samacharsecretary.com

SC जज ने उठाया बड़ा सवाल: लालची जजों को सिस्टम से बाहर करना क्यों है जरूरी?

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अदालत में जजों के आचरण को लेकर अहम बातें कही हैं। शनिवार को न्यायपालिका में ईमानदारी के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार हो जाते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं है और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद आज ज्यूडिशियरी में शामिल अधिकारियों को बहुत अच्छा वेतन और सेवा शर्तें मिल रही हैं, इसलिए किसी भी तरह का अनैतिक आचरण अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जज लालच में आ जाता है, तो उसे सिस्टम से ही हटा दिया जाना चाहिए।” प्रलोभन से बचना चाहिए- SC जज SC जज ने आगे कहा कि एक जज को अपने वैध वेतन में खुश रहना चाहिए और किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न कर पाना न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखना भी शामिल है। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक भी गलत फैसला न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कमजोर कर सकता है। उन्होंने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज में भी पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया, खासकर जिला न्यायपालिका में। वहीं उन्होंने हाईकोर्ट से अपील की है कि वे अधिकारियों के लिए सहयोगी वातावरण बनाने की कोशिश करें। AI के खतरों पर भी बोलीं जस्टिस नागरत्ना इस दौरान ज्यूडिशियरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां वकीलों ने अदालत में एआई टूल्स से तैयार किए गए ऐसे कानून का हवाला दिया, जो थे ही नहीं। उन्होंने कहा है कि वकीलों को जिन फैसलों का वे हवाला देते हैं, उनकी सत्यता की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए।

निदा खान को TCS ने किया सस्पेंड, नासिक कांड के बाद बड़ा कदम, अग्रिम जमानत पर आज फैसला

 नासिक नासिक के चर्चित यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में निदा खान को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. एक तरफ जहां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) ने उसे सस्पेंड कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ आज उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई होनी है. इस केस को लेकर कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर हलचल तेज है. महिला आयोग की जांच भी जारी है और आज इस जांच का तीसरा दिन है. ऐसे में पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।  निदा खान को TCS ने 9 अप्रैल 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र के जरिए सस्पेंड कर दिया. कंपनी के मुताबिक, उनके खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके चलते वे फिलहाल न्यायिक या पुलिस हिरासत में हैं. कंपनी ने यह भी साफ किया कि ऐसी स्थिति में वह अपने काम की जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं हैं. इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है।  सस्पेंशन ऑर्डर में साफ लिखा गया है कि निदा खान 27 दिसंबर 2021 से कंपनी के साथ जुड़ी थीं और प्रोसेस एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं. कंपनी ने उनके नेटवर्क एक्सेस को भी तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया है. साथ ही निर्देश दिया गया है कि उनके पास मौजूद कंपनी की सभी संपत्तियां वापस जमा कराई जाएं. उन्हें किसी भी ऑफिस में रिपोर्ट करने या घर से काम करने से भी मना किया गया है।  कंपनी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि निदा खान इस मामले को लेकर किसी भी कर्मचारी से बातचीत नहीं करेंगी और पूरी गोपनीयता बनाए रखेंगी. अगर वे इन निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. यह आदेश कंपनी के HR हेड शेखर कांबले द्वारा जारी किया गया है, जो पुणे, नासिक और गोवा क्षेत्र के प्रभारी हैं।  इस बीच, आज कोर्ट में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है. पूरे मामले को लेकर अटकलें तेज हैं कि कोर्ट उन्हें राहत देगा या उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी जाएगी. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला अहम हो सकता है और आगे की जांच पर भी इसका असर पड़ेगा।  महिला आयोग की ओर से गठित सत्यशोधन समिति भी इस मामले की जांच कर रही है. आज इस जांच का तीसरा दिन है और टीम लगातार तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है. आयोग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही या अन्य पहलू जुड़े हुए हैं।  पूरे मामले ने कॉर्पोरेट और सामाजिक दोनों ही स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ कंपनी ने अपनी नीति के तहत सख्त कदम उठाया है, तो दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है. आने वाले दिनों में कोर्ट के फैसले और जांच रिपोर्ट के आधार पर इस केस की दिशा साफ होगी। 

PM मोदी ने झालमुड़ी के दौरान दुकानदार को दिए 10 रुपये, लेकिन जेब में थे और कितने नोट?

झाड़ग्राम  झाड़ग्राम की गलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘झालमुड़ी प्रेम’ सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है. सुरक्षा के कड़े घेरे को तोड़कर जब पीएम मोदी एक साधारण सी दुकान पर पहुंचे, तो वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया. अपनी जेब से पैसे निकालने से लेकर दुकानदार के साथ उनकी मजेदार बातचीत ने लोगों का दिल जीत लिया है. पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में चुनावी रैली करने के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल को किनारे रखते हुए एक छोटी सी झालमुड़ी की दुकान पर रुकने का फैसला किया. वहां पहुंचकर उन्होंने कहा- भाई हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ? कितने का होता है आपका झालमुड़ी? इस पर दुकानदार कहता है- आप जितने का कहेंगे उतना का खिलाएंगे।  इस पर पीएम मोदी दुकानदार से कहते हैं कि अच्छे वाला कितने का होता है? इस पर दुकानदार कहता है 10, 20 और 30. इस पर पीएम मोदी कहते हैं जो भी है बना दो. इसके बाद पीएम जेब से पैसे निकालते हैं. वीडियो में दिख रहा है कि उनके जेब से 50 रुपया का एक नोट, 20 रुपया का दो नोट औऱ 10 रुपये का एक नोट निकला. पीएम मोदी उसमें से 10 रुपये निकालकर दुकानदार को दे देते हैं. दुकानदार कहता है आप आए यही काफी है. इस पर मोदी कहते हैं नहीं भाई ऐसा नहीं. इस पर दुकानदार फिर कुछ कहता है और 10 रुपये गल्ले में डाल देता है. फिर दुकानदार कुछ कहता है. इस पर पीएम कहते हैं, ‘दिमाग नहीं खाते भाई’. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी हंसने लगे. पीएम ने न केवल बड़े चाव से बंगाल के इस प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड का आनंद लिया. इस दौरान सबलोग उनको देख रहे थे।  जेब से निकाले 100 रुपये के आसपास, दिए केवल 10 सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झालमुड़ी का लुत्फ उठाने के बाद प्रधानमंत्री अपनी जेब से तीन-चार नोट निकालते हैं. वीडियो को गौर से देखने पर पता चलता है कि उनकी हाथ में 50 रुपये का एक नोट, 20 रुपये के दो नोट और 10 रुपये का एक नोट था. कुल मिलाकर लगभग 100 रुपये. पीएम ने बड़ी सहजता से उनमें से 10 रुपये का नोट निकाला और दुकानदार को थमा दिया. दुकानदार, जो प्रधानमंत्री को अपने सामने देखकर दंग था, उसने पैसे लेने से मना करते हुए कहा, ‘सर, आप यहां आए यही काफी है।  ‘दिमाग नहीं खाते भाई’- पीएम का मजेदार जवाब जब दुकानदार ने पैसे लेने में संकोच किया, तो प्रधानमंत्री ने उसे डांटने के अंदाज में प्यार से कहा, ‘नहीं भाई, ऐसा नहीं होता.’ दुकानदार के बार-बार मना करने पर मोदी ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में कहा, ‘दिमाग नहीं खाते भाई, पैसे लो.’ उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग और सुरक्षाकर्मी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. पीएम ने साफ किया कि वह बिना पैसे दिए कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे. अंत में मासूम दुकानदार को प्रधानमंत्री से वह 10 रुपये लेने ही पड़े।  बिहार का रहने वाला है दुकानदार पीएम मोदी ने जिस दुकानदार की दुकान से झालमुरी खाई वो बिहार के गया का रहने वाला है। उसका नाम विक्रम साहो है। उसने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में पीएम के साथ हुई बातचीत को साझा किया। उसने बताया कि पीएम मोदी ने उससे उसके बारे में पूछा। उन्होंने पीएम मोदी को बताया कि वो 9वीं पास है। परिवार की आर्थिक तंगी के चलते वो आगे पढ़ाई नहीं कर पाया। माता-पिता के बारे में भी पूछा पीएम मोदी ने विक्रम से उसके माता-पिता के बारे में भी पूछा। उन्होंने बताया कि परिवार में तीन लोग है। उन्होंने पीएम मोदी को अपने माता पिता का नाम भी बताया। दुकानदार ने बताया कि उनकी माता का नाम सुनीता देवी और पिता का नाम उत्तम साहो है। पीएम मोदी ने पूछा कि आपकी कितनी दुकानें हैं तो उन्होंने बताया कि सिर्फ एक ही दुकान है। एक बात का रह गया मलाल दुकानदार विक्रम ने बताया कि उन्होंने एक बात का मलाल है कि वो पीएम मोदी का ऑटोग्राफ नहीं पाया है। उसने बताया कि पीएम ने उनसे राजनीति से जुड़ी कोई बात नहीं की। उन्होंने झालमुरी के पैसे भी दिए। पीएम मोदी ने उसने कहा कि बढ़िया से रहो। मुझे बहुत अच्छा लगा कि पीएम मोदी मेरी दुकान में आए और झालमुरी खाई।  जनता के बीच बनी चर्चा यह दृश्य देखकर झाड़ग्राम की जनता हैरान रह गई. एक तरफ जहां बंगाल में करोड़ों के घोटालों की खबरें चर्चा में रहती हैं, वहीं देश के प्रधानमंत्री का एक-एक रुपये का हिसाब रखना और दुकानदार के स्वाभिमान का सम्मान करना लोगों को काफी पसंद आ रहा है. भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह मोदी की ‘गारंटी’ और उनकी ‘सादगी’ का प्रमाण है।  कुल मिलाकर, झाड़ग्राम की यह छोटी सी दुकान अब इलाके में मशहूर हो गई है. प्रधानमंत्री के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ ने न केवल स्थानीय जायके को प्रमोट किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सत्ता के शिखर पर बैठने के बाद भी वे अपनी जड़ों और सामान्य शिष्टाचार को नहीं भूले हैं. सोशल मीडिया पर अब लोग पीएम की जेब से निकले उन नोटों और उनकी ‘दिमाग नहीं खाने’ वाली बात पर जमकर कमेंट्स कर रहे हैं। 

पति का दर्द: ‘दूसरी पत्नी और बेटे के साथ फरार हो गई’, रोते हुए सुनाई आपबीती

 बीड महाराष्ट्र के बीड जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी दूसरी पत्नी पर अपने पहले विवाह से हुए नाबालिग बेटे के साथ फरार होने का आरोप लगाया है. इस संबंध में पीड़ित व्यक्ति ने रविवार को कैज थाने में शिकायत दर्ज कराई।  शिकायतकर्ता के अनुसार, उसकी पहली पत्नी से दो बेटे और दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है. करीब चार साल पहले उसने दूसरी शादी की थी. उसने पुलिस को बताया कि वह इस सप्ताह की शुरुआत में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुंबई गया हुआ था, इसी दौरान उसकी दूसरी पत्नी और उसका नाबालिग बेटा अचानक घर से गायब हो गए. पीड़ित व्यक्ति ने कहा, 'सर मेरी दूसरी पत्नी नाबालिग बेटे के साथ फरार हो गई है।  मामले में एक नया मोड़ तब आया जब उसके दामाद को हैदराबाद यातायात पुलिस द्वारा जारी एक ई-चालान मिला, जो सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा था. इसके बाद शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि उसकी दूसरी पत्नी और नाबालिग बेटा दामाद की मोटरसाइकिल लेकर फरार हुए हैं।  पुलिस के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और महिला तथा नाबालिग की तलाश के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

आप अनपढ़ हैं, शक्तियां नहीं जानते: HC ने कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई

भरूच गुजरात हाई कोर्ट ने  भरूच के जिला कलेक्टर को जबरदस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको तो अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। मामला एक जनहित याचिका के जवाब से जुड़ा था। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक जनहित याचिका के जवाब में एक अस्पष्ट हलफनामा दायर करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भरूच के जिला कलेक्टर को फटकार लगाई। याचिका में अमोनियम नाइट्रेट भंडारण इकाइयों द्वारा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन राय की बेंच ने कहा कि कलेक्टर अनपढ़ हैं। उन्हें संबंधित नियमों की जानकारी नहीं हैं। यहां तक कि उन्हें अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी कोई ज्ञान नहीं था। अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण से जुड़ा मामला चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है, जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिले में अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक पदार्थ) के भंडारण और प्रोसेसिंग में लगी औद्योगिक इकाइयां जरूरी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस मामले के केंद्र में मौजूद इस केमिकल को भारतीय कानून के तहत लंबे समय से एक खतरनाक पदार्थ माना जाता रहा है। इसे खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें भोपाल गैस त्रासदी के बाद बनाया गया था। यह अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 द्वारा भी शासित होता है। किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम होंगे याचिका के अनुसार, इन नियमों में सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही इसके निर्माण, भंडारण, परिवहन और संचालन के लिए विस्तृत सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि यह अत्यधिक विस्फोटक पदार्थ है। याचिका के अनुसार, इन नियमों का प्रवर्तन मुख्य रूप से पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के अधीन कार्यरत मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और स्थानीय पुलिस के अधीन है। याचिका में चेतावनी दी गई कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। विशेष रूप से उन सघन औद्योगिक क्षेत्रों में जहां अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा को अन्य खतरनाक कार्यों और रिहायशी इलाकों के बेहद करीब ही संभाला जाता है। कलेक्टर द्वारा पेश किया गया हलफनामा खारिज कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा पेश किए गए हलफनामे को खारिज कर दिया और यह टिप्पणी की कि 2012 के नियमों से पहले भी अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक नियम 2008 के नियामक दायरे में आता था। पुरानी इकाइयों के लिए सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या राज्य ने उन पिछली रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई की थी, जिनमें मानदंडों के उल्लंघन का खुलासा हुआ था। हलफनामे में दिया गया यह बयान अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह साफ नहीं है कि कौन सी इकाई निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही थी। ऐसा लगता है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है और न ही जिला कलेक्टर के शपथ-पत्र में ऐसा कुछ है जिससे यह पता चले कि 19 मार्च 2025 और 23 मार्च 2026 की रिपोर्टों पर जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई की गई हो। कोर्ट ने वकील की आलोचना की कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा पेश एक नई रिपोर्ट पर संदेह व्यक्त किया, क्योंकि यह बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के उल्लंघन से संबंधित पिछली निष्कर्षों के उलट थी। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य के एक वकील की आलोचना की, जिन्होंने उसके समक्ष इतना अस्पष्ट हलफनामा दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि आप अधिकारियों के मुखपत्र नहीं हैं। इस तरह का हलफनामा दायर करके आप अधिकारियों के मुखपत्र बन जाते हैं, जबकि आप एक वकील हैं। आप हमें हल्के में ले नहीं सकते कोर्ट ने कहा कि हम सब्र रख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें हल्के में ले सकते हैं। जब वकील ने हलफनामा वापस लेने और उसकी जगह नया हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी तो अदालत ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम आपको इसे यूं ही वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य मुद्दा केवल यह नहीं था कि कौन से नियम लागू होते हैं, बल्कि यह था कि क्या विस्फोटक के भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का वास्तव में पालन किया जा रहा था। कलेक्टर को निर्देश दिया इसके बाद कोर्ट ने अंकलेश्वर के मामलतदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रतिवादी इकाइयों का एक नया निरीक्षण करें। कोर्ट ने कलेक्टर को यह भी निर्देश दिया कि वे इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच करें। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ एक नया हलफनामा दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।

भारत को मिला बड़ा खजाना, तेल संकट के बीच 42.5 टन सोने का भंडार और डॉलर की बारिश का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत में सोने के प्रति दीवानगी सदियों पुरानी है. भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में से एक है. हम हर साल 800 टन से अधिक सोना विदेशों से आयात (Import) करते हैं. सोने के मामले में देश को आत्‍मनिर्भर बनाने के प्रयास कई सालों से हो रहे हैं. इसमें सफलता भी मिली है. इसी कड़ी में अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल (Kurnool) जिले में देश की पहली प्राइवेट गोल्‍ड माइन मई में शुरू होने वाली है. जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Geomysore Services India Pvt Ltd) की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान है।  इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट (Processing Plant) मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है. वर्तमान में यहां प्री-कमर्शियल ऑपरेशंस चल रहे हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है. राज्य के खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीना ने इसे भारत की व्यापक स्वर्ण खनन महत्वाकांक्षाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया है।  42.5 टन सोना होने का अनुमान एक रिपोर्ट के अनुसार, जोन्नागिरी, एर्रागुडी (Erragudi) और पागिदिरायी (Pagidirayi) गांवों में 598 हेक्टेयर क्षेत्र में सोने का 13.1 टन प्रमाणित भंडार (Certified Reserves) है. यहां कुल 42.5 टन तक होने सोना होने की संभावना जताई गई है. जब यह खदान अपनी पीक क्षमता (Peak capacity) पर होगी, तब यहां से हर साल करीब 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा. यह सिलसिला अगले 15 वर्षों तक निरंतर जारी रहने की उम्मीद है।  400 करोड़ का निवेश इस पूरे प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है. इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा (Thriveni Earthmovers & Infra) और डेक्कन गोल्ड (Deccan Gold) जैसी दिग्गज कंपनियों का समर्थन प्राप्त है. जोन्नागिरी परियोजना अकेले इस विशाल आयात को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती, लेकिन यह घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव है।  हुट्टी गोल्ड माइंस (Hutti Gold Mines) जैसे वर्तमान सरकारी संयंत्र सालाना केवल 1.5 टन उत्पादन कर पाते हैं, जबकि प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields – KGF) साल 2000 में ही बंद हो चुके हैं. ऐसे में जोन्नागिरी जैसी निजी परियोजनाओं का सफल होना एक सकारात्मक संदेश है।  अत्याधुनिक तकनीक से खनन जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स में इन दिनों आधुनिक मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की गूंज सुनाई देती है. महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में इस प्रोसेसिंग प्लांट को तैयार किया गया है. त्रिवेणी अर्थमूवर्स के प्रबंध निदेशक बी. प्रभाकरन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत में ‘जिम्मेदार और प्रतिस्पर्धी खनन’ का एक वैश्विक मॉडल पेश करता है. जियोमैसूर के निदेशक हनुमा प्रसाद मोदाली का कहना है कि इस सफलता से भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी निजी निवेश का रास्ता साफ होगा। 

Google Chrome यूजर्स सावधान! एक क्लिक से हो सकता है सिस्टम हैक, जारी हुआ हाई अलर्ट

नई दिल्ली  भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome उपयोगकर्ताओं के लिए गंभीर अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने ब्राउजर में पाई गई कई तकनीकी कमजोरियों को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखा है। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी किसी भी यूजर के सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। ऐसे में यह चेतावनी हर इंटरनेट यूजर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह खतरा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा गंभीर है जो विंडोज, मैकओएस और लिनक्स जैसे डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म पर ब्राउजर का उपयोग करते हैं। व्यक्तिगत यूजर्स के साथ-साथ कंपनियां और संस्थाएं भी इस जोखिम के दायरे में हैं। यानी जो भी व्यक्ति अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इंटरनेट ब्राउजिंग करता है, उसे तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। कैसे होता है साइबर अटैक? एजेंसी के मुताबिक, ब्राउजर (Google Chrome) के कई अहम हिस्सों में गंभीर कमजोरियां पाई गई हैं। इनमें वेब ऑडियो, वेबआरटीसी और मीडिया कंपोनेंट्स में ‘यूज-आफ्टर-फ्री’ जैसी त्रुटियां शामिल हैं। इसके अलावा V8 JavaScript Engine और CSS प्रोसेसिंग में ‘टाइप कन्फ्यूजन’ जैसी समस्याएं सामने आई हैं। साथ ही रेंडरिंग इंजन Blink में ‘आउट-ऑफ-बाउंड्स रीड/राइट’ जैसी खामियां पाई गई हैं, जो सिस्टम की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। इन कमजोरियों का असर डाउनलोड, डेवलपर टूल्स और नेविगेशन जैसे फीचर्स पर भी देखा गया है। इन खामियों का फायदा उठाने के लिए हैकर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। वे यूजर को किसी फर्जी या संदिग्ध वेबसाइट पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही यूजर उस लिंक पर जाता है, ब्राउजर की कमजोरियां सक्रिय हो जाती हैं और हमलावर सिस्टम में घुसपैठ कर सकता है। इसके बाद डेटा चोरी, सिक्योरिटी बायपास या सिस्टम क्रैश जैसी घटनाएं हो सकती हैं। तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि सभी यूजर्स तुरंत अपने ब्राउजर (Google Chrome) को अपडेट करें। कंपनी ने इन खामियों को ठीक करने के लिए नया अपडेट जारी कर दिया है। यूजर्स ब्राउजर की सेटिंग्स में जाकर “Check for Updates” विकल्प के जरिए लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर सकते हैं। साथ ही ऑटोमैटिक अपडेट को चालू रखना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य के सुरक्षा पैच समय पर मिलते रहें। तकनीकी अपडेट के अलावा डिजिटल व्यवहार में सावधानी भी जरूरी है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और संदिग्ध वेबसाइट्स से दूरी बनाए रखें। साइबर खतरों के इस दौर में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है।

इजरायल का सोमालीलैंड में राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने का कदम, 16 मुस्लिम देशों ने किया विरोध

यरुशलम कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की सहित 16 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को दोहा में एक संयुक्त बयान जारी कर सोमालीलैंड में इजरायल द्वारा राजनयिक प्रतिनिधि की नियुक्ति की कड़ी निंदा की है. इन देशों ने कहा है कि इजरायल का यह फैसला सोमालिया संघीय गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है।  इस्लामिक देशों ने अपने बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ उठाया गया यह कदम एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है. मंत्रियों ने दोहराया कि केवल सोमालिया के वैध राज्य संस्थान ही वहां की जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करते हैं।  इस विरोध में कतर, कुवैत, सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मॉरिटानिया, जॉर्डन और ओमान के विदेश मंत्री शामिल रहे. उन्होंने किसी भी ऐसे एकतरफा कदम को खारिज कर दिया जो राज्यों की एकता को कमजोर करता है।  'क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा…' संयुक्त बयान में जोर दिया गया है कि इजरायल का यह फैसला अफ्रीकी संघ के संविधान अधिनियम का उल्लंघन करता है. देशों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाइयों से हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. 16 देशों ने सोमालिया की एकता के प्रति अपने अटूट समर्थन को फिर से दोहराया है।  सोमालीलैंड को लेकर इजरायल के इस कदम ने राजनयिक गलियारों में कड़वाहट पैदा कर दी है. कतर के विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, सोमालीलैंड को 'तथाकथित' क्षेत्र बताते हुए इजरायली दूत की नियुक्ति को अवैध माना गया है. मुस्लिम देशों का तर्क है कि यह एकतरफा कार्रवाई सोमालिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और वैश्विक मंच पर इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।  हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति की अपील विदेशी मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सोमालिया की संप्रभुता का सम्मान करें. उन्होंने कहा कि इजरायल की इस पहल से क्षेत्र में चल रही शांति की कोशिशों को धक्का लग सकता है. इन 16 देशों ने एकजुट होकर कहा कि वे सोमालिया की अखंडता को बचाने के लिए हर मुमकिन कूटनीतिक कोशिश जारी रखेंगे और ऐसे किसी भी दूत को मान्यता नहीं दी जाएगी। 

चुनाव प्रचार के दौरान PM मोदी ने लिया झालमुड़ी का स्वाद, बोले—‘भाई, कितने की है?’

बिष्णुपुर. पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ चुनावी रैलियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थानीय लोकप्रिय स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का आनंद लिया। पुरुलिया, झाड़ग्राम, मेदिनीपुर और बिष्णुपुर में लगातार चार रैलियों के बाद वह झाड़ग्राम में एक छोटी सी दुकान के पास रुके, जहां उन्होंने झालमुड़ी खाई और आसपास मौजूद लोगों को भी यह नाश्ता बांटा। इस दौरान पीएम मोदी का यह सहज अंदाज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया। दुकान पर मौजूद नमकीन और मुरमुरे से भरे कंटेनरों के बीच जैसे ही उनके रुकने की खबर फैली, वहां भीड़ उमड़ पड़ी। आसपास मौजूद लोग उत्साह के साथ इस पल को देखते नजर आए और कई लोग अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाते दिखे। प्रधानमंत्री ने एक्स पर शेयर किया वीडियो पीएम मोदी ने इस पल की झलक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा की। उन्होंने लिखा, 'पश्चिम बंगाल में व्यस्त रविवार के बीच चार रैलियों के दौरान झाड़ग्राम में स्वादिष्ट झालमुड़ी का आनंद लिया।' इस दौरान वह अपने पारंपरिक परिधान (सफेद कुर्ता, नीली जैकेट और बीजेपी के प्रतीक कमल वाले लाल गमछे) में नजर आए। वीडियो में दिख रहा है कि पीएम मोदी दुकान पर पहुंचते हैं और कहते हैं कि भाई हमें अपना झालमुड़ी खिलाओ। कितने का है? अच्छे वाला कितने का है? इस पर दुकानदार जवाब देता है कि 10, 20 रुपये में है। पीएम मोदी कहते हैं कि जो भी है उसे बना दो। प्रधानमंत्री उसे 10 रुपये देते हैं मगर दुकानदार लेने से मना करता है और अंत में उनके कहने पर नोट रख लेता है। इसके बाद वह आसपास मौजूद लोगों को भी झालमुड़ी खिलाते हैं।

ईरान का ट्रंप पर हमला, खामेनेई के आदेश पर होर्मुज खोला जाएगा, न कि ‘इडियट’ के कहने पर

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सोशल मीडिया वॉर में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल समुद्री ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इडियट (मूर्ख) करार दिया है। इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप से हुई, जो कथित तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना और समुद्र में मौजूद जहाजों के बीच रेडियो संचार की है। इस रिकॉर्डिंग में ईरानी नौसेना का एक अधिकारी इडियट शब्द का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा है। शुरुआत में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि ईरानी अधिकारी ने अपने ही विदेश मंत्री के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है। ईरानी दूतावास का तीखा पलटवार इन दावों को खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीका में ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद कड़ा और सीधा पोस्ट किया। दूतावास ने लिखा, "ओ बेवकूफ, उसका मतलब तुम्हारे 'इडियट' राष्ट्रपति ट्रंप से था। बस गूगल पर 'इडियट' सर्च करके देख लो, तुम्हें समझ आ जाएगा कि वह कौन है।" दूतावास का यह बयान सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाता है, जो अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपनी विदेश नीति और घोषणाएं साझा करते रहते हैं। ऑडियो क्लिप में क्या था? मैरीटाइम चैनल 16 पर प्रसारित इस रेडियो संदेश में IRGC नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों को सख्त चेतावनी दी थी। संदेश में कहा गया, "यह चैनल 16 पर ईरानी सिपह नौसेना की कॉल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। हम इसे हमारे इमाम खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे, न कि किसी 'इडियट' के ट्वीट्स के आधार पर।" यह संदेश स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के उन हालिया ट्वीट्स और बयानों पर कटाक्ष था, जिनमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले होने का दावा किया था। आम तौर पर दूतावास और राजनयिक मिशन इस तरह की अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से बचते हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी ने ईरान के रुख को और अधिक आक्रामक बना दिया है। ईरान का यह हमला दर्शाता है कि वह कूटनीतिक मेज के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई में भी पीछे नहीं हटना चाहता। इस निजी हमले के बाद फिलहाल वाइट हाउस या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।