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तुर्की में भूकंप से कांपी धरती, 5.8 तीव्रता के झटकों से दियारबाकिर समेत कई शहर हिले

अदियामान  तुर्की में गुरुवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. शुरुआती अनुमान के मुताबिक भूकंप की तीव्रता 5.8 थी. दियारबाकिर, अदियामान और सानलिउर्फा समेत आसपास के कई प्रांतों में लोगों ने झटके महसूस किए. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक दियारबाकिर में भूकंप का असर ज्यादा महसूस हुआ।  शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप की तीव्रता 5.5 बताई गई थी, जिसे बाद में 5.8 बताया गया. फिलहाल भूकंप से हुए नुकसान या किसी के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई है. भूकंप से जुड़ी ज्यादा जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।  एजेंसी के मुताबिक इसके झटके शानलिउर्फा के साथ अदियामान, मालट्या, दियारबाकिर और गाजियांटेप में भी महसूस किए गए. AFAD ने कहा कि फिलहाल किसी तरह की नकारात्मक स्थिति की जानकारी नहीं है और प्रभावित इलाकों में फील्ड स्कैनिंग जारी है।  अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है. प्रशासन की टीमें अलग-अलग इलाकों में जाकर हालात का जायजा ले रही हैं. भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने आती है या नहीं, इसे लेकर निगरानी जारी है।  संवेदनशील इलाकों में से एक पूर्वी तुर्किए दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप-संवेदनशील इलाकों में से एक है। यहां से ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट गुजरती है और यह एनाटोलियन, अरेबियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा के पास स्थित है। विनाशकारी भूकंपों का इतिहास इस इलाके में विनाशकारी भूकंपों का लंबा इतिहास रहा है। इनमें सबसे प्रमुख फरवरी 2023 में कहरामनमारस प्रांत में आया भूकंप था, जिसमें अकेले तुर्किए में 53,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और यह सदी के सबसे घातक भूकंपों में से एक माना जाता है।

वाइट हाउस में मीडिया बैन पर कोर्ट का फैसला, जज ने चैनलों के दरवाजे खोले

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको जैसे मीडिया घरानों के पत्रकारों का राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास वाइट हाउस में प्रवेश से वर्जित कर दिया था। उन्होंने इन मीडिया हाउस पर झूठी खबरें प्रकाशित करने का आरोप लगाया था। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ इन मीडिया संस्थानों ने कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर रोक लगाते हुए यह बैन हटा दिया है। आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने बीते सोमवार को मुकदमा दायर किया था। इन मीडाय संस्थानों ने आरोप लगाया कि चुनिंदा तरीके से यह प्रतिबंध लगाया जाना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। इन समाचार संस्थानों ने अपनी याचिका में कहा कि संविधान राष्ट्रपति या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता कि वह केवल खबरें पसंद नहीं आने पर बिना बैन कर दे। उन्होंने कहा कि किसी सूचना या प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रेस के प्रथम संशोधन से जुड़े अधिकारों, स्वतंत्रता और संपत्ति संबंधी हितों से वंचित करना गलत है। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिम केली ने वाइट हाउस में इन मीडिया संस्थानों पर लगे बैन को गलत बताते हुए इसे हटा दिया। आपको बता दें कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के वकीलों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर इस प्रतिबंध को सही ठहराने की कोशिश की थी। CNN की पत्रकार को देख UN में भड़के ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा में डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सीएनएन की प्रतिष्ठित पत्रकार कैटलिन कॉलिन्स पर निशाना साधा और उनसे कहा, ''आपको यहां नहीं होना चाहिए।'' ट्रंप मंगलवार को महासभा में अपने संबोधन से पहले संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे और कॉलिन्स से कहा, ''मुझे हैरानी है कि सीएनएन यहां मेरी कवरेज कर रहा है। आपको यहां मेरी कवरेज के लिए नहीं होना चाहिए। आपने कहा था कि आप मेरी कवरेज नहीं करेंगे।'' हालांकि, कॉलिन्स ने बाद में प्रसारण में कहा कि सीएनएन ने ऐसा कभी नहीं कहा।

बुलेट ट्रेन की तैयारी पूरी, अगले साल पटरियों पर दौड़ने की रेलवे ने दी पुष्टि

अहमदाबाद देश की पहली बुलेट ट्रेन (India's First Bullet Train) को चलाने की तैयारियां जोर-शोर पर चल रही है. हाई स्पीड रेल ट्रैक से लेकर स्टेशनों, ब्रिज और सुरंगों का काम युद्धस्तर पर जारी है. बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी और अगले साल यानी 2027 से इसकी शुरुआत होने वाली है. रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से इसे कन्फर्म कर दिया गया है।  Railway Ministry की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर वीडियो शेयर किया गया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो के कैप्शन में मिनिस्ट्री की ओर से लिखा गया है, 'बुलेट ट्रेन अगले साल पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार!' इसमें रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन ट्रैक से लेकर स्टेशनों तक पर जारी काम की झलक दिखाई गई है।  वायरल वीडियो में क्या-क्या?  बात करें रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से Social Media पर शेयर किए वीडियो की, तो इसमें भारतीय रेलवे द्वारा Bullet Train Project में किए जा रहे कामों की झलक देखने को मिल रही थी. सूरत-वापी ट्रैक पर रेलवे ब्रिज, स्टेशन, सुरंगों में काम करते हुए रेलवे के कर्मचारी नजर आ रहे हैं, जो इस बात को साफ कर रहे हैं, कि अगले साल 2027 में बुलेट ट्रेन को पटरियों पर दौड़ाने के लिए किस स्तर पर काम पूरा किया जा रहा है।   सूरत-वापी बुलेट ट्रेन सेक्शन कितना लंबा? भारत की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल संभावित 15 अगस्त 2027 (First Bullet Train From 15t August 2027) से ट्रैक पर तेज रफ्तार से दौड़ती हुई नजर आएगी. रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से किए गए एक्स पोस्ट से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसके संकेत दे चुके हैं. बता दें कि देश की अपनी पहली Bullet Train के पहले चरण की शुरुआत 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर होगी. इसका 348 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में आता है और जिस वापी-सूरत सेक्शन का वीडियो रेलवे मिनिस्ट्री ने शेयर किया है, वो करीब 100 किलोमीटर का है।     2 घंटे में मुंबई से अहमदाबाद, 12 स्टॉपेज बुलेट ट्रेन जब फुल स्पीड में होगी, तो 320 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी, जबकि अहमदाबाद से मुंबई के बीच औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बुलेट ट्रेन अगले साल से दौड़ेगी. इस हिसाब से देखें, तो अभी तक सबसे हाई स्पीड ट्रेनों के जरिये मुंबई से अहमदाबाद का सफर करीब 6 घंटे में पूरा होता है, लेकिन बुलेट ट्रेन के जरिए ये महज 2 घंटे के आसपास में पूरा होगा।  अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में रेलवे की ओर से बुलेट ट्रेन के 12 स्टॉपेज तय किए गए हैं. पहला Bullet Train स्टेशन साबरमती रखा गया है, तो वहीं आखिरी मुंबई है. इनमें साबरमती-मुंबई (BKC) के अलावा ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद शामिल हैं। 

भारत पर 100% टैरिफ को लेकर जेपी मॉर्गन CEO ने US को चेताया, सप्लाई चेन पर असर का डर

मुंबई अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिला है. भारत और चीन भी इसकी जद में आ सकते हैं. इसी बीच जेपी मॉर्गन के CEO जेमी डिमोन ने अमेरिका से भारत को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।  मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत में डिमोन ने कहा कि अमेरिका को पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने से पहले भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है।  डिमोन बोले- तेल पर टैरिफ लगाना सही तरीका नहीं जेमी डिमोन ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि तेल पर किसी तरह का टैरिफ लगाया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बीच अमेरिका को यह देखना चाहिए कि कहीं इसका नुकसान भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट को तो नहीं हो रहा।  डिमोन ने कहा कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा तो उसे कहीं और से तेल खरीदना पड़ेगा. लेकिन हर तरह का कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता. अलग-अलग रिफाइनरियां खास तरह के क्रूड को प्रोसेस करने के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं. ऐसे में रूसी तेल की जगह किसी दूसरे देश से आने वाला क्रूड हर रिफाइनरी के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है।  भारत के लिए रूसी तेल बदलना आसान नहीं भारत दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में शामिल है और रूसी तेल उसकी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा है. डिमोन के मुताबिक, रूसी सप्लाई में किसी तरह की रुकावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगी. इससे इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है।  डिमोन ने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन की मदद के लिए और कदम उठाने चाहिए, लेकिन रूस के ऊर्जा कारोबार पर कार्रवाई करते समय इसके व्यापक असर को भी ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया।  भारत बोला- लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी सबसे पहले भारत ने रूसी तेल खरीद को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी से जोड़कर इसका बचाव किया है. अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि भारत की एनर्जी पॉलिसी 'पीपल फर्स्ट' के नजरिए पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत के फैसले तेल की उपलब्धता, कीमत, बाजार की हालत और कारोबारी व्यवहार्यता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।  भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में ग्लोबल ऑयल मार्केट में कीमत और सप्लाई में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।  अगस्त में 16.5 फीसदी घटा रूसी तेल आयात रॉयटर्स के टैंकर डेटा के मुताबिक, भारत ने अगस्त में करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया. यह जुलाई के मुकाबले 16.5 फीसदी कम था. अगस्त में भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 47 फीसदी रही।  भारत ने अगस्त में कुल करीब 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो जुलाई से करीब 8.8 फीसदी कम था. ऐसे में रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा अब भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए भी अहम हो गया है।  डिमोन ने दोनों देशों से रुके हुए ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा करने के लिए बातचीत जारी रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि कारोबार के लिए स्थिरता और नियमों में भरोसा बेहद जरूरी है।   

बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, इस रविवार भी खुले रहेंगे बैंक

नई दिल्ली वैसे तो रविवार को साप्ताहिक अवकाश की वजह से बैंक बंद रहते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। दरअसल, 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल से पहले रविवार को बैंक खुले रहेंगे। सरकार ने बैंकिंग सेवाओं में रुकावट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। इसके तहत, सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार, 27 सितंबर को खुले रहेंगे और सामान्य रूप से काम करेंगे। वित्त मंत्रालय का बयान वित्त मंत्रालय ने 23 सितंबर को एक बयान में कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की प्रस्तावित हड़ताल 26 और 27 सितंबर के वीकेंड के बाद हो रही है, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक परेशानी हो सकती थी। इसी को ध्यान में रखकर फैसला लिय गया है। मंत्रालय ने बयान में कहा, " आम लोगों की बैंकिंग से जुड़ी जरूरी जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों इसलिए सभी सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार, 27 सितंबर, 2026 को सामान्य रूप से काम करेंगे।" UFBU और सरकार के बीच नहीं हुई सुलह बीते मंगलवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और सरकार के बीच बैठक हुई थी लेकिन पॉजिटिव नतीजे नहीं आए। मंगलवार को उप-मुख्य श्रम आयुक्त के सामने हुई सुलह बैठक के बाद यूएफबीयू ने एक बयान में कहा, ''वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और बैंक प्रबंधन की हड़ताल टालने की अपील का जवाब देते हुए, हमने उन्हें बताया कि अगर पांच-दिन के कामकाज की हमारी मांग को लागू करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक प्रगति होती है, तो यूएफबीयू उस पर विचार करेगा।'' बयान में कहा गया कि ऐसा न होने पर यह संगठन 28, 29 और 30 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल पर आगे बढ़ने के लिए मजबूर होगा। UFBU की बात करें तो यह यूनियन बैंकिंग कर्मचारियों के 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। यह 5-दिन की बैंकिंग सेवा के साथ कई अन्य मांग भी कर रहा है। इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और दूसरे सार्वजनिक बैंकों ने अपने-अपने कर्मचारियों से हड़ताल से दूर रहने की अपील की है। वहीं, ग्राहकों के लिए सोशल मीडिया या मैसेज और मेल के माध्यम से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि हड़ताल की आशंका के मद्देनजर ग्राहकों को अपने कामकाज उससे पहले ही निपटा लेने चाहिए। साथ ही, उन्हें एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। 11 सितंबर को भी थी हड़ताल इससे पहले 11 सितंबर को इन्हीं मांगों को लेकर यूएफबीयू के बैनर तले 7 संगठनों ने एक दिन की हड़ताल की थी। हड़ताल की वजह से सरकारी बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था जबकि निजी बैंकों में कम असर देखने को मिला था। निजी बैंकों के कर्मचारियों में कर्मचारी संघों के सदस्यों की संख्या कम होने के कारण उन पर हड़ताल का प्रभाव कम दिखा। यूएफबीयू संगठन में एआईबीईए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), एआईबीओसी (अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ), एनसीबीई (राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी परिसंघ), एआईबीओए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), बीईएफआई (भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ), आईएनबीईएफ (भारतीय राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी महासंघ) और आईएनबीओसी (भारतीय राष्ट्रीय बैंक अधिकारी कांग्रेस) शामिल हैं।

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप का खुला समर्थन, जानें IMEC की खासियत

 नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए एक बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर खुला समर्थन जताया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान GCC और अरब देशों के नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को ईरान के चोकपॉइंट से दूर ले जाने की जरूरत है।  ट्रंप ने कहा कि पड़ोसी देशों में कमर्शियल शिपिंग पर ईरान के हमलों ने इस जरूरत को और साफ कर दिया है. उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन IMEC और तेल को बाहर निकालने के दूसरे रास्तों का मजबूती से समर्थन करता है. इसमें पाइपलाइन और दूसरे विकल्प भी शामिल हैं. ट्रंप ने कहा कि साथ मिलकर मिडिल ईस्ट के सामने दशकों से चली आ रही चुनौतियों को दूर करने का मौका है।  2023 में सामने आया था IMEC का प्लान भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को 2023 में सामने लाया गया था. इसका मकसद भारत को खाड़ी क्षेत्र के जरिए यूरोप से जोड़ना है. इसके तहत एक ईस्टर्न कॉरिडोर भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ेगा, जबकि नॉर्दर्न कॉरिडोर खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा।  इस कॉरिडोर में रेलवे और शिप-रेल ट्रांजिट नेटवर्क के साथ सड़क परिवहन के रास्ते भी शामिल हैं. ट्रंप के ताजा समर्थन से IMEC को लेकर अमेरिका की रणनीतिक सोच भी सामने आई है. ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट की ऊर्जा सप्लाई को वैकल्पिक रास्तों से जोड़ने के संदर्भ में रखा।  ईरान को फिर दी सख्त चेतावनी बैठक में ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को आर्थिक तौर पर अलग-थलग कर दिया है और उम्मीद है कि ईरान जल्द सही फैसला करेगा. ट्रंप ने कहा कि एक समय ऐसा भी आ सकता है जब बहुत देर हो जाएगी और अमेरिका के पास ईरान को एक राष्ट्र के तौर पर बने रहने देने का मौका नहीं होगा।  ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के साथ बैठक में मौजूद देशों के नेता भी चाहते हैं कि ईरान जल्द सही कदम उठाए. उन्होंने GCC और अरब देशों के नेताओं को अमेरिका के करीबी सहयोगी और साझेदार बताया और कहा कि उनका मकसद मिडिल ईस्ट को ज्यादा सुरक्षित और समृद्ध बनाना है।  ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में जंग और कमर्शियल शिपिंग पर हमलों के बीच ऊर्जा सप्लाई के वैकल्पिक रास्तों को लेकर चर्चा तेज है. ऐसे में IMEC को लेकर अमेरिका का खुला समर्थन भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है। 

रेलवे के नए पेंशन नियम लागू, डेथ-डिसएबिलिटी मामलों में अब ऐसे तय होगी पेंशन

   नई दिल्ली रेलवे में नौकरी करने वालों के लिए पेंशन से जुड़ा एक ऐसा नियम आया है, जिसे कर्मचारी और उनके परिवार को जरूर समझना चाहिए. नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी को गंभीर बीमारी, हादसे या किसी ऐसी घटना का सामना करना पड़ता है, जिसका संबंध उसकी सेवा से है, तो उसके बाद मिलने वाली पेंशन सामान्य नियमों से अलग हो सकती है. कर्मचारी की स्थिति, मौत या डिसएबिलिटी किस तरह की घटना से जुड़ी है, इसके आधार पर पेंशन का पूरा ढांचा तय होगा।  रेलवे ने अब इसके लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. रेलवे बोर्ड ने 'रेल सर्विस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स, 2026' को नोटिफाई कर दिया है. नए नियमों ने 1993 के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स की जगह ली है. इनमें सेवा के दौरान मौत या डिसएबिलिटी से जुड़े मामलों के अलावा फैमिली पेंशन, मेडिकल बोर्ड की अपील, डिसएबिलिटी की गणना, सेवा से जुड़ी बीमारियां और पेंशन में देरी जैसे कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।  किन कर्मचारियों और परिवारों को मिलेगा फायदा? नए नियम उन मामलों में लागू होंगे, जहां कर्मचारी की डिसएबिलिटी या मौत का संबंध रेलवे सेवा से हो. अगर कर्मचारी डिसएबिलिटी के बाद भी रेलवे की सेवा में बना रहता है, तब भी इन नियमों के तहत प्रावधान लागू हो सकते हैं. इसके अलावा एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन के दायरे में आने वाले परिवार भी इन नियमों से कवर होंगे. यानी कर्मचारी की सेवा से जुड़ी मौत की स्थिति में उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन भी घटना की कैटेगरी के हिसाब से तय होगी. NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्होंने 2025 के संबंधित नियमों के तहत कौन-सा विकल्प चुना है।  नए रूल्स में मौत और डिसएबिलिटी की 4 कैटेगरी नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी को चार कैटेगरी में बांटा गया है. इन्हीं कैटेगरी से यह तय होगा कि कर्मचारी या उसके परिवार को किस तरह का पेंशन लाभ मिलेगा।  Category A: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो प्राकृतिक कारणों से हुई हो और जिसका रेलवे सेवा से कोई संबंध नहीं हो।  Category B: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो रेलवे सेवा के कारण हुई हो या सेवा की वजह से बढ़ी हो।  Category C: दंगे, हिंसा, खराब मौसम, राहत या बचाव अभियान जैसी गंभीर परिस्थितियों में हुई मौत या डिसएबिलिटी।  Category D: आतंकवादी हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या दुश्मन की कार्रवाई से जुड़े मामले।  यानी हर मामले में एक जैसा पेंशन नियम लागू नहीं होगा. घटना की प्रकृति के आधार पर कर्मचारी या परिवार का लाभ बदल सकता है।  डिसएबिलिटी पेंशन कैसे तय होगी? नई व्यवस्था में डिसएबिलिटी पेंशन को दो हिस्सों में बांटा गया है- सर्विस एलीमेंट और डिसएबिलिटी एलीमेंट. सर्विस एलीमेंट कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी यानी इमोल्यूमेंट्स या एवरेज इमोल्यूमेंट्स के 50% के बराबर होगा, जो भी अधिक हो. कैटेगरी B, C और D में 100% डिसएबिलिटी होने पर डिसएबिलिटी एलीमेंट 30% होगा. इस तरह 100% डिसएबिलिटी की स्थिति में पेंशन का ढांचा 50% सर्विस एलीमेंट और 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट से बनेगा. खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की शर्त नहीं रखी गई है. यानी 10 साल से कम सेवा वाले कर्मचारी को भी सर्विस एलीमेंट मिल सकता है. हालांकि ऐसी स्थिति में सर्विस ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलेगा।  डिसएबिलिटी का प्रतिशत कैसे तय होगा? डिसएबिलिटी का प्रतिशत भी पेंशन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा. मेडिकल बोर्ड अगर डिसएबिलिटी 50% तक तय करता है, तो डिसएबिलिटी एलीमेंट के लिए 50% ही माना जाएगा. अगर डिसएबिलिटी 50% से ज्यादा और 75% तक है, तो गणना के लिए इसे 75% माना जाएगा. वहीं 75% से ज्यादा और 100% तक डिसएबिलिटी होने पर 100% माना जाएगा. इस व्यवस्था को डिसएबिलिटी की ब्रॉड-बैंडिंग कहा गया है. इसका मकसद यह है कि कुछ स्तर की डिसएबिलिटी होने पर पेंशन की गणना कर्मचारी के लिए ज्यादा अनुकूल तरीके से की जा सके।  मौत होने पर परिवार को कितनी पेंशन? यहीं नए नियमों का एक अहम हिस्सा सामने आता है. Extraordinary Family Pension में विधवा या विधुर (जिसकी पत्नी मर गई हो) के अलावा पात्र आश्रित बच्चे, माता-पिता और आश्रित भाई-बहन भी शामिल हो सकते हैं. कैटेगरी A के मामलों में सामान्य पेंशन नियम लागू होंगे. लेकिन सेवा से जुड़ी गंभीर घटनाओं वाली कैटेगरी B, C और D में परिवार को अलग प्रावधान के तहत पेंशन मिलेगी. कैटेगरी B में फैमिली पेंशन कर्मचारी की पे के 60% के बराबर होगी. वहीं कैटेगरी C और D में फैमिली पेंशन कर्मचारी की बेसिक पे के 100% के बराबर होगी।  रेलवे बोर्ड के नियमों के मुताबिक फैमिली पेंशन ₹18,000 से कम नहीं होगी. अगर डिसएबिलिटी पेंशन पा रहा कर्मचारी उसी चोट या बीमारी के कारण बाद में मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसके लिए भी अलग प्रावधान दिए गए हैं. डिसएबिलिटी रिटायरमेंट की तारीख से सात साल के भीतर ऐसी मौत होने पर संबंधित कैटेगरी के तहत Extraordinary Pension का लाभ परिवार को मिल सकता है।  नौकरी जारी रही तो क्या होगा? मान लीजिए किसी कर्मचारी को डिसएबिलिटी हुई, लेकिन रेलवे ने उसे नौकरी से हटाने के बजाय सेवा में बनाए रखा. ऐसी स्थिति में उसे हर महीने डिसएबिलिटी एलीमेंट नहीं मिलेगा. इसके बजाय डिसएबिलिटी एलीमेंट की कैपिटलाइज्ड वैल्यू के आधार पर एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा. गजट नोटिफिकेशन में इसका उदाहरण भी दिया गया है. अगर कर्मचारी की उम्र 40 साल है, बेसिक पे ₹30,000 महीना है, वह Category B में आता है और डिसएबिलिटी 40% है, तो 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट और 9.075 के कम्यूटेशन फैक्टर के आधार पर एकमुश्त रकम ₹3,92,040 बनती है।  पेंशन के लिए अलग से आवेदन नहीं नए नियमों में कर्मचारियों और परिवारों के लिए एक अहम राहत आवेदन की प्रक्रिया को लेकर है. डिसएबिलिटी पेंशन या Extraordinary Family Pension के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. संबंधित केस की जांच और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हेड ऑफ ऑफिस की होगी. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर मामले पर फैसला किया जाएगा. डिसएबिलिटी पेंशन के मामलों में तय समय के भीतर पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी करना होगा।  पेंशन में देरी हुई तो इंटरेस्ट मिलेगा नए नियमों में पेंशन भुगतान में … Read more

डीप डिप्रेशन तट के करीब, विशाखापट्टनम-गोपालपुर के बीच लैंडफॉल के आसार

 नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में स्थित डीप डिप्रेशन अब तटीय इलाकों के बहुत नजदीक पहुंच चुका है. 23 सितंबर 2026 को सुबह 5:30 बजे भारतीय समय के अनुसार यह सिस्टम अक्षांश 18.0 डिग्री उत्तर और देशांतर 84.7 डिग्री पूर्व के पास केंद्रित था।  यह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण पूर्व में, ओडिशा के गोपालपुर से 150 KM दक्षिण में, पुरी से 230 KM दक्षिण-पश्चिम में और विशाखापट्टनम से 150 KM पूर्व-उत्तर पूर्व में स्थित था. पिछले छह घंटों में यह पश्चिम दिशा में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा है।  मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात तक उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटों को पार कर सकता है. संभावित क्रॉसिंग क्षेत्र विशाखापट्टनम और गोपालपुर के बीच है और यह कलिंगपट्टनम के करीब से गुजर सकता है. डीप डिप्रेशन की स्थिति में ही तट पार करने की संभावना है. इससे तटीय जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्री लहरों का खतरा बढ़ गया है।  सिस्टम की वर्तमान स्थिति और गति डीप डिप्रेशन बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया बना हुआ था. पिछले कुछ दिनों में यह लगातार तेज होता रहा और अब तट के बेहद करीब आ गया है. सुबह की स्थिति में यह कलिंगपट्टनम से महज 70 किलोमीटर दूर था जो दर्शाता है कि लैंडफॉल का समय निकट है. पश्चिम दिशा में इसकी गति 12 किलोमीटर प्रति घंटे रही है।  आगे पश्चिम-उत्तर पश्चिम मार्ग अपनाने से यह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से ओडिशा की ओर बढ़ेगा. इतने करीब आने से स्थानीय प्रभाव तेजी से महसूस होने लगेंगे. तटीय क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे और बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है. समुद्र उग्र हो सकता है इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है. निचले इलाकों में जलभराव की आशंका है।  उत्तर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, श्रीकाकुलम और आसपास के जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. दक्षिण ओडिशा के गंजाम, पुरी और गोपालपुर क्षेत्रों में भी यही स्थिति रहने वाली है. तेज हवाएं पेड़ों को उखाड़ने और बिजली व्यवस्था को प्रभावित करने में सक्षम हैं. नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है जिससे बाढ़ का खतरा पैदा होगा. शहरों में जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।  प्रशासन ने तटीय जिलों में अलर्ट जारी रखा है. लोगों को ऊंचे स्थानों पर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है. स्कूल और ऑफिस प्रभावित हो सकते हैं. किसानों को फसलों की सुरक्षा के उपाय करने को कहा गया है. राहत सामग्री और आपात टीमें तैयार रखी गई हैं।  तैयारी और आगे की निगरानी डीप डिप्रेशन के तट पार करने के बाद इसका प्रभाव आंतरिक क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है. तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है. सिस्टम के कमजोर पड़ने की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है. मौसम विभाग नियमित बुलेटिन जारी कर रहा है. स्थानीय प्रशासन राहत शिविर और मेडिकल टीमें सक्रिय रखे हुए है।  इस तरह के सिस्टम मानसून के अंतिम चरण में आम हैं लेकिन तट के इतने करीब आकर तीव्र रहना चुनौती पैदा करता है. भारी बारिश से भूस्खलन का खतरा पहाड़ी इलाकों में बढ़ सकता है. बिजली कटौती और संचार बाधित होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए बैकअप व्यवस्था जरूरी है।  लोगों को शांत रहकर आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए. सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचना बेहतर होगा. मौसम विभाग की वेबसाइट या ऐप से सही जानकारी लें. डीप डिप्रेशन के गुजरने के बाद भी कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर रह सकता है. जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतें. प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से नुकसान को कम किया जा सकता है. सभी को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि सिस्टम रात तक तट पार कर सकता है। 

भूटान PM त्शेरिंग टोबगे ने UNGA में की भारत की तारीफ, साझेदारी का किया जिक्र

नई दिल्ली भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने भारत को भूटान का भरोसेमंद दोस्त और साझेदार बताया. टोबगे ने कहा कि भूटान की महत्वाकांक्षी गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी यानी GMC परियोजना सीधे भारत की सीमा से लगी हुई है और इस विजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और असम सरकार का समर्थन हासिल है।  टोबगे ने कहा कि GMC की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. यह शहर भूटान के सबसे करीबी दोस्त और पड़ोसी भारत की सीमा पर स्थित है. उन्होंने कहा कि सीमा के दूसरी तरफ दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश और दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक मौजूद है. उनके मुताबिक, भारत के साथ यह कनेक्टिविटी GMC को दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंच का एक अहम रास्ता बनाती है।  GMC के लिए भारत की दोस्ती को बताया बड़ी ताकत भूटान PM ने कहा कि GMC को शुरुआत से ही वह चीज मिल रही है, जिसे कई नए शहर हासिल करने में दशकों लगा देते हैं. इसमें बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों तक पहुंच, कनेक्टिविटी और भारत जैसा भरोसेमंद दोस्त शामिल है।  उन्होंने कहा कि GMC की सोच को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ भारत सरकार और सीमा से लगे असम के पड़ोसियों का भी समर्थन मिला है. टोबगे ने इस समर्थन को परियोजना के लिए अहम बताया।  बोले- भरोसा खरीदा नहीं जा सकता शेरिंग टोबगे ने कहा कि भूटान के पास एक और ऐसी ताकत है जिसे खरीदा नहीं जा सकता और वह है भरोसा. उन्होंने कहा कि यह भरोसा शांति, राजनीतिक स्थिरता, कानून के राज और अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने के रिकॉर्ड से बना है।  भूटान PM के मुताबिक, लंबे समय के निवेशकों के लिए भरोसा बेहद अहम है, क्योंकि इससे भविष्य को लेकर एक तरह की स्थिरता और भरोसा पैदा होता है. उन्होंने कहा कि GMC दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों के लिए एक गेटवे के तौर पर काम कर सकता है।  टोबगे के बयान में भारत और भूटान के रिश्तों के साथ-साथ GMC प्रोजेक्ट के लिए भारत की भूमिका पर भी खास जोर रहा. उन्होंने भारत के साथ सीमा से जुड़ी अपनी भौगोलिक स्थिति, बाजारों तक पहुंच और दोनों देशों के बीच भरोसे को GMC की बड़ी ताकत के तौर पर पेश किया। 

SIR विवाद के बीच EC का जवाब, कहा- फैसलों पर कोई औपचारिक असहमति नहीं

 नई दिल्ली मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग के सूत्रों ने सफाई दी है. ECI सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं. लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता।  सूत्रों ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने टिप्पणियां की थीं. इन पर फैसले से पहले विचार भी किया गया. लेकिन किसी भी चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक डिसेंट दर्ज नहीं कराया. आयोग के मुताबिक, जिन आदेशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।  क्या है ऑब्जर्वेशन और डिसेंट में फर्क? चुनाव आयोग के मुताबिक, किसी मामले पर चर्चा के दौरान आयुक्त का सवाल उठाना या अपनी राय रखना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. तीन सदस्यीय आयोग में सभी चुनाव आयुक्तों की बराबर भूमिका होती है. अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हो तो बहुमत की राय के आधार पर फैसला होता है।  हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने कुछ कदमों को बिना उनकी जानकारी के उठाए जाने पर सवाल भी उठाए थे।  पहले भी चुनाव आयोग में दर्ज हो चुका है डिसेंट चुनाव आयोग के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी आयुक्त ने बहुमत की राय से अलग रुख अपनाया हो. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों समेत आचार संहिता से जुड़ी कुछ शिकायतों पर अपने सहयोगियों से अलग राय रखी थी।  2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने सोनिया गांधी की कथित अयोग्यता से जुड़े मामले में चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और नवीन चावला से अलग राय रखी थी. इन मामलों में आयोग के भीतर अलग राय दर्ज करने की व्यवस्था का इस्तेमाल हुआ था।  पहले सिर्फ एक ही चुनाव आयुक्त होता था आज तीन सदस्यीय चुनाव आयोग है, लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था. 1950 में चुनाव आयोग के गठन के समय यह सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त वाला एक सदस्यीय निकाय था. 1950 से 1989 तक आयोग इसी व्यवस्था के तहत काम करता रहा।  1989 में पहली बार दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए, लेकिन उनकी नियुक्ति थोड़े समय के लिए रही. 1990 में आयोग फिर एक सदस्यीय हो गया. इसके बाद 1993 में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के साथ तीन सदस्यीय व्यवस्था स्थायी हो गई।  इसलिए मौजूदा विवाद में अहम सवाल यही है कि चुनाव आयुक्तों की आंतरिक टिप्पणियों को किस तरह समझा जाए. ECI सूत्र इन्हें सामान्य डेलिबरेशन का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि प्रकाशित रिपोर्ट में इन्हें रिकॉर्ड पर दर्ज आपत्तियों के रूप में पेश किया गया है।  आयोग के सूत्रों ने सिस्टम में किसी तरह के केंद्रीय हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि पूरे देश के लिए एक ही सिस्टम है और सभी ईआरओ उसी सिस्टम में डेटा फीड करते हैं. अब तक किसी ने इसको लेकर शिकायत नहीं की है. आयोग के सूत्रों का यह भी कहना है कि अधिकारी भी अलग-अलग विचारधाराओं से प्रभावित हो सकते हैं।  आयोग के सूत्रों के मुताबिक, मतभेद लोकतंत्र का आधार हैं और यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. उनका कहना है कि पिछले 14 महीनों में ऐसे सैकड़ों मौके आए, जब शुरुआत में मतभेद होने के बावजूद आखिर में सर्वसम्मति से राय बनी. इस दौरान सुधार के लिए सैकड़ों कदम भी उठाए गए।  चुनाव आयुक्तों पर दावों को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया चुनाव आयुक्तों को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि अगर दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई है तो राज्यसभा में पहले से लंबित प्रस्ताव को अब सामने लाना चाहिए. उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की।  वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए हैं. सिब्बल ने आरोप लगाया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी।  उन्होंने एसआईआर को रोकने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग की. विपक्ष के अन्य नेताओं, जिनमें कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और जयराम रमेश, आप नेता सौरभ भारद्वाज और शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत शामिल हैं, ने भी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।  पूर्व चुनाव आयुक्त दावों पर क्या बोले? पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा, "मतभेद कहीं भी हो सकते हैं, लेकिन इलेक्शन कमिशन की मीटिंग के दौरान इन मतभेदों को एक-दूसरे को समझकर और समझाकर दूर किया जाता है. इसी तरह सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते रहे हैं. लेकिन यह पहली बार हुआ है कि पिछले दस महीनों में 14 बार दो इलेक्शन कमिशनरों ने विरोध किया, फिर भी फैसले होते गए. कानूनन देखा जाए तो किसी भी एक इलेक्शन कमिशनर के पास अपने स्तर पर कोई पावर नहीं है. इलेक्शन कमिशन में तीनों लोग बैठते हैं, मीटिंग करते हैं और मिलकर फैसले लेते हैं. यही व्यवस्था शक्तिशाली है. किसी एक व्यक्ति को एडमिनिस्ट्रेटिव पावर के नाम पर कोई अतिरिक्त अधिकार नहीं दिया गया है।