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क्या इंसानों में तेजी से फैल रहा है हंतावायरस? WHO ने जारी की नई जानकारी

नई दिल्ली दुनिया भर में खौफ फैलाने वाले एंडीज हंतावायरस के बारे में वैज्ञानिकों को अब भी बहुत कम जानकारी है. खासकर यह वायरस इंसान के शरीर में कितने समय तक रह सकता है. कितने समय तक दूसरों में फैल सकता है. यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है. MV Hondius क्रूज जहाज पर फैले इस वायरस ने 11 लोगों को बीमार किया और 3 लोगों की जान ले ली. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस वायरस की गहराई से जांच कर रहा है।  एंडीज हंतावायरस सिर्फ हवा या चूहों से नहीं, बल्कि इंसान के कई तरह के शरीर के तरल पदार्थों से भी फैल सकता है. इसमें लार, मां का दूध और स्पर्म शामिल हैं. क्रूज जहाज पर हुई इस घटना के बाद वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि यह वायरस यौन संबंध या निकट संपर्क से भी फैल सकता है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि संक्रमण के बाद व्यक्ति कितने समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकता है, इसकी सही जानकारी नहीं है।  WHO ने शुरू की जरूरी स्टडी विश्व स्वास्थ्य संगठन की उभरती बीमारियों और जूनोसिस यूनिट की प्रमुख मारिया वान केरखोवे ने बताया कि एंडीज हंतावायरस पर कई अध्ययन चल रहे हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है नेचुरल हिस्ट्री स्टडी. यह स्टडी वायरस के इंसान के शरीर में जीवन चक्र को समझने की कोशिश करेगी।  मारिया वान केरखोवे ने कहा कि यह स्टडी उन लोगों के नियमित सैंपल लेकर करेगी जो क्वारंटाइन में हैं. इससे पता चलेगा कि वे संक्रमित हैं या नहीं. क्या वे दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं या नहीं. यह जानकारी इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि अभी तक हंतावायरस के लिए कोई खास इलाज उपलब्ध नहीं है।  क्रूज जहाज पर फैला खतरा अप्रैल महीने में MV Hondius क्रूज जहाज पर यह वायरस तेजी से फैला. जहाज पर सवार यात्री और कर्मचारी दोनों प्रभावित हुए. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इस वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. कई देशों में क्रूज यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी गई है. हंतावायरस के प्रकारों के बारे में कुछ जानकारी है, लेकिन एंडीज स्ट्रेन नया और खतरनाक है।  वैज्ञानिक नहीं जानते कि संक्रमण के बाद वायरस शरीर में कितने दिन, हफ्ते या महीने तक एक्टिव रह सकता है. अगर यह वायरस लंबे समय तक शरीर में छिपा रह सकता है तो ठीक हो चुके व्यक्ति भी दूसरों को संक्रमित कर सकता है. यही वजह है कि WHO क्वारंटाइन में रह रहे लोगों पर लगातार नजर रख रहा है. उनके सैंपल (खून, लार, स्पर्म आदि) की जांच कर रहा है। फिलहाल हंतावायरस का कोई स्पेसिफिक इलाज नहीं है. डॉक्टर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जैसे ऑक्सीजन, दर्द निवारक दवाएं और फेफड़ों की देखभाल. अगर वायरस लंबे समय तक संक्रामक रहता है तो क्वारंटाइन की अवधि बढ़ाई जा सकती है. यही वजह है कि WHO इस स्टडी को बहुत महत्व दे रहा है।  आगे क्या हो सकता है? वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में स्टडी के नतीजे सामने आएंगे. इससे पता चलेगा कि संक्रमित व्यक्ति को कितने समय तक अलग-थलग रखना चाहिए. किन-किन सावधानियों का पालन करना चाहिए. खासकर पुरुषों को यौन संबंध बनाने, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी बरतने और निकट संपर्क से बचने की सलाह दी जा सकती है।  एंडीज हंतावायरस अभी भी कई राज छिपाए हुए है. WHO की यह नई स्टडी वायरस को बेहतर समझने में मदद करेगी. फिलहाल सतर्कता और साफ-सफाई ही सबसे बड़ा बचाव है. वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियों को रोका जा सके और प्रभावित लोगों का सही इलाज किया जा सके।     

नाबालिग से हैरेसमेंट केस में घिरे बंडी संजय के बेटे, हाईकोर्ट से नहीं मिली गिरफ्तारी पर रोक

 हैदराबाद केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भगीरथ को एक बड़े कानूनी मामले में हाई कोर्ट से झटका लगा है. तेलंगाना हाई कोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत दर्ज एक मामले में भगीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।  हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने शुक्रवार शाम को भगीरथ की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू की. जस्टिस टी. माधवी देवी की अगुवाई में ये सुनावई करीब आधी रात तक चलती रही।  लंबी बहस के बाद जज ने अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. लेकिन भगीरथ के वकील ने अदालत से गुहार लगाई कि अंतिम फैसला आने तक भगीरथ की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया।  'पीड़िता का बयान देखने के बाद राहत नहीं दे सकती' अंतरिम राहत की मांग को ठुकराते हुए जस्टिस टी. माधवी देवी ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि मुझे इस मोड़ पर कोई अंतरिम आदेश देना चाहिए. मैंने पीड़िता का बयान पढ़ा है. उसे देखने के बाद, इस स्तर पर मैं कोई भी अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं हूं।  अदालत में दोनों पक्षों की तीखी बहस सुनवाई के दौरान भगीरथ के वकील ने तर्क दिया कि जमानत याचिका पर सुनवाई करते समय अदालत के पास अंतिम फैसला आने तक अंतरिम जमानत देने की अंतर्निहित शक्ति होती है. उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले की शिकायतकर्ता ने खुद माना था कि उनकी बेटी साल 2025 से भगीरथ के साथ रिलेशनशिप में थी और दोनों के बीच अच्छे रिश्ते थे।  वगहीं, पीड़िता के वकील ने भगीरथ को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि आरोपी के पिता (बंडी संजय) एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं. ऐसे में अगर आरोपी को राहत मिलती है, तो वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।  क्या है पूरा मामला? 8 मई एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि भगीरथ उनकी बेटी के साथ रिलेशनशिप में था और उसने लड़की का सेक्सुअल हैरेसमेंट किया. पुलिस ने पहले भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था. लेकिन कोर्ट के सामने पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद, मामले में पॉक्सो कानून की और भी सख्त धाराएं जोड़ दी गईं।  भगीरथ का दावा- 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी वहीं, भगीरथ ने भी करीमनगर पुलिस में लड़की और उसके परिवार के खिलाफ एक काउंटर शिकायत दर्ज कराई है. भगीरथ का दावा है कि लड़की से उसकी जान-पहचान थी और वो उसके फैमिली फंक्शन में भी गया था. उसने आरोप लगाया कि लड़की और उसके माता-पिता उस पर शादी का दबाव बनाने लगे. जब उसने शादी से इनकार कर दिया, तो वो पैसों की मांग करने लगे और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।  भगीरथ का आरोप है कि उसने लड़की के पिता को 50,000 रुपये भी दिए थे, लेकिन बाद में परिवार ने उससे 5 करोड़ रुपये की मांगे और मांग पूरी न होने पर मां ने खुदकुशी करने की धमकी दी।  जज ने सोशल मीडिया कैंपेन पर जताई चिंता सुनवाई शुरू होने से पहले जस्टिस टी. माधवी देवी ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे दुष्प्रचार पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अगर पीड़िता के वकील को उनके सामने बहस करने में कोई आपत्ति है, तो वो इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगी. हालांकि, दोनों पक्षों के वकीलों की अपील पर उन्होंने मामले की सुनवाई की। 

अब सोमवार और शुक्रवार होगी वर्चुअल सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नया आदेश

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब सुप्रीम कोर्ट में भी दिखाई देने लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए आदेश जारी किया है कि कोर्ट के स्टाफ सप्ताह में दो दिन घर से काम करेंगे। साथ ही कोर्ट की सुनवाई सोमवार, शुक्रवार को ऑनलाइन मोड में होगी। इसके साथ ही रजिस्ट्री से जुड़े 50 फीसदी कर्मचारियों को WFH करने का आदेश दिया गया है।  इसके तहत सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मामलों की सुनवाई की जाएगी। वहीं, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को वकीलों और याचिकाकर्ताओं के सामने विकल्प होगा कि वह फिजिकली या वर्चुअली पेश हो सकते हैं। कोर्ट ने आगे कहाकि जजों ने एकमत से फैसला लिया है कि ईंधन के पूरी तरह से सदुपयोग के लिए वह कार पूलिंग को बढ़ावा देंगे। दो दिन 50 फीसदी स्टाफ को WFH इसके अलावा, हफ्ते में दो दिन सभी रजिस्ट्री ब्रांच या सेक्शन के 50 फीसदी स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति होगी। इसके लिए वीकली रोस्टर तैयार किया जाएगा, ताकि कोर्ट का काम-काज प्रभावित न होने पाए। फैसले में आगे कहा गया है कि रजिस्ट्री अधिकारी वर्क फ्रॉम व्यवस्था को काम के हिसाब से बंद कर सकते हैं बदल सकते हैं। अगर उन्हें लगता है कि किसी खास ब्रांच में ऑफिस से ही काम करना जरूरी है तो इसके मुताबिक फैसला लिया जा सकता है। PM मोदी की अपील यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को तेल का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक ही करने का आह्वान किया है। पश्चिम एशिया में मौजूद संकट और दुनिया में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पीएम मोदी ने देश के नागरिकों से यह अपील की है। गौरतलब है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी गई है।

मॉनसून का इंतजार खत्म होने वाला है, जानिए कब बदलेगा मौसम का मिजाज

नई दिल्ली उत्तर भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कई दिनों तक बारिश होने के बाद एक बार फिर से भीषण गर्मी का दौर वापस लौट आया है। इसकी वजह से लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल, मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून 26 मई को दस्तक दे सकता है। भारत में यह सबसे पहले केरल में आता है और इस बार 26 मई को यानी कि तय समय से पहले ही आने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इस तारीख में प्लस माइनस चार दिनों की संभावना जताई है। वहीं, अगले 24 घंटे में मॉनसून बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहुंचने वाला है। मॉनसून के आने से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे हफ्ते के दौरान उत्तर पूर्वी भारत, अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल के जरिए मॉनसून के एंट्री लेने के बाद अगले एक महीने के भीतर यह अन्य राज्यों की ओर बढ़ेगा। भारत के निचले भाग से ऊपरी भाग की ओर मॉनसून बढ़ता जाएगा। आमतौर पर मॉनसून केरल में एक जून को पहुंचता है, लेकिन इस बार चार दिन पहले आने की संभावना है, जोकि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। उत्तर भारत के मौसम का हाल उत्तर भारत की बात करें तो 15 व 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में व पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। इस दौरान आंधी की स्पीड 50 किमी प्रति घंटे रह सकती है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान में गरज के साथ आंधी आ सकती है। 15 मई को पश्चिमी राजस्थान में कुल इलाकों में धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 15-17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। मॉनसून से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश इसके अलावा, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 15-17 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, 16-17 मई को केरल, माहे, 15 मई को लक्षद्वीप में और 15-18 मई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर भारी बरसात की संभावना है। साथ ही, 15 मई को केरल, माहे में कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। 15 मई को आंतरिक कर्नाटक में कुछ जगह पर ओले गिरेंगे।

UAE के बड़े फैसले से बदलेंगे तेल समीकरण! भारत को दिखा बड़ा लाभ

नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले दिनों तेल उत्पादक मुस्लिम देशों के संगठन ओपेक से खुद को अलग कर लिया था। उसका कहना था कि इस संगठन में रहते हुए उसके ऊपर तेल उत्पादन की सीमा तय करने को लेकर बंधन रहता है। ऐसे में वह इससे बाहर रहना ही ठीक समझ रहा है। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी यूएई दौरे पर 15 मई को पहुंचने वाले हैं। उससे पहले यूएई स्थित भारतीय राजदूत दीपक मित्तल का कहना है कि इससे हमें फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत की ऊर्जा सुरक्षा यूएई के साथ संबंध बेहतर होने से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब यदि यूएई की ओर से तेल उत्पादन में इजाफा होगा तो इसका फायदा हमें सीधे तौर पर मिलेगा। इसके अलावा हम अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधिकरण भी कर सकेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे से पहले उन्होंने कहा कि हमारी संयुक्त अरब अमीरात के साथ साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। अब हम अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहे हैं और अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत भी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से इजाफा कर रहा है। हमारी ओर से पाइपलाइन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा एलपीजी, कच्चा तेल, एलएनजी की स्टोरेज के लिए भी हम क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं। मित्तल ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात हमारे लिए महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। पिछले साल भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले देशों में यूएई चौथे स्थान पर था। भारत के कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 11 फीसदी थी। इसके अलावा पिछले 6 से 7 सालों में वह एलएनजी का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।' दीपक मित्तल ने कहा कि यूएई ने जब ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया है तो वह अपने लिए बाहर भी अवसरों की तलाश कर रहा होगा। उसने उत्पादन में इजाफा किया तो भारत एक खरीददार के तौर पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हमेशा ही अच्छे नेटवर्क को प्राथमिकता दी है। सऊदी अरब से किन मतभेदों के चलते OPEC से निकला UAE उन्होंने कहा कि हम अपने रणनीतिक स्टोरेज में इजाफा कर रहे हैं। कच्चे तेल के अलावा हम गैस, एलपीजी और पीएनजी की स्टोरेज भी बढ़ाना चाहते हैं। बता दें कि इसी महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया था। इस तरह उसने दशकों से सऊदी अरब के साथ चले आ रहे मतभेदों को खत्म कर दिया था। दरअसल सऊदी अरब की ओपेक में ज्यादा पकड़ मानी जाती है। अकसर वह तेल उत्पादन घटाने और बढ़ाने के एकतरफा फैसलों की बात करता था। यह स्थिति यूएई को असहज करने वाली थी।

चीन में ट्रंप की हुई किरकिरी? शी जिनपिंग के बयान से मचा वैश्विक सियासी तूफान

बीजिंग  ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी चीन में हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है.डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. जिनपिंग से मिलते ही ट्र्ंप के सुर बदले दिखे. चीन में डोनाल्ड ट्रंप ने जिनपिंग के तारीफों के पुल बांधे. जिनपिंग को महान नेता बताया. उन्हें अच्छा दोस्त कहा. मगर इसके उलट डोनाल्ड ट्रंप को जलालत झेलनी पड़ी. जी हां, शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप की घनघोर बेइज्जती कर दी. अमेरिका को उनके सामने ही डिक्लाइनिंग नेशन यानी गिरता हुआ देश बता दिया. दिलचस्प बात यह रही कि डोनाल्ड ट्रंप भी जिनपिंग के इस बात से सहमत दिखे।  सबसे पहले जानते हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को लेकर ट्रंप के आगे क्या कहा. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कूटनीतिक मुलाकात के दौरान एक ऐसा बयान सामने आया, जिसने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया. जिनपिंग ने अमेरिका को पतन की ओर जाता देश या गिरता हुआ देश बताया. बीजिंग में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान जिनपिंग ने जिस अंदाज में अमेरिका को गिरता हुआ देश बताया, उसे ट्रंप के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है. हालांकि, ट्रंप इस बयान का अलग मतलब समझा रहे हैं।  ट्रंप ने बाइडन प्रशासन को लपेटा डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि शी जिनपिंग का यह बयान पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल को लेकर था. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की उन टिप्पणियों की नई व्याख्या दी. ट्रंप ने तर्क दिया कि जिनपिंग का इशारा खास तौर पर जो बाइडेन के कार्यकाल और उस वक्त हुए अमेरिका को नुकसान की ओर था, न कि उनके प्रशासन के तहत अमेरिका की स्थिति को लेकर था. ट्रंप ने अपने तरह से उस बयान को समझाते हुए कहा कि उनके दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका फिर से दुनिया की सबसे ताकतवर आर्थिक और सैन्य शक्ति बन गया है।  ट्रंप ने अपनी सरकार का किया बचाव डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट कर अमेरिका की मौजूदा वैश्विक स्थिति का बचाव किया और एक बार फिर बाइडेन के राष्ट्रपति काल की आलोचना की. ट्रंप ने लिखा, ‘जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही नजाकत से अमेरिका को एक ‘संभवतः पतनशील राष्ट्र’ कहा तो उनका इशारा ‘स्लीपी जो बाइडेन’ और बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों के दौरान हुए भारी नुकसान की ओर था. और इस मामले में शी जिनपिंग 100% सही हैं।  हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र कर रहे थे. क्या वह निजी बातचीत में कही गई बात थी या बीजिंग में सार्वजनिक रूप से कही गई थी. दौरे के पहले दिन शी जिनपिंग ने ‘पतनशील राष्ट्र’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उन्होंने ‘थ्यूसिडिडीज ट्रैप’ में फंसने को लेकर जरूर चेतावनी दी. यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक अवधारणा है, जिसमें एथेंस के उदय से स्पार्टा की सत्ता को चुनौती मिली थी।  जिनपिंग ने क्या कहा था बीजिंग में अपने शुरुआती संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा था, ‘दुनिया एक नए मोड़ पर आ गई है. क्या चीन और अमेरिका ‘थ्यूसिडिडीज ट्रैप’ से बच सकते हैं और बड़ी शक्तियों के संबंधों का नया मॉडल बना सकते हैं?’ ट्रंप के साथ बैठक के दौरान शी ने ‘सदी में पहले कभी न देखे गए बड़े बदलावों’ का भी जिक्र किया, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक व्यवस्था से हटने के संकेत के तौर पर देखा गया।  वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने आगे बाइडेन प्रशासन पर ‘खुली सीमाएं, ऊंचे टैक्स, खराब व्यापार समझौते, बढ़ता अपराध’ और अन्य नीतियों के जरिए नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. ट्रंप ने विविधता, समानता और समावेशन (DEI) पहलों और ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़ी नीतियों की भी आलोचना की।  अपनी तारीफ में क्या कहा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका अब आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत हो रहा है, जिसमें ‘स्टॉक मार्केट्स अपने उच्चतम स्तर पर’, मजबूत रोजगार बाजार और वैश्विक स्तर पर फिर से प्रतिष्ठा हासिल करने की बात कही. उन्होंने ‘ईरान की सैन्य ताकत को खत्म करने’ का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका एक बार फिर ‘आर्थिक महाशक्ति’ बन गया है. ट्रंप ने आगे कहा कि शी ने उन्हें ‘अद्भुत सफलताओं’ के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्ते बेहतर होंगे।  जिनपिंग से सहमत हैं ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दो साल पहले तक हम सच में एक पतनशील राष्ट्र थे. इस पर मैं राष्ट्रपति शी से पूरी तरह सहमत हूं. लेकिन अब, अमेरिका दुनिया का सबसे आकर्षक देश है और उम्मीद है कि हमारा चीन के साथ रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर होगा।   

गैस संकट से निपटने की तैयारी: भारत का ₹40 हजार करोड़ का मास्टर प्लान, LPG सप्लाई रहेगी जारी

नई दिल्ली  भारत में एक कहावत काफी प्रचलित है कि संकट में भविष्‍य का समाधान छिपा रहता है. जरूरत है तो बस उसे तलाशने की. ईरान जंग की वजह से एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर विख्‍यात होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस की सप्‍लाई बाधित होने के बाद भारत अब एक महाप्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है. तकरीबन 40000 करोड़ की इस परियोजना के सफल रहने पर आने वाले कई दशकों तक भारत में गैस की कमी नहीं होगी. बता दें कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी सप्‍लाई चेन में गंभीर खलल पैदा हो गया है. इससे भारत भी प्रभावित हुआ है. नई दिल्‍ली एक एनर्जी डिपेंडेंट कंट्री है. तेल और गैस का अधिकांश हिस्‍सा खाड़ी के देशों से आयात किया जाता है. ऐसे में ईरान युद्ध की वजह से वेस्‍ट एशिया में मचे उथल-पुथल का असर भारत पर भी पड़ रहा है. इसके साथ ही ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के साथ ही होर्मुज स्‍ट्रेट का भी विकल्‍प गंभीरता से ढूंढा जाने लगा है।  दरअसल, भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र से निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ओमान से सीधे गहरे समुद्र के रास्ते गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है. होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर गंभीरता से काम कर रही है. अनुमानित 40 हजार करोड़ रुपये (करीब 4.7-4.8 अरब डॉलर) की लागत वाली इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर इसे पूरा होने में पांच से सात वर्ष लग सकते हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सरकार जल्द ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को डिटेल्‍ड रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दे सकती है. यह पहल नई दिल्ली स्थित निजी क्षेत्र के कंसोर्टियम ‘साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज’ (SAGE) द्वारा प्रस्तुत प्री-फिजिबिलिटी अध्ययन के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।  भारत की प्‍लानिंग रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि भारत अब LNG के स्पॉट बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलना चाहता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया से सीधी पाइपलाइन भारत को स्थिर और अपेक्षाकृत सस्ती गैस उपलब्ध करा सकती है. साथ ही किसी ट्रांजिट देश या समुद्री मार्ग पर निर्भरता भी कम होगी. भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है. ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और एनर्जी-मिक्‍स में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयासों के बीच वर्तमान खपत लगभग 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mmscmd) है, जो 2030 तक बढ़कर करीब 290-300 mmscmd तक पहुंचने का अनुमान है. इसी अवधि तक LNG आयात 180-200 mmscmd तक पहुंच सकता है।  ओमान से सीधे गुजरात प्रस्तावित ‘मिडिल ईस्ट-इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन’ (MEIDP) करीब 2,000 किलोमीटर लंबी होगी और अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए ओमान को सीधे गुजरात तट से जोड़ेगी. पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 31 mmscmd प्राकृतिक गैस की आपूर्ति संभव होगी. प्रोजेक्‍ट रूट इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह ओमान और UAE के रास्ते अरब सागर से होकर गुजरे तथा भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचा जा सके. इस पाइपलाइन के माध्यम से भारत को ओमान, यूएई, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर जैसे देशों के विशाल गैस भंडार तक पहुंच मिल सकेगी. इन देशों के पास संयुक्त रूप से लगभग 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार मौजूद है।  3450 मीटर की गहराई में पाइप बिछाने की योजना बताया जा रहा है कि पाइपलाइन समुद्र की सतह से करीब 3,450 मीटर की गहराई तक बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में शामिल हो सकती है. हालिया तकनीकी अध्ययनों में गहरे समुद्र में पाइप बिछाने और मरम्मत तकनीकों में प्रगति के कारण परियोजना को व्यवहारिक बताया गया है. SAGE ने सरकार को दी जानकारी में दावा किया है कि समुद्र तल की स्थिति का अध्ययन करने के लिए प्रस्तावित मार्ग पर लगभग 3,000 मीटर की परीक्षण पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है।  होर्मुज स्‍ट्रेट का विकल्‍प दरअसल, इस परियोजना को आगे बढ़ाने के पीछे हालिया होर्मुज संकट एक बड़ा कारण माना जा रहा है. वर्ष 2025 में भारत के लगभग दो तिहाई एलएनजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आए थे. फरवरी में ईरान द्वारा अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव के दौरान इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद करने के बाद वैश्विक एलएनजी आपूर्ति में 20 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला. एशियाई स्पॉट एलएनजी कीमतों का प्रमुख इंडेक्‍स प्लैट्स जेकेएम सामान्य परिस्थितियों में जहां 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के आसपास था, वहीं भू-राजनीतिक संकट के दौरान यह बढ़कर 24-25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गया. इस घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति और मूल्य स्थिरता से जुड़ी कमजोरियों को उजागर कर दिया है। 

शुभेंदु सरकार का सख्त कदम, RG कर मामले में तीन IPS अफसरों पर गिरी गाज

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सूबे की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई तरह की बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल में कुल मिलाकर अराजकता का माहौल था और हमने अब सख्ती शुरू कर दी है. शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "आरजी कर डॉक्टर रेप और मर्डर केस को ठीक से न संभालने के आरोप में तीन IPS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. कोलकाता पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है।  CM शुभेंदु ने  में आगे आरोप लगाया कि ये अधिकारी पीड़ित परिवार को रिश्वत देने और बिना किसी लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में शामिल थे. इन तीनों IPS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।  उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल किया जा रहा था. हमने जांच शुरू की और पाया कि आरोप सही थे." उन्होंने बरामद किए गए मोबाइल फोन दिखाए गए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का पता चल सके।  'हम पता लगाएंगे…' सीएम शुभेंदु ने कहा कि मैंने आरजी कर घटना की जांच में कोलकाता पुलिस की भूमिका पर गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी है. उस वक्त इस घटना को ठीक से नहीं संभाला गया था. पुलिस को जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह उसने नहीं निभाई।  "हम पता लगाएंगे कि क्या पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक नेताओं के इशारे पर काम करना पड़ा था. एक पुलिस DC का रवैया और भाषा अनुचित थी।  बंगाल सरकार ने आरजी कर मामले से जुड़े तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. कोलकाता के पूर्व CP विनीत गोयल उनमें से एक हैं।  आरजी कर मामला क्या है? यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई थी. कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर एक सेमिनार हॉल में मिला था. कोलकाता पुलिस ने 33 साल के एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को, डॉक्टर के साथ रेप और उसकी हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया था. बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।  इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ित के लिए इंसाफ की मांग की गई. पीड़ित की मां ने हाल ही में हुए बंगाल चुनावों में पानीहाटी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।  विधानसभा चुनावों से पहले, आरजी कर की पीड़िता को इंसाफ दिलाना बीजेपी के मुख्य वादों में से एक था. 20 जनवरी, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, डॉक्टर के परिवार का आरोप है कि इस अपराध को अंजाम देने में वह अकेला नहीं था।  पिछले दिनों परिवार ने कोलकाता हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई है, जिनकी सीबीआई और राज्य पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की है. उन्होंने कहा कि एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय के मुताबिक, घटना के वक्त वहां कई लोग मौजूद हो सकते हैं। 

‘कुछ मीडिया में गए, कुछ RTI एक्टिविस्ट बने’— CJI के बयान से छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को कोर्ट में एक ऐसी बात कही जो चर्चा में आ गई है. एक वकील के मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से की और कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं।   उन्होंने ऐसे लोगों को 'समाज के परजीवी' भी कहा. यह टिप्पणी तब आई जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए कोर्ट में याचिका लेकर आया था।  भारत में वकालत में एक खास रैंक होती है जिसे 'सीनियर एडवोकेट' कहते हैं. यह दर्जा कोर्ट खुद किसी वकील को देती है जब वो यह समझे कि उस वकील का अनुभव, काम और पेशेवर आचरण इसके लायक है. यह दर्जा मांगा नहीं जाता बल्कि दिया जाता है. कोई वकील खुद इसके लिए याचिका नहीं लगाता।  कोर्ट में क्या हुआ? CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने एक वकील ने याचिका दाखिल की थी. वो चाहते थे कि दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे. लेकिन उन वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को देखकर बेंच बहुत नाराज हो गई।  CJI ने साफ कहा कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें यह दर्जा दे भी दे तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर देगा. उन्होंने वकील से पूछा कि क्या यह दर्जा कोई मेडल है जो सजावट के लिए रखा जाए. और यह भी पूछा कि क्या ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बनना चाहिए।  CJI ने 'कॉकरोच' और 'परजीवी' क्यों कहा? सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि समाज में पहले से ऐसे 'परजीवी' हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं. फिर उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा जिन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती और पेशे में कोई जगह नहीं होती, वो मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सबको निशाना बनाने लगते हैं. इन्हें उन्होंने 'कॉकरोच जैसे युवा' कहा. CJI ने वकील से पूछा कि क्या वो भी उन लोगों के साथ हाथ मिलाना चाहता है।  वकीलों की डिग्री पर भी उठाए सवाल CJI ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि वो CBI से कहना चाहते हैं कि बहुत से वकीलों की डिग्रियों की जांच की जाए क्योंकि उनकी असलियत पर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले में कभी कुछ नहीं करेगी क्योंकि उन्हें वकीलों के वोट चाहिए।  आखिर में क्या हुआ? वकील ने बेंच से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी. बेंच ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।   

ब्रिक्स समिट में मतभेद, 60 एजेंडों पर सहमति लेकिन ईरान मुद्दे पर विवाद

नई दिल्ली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेश मंत्रियों के बीच ईरान के मसले को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन सकी। ऐसी स्थिति में साझा बयान जारी नहीं किया गया। इसकी बजाय एक आउटकम स्टेटमेंट ही जारी किया गया है। जानकारी मिली है कि ईरान के मसले पर भले ही ब्रिक्स देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन सकी, लेकिन कुल 60 एजेंडों पर सभी ने विचार साझा किए। सभी देशों के इन एजेंडों पर एक जैसे विचार रहे। इन एजेंडों में ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट ऐक्शन, फाइनेंशियल कनेक्टिविटी आदि शामिल हैं। दिल्ली में आयोजित विदेश मंत्रियों की इस समिट में ईरान के मसले को लेकर मतभेद हो गए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स देशों से मांग की कि वे बयान में ईरान और इजरायल के हमलों की निंदा करें। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों ने ईरान पर जो हमले किए, वह गलत थे और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ थे। लेकिन ज्यादातर इस पर सहमत नहीं दिखे। इसकी वजह यह है कि भारत समेत ज्यादातर देश चाहते थे कि ईरान के साथ ही अमेरिका और इजरायल के साथ भी संतुलन बनाकर रखा जाए। इसी को लेकर मीटिंग में मतभेद पैदा हो गए और अंत में साझा बयान जारी न करने पर ही सहमति बनी। गुरुवार को इस समिट की शुरुआत हुई थी। अपने शुरुआती भाषण में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोले जाने की वकालत की थी। उनका कहना था कि समुद्र में संचालन सुरक्षित और निरंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जंग में अंतरराष्ट्रीय सीमा के तहत आने वाले समुद्री क्षेत्र में किसी तरह की बंदी नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील करते हुए कहा कि आप सभी अमेरिका और इजरायल की ओर से हमारे ऊपर हमले की निंदा करें। इस पर सहमति ही नहीं बन पाई। कुछ देश इसके लिए तैयार थे, लेकिन कुछ मुल्कों ने इस पर सहमति नहीं जताई। जयशंकर और अराघची के बीच समिट से इतर क्या हुई बात ब्रिक्स समिट के इतर जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अराघची के बीच बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने इजराय और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बात की। वहीं जयशंकर ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही होने देने की मांग की। एस. जयशंकर ने कहा कि हमने दोनों देशों के हितों को लेकर बात की। हमारी इस बात को लेकर सहमति है कि जरूरी मुद्दों को बातचीत से हल किया जाए। हमारी क्षेत्रीय स्थिरता और हालातों को लेकर भी बात हुई।