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दुश्मन के ठिकानों पर बरसेगी स्वदेशी ‘धमक’, रक्षा मंत्रालय खरीदेगा 1000 किलो वाले 600 हवाई बम

नई दिल्ली भारत ने हाल के वेस्ट एशिया युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से बहुत बड़ी सीख ली है. इन दोनों घटनाओं ने दिखाया कि लड़ाई के समय हथियारों की उपलब्धता और उनकी ताकत कितनी जरूरी होती है. इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने अब भारतीय वायु सेना को और मजबूत बनाने का फैसला किया है. रक्षा मंत्रालय स्वदेशी 1000 किलो के हवाई बम खरीदने की तैयारी में है. ये बम अमेरिका के MK-84 बम जैसे होंगे जो 2000 पाउंड यानी लगभग 907 किलो विस्फोटक ले जा सकते हैं. इसका मतलब है कि ये बम दुश्मन के बड़े-बड़े टारगेट को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं. अब भारत खुद इन बमों को बनाएगा ताकि विदेश से खरीदने की जरूरत कम हो और वायु सेना हमेशा तैयार रहे. कितने 1000 किलो के हवाई बम खरीदे जाएंगे? रक्षा मंत्रालय ने इन स्वदेशी बमों के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI जारी कर दिया है. इसके तहत 600 ऐसे 1000 किलो के हवाई बम बनाए और खरीदे जाएंगे. इनके साथ टेल यूनिट यानी पूंछ वाला हिस्सा और दूसरे जरूरी उपकरण भी शामिल होंगे. यह पूरा प्रोजेक्ट बाय इंडियन कैटेगरी में चलेगा यानी सब कुछ भारत में ही बनेगा. इससे भारतीय कंपनियां आगे बढ़ेंगी और देश की रक्षा व्यवस्था मजबूत होगी. बम की खासियतें क्या हैं और ये कितने खतरनाक होंगे? ये नए हवाई बम खुद-ब-खुद टुकड़ों में बंटकर फैलेंगे. ये उच्च कैलिबर के हथियार हैं जो बहुत तेज विस्फोट पैदा करते हैं. दुश्मन के टारगेट पर भारी प्रभाव डालते हैं. ये बम रूसी और पश्चिमी दोनों तरह के विमानों पर लगाए जा सकेंगे जो भारतीय वायु सेना के पास हैं. अभी तक भारतीय वायु सेना ऐसे एमके-84 क्लास के बम विदेशी कंपनियों से खरीदती थी. अब स्वदेशी बम आने से वायु सेना को ज्यादा विश्वास होगा और लॉजिस्टिक्स भी आसान हो जाएंगे. ये बम दुश्मन के बड़े ठिकानों, पुलों, रनवे या गोदामों को एक झटके में नष्ट कर सकते हैं. दो चरणों में होगी पूरी खरीद प्रक्रिया इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे जिनमें लाइव वाले और इनर्ट यानी बिना विस्फोटक वाले दोनों तरह के बम शामिल होंगे. इनके साथ टेल यूनिट और दूसरे उपकरण भी विकसित किए जाएंगे. इस चरण में सिंगल स्टेज कंपोजिट ट्रायल्स होंगे और उसके बाद एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स यानी एएसक्यूआर की जांच की जाएगी. पहले चरण में कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी है. दूसरे चरण में योग्य कंपनियों को कमर्शियल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया जाएगा और कुल 600 बम खरीदे जाएंगे. यह खरीद बाय इंडियन-आईडीडीएम कैटेगरी में होगी जो डीएपी 2020 के हिसाब से सबसे ज्यादा स्वदेशी वाला रास्ता है. बम कब तक भारतीय वायु सेना में शामिल होंगे? पूरे प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा. ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक यह समय लगेगा. इसमें प्रोटोटाइप बनाना, यूजर ट्रायल्स करना, मूल्यांकन, कॉमर्शियल प्रोसे और अंत में कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करना शामिल है. भारतीय वायु सेना इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रही है ताकि स्वदेशी विकास हो सके. आगे चलकर बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा सके. ट्रायल्स भारत में ही आईएएफ यूनिट्स या तय जगहों पर होंगे और तय आईएएफ विमान पर ही इनकी टेस्टिंग की जाएगी. इससे लॉजिस्टिक एंड्योरेंस यानी लंबे समय तक हथियारों की सप्लाई आसान हो जाएगी. ये स्वदेशी 1000 किलो के बम भारतीय वायु सेना को भारी फायर पावर देंगे. अब वायु सेना को विदेशी बमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. भारतीय निजी कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकती हैं. विदेशी सहयोग की भी अनुमति है लेकिन शर्त यह है कि डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादातर भारत में ही हो. कंपनियों को फाइनेंशियल और टेक्निकल दोनों तरह से जांचा जाएगा. उनकी इंजीनियरिंग क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटीग्रेशन क्षमता, स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत और जरूरी स्टैंडर्ड का पालन देखा जाएगा.

12000 करोड़ का तोहफा, राजाजी नेशनल पार्क के बीच से गुजरेगा देश का आधुनिक कॉरिडोर, वन्यजीवों के लिए खास इंतजाम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने वाले हैं। इसके लिए पीएम मोदी का देहरादून दौरा प्रस्तावित है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर सिर्फ ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। अभी तक दिल्ली से देहरादून पहुंचने में करीब 6.5 घंटे लगते हैं। यह हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए देहरादून तक जाएगा। यह रूट उत्तर भारत के कई व्यस्त इलाकों को सीधे और तेज कनेक्शन देगा। हाईटेक और सुरक्षित सफर करीब 213 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं से लैस है। कारों के लिए 100 किमी/घंटा स्पीड लिमिट तय की गई है। 7 इंटरचेंज और 2 रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। 10 बड़े पुल और 14 वे-साइड सुविधाएं यात्रियों को मिलेंगी। जंगल के बीच खास इंतजाम एक्सप्रेसवे का 12 किमी लंबा हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क से होकर गुजरता है, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड रोड, हाथी अंडरपास और एनिमल क्रॉसिंग बनाई गई हैं। यह एक्सप्रेसवे हरिद्वार लिंक और चारधाम हाईवे से भी जुड़ेगा, जिससे उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान हो जाएगी। कितना खर्च, क्या फायदा करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी आएगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और साथ ही पर्यटन व स्थानीय कारोबार को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। टोल कितना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, दिल्ली से देहरादून जाने के लिए कार का एक तरफ का टोल करीब ₹675 तय किया गया है। अगर कोई यात्री 24 घंटे के भीतर वापसी करता है, तो उसे दोनों तरफ का टोल ₹1,010 देना होगा, यानी एक दिन के सफर में करीब ₹340 की बचत होगी। प्राधिकरण का अनुमान है कि इस एक्सप्रेसवे से हर साल लगभग ₹900 से ₹950 करोड़ की टोल आय होगी। इस हिसाब से करीब ₹12,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की भरपाई में लगभग 13 साल का समय लग सकता है।

RTE एक्ट पर हाई कोर्ट की टिप्पणी,सामाजिक समानता जरूरी, पर खास प्राइवेट स्कूल में दाखिले की जिद गलत

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी बच्चे के शिक्षा के अधिकार में उसके लिए कोई खास स्कूल चुनने का अधिकार शामिल नहीं है। कोर्ट का यह फैसला एक महिला की अपील पर आया, जिसमें उसने अपने बच्चे को ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत एक प्राइवेट स्कूल में दूसरी क्लास में एडमिशन दिलाने की गुहार लगाई थी। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने कहा कि शिक्षा का अधिकार एक्ट एक फायदेमंद कानून है। इसे सामाजिक समावेश के लक्ष्यों को पाने और यह पक्का करने के लिए बनाया गया था कि स्कूल एक ऐसी जगह बनें, जहां जाति, नस्ल या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। कोर्ट ने 25 मार्च को फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा के इस अधिकार को किसी खास स्कूल को चुनने के अधिकार के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट का यह फैसला एक मां की अपील पर आया था, जिसमें उसने अपने बच्चे को 2024-2025 के एकेडमिक सेशन के लिए ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत एक प्राइवेट स्कूल में दूसरी क्लास में एडमिशन दिलाने की गुहार लगाई थी। एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी अपीलकर्ता ने इससे पहले 2023-2024 के शैक्षणिक सत्र के लिए एक निजी स्कूल की पहली कक्षा में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत अपने बच्चे के दाखिले के लिए हाई कोर्ट की एकल जज की पीठ से संपर्क किया था। इस अपील में, अपीलकर्ता ने एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि चूंकि स्कूल के पास अपीलकर्ता के बच्चे को दाखिला देने से इनकार करने का कोई वैध आधार नहीं था, फिर भी संबंधित शैक्षणिक वर्ष के खत्म हो जाने के कारण कोर्ट उसके बच्चे को अगले शैक्षणिक वर्ष यानी 2024-25 में एडमिशन देने का आदेश जारी करने में असमर्थ थी। दूसरी कक्षा में प्रवेश चाहती थी महिला एकल जज ने कहा था कि इस शैक्षणिक वर्ष के लिए कक्षा एक में ईडब्ल्यूएस की जो सीटें खाली रह गई हैं, उन्हें अगले वर्ष इसी कक्षा के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। यदि कोई ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार आवेदन करना चाहता है, जिसमें अपीलकर्ता का बच्चा भी शामिल है तो ये सीटें उसके लिए उपलब्ध होंगी। लेकिन, अपीलकर्ता ने डिवीजन बेंच के सामने यह तर्क दिया कि उसके बच्चे को शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए स्कूल में कक्षा दो में प्रवेश दिया जाना चाहिए। डिवीजन बेंच का राहत देने से इनकार डिवीजन बेंच ने अपील में राहत देने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि याचिका के लंबित रहने के दौरान अंतरिम आदेश के तहत अस्थायी दाखिला या सीट आरक्षित करने का कोई आदेश न होने की स्थिति में शैक्षणिक वर्ष समाप्त होते ही स्कूल में दाखिला पाने का छात्र का अधिकार समाप्त हो गया। बेंच ने यह भी कहा कि जब स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया तो शिक्षा निदेशालय ने अपीलकर्ता के बच्चे को एक दूसरे स्कूल में समायोजित कर दिया। यह स्कूल उन पसंदीदा स्कूलों में से एक था जिन्हें अपीलकर्ता ने आवेदन पत्र भरते समय चुना था। हालांकि, कोर्ट ने यह नोट किया कि अपीलकर्ता ने दूसरे स्कूल को स्वीकार नहीं किया। लॉटरी ड्रॉ के दौरान चुना गया नाम अपीलकर्ता ने बताया कि मार्च 2023 में शिक्षा निदेशालय द्वारा किए गए लॉटरी ड्रॉ के दौरान उनके बच्चे का नाम एक प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए चुना गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्कूल गईं तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। बताया गया कि उन्हें आगे की जानकारी दी जाएगी। वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया कोर्ट को बताया गया कि बाद में अपीलकर्ता को सूचित किया गया कि ईडब्ल्यूएस बच्चों को तब तक एडमिशन नहीं दिया जा सकता, जब तक कि जनरल कैटेगरी की सभी सीटें भर न जाएं। इसलिए उनके बच्चे को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। इसलिए, उसने एक रिट याचिका दायर की, जिसमें स्कूल को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वह शिक्षा निदेशालय द्वारा लॉटरी के माध्यम से चुनी गई उम्मीदवारों की सूची के आधार पर प्रवेश दे। नगर निगम स्कूल में प्रवेश देने की पेशकश अपील की सुनवाई के दौरान, शिक्षा निदेशालय के वकील ने अपीलकर्ता के बच्चे को किसी भी नगर निगम स्कूल में प्रवेश देने की पेशकश की। अपीलकर्ता के वकील ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता आवंटित स्कूल के अलावा किसी अन्य संस्थान में प्रवेश स्वीकार करने को तैयार नहीं है, क्योंकि उनकी ओर से कोई गलती न होने के बावजूद उनके बच्चे को प्रवेश देने से मना कर दिया गया था।

खाड़ी में गहराया ऊर्जा संकट,कुवैत के तेल मंत्रालय और रिफाइनरी पर हमला, वैश्विक सप्लाई पर खतरे के बादल

कुवैत   मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब और खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है. कुवैत में एक के बाद एक ड्रोन हमलों ने हालात को गंभीर बना दिया है. ताजा हमलों में तेल सेक्टर, पावर प्लांट और सरकारी इमारतों तक को निशाना बनाया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. रविवार सुबह सबसे बड़ा हमला कुवैत के शुवैख इलाके में हुआ, जहां कुवैत पेट्रोलियम कोऑपरेशन के ऑयल कॉम्प्लेक्स में आग लग गई. इस कॉम्प्लेक्स में कुवैत का तेल मंत्रालय और कंपनी का मुख्यालय भी स्थित है. ड्रोन हमले के बाद पूरे परिसर को तुरंत खाली करा लिया गया. राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई. इसके अलावा, एक और ड्रोन हमले में सरकारी मंत्रालयों के ऑफिस कॉम्प्लेक्स को भी निशाना बनाया गया. इस हमले में इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है. ऊर्जा सेक्टर पर हमले का असर और भी गंभीर रहा. पॉवर-डीसैलिनेशन प्लांट्स पर भी हमले कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय के मुताबिक, दो बड़े पावर और वॉटर डीसैलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाया गया. इन हमलों के बाद दो बिजली उत्पादन यूनिट्स को बंद करना पड़ा, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार ने इमरजेंसी प्लान लागू कर दिए हैं ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो. इसी बीच खाड़ी के एक और देश बहरीन में भी हमला हुआ. वहां एक स्टोरेज फैसिलिटी में आग लग गई, जिसे बाद में काबू कर लिया गया. इस हमले में भी कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन नुकसान का आकलन किया जा रहा है. कुवैत के कई तेल रिफाइनरी पर हमले कुवैत पहले भी इस जंग का असर झेल चुका है. यहां की बड़ी रिफाइनरी मीना अल-अहमदी रिफाइनरी और मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर पहले भी ड्रोन हमले हो चुके हैं. कई बार ये हमले एक साथ कई जगहों पर किए गए, जिससे ऑपरेशनल यूनिट्स को भारी नुकसान हुआ. इन लगातार हमलों का असर सिर्फ कुवैत तक सीमित नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खाड़ी के ऊर्जा ढांचे पर इसी तरह हमले जारी रहे, तो वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ेगा. कुवैत, जो OPEC के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है, पहले रोजाना करीब 2.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता था. लेकिन जंग और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं की वजह से अब उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, इस हमले को लेकर ईरान की तरफ से खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बड़ी कूटनीति, खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया के बंदरगाहों पर दी दस्तक

नई दिल्ली भारतीय नौसेना ने दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूती से पेश किया है. इस दौरान भारतीय युद्धपोतों ने खाड़ी देशों, लाल सागर, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य हिंद महासागर के विभिन्न देशों में 'ओवरसीज पोर्ट कॉल्स' यानी विदेशी बंदरगाहों का दौरा किया है. ये ऑपरेशन नौसैनिक कूटनीति की कोशिशों को बेहतर करने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए गए थे. नौसेना के विभिन्न जहाजों ने फ्रांस से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया तक अपनी पहुंच बनाई. खुले स्रोतों और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के आधार पर तैयार ये ब्योरा भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति बनाए रखने की महत्वाकांक्षा को दिखाता है. गल्फ-रेड सी क्षेत्र रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के बीच भारतीय जहाजों ने खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण दौरे किए. आईएनएस सुदर्शन ने मार्च 2026 में फ्रांस और फरवरी 2026 में ओमान का दौरा किया. वहीं, आईएनएस त्रिकंड मार्च 2026 में तंजानिया और मोजाम्बिक के बंदरगाहों पर पहुंचा. तलवार क्लास के जहाजों ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान जिबूती और ओमान में उपस्थिति दर्ज कराई. इसके अलावा आईसीजीएस सार्थक ने दिसंबर 2025 में कुवैत, सऊदी अरब और ईरान के बंदरगाहों पर पोर्ट कॉल किए जो इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते सुरक्षा हितों को रेखांकित करता है. दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय नौसेना वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री रास्तों पर भी भारतीय नौसेना की सक्रियता काफी ज्यादा रही. दिसंबर 2025 में आईसीजीएस विग्रह ने मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया. जनवरी 2026 में आईएनएस शार्दुल और आईएनएस तीर सिंगापुर पहुंचे, जबकि आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी ने इंडोनेशिया और थाईलैंड के बंदरगाहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ये पोर्ट कॉल्स न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण 'सी-लेन' (Sea Lanes) की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाते हैं. हिंद महासागर से ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच उधर, भारत ने मध्य हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में भी भारतीय नौसेना ने अपनी कूटनीति जारी रखी. आईएनएस शारदा और आईएनएस सागरध्वनि ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में मालदीव का दौरा किया. इसी दौरान आईएनएस सुनयना और संकल्प मॉरीशस पहुंचे. आईएनएस त्रिकंड और संकल्प ने मार्च 2026 तक सेशेल्स में अपनी उपस्थिति बनाए रखी. सबसे महत्वपूर्ण तैनाती मार्च 2026 में आईएनएस नीलगिरी की रही, जिसने ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाह पर पोर्ट कॉल किया. ये व्यापक विस्तार भारत की वैश्विक समुद्री भूमिका और सुरक्षा नेटवर्क को और ज्यादा प्रभावी बनाते हैं.  

सीक्रेट मिशन,24 घंटे तक दुश्मन की जमीन पर पिस्तौल लेकर छिपा रहा अमेरिकी जांबाज, सैकड़ों सैनिकों ने बचाई जान

वॉशिंगटन अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ने शनिवार की रात एक जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन में ईरान में फंसे अपने एक लापता एयरफोर्स ऑफिसर को ईरान में घुसकर रेस्क्यू कर लिया.  इस मिशन के दौरान रेस्क्यू टीम का कोई भी सदस्य हताहत नहीं हुआ और घायल ऑफिसर को इलाज के लिए सीधे कुवैत भेज दिया गया है. दरअसल, शुक्रवार को ईरान ने अमेरिका के F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया था. जेट गिरने के बाद दोनों क्रू मेंबर्स ने इजेक्ट कर लिया था. पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स ऑफिसर दुश्मन के इलाके में फंस गया और लगभग एक दिन तक सिर्फ एक पिस्तौल के साथ छिपा रहा. जबकि ईरानी सेना ने उसे ढूंढने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी और स्थानीय लोगों को इनाम का लालच भी दिया था. हालांकि, जिस इलाके में F-15E जेट गिरा वहां सरकार के खिलाफ काफी विरोध है, इसी वजह से ऑफिसर को छिपने में मदद मिली. उधर, ईरान में फंसे ऑफिसर तक पहुंचने के लिए अमेरिकी सेना का अधिकारियों में होड़ लगी थी, जिसमें अंततः सैकड़ों अमेरिकी कमांडो ने बाजी मार ली. 'कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद…' न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस ट्रूप्स शामिल थे. साथ में दर्जनों अमेरिकी युद्ध विमान, हेलिकॉप्टर, साइबर, स्पेस और अन्य इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में फंसे अमेरिकी ऑफिसर एक बीकन और सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद से रेस्क्यू टीम के संपर्क में था. जब अमेरिकी कमांडो ऑफिसर के करीब पहुंचे तो वहां जबरदस्त गोलीबारी शुरू हो गई. अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ऑफिसर की लोकेशन के पास बढ़ रहे ईरानी काफिलों पर बमबारी की, ताकि उन्हें दूर रखा जा सके. इस मिशन में दर्जनों युद्धक विमानों, हेलीकॉप्टरों और साइबर व इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. सीआईए ने भी 'अनकन्वेंशनल असिस्टेड रिकवरी' के जरिए नागरिकों से संपर्क साधने में अहम भूमिका निभाई. 'बेस में फंसे अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान' रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इस ऑपरेशन के आखिरी पलों में रेस्क्यू टीम को एक तकनीकी दिक्कत का भी सामने करना पड़ा, जब कमांडो और ऑफिसर को ले जाने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक रिमोट बेस पर फंस गए. कमांडरों ने तुरंत फैसला लेते हुए तीन नए विमान वहां भेजे. पुराने दोनों खराब विमानों को बम से उड़ा दिया गया, ताकि वो ईरान के हाथ न लग सकें. इसके बाद सभी सैन्य कर्मियों और बचाए गए ऑफिसर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने इस रेस्क्यू को इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण और जटिल ऑपरेशंस में से एक बताया है. सैकड़ों सैनिकों की भागीदारी और दुश्मन की जमीन पर इस तरह की कार्रवाई ने अमेरिकी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है. फिलहाल घायल ऑफिसर की हालत स्थिर है और वह कुवैत में विशेषज्ञों की निगरानी में है. इस सफल मिशन ने अमेरिकी खेमे में नई ऊर्जा भर दी है.

ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की तैयारी, अमेरिका ने खाली किए अपने मिसाइल भंडार, नर्क का द्वार खुलने की चेतावनी

वॉशिंगटन  ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के अगले चरण मे JASSM-ER क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन मिसाइलों की युद्धक्षेत्र में तैनाती चल रही है। इन मिसाइलों को उन भंडारों से निकाला जा रहा है जिन्हें दूसरे क्षेत्रों के लिए रखे गए थे। इन मिसाइलों की तैनाती उस वक्त हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और युद्धविराम पर सहमति नहीं बनने पर 'पाषाण युग' में पहुंचाने की धमकी दी है। ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका को 'नर्क का दरवाजा' खोलने की धमकी दी है। इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्रशांत क्षेत्र के भंडारों से 1.5 मिलियन डॉलर की इस मिसाइल को निकालने का आदेश मार्च के आखिर में जारी किया गया था। उस व्यक्ति ने बताया कि अमेरिका के अन्य ठिकानों (जिनमें मुख्य अमेरिकी भूभाग भी शामिल है) पर मौजूद मिसाइलों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ठिकानों या UK के फेयरफोर्ड में भेजा जाएगा। संवेदनशील जानकारियों पर चर्चा करने के लिए उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका की सबसे घातक मिसाइल हालांकि अमेरिका के सामने दिक्कत ये है कि भंडार से इन मिसाइलों के निकाले जाने के बाद युद्ध से पहले के 2300 मिसाइलों के भंडार में से बाकी दुनिया के लिए सिर्फ 425 JASSM-ER मिसाइलें ही उपलब्ध रह जाएंगी। यह संख्या लगभग 17 B-1B बमवर्षक विमानों के एक ही मिशन के लिए काफी होगी। इसके अलावा लगभग 75 अन्य मिसाइलें क्षतिग्रस्त होने या तकनीकी खराबी के कारण "इस्तेमाल के लायक नहीं" हैं। JASSM-ER, जिसका पूरा नाम 'जॉइंट एयर-टू-सरफेस मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज' है उसकी रेंज 600 किलोमीटर से ज्यादा है और इस मिसाइल की क्षमता ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में तबाही मचाने की है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन की हवाई सुरक्षा से बचते हुए सुरक्षित दूरी से ही अपने लक्ष्यों को भेद सके। हालांकि इसका मतलब ये भी हो सकता है कि जिस तरह से ईरान ने अब अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मारना शुरू किया है उसे देखते हुए शायद अब ईरान के एयर डिफेंस क्षेत्र में आए बगैर उसके ठिकानों पर हमला करना हो सकता है। दो तिहाई हिस्से का ईरान युद्ध में होगा इस्तेमाल उस व्यक्ति ने ये भी बताया कि कम दूरी वाली JASSM मिसाइल के साथ-साथ जिसकी मारक क्षमता लगभग 250 मील है, अमेरिका के लगभग दो-तिहाई जखीरे को ईरान युद्ध के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। लेकिन अमेरिका और इजरायल के मिसाइल भंडार में कमी आने की कई रिपोर्ट्स आई हैं। अमेरिका में मिसाइल इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के मारक हथियारों की आपूर्ति एक अहम मुद्दा बनी हुई है। इस्तेमाल हो चुके हथियारों की भरपाई करने में मौजूदा उत्पादन दर के हिसाब से कई साल लग जाएंगे। अमेरिका अगर हमलों के लिए JASSM-ER जैसे लंबी दूरी के हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है, तो इससे उसके सैनिकों को होने वाला खतरा तो कम हो जाता है लेकिन चीन जैसे अधिक सक्षम प्रतिद्वंद्वियों के लिए रखे गए हथियारों के जखीरे में कमी आ जाती है। ऐसी स्थिति में ताइवान पर जब चीन हमला करेगा तो अमेरिका के पास गाल बजाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहेगा।

पश्चिम एशिया संघर्ष और ईंधन संकट पर जयशंकर की दोटूक, चुनौतियों को भारत ने सफलतापूर्वक संभाला

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके आर्थिक असर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने हाल के वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना किया है। एस. जयशंकर ने शनिवार को आईआईएम रायपुर के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा कि बढ़ते वैश्विक तनाव के माहौल के बावजूद भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की चुनौतियों को 'काफी हद तक सफलतापूर्वक' संभाला है। भारत वैश्विक झटकों से मजबूती से बाहर निकला उन्होंने कहा कि अब किसी भी क्षेत्र में होने वाले संघर्ष का असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्वीकरण के कारण उसका प्रभाव दुनिया के अन्य हिस्सों में भी महसूस किया जाता है। उन्होंने कहा, इसमें कोई शक नहीं है कि हाल के समय में कई वैश्विक झटकों ने हमारी मजबूती की परीक्षा ली है और भारत इनसे मजबूती के साथ बाहर निकला है। ' पश्चिम एशिया संघर्ष से हाइड्रोकार्बन में आई कमी' विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट वैश्विक ईंधन सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है और इससे हाइड्रोकार्बन की कमी भी देखी जा रही है। जयशंकर ने कहा कि मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करना जोखिम को कम करने और रणनीतिक ताकत बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है।     उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर भी इशारा किया, जहां ताकत और प्रभाव का संतुलन लगातार बदल रहा है, और कहा कि मौजूदा अस्थिरता संरचनात्मक है     उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, कनेक्टिविटी और संसाधनों में तेजी से हो रहे बदलावों ने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है।     जयशंकर कहा कि आज हर चीज का इस्तेमाल रणनीतिक रूप से किया जा रहा है, और कई मामलों में इसे हथियार की तरह भी इस्तेमाल किया जा रहा है।     विदेश मंत्री ने कहा, इस वजह से अब देशों और आर्थिक नीतियों में जोखिम कम करने, विविधता बढ़ाने और मजबूती पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। जयशंकर ने कोविड-19 महामारी, जारी युद्ध और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की सबसे बड़ी चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, प्रतिनिधित्व वाली राजनीति और मजबूत नेतृत्व इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। अभिषेक पाण्डेय

मिसाइल संकट के बीच ईरान की कार्रवाई, अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू मिशन में लगे विमान और हेलीकॉप्टर तबाह

 नई दिल्ली  ईरान ने अमेरिके F-15 और A-10 फाइटर जेट मार गिराने के बाद लड़ाकू विमान C-130 पर हमले का दावा किया है। फार्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नष्ट किया गया विमान C-130 श्रेणी का एक मालवाहक विमान था, जिसे ईरान की विशेष पुलिस कमांडो यूनिट फराज रेंजर्स ने निशाना बनाया। दरअसल, ईरान ने बीते दिनों अमेरिका का के F-15 फाइटर जेट मार गिराया। इस दौरान इसमें सवार एक पायलट सुरक्षित बच गया, जबकि दूसरा लापता हो गया था। जिसे आज अमेरिकी सैनिकों ने बचाव अभियान के दौरान खोज निकालने की खबर सामने आई है। C-130 को मार गिराने का दावा ईरान का दावा है कि उसने इस्फहान में अमेरिकी विमान C-130 को मार गिराया। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह विमान पायलट को बचाने वाले मिशन में शामिल था। इससे पहले अमेरिका इस मिशन में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों के नष्ट होने की पुष्टि कर चुका है लेकिन C-130 के बारे में अमेरिका की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान की पुलिस कमांड ने घोषणा की कि इस्फहान के दक्षिण में एक अमेरिकी C-130 विमान को मार गिराया गया है। समूह ने कहा, "एक संयुक्त अभियान (एयरोस्पेस, थल सेना, लोकप्रिय इकाइयां, बासिज और पुलिस कमांड) के दौरान, दुश्मन की उड़ने वाली चीजों को नष्ट कर दिया गया।" तसनीम समाचार एजेंसी ने प्रांतीय अधिकारी इराज काजेमीजू के हवाले से बताया कि दक्षिण-पश्चिमी कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कोह-ए सियाह इलाके में कल रात हुए हमले में पांच लोग मारे गए। इजरायली ड्रोन को भी मार गिराने का दावा ईरानी सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान, खातम अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि मार गिराए गए विमानों में एक C-130 सैन्य परिवहन विमान और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर शामिल थे। इससे पहले रविवार को, ईरान की सेना ने भी कहा था कि उन्होंने उसी प्रांत में एक इजरायली ड्रोन को मार गिराया है। (समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

चुनावी समर में बीफ और डीपफेक विवाद की एंट्री, कुंकी चौधरी ने सीएम सरमा के दावों को बताया मनगढ़ंत

असम असम विधानसभा चुनाव में सबसे कम उम्र की प्रत्याशी कुंकी चौधरी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। सीएम सरमा ने असम जातीय परिषद (AJP) की उम्मीदवार कुंकी चौधरी की मां पर बीफ खाने और फिर सोशल मीडिया पर इसका दिखावा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कुंकी चौधरी की मां ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान और बीफ खाने के पोस्ट शेयर किए थे। इसके बाद कुंकी चौधरी ने भी तस्वीरों को गलत बताते हुए पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवाई है। सीएम सरमा ने कहा था कि कुंकी चौधरी औ उनकी मां सनातनी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा, ''प्रसारित की जा रही सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता/डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके रूपांतरित और मनगढ़ंत बनाया गया है… इन वीडियो को संभवतः जनता में गलतफहमी पैदा करने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है।'' उन्होंने पुलिस से मामले को अत्यावश्यक मानते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। संपर्क करने पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वे शिकायत की जांच कर रहे हैं और आरोपों को लेकर छानबीन शुरू कर दी गई है। शिकायत दर्ज कराने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कुंकी ने आरोप लगाया कि फर्जी वीडियो अपलोड करने वाले कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सत्ताधारी भाजपा से जुड़े हैं और मुख्यमंत्री शर्मा के करीबी हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे समझ नहीं आता कि भाजपा मेरे खिलाफ इतना घटिया रवैया क्यों अपना रही है। मैं राजनीति में अभी नयी हूं और वे मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं।' कौन हैं कुंकी चौधरी यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से परास्नातक डिग्री प्राप्त 27 वर्षीय कुंकी गुवाहाटी मध्य निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता से है। वह गुवाहाटी की रहने वाली हैं और असम में शिक्षा को लेकर कई ट्रस्ट और संस्थाएं चला रही हैं। मुख्यमंत्री शर्मा द्वारा उनकी मां पर लगाए गए आरोपों के बाद, कुंकी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने देश में उन्हें घर-घर में मशहूर करने के लिए शर्मा को धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था, ''माननीय मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे पता चला है कि मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने मेरी मां पर कुछ आरोप लगाए हैं, जो पूरी तरह से झूठे हैं।''(भाषा से इनपुट्स के साथ)