरुस्त करने के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से एक व्यापक योजना बनाई है, जिसके टेंडर जारी कर दिए गए हैं। बता दें कि मानसून के दौरान नगर निगम के सेक्टरों और कॉलोनियों की सड़कें छलनी हो गई थी। अब निगम की तरफ से इन सड़कों के निर्माण के लिए निगम ने एस्टीमेट तैयार करके टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम अधिकारियों का दावा है कि नवंबर माह के पहले सप्ताह में इन सभी सड़कों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसको लेकर 80 फीसदी सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम की इस योजना में मुख्य रूप से सेक्टर-30, 42, 43, 55, 5, 16, 17ए, 41, और सेक्टर-34 की बदहाल सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा। इन सेक्टरों में रहने वाले हजारों लोगों को इससे सीधा फायदा मिलेगा। सेक्टर 16 औद्योगिक क्षेत्र, सेक्टर 42, सेक्टर 43 (नाला), सेक्टर 43 (तुलसी पार्क), -सेक्टर 17ए, सुशांत लोक दो, सेक्टर-55, पालीवास से बंधवाड़ी, सेक्टर-47 (मॉडल रोड), सेक्टर-30, साउथ सिटी-1 (ब्लॉक सी), सेक्टर 5 (भाग-3 और 4), सेक्टर- 41 आदि में सड़कें बनेंगी। गुरुग्राम नगर निगम ने सेक्टर 43 के निवासियों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना शुरू की है। निगम ने व्यस्त गोल्फ कोर्स रोड के पास 18 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे फुटपाथ के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया है। यह कार्य नगर निगम के नए वार्ड संख्या 22 के अंतर्गत आता है। यह नया फुटपाथ निवासियों और छात्रों दोनों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करेगा। फुटपाथ का निर्माण एचवीपीएनएल कार्यालय, गोल्फ कोर्स रोड से शुरू होगा और पारस अस्पताल रोड तक जाएगा। यह फुटपाथ गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, एंबिएंस स्कूल और हरिजन कॉलोनी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे इन इलाकों के निवासियों और स्कूल आने-जाने वाले छात्रों को सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा। इस फुटपाथ निर्माण कार्य पर अड़तालीस लाख रुपये से अधिक की लागत से किया जाएगा। लोगों को ये सुविधा मिलेंगी सुगम आवागमन: टूटी और गड्ढों वाली सड़कों से मुक्ति मिलेगी, जिससे वाहनों का मेंटेनेंस खर्च कम होगा और आवागमन सुगम होगा। सुरक्षा: सड़कों की गुणवत्ता सुधरने और नालों के निर्माण से शहर में जलभराव की समस्या खत्म होगी, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा। बुनियादी ढांचा: मॉडल रोड और फुटपाथ बनने से शहर का बुनियादी ढांचा सुधरेगा और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा। स्वच्छता: जल निकासी की बेहतर व्यवस्था से सड़कों पर गंदगी और जल जमाव की समस्या खत्म होगी, जिससे स्वच्छता बढ़ेगी। नगर निगम के इस कदम से उम्मीद है कि आगामी वर्षों में शहर की आंतरिक सड़कें उच्च गुणवत्ता वाली बनेंगी।

चुनाव से पहले NDA का मास्टरस्ट्रोक, दीदियों के खातों में पहुंचा 2100 करोड़

 पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज हो सकता है। शाम चार बजे भारत निर्वाचन आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा हो चुकी है जिसमें चुनाव का पूरा प्रोग्राम अनाउंस किया जा सकता है। इससे पहले एनडीए खासकर बिहार सरकार ने एक और स्ट्रोक लगा दिया है। सीएम नीतीश कुमार ने रिमोट का बटन दबाकर बिहार की 21 लाख जीविका दीदियों के खाते में दस-दस हजार की राशि सोमवार को भेज दिया। अबतक एक करोड़ 21 लाख दीदियों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दस हजार की राशि का लाभ दिया जा चुका है। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत बिहार सरकार के कई मंत्री और अधिकारी शामिल थे। इससे पहले 26 सितम्बर को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से रिमोट दबाककर 75 लाख महिलाओं को यह उपहार दिया था। पीएम ने कहा था कि बिहार की महिलाओं के दो भाई हैं नीतीश और नरेंद्र जो उनकी सुख और समृद्धि के लिए काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने तीन अक्टूबर को दूसरी किश्त जारी की। उस दिन 25 लाख महिलाओं के खाते में दस-दस हजार की राशि ट्रांसफर की गई थी। अब आज सोमवार को 21 लाख महिलाओं को इसका लाभ दिया गया। बिहार सरकार यह संकल्प है कि राज्य की महिलाओं को शैक्षणिका, राजनीतिक, सामाजिक के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत किया जाए। मालूम हो कि महिलाओं को अपने पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए उन्हें दस-दस हजार रुपये दिये जा रहे हैं। बाद में उनके द्वारा की गयी तैयारी का आकलन करते हुए उन्हें और दो लाख रुपये तक की सहायता राज्य सरकार देगी। इस योजना में जीविका से जुड़ी हर परिवार की एक महिला को यह राशि दी जा रही है। अन्य महिलाएं भी जीविका से जुड़कर इस योजना का लाभ ले सकती हैं। सीएम आज पटना मेट्रो का उद्घाटन करने वाले हैं। मुजफ्फरपुर में भी वे करीब तीन सौ करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन आज करने वाले हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद आज, चुनाव आयोग करेगा कार्यक्रम की घोषणा

पटना  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) आज शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों और शेड्यूल की आधिकारिक घोषणा करेगा. उम्मीद लगाई जा रही हैं कि बिहार में दो चरणों में मतदान हो सकता है. वहीं, रविवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि आगामी विधानसभा चुनाव 22 नवंबर से पहले संपन्न हो जाएगी, क्योंकि 22 नवंबर को वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो रहा है. आयोग ने 4 और 5 अक्टूबर को बिहार का दौरा किया, जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने राजनीतिक दलों, अधिकारियों, पुलिस और सिविल सोसाइटी से मुलाकात की. इस दौरान कानून-व्यवस्था, व्यय निगरानी और मतदान केंद्रों की व्यवस्था पर चर्चा हुई. राजनीतिक दलों ने चरणों की संख्या पर सुझाव दिए और आयोग ने छठ पूजा (18-28 अक्टूबर) और दिवाली को ध्यान में रखते हुए शेड्यूल तैयार किया है. मतदान संभवतः छठ के बाद अक्टूबर-नवंबर में होगा जो 2020 की तरह कम चरणों में हो सकता है. प्रत्येक बूथ पर केवल 1,200 मतदाताओं की अनुमति होगी. राजनीतिक दलों की आयोग से अपील वहीं, राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग के साथ बैठक में छठ पर्व के तुरंत बाद चुनाव कराने की अपील की है जो अक्टूबर के अंत में मनाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके, क्योंकि बड़ी संख्या में बाहर काम करने वाले लोग त्योहारों के लिए अपने-अपने घर लौटते हैं. 22 साल बाद हुआ वोटर लिस्ट का शुद्धीकरण इससे पहले बिहार दौरे के बाद पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण से 22 साल बाद मतदाता सूची का शुद्धिकरण हुआ है. उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कई नई पहल की जा रही हैं, जिन्हें आने वाले समय में पूरे देश में दोहराया जाएगा. मुख्य चुनाव आयुक्त ने 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के चुनावों में शुरू की जा रही कई पहलों के बारे में भी बताया, जिसमें अनुसूचित जातियों के लिए 38 निर्वाचन क्षेत्र और अनुसूचित जनजातियों के लिए दो अन्य आरक्षित हैं. इन पहलों में, जिन्हें समय आने पर पूरे देश में दोहराया जाएगा, एक नई मानक संचालन प्रक्रिया शामिल है, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि पंजीकरण के 15 दिनों के अंदर मतदाताओं को ईपीआईसी कार्ड वितरित किए जाएं और मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा सुविधा भी शामिल है. एक मतदान केंद्र पर होंगे 1200 मतदाता सीईसी ने कहा, 'मतदान केंद्रों पर भीड़भाड़ को रोकने के लिए ये फैसला लिया गया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से ज़्यादा मतदाता नहीं होंगे. मतदाताओं के लिए मतदान प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मतदान केंद्रों पर मोबाइल डिपॉज़िट सुविधा शुरू की जा रही है.' हर बूथ की होगी वेबकास्टिंग उन्होंने कहा, 'अन्य नई सुविधाओं में सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग और ईवीएम डेटा में विसंगति की शिकायत के मामले में वीवीपीएटी पर्चियों का अनिवार्य सत्यापन शामिल है.' उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया 22 नवंबर से पहले पूरी कर ली जाएगी, जब वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. आपको बता दें कि बिहार चुनाव में सत्ताधारी एनडीए (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी इस बार मैदान में है. इस विधानसभा चुनाव में बेरोजगारी, प्रवासन और स्थानीय मुद्दे प्रमुख होंगे. आयोग ने जेल में बंद व्यक्तियों के नामांकन पर संसदीय कानूनों का हवाला देते हुए फैसला लेने की बात कही.