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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग पर सरकार का बड़ा ऐलान, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली  8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। वित्त मंत्रालय के एक्सपेंडिचर डिपार्टमेंट की ओर से 3 नवंबर को जारी गजट अधिसूचना में आयोग की संरचना, सदस्यों, कार्यक्षेत्र (Terms of Reference – TOR) और मुख्यालय का डिटेल साझा किया गया है। आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन, भत्तों और अन्य लाभों की समीक्षा कर सिफारिशें देने का कार्य सौंपा गया है।   सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है — -अध्यक्ष (Chairperson): जस्टिस रंजन प्रकाश देसाई -पार्ट-टाइम सदस्य (Part-Time Member): प्रो. पुलक घोष -सदस्य-सचिव (Member-Secretary): पंकज जैन आयोग का कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतन ढांचा तार्किक, कुशल और परफॉर्मेंस बेस्ड हो, जो वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय अनुशासन के अनुरूप हो। 8वें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र सरकार ने आयोग के लिए विस्तृत TOR जारी किए हैं। इसके तहत आयोग को निम्नलिखित कार्य करने होंगे — (a) आयोग यह जांच करेगा और सिफारिश करेगा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, रक्षा बलों और अन्य विभागों के लिए वेतन, भत्तों और सुविधाओं में क्या-क्या परिवर्तन आवश्यक और व्यावहारिक हैं। इनमें शामिल हैं: 1. केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी 2. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी 3. रक्षा बलों के कार्मिक 4. केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी 5. भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (IA&AD) के अधिकारी 6. संसद द्वारा गठित नियामक संस्थाओं (RBI को छोड़कर) के सदस्य 7. सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी 8. उन उच्च न्यायालयों के कर्मचारी जिनका खर्च केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वहन किया जाता है 9. केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारी (b) आयोग ऐसा वेतन ढांचा सुझाएगा जिससे योग्य प्रतिभा सरकारी सेवा की ओर आकर्षित हो और कर्मचारियों में जवाबदेही, दक्षता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिले। (c) आयोग मौजूदा बोनस और प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा करेगा और प्रदर्शन-आधारित नई योजना बनाने की सिफारिश करेगा ताकि उत्पादकता और उत्कृष्टता को पुरस्कृत किया जा सके। (d) मौजूदा भत्तों और उनकी पात्रता की शर्तों की समीक्षा कर उनका युक्तिकरण किया जाएगा। (e) (i) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) से जुड़े कर्मचारियों के लिए डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) की समीक्षा कर सिफारिशें देना। (ii) उन कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी और पेंशन की समीक्षा करना जो NPS/UPS में शामिल नहीं हैं। आर्थिक संतुलन पर ध्यान 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें बनाते समय देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, राज्यों की वित्तीय स्थिति, और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) व निजी क्षेत्र में प्रचलित वेतन ढांचे को भी ध्यान में रखना होगा। आयोग की कार्यप्रणाली आयोग अपने कार्य के लिए स्वतंत्र प्रक्रिया अपनाएगा। इसे सलाहकारों, विशेषज्ञों और संस्थागत परामर्शदाताओं की नियुक्ति का अधिकार होगा। आयोग आवश्यक सूचनाएं और साक्ष्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से मांग सकता है। सरकार ने राज्यों, सेवाकर्मी संघों और अन्य संबंधित पक्षों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। रिपोर्ट तैयार करने की समयसीमा 8वें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें गठन की तिथि से 18 महीनों के भीतर प्रस्तुत करनी होंगी। यदि आवश्यक हो, तो आयोग मध्यवर्ती रिपोर्टें भी भेज सकता है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। कुल मिलाकल 8वें वेतन आयोग के गठन से केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनरों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आयोग की सिफारिशों के बाद अगले कुछ वर्षों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।  

आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, फैसले की तारीख घोषित

सुप्रीम कोर्ट ने तय की तारीख, आवारा कुत्तों के शिकार लोगों की भी सुनी जाएगी बात आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, फैसले की तारीख घोषित सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामलों की सुनवाई, पीड़ितों की सुनाई जाएगी राय नईदिल्ली  आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित मामले के आदेशों के अनुपालन में चूक होती है तो मुख्य सचिवों को फिर से पेश होना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि अब मुख्य सचिवों की प्रत्यक्ष उपस्थिति जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह उन लोगों की भी सुनवाई करेगा जिनको कुत्तों ने काटा है और इसके बाद सात नवंबर को आदेश पारित करेगा। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि अधिकतर राज्यों ने अनुपालन हलफनामे दायर कर दिए हैं। कोर्ट ने केरल के मुख्य सचिव द्वारा दायर छूट के अनुरोध वाले आवेदन को अनुमति दे दी है और कहा इस बात को संज्ञान में लिया कि प्रमुख सचिव अदालत में उपस्थित हैं। इसके अलावा भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड को इस मामले में पक्षकार बनाने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश स पूछा कि पिछली तारीख पर अनुपान हलफानामा क्यों नहीं दाखिल किया गया? बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को उसके समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि अधिकतर राज्यों ने अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ने 27 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को उसके समक्ष उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया था कि अदालत के 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अनुपालन हलफनामे क्यों नहीं दायर किए गए। पीठ ने अपने आदेश का पालन नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि 27 अक्टूबर तक पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को छोड़कर किसी भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने अनुपालन हलफनामे दायर नहीं किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के अनुपालन के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा था।  

भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार

30,000 करोड़ की बड़ी डील: राफेल-सुखोई-तेजस नहीं, भारत खरीद रहा नया बवाल, पाकिस्तान हुआ दहला भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार 30,000 करोड़ की डील में भारत का नया हथियार, पाकिस्तान में डर और चिंता बढ़ी नईदिल्ली  30,000 Crore Drone Deal: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार देश की सेनाओं को रॉकेट की रफ्तार से मॉर्डर बनाने में जुटी है. इस कारण करीब-करीब हर हफ्ते हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा रही है. मोटे तौर पर देखें तो देश में एयर फोर्स के पास फाइटर जेट की कमी ही सबसे बड़ी समस्या दिखती है. इस समय एयरफोर्स के पास केवल 31 स्क्वाड्रन बचे हैं जबकि जरूरत कम से कम 42 स्क्वाड्रन की है. इस कमी को पूरा करने के लिए कई मोर्चे पर काम चल रहा है. लेकिन, इस बीच भारत ने आसमान में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए अन्य कई सौदों को अंतिम रूप दिया है. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. इस ऑपरेशन में उसको ऐसी मार पड़ी है जिसकी उसने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी. ऐसे में माना जा रहा है कि वह इस चोट का बदला लेने के लिए चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ कभी भी कोई बड़ी साजिश रच सकता है. इस तरह भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों में तनिक भी चूक या कमी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. एयरफोर्स के फाइटर जेट की कमी को पूरा करने के लिए भारत राफेल, सुखोई और देसी फाइटर जेट तेजस को लेकर कई स्तरों पर काम कर रहा है. लेकिन, आसमान में बादशाहत कायम करने के लिए केवल फाइटर जेट्स ही जरूरी नहीं है. इसके अलावा भी कई तरह के जहाज और मिसाइलें चाहिए. तभी जाकर कोई एयरफोर्स मुकम्मल तौर पर ताकतवर बन पाती है. ऐसे में भारत मिसाइलों, एयर डिफेंस, जासूसी जहाजों, राडार सिस्टम और ड्रोन्स पर खूब खर्च कर रही है. क्योंकि आधुनिक जंग में ये चीजें पहले की तुलना में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं. 87 मेल ड्रोन्स दरअसल, भारतीय सेना ने 87 मेडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंडुरेंस यानी MALE ड्रोन्स खरीदने की योजना बनाई है. ये एक तरह से बेबी फाइटर जेट्स हैं. इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. ये इतने पैसे हैं कि इसमें कई छोटे देश पूरा रक्षा बजट तैयार करते हैं. यानी इस एक मेल ड्रोन की कीमत करीब 350 करोड़ आएगी. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के लिए भारतीय कंपनियों को तैयार किया जा रहा है. हालांकि फिलहाल वे पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाई हैं. बावजूद इसके सरकार ने इस डील के लिए देसी कंपनियों की शर्त जोड़ दी है. अब मंगलवार को भारतीय कंपनियों को इसका टेंडर जारी किया जा सकता है. सरकार की योजना इस सौदे के साथ देश में ड्रोन निर्माण के लिए एक इकोसिस्टम बनाने की है, जिससे आने वाले वक्त में भारत किसी पर निर्भर न रहे. अब इस सौदे में शामिल होने के लिए विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी को दौड़ रही हैं ताकि वे उनको ड्रोन्स के लिए जरूरी उपकरणों की सप्लाई कर सकें. इन कंपनियों में इजरायली कंपनी एल्बिट और अमेरिकी जनरल एटॉमिक्स के नाम सबसे आगे हैं. अभी सरकार ने देसी में ड्रोन निर्माण में 50 फीसदी स्वदेशी कंटेंट की शर्त रखी है. ऐसे में इन विदेशी कंपनियों को काफी स्कोप दिख रहा है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस करीब 30 हजार करोड़ रुपये का सौदा सबसे कम बोली लगाने वाली दो कंपनियों को दिया जाएगा, ताकि कम से कम दो ड्रोन निर्माण प्लेयर तैयार किया जा सके.  

SC ने पोर्न बैन पर सुनवाई से किया इनकार, नेपाल का हवाला देकर दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पोर्नोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर विचार करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने इस मामले का जिक्र करते हुए नेपाल में हाल ही में हुए जेन जेड (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि देखिए, प्रतिबंध को लेकर नेपाल में क्या हुआ. हालांकि, निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद निर्धारित की है. इस बीच आपको बता दें कि मुख्य न्यायाधीश गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह देश में पोर्नोग्राफी पर नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना तैयार करे, विशेष रूप से नाबालिगों को अश्लील सामग्री से बचाने के उद्देश्य से. इसके अलावा, याचिका में सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी किसी भी सामग्री को देखने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि डिजिटलीकरण के युग में हर व्यक्ति के पास इंटरनेट की पहुंच है और अब शिक्षित या अशिक्षित का फर्क नहीं रह गया है. सब कुछ एक क्लिक में उपलब्ध है. उन्होंने सरकार के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि इंटरनेट पर अरबों पोर्न साइट्स मौजूद हैं.  भारत में 20 करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो याचिका में यह भी कहा गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना पड़ा, लेकिन इन उपकरणों पर पोर्नोग्राफी देखने से रोकने के लिए कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है. हालांकि, अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे कई सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित या मॉनिटर करने की सुविधा देते हैं. याचिकाकर्ता के अनुसार, पोर्नोग्राफी समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, खासतौर पर 13 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों पर. उन्होंने दावा किया कि भारत में 20 करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो या क्लिप है जिनमें बाल यौन सामग्री भी शामिल है और बिक्री के लिए आसानी से उपलब्ध हैं. याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत सरकार के पास ऐसे वेबसाइट्स या सामग्री तक आम जनता की पहुंच रोकने का अधिकार है. 

ईरानी राष्ट्रपति ने किया एटॉमिक प्लान का खुलासा, रूस देगा सहयोग

तेहरान  ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के प्रमुख ने ऐलान किया है कि तेहरान अपनी स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से रूस की मदद से आठ नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण करेगा। उधर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपने देश के 'शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम' और 'हथियार निर्माण न करने' की नीति को फिर से दोहराया है। ईरानी मीडिया तस्नीम ने रविवार को AEOI प्रमुख मोहम्मद एस्लामी के बयान का हवाला देते हुए बताया कि बुशहर में चार परमाणु संयंत्रों और उत्तर तथा दक्षिणी तटों पर चार अन्य संयंत्रों के संयुक्त निर्माण के लिए ईरान और रूस के बीच नया समझौता हुआ है। इन संयंत्रों के ठिकानों की आधिकारिक घोषणा सरकार बाद में करेगी। AEOI प्रमुख ने कहा कि ये संयंत्र 'स्थिर और पर्यावरण-अनुकूल परमाणु ऊर्जा' प्रदान करेंगे तथा ईरान को परमाणु ऊर्जा से 20000 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाने में सहायता देंगे। रूसी सरकारी मीडिया TASS ने AEOI प्रेस सेवा के संदर्भ से बताया कि एस्लामी ने कहा कि उत्तरी प्रांत गोलिस्तान के तट पर एक परमाणु संयंत्र का निर्माण आरंभ हो चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि खुझिस्तान प्रांत में एक अन्य संयंत्र का निर्माण, जो 1979 की इस्लामी क्रांति से पूर्व शुरू हुआ था, जल्द पूरा करने की योजना है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने  अपने देश के 'शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम' और 'हथियार न विकसित करने' की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। आधिकारिक एजेंसी इरना के अनुसार, AEOI के दौरे के दौरान पेजेशकियन ने कहा कि बम निर्माण इस क्षेत्र का एक छोटा, अर्थहीन और अमानवीय हिस्सा है, जबकि अधिकांश भाग मानवीय जरूरतों को पूरा करता है। ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिमी ताकतों पर आरोप लगाया कि वे ईरान जैसे स्वतंत्र देशों को उन्नत तकनीक से दूर रखना चाहती हैं, ताकि वे केवल असेंबली स्तर के उद्योगों तक सीमित रहें। इसके अलावा, IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, पेजेशकियन ने ईरानी वैज्ञानिकों पर हो रही दुश्मनी और हत्याओं को प्रमुख शक्तियों के ईरान की वैज्ञानिक-तकनीकी स्वतंत्रता से भय का परिणाम बताया। बता दें कि जून 2025 में इजरायल ने नतांज और फोर्डो जैसे प्रमुख ईरानी परमाणु स्थलों पर हवाई हमला किया था। 12 दिनों तक परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ। इस दौरान अमेरिका ने भी ईरानी परमाणु केंद्रों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर ईरान अपनी परमाणु सुविधाओं को फिर से चालू करता है, तो वे फिर से हमलों का आदेश देंगे।

कल से देशभर में SIR की शुरुआत, 12 राज्यों की सरकारें विरोध के मोर्चे पर

नई दिल्ली छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में 4 नवंबर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम शुरू हो रहा है। हालांकि पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक चुनाव आयोग को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत कई प्रमुख विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। ममता बनर्जी मार्च निकालेंगी तो डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। बता दें कि चुनाव आयोग ने इसी साल बिहार में इस प्रक्रिया को किया और अब 12 राज्यों में की जा रही है। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसे लेकर अन्य पार्टियों के साथ बैठक भी की। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल पार्टियों ने एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का प्रस्ताव पारित किया है। तमिलनाडु में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उनकी मांग है कि ये प्रक्रिया चुनाव बाद हो, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे नहीं माना। SIR के विरोध में हुई बैठक में डीएमके के अलावा कांग्रेस, मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK), विदुथलाई चिरुथिगल काची, वामपंथी दलों, कमल हासन के नेतृत्व वाली मक्कल नीधि मय्यम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची और तमिलागा वाझ्वुरिमई काची सहित सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सहयोगियों ने हिस्सा लिया। देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (DMDK) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) तथा डीएमके के वैचारिक मूल संगठन द्रविड़ार कषगम सहित मित्र दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। इधर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी इसके विरोध में है। इसके खिलाफ 4 नवंबर को कोलकाता में टीएमसी मार्च भी निकाल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मार्च का नेतृत्व करेंगी। इसके विरोध में टीएमसी ने कहा कि तथाकथित विशेष गहन पुनरीक्षण वास्तव में खामोशी से की जाने वाली धांधली है। हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। केरल की लेफ्ट सरकार ने भी किया विरोध वहीं केरल की लेफ्ट सरकार भी इसके विरोध में है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने निर्वाचन आयोग से उसके फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया है। इस पर गठबंधन के सहयोगियों की बैठक हुई। गठबंधन का कहना है कि ऐसे समय में जब स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य में यह संशोधन लागू नहीं किया जाना चाहिए। ये समझना चाहिए कि एसआईआर लोगों को कैसे प्रभावित करता है. आयोग को इस मामले में समीक्षा करनी चाहिए। कांग्रेस कर रही विरोध कांग्रेस शुरू से ही इस प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमलावर है। राहुल गांधी वोट चोरी का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने बिहार में इसके विरोध में वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली। उनका कहना है कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि इसके माध्यम से विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है। इसके साथ हो जातीय जनगणना: सपा उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इसे लेकर एक मांग की है। सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ये बड़ी एक्सरसाइज है। हम चाहते हैं कि SIR में एक कॉलम और बढ़ाया जाए जिससे जातीय जनगणना करी जा सके। प्रथम चरण की प्रक्रिया     जिनका नाम 2003 के एसआईआर नाम है उन्हें दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है     केवल 5-6 प्रतिशत मतदाताओं को ही दस्तावेज देने की होगी जरूरत     असुविधा होने पर मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950     बीएलओ कॉल रिक्वेस्ट के माध्यम से ले सकते हैं मदद     मुद्रण प्रशिक्षण कार्य दिनांक 28.10.2025 से 03.11.2025 तक     घर घर गणना चरण अवधि (घर-घर जाकर सत्यापन) कार्य दिनांक 04.11.2025 से 04.12.2025 तक     मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन दिनांक 09.12.2025 होगा     दावे और आपत्ति की अवधि दिनांक 09.12.2025 से 08.01.2026 तक रहेगा     नोटिस चरण सुनवाई और सत्यापन दिनांक 09.12.2025 से 31.01.2026     मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन दिनांक 07.02.2026 होगा     छत्तीसगढ़ में विगत एसआईआर की मतदाता सूची वर्ष 2003 को आधार मानकर जो मिलान किया गयाहै     बीएलओ द्वारा वर्तमान में केवल अपने मतदान केंद्र के मतदाताओं का मिलान किया गया है     जो कि 71 प्रतिशत के करीब है     मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने बताया     2003 के बाद से आज पर्यंत कई मतदाता अन्यत्र शिफ्ट हुए हैं     मतदान केन्द्रों का परिसीमन भी हुआ है     एन्यूमरेशन फेज में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर-घर सर्वे के दौरान यह मिलान प्रतिशत 10-15 प्रतिशत और बढ़ जाएगा     मतदाता सूची में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं     वर्ष 2003 के एसआईआर के बाद विवाहित महिलाएं अपने तत्कालीन मतदान केंद्र से अन्यत्र स्थानांतरित हुई हैं     बीएलओ द्वारा घर-घर एन्यूमरेशन फेज में 15 से 20 प्रतिशत और महिला मतदाताओं का मिलान किया जा सकेगा     इस प्रकार मिलान का कुल प्रतिशत 71 प्रतिशत से बढ़कर 94-95 प्रतिशत हो जाएगा     केवल शेष बचे मतदाताओं से ही दस्तावेज लेने की आवश्यकता होगी     भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के दौरान विभिन्न नवाचारों के माध्यम से मतदाताओं को सुविधा प्रदान करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है     किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950     बीएलओ कॉल रिक्वेस्ट (BLO Call Request) के माध्यम से मतदाता सूची से संबंधित सहायता प्राप्त कर सकते हैं     सीईओ यशवंत कुमार ने राजनीतिक दलों से किया आग्रह     पुनरीक्षण के दौरान अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (BLAs) के माध्यम से निर्वाचन आयोग के कर्मचारियों को पूरा सहयोग दें     ताकि छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें 7 फरवरी को आएगी अंतिम मतदाता सूची गणना के बाद 9 दिसंबर को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। इसी दिन से दावे और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती हैं, जो कि 8 जनवरी 2026 तक चलेंगी. 9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक नोटिस फेज रहेगा। जिसमें सुनवाई और वैरिफिकेशन का काम किया जाएगा। इन सबके बाद 7 फरवरी को 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। दूसरे चरण में जिन-जिन राज्यों में एसआईार की प्रक्रिया होनी … Read more

बुजुर्ग विधवा मामले में HC का फैसला, बेटे की गवाही न मानकर आरोपी को किया बरी

तिरुवनंतपुरम बुजुर्ग महिला के बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा काट रहे शख्स को केरल हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि पीड़िता के मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे की तरफ से सबूत दिया गया था, जिसपर अभियोजन पक्ष काफी निर्भर था। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बेटा गवाही देने में सक्षम नहीं था और ऐसे में इस सबूत को शामिल नहीं किया जा सकता। साल 2018 में परिमल साहू को ट्रायल कोर्ट ने 60 साल की विधवा के बलात्कार और हत्याकांड में दोषी पाया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि परिमल ने बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा, रेप किया और फिर हत्या कर दी थी। वारदात के समय पीड़िता अपने बेटे के साथ रह रही थी। जबकि, परिमल पीड़िता के घर के पास उसी परिसर में रहता था। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के रिश्तेदार के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई थी। रिश्तेदार का कहना था कि जब वह घर पहुंचा, तो पीड़िता के बेटे ने बताया कि मुन्ना (परिमल) ने उसकी मां के सिर पर पत्थर मारा, कमरे में घसीट कर ले गया और वहां उसपर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से बेटे की गवाही पर आधारित था। कोर्ट ने पाया कि डॉक्टर ने कहा है कि बेटे की मानसिक उम्र साढ़े सात साल है। जबकि, उसकी उम्र 35 साल है। इसके बाद भी ट्रायल कोर्ट ने voir dire टेस्ट नहीं कराया। कोर्ट ने कहा, 'voir dire टेस्ट का नहीं कराया जाना PW4 (बेटे) के गवाही के देने की क्षमता और विश्वसनीयता के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है। खासतौर से तब जब PW4 जैसे गवाहों को सिखाया पढ़ाया जा सकता है।' हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया है कि voir dire टेस्ट का नहीं होना गवाही को खारिज करने के लिए हमेशा पर्याप्त कारण नहीं होता, लेकिन ट्रायल कोर्ट और अपील कोर्ट की जिम्मेदारी है कि गवाही की सावधानी से जांच करें। इस मामले में कोर्ट ने पाया कि पीड़िता का बेटा मुख्य परीक्षा में गवाही देने में सक्षम था, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान वह साधारण सवालों के भी ठीक जवाब नहीं दे सका। कोर्ट ने कहा कि इससे संकेत मिलते हैं कि बेटे को सिखाया गया है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि परिमल के हाथों पर बचाव के जख्मों के निशान थे, जो संकेत देते हैं कि पीड़िता ने संघर्ष किया होगा। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता पर परिमल के कोई स्किन सेल नहीं मिले और जुटाए गए अन्य सबूत भी डीएनए टेस्टिंग के लिए पर्याप्त नहीं है। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एके जयशंकरन नाम्बियार और जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने परिमल को बरी कर दिया।

ट्रंप ने बताया बड़ा राज, पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण

इस्लामाबाद  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से  उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि हम भी परीक्षण करेंगे क्योंकि दूसरे देश परमाणु परीक्षण करते हैं.  ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया के कई देश परमाणु बम की टेस्टिंग कर रहे हैं. लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इस बारे में बात नहीं करते. वे इसे बताते नहीं हैं. हम एक खुला समाज हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं. हमें इस बारे में बात करनी ही होगी क्योंकि वरना आप लोग कल को रिपोर्ट कर देंगे. उनके पास ऐसे पत्रकार नहीं हैं जो इस बारे में लिखें."  ट्रंप ने आगे कहा कि अब अमेरिका भी न्यूक्लियर टेस्ट करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान भी परमाणु बम का परीक्षण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परीक्षण करेंगे क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं. और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है." गौरतलब है कि पाकिस्तान की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक 1998 में परमाणु परीक्षण किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को माने तो पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करता आ रहा है. और ऐसी ही स्थिति रूस और चीन की है. ट्रंप के मुताबिक दोनों ही देश लंबे समय से परमाणु परीक्षण करते आ रहे हैं.  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज चैनल सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम पर एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं.  ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने 33 साल के प्रतिबंध के बाद अमेरिकी सेना को परमाणु हथियार परीक्षण करने के अपने आदेश को उचित ठहराया. ट्रंप के खुलासे के मुताबिक अगर पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो ये भारत के लिए चिंताजनक सूचना है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "परमाणु हथियार संपन्न देश आपको इसके बारे में बताने नहीं जाते… वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं जहां लोगों को ठीक से पता ही नहीं चलता कि परीक्षण में क्या हो रहा है. बस आपको थोड़ा कंपन महसूस होता है." 33 सालों बाद न्यूक्लियर टेस्ट क्यों कर रहा है अमेरिका बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका 33 वर्षों के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण शुरू करने जा रहा है. अमेरिका ने आखिरी बार परीक्षण 1992 में किया गया था. इसके बाद शीत युद्ध के अंत की घोषणा की गई थी.  सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पेंटागन को "हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने" का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई न्यूक्लियर सिस्टम के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है.

विदेशी नंबर से भी करें UPI पेमेंट! जानिए आसान तरीका और जरूरी सेटिंग्स

नई दिल्ली डिजिटल पेमेंट ने भारत में पैसे भेजने और लेने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब बात सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश में रहने वाले भारतीय भी UPI (Unified Payments Interface) के जरिए अपने भारतीय बैंक अकाउंट से सीधे भुगतान कर सकते हैं. हाल ही में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कुछ देशों के लिए यह सुविधा शुरू की है, जिससे इंटरनेशनल मोबाइल नंबर वाले यूजर्स भी अब भारत में आसानी से UPI ट्रांजैक्शन कर सकते हैं. अगर आप विदेश में रहते हैं और अपने इंटरनेशनल नंबर से UPI इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से पढ़ें. इंटरनेशनल मोबाइल नंबर से UPI पेमेंट करने का तरीका अब तक UPI केवल भारतीय मोबाइल नंबर पर ही चलता था, लेकिन अब यह नियम कुछ देशों के यूजर्स के लिए बदल गया है. इसका फायदा खासकर एनआरआई (NRI) भारतीयों को मिलेगा, जो विदेश में रहकर भी अपने भारतीय बैंक अकाउंट से लेन-देन कर सकेंगे. चलिए जानते हैं, कैसे आप अपने इंटरनेशनल नंबर से UPI एक्टिवेट कर सकते हैं:     UPI ऐप डाउनलोड करें: सबसे पहले अपने मोबाइल के ऐप स्टोर से ऐसा UPI ऐप डाउनलोड करें जो विदेशी नंबरों को सपोर्ट करता हो. जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay (India Version), BHIM App या आपके बैंक की मोबाइल बैंकिंग ऐप.     इंटरनेशनल मोबाइल नंबर डालें: ऐप खोलने के बाद आपसे मोबाइल नंबर मांगा जाएगा. यहां अपना Country Code (जैसे +1, +44, +971) और इंटरनेशनल नंबर दर्ज करें.     OTP से वेरिफिकेशन करें: ऐप आपके इंटरनेशनल नंबर पर एक OTP (वन टाइम पासवर्ड) भेजेगा. इस OTP को एंटर करके नंबर वेरिफाई करें.     (ध्यान दें: इसके लिए आपके मोबाइल में इंटरनेशनल SMS या रोमिंग प्लान एक्टिव होना जरूरी है.)     बैंक अकाउंट लिंक करें: वेरिफिकेशन पूरा होते ही ऐप अपने-आप उस भारतीय बैंक अकाउंट को पहचान लेगा जो आपके नंबर से जुड़ा हुआ है.     UPI PIN सेट करें: अब अपने डेबिट कार्ड के आखिरी 6 अंक और एक्सपायरी डेट डालें. इसके बाद नया UPI PIN सेट करें.     अब आप तैयार हैं पेमेंट के लिए: अब आप भारत में किसी भी व्यापारी, परिवार या दोस्त को QR कोड स्कैन करके, UPI ID डालकर, या मोबाइल नंबर से तुरंत पेमेंट कर सकते हैं. इन बातों का रखें खास ध्यान     आपके पास NRE (Non-Resident External) या NRO (Non-Resident Ordinary) बैंक अकाउंट होना जरूरी है.     बैंक रिकॉर्ड में आपका वही इंटरनेशनल नंबर लिंक होना चाहिए, जिससे आप UPI करना चाहते हैं.     फिलहाल यह सुविधा केवल NPCI द्वारा चुने गए देशों में रहने वाले यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है.     जिन देशों में यह सुविधा सक्रिय है, वहां के बैंक और नेटवर्क को भी NPCI की पार्टनर लिस्ट में होना चाहिए. कौन से देशों में उपलब्ध है यह सुविधा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई (UAE), सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हांगकांग, ओमान, कतर, अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देशों के यूजर्स के लिए यह सर्विस धीरे-धीरे शुरू हो चुकी है. आने वाले महीनों में इसे और देशों में विस्तार दिया जाएगा. क्यों है यह फीचर खास? यह सुविधा विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए बेहद फायदेमंद है. पहले उन्हें भारत में पैसा भेजने के लिए कई ऐप या बैंक चैनल्स का सहारा लेना पड़ता था, जिनमें ट्रांजैक्शन चार्ज भी लगता था. अब वे अपने ही इंटरनेशनल नंबर से सीधा UPI ट्रांजैक्शन कर सकेंगे तेज, सुरक्षित और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के. अगर आप भी किसी विदेशी देश में रहते हैं और अपने भारतीय बैंक अकाउंट से रोज़मर्रा के लेन-देन करना चाहते हैं, तो अब यह बेहद आसान हो गया है. बस आपका नंबर NPCI द्वारा समर्थित देश का होना चाहिए, बैंक अकाउंट लिंक हो और फोन में इंटरनेट कनेक्शन मौजूद हो. इसके बाद आप भारत में कहीं भी और किसी को भी UPI के जरिए तुरंत भुगतान कर सकते हैं.

डिग्री नहीं, स्किल की जरूरत: एआई के दौर में ये 6 हुनर बचाएंगे आपकी नौकरी

नई दिल्ली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटेमेशन के चलते दुनिया की बड़ी कंपनियों में छंटनी का दौर तेज हो गया है। अमेजन, यूपीएस, टारगेट, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। धड़ाधड़ पिंक स्लिप पकड़ाई जा रही हैं और नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। टेक से लेकर ट्रांसपोर्ट तक जैसी फलने फूलने वाली इंडस्ट्री अब रीस्ट्रक्चरिंग और एफिशिएंसी की भाषा बोल रही हैं। हर सेक्टर के विभिन्न कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चितता से भरा है। इस उथल-पुथल के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था नो हायर -नो फायर यानी न नई भर्ती, न ज्यादा छंटनी , ऐसी स्थिति में फंसी है। इसकी वजह है- जियोपॉलिटिक्स (अंतरराष्ट्रीय तनाव), ऑटोमेशन, टैक्स-टैरिफ और बदलती उपभोक्ता आदतें। अमेरिका की सत्ता में डोनाल्ड ट्रंप के लौटने के बाद से पब्लिक सेक्टर में हजारों लोगों की नौकरियां गई हैं। सरकारी शटडाउन अपने चौथे हफ्ते के करीब है, जिससे कई लोगों को सैलरी नहीं मिली और सभी के पास कोई जवाब नहीं है। भर्तियां अब सिर्फ डिग्री के दम पर नहीं टैग्ड के फाउंडिंग मेंबर और सीईओ देवाशीष शर्मा का कहना है कि भारत में कंपनियों में अब भर्तियां डिग्री के दम पर नहीं, बल्कि कैंडिडेट में जॉब के लिए दिखने वाली तैयारी से तय होगी। प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और योग्यता मूल्यांकन से स्किल्स देखी जाएगी। उन्होंने कहा, 'एम्प्लॉयर्स खासकर बड़ी कंपनियां एकेडमिक इंस्टीट्यूशन्स के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स बनाकर और करिकुलम को मिलकर डिजाइन करके जॉब के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।' कई बड़ी दिग्गजों कंपनियों खर्चों को लेकर अपना हाथ टाइट कर लिया है और कर्मचारियों की संख्या पर लगाम लगाई है, यहां देखें लिस्ट अमेजन: ने 14,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों (लगभग 4% ) की छंटनी की है। कंपनी इस पैसे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश कर रही है। यूपीएस : ने इस साल 48,000 नौकरियां घटाई हैं और 93 ब्रांचों को बंद कर दिया है क्योंकि शिपिंग (सामान भेजने) की मात्रा कम हुई है। टारगेट : टारगेट ने 1800 कर्मचारियों (लगभग 8% कॉर्पोरेट कर्मी) को हटाया है। नेस्ले : बढ़ती कीमतों और टैरिफ के कारण अगले दो सालों में दुनिया भर में 16,000 छंटनियां कर रही है। लुफ्थांसा समूह : 2030 तक 4,000 पद खत्म करने की योजना बना रहा है। प्रशासनिक काम को डिजिटल और AI प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर रहा है। नोवो नॉर्डिस्क : अपनी ब्लॉकबस्टर दवाओं की भारी मांग के बावजूद 9,000 कर्मचारियों (11% कार्यबल) की छंटनी की घोषणा की है। इंटेल : छंटनी और कर्मचारियों के छोड़ने से अपने मुख्य मैनफोर्स को 99,500 से घटाकर 75,000 कर रहा है। माइक्रोसॉफ्ट : माइक्रोसॉफ्ट ने इस साल 6,000 कर्मचारियों को निकालने के बाद, गेमिंग और प्रबंधन डिवीजनों में 9,000 और कर्मचारियों की छंटनी की है। एआई, ऑटोमेशन और मार्केट की बदलती जरूरतों में कैसे टिके रहें- 1- फिर से सीखें और नए सिरे से सोचें वो दिन गए जब एक ही स्किल से जिंदगी काटी जा सकती है। जिंदगी भर कमाया जा सकता था। खुद की स्किल्स को बढ़ाना और उसे अपग्रेड करना अब ऑप्शनल नहीं है; यह अनिवार्य है और जिदा रहने का तरीका है। प्रोफेशनल्स को लगातार सीखने में निवेश करना चाहिए, चाहे वह एआई साक्षरता हो, डेटा इंटरप्रिटेशन हो, या कम्युनिकेशन को बेहतर बनाना हो। कोर्सेरा, लिंक्डइन लर्निंग जैसे प्लेटफॉर्म और कंपनी-स्पॉन्सर्ड प्रोग्राम किसी के स्किलसेट को नए सिरे से समझने के लिए मजबूत रास्ते देते हैं। 2. एक पर्सनल ब्रांड बनाएं आज की दुनिया में आपकी ऑनलाइन पहचान बहुत मायने रखती है। लिंक्डिन पर नेटवर्किंग, अनुभव साझा करना और ईमानदारी से खुद को पेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डिजिटल वर्ल्ड में आपकी मौजदूगी आपको भीड़ में सबसे अलग खड़ा कर देगी। 3. फाइनेंशियल दूर की सोच बढ़ाएं जॉब की असुरक्षा के माहौल में आपका बचाया हुआ पैसा बहुत काम आएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कम से कम छह महीने के खर्चों को कवर करने वाला एक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए। कंसल्टिंग, फ्रीलांसिंग, या पैसिव इन्वेस्टमेंट के जरिए इनकम के सोर्स को अलग-अलग करें। साइड इनकम के लिए निवेश करें। 4. जुड़े रहें, संपर्क में रहें नेटवर्किंग लेन-देन वाली नहीं, बल्कि रिश्तों को बनाए रखने वाली होती है। नौकरी से निकाले जाने और बदलाव के दौरान इमोशनल सपोर्ट अक्सर साथियों, पुराने साथ काम करने वालों या इंडस्ट्री के लोगों से मिलता है। इन कनेक्शन को बनाए रखने से अनजाने रास्ते खुल सकते हैं। 5. मानसिक संतुलन को प्राथमिकता दें नौकरी छूटने या अस्थिरता से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। मानसिक रूप से मजबूत बने रहने में थेरेपी, मेडिटेशन और नियमित दिनचर्या मदद करती है। 6. लगातार सीखें, खुद को बदलें अब हर व्यक्ति को अपनी स्किल्स को बढ़ाने, खुद को नया रूप देने की जरूरत है। आज का जॉब मार्केट खत्म नहीं हुआ है। यह बस बदल रहा है। इसके लिए सिर्फ टेक्निकल काबिलियत ही नहीं, बल्कि इमोशनल इंटेलिजेंस, एडजस्ट करने की क्षमता और समय के साथ बदलना जरूरी है।