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ईरानी जहाज के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने के बाद अमेरिका ने किया हमला, बातचीत का रास्ता क्या होगा?

वाशिंगटन/तेहरान  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना ने गल्फ ऑफ ओमान में एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज तौस्का पर गोलीबारी कर उसे जब्त कर लिया. जहाज अमेरिकी नौसेना की ब्लॉकेड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था. इस घटना ने क्षेत्र में पहले से ही अस्थिर युद्धविराम को और कमजोर कर दिया है, जबकि पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता पर गहरा संकट छा गया है।  सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यूएसएस स्प्रुएंस ने तौस्का को रोका और उसे रुकने की उचित चेतावनी दी. ईरानी क्रू ने नहीं माना, इसलिए हमारी नौसेना ने उनके इंजन रूम में छेद कर उन्हें रोक दिया. अब यह जहाज यूएस मरीन्स की कस्टडी में हैं और देख रहे हैं कि उसमें क्या है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी इसकी पुष्टि की. जहाज ईरान के अब्बास बंदरगाह की ओर जा रहा था. ईरान की सेना ने राज्य मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है कि वह जल्द ही जवाबी कार्रवाई करेगी. ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।  गौरतलब है कि पिछले हफ्तों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान ने अमेरिकी ब्लॉकेड के जवाब में जलमार्ग को बंद रखा हुआ है. इससे ग्लोबल तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है. इस बीच, व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि उपराष्ट्रपति जेडी वांस और उच्च स्तरीय अमेरिकी अधिकारी आने वाले दिनों में पाकिस्तान जाकर ईरान के साथ शांति वार्ता का नया दौर करेंगे. हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका ब्लॉकेड नहीं हटाता तब तक वह अपने दूत नहीं भेजेगा. इस बीच मौजूदा युद्ध विराम की मियाद बुधवार को समाप्त हो जा रही है. इसे बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन नई घटना ने स्थिति को जटिल बना दिया है।  वार्ता में अड़चने वार्ता में कई प्रमुख अड़चनें हैं. ईरान के यूरेनियम स्टॉक पर नियंत्रण, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी मांगें इसमें सबसे अहम हैं. ईरान अमेरिकी ब्लॉकेड को युद्धविराम का उल्लंघन मान रहा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि ईरान ने जहाजों पर फायरिंग कर समझौते का उल्लंघन किया. इस तनाव का वैश्विक प्रभाव साफ दिख रहा है. रविवार को तेल की कीमतों में फिर उछाल आया. ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दुनिया के लगभग फीसदी तेल की ढुलाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती है. कई दिनों से यहां शिपिंग प्रभावित है, जिससे एशिया और यूरोप में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।  पाकिस्तान इन वार्ताओं में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. पहले दौर की वार्ता में 21 घंटे की चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका था. उपराष्ट्रपति वांस ने तब कहा था कि ईरान अमेरिकी शर्तों- खासकर परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता को मानने को तैयार नहीं है. अब नई घटना के बाद वार्ता की संभावनाएं धूमिल नजर आ रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है. अगर युद्ध विराम नहीं बढ़ाया गया तो फिर से पूर्ण युद्ध की स्थिति बन सकती है. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ब्लॉकेड तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी मांगें पूरी नहीं करता. वहीं ईरान कह रहा है कि जब तक अमेरिका अपने बंदरगाहों पर ब्लॉकेड नहीं  .हटाता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलना नामुमकिन है। 

कर्मचारियों के लिए बुरी खबर, 8वें वेतन आयोग के हिसाब से नहीं मिलेगा डीए का एरियर

नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी बढ़ाने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन इसका फायदा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत नहीं दिया जाएगा. केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले दिनों जनवरी-जून, 2026 के लिए महंगाई भत्‍ता 2 फीसदी देने का ऐलान किया है. यह महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से बढ़ाया जाएगा, लेकिन आगे जब 8वां वेतन आयोग लगेगा तो इस महंगाई भत्‍ते का एरियर केंद्रीय कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा।  केंद्रीय कर्मचारी संगठन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि अभी 8वां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है. लिहाजा सरकार ने 2 फीसदी महंगाई भत्‍ता बढ़ाने का ऐलान 7वें वेतन आयोग के हिसाब से ही किया है. आगे जब 8वां वेतन आयोग लागू होगा तो माना जा रहा है कि इसे 1 जनवरी, 2026 से ही प्रभावी किया जाएगा. ऐसे में कर्मचारी संगठन कयास लगा रहे थे कि तब 8वें वेतन आयोग और 7वें वेतन आयोग के बीच जो भी अंतर होगा, उस राशि को जनवरी-जून, 2026 के महंगाई भत्‍ते के हिसाब से एरियर बनाकर दिया जाएगा. लेकिन, मामले से जुड़े लोगों को कहना है कि सरकार इस एरियर के भुगतान को नजरअंदाज कर सकती है।  अभी तक क्‍या था नियम कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि ने बताया कि अभी तक जब भी नया वेतन आयोग लागू होता था तो पहला महंगाई भत्‍ता शून्‍य कर दिया जाता था और उसकी शुरुआत 6 महीने बाद होती थी. तब कर्मचारियों को बीच की अवधि वाले महंगाई भत्‍ते की राशि को एरियर के रूप में नए वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके दिया जाता था. इस बार कर्मचारियों को भले ही मूल वेतन पर महंगाई भत्‍ते का एरियर मिल जाएगा, लेकिन जनवरी-जून अवधि के लिए 8वें वेतन आयोग के हिसाब से अलग एरियर नहीं दिया जाएगा।  इस बार क्‍या होगा नुकसान कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि का कहना है कि इस बार जनवरी-जून का महंगाई भत्‍ता 7वें वेतन आयोग के हिसाब से दिया जा रहा है, लिहाजा इस अवधि का कोई डीए बकाया नहीं होगा. आगे जब 8वें वेतन आयोग को लागू कर दिया जाएगा तब जुलाई से 7वें वेतन आयोग के तहत जो डीए की बढ़ोतरी होगी, उस पर 8वें वेतन आयोग के हिसाब से कैलकुलेट करके महंगाई भत्‍ते के एरियर का भुगतान किया जाएगा. 8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की सैलरी जनवरी, 2026 से ही बढ़ाए जाने का अनुमान है।  असली मुद्दा एचआरए का फंसेगा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हर बार जब भी नया वेतन आयोग लगता है तो एचआरए का एरियर ही फंस जाता है. सरकार को चाहिए कि 8वां वेतन आयोग लगने के बाद महंगाई भत्‍ते की तरह एचआरए के एरियर का भी भुगतान किया जाए. अगले महंगाई भत्‍ते का ऐलान दिवाली के आसपास अक्‍टूबर में किया जाएगा. तब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से कर्मचारियों को डीए के एरियर का भुगतान किया जा सकता है।   

CJI सूर्यकांत का बंगाल में सख्त कदम, कलकत्ता HC से तुरंत मांगी रिपोर्ट; वोटिंग में रुकावट?

नई दिल्ली  भारत में चुनाव सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है इसे जनता के अधिकारों का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. लेकिन जब इसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है. पश्चिम बंगाल के SIR केस में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जिस तरह सख्ती दिखाई है, उसने इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया है. सवाल यह है कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे तो क्या हजारों-लाखों लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं? यह चिंता सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोकतंत्र के मूल ढांचे से जुड़ी है।  अब CJI की टिप्पणी और तुरंत रिपोर्ट मांगने का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. कलकत्ता हाई कोर्ट से आज ही स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. यह दिखाता है कि अदालत इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. चुनाव से ठीक पहले ऐसी गड़बड़ियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है. अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सीधे मतदान पर पड़ सकता है. यही वजह है कि अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी है।  ट्रिब्यूनल पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट सख्त     पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनलों के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तुरंत रिपोर्ट मांगी गई है. अदालत यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में आदेशों की अनदेखी हो रही है और क्या नागरिकों को न्याय पाने में दिक्कत हो रही है।      वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में दलील दी कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं. लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति नहीं दी जा रही. यहां तक कि वकीलों को भी पक्ष रखने का मौका नहीं मिल रहा. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।      कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में हर दिन नए मुद्दे सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि अब हाईकोर्ट से सीधे रिपोर्ट लेकर स्थिति साफ करने का फैसला लिया गया है. अदालत का यह कदम इस बात का संकेत है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है।  SIR मामला क्या है और विवाद क्यों बढ़ा? SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक प्रक्रिया है, इसमें चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है. इसमें नाम जोड़ने और हटाने का काम होता है. विवाद तब बढ़ा जब आरोप लगा कि कई लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और अपील के लिए बने ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे. इससे हजारों लोगों के वोट देने का अधिकार प्रभावित हो सकता है।  सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन होना जरूरी है. अदालत ने कहा कि जिन लोगों की अपील मतदान से दो दिन पहले तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी तो नहीं हो रही।  क्या सच में लोग वोट देने से वंचित हो सकते हैं? अगर ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं करते और अपील समय पर नहीं सुनी जाती, तो यह संभावना बन सकती है. कई लोग अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं. यही वजह है कि अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और तुरंत हस्तक्षेप किया है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।  आगे क्या हो सकता है? अब सबकी नजर कलकत्ता हाईकोर्ट की रिपोर्ट पर टिकी है. अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आती है, तो सुप्रीम कोर्ट कड़े निर्देश जारी कर सकता है. इससे ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली में बदलाव हो सकता है. चुनाव से पहले यह मामला और भी अहम हो गया है, क्योंकि इसका सीधा असर मतदाताओं के अधिकार पर पड़ता है. अदालत का यह रुख साफ करता है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

पचपदरा रिफाइनरी में आग से मची अफरातफरी, कल पीएम मोदी करने वाले थे उद्घाटन, सीएस पहुंचे मौके पर

बालोतरा  राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अगले ही दिन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफाइनरी के उद्घाटन का कार्यक्रम निर्धारित है। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और रिफाइनरी प्रबंधन में हलचल तेज हो गई।   प्रोसेसिंग यूनिट में लगी आग प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग रिफाइनरी की एक प्रोसेसिंग यूनिट में लगी है। घटना के बाद परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। आग किस कारण से लगी, इसका अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। तकनीकी टीम और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और कारणों की जांच में जुटी हुई हैं। दूर तक दिखाई दिया धुएं का गुबार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग काफी तेज थी और उसका घना धुआं करीब एक किलोमीटर दूर से भी साफ दिखाई दे रहा था। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता दिखाई दिया, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।   राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 20 से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के लिए तुरंत मोर्चा संभाला। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आग को अन्य यूनिटों तक फैलने से रोका जा सके। 2013 में रखी गई थी रिफाइनरी की आधारशिला रिफाइनरी की आधारशिला सबसे पहले 22 सितंबर, 2013 को सोनिया गांधी ने राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान रखी थी, जिसकी शुरुआती अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। सरकार बदलने के बाद, PM मोदी ने 16 जनवरी, 2018 को इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया और इसकी लागत को संशोधित करके 43,129 करोड़ रुपये कर दिया। लोकार्पण की तैयारियों के बीच 'अग्निपरीक्षा' जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर को रिफाइनरी की एक विशेष यूनिट में अचानक स्पार्किंग या अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी। कल होने वाले प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूरी रिफाइनरी को छावनी में तब्दील किया गया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने तकनीकी टीम और प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय, बुझाने के प्रयास तेज आग लगते ही रिफाइनरी का इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम तुरंत सक्रिय हो गया। मौके पर मौजूद दर्जनों दमकल गाड़ियां और हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। धुएं की तीव्रता इतनी अधिक है कि इसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। रिफाइनरी के उच्चाधिकारी और जिला प्रशासन के आला अफसर मौके पर पहुँच चुके हैं और स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।   उद्घाटन कार्यक्रम पर पड़ सकता है असर बताया जा रहा है कि 21 अप्रैल को सुबह करीब 11:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन किया जाना था। ऐसे में आग लगने की इस घटना ने प्रशासन और प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस हादसे का उद्घाटन कार्यक्रम पर भी असर पड़ सकता है।   अधिकारियों की नजर स्थिति पर फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता आग पर पूरी तरह काबू पाना और किसी भी तरह के बड़े नुकसान को टालना है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही आग पर नियंत्रण पाने की उम्मीद है। सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी प्रोटोकॉल पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल यहां भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसके लिए एसपीजी (SPG) और राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा का कड़ा घेरा बना रखा है। लोकार्पण से ठीक पहले हुई इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:     क्या यह कोई तकनीकी खामी है या सुरक्षा में चूक?     क्या कल के कार्यक्रम के समय में कोई बदलाव होगा? (हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है)।     रिफाइनरी के संवेदनशील जोन में आग लगने का वास्तविक कारण क्या है? अधिकारियों में मचा हड़कंप, कारणों का खुलासा नहीं फिलहाल प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और उसे अन्य यूनिट्स तक फैलने से रोकने की है। आग लगने के सटीक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। एचपीसीएल (HPCL) और राजस्थान रिफाइनरी के तकनीकी विशेषज्ञ मौके पर डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। गनीमत यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

रेलवे ने कबाड़ बेचकर ₹6,800 करोड़ की कमाई की, 168% की वृद्धि से तोड़े सभी रिकॉर्ड

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने अपनी वित्तीय सुदृढ़ता की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2025-26 के समापन पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने स्क्रैप (कबाड़) की बिक्री से कुल 6,813.86 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. यह आंकड़ा रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य से लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है।  लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन रेलवे की यह सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के कुशल मुद्रीकरण की दिशा में चल रहे व्यवस्थित प्रयासों का परिणाम है. पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपये की कमाई की थी. अधिकारियों के अनुसार, अनुपयोगी रेल पटरियों, पुराने इंजनों, कोचों और वैगनों के पारदर्शी ई-ऑक्शन के कारण राजस्व में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।  गैर-किराया राजस्व (NFR) में 168% की भारी वृद्धि रेलवे के लिए स्क्रैप की बिक्री न केवल आय का स्रोत बनी है, बल्कि इसने गैर-किराया आय) को भी मजबूती दी है. रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन, स्टेशन पुनर्विकास और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय वित्त वर्ष 2021-22 के 290 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 777.76 करोड़ रुपये हो गई है. यह पांच वर्षों में लगभग 168 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है. इस वर्ष के लिए NFR का लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे रेलवे ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है।  बिना टिकट यात्रियों से वसूले 148 करोड़ रुपये बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाकर 148 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं. माल ढुलाई में भी जोन ने 21 मिलियन टन से ज्यादा माल पहुंचाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तर मध्य रेलवे के रेलवे यार्ड, वर्कशॉप और ट्रैक के किनारे पड़ी पुरानी लोहे की चीजें, पुराने सामान और बेकार माल को नीलामी के जरिए बेचा गया, रेलवे ने इसे “कबाड़ से जुगाड़” का नाम दिया है. इस अभियान से सिर्फ पैसे ही नहीं आए, बल्कि रेलवे के स्टेशन और यार्ड साफ-सुथरे भी हो गए हैं।  इसके अलावा, रेलवे ने बिना टिकट यात्रा पर बड़ी सख्ती की. विशेष टिकट चेकिंग ड्राइव चलाकर बिना टिकट यात्रा करने वालों से 148 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया. अब रेलवे नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने की व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है।  पर्यावरण और संचालन को लाभ स्क्रैप मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया ने न केवल खजाने को भरा है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार किया है. यार्डों, वर्कशॉप और डिपो में सालों से पड़े कबाड़ के हटने से बहुमूल्य जगह खाली हुई है, जिससे रेलवे परिसरों में सुरक्षा और स्वच्छता बढ़ी है. साथ ही, स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से रेलवे अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों (Waste-to-Wealth) को भी पूरा कर रहा है।  यात्रियों पर बिना बोझ डाले ढांचागत विकास सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त आय का उपयोग रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा. टिकट की दरों में वृद्धि किए बिना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, जैसे आधुनिक स्टेशन आउटलेट, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर 22 प्रीमियम ब्रांडेड आउटलेट्स आवंटित किए जा चुके हैं, जो भविष्य में आय के नए द्वार खोलेंगे। 

जापान में 7.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी के खतरे को लेकर अलर्ट जारी

टोक्यो   सोमवार को जापान के पूर्वोत्तर तट पर प्रशांत महासागर में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है। भूकंप का केंद्र उत्तरी इवाते प्रांत के पास समुद्र में था। भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 4:53 बजे आया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। टोक्यो तक महसूस हुए झटके भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।  इसके अलावा, क्योडो के अनुसार, जापान में आए जोरदार भूकंप के बाद टोक्यो-आओमोरी बुलेट ट्रेन लाइन पर परिचालन रोक दिया गया। सुनामी की चेतावनी जारी भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है। इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरों की चेतावनी दी गई है। एजेंसी ने तटीय इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। सुनामी लहरों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है। जापान के मीडिया NHK के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि जोरदार भूकंपीय गतिविधि के कारण समुद्र तट के पास सुनामी भी आ गई। मौसम एजेंसी ने चेतावनी दी कि सुनामी की लहरें उत्तरी तटरेखा तक लगभग तुरंत पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने कहा कि तटीय क्षेत्रों और नदी के किनारे वाले इलाकों से तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि ऊंची जमीन या किसी सुरक्षित इमारत में चले जाएं, और साथ ही यह भी चेताया कि सुनामी की लहरों से नुकसान होने की संभावना है। एजेंसी ने आगे कहा, "सुनामी की लहरें बार-बार आने की उम्मीद है। जब तक चेतावनी वापस नहीं ले ली जाती, तब तक सुरक्षित जगह न छोड़ें।" सालो पहले जापान में आया था प्रलय जापान में अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं जो कई बार भयानक तबाही भी मचाते हैं। इसी वजह से यहां सरकार ने सख्त निर्माण नियम लागू किए हैं जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इमारतें मजबूत झटकों का सामना कर सकें। जापान के जहन में अभी भी 2011 की फुकुशिमा त्रासदी की काली यादें कैद हैं। सालो पहले जापान में 9.0-9.1 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था जिसने एक घातक सुनामी को जन्म दिया जिसने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को बर्बाद कर दिया था। सुनामी से 18,500 लोग मारे गए थे या लापता हो गए थे।   

AAP की हवाला मुश्किलें बढ़ी, गुजरात में किसने भेजा था दिल्ली से कैश?

सूरत गुजरात में सूरत क्राइम ब्रांच ने स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े एक कथित बड़े “राजनीतिक हवाला घोटाले” का खुलासा किया है। जांच में एक अवैध वित्तीय नेटवर्क का पता चला है, जिसके जरिए पिछले चार महीनों में दिल्ली से सूरत तक अंगड़िया चैनलों के माध्यम से 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचाई गई। पुलिस ने दिल्ली और गुजरात के बीच संचालित एक सुव्यवस्थित अंतरराज्यीय गिरोह की पहचान की है। प्रमुख व्यक्तियों में शामिल हैं: हिमांशु पाहुजा: दिल्ली के जनकपुरी निवासी पाहुजा को इस गिरोह का मुख्य वित्तपोषक और संचालक बताया जा रहा है। वह आम आदमी पार्टी के नेता सुरेंद्र भारद्वाज का करीबी सहयोगी माना जाता है। आकाश मिश्रा: सूरत के पिपलोद क्षेत्र से संचालित मिश्रा, दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के पूर्व निजी सहायक (PA) रह चुके हैं। उन पर सूरत में मुख्य रूप से धन प्राप्त करने का आरोप है। अजय तिवारी: मिश्रा के सहयोगी, जिन्होंने शहर में अवैध धन के वितरण और प्रबंधन में सहायता की। CCTV फुटेज और कार्यप्रणाली इस मामले में बड़ी सफलता तब मिली जब क्राइम ब्रांच को स्थानीय अंगड़िया फर्मों से CCTV फुटेज मिले। फुटेज में कथित रूप से लोगों को बड़ी मात्रा में कैश गिनते और अवैध लेन-देन संभालते हुए देखा गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह धन उच्च स्तरीय पार्टी अधिकारियों के निर्देश पर दिल्ली से भेजा गया था, ताकि स्थानीय गतिविधियों को समर्थन दिया जा सके। यह भी सामने आया है कि हिमांशु पाहुजा इस मामले का प्रमुख संचालक है। वह पहले कांग्रेस में सक्रिय था, लेकिन वर्तमान में आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ माना जाता है और सुरेंद्र भारद्वाज का करीबी है। क्राइम ब्रांच ने उससे कई घंटों तक पूछताछ की। जांच से संकेत मिलता है कि दिल्ली से धन भेजने में उसकी केंद्रीय भूमिका थी। फिलहाल उसे छोड़ दिया गया है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय नेटवर्क और भूमिका जांच में यह भी सामने आया है कि मिश्रा और तिवारी केवल धन प्राप्त करने वाले ही नहीं थे, बल्कि सूरत में स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में भी गहराई से शामिल थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने पाहुजा की ओर से धन एकत्र करने और वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनाव प्रचार में धन का दुरुपयोग अधिकारियों को संदेह है कि इस बेहिसाब धन का उपयोग चुनाव संबंधी गतिविधियों में किया गया, जिसमें रैलियों का आयोजन, स्थानीय कार्यकर्ताओं को वित्तीय सहायता देना और “गुप्त राजनीतिक अभियान” चलाना शामिल है। यह आचार संहिता (Model Code of Conduct) और आयकर नियमों का सीधा उल्लंघन है। आयकर विभाग भी जांच में शामिल सूरत क्राइम ब्रांच ने इस कथित “काले धन” के स्रोत का पता लगाने के लिए आयकर विभाग को औपचारिक रूप से सूचित किया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सूरत के कई बड़े राजनीतिक नेताओं को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। संभावित अंतरराज्यीय कड़ियां फिलहाल जांच का केंद्र दिल्ली-सूरत नेटवर्क ही है, पर पुलिस को संदेह है कि इसी तरह के हवाला नेटवर्क गुजरात के अन्य बड़े शहरों- अहमदाबाद, राजकोट और वडोदरा, में भी सक्रिय हो सकते हैं। पूरे वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक अंतरराज्यीय जांच टीम गठित की जा सकती है।

गर्मियों में उफान: UP-MP और अन्य राज्यों में हीटवेव, गोंदिया में ट्रैफिक सिग्नल बंद

 नई दिल्ली भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी को लेकर चेतावनी जारी की है. IMD ने पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में 23 अप्रैल तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है।  साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पूर्वी मध्य प्रदेश में 20 और 21 अप्रैल को हीटवेव की स्थिति बनने की संभावना है. इसके अलावा मौसम विभाग ने झारखंड में 22 अप्रैल तक जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 23 अप्रैल तक हीटवेव का अलर्ट जारी है. वहीं, इस बीच पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और ओडिशा में हीटवेव की संभावना बनी हुई है।  महाराष्ट्र में हाय गर्मी महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. इस चिलचिलाती धूप ने नागरिकों का हाल बेहाल कर दिया है. विशेष रूप से गोंदिया शहर के प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लाल होने के कारण लोगों को काफी देर तक कड़ी धूप में खड़ा रहना पड़ता था, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।  जनता की इस समस्या को देखते हुए, नागरिकों ने जिला यातायात शाखा के पुलिस निरीक्षक नागेश भास्कर से अनुरोध किया कि दोपहर के समय सिग्नल बंद रखे जाएं. नागरिकों की इस जायज मांग पर संज्ञान लेते हुए यातायात पुलिस ने एक जरूरी फैसला लिया है. इस बीच सिग्नल बंद रहने का समय दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक तय किया गया है. इसके बाद शाम 4 बजे से सिग्नल फिर से चालू कर दिए जाएंगे।  इस फैसले के कारण अब नागरिकों को तपती धूप में चौराहों पर रुकना नहीं पड़ रहा है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिला है. जिला यातायात पुलिस के इस मानवीय कदम की शहरवासियों द्वारा सराहना की जा रही है।  दिल्ली में बढ़ेगा पारा भारत मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 20 अप्रैल को अधिकतम तापमान 39°C से 41°C और न्यूनतम तापमान 20°C से 22°C के बीच रहने की संभावना है. ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा सकता है।  आने वाले दिनों में भी गर्मी से राहत के संकेत नहीं हैं, दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 40°C से 42°C के बीच बना रह सकता है।  मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यहां लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण स्वास्थ्य को लेकर जोखिम बना रह सकता है. इसका असर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है।  क्या सावधानियां बरतें:     लंबे समय तक सीधे धूप में रहने से बचें     हल्के और ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें     बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकें     पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें  

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बस दुर्घटना, 15 की मौत; मृतकों की संख्या बढ़ सकती है

उधमपुर  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में एक यात्री बस खाई में गिर गई है। इस भीषण हादसे में 15 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कई यात्री घायल हुए हैं। यह घटना तब हुई, जब बस रामनगर से उधमनगर की ओर जा रही थी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब बस रामनगर के पास ही एक गांव कगोर्ट से गुजर रही थी। जानकारी मिली है कि ऊंची पहाड़ी पर बने रोड से गुजरती हुई बस का एक तीखे मोड़ के पास नियंत्रण खो गया। यह हादसा सुबह 10 बजे के करीब ही हुआ। हादसे के बाद से बचाव अभियान जारी है। कई लोगों को इस घटना के बाद अस्पताल में एडमिट कराया गया है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह बस उधमपुर जा रही थी, तभी यह हादसा हुआ। इस घटना को लेकर एलजी मनोज सिन्हा ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद और दिल तोड़ने वाला है। मेरी संवेदनाएं मृतकों के साथ हैं। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके अलावा घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस घटना को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि मेरी उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर मिंगा शेरपा से बात हुई है। उनका कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन समय रहते शुरू हो गया था और घायलों को उचित इलाज दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बारे में मुझे कुछ समय पहले ही जानकारी मिली थी और मैंने तुरंत उधमपुर के डिप्टी कमिश्नर से बात की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई. घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है. उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में इमरजेंसी वार्ड को अलर्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है. जिला प्रशासन ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है. रामनगर के एसडीएम ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।  उधमपुर-रामनगर मार्ग पर सड़क की स्थिति और मौसम को लेकर अक्सर हादसे होते रहते हैं. पहाड़ी इलाका होने के कारण मोड़ों पर सतर्कता बरतना जरूरी होता है. इस हादसे के कारण स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित हुआ है. पुलिस ने आसपास के इलाके में यातायात को डायवर्ट कर दिया है. स्थानीय लोग बस हादसों को रोकने के लिए सड़क सुधार और बेहतर यातायात प्रबंधन की मांग कर रहे हैं। 

हिंगलाज मंदिर में मना उत्सव, पाकिस्तान में 3 लाख हिंदू पहुंचे; जानिए मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

 बलूचिस्तान प्रांत  पाकिस्तान में तीन दिवसीय हिंगलाज माता उत्सव रविवार को संपन्न हो गया है। खबर है कि इस दौरान करीब 3 लाख हिंदू मंदिर पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि यह आंकड़ा बीते साल हुए उत्सव से करीब तीन गुना ज्यादा था। इस दौरान आयोजन स्थल पर भंडारा, चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की गई थी। उत्सव के दौरान तीर्थयात्री सैकड़ों किमी की यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में इस महीने करीब 3 लाख हिंदू श्रद्धालु पहुंचे थे। जबकि, पूरे साल में यह आंकड़ा करीब 10 लाख है। मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं ने थारपरकर, उमरकोट और संहार समेत सिंध के कई इलाकों से लंबी यात्रा की थी। कहा जाता है कि इस यात्रा को पूरी करने में 20 दिनों का समय लग जाता है। हिंगलाज मंदिर का इतिहास पाकिस्तान में इस तीर्थस्थल को नानी का मंदिर भी कहा जाता है। यह 51 शक्ति पीठों में से एक हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहां सती का सिर गिरा था। लयारी तहसील के पहाड़ी इलाके में स्थित यह मंदिर हिंगोल नदीं के पास एक गुफा में बना हुआ है। कराची से इसकी दूरी लगभग 250 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है। यह इलाका हिंगोल नेशनल पार्क क्षेत्र में आता है। पूरे पाकिस्तान से आते हैं श्रद्धालु इस तीर्थ यात्रा को हिंगलाज यात्रा कहा जाता है, जिसमें पाकिस्तान के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कठिन यात्रा कर पहुंचते हैं। अप्रैल 2024 में एपी न्यूज से बातचीत में हिंगलाज माता मंदिर के पदाधिकारी वर्सीमल दीवानी ने बताया था कि इस त्योहार में सिर्फ पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू ही शामिल हो सकते हैं। तब उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से दुनिया के अन्य हिस्सों में हिंदुओं को वीजा देने की अपील भी की थी। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि इस यात्रा में अन्य देशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे होती है पूजा हर साल अप्रैल में इस उत्सव का आयोजन होता है, जिसके तहत तीसरे दिन पुजारी मंत्रों का जाप करते हैं और देवताओं को भेंट स्वीकार करने के लिए बुलाते हैं। हर श्रद्धालु हिंगलाज माता मंदिर में 3 नारियल चढ़ाता है। एक ओर जहां कुछ श्रद्धालु पूरे 4 दिनों के उत्सव में शामिल रहते हैं। वहीं, कुछ पूजा कर लौट जाते हैं। कठिन है यात्रा सड़क मार्ग से कराची से हिंगलाज की दूरी तय करने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। कुछ तीर्थयात्री कार या बसों से पहुंचते हैं। जबकि, कुछ साइकिल से आते हैं। कहा जाता है कि पहले इस यात्रा को पूरा करने में करीब 150 किमी पैदल चलना होता था। तब श्रद्धालु रेगिस्तान से पास की सड़क तक का सफर तय कर मंदिर पहुंचते थे। हालांकि, अब मकरान कोस्टल हाईवे ने रास्ता आसान कर दिया है। इस साल का आयोजन डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर उत्सव के लिए बलूचिस्तान सरकार, प्रांत के आपदा प्रबंधक और जिला प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारियां की थीं। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के चलते मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा के लिए पाकिस्तान सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस और लेवी की टुकड़ियों को तैनात किया गया था।