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मौलाना को पड़ा भारी: CM योगी के खिलाफ अपशब्द कहने पर यूपी पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया

पूर्णिया  गौमाता और योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मौलाना को पूर्णिया जिले से हिरासत में लिया और अब उसे यूपी ले जाया जा रहा है. गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा के बीच उसे ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कराकर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया. इस कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।  मौलाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मजहबी जलसे के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी मां को लेकर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे. इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिला. कई संगठनों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. परिवर्तन चौक और गांधी पार्क के आसपास मौलाना के खिलाफ पोस्टर लगाए गए थे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन पोस्टर हटवा दिए और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।  120 से ज्यादा हुईं थीं FIR बताया जा रहा है कि मौलाना ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में लागू गौकशी कानूनों की आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने अपने समर्थकों से सोशल मीडिया और सड़कों पर विरोध करने की अपील भी की थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस, नगर निगम, अलीगंज, आलमबाग, गोमतीनगर समेत पूरे शहर में पोस्टर लगे थे. मौलाना सलीम पर उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं।  बिहार से यूपी ला रही पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है. मौलाना को उत्तर प्रदेश लाकर आगे की पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। 

महोबा में बैडमिंटन कोर्ट पर खेलते हुए खिलाड़ी की मौत, 5 सेकंड में हुआ दर्दनाक हादसा

महोबा  महोबा जिला स्टेडियम में बैडमिंटन खेल रहे पस्तोर गली निवासी 58 वर्षीय सुधीर गुप्ता की सडन कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत हो गई. रोजाना की तरह स्टेडियम पहुंचे सुधीर अपने साथियों के साथ पूरी ऊर्जा में खेल रहे थे. लगातार तीन शॉट खेलने के महज 11 सेकंड बाद उन्हें सीने में बेचैनी महसूस हुई. उन्होंने अपना हाथ दिल की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 सेकंड के भीतर ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुधीर गुप्ता पूरी तरह फिट लग रहे थे. खेल के दौरान अचानक उनके कदम लड़खड़ाए और वह संभल नहीं पाए।  डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है. इस घातक अटैक ने उन्हें संभलने या मदद मांगने तक का मौका नहीं दिया. खेल का मैदान देखते ही देखते मातम के सन्नाटे में बदल गया।  परिवार में कोहराम, वीडियो वायरल सुधीर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और पस्तोर गली मोहल्ले में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को फिटनेस और जीवन की अनिश्चितता पर सोचने पर मजबूर कर रहा है. एक हंसते-खेलते इंसान का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को हैरान कर रहा। है।   

राजस्थान बोर्ड 12वीं परिणाम: बेटियों की शानदार सफलता, दीपिका ने 99.8% और नव्या मीणा ने 99.6% अंक प्राप्त किए

जयपुर   राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी गई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट Link आज 31 मार्च को सुबह 10 बजे एक्टिव कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ऑनलाइन माध्यम से रिजल्ट जारी किया है। इस दौरान बोर्ड के प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ भी बोर्ड कार्यालय से कार्यक्रम में शामिल रहे। रिजल्ट जारी हो गया है और Rajasthan Board 12th Result 2025 Direct Link ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर एक्टिव है। छात्र सबसे पहले रोल नंबर से यहीं अपना रिजल्ट देख सकेंगे। यहां राजस्थान बोर्ड बारहवीं परिणाम 2026 से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स देखते रहें। इस साल राजस्थान बोर्ड 12वीं की परीक्षा में कुल 9 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 96.23 छात्र सफल घोषित किए गए हैं. पिछले साल की तरह इस बार भी [लड़कियों/लड़कों] का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने सफलता का परचम लहराया. बोर्ड मुख्यालय से प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी नतीजों की पुष्टि की है।  तीनों स्ट्रीम का पास प्रतिशत (Stream-wise Data) विज्ञान (Science): 97.52 प्रतिशत वाणिज्य (Commerce): 93.64 प्रतिशत कला (Arts): 97.54 प्रतिशत साइंस में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं साइंस रिजल्ट में लड़कों से ज्यादा लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं.  साइंस में कुल 287068 स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन किया था. इसमें से 285299 स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे. साइंस का परीक्षा परिणाम 97.52 प्रतिशत रहा. 97.02 प्रतिशत छात्र और 98.34 छात्राएं पास हुई हैं. 178051 में से 146644 छात्र और 107248 में से 98836 छात्राएं फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  कॉमर्स में लड़कों का दिखा जलवा राजस्थान 12वीं बोर्ड  कॉमर्स में लड़कों का रिजल्ट बेहतर रहा. कॉमर्स में कुल 30798 स्टूडेंट रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 30580 स्टूडेंट परीक्षा हिस्सा लिया था. कॉमर्स का परिणाम 93.64 प्रतिशत रहा.  छात्रों के पास होने का प्रतिशत 94.04 और छात्राओं का पास होने का प्रतिशत 92.82 रहा. 20666 छात्रों में से 13976 लड़के और 9914 लड़कियों में से 8096 लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  आर्ट्स में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स में बेटियां आगे रहीं. आट्‌र्स में कुल 591023 स्टूडेंट रजिस्टर्ड हैं, जिसमें से 583201 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए। परिणाम 97.54 प्रतिशत रहा. लड़कों के पास होने का प्रतिशत 96.68 और लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 98.29 रहा।  कैसे चेक करें अपना रिजल्ट: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर 'Main Examination Results 2026' के लिंक पर क्लिक करें. अब अपनी स्ट्रीम (Science/Arts/Commerce) का चुनाव करें. अपना रोल नंबर दर्ज करें और 'सबमिट' बटन दबाएं. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे भविष्य के लिए डाउनलोड कर लें. रिजल्ट का डायरेक्ट लिंक: rajeduboard.rajasthan.gov.in, rajresults.nic.in राजस्थान बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित करने के साथ ही उन छात्रों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जो अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं. यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसे उसकी मेहनत के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, तो वह 'स्क्रूटनी' या कॉपियों की 'री-चेकिंग' के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है. इसके लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रति विषय शुल्क जमा करना होगा. स्क्रूटनी की प्रक्रिया परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होती है, जिसके बाद संशोधित अंकतालिका जारी की जाती है।  वहीं, जो छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल रहे हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ऐसे विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा का आयोजन करेगा. बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अगले 48 घंटों में आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी. इससे छात्रों को अपना कीमती साल बचाने का एक और अवसर मिलेगा। 

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: शादीशुदा और बालिग महिला की सहमति से संबंध को रेप नहीं माना जाएगा

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक बड़े फैसले के चर्चे हो रहे हैं। दरअसल कोर्ट ने एक बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों पर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सहमति से बने शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि किसी बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज करके बड़ा फैसला दिया । ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से बनाए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इस फैसले को काफी अहम और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला बेमेतरा से जुड़ा है ये मामला आपको बता दें कि यह मामला बेमेतरा जिले से जुड़ा है, जहां पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की मंजूरी मांगी थी लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के निर्णय को ही सही माना और याचिका खारिज कर दी। आखिर क्या था पूरा मामला मामला कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करने वाली महिला से जुड़ा है,वहीं पर आरोपी भी काम करता था। इसी दौरान आरोपी  ने उससे बात करना शुरू किया और शादी करने का वादा किया। आरोपी उसे अपने  घर ले गया और दुष्कर्म किया। लेकिन महिला पहले से ही तीन माह के गर्भ से थी। लोक लाज से किसी को  ये बात नहीं बताई लेकिन पति के पूछने पर सारी वारदात बताई और फिर थाने में रिपोर्ट लिखाई। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को बरी कर दिया गया जिस पर पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन सुनवाई में पता चला कि महिला ने  सहमति से शारीरिक संबंध बनाया था। इसी पर  कोर्ट ने कहा कि एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध में दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में 6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास हुए पूर्ण

छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास: चालू वित्तीय वर्ष में  6 लाख से अधिक ग्रामीण आवास पूर्ण चालू वित्तीय वर्ष में देश में सर्वाधिक आवास निर्माण प्रदेश में योजना आरंभ से एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास निर्माण आवास से बदली तस्वीर: 9 हजार से ज्यादा महिलाएं बनीं “लखपति दीदी” तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही का मॉडल बना छत्तीसगढ़ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण आवास निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए हैं। यह इस वर्ष देश में सर्वाधिक आवास निर्माण का आंकड़ा है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सशक्त एवं समन्वित क्रियान्वयन से यह उपलब्धि संभव हो पाई है। इससे प्रदेश आवास निर्माण के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है। “सबको आवास” के लक्ष्य को तेजी से साकार करने के लिए वर्तमान सरकार के प्रथम कैबिनेट निर्णय में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान में , सर्वे सूची में शामिल सभी पात्र हितग्राहियों को कवर कर लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 5.87 लाख, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 13 हजार तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं। योजनाओं के प्रभावी समन्वय से 6 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य पार किया गया है। यह उपलब्धि वर्ष 2016 में योजना प्रारंभ होने के बाद *प्रदेश में किसी एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक आवास पूर्ण होने का रिकॉर्ड है, *जो तेज क्रियान्वयन और प्रभावी मॉनिटरिंग को दर्शाता है। आवास निर्माण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नई गति आई है। “डीलर दीदी” मॉडल के तहत 9 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूह सदस्य आवास निर्माण की सामग्री आपूर्ति कर  “लखपति दीदी” बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इसके साथ ही हजारों महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं। साथ ही, 6 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 1200 से अधिक “रानी मिस्त्री” शामिल हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्रदान किए गए हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए टोल-फ्री नंबर 18002331290 संचालित है। पिछले 10 महीनों में इस पर 1500 से अधिक शिकायतें एवं सुझाव प्राप्त हुए, जिनका त्वरित निराकरण किया गया है। हर माह की 7 तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में “आवास दिवस” के माध्यम से जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।इसके साथ-साथ ग्राम पंचायत स्तर पर क्यू आर कोड आधारित सूचना प्रणाली से जानकारी सहज उपलब्ध हो रही है । छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन , समावेशी विकास एवं पारदर्शिता की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हो रहा है।

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर, इन-हाउस डिज़ाइन और निर्माण

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर इन-हाउस डिज़ाइन एवं निर्माण एमपी ट्रांसको में नई पहल भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने पारेषण कार्यों में नवाचार और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एमपी ट्रांसको टीकमगढ़ द्वारा सब स्टेशनों में मेंटेनेंस कार्यों के लिए 36 फीट तक ऊँचाई पर काम करने में सक्षम एक मैन लिफ्टर का सफलतापूर्वक डिज़ाइन एवं निर्माण इन-हाउस किया गया है। यह अभिनव "मैन लिफ्टर" विशेष रूप से सब स्टेशनों में स्थापित ऊँचाई पर स्थित उपकरणों के सुरक्षित, कुशल और समयबद्ध रखरखाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस उपकरण की सहायता से मेंटेनेंस स्टॉफ अब ऊँचे स्ट्रक्चर, इंसुलेटर, बस बार तथा अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों तक आसानी से पहुँच सकता है। इससे स्कैफोल्डिंग या लेडर के उपयोग की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी, जिससे जोखिम और श्रम दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। मात्र 39 हजार मे तैयार सब स्टेशन में ही उपलब्ध स्क्रैप मटेरियल और बाहर से न्यूनतम सामग्री खरीद कर इस लिफ्टर को तैयार किया गया है। बाजार में इस लिफ्टर की कीमत ढाई लाख रुपए से प्रारंभ होती है पर इसे सिर्फ 39000 रूपये में इन हाउस ही तैयार कर लिया गया। इन हाउस लिफ्टर तैयार करने में सागर के अधीक्षण अभियंता एम वाय मंसूरी, के मार्गदर्शन में टीकमगढ़ के कार्यपालन अभियंता आर. पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता जी. पी. राय का योगदान रहा। मेंटेनेंस की दक्षता में होगी बढ़ोतरी यह नवाचार कार्यस्थल की सुरक्षा को बढाने के साथ , मेंटेनेंस कार्यों की दक्षता में सुधार करेगा तथा मरम्मत के दौरान होने वाले डाउनटाइम को भी कम करेगा। स्थानीय स्तर पर डिज़ाइन कर तैयार किया गया यह मैन लिफ्टर एमपी ट्रांसको की इन-हाउस नवाचार क्षमता का उदाहरण है।  

EWS प्रमाणपत्र विवाद में फंसी केरल कैडर की एमपी मूल की IPS अधिकारी, डिमोशन का संकट

खरगोन  देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।  शिकायत के बाद शुरू हुई जांच निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।  केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है। कहां उलझा मामला? जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है। 

नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे कलेक्टर और 162 अधिकारी, क्या होगा खास?

इंदौर  इंदौर जिले में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार सत्र के पहले दिन को उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों का स्वागत तिलक लगाकर और वंदन के साथ किया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में विशेष बाल सभाओं का आयोजन होगा, जिससे बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाया जा सके। सत्र के प्रारंभ में ही विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी सुनिश्चित किया गया है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल और कलेक्टर की क्लास स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में एक विशेष कार्यक्रम 4 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस दिन जिले के 162 प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न सरकारी स्कूलों में पहुंचेंगे और वहां विद्यार्थियों की क्लास लेंगे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक 2 में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे और उनके साथ संवाद करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों का मनोबल बढ़ाना है। विशेष भोज और शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर सत्र के पहले दिन विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोज की व्यवस्था की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी (DPC) द्वारा इस संबंध में लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आकर्षक बनाना है। इसके साथ ही साल की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। नामांकन वृद्धि के लिए शिक्षकों का घर-घर संपर्क अभियान सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 'ज्यादा नामांकन' अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करेंगे और उन्हें स्कूल में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस रणनीति से विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष सरकारी स्कूलों में छात्रों का ग्राफ बढ़ेगा। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और अभिभावकों का सम्मान होगा शिक्षा विभाग ने इस बार केवल छात्रों ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। जिन विद्यार्थियों ने पिछली कक्षाओं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनके माता-पिता को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावकों के सम्मान से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में और भी बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रेरित होंगे। 

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं। डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं। विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।