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युगांडा के आर्मी चीफ ने तुर्की से दुल्हन मांगी, पहले मेलोनी को दिया था शादी का ऑफर

कंपाला युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. उन्होंने तुर्की से एक अरब डॉलर की मांग की है, साथ ही कहा कि देश की 'सबसे खूबसूरत महिला' दुल्हन के रूप में उनको दी जाए. और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो युगांडा उनके साथ सारे संबंध तोड़ लेगा. हालांकि, उन्होंने बाद में इन ट्वीट्स को हटा लिया. फिलहाल ये भी साफ नहीं है कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा।  बता दें कि आर्मी चीफ कैनेरुगाबा युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के बेटे हैं. यह पहली बार नहीं है जब कैनेरुगाबा ने बेतुकी बयानबाजी की हो।  अक्टूबर 2022 में, उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी संग शादी की पेशकश की थी. बदले में 100 अंकोले गायों (लंबे सींग वाली ब्रीड) की पेशकश की. उनको कैनेरुगाबा ने 'धरती पर सबसे खूबसूरत गायें' बताया था. तब मेलोनी इटली की पीएम नहीं बनी थीं।  कैनेरुगाबा ने तब ट्विटर पर अपने फॉलोअर्स से पूछा था कि मेलोनी से शादी करने के लिए उनको कितनी गाय देनी चाहिए. उन्होंने आगे लिखा था कि हमारे कल्चर में किसी जिस लड़की को आप पसंद करते हैं, उसे आप एक गाय देते हैं।  हालांकि, इस प्रस्ताव के तुरंत बाद एक धमकी दी गई. कैनेरुगाबा ने कहा, 'अगर रोमन हमारी गायों को अस्वीकार करते हैं, तो इसका मतलब है कि हमें रोम पर कब्जा करना होगा. इसमें हमें कई दिन लग जाएंगे।  राजनयिक संबंधों के लिए खतरा युगांडा के सेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर राजनयिक संबंध टूट सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि युगांडा 30 दिनों के भीतर कंपाला में तुर्की के दूतावास को बंद कर सकता है , और कहा कि तुर्की की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले को सोशल मीडिया की बयानबाजी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, यह संकेत देते हुए कि स्थिति एक औपचारिक राजनयिक मुद्दे में बदल सकती है। विवादास्पद व्यक्तिगत टिप्पणी की आलोचना हुई वित्तीय मांग के अलावा, कैनेरुगाबा ने एक बेहद आलोचनात्मक व्यक्तिगत टिप्पणी भी की, जिसमें उन्होंने तुर्की से देश की "सबसे खूबसूरत महिला" को जीवनसाथी के रूप में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस बयान को अनुचित और असंवेदनशील बताते हुए इसकी कड़ी निंदा हुई है, जिससे विवाद और भी बढ़ गया है। यात्रा संबंधी सलाह और कड़े बयान कैनेरुगाबा ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए युगांडा के नागरिकों को तुर्की की यात्रा से बचने की सलाह दी। उन्होंने तुर्की पर युगांडा के प्रति अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया और द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट की चेतावनी दी। व्यापक भूराजनीतिक संदर्भ युगांडा लगभग दो दशकों से सोमालिया में अपनी महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है और अल-शबाब जैसे चरमपंथी समूहों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान दे रहा है। वहीं, तुर्की ने मोगादिशु में परियोजनाओं सहित इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक और अवसंरचनात्मक उपस्थिति का विस्तार किया है । विवादास्पद बयानों का पैटर्न यह पहली बार नहीं है जब कैनेरुगाबा अपने असामान्य बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं। उनके पिछले सार्वजनिक बयानों ने भी बहस छेड़ दी है और उनके राजनयिक निहितार्थों को लेकर चिंताएं पैदा की हैं। आर्मी चीफ बेटा करे गलती, राष्ट्रपति पिता मांगे माफी उनके बयान की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई. फिर कैनेरुगाबा के पिता और युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी को अपने बेटे की टिप्पणियों के लिए माफी मांगनी पड़ी।  मुहूजी, जिन्हें उनके पिता के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है, ने 2022 में सार्वजनिक रूप से केन्या पर आक्रमण करने की धमकी भी दी थी. उन्होंने कहा था, 'मुझे और मेरी सेना को नैरोबी पर कब्जा करने में दो हफ्ते से ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।  इस धमकी के चलते उनके पिता ने उन्हें आर्मी चीफ के पद से अस्थायी रूप से बर्खास्त कर दिया था. साथ ही केन्या से औपचारिक माफी मांगी थी। 

नाकेबंदी की तरफ आए तो कर देंगे तबाह, ड्रग्स तस्करों जैसा अंजाम भुगतने की डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फिर से ईरान को चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज में अगर कोई भी ईरानी अमेरिकी नेवी नाकेबंदी की तरफ आया तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। बता दें कि ईरान के साथ पाकिस्तान में वार्ता विफल होने के बाद से ही ट्रंप भड़के हुए हैं। वह लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरान की नेवी को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि ईरानी नेवी समुद्र की तली में पड़ी है। उनके पास 158 जहाज वहां पर हैं। हम इन्हें मार नहीं पाए हैं। यह लोग इसे फास्ट अटैक शिप्स कहते हैं, लेकिन हम लोग इसे बड़ा खतरा नहीं मानते। गौरतलब है कि अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान के स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। इसमें कहा गया कि ‘यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहाकि यह नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। सेंटकॉम ने कहाकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

चुनाव के कारण हम अंधे नहीं हो सकते: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, निर्वाचन आयोग को दिया जवाब देने का आदेश

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले चल रहे वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू' (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि मतदाताओं का चुनावी सूची में बने रहने का अधिकार लगातार बना रहता है. इसे किसी भी हाल में चुनावी दबाव के कारण प्रभावित नहीं किया जा सकता।  सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में वोटर का अधिकार केवल कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक महत्व भी रखता है. कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और मतदाता सूची को लेकर लगातार विवाद सामने आया है।  यह मामला उन मतदाताओं की याचिका से जुड़ा है, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. उनकी अपीलें अभी अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने की कट-ऑफ तारीख आगे बढ़ाई जाए, ताकि अपील मंजूर होने पर वे मतदान कर सकें।  चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनावों की गहमागहमी और दबाव के बीच भी अदालत मतदाताओं के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकती. बेंच ने कहा, ''जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोटर बने रहने का अधिकार केवल संवैधानिक नहीं है।  कोर्ट ने कहा कि ये एक भावनात्मक अधिकार भी है. हमें इसकी रक्षा करनी होगी. भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि वोटर लिस्ट को 9 अप्रैल की तारीख के आधार पर अंतिम रूप दे दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने इस प्रक्रिया में कुछ कमियों की ओर इशारा किया. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी जैसी नई श्रेणी पर सवाल उठाए।  बेंच ने यह भी याद दिलाया कि पहले के मामलों में आयोग ने 2002 की मतदाता सूची के लोगों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की जरूरत नहीं बताई थी. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग अपील प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं करा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस पर जोर देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मामलों की जांच के दौरान त्रुटियों की संभावना बनी रहती है, इसलिए एक मजबूत और प्रभावी अपीलीय तंत्र बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब एक दिन में सैकड़ों-हजारों दस्तावेजों की जांच होती है, तो पूर्ण सटीकता की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद अहम है. इसका सीधा असर उन मतदाताओं पर पड़ सकता है, जिनकी चुनावी भागीदारी फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है. कोर्ट का अंतिम रुख चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है। 

बंगाल चुनाव: 34 लाख लोग नहीं कर सकेंगे वोटिंग, SC ने अंतरिम राहत देने से किया मना

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ 13 लोगों द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को होगा. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका को ‘‘समय पूर्व'' करार देते हुए पीड़ित पक्षों को स्थापित अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क करने का निर्देश दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों को अंतरिम वोटिंग अधिकार देने से मना कर दिया है, जिनके नाम वोटर लिस्ट की सफाई प्रक्रिया (SIR) के दौरान हटा दिए गए थे और जिनकी अपीलें अभी भी अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं।  सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने पीठ को बताया कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इन लोगों को आगामी दो चरणों के विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह बिल्कुल असंभव है। अगर हम ऐसा करते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के मतदान अधिकार निलंबित करने पड़ेंगे। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में कुल 34 लाख अपीलें लंबित हैं। यह आदेश 13 लोगों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ हस्तक्षेप की मांग की गई थी। पीठ ने याचिका को 'समय से पहले' बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधिकरणों में ही राहत मांगने की सलाह दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा चूंकि याचिकाकर्ता (कुरैशा यास्मीन और अन्य) पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क कर चुके हैं, इसलिए याचिका में व्यक्त आशंकाएं समय से पहले हैं। अगर याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, अदालत ने याचिका के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी। न्यायमूर्ति बागची ने चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोट देने का अधिकार न केवल संवैधानिक है, बल्कि भावनात्मक भी है। यह लोकतंत्र का हिस्सा होने और सरकार चुनने से जुड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व न्यायाधीशों द्वारा गठित न्यायाधिकरणों पर निर्णय की समयसीमा का बोझ नहीं डाला जा सकता। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए गलत तरीके अपनाने की बात नहीं है। साधन ही लक्ष्य को सही ठहराते हैं। हमें उचित प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा करनी होगी। मतदाता को दो संवैधानिक प्राधिकरणों के बीच नहीं फंसाया जाना चाहिए। कल्याण बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग न्याय के लिए इस अदालत की ओर देख रहे हैं. लोग अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं. 34 लाख लोग असली वोटर हैं, इसीलिए वे न्याय के लिए आपकी ओर देख रहे हैं।  टीएमसी ने तर्क दिया कि उन सभी व्यक्तियों को मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए जिनके नाम 22 अप्रैल तक अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकार किए जाते हैं।  इस केस की सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि हमें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पत्र मिला है. उन्होंने अपडेट किया है कि 60 लाख से 6 हजार 675 आपत्तियां और दावे निपटाए गए. उनके पास लगभग 1823 आपत्तियों पर निर्णय लिया जाना बाकी है, उनमें तकनीकी कारण हैं. कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपडेट किया है कि उन्होंने न्यायाधिकरणों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तैयार करने के लिए उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त जजों की एक समिति बनाई है।  अधिकारियों को मिलती रहेगी सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम भारत सरकार और निर्वाचन आयोग के साथ-साथ राज्य सरकार को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा किसी भी सूरत में वापस नहीं ली जाए।  याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटा रहा है और अपीलों की सुनवाई समय पर नहीं हो रही है। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने बताया कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें अभी लंबित हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अगर बहस करने की अनुमति ही नहीं दी जाती तो अपीलों का क्या फायदा? क्या इनका फैसला तय समयसीमा में होगा या इन्हें लगातार टाला जाएगा? गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले ही पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया है। अदालत के कोई विशेष निर्देश न होने तक कोई नया नाम शामिल नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में हटाए गए लगभग 27 लाख मामलों का फैसला करने के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण गठित किए गए हैं।

ठाणे में सीमेंट मिक्सर ट्रक से वैन टकराई, 11 की मौत, 3 महिलाएं भी शामिल, 2 की हालत गंभीर

 ठाणे  मुंबई के कल्याण में हुए सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है. अस्पताल में भर्ती दो लोगों ने दम तोड़ दिया. इस संबंध में अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर दुख जताया है और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।  डंपर और कार की टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को मुंबई के कल्याण इलाके में एक डंपर की टक्कर एक कार से हो गई. यह हादसा कल्याण-मुरबाड सड़क पर रायता पुल के पास सोमवार सुबह 11 बजे हुआ. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार कल्याण से आ रही थी, तभी उसकी सीधी टक्कर एक मिक्सर ट्रक से हो गई।  इस हादसे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख जताया है. उन्‍होंने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्‍ट में कहा, “कल्याण के पास नेशनल हाईवे 61 पर दो वाहनों की टक्कर से हुए भीषण हादसे में 11 लोगों की जान जाना बेहद दुखद है. मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. हम इन परिवारों के दुख में उनके साथ हैं. हम स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं।  वहीं, पुलिस ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की खबर मिलते ही, टिटवाला पुलिस स्टेशन की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिया।  शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि हादसे के समय कार में 12 यात्री सवार थे. कुल यात्रियों में से आठ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पीड़ितों की मदद करने की कोशिश की. बाद में, दो और लोगों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. पुलिस के मुताबिक, जब कल्याण के पास रायता पुल के पास टक्कर हुई, तब वाहन मुरबाड की ओर जा रहा था।  इससे पहले, समाचार एजेंसी आईएएनएस से ​​बात करते हुए, ठाणे के पुलिस अधीक्षक डीएस स्वामी ने नौ लोगों की मौत की पुष्टि की थी. टिटवाला के डिप्टी एसपी अनिल लाड ने मीडिया से कहा, “मृतकों की पहचान की प्रक्रिया अभी चल रही है, जबकि घायलों का इलाज पास के एक अस्पताल में किया जा रहा है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. इस घटना में संबंधित सरकारी विभागों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।  पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि तेज रफ्तार वाहन पर से नियंत्रण खो देना ही इस दुर्घटना का कारण हो सकता है. अधिकारियों ने बताया कि इस टक्कर के कारण टिटवाला-कल्याण मार्ग पर रायता पुल के पास हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे इलाके में वाहनों की आवाजाही में काफी बाधा आई।   

महंगाई का दबाव: रिटेल महंगाई बढ़ी, खाने-पीने की चीजों की कीमतें हुईं ऊंची

नई दिल्ली  देश में महंगाई के मोर्चे पर मार्च महीने में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.40% हो गई, जो फरवरी में 3.21% थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण महंगाई दर 3.63% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अपेक्षाकृत कम 3.11% दर्ज की गई। खाद्य महंगाई में भी इजाफा देखने को मिला। Consumer Food Price Index (CFPI) के अनुसार, मार्च में खाद्य महंगाई दर 3.87% रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 3.96% और शहरी इलाकों में 3.71% दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि गांवों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव ज्यादा बना हुआ है। वहीं, आवास क्षेत्र में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। मार्च 2026 में हाउसिंग इंफ्लेशन 2.11% आंकी गई। इसमें ग्रामीण आवास महंगाई 2.54% और शहरी आवास महंगाई 1.95% रही। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। फिलहाल महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है, जिससे नीतिगत स्तर पर राहत की स्थिति बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने किया दावा, भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसले की ओर बढ़ रहा है

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित किया. सम्मेलन में सरकार, शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति सहित अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां और सफल महिलाएं शामिल हुईं ।  'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार भी हमारे बीच हैं. देश की विकास यात्रा में भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेने वाला है.' यह फैसला महिला शक्ति को समर्पित है. यह महिला शक्ति के सम्मान के लिए समर्पित है ।          हमारे देश की संसद एक नया इतिहास बनाने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत की सोच को साकार करेगा. एक ऐसा इतिहास जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतावादी हो, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ एक नारा न हो, बल्कि हमारे काम करने के तरीके, हमारे फैसले लेने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा हो. दशकों के इंतजार को खत्म करने का समय आ गया है, राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक आज 16, 17 और 18 अप्रैल है ।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, '2023 में पार्लियामेंट की नई बिल्डिंग में हमने महिला सशक्तिकरण एक्ट पेश किया. इसे समय पर लागू किया जा सके, इसके लिए 16 अप्रैल से पार्लियामेंट के बजट सेशन की स्पेशल मीटिंग होने जा रही है. नारी शक्ति वंदन प्रोग्राम के जरिए हमें देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है. मैं आपको उपदेश देने नहीं आया हूँ, न ही आपको जगाने आया हूँ. मैं आज आपके देश की लाखों माताओं और बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूँ ।  नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने संबोधित किया इस मौके पर नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा, 'अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था, महिलाएं आधा आसमान संभालती हैं, तो क्या उन्हें कम से कम एक तिहाई पॉलिटिकल जमीन नहीं संभालनी चाहिए? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ उनके दूर के विचार को पूरा किया है ।  यह एक्ट सिर्फ लोकसभा और विधानसभा में रिजर्वेशन देने के लिए नहीं है, बल्कि यह उस सोच को बदलने की कोशिश करता है जिसने सालों से महिलाओं को फ़ैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर रखा है. यह भारत के लोकतंत्र को सिर्फ संख्या से आगे बढ़ाकर ज़्यादा संवेदनशीलता की ओर ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।  बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ: सीएम रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हमने यह सफर बेटी बचाओ से शुरू किया था, एक समय था जब बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता था. बेटियों को पढ़ाने का अगला दौर आया, तो हम बेटी पढ़ाओ के दौर में आ गए. मुझे बहुत खुशी है कि आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हम 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ' के दौर में आ गए हैं ।  इस कार्यक्रम का मकसद भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करने के लिए अलग-अलग तरह के हितधारकों को एक साथ लाना है. यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बड़े पैमाने पर प्रयासों के तहत आयोजित किया जा रहा है और इसका मकसद फैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के महत्व को बताना है।  यह पंचायत जैसे जमीनी स्तर के सरकारी संस्थानों से लेकर राष्ट्रीय संसद तक सभी सेक्टर में लीडरशिप रोल में महिलाओं की बढ़ती मौजूदगी को भी दिखाएगा. यह इवेंट सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के पास होने के बाद हो रहा है, जो विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम था।  इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई रिजर्वेशन का प्रावधान है, जिसे भारत के राजनीतिक माहौल के लिए बड़े पैमाने पर बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है ।  अब जब पूरा ध्यान पूरे देश में महिला आरक्षण लागू करने पर है तो इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का एक सत्र बुलाया गया है. उम्मीद है कि सम्मेलन इस पहल को लेकर तेजी लाएगा और शासन में ज्यादा सबको साथ लेकर चलने के केंद्र सरकार के वादे को फिर से पक्का करेगा ।  आधिकारिक बयान के मुताबिक सम्मेलन में भारत के भविष्य को बनाने में महिलाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा, क्योंकि देश 2047 तक एक विकसित देश बनने के अपने लंबे समय के विजन की ओर बढ़ रहा है, जिसे अक्सर 'विकसित भारत 2047' कहा जाता है ।  केंद्र सरकार ने लगातार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एक विकसित भारत के अपने विजन का एक अहम हिस्सा बताया है. इस सम्मेलन से इस बात को और मजबूत करने और सबको साथ लेकर चलने वाली और टिकाऊ विकास पाने की कोशिशों को और मजबूत करने की उम्मीद है । 

अमेरिका की नाकेबंदी से होर्मुज स्ट्रेट में संकट, कच्चे तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर से ऊपर

न्यूयॉर्क दुनिया की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए मिडिल-ईस्ट को लेकर फिलहाल अभी तक समझौता नहीं हो सका है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यूएस-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता रुक गई.  करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके, जिससे सीजफायर पर संकट गहरा गया है।  अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान ने जंग खत्म करने के लिए यूएस की शर्तें नहीं मानी. बातचीत में रुकावट आने के बाद वेंस अमेरिका लौट गए. दूसरी तरफ, ईरान ने इस बातचीत को नाकाम बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने बहुत ज़्यादा मांगें रखीं।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नाकेबंदी का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना है। ट्रम्प के मुताबिक, कई अन्य देश भी इस प्रयास में अमेरिका का साथ दे रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान हुआ है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 158 जहाज तबाह किए जा चुके हैं। नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले करने पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के हिसाब से आगे का फैसला लिया जाएगा। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत एक अस्थायी दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी समाधान में बदलने के लिए हो रही थी. इस वार्ता में अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ सहित कई सीनियर अधिकारी शामिल हुए।  पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स     चीन को धमकी- ट्रम्प ने चीन को साफ चेतावनी दी है कि अगर उसने ईरान की सैन्य मदद की, तो अमेरिका उस पर 50% तक भारी टैरिफ लगा देगा।     होर्मुज की नाकाबंदी- ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी करेगी और ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रास्ते में रोक लिया जाएगा।     इजराइली मंत्री का मस्जिद दौरा- इजराइल के मंत्री बेन गविर के अल अक्सा मस्जिद दौरे पर जॉर्डन ने विरोध जताया और इसे भड़काऊ कदम बताते हुए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कहा।     ईरान ने टोल मांगा- ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कंट्रोल में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना जरूरी होगा।     50 लोग गिरफ्तार- ईरान में करीब 50 लोगों को जासूसी के आरोप में पकड़ा गया है, जिन पर अमेरिका और इजराइल को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान के चार बंदरगाहों पर सीधा असर अमेरिकी नौसेना के ईरानी समुद्री क्षेत्रों की नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक शिपिंग उद्योग में भारी चिंता देखी जा रही है. उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका इन बंदरगाहों को ब्लॉक करता है, तो ईरान के चार सबसे बड़े बंदरगाहों पर सीधा असर पड़ेगा     खार्ग द्वीप: ये ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात टर्मिनल है.     जास्क टर्मिनल: ओमान की खाड़ी में स्थित एक प्रमुख तेल केंद्र है.     बंदर अब्बास: ईरान का रणनीतिक रूप से बड़ा और मुख्य व्यापारिक बंदरगाह है.     बंदर खुमैनी: ईरान का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है.  सीजफार पर ट्रंप बोले- अच्छी तरह कायम है ईरान के साथ सीजफायर कायम रहने को लेकर ट्रंप ने बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'मैं कहूंगा कि यह अच्छी तरह कायम है. उनकी सेना खत्म हो चुकी है. उनका पूरा नौसेना बल पानी में डूब गया है. 158 जहाज तबाह हो गए हैं. उनका नौसेना बल खत्म हो गया है. उनके ज्यादातर बारूदी सुरंग यंत्र नष्ट हो गए हैं. कल सुबह 10 बजे से नाकाबंदी लागू हो जाएगी. दूसरे देश ये ध्यान देने के लिए काम कर रहे हैं कि ईरान तेल न बेच सके और ये बहुत प्रभावी होगा. कई नावें तेल भरकर हमारे देश की ओर आ रही हैं और फिर उसे ले जाएंगी. इसलिए वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नहीं गुजरेंगी. इसे ठीक कर लिया जाएगा. इस बीच, वो हमारा इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारे पास रूस और सऊदी अरब दोनों के कुल तेल से कहीं ज्यादा तेल है. हो ये रहा है कि नावें यहां आ रही हैं, तेल भर रही हैं. हमें होर्मुज से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।  इजरायली हमलों में मौतों की संख्या 2000 पार लेबनान में जारी इजरायली हमलों के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,055 तक पहुंच गई है।   अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में भारी इजाफा अमेरिका ने सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की घोषणा की है. जिसके बाद रविवार को बाजार खुलते ही तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया. अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत 8% बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 7% की बढ़त के साथ 102.29 डॉलर पर आ गया।     

ईरान के लिए नया संकट: ‘वॉटर वॉर’ के तहत अमेरिका चार इलाकों से करेगा नाकेबंदी

वाशिंगटन पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की ‘शांति वार्ता’ पटरी से उतरते ही डोनाल्ड ट्रंप का पारा चढ़ गया है. अब ट्रंप ने सीधी धमकी दे डाली है कि अमेरिका खुद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करेगा. यानी जिस होर्मुज को खुलवाने के लिए अब तक वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बना रहा था, अब उसी लाइफलाइन को खुद जाम करने की बात कह रहा है।  ट्रंप का ये दांव सीधे ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट करने वाला है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेहरान के लिए लाइफलाइन जैसा है. यहीं से उसका ज्यादातर तेल दुनियाभर में जाता है. अगर ये रास्ता बंद हुआ, तो ईरान की कमाई पर सीधा ताला लग सकता है।  ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री को डर है कि ट्रंप के फैसले से तेल की कीमतें और बढ़ेंगी, क्योंकि अमेरिका उन सभी ईरानी जहाजों पर भी रोकना शुरू कर सकता है, जिन्हें अब तक बिना रोक-टोक आने दिया जा रहा था. इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि ईरान से आने वाले कुछ ऐसे जहाज, जो होर्मुज का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे थे, उन्हें भी अमेरिका रोक सकता है।  ताजा जानकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरानी के समंदर में नाकाबंदी शुरू करता है, तो ईरान के 4 प्रमुख बंदरगाह प्रभावित होंगे: 1. खर्ग (खार्क) द्वीप 2. जास्क टर्मिनल 3. बंदर अब्बास 4. बंदर खुमैनी वैसे अमेरिका और इजरायल के सात जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था. लेकिन फिर ईरान ने धीरे-धीरे इसे खोला. कुछ तेल टैंकर्स को 20 लाख डॉलर प्रति जहाज (करीब 18 करोड़ रुपये) तक के शुल्क के बदले में गुजरने की इजाजत भी दी।  ईरान को आर्थिक चोट देने की तैयारी में ट्रंप ये भी सामने आया कि होर्मुज से UAE, ओमान का तेल निकलने में दिक्कत आ रही है. वहीं ईरान युद्ध के दौरान भी इस इलाके से अपने तेल का आवागमन जारी रखे हुए है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान मार्च तक औसतन 18 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करने में कामयाब रहा – जो पिछले तीन महीनों की तुलना में लगभग 1 लाख बैरल प्रति दिन ज्यादा है।  ईरान जो तेल बेच रहा है उससे मिल रहे फंड का इस्तेमाल सरकार चलाने और सैन्य अभियानों के लिए हो रहा है. अब होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके ट्रंप इसपर डेंट करना चाहते हैं. हालांकि, इससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है. बता दें कि पाकिस्तान में हुई मीटिंग फेल होने के बाद कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।  तेल के दाम और ज्यादा हाई पर न जाएं इसीलिए, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी टैंकरों को इस क्षेत्र से गुजरने पर कोई रोक-टोक नहीं लगाई थी. क्योंकि कहीं से भी मार्केट तक पहुंचने वाला कच्चा तेल, तेल की कीमतों को कम से कम कुछ हद तक कंट्रोल में रखने में मदद कर सकता है. इसी वजह से मार्च में अमेरिका ने ईरान को उसके उस तेल को बेचने के लिए एक अस्थायी लाइसेंस दिया था, जो टैंकरों में भरकर समुद्र में पहुंच गया था।  इस फैसले से बड़ी मात्रा (140 मिलियन बैरल) में कच्चा तेल उपलब्ध हो गया था. 140 मिलियन बैरल, जो US Energy Information Administration के अनुसार, पूरी दुनिया की तेल की मांग को लगभग डेढ़ दिन तक पूरा करने के लिए काफी था।  लेकिन, अगर अब ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करेंगे तो इससे तेल और गैस की कीमतों में और भी उछाल आने के पूरे-पूरे चांस बने रहेंगे। 

ग्वादर के पास नौसैनिक जहाज को बनाया गया निशाना, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की नेवी के एक जहाज पर अरब सागर में हमला हुआ है। इसमें कम से कम तीन पाकिस्तानी नौसेना कर्मियों की मौत हुई है। बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया है कि रविवार को जिवानी खाड़ी के पास पाकिस्तान के एक नौसैनिक जहाज को निशाना बनाकर उड़ा दिया गया। इस हमले ने ध्यान खींचा है क्योंकि क्योंकि यह पहली बार है, जब बलूचिस्तान के पास के समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया गया है। पाकिस्तानी आर्मी और सरकार के लिए यह खासतौर से चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि अटैक रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण ग्वादर पोर्ट के पास हुआ है स्थानीय मीडिया के अनुसार, ग्वादर के पास समुद्र में पाकिस्तान नौसेना की एक नाव पर हमला हुआ। खुले समुद्र में इस तरह की घटना पहली बार हुई है। इसमें पाकिस्तानी नौसेना के तीन जवान मारे गए हैं। अब तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। स्थानीय एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इसके पीछे बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही गुट हो सकते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह छेड़ रखा है। पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता ईरान में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की वजह से पूरे क्षेत्र में समुद्री यातायात प्रभावित है। ऐसे में पाकिस्तान के बंदरगाहों पर कई देशों के बड़े जहाज और कंटेनर लंगर डाल रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जोखिम के चलते यह क्षेत्र वैकल्पिक केंद्र के रूप में उभरा है। ऐसे समय में पाकिस्तानी समुद्री क्षेत्र के भीतर हुए इस हमले से विदेशी नाविकों के बीच डर और चिंता बढ़ सकती है। बलूचिस्तान के पास पाकिस्तानी नेवी पर हमला आर्मी चीफ असीम मुनीर और शहबाज शरीफ की चिंता को बढ़ाता है। इससे पाकिस्तान के सामने समुद्र की सुरक्षा को बेहतर करने की बड़ी चुनौती सामने आ गई है। इस पूरे क्षेत्र में जमीन पर पहले ही पाकिस्तान की आर्मी पहले ही बीएलए, टीटीपी और दूसरे गुटों के हमलों का सामना कर रही है। बलूचिस्तान में विद्रोह पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से हिंसा और अशांति का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र में कई हथियारबंद गुट पाकिस्तानी आर्मी पर हमले करते रहे हैं। कई ऐसे इलाके हैं, जहां जाना भी पाकिस्तानी अफसरों और पुलिस के लिए संभव नहीं है। पाकिस्तान ने कई ऑपरेशन किए हैं लेकिन उसे बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। बलूचिस्तान में सक्रिय हथियारबंद गुटों का कहना है कि उनके प्रांत के संसाधनों को लूटा जा रहा है। इन गुटों का आरोप है कि बलूचिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत के लोग कर रहे हैं। ऐसे में वह बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहे है ताकि यहां के लोगों की स्थिति में सुधार हो सके।