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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए। बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव  प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव मती शम्मी आबिदी, विशेष सचिव मती इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख  विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव  अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नवनियुक्त इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों और पावर प्लांट निर्माण का विशेष प्रशिक्षण

नवनियुक्त इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों और पॉवर प्लांट निर्माण का मिला प्रशिक्षण भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के नवनियुक्त 10 कनिष्ठ अभियंताओं (सिविल) का छह सप्ताह का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान, नागपुर में आयोजित किया गया। अभियंताओं को ताप एवं जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण, संधारण तथा आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीकों का गहन सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। छह सप्ताह तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नवनियुक्त अभियंताओं को विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों जैसे कंक्रीट टेक्नोलॉजी, मटेरियल टेस्टिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, कार्य मापन, निर्माण पर्यवेक्षण तथा नवीनतम इंजीनियरिंग तकनीकों के अनुप्रयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के चंद्रपुर और कोराडी स्थित 2×600 मेगावाट सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत इकाइयों का औद्योगिक भ्रमण रहा। इस दौरान प्रशिक्षु अभियंताओं ने निर्माणाधीन विद्युत परियोजनाओं में फाउंडेशन, संरचनात्मक निर्माण एवं परियोजना निष्पादन की प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।  

अयोध्या मामले में योगी बोले, सपा-कांग्रेस के मुंह पर फेविकोल क्यों

लखनऊ मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अयोध्‍या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सवाल उठाने पर सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। प्रतापगढ़ में राम मंदिर को लेकर सपा और कांग्रेस पर सीएम योगी खूब बरसे। योगी ने कहा कि कांग्रेस और सपा ने एक घटना को बढ़ाकर हिंदुओं को अपमानित कर आस्था के साथ खिलवाड़ किया। योगी ने कहा कि वक्फ के नाम पर देश-प्रदेश में हजारों हेक्टेयर जमीन बेची गई, एक भी बार सपा-कांग्रेस नहीं बोली। अयोध्या में एसआईटी ने जांच की, प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई की। लेकिन वक्फ के नाम पर सपा-कांग्रेस के लोगों के मुंह पर फेविकोल क्यों लग जाता है। मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ जिले के सदर और विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्रों में 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में सपा और कांग्रेस की तीखी आलोचना करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने कहा कि अयोध्या के मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है, मगर वक्फ के मुद्दे पर सपा और कांग्रेस के लोगों के मुंह पर 'फेविकोल' क्यों लग जाता है। आदित्यनाथ ने कहा कि राम के अस्तित्व को नकारने वाले, अयोध्या में राम भक्तों पर गोली चलाने वाले और हिंदू विरासत से जुड़े धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार से संबंधित रकम को कब्रिस्तान की चहारदीवारी पर खर्च करने वाले लोग अयोध्या के प्रति कब से आस्थावान हो गए? उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों के लोगों को राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि अब तो इन सपाइयों से और कांग्रेसियों से गिरगिट भी शरमा रहा होगा कि भाई देखो कम से कम एक नई प्रजाति आ गई है जो हमसे ज्यादा तेजी से रंग बदलती है। हर जागरूक नागरिक को सपा और कांग्रेस से यह प्रश्न करने चाहिए उन्होंने कहा कि जब सपा और कांग्रेस के लोग अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां और लाठी चलवाते थे, भगवान राम और कृष्ण को काल्पनिक कहते थे, कांवड़ यात्रा को प्रतिबंधित करते थे, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन पर रोक लगाते थे, दुर्गा पूर्जा पंडालों पर रोक लगाते थे और अवैध बूचड़खानों में गौमाता की हत्या करवाते थे, क्या तब हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जागरूक नागरिक को सपा और कांग्रेस से यह प्रश्न करने चाहिये। राम का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर खड़ा है, यही समाजवादी पार्टी की पीड़ा योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जहां पर वे बाबरी का 'गुलामी का ढांचा' (स्पष्ट रूप से मुगल शासन के संदर्भ में)देखना चाहते थे, आज आप सबके पुरुषार्थ से वहां भगवान राम का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर खड़ा है, यही समाजवादी पार्टी की पीड़ा है।  

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

रायपुर      ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0श् लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।          मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।        वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना          पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है। उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी       यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है। रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता       वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है। जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर       वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके। सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन       वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी। वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल    छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतलुज के पानी से हरियाणा में आई हरित क्रांति, 14,800 किमी नहर नेटवर्क ने बदली तस्वीर

 भिवानी आठ जुलाई 1954 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाखड़ा-नांगल परियोजना की सबसे बड़ी नहर का उद्घाटन किया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि सतलुज का यह पानी आने वाले दशकों में हरियाणा की तकदीर बदल देगा। वर्ष 1966 में राज्य गठन के समय जहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर था, वहीं आज हरियाणा देश के सबसे अधिक सिंचित और सर्वाधिक उत्पादक कृषि राज्यों में शामिल है। इस बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी भाखड़ा नहर प्रणाली, पश्चिमी यमुना नहर और दक्षिण हरियाणा तक पहुंची जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट कैनाल बनी हैं। हरियाणा आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25, स्टेट स्टैटिस्टिकल एब्स्ट्रैक्ट, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) के अनुसार प्रदेश में अब करीब 14,800 किलोमीटर लंबा नहर नेटवर्क है। इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही इसके जरिए लगभग पूरे कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और भिवानी जैसे राजस्थान सीमा से लगे जिले हों या महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और चरखी दादरी का दक्षिणी शुष्क क्षेत्र, यहां नहरों ने खेती, पेयजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। वर्ष 1966 के बाद सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने हरित क्रांति को गति दी। गेहूं और धान उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई, फसल सघनता बढ़ी, बागवानी और डेयरी को बढ़ावा मिला तथा ग्रामीण आय में लगातार सुधार हुआ। भले ही आजकल नहरों में पानी कम आ रहा है पर आज हरियाणा देश के केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल देने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में है। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विनोद फौगाट ने कहा कि हरियाणा की हरित क्रांति की असली ताकत भरोसेमंद सिंचाई रही और इसका सबसे बड़ा आधार भाखड़ा नहर प्रणाली है।भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की भाखड़ा परियोजना उत्तर भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि समृद्धि की आधारशिला कही जा सकती है।  

“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मा…h

बिहार राजस्व अदालतों में नई व्यवस्था लागू, ऑनलाइन दस्तावेजों से ही होगी सुनवाई

पटना. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व न्यायालयों में लंबित और नए मामलों के निष्पादन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब राजस्व न्यायालयों में किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान आवेदक या विपक्षी पक्ष से किसी भी प्रकार का भौतिक साक्ष्य या दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेज और साक्ष्य ही मान्य होंगे। विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं (डीसीएलआर) और अंचल अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शुरू से अंत तक की प्रक्र‍िया ऑनलाइन उन्होंने कहा है कि राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत वाद दायर करने से लेकर अंतिम आदेश पारित करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जानी है। विभाग को जानकारी मिली थी कि कई स्थानों पर सुनवाई के दौरान पक्षकारों से भौतिक रूप से दस्तावेज लिए जा रहे हैं, जो निर्धारित व्यवस्था के विपरीत है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने इस पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया है। पोर्टल पर ही अपलोड होंगे अतिरिक्त दस्तावेज नए निर्देश के अनुसार, यदि किसी मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्षकारों को केवल RCMS पोर्टल पर ही दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। राजस्व न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही मामलों का निष्पादन करेंगे। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी होगी। दस्तावेजों से छेड़छाड़ या विवाद की आशंका समाप्त होगी और सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। साथ ही लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने या कागजी दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। सचिव जय सिंह ने सभी जिला और अंचल स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि राज्य में राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू हो सके।

पंजाब में वकीलों की हड़ताल से न्यायिक कामकाज प्रभावित, अदालतों में ठप पड़े काम

बरनाला. लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के विरोध में जॉइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर पंजाब भर के वकील समुदाय ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके तहत कोर्ट का काम पूरी तरह से ठप्प रहा। वकीलों का आरोप है कि सरकार इस पॉलिसी से क्राइम और क्रिमिनल्स को बढ़ावा दे रही है, जिससे लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इस मौके पर बोलते हुए एडवोकेट धीरज कुमार ने मौजूदा सिस्टम पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के तहत अपराध करने वाले व्यक्ति को सरकार की तरफ से फ्री वकील दिया जाता है, जिससे क्रिमिनल का कोर्ट में एक भी रुपया खर्च नहीं होता। हद तो तब हो जाती है जब कई मामलों में क्रिमिनल्स को बेल देने की भी जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ सरकार गांव के पंचों और सरपंचों से ड्रग स्मगलर्स को बेल न देने के लिए कह रही है, वहीं दूसरी तरफ ड्रग स्मगलर्स इस सिस्टम के जरिए बिना बेल के फ्री रिहाई पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम की वजह से लूटपाट और ड्रग ट्रैफिकिंग जैसे अपराध दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं। जिला बार एसोसिएशन बरनाला की एडहॉक कमेटी के चेयरमैन हरिंदरपाल सिंह रानू ने कहा कि यह हड़ताल किसी एक जिले की नहीं बल्कि पूरे पंजाब की बार एसोसिएशनों ने मिलकर की है। उन्होंने कहा कि फ्री कानूनी मदद गरीब और जरूरतमंद लोगों को मिलनी चाहिए, प्रोफेशनल क्रिमिनल्स को नहीं। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी में कमियों की वजह से चोरी करने वाले और ड्रग बेचने वाले क्रिमिनल्स जेल से बाहर आने के बाद फिर वही काम करते हैं। संघर्ष के अगले फेज के बारे में बोलते हुए चेयरमैन रानू ने कहा कि इससे पहले जॉइंट एक्शन कमेटी और बार काउंसिल के मेंबर्स ने माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से बातचीत की थी और इस मसले को सुलझाने के लिए उनकी तरफ से एक कमेटी भी बनाई गई थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद कोई सही फैसला नहीं हुआ है। वकील नेताओं ने साफ किया कि जब तक सरकार इस पॉलिसी को रद्द नहीं करती या इसमें सुधार नहीं करती, तब तक लीगल कम्युनिटी कंधे से कंधा मिलाकर अनिश्चित समय के लिए हड़ताल जारी रखेगी।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के साझा प्रयासों को और सशक्त बनाने पर दिया गया जोर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री  राधाकृष्ण किशोर ने सौजन्य भेंट की।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जशपुर क्षेत्र का झारखंड से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसने दोनों राज्यों के लोगों के बीच विश्वास और निकटता को निरंतर मजबूत किया है। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री  साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।

बांकीपुर सीट पर सियासी मुकाबला दिलचस्प, प्रशांत किशोर के साथ आए शत्रुघ्न सिन्हा; BJP के टिकट पर नजर

पटना. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई हाईप्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, जबकि प्रमुख विपक्षी दल और अन्य पार्टियां उम्मीदवारों का एलान कर चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। भाजपा की ओर से कई नामों पर चर्चा तेज है। इनमें पार्टी नेता अजीत कुमार लाली और नील रतन घोष प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व फिलहाल उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन में जुटा है। ऐसे में भाजपा के फैसले पर सभी राजनीतिक दलों और चुनावी विश्लेषकों की नजर टिकी हुई है। उधर, राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा कुमारी पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जन सुराज से प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। 11 जुलाई को नामांकन भरेंगे प्रशांत किशोर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। वे मोहल्लों, बाजारों और विभिन्न सामाजिक समूहों से मुलाकात कर समर्थन जुटा रहे हैं। पार्टी की ओर से जानकारी दी गई है कि 11 जुलाई को वह अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पीके का खुला समर्थन किया है। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर 'बिहारी बाबू' ने इसे बिहार की राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बताया। शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा कि PK के चुनाव मैदान में उतरने से बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में नई हलचल पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि आज समय की सबसे बड़ी जरूरत एकता है और आम जनता, विशेषकर युवाओं से जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर का समर्थन करने की अपील की। भाजपा के फैसले पर टिकी निगाहें बांकीपुर उपचुनाव में अब तक राजद, जन सुराज और जनशक्ति जनता दल अपने प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। ऐसे में सबसे अधिक उत्सुकता भाजपा के उम्मीदवार को लेकर है। पार्टी प्रत्याशी घोषित होने के बाद इस हाईप्रोफाइल सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। जानकारों का मानना है कि भाजपा का उम्मीदवार तय होने के साथ ही राजनीतक गरमाहट और तेज होगी।