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कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ यात्रा जारी, 4,812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था जम्मू से हुआ रवाना

जम्मू जम्मू-कश्मीर में जम्मू यात्री निवास आधार शिविर से श्री अमरनाथ यात्रा के लिए 4812 तीर्थयात्रियों का तीसरा जत्था शनिवार को 'बम बम भोले' के जयकारों के बीच पवित्र गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ।अधिकारियों के अनुसार, 2041 तीर्थयात्री बालटाल के लिए रवाना हुए, जबकि2771 तीर्थयात्री बसों और निजी वाहनों के काफिले में पहलगाम मार्ग से यात्रा करने के लिए निकले। यात्रा का काफिला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुआ। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को श्री अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया। इसमें कहा गया है कि वार्षिक यात्रा के लिए पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित कर दी गयी है। बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर लौटे श्रद्धालु उधर, वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा 2026 शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बालटाल और पहलगाम, दोनों मुख्य मार्गों से हर्षोल्लास के साथ शुरू हुई। बालटाल मार्ग से सुबह रवाना हुए पहले जत्थे के कई श्रद्धालु बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन कर बेहद खुशी-खुशी लौट आए। पवित्र गुफा के दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और आस्था की अलग ही झलक दिखाई दी। उन्होंने कहा कि दिव्य दर्शनों से अद्भुत आनंद मिला है। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस वर्ष पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी अपने पूर्ण आकार में विराजमान हैं। पहले दिन दर्शन करने वाले यात्रियों ने खुद को बहुत ही सौभाग्यशाली बताया। उनका कहना है कि उन्हें पहली आरती और प्रथम पूजा के दौरान बाबा बर्फानी के दिव्य स्वरूप के दर्शन का अवसर मिला। उनका कहना है कि यात्रा मार्ग पर मौसम ने थोड़ी परीक्षा जरूर ली लेकिन भोलेनाथ की भक्ति के आगे सारी मुश्किलें आसान हो गईं। उन्होंने कहा कि दर्शन कर जत्थे का हर सदस्य भगवान शिव के रंग में रंग गया। पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर अद्भुत आनंद मिला : पंकज पहले जत्थे में शामिल श्रद्धालु पंकज सावंत ने बताया कि वे सुबह करीब पांच बजे दर्शन के लिए निकले। यात्रा के दौरान तेज बारिश और घने कोहरे के कारण चढ़ाई कठिन रही लेकिन बाबा भोलेनाथ की कृपा से सभी बाधाएं आसान लगने लगीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब नौ बजे जब वे पवित्र गुफा पहुंचे, तब वहां केवल सात-आठ श्रद्धालु ही मौजूद थे। भीड़ कम होने के कारण उन्हें पांच से दस मिनट तक शांतिपूर्वक पवित्र शिवलिंग के दर्शन और ध्यान का अवसर मिला। वहां का नजारा अद्भुत था, जिससे आत्मिक आनंद मिला।  

पाकिस्तान में विदेशी महिलाओं से गैंगरेप से मचा बवाल, इशाक डार के करीबी पर गंभीर आरोप

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के लाहौर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां दो विदेशी महिलाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के मामले में पुलिस ने चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) का एक बेहद करीबी रिश्तेदार भी शामिल है। इसे मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। लाहौर की एक अदालत ने शुक्रवार को चारों आरोपियों मोहम्मद रजा डार, हसन रजा, सिकंदर खान और साजिद अली को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इनमें से मुख्य आरोपी मोहम्मद रजा डार डिप्टी पीएम इशाक डार का करीबी रिश्तेदार है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, "चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें देश के उप-प्रधानमंत्री इसहाक डार का करीबी रिश्तेदार शामिल है, इसलिए पुलिस इस हाई-प्रोफाइल केस की हर पहलू से बेहद बारीकी और गंभीरता से जांच कर रही है।" पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिलाएं नीदरलैंड और वेनेजुएला की नागरिक हैं। 29 जून को लाहौर पहुंचने पर पांच लोगों ने कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया था और फिर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। स्पेन से आए एक फोन कॉल के बाद बची जान इस खौफनाक वारदात का शिकार हुईं महिलाओं की जान तब बची जब पुलिस को स्पेन से एक आपातकालीन फोन कॉल आया। दरअसल, पीड़ितों में से एक महिला के पिता ने स्पेन से पाकिस्तानी अधिकारियों को संपर्क कर अपनी बेटी की जान खतरे में होने की जानकारी दी। इस अंतरराष्ट्रीय इनपुट के तुरंत बाद हरकत में आई लाहौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस ठिकाने पर छापेमारी की और दोनों विदेशी महिलाओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया। लाहौर पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में पांच संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365A (अपहरण) और 375A (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को दबोच लिया है, जबकि पांचवां आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। बिजनेस पार्टनर हैं आरोपी और पीड़ित महिलाएं एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिलाओं और मुख्य आरोपी मोहम्मद रजा डार के बीच पहले से ही व्यावसायिक संबंध थे। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि वे अक्टूबर 2025 में सिंगापुर में रजा डार से मिली थीं। दोनों महिलाएं और रजा डार एक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर में बिजनेस पार्टनर थे। इसी व्यापारिक सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए रजा डार ने महिलाओं को पाकिस्तान आने का न्योता दिया और उनके लिए बिजनेस वीजा का प्रबंध भी किया। आमंत्रण पर दोनों महिलाएं 29 जून को लाहौर पहुंची थीं। एक पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि लाहौर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद रजा डार और उसके साथी उन्हें रिसीव करने आए। लेकिन वे उन्हें होटल ले जाने के बजाय जबरन एक अज्ञात घर में ले गए। वहां आरोपियों ने बंधक बनाकर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उनकी रिहाई के बदले मोटी फिरौती की मांग की। अदालत के एक अधिकारी के मुताबिक, जब शुक्रवार को चारों आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो पीड़ितों ने रजा डार की पहचान मुख्य साजिशकर्ता के रूप में की है।  

बलूचिस्तान फिर दहला! ग्वादर में BLA के फिदायीन हमले से 30+ पाक सैनिकों की मौत का दावा

बलूचिस्तान पाकिस्तान में बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने कोहराम मचा दिया है. बलूचिस्तान के ग्वादर में बीएलए ने पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें बिछाकर गदर काट दी है. जी हां, बलूचिस्तान के ग्वादर में फिदायीन हमला कर बीएलए ने पाकिस्तान के 30 से अधिक सैनिकों को मार डाला. ग्वादर के जिवानी इलाके के पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है. गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तान ने बैन कर रखा है. समय-समय पर बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान को घाव देता रहता है. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।  बीएलए ने अटैक कर पाकिस्तान को दिया गहरा जख्म ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का अलगाववादी समूह है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इसे एक आतंकी संगठन मानती है. इसे बैन कर रखा है. जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि वह बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा है. उसका कहना है कि बलूचिस्तान का हक मारा जा रहा है. पाकिस्तानी हुकूमत बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार करती है. पाकिस्तानी सरकार यहां के खजाने को लूटती है, मगर उस लिहाज से इस इलाके का विकास नहीं करती।  ग्वादर में कब और कैसे हुआ अटैक बहरहाल, ग्वादर में यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ. इस अटैक को बलूच लिबरेशन आर्मी की खास ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि अताउल्लाह बलूच उर्फ अजमल नाम के एक आत्मघाती हमलावर ने शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समय) विस्फोटकों से लदे ट्रक को कोस्ट गार्ड के कड़ी सुरक्षा वाले कैंप में घुसा दिया, जिससे जबरदस्त धमाका हुआ. इस अटैक में कैंप पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया।  बीएलए ने वीडियो में दिखाया सबूत बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल’ ने 43 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि धमाके से ठीक पहले विस्फोटकों से भरा ट्रक कैंप में घुस रहा था. बलूच लिबरेशन आर्मीने कहा कि बाद के फुटेज में मिलिट्री कैंप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ दिखाई दिया. इतना ही नहीं, ट्रक बम धमाके के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के ‘फतेह स्क्वाड’ ने ज़मीन से एक साथ हमला किया. बलूच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इसके बाद उसके लड़ाकों ने बचे हुए कोस्ट गार्ड कर्मियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और ऑपरेशन के दौरान 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। 

कश्मीर की पाठ्यसामग्री पर बवाल: बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा? मकबूल भट्ट और अलगाववादियों के महिमामंडन का दावा

जम्मू  आतंकवाद और अलगाववाद के अंधकार से दूर हो रहे जम्मू-कश्मीर की नई पीढ़ी को फिर से आतंक का पाठ पढ़ाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर समग्र शिक्षा नीति के तहत स्कूलों को ऐसी किताबें भेजी गई है कि जिसमें आतंकी मकबूल बट को शहीद और अलगाववादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए महिमामंडन किया गया है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने इस किताब को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और पुस्तक खरीद में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई "जम्मू-कश्मीर की महान व दिग्गज हस्तियां" नामक इस पुस्तक को एक निजी प्रकाशक ओबराय बुकस सर्विस की ओर से प्रकाशित किया गया है और इसे हिलाल अहमद व संतोष मीणा द्वारा लिखा गया है। सैयद अलगी, शब्बीद सहित कई अलगाववादियों का जिक्र शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर पुस्तक को सार्वजनिक करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और इस पुस्तक की खरीद करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। फोरम के उप-प्रधान रघु मेहता व ट्रस्टी दीपक कपूर ने बताया कि पुस्तक में आतंकी मकबूल भट्ट को शहीद-ए-आजम बताया है और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी। प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए इस पुस्तक की खरीद की और प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पुस्तक उपलब्ध कराई गई। कपूर ने बताया कि पुस्तक में मकबूल बट पर अध्याय है। इसमें भारत को आक्रांता दिखाया है और बताया है मकबूल ने कश्मीर की आजादी के लिए बलिदान दे दिया। 1984 में दी गई थी फांसी मकबूल को सीआइडी इंस्पेक्टर अमर चंद व भारतीय राजदूत की हत्या के आरोप में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। पुस्तक में कुछ अन्य अध्यायों में सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी करार दिया गया है।  

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अस्पताल में भर्ती, तबीयत बिगड़ने के बाद रद्द हुए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम

ठाणे अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इलाज के लिए ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से काम के भारी दबाव और लगातार भागदौड़ का सीधा असर एकनाथ शिंदे की सेहत पर पड़ा है। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। विधानमंडल की कार्यवाही के दौरान ही उन्हें बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद वह कुछ तय कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ठाणे पहुंचे, लेकिन तबीयत ज्यादा नासाज होने के चलते उन्हें अपने सभी कार्यक्रम रद्द करने पड़े। डॉक्टरों ने दी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और फिर विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के कारण एकनाथ शिंदे लगातार व्यस्त चल रहे थे। माना जा रहा है कि थकान, वायरल बुखार और कमजोरी की वजह से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर आराम करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर समुचित इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें फौरन ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, चिंता की कोई बात नहीं है और उनकी स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। रात 2 बजे हुआ शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश डिप्टी सीएम के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से ठाणे में होने वाले एक अहम सियासी कार्यक्रम में भी बदलाव करना पड़ा। दरअसल, ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में शुक्रवार दोपहर धुले से ठाकरे गुट की शिवसेना उपनेत्री शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश समारोह आयोजित होने वाला था। लेकिन एकनाथ शिंदे के अचानक बीमार पड़ने के कारण इसे टालना पड़ा। आखिरकार देर रात 2 बजे कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटिल ने ठाणे में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वायरल बुखार और लगातार व्यस्तता के बीच अस्पताल पहुंचे शिंदे     प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर विधानसभा सत्र के दौरान ही एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होने लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य थकान माना गया, लेकिन शाम तक तबीयत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच की सलाह दी. देर रात उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।      लगातार राजनीतिक बैठकों, विधानसभा सत्र और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था. डॉक्टरों का मानना है कि वायरल संक्रमण के साथ लगातार काम का दबाव भी उनकी तबीयत बिगड़ने की एक वजह हो सकता है. फिलहाल उनकी मेडिकल जांच जारी है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।      शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर है और उन्हें केवल निगरानी तथा आराम के लिए अस्पताल में रखा गया है. पार्टी की ओर से समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील भी की गई है।  महत्वपूर्ण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते एकनाथ शिंदे के कई राजनीतिक कार्यक्रम फिलहाल रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण पार्टी दीक्षांत समारोह में भी अब वह शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा आगामी राजनीतिक दौरों की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।  डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज अस्पताल सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वायरल बुखार और कमजोरी को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है।  राजनीतिक हलकों में बढ़ी चिंता महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर तेजी से फैल गई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. फिलहाल पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बाद ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।  एकनाथ संभाजी शिंदे महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। शिंदे इससे पहले 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 तक महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के मार्गदर्शन में हुई, जिसके बाद वे 1997 में ठाणे नगर निगम में पहली बार पार्षद चुने गए। ठाणे के कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से 2004 से लगातार विधायक रहे शिंदे ने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान शिवसेना में बगावत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। फरवरी 2023 से वे शिवसेना के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं, जब चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए नेतृत्व परिवर्तन में, उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

भारत का बड़ा फैसला: पाकिस्तान में छिपे 23 आतंकियों को आतंकी घोषित, आतंक के खिलाफ सख्त संदेश

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी करके 23 आतंकियों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है. इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है. इनमें से ज्यादातर आतंकी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं और पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहे हैं।   इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 में नगरोटा स्थित भारतीय सेना शिविर पर हुए हमले और 2022 में जम्मू के सुंजवां में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए गए हैं।  लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है. सबसे चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है. गजट के मुताबिक उसका स्थायी पता बेंगलुरु, कर्नाटक का है, जबकि वह अभी पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है।  सरकार का कहना है कि वह लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और ISIS से जुड़े मॉड्यूल से संबंध रखता है. उस पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भर्ती करने, हथियारों की ट्रेनिंग दिलवाने और आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा जुटाने का आरोप है।  गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि संबंधित व्यक्ति आतंकवाद में शामिल है. इसी आधार पर UAPA की धारा 35 के तहत उसका नाम कानून की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है।  इस सूची में शामिल होने के बाद इन आतंकियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता आसान हो जाता है. यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश राठी ने जारी की है।  पाकिस्तान के इन खूंखार आतंकियों का नाम साल 2016 में नगरोटा में आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड हाफिज मोहम्मद सईद ही था। इसके अलावा सुजवान मिलिटरी स्टेशन पर हमले में भी उसका नाम आया था। गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन में इनका नाम अब्दुर रऊफ, हाफिज खालिद वलीद उर्फ और राणा इफ्तिकार बताया गया है। राणा इफ्तिकार जिहादी संगठनों की बागडोर संभालता है। इसके अलावा युवाओं को भटकाकर आतंक के रास्ते पर लाता था। इसके अलावा अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दवा का सदस्य है। वह आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने, फंड इकट्ठा करने का काम करता है। 51 साल का हाफिज खालिद वलीद हाफिज सईद के अंडर में ही काम करता है और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है। इसके अलावा इस लिस्ट में मसूद इलियास कश्मीरी का नाम है जिसे मुफ्ती मसूद इलियास के नाम से भी जानते हैं। वह पीओके के रावलकोट में रहता है और जैश-ए-मोहम्मद में नियुक्तियां करता है। इसके अलावा भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराता है। भारत में हुए आतंकी हमले में भी उसका नाम शामिल है। नोटिफिकेशन के मुताबिक मोहम्मद मुसादिक उर्फ हमजा पाकिस्तान के नारोवाल जिले के शकारगढ़ में रहता है और कश्मीर में घुसपैठ खरने वाले जैश-ए-मोहम्मद के गुट की मदद करता है। वह सीमा पार ड्रोन के जरिए हथियार भी भेजता है और जैश के लिए साइबर हेड का भी काम करता है। वह ऑनलाइन माध्मय से भी युवाओं को आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित करता है। अबू साद के नाम से जाना जाने वाला मुफ्ती मोहम्मद असगरर खान अब्बासपुर में रहता है और नगरोटा में सेना के कैंप पर हुए हमले में शामिल था। इसके अलावा 56 साल के हाफिज अब्दुल शकूर का भी इस लिस्ट में नाम है। नोटिफिकेशन में क्या कहा गया? गृह मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में सईद के करीबी साथियों के तौर पर अब्दुल रऊफ, हाफिज खालिद वलीद और राणा इफ्तिखार की पहचान की है। दस्तावेज में कहा गया है, "54 साल के राणा इफ्तिखार जिहाद-विरोधी संगठनों के बीच तालमेल बिठाता है, युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाता है और हाफिज सईद का करीबी साथी है।" इसमें आगे बताया गया, "52 साल का अब्दुल रऊफ लश्कर और जमात-उद-दावा से जुड़ा है। वह आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने और उनमें तालमेल बिठाने तथा फंड इकट्ठा करने के काम में शामिल है। वह हाफिज सईद की सीधी कमान में लश्कर के मुख्य आतंकवादियों में से एक है।" इसमें आगे कहा गया है, "51 साल का हाफिज खालिद वलीद, हाफिज सईद की सुरक्षा में रहकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के इरादे से काम करता है और कई आतंकवादी घटनाओं का मास्टरमाइंड है।" एनआईए को मिलेगी ताकत सूची में आतंकवादियों के नाम शामिल होने से नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को उनके फंड को रोकने, हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने और उनकी संपत्ति जब्त करने की शक्ति मिलेगी। 2019 में आतंकवाद-रोधी कानून में संशोधन करके व्यक्तिगत आतंकवादियों को भी सूची में शामिल करने का प्रावधान किया गया था। संशोधन से पहले केवल समूहों को ही आतंकवादी संगठनों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता था। 80 आतंकवादियों की लिस्ट शनिवार को पाकिस्तान में रहने वाले 23 आतंकवादियों को सूची में जोड़ा गया, जिनमें जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों में शामिल लोग भी शामिल हैं। इसके साथ ही सूची में शामिल आतंकवादियों की कुल संख्या 80 हो गई है। केंद्र सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक उर्फ डॉक्टर, मुफ्ती मुहम्मद असगर खान उर्फ अबू साद, हाफिज अब्दुल शकूर उर्फ कारी जर्रार, अब्दुल्ला जिहादी, गुलाम फरीद, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और वसीम नूर जट को सूची में शामिल किया है। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कय्यूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद वलीद, मौलाना सैफुल्ला खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फारूक, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, मोहम्मद शाहिद फैसल (जो अल-कायदा और ISIS से भी जुड़ा है) को भी सूची में शामिल किया गया है।

Forex Reserves Down: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, गोल्ड रिजर्व भी घटा

 नई दिल्‍ली भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्‍ड रिजर्व में भारी कटौती हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए आंकडों के अनुसार, 26 जून 2026 को समाप्‍त सप्‍ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर रह गया, जबकि इससे पहले के सप्‍ताह के फॉरेन एक्‍सचेंज 963 मिलियन डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।  आरबीआई ने बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े हिस्‍से फॉरेन करेंसी असेट्स में 150 मिलियन डॉलर की गिरावट आई है और यह 541.067 अरब डॉलर पर आ चुका है. विदेशी मुद्रा असेट में यूरो, पाउंड और येन जैसी नॉन अमेरिकी करेंसी की वैल्‍यू में उतार-चढ़ाव का भी असर विदेशी मुद्रा भंडार में हुआ है।  गोल्‍ड रिजर्व में भारी गिरावट इसके अलावा, एक सप्‍ताह में गोल्‍ड रिजर्व में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोने के भंडार 5.394 अरब डॉलर घटकर 102.536 अरब डॉलर पर आ गया. वहीं स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDRs) की वैल्‍यू 89 मिलियन डॉलर घट गई और 18.558 अरब डॉलर रह गई. इतना ही नहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 21 मिलियन डॉलर घटकर 4.7772 अरब डॉलर रह गई है।  फरवरी में रिकॉर्ड हाई पर था विदेशी रिजर्व  गौर करने वाली बात है कि 27 फरवरी 2026 की सप्‍ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर था. हालांकि, इसके बाद वेस्‍ट एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष के कारण रुपये में लगाता दबाव बना रहा है, जिसके बाद रुपये की गिरावट को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई ने कई उपाय किए, उसमें डॉलर की बिक्री भी शामिल थी. जिस कारण विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली है।   क्‍यों आई गोल्‍ड रिजर्व में कटौती?  इसके अलावा, पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में संकट को कम करने के लिए 11 मई को लोगों से अपील की कि वे विदेशी यात्राएं कम करें. पेट्रोल और डीजल वाहनों का उपयोग कम करें और सोने की खरीद भी बंद करें, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा विदेशी खर्च को कम किया जा सके और आयात लागत को घटाया जा सके. इसके बाद सोने के आयात शुल्‍क में भी भारी बढ़ोतरी कर दी गई, जिस कारण सोने का आयात घट गया और गोल्‍ड के रिजर्व में कटौती देखी गई है। 

Heatwave in America: रिकॉर्ड गर्मी ने बिगाड़ा Independence Day Celebration, वॉशिंगटन DC में कई कार्यक्रम प्रभावित

 वॉशिंगटन  अमेरिका के पूर्वी तट पर भीषण गर्मी की वजह से कई राज्यों में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम रद्द करने पड़े हैं. वॉशिंगटन डीसी में नेशनल मॉल पर लगा ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर शुक्रवार को कुछ घंटों के लिए बंद कर दिया गया. गर्मी और नमी के कारण वहां तापमान 113 डिग्री फारेनहाइट (करीब 45 डिग्री सेल्सियस) तक महसूस हो रहा था. वर्जीनिया और मैरीलैंड के कई शहरों में परेड कैंसिल कर दी गई हैं. हालांकि कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट को तय समय पर ही रखा गया है, बस सुरक्षा के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं।  फेयर आयोजित करने वाली संस्था फ्रीडम 250 ने एक्स पर बयान जारी कर कहा कि उनके लिए मेहमानों, कर्मचारियों और कलाकारों की सुरक्षा सबसे जरूरी है, इसलिए फेयर को शाम पांच बजे तक बंद रखा गया. इसी गर्मी के चलते वर्जीनिया के लीसबर्ग और मैरीलैंड के लॉरेल तथा टकोमा पार्क में स्वतंत्रता दिवस की परेड रद्द कर दी गई हैं।  दूसरी तरफ, अमेरिकी कैपिटल पुलिस ने बताया कि शाम को होने वाला वार्षिक कैपिटल फोर्थ कॉन्सर्ट तय समय रात आठ बजे ही शुरू होगा, लेकिन गर्मी को देखते हुए दर्शकों के लिए गेट शाम सात बजे  खोले जाएंगे।  पुलिस ने लोगों से पानी की बोतलें साथ लाने की अपील की है. इस कॉन्सर्ट में पैटी लाबेल, एलन जैक्सन, शिकागो और कूल एंड द गैंग जैसे कलाकार परफॉर्म करेंगे. गुरुवार शाम हुई रिहर्सल में गर्मी की वजह से आम लोगों को जाने की इजाजत नहीं दी गई थी।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शाम को साउथ डकोटा जाकर माउंट रशमोर पर भाषण देंगे और आतिशबाजी देखेंगे. वे कल शाम वॉशिंगटन में भी भाषण देंगे, जिसके बाद बड़ा आतिशबाजी शो होगा।  भीषण गर्मी के कारण एमट्रेक ने भी उत्तर पूर्वी इलाके में कुछ ट्रेनें रद्द कर दी हैं, क्योंकि गर्मी से पटरियां प्रभावित हो सकती हैं. न्यूयॉर्क में मेयर जोहरान मामदानी ने बिजली बचाने की अपील की, जिस पर रिपब्लिकन नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 

सिंधु जल विवाद में चीन की एंट्री क्यों? भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने ड्रैगन का क्यों लिया सहारा

नई दिल्ली  पाकिस्तान दशकों से सिंधु से अपनी प्यास बुझा रहा था. सिंधु जल समझौते से फायदा उठा रहा था. मगर वह अपनी औकात भूल गया. उसे यह याद नहीं रहा कि सिंधु जल समझौते की चाबी भारत के पास है. पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक करवाकर बहुत बड़ी गलती कर दी. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान को दोतरफा मार मारी. पहले तो ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए. उसके बाद सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान के होश ठिकाने लगा दिए. भारत ने जब से सिंधु का पानी रोका है, तब से पाकिस्तान की हालत खराब है. वह पानी के लिए तड़प रहा है. पाकिस्तानी नेताओं के बयान में बार-बार सिंदु का दर्द झलक रहा है. अलग-अलग मंचों पर सिंधु का राग अलाप रहा है. जब इन सबसे भारत पर कोई असर नहीं पड़ा तो पाकिस्तान अब चीन के पल्लू में जा छिपा है. पाकिस्तान ने अबकी बार सिंधु जल विवाद पर सीधे चीन को घसीट लिया है।  दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर विवाद पुराना है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल सकती. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब पाकिस्तान ने इस पूरे विवाद में चीन का नाम भी जोड़ दिया है. पाकिस्तान का कहना है कि हिमालय से निकलने वाली नदियां सिर्फ भारत और पाकिस्तान की नहीं हैं, बल्कि चीन भी इनका बड़ा हितधारक है. सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान ने अचानक चीन को इस विवाद में क्यों घसीटा? पाकिस्तान की नई रणनीति क्या है? सबसे पहले जानते हैं कि पाकिस्तान ने अब चीन का नाम कैसे और क्यों लिया है. दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हिमालय से निकलने वाली नदियां कुदरत की देन हैं. ये नदियां सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती हैं. उनका कहना है कि चीन से भी कई बड़ी नदियां निकलती हैं, इसलिए पानी का मुद्दा पूरी मानवता से जुड़ा है और चीन की भूमिका भी अहम है. यानी पाकिस्तान यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का मुद्दा है।  पाकिस्तान का पूरा बयान क्या है? पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘चीन के बारे में दो सवाल थे. सबसे पहले हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों का पानी कुदरत की एक बड़ी देन है. हिमालयी नदी प्रणाली अल्लाह की एक नेमत है, जो सिंधु से लेकर मेकांग तक कई देशों को पानी देती है. चीन की नदियां भी वहीं से निकलती हैं. इसलिए, यह पूरी इंसानियत की साझा विरासत है. पानी से जुड़े बड़े मुद्दों पर चीन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहेगा, क्योंकि वह सिर्फ़ दक्षिण एशिया (भारत और पाकिस्तान) में बहने वाली नदियों के मामले में ही नहीं, बल्कि हिमालय से चीन और सुदूर पूर्व (हमारे पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) की ओर बहने वाली विशाल नदी प्रणालियों के मामले में भी एक अहम पक्षकार है।  चीन का नाम क्यों लिया? अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान ने चीन का नाम क्यों लिया. तो इसका जवाब सिंपल है- प्रेशर यानी दबाव. जी हां, सिंधु जल पर पाकिस्तान छटपटा रहा है. भारत ने जब से पानी रोका है, तब से वह बिलबिला रहा है. वह हर कोशिश कर रहा है मगर सिंधु का एक कतरा तक नहीं मिल पा रहा है. भारत साफ कर चुका है, पहले आतंकाद रोको, तभी पानी मिलेगा. इसलिए पाकिस्तान इस समय कूटनीतिक दबाव में है. भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मंचों पर घेरा है. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि चीन खुलकर उसके पक्ष में बोले और भारत पर दबाव बने।  पाकिस्तान को चीन से क्या उम्मीद यह हकीकत है कि चीन बहुत समय से पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त है. यूं कहिए कि वह पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. इसलिए पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन उसके समर्थन में आवाज उठा सकता है. मगर बीते कुछ समय से भारत-चीन के रिश्ते भी बेहतर हुए हैं. अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत और चीन में नजदीकियां बढ़ी हैं. ऐसे में पाकिस्तान का चीन खुलकर साथ दे और भारत का विरोध करे, इसकी संभावना बहुत कम है. इसलिए यहां पाकिस्तान की दाल गलती नहीं दिख रही है।  चीन क्यों नहीं देगा दखल भारत-पाकिस्तान के इस सिंधु जल मसले पर चीन के न बोलने की एक और वजह है. भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद का आधार सिंधु जल संधि है. यह समझौता सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इसमें चीन किसी भी रूप में पक्षकार नहीं है. इसलिए चीन चाहकर भी दो देशों के मसले में मौजूदा हालात में न बोलेगा और न दखल देगा. वैसे भी लीगली भी देखें तो सिंधु जल संधि में चीन की कोई भूमिका नहीं है।  पाकिस्तान को किस बात का डर? पाकिस्तान के लिए सिंधु का पानी संजीवनी से कम नहीं है. पाकिस्तान बहुत हद तक सिंधु के पानी पर जिंदा है. पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. अगर भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का अधिकतम इस्तेमाल करता है या परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाता है, तो पाकिस्तान को भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता हो सकती है. इस बार तो वैसे भी बाढ़ ने पाकिस्तान को बचा लिया. मगर बाढ़ नहीं आती तो पाकिस्तान में अभी त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा होता।  सिंधु जल पर भारत का रुख क्या है? सिंधु जल समझौते पर भारत का रुश साफ है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का रास्ता नहीं छोड़ता, तब तक उसे एक बूंद भी सिंधु का पानी नहीं मिलेगा. भारत का तर्क है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते. भारत यह भी कह … Read more

Oil Import पर घटेगी निर्भरता? SBI रिपोर्ट में 2030 तक भारत की बड़ी तैयारी का खुलासा

नई दिल्‍ली ईरान-अमेरिका जंग के दौरान भारत को कच्‍चे तेल के आयात में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देश से ज्‍यादा कीमत पर कच्‍चे तेल का आयात करना पड़ा, जिस कारण देश का आयात बिल काफी बढ़ गया।  अब देश अपने आयात बिल को कम करने पर फोकस कर रहा है. साथ ही एनर्जी को लेकर दूसरे देशों से निर्भरता को कम कर रहा है. जिसे लेकर सरकार ने इलेक्‍ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ा दी है और इसे प्रमोट भी कर रही है. नियामकी चीजों में ढील भी दी गई है. हर तरफ से सरकार का फोकस कच्‍चे तेल को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है. इस बीच, SBI की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया गया है।  SBI की रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2030 तक भारत एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा, जिससे उसका आयात बिल 1 लाख करोड़ रुपये कम हो सकता है, जिससे भारत को एक बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, इसके लिए भारत को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं… 2030 तक हो सकता है ये बड़ा बदलाव दरअसल, रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 2027 से 2030 के बीच 35 लाख इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोल वाहनों की जगह ले सकते हैं. अगर 2030 तक घरेलू ऑटो मार्केट में 20 फीसदी ईवी का हिस्‍सा होता है तो भारत का इम्‍पोर्ट बिल 1 लाख करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मार्च से जून महीने के दौरान, हर महीने एवरेज 2.30 लाख ईवी वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है. यह 2025 तक हर महीने 1.3 लाख था. इसका मतलब है कि हर महीने ईवी रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या में करीब 1 लाख की बढ़ोतरी हुई है।  चार्जिंग इंफ्रा बढ़ाने पर जोर  SBI की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अलग-अलग राज्‍यों में चार्जिंग स्‍टेशनों को लेकर लोड अलग-अलग है. कुछ राज्‍यों में हर चार्जिंग स्‍टेशन 200 से ज्‍यादा ईवी की सेवा देते हैं और दूसरे राज्‍यों में यह संख्‍या 50 वाहनों तक ही सीमित है. भारत में ईवी चार्जिंग की सफलता, चार्जिंग स्‍टेशनों और ईवी इंफ्रा पर निर्भर करेगी. भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्‍टेशन हैं. इसमें भी कर्नाटक और महाराष्‍ट्र में कुल देश का 35 फीसदी ईवी इंफ्रा डेवलप है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सबसे पहले हर राज्‍यों में चार्जिंग इंफ्रा को बढ़ाने पर जोर देना होगा।  दूसरे देशों पर निर्भरता होगी कम  अगर सरकार और राज्‍य पूरी क्षमता के साथ ईवी को प्रमोट करते हैं और उसके सफलता के लिए सही प्रयास किए जाते हैं तो यह कच्‍चे तेल के आयात में बड़ी कटौती कर सकती है. देश में पेट्रोल-डीजल पंपो की संख्‍या कम हो सकती है, क्‍योंकि ईवी के आने से ईंधन भरवाने की समस्‍या कम हो जाएगी. इस वजह से दूसरे देशों-खासकर मिडिल ईस्‍ट और अमेरिका जैसे दशों से कच्‍चे तेल की निर्भरता कम हो जाएगी।