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वाई पूरण कुमार के निधन के बाद पोस्टमार्टम, अंतिम संस्कार में सुरक्षा बढ़ाई गई

चंडीगढ़ हरियाणा के एडीजीपी वाई पूरण कुमार के शव का पोस्टमार्टम किया गया। एसएसपी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर वाई पूरण कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार को सेक्टर 24 स्थित आवास से पीजीआई लेकर पहुंचीं। इस दौरान अमनीत पी कुमार की तरफ से कहा गया कि यूटी पुलिस द्वारा निष्पक्ष, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के आश्वासन और हरियाणा सरकार द्वारा आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने पति के शव का पोस्टमार्टम कराने की सहमति दी है।   बता दें कि समय पर पोस्टमार्टम के साक्ष्यगत महत्व और न्याय के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, गठित डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा, एक बैलिस्टिक विशेषज्ञ की उपस्थिति में, एक मजिस्ट्रेट की देखरेख में, और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी के साथ कराने पर सहमति व्यक्त की। अमनीत पी कुमार ने कहा कि मुझे न्यायपालिका और पुलिस अधिकारियों पर पूरा भरोसा है, और मुझे पूरी उम्मीद है कि जांच पेशेवर, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से की जाएगी, ताकि कानून के अनुसार सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि जांच दल को मेरा पूरा सहयोग मिलता रहेगा ताकि प्रक्रिया में तेजी आए और जल्द से जल्द न्याय मिले। जांच जारी रहने के मद्देनजर, इस समय कोई और सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया जाएगा और मैं मीडिया से अनुरोध करती हूं कि वे मामले की संवेदनशीलता का सम्मान करें। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शाम चार बजे अंतिम संस्कार का समय तय किया गया है। इसके लिए सेक्टर 25 शमशान घाट में भी पुलिस सुरक्षा लगा दी गई है। एडीजीपी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले की जांच के लिए 10 अक्टूबर को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन कमेटी (एसआईटी) का गठन किया गया था। चंडीगढ़ के आईजी पुष्पेंद्र कुमार की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टीम गठित की गई थी।  

संघर्ष के बीच गाज़ा में 8 नागरिकों की हत्या, हमास पर गंभीर आरोप

गाजा गाजा शांति प्रस्ताव मिस्र की धरती पर पारित हो गया है। इसमें अमेरिका, तुर्की और मिस्र और कतर शामिल थे। इसके अलावा अन्य कई देशों ने सहमति जताई और इजरायल भी राजी है। सीजफायर का ऐलान हो चुका है और हमास ने हथियार छोड़न पर सहमति जताई है। फिर भी जमीन पर ऐसा होता नहीं दिख रहा है। हमास का एक नया वीडियो सामने आया है, जो सोमवार की शाम का बताया जा रहा है। इसमें दिखता है कि हमास के हथियारबंद कमांडर 8 लोगों को घुटनों पर बिठाकर गोली मार देते हैं। इन लोगों के हाथ बंधे होते हैं और उनकी आंखों पर भी पट्टी बांध दी जाती है। इसके बाद उन्हें घुटनों पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता है। फिर उनके सिरों में गोलियां मार दी जाती हैं। गोलियों की इन तड़तड़ाहट के बीच भीड़ की ओर से अल्लाह हू अकबर के नारे लगते सुने जा रहे हैं। इस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसे शेयर करना भी मुश्किल है। कहा जा रहा है कि इन लोगों पर हमास के लड़ाकों ने आरोप लगाया कि वे हमास से मिले हुए हैं। यह कार्रवाई हमास ने गाजा पर अपना कब्जा मजबूत करने के लिए की है। यदि ऐसा है तो यह शर्त का खुला उल्लंघन है और इजरायल के लिए भी चुनौती बढ़ाने वाला है। इजरायल ने पहले कहा था कि सीजफायर की यह शर्त होगी कि हमास हथियार छोड़ दे या फिर गाजा से निकल जाए। फिलहाल वह दोनों में से किसी भी स्थिति पर काम करता नहीं दिख रहा है। वायरल फुटेज में दिखता है कि मारे गए लोगों को सड़क पर घुटनों के बल बिठाया जाता है। इसके बाद उनकी जमकर पिटाई की जाती है और फिर सभी के सिर पर गोलियां मारकर कत्ल कर दिया जाता है। यह बेहद ही खूंखार तरीका इस्लामिक स्टेट से मिलता जुलता है। वह भी इसी तरह से कत्ल को अंजाम दिया करता था। वीडियो में दिखता है कि हमास के कमांडरों ने हरे रंग का स्कार्फ पहना हुआ है, जो हमास से जुड़ा हुआ है। इस दौरान भीड़ अल्लाह हू अकबर के नारे लगाती रहती है। हमास ने एक बयान में कहा है कि मारे गए लोग अपराधी थे और इजरायल के साथ मिले थे। हालांकि इसके बारे में उनकी ओर से कोई सबूत नहीं दिया गया है।  

सीमा पर जंग के हालात! पाक-अफगान सेनाओं के बीच जमकर हुई फायरिंग

अफगानिस्तान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सैनिकों के बीच मंगलवार को सुदूर उत्तर-पश्चिमी सीमा क्षेत्र में झड़पें हुईं। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया ने अपनी खबर में अफगानिस्तान के सैनिकों पर ‘‘बिना उकसावे के गोलीबारी'' करने का आरोप लगाया और कहा कि गोलीबारी के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। ‘पाकिस्तान टीवी' में प्रसारित खबर और दो सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की जिससे अफगान टैंकों और सैन्य चौकियों को नुकसान पहुंचा। अफगनिस्तान के खोस्त प्रांत के पुलिस उप प्रवक्ता ताहिर अहरार ने झड़पों की पुष्टि की लेकिन कोई और जानकारी नहीं दी। इस सप्ताह दोनों ओर से गोलीबारी की यह दूसरी घटना है। पाकिस्तान की सरकारी मीडिया के अनुसार अफगानिस्तान की सेना और पाकिस्तानी तालिबान ने संयुक्त रूप से ‘‘बिना उकसावे के'' एक पाकिस्तानी चौकी पर गोलीबारी की जिसके बाद खैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कुर्रम ज़िले में पाकिस्तानी सैनिकों ने करार जवाब दिया। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी तालिबान के एक विशाल प्रशिक्षण केंद्र को भी नष्ट कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने फिलहाल इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है। शनिवार को दोनों पक्षों के बीच कई सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलीबारी हुई थी जिससे दोनों पक्षों के दर्जनों लोग हताहत हुए थे। इसके बाद से ही सेना अलर्ट पर है। हालांकि सऊदी अरब और कतर की अपील के बाद रविवार को झड़पें रुक गईं थीं लेकिन पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सभी सीमाएं बंद हैं।  

सोशल मीडिया निगरानी बढ़ी: चुनाव आयोग ने सियासी विज्ञापनों व प्रत्याशियों के खातों के लिए दिए निर्देश

 नई दिल्ली चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और जम्मू-कश्मीर समेत छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसी बीच आयोग ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर 2025 को आदेश दिए हैं कि सभी राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दल, साथ ही चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशी, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रचार करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से अपने राजनीतिक विज्ञापनों का पूर्व-सत्यापन कराएं। विज्ञापन और सोशल खातों का पूर्व-सत्यापन चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, किसी भी राजनीतिक विज्ञापन को इंटरनेट या सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले एमसीएमसी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बता दें कि, सभी राज्य और जिले में एमसीएमसी बनाई गई है जो विज्ञापनों की जांच करेगी और दिशानिर्देशों के अनुसार पूर्व-सत्यापन करेगी। भ्रामक समाचार पर निगरानी मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी संदिग्ध मामलों जैसे 'पेड न्यूज' पर भी कड़ी नजर रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी। वहीं चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी नामांकन दाखिल करते समय चुनाव आयोग को देना होगा। चुनावी खर्च का विवरण भी साझा करना अनिवार्य इसके साथ ही चुनावी खर्च का विवरण भी साझा किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया और इंटरनेट प्रचार पर हुए खर्च का विवरण चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के अंदर देना होगा। इसमें इंटरनेट कंपनियों को भुगतान, विज्ञापन सामग्री तैयार करने का खर्च और सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन का खर्च शामिल होगा। कुल मिलाकर चुनाव आयोग का यह कदम डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आयोग का उद्देश्य है कि राजनीतिक प्रचार ईमानदारी और नियमों के अनुरूप हो।

PAK सेना ने 15 मिनट की मुठभेड़ में टेके घुटने, तालिबान हथियार ले उड़े

काबुल  तालिबानी लड़ाके और पाकिस्तानी की सेनाओं के बीच एक बार फिर से भीषण जंग हो रही है. दोनों सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित स्पिन बोल्डक में लड़ाई लड़ रही हैं. आज सुबह लगभग 4 बजे स्पिन बोल्डक क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच भारी लड़ाई शुरू हो गई. सोशल मीडिया पर जारी किए गए बॉर्डर में स्पिन बोल्डक-चमन सीमा का क्रॉसिंग दिखाई दे रहा है. स्पिन बोल्डक अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित है. यह उत्तर में कंधार शहर और दक्षिण में पाकिस्तान के चमन और क्वेटा शहर से एक राजमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. पश्चिमी-चमन सीमा क्रॉसिंग शहर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है.  अफ़गान तालिबान का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिकों के साथ भिडंत के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों को सरेंडर के लिए मजबूर कर दिया और उनके हथियार ज़ब्त कर लिए गए.  एक और वीडियो में दिखाया गया है कि लड़ाई के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों के हथियार जब्त कर लिए. स्पिन बोल्डक जिले के सूचना प्रमुख अली मोहम्मद हकमल ने टोलो न्यूज़ को बताया कि जारी लड़ाई में हल्के और भारी दोनों तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी तोपखाने की गोलाबारी से आम लोगों के घर तबाह हो गए हैं, जिससे कई निवासियों को इलाक़े से भागना पड़ा है.  अफगानिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े कबीर हकमाल ने कहा है कि, 'स्पिन बोल्डक क्षेत्र में तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच भीषण झड़पें हुई हैं. कई सूत्रों ने हताहतों की पुष्टि की है और बताया है कि कई स्थानीय घर नष्ट हो गए हैं. पाकिस्तानी सेना कथित तौर पर डूरंड रेखा से सटे इलाकों को निशाना बनाने के लिए भारी हथियारों और हवाई शक्ति का इस्तेमाल कर रही है. दोनों पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.' AFGEYE नाम की न्यूज एजेंसी ने कहा है कि कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक गेट पर आज तड़के अफगान सुरक्षा बलों और पाकिस्तानियों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गईं. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. एक दूसरे यूजर ने लिखा है कि अफगान सेना ने स्पिन बोल्डक में डूरंड रेखा पर पाकिस्तान की चौकियों को नष्ट कर दिया है और दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों को ज़िंदा पकड़ लिया है. उन्होंने बड़ी संख्या में हल्के और भारी हथियारों के साथ-साथ टैंक भी ज़ब्त कर लिए हैं और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में स्थानांतरित कर दिया है. पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया टकराव  11-12 अक्टूबर की रात को अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला बोला. तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 25 चौकियां कब्जे में लीं, जबकि पाकिस्तान के अनुसार 23 उसके सैनिक मारे गए और 200 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए.  यह लड़ाई डुरंड लाइन के आस-पास हो रही है. ये वो जगह है जहां पर पाकिस्तान अफगानिस्तान पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को पनाह देने का आरोप लगाता है. पाकिस्तान टीटीपी पर अपने यहां हमलों का आरोप लगाता रहता है.  जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने कंधार और हेलमंद में ड्रोन हमले किए. तनाव के बीच दोनों देशों ने सीमा बंद कर दी है जिससे व्यापार ठप हो गया और हजारों वाहन फंस गए हैं. 

MP में बच्चों की मौत से जुड़ा कोल्ड्रिफ, भारत में तीन कफ सिरप के इस्तेमाल पर अलर्ट

नई दिल्ली विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत के कई राज्यों में प्रतिबंधित तीन ब्रांड के जहरीले कफ सिरप के बारे में स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। संगठन ने अधिकारियों से आग्रह किया कि तीनों प्रतिबंधित सिरप में से किसी के मिलने पर एजेंसी को सूचित करें। डब्ल्यूएचओ के परामर्श में उस संदिग्ध कोल्ड्रिफ कफ सिरप का भी जिक्र है, जिसे लेने से कथित तौर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की जान गई।   स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि प्रभावित दवाइयां कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश टीआर और रिलाइफ के विशिष्ट बैच का निर्माण क्रमशः श्रीसन फार्मास्युटिकल्स, रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स और शेप फार्मा करती है। ये जहरीले कफ सिरप संभावित रूप से जानलेवा बीमारी का भी कारण बन सकते हैं। भारत के स्वास्थ्य प्राधिकरण, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने डब्ल्यूएचओ को बताया कि पिछले हफ्ते भारत में 5 साल से कम उम्र के 17 बच्चों की ये सिरप पीने से मौत हो गई थी। सीडीएससीओ ने कहा कि इनमें से कोई भी दूषित दवा भारत से निर्यात नहीं की गई है और अवैध निर्यात का कोई सबूत नहीं है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह सिरप भारत में जोखिम भरे हैं और इनसे गंभीर-जान पर खतरा पैदा करने वाली बीमारी हो सकती हैं। सिरप में पाया गया था डायथिलीन ग्लाइकॉल गौरतलब है कि दूषित दवा के प्रयोगशाला परीक्षणों में डायथिलीन ग्लाइकॉल के मिलावट की पुष्टि हुई थी जो एक जहरीला रसायन है और बड़े पैमाने पर विषाक्तता की घटनाओं से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक डीके मौर्य ने बताया था कि इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48% से ज्यादा पाई गई, जबकि स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है। यह मात्रा बेहद खतरनाक है। कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली कंपनी पर लग गया ताला? कई राज्यों ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने अब तमिलनाडु में मिलावटी कफ सिरप कोल्ड्रिफ बनाने वाली श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी का न सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया है साथ ही कंपनी को बंद करने का आदेश भी दिया गया है। इसस पहले कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को मध्य प्रदेश के एक विशेष जांच दल ने गिरफ्तार भी किया था। प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के एक मामले में श्रीसन फार्मास्युटिकल्स और उसके कुछ अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी भी की है।  

RBI ने दी डिजिटल पेमेंट्स को नई दिशा, छोटे लेन-देन के नियमों में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश के प्रमुख बैंकों ने RBI के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वे ₹100 से कम के छोटे डिजिटल लेन-देन पर SMS अलर्ट भेजना बंद करना चाहते हैं। बैंक इसके लिए RBI की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि UPI और अन्य डिजिटल तरीकों से होने वाले छोटे लेन-देन में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण ग्राहकों को लगातार SMS अलर्ट मिल रहे हैं, जिससे उन्हें Notification Fatigue हो रही है। लगातार अलर्ट आने से ग्राहक महत्वपूर्ण और बड़े लेन-देन के अलर्ट को भी नजरअंदाज करने लगे हैं, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है। नए प्रस्ताव के तहत ग्राहकों को केवल बड़े या एक निर्धारित संख्या/मूल्य से अधिक के लेन-देन के लिए ही SMS अलर्ट भेजे जाएंगे। जानकार सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव पिछले महीने सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के आंतरिक विचार-विमर्श के बाद RBI को भेजा गया है। बैंकों ने इसके साथ ही धोखाधड़ी की आशंका को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों की एक सूची भी प्रस्तुत की है। ग्राहकों को मिलेगा ऑप्शन वर्तमान में RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को ग्राहकों को SMS अलर्ट देना जरुरी है। नए प्रस्ताव में ग्राहक को यह ऑप्शन दिया जाएगा कि वे ₹100 से कम के लेन-देन के लिए SMS अलर्ट बंद करना चाहते हैं या नहीं। जिन ग्राहकों को अलर्ट की जरूरत होगी, वे ऐप नोटिफिकेशन या ईमेल अलर्ट के जरिए से अलर्ट प्राप्त करना जारी रख सकते हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि एक SMS भेजने पर लगभग ₹0.20 की लागत आती है, जो ग्राहक से वसूली जाती है। बैंकों का मानना है कि इस बदलाव से तकनीक का बेहतर उपयोग होगा और ग्राहकों को वास्तविक उपयोग के अनुसार ही शुल्क लिया जाना चाहिए।

21वीं किस्त से जुड़ी अहम खबर: जानिए, क्या पति और पत्नी दोनों ले सकते हैं इस योजना का लाभ?

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम किसान सम्मान स्कीम साल 2019 में शुरू की थी। इस योजना के तहत सरकार किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह राशि किसानों के बैंक खाते में तीन किस्तों में ट्रांसफर की जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त 2 हजार रुपये की होती है। किस्तें 4 महीने के अंतराल पर दी जाती हैं। अब तक सरकार ने इस योजना की 21 किस्तें जारी कर दी हैं। 21वीं किस्त के पैसे फिलहाल पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित लगभग 27 लाख किसानों के खातों में भेजे गए हैं। बाकी किसानों को यह किस्त कब मिलेगी, इस बारे में किसानों में उत्सुकता बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिवाली से पहले 21वीं किस्त जारी हो सकती है, लेकिन संभावना कम दिखाई दे रही है। संभव है कि यह किस्त अगले महीने जारी की जाए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस स्कीम का पति-पत्नी दोनों लाभ ले सकती हैं या नहीं? कई किसानों के मन में सवाल होता है कि अगर पति-पत्नी दोनों एक ही परिवार में आवेदन करें, तो क्या दोनों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के नियमों के अनुसार, एक परिवार में केवल एक सदस्य ही योजना का लाभ ले सकता है। यह सदस्य वही होगा जिसके नाम पर कृषि भूमि पंजीकृत है। यानी परिवार में पति और पत्नी दोनों एक साथ लाभ नहीं ले सकते, केवल भूमि के मालिक को ही राशि मिलती है। लाभ लेने के लिए जरूरी प्रक्रिया पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को e-KYC और भूलेखों का सत्यापन कराना जरूरी है। इसके बिना योजना की किस्तें खाते में ट्रांसफर नहीं की जा सकतीं। सरकार किसानों को सलाह देती है कि वे योजना में आवेदन करते समय सभी दस्तावेज सही और अपडेट रखें, ताकि आर्थिक सहायता समय पर मिल सके।

सहारा केस: सिब्बल ने जताई आपत्ति, कहा टुकड़ों में बिक्री से नुकसान; सुप्रीम कोर्ट बोले- देखेंगे!

नई दिल्ली सहारा इंडिया ग्रुप चाहता है कि उसकी प्रॉपर्टीज एक साथ बेच दी जाएं. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान Sahara India Commercial Corporation Ltd (SICCL) ने यही गुहार लगाई. ग्रुप ने विभिन्न संपत्तियों जिनमें अंबी वैली (महाराष्ट्र) और सहारा शहर (लखनऊ) जैसी हाई-वैल्यू प्रॉपर्टीज शामिल हैं, को Adani Properties Pvt Ltd को बेचने की अनुमति मांगी है. कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि किन प्रॉपर्टीज पर विवाद है और किन पर नहीं. चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने केंद्र सरकार, SEBI और अमिकस क्यूरी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी. ‘अंबी वैली’ से ‘सहारा शहर’ तक, 88 प्रॉपर्टीज की सूची, पर कई पर विवाद     सहारा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि समूह अपनी संपत्तियां बेचकर बकाया राशि चुकाने की योजना बना रहा है. उनके मुताबिक, इन संपत्तियों की वैल्यू लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये है. सिब्बल ने कहा, ‘इनमें 88 प्रॉपर्टीज शामिल हैं. इन्हें एक साथ बेचना जरूरी है. टुकड़ों में बेचने से खरीदार नहीं मिलेंगे.’     SEBI की ओर से कहा गया कि सहारा इन प्रॉपर्टीज को बेच सकता है, बशर्ते बिक्री मार्केट रेट के 90% से कम पर न हो. SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट अनुमति देती है, तो उन्हें किसी प्रस्ताव की अलग से जांच करने की आवश्यकता नहीं.     वहीं, एडवोकेट मुकुल रोहतगी, जो Adani Properties Pvt Ltd की ओर से पेश हुए, ने कहा कि कंपनी सभी प्रॉपर्टीज खरीदने को तैयार है. उन्होंने कहा, ‘अगर इसे हिस्सों में बेचा गया तो मुकदमेबाजी कभी खत्म नहीं होगी. हम सब कुछ, सभी क्लेम्स के साथ लेने को तैयार हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले अधिकार तय करो, फिर बिक्री होगी     सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि फिलहाल किसी बिक्री पर अनुमति देने से पहले सभी पक्षों के अधिकारों को क्रिस्टलाइज करना जरूरी है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘कुछ प्रॉपर्टीज पर कई दावेदार हैं, कुछ पर मुकदमे चल रहे हैं. पहले यह साफ होना चाहिए कि कौन सी प्रॉपर्टी विवादित है और कौन सी नहीं.’     सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन (अमिकस क्यूरी) ने कहा कि कुछ जमीनें ऐसी हैं जिन्हें बेचा ही नहीं जा सकता, क्योंकि वे ‘वेटलैंड्स (जल क्षेत्र)’ हैं. इस पर सीजेआई गवई ने कहा, ‘अगर कोई वेटलैंड खरीदे भी तो वहां निर्माण संभव नहीं होगा.’     कोर्ट ने अमिकस को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत चार्ट तैयार करें, जिसमें यह दर्ज हो कि कौन सी संपत्तियां विवादित हैं, किन पर हक तय हो चुका है, और किन पर ‘शैडो ऑफ डाउट’ है. केंद्र, SEBI और सहारा, तीनों को जवाब दाखिल करने का निर्देश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र की ओर से पेश हुए, ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है और सरकार को भी अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए. इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि वित्त मंत्रालय (MoF) को भी पार्टी बनाया जाए ताकि केंद्र सरकार इस पर अपना रुख साफ कर सके. सिब्बल ने बताया कि सहारा ने हाल ही में SEBI–Sahara फंड से 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि कुछ कोऑपरेटिव सोसायटीज के भुगतान किए जा सकें. लेकिन अन्य वकीलों ने दावा किया कि अभी भी करीब 9000 करोड़ रुपये का डेफिसिट है. अदालत ने कहा कि सहारा को पहले कर्मचारियों के दावों और बकाया राशि की स्थिति स्पष्ट करनी होगी. ‘एक साथ बिक्री जरूरी’, सिब्बल की दलील, कोर्ट ने कहा ‘देखेंगे’ कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि संपत्तियों को ‘एक बास्केट में’ बेचना ही व्यवहारिक विकल्प है. उन्होंने कहा, ‘अगर एक-एक करके बेचा गया तो निवेशक पीछे हट जाएंगे, जैसा पहले वर्सोवा प्रोजेक्ट में हुआ था.’ जस्टिस गवई ने कहा कि अदालत यह तय करेगी कि प्रॉपर्टीज को एकमुश्त (en bloc) बेचा जाए या अलग-अलग (piecemeal). सीनियर एडवोकेट अरविंद दातर ने सुझाव दिया कि जिन प्रॉपर्टीज पर कोई विवाद नहीं है, उन्हें पहले बेचा जा सकता है और बाकी पर अलग सुनवाई हो.  

अब US पासपोर्ट उतना ताकतवर नहीं! रैंकिंग में गिरावट, मलेशिया से हुई बराबरी

वाशिंगटन अमेरिका की साख को बड़ा झटका लगा है. Henley Passport Index के ताजा आंकड़ों में अमेरिकी पासपोर्ट 20 साल में पहली बार दुनिया के टॉप 10 सबसे पावरफुल पासपोर्ट्स की लिस्ट से बाहर हो गया है. अब यह 12वें पायदान पर पहुंच गया है और मलेशिया के साथ टाई हो गया है. कभी नंबर 1 पर रहा अमेरिकी पासपोर्ट अब सिर्फ 180 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल एंट्री देता है. यह गिरावट ग्लोबल सॉफ्ट पावर में अमेरिका के कमजोर होते प्रभाव का संकेत मानी जा रही है. वहीं, एशिया-पैसिफिक देशों ने एक बार फिर पासपोर्ट पावर में बाजी मार ली है. सिंगापुर और साउथ कोरिया ने दिखाया दम, एशिया की पासपोर्ट ताकत हावी Henley Passport Index के मुताबिक, सिंगापुर अब दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट है, जो 193 देशों में वीजा-फ्री एंट्री देता है. दूसरे नंबर पर साउथ कोरिया (190 डेस्टिनेशंस) और तीसरे पर जापान (189) हैं. वहीं, यूरोप के पारंपरिक पावरहाउस देशों – जर्मनी, इटली और स्पेन – भी टॉप 5 में शामिल हैं. इस बीच, अमेरिका का दो पायदान नीचे खिसककर 12वें स्थान पर पहुंचना ग्लोबल ट्रैवल फ्रीडम की रैंकिंग में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. क्यों गिरा अमेरिकी पासपोर्ट का रुतबा?     अमेरिकी पासपोर्ट की गिरावट के पीछे कई कारण हैं – खासकर उसकी विदेश नीति और वीजा-रिक्रिप्रोसिटी की कमी.     ब्राजील ने हाल ही में अमेरिका के नागरिकों के लिए वीजा-फ्री एंट्री खत्म की क्योंकि अमेरिका ने ब्राजीलियनों के लिए वैसी छूट नहीं दी.     चीन और वियतनाम की नई वीजा-फ्री लिस्ट में भी अमेरिका को शामिल नहीं किया गया.     इसके अलावा, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार और सोमालिया जैसे देशों ने नए ई-वीजा सिस्टम लागू किए, जिससे अमेरिकी पासपोर्ट की पहुंच और घट गई. ‘ओपननेस’ में अमेरिका पीछे, दुनिया जवाब दे रही है उसी अंदाज में डेटा दिखाता है कि अमेरिकी नागरिकों को भले ही 180 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलती हो, मगर खुद अमेरिका सिर्फ 46 देशों के नागरिकों को बिना वीजा एंट्री देता है. Henley Openness Index में अमेरिका 77वें स्थान पर है. इसका मतलब साफ है कि अमेरिका जितना बंद होता जा रहा है, उतना ही बाकी देश भी उसके नागरिकों के लिए अपने दरवाजे बंद कर रहे हैं. यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया के बाद दुनिया में सबसे बड़ी ‘रीसिप्रोकल गैप’ है. चीन ने दिखाई ग्रोथ, अमेरिका से आगे बढ़ा कूटनीतिक पासपोर्ट गेम जहां अमेरिका की रैंक नीचे जा रही है, वहीं चीन ने पासपोर्ट पावर में जबरदस्त उछाल दर्ज की है. 2015 में 94वें स्थान पर रहा चीन अब 2025 में 64वें नंबर पर पहुंच गया है. पिछले 10 सालों में चीन ने 37 नए देशों में वीजा-फ्री एंट्री हासिल की है. चीन अब 76 देशों को वीजा-फ्री एक्सेस देता है, यानी अमेरिका से 30 ज्यादा. हाल ही में उसने रूस को भी इस लिस्ट में जोड़ा है. यह कदम साफ दिखाता है कि बीजिंग अपने ‘ट्रैवल डिप्लोमेसी’ कार्ड को बखूबी इस्तेमाल कर रहा है, जबकि वाशिंगटन अपनी ‘ओपननेस पॉलिसी’ में पिछड़ रहा है. अमेरिकियों में बढ़ी ‘दूसरी सिटिजनशिप’ की होड़ US पासपोर्ट की गिरती ताकत का असर अब अमेरिकियों के व्यवहार पर भी दिखने लगा है. Henley & Partners की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अमेरिकी नागरिक ‘इन्वेस्टमेंट माइग्रेशन प्रोग्राम्स’ में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बना रहे हैं. साल की तीसरी तिमाही तक अमेरिकियों के एप्लिकेशन पिछले पूरे साल की तुलना में 67% ज्यादा रहे. यह ट्रेंड बताता है कि कई अमेरिकी अब वैकल्पिक नागरिकता या रेसिडेंसी के जरिए अपनी ‘ट्रैवल फ्रीडम’ वापस पाना चाहते हैं.