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30 लाख की वसूली के आरोप में फंसे पूर्व SP: ग्वालियर कोर्ट ने 4 पुलिसकर्मियों को किया तलब

ग्वालियर  ग्वालियर के विशेष सत्र न्यायालय ने दो साल पुराने मामले में भोपाल के DIG राजेश सिंह चंदेल (तत्कालीन ग्वालियर एसपी) समेत तत्कालीन टीआई, एसआई और हवलदार पर डकैती का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. परिवाद मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने ये आदेश दिया. पीड़ित ने पुलिस के खिलाफ याचिका लगाई थी। धोखाधड़ी केस में 30 लाख वसूलने का आरोप मामले के अनुसार ग्वालियर के थाटीपुरा थाना पुलिस ने दिसंबर 2024 में ग्वालियर के विक्रम राणा समेत दो लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था. इसी मामले में समझौते के नाम पर 30 लाख रुपये वसूलने का आरोप विक्रम के भाई अनूप राणा ने परिवाद में लगाया था. सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने आईपीसी राजेश चंदेल सहित 03 पुलिसकर्मियों पर डकैती, साजिश रचने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। शिकायत की तो उल्टा जेल भेज दिया शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, अनूप राणा के भाई पर थाटीपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज था, जिसमें फरियादी से समझौता हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने पहले 5 लाख रुपए लिए और बाद में और पैसों की मांग करने लगी। कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए। एसपी से की थी लिखित शिकायत अनूप राणा ने जब तत्कालीन SP राजेश चंदेल से इसकी लिखित शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय मामला दोबारा थाटीपुर थाने भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने अनूप राणा को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। CCTV फुटेज डिलीट होने पर कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई। मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया। नौकरी के नाम पर ठगी केस से शुरू हुआ विवाद पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले। आखिर क्या है पूरा मामला ? फरियादी के वकील अशोक प्रजापति के मुताबिक "फ़रवरी 2024 में इन पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ लगाये गए परिवाद में बताया गया है विक्रम राणा और चन्द्रलेखा जैन के ख़िलाफ़ दिसंबर 2023 में धोखाधड़ी का मामला थाटीपुर थाने में दर्ज किया गया था. थाटीपुर पुलिस ने उस केस के फ़रियादी से समझौता कराने के नाम पर 5 लाख 80 हज़ार रुपये लिए. इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को दोनों आरोपियों विक्रम और चंद्रलेखा को थाने बुलाया, जहां 25 लाख रुपये की और डिमांड की गई. इस पर दोनों आरोपियों विक्रम से 9 लाख 75 हज़ार और चंद्रलेखा के घर से 15 लाख रुपये (कुल 24 लाख 75 हज़ार रुपये) मंगवा कर रख लिये गए. पुलिस द्वारा 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया. जब फिर से और रुपये मांगे गए तो फरियादियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया। एसपी पर आरोप- शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की परिवाद में दावा किया गया कि जब पुलिस को और रुपये नहीं मिले तो उन्होंने फरियादी को षड्यंत्रकारी बनाकर जेल भिजवा दिया गया. परेशान होकर मामले की शिकायत विक्रम के भाई अनूप राणा ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से भी की लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. इन हालतों से परेशान हो कर फ़रियादी ने न्यायालय में पुलिस के ख़िलाफ़ ही याचिका दायर की. न्यायालय ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने के आदेश दिए।   साक्ष्य मिटाने और साजिश के आरोप फरियादी के अधिवक्ता अशोक प्रजापति के मुताबिक "न्यायालय ने पुलिस से थाटीपुर थाने में लगे सीसीटीवी के फुटेज बतौर साक्ष्य मांगे लेकिन पुलिस ने हलफनामा दिया, जिसमें लिखा था कि 3 जनवरी 2024 से पहले के सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुके हैं. पुलिस पर लापरवाही और ऐसे जवाब पर नाराजगी जताते हुए विशेष सत्र न्यायालय ने सभी तथ्यों को संज्ञान में लिया और सोमवार को इस परिवाद में तत्कालीन एसपी आईपीएस राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ, उपनिनिरीक्षक अजय सिंह सिंह सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ लूट, डकैती, साक्ष्य मिटाने और साजिश रचने का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

उज्जैन पहुंचीं तमन्ना भाटिया, महाकाल के दरबार में लिया आशीर्वाद; बोलीं- यह अनुभव अविस्मरणीय

उज्जैन साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लिया। तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया नंदी हाल में बैठकर भक्ति भाव से भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दौरान वे मस्तक पर चंदन लगाए पूरी तरह बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आईं। करीब दो घंटे तक उन्होंने भस्म आरती का दिव्य नजारा देखा। आरती के बाद अभिनेत्री ने नंदीजी का पूजन-अभिषेक किया और नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को पुजारी के हाथों जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। भस्म आरती के बाद तमन्ना ने कहा, आज भगवान ने मुझे बुलाया था। बाबा महाकाल के बुलावे पर ही भक्त यहां आते हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। आज जो आरती देखने को मिली, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आरती में शामिल होकर बहुत ऊर्जा मिलती है। सब लोग एक साथ बैठकर जिस तरह आरती देखते हैं, ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता। मंदिर परिसर में अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से बढ़ाई गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: 3 झुग्गी बस्तियों को हटाने के निर्देश, निवासियों को मिला 15 दिन का समय

नई दिल्ली दिल्ली में तीन झुग्गी बस्तियों को खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग और एयर फोर्स स्टेशन के नजदीक मौजूद इन बस्तियों को खाली कराने की हरी झंडी देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे को हटाना 'आश्रय और आजीविका के अधिकार' का उल्लंघन नहीं है, बशर्ते उनका पुनर्वास उचित तरीके से हो। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों को हटाए जाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि, एजेंसियों को आदेश दिया कि सवदा घेवर्रा के पुनर्वास स्थलों पर पानी, स्वच्छता, स्कूल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इन बस्तियों के निवासियों को 15 दिन के भीतर जगह खाली करने को कहा। अदालत ने कहा कि उन्हें अक्टूबर 2025 में पहला नोटिस जारी किया गया था और तब से काफी समय बीत चुका है। सुरक्षा चिंता से अदालत सहमत अदालत ने सरकार की ओर से जाहिर की गई चिंताओं पर भी सहमति जताई। सरकार की ओर से कहा गया था कि संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा किया गया है। यह एक एयरफोर्स स्टेशन के साथ लगा हुआ है। अवैध निर्माणों को हटाने का फैसला रक्षा ढांचे को सुरक्षित करने और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उद्देश्य से लिया गया है। जस्टिस कौरव ने कहा, 'मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं याचिकाकर्ताओं को बेदखल करने के कारणों के रूप में पर्याप्त हैं।' क्यों दूसरी जगह नहीं जाना चाहते झुग्गीवासी याचिकाकर्ताओं ने सवदा घेवर्रा में पुनर्वास को चुनौती देते हुए कहा था कि नया स्थान उनके कार्यस्थलों और बच्चों के स्कूलों से दूर है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील सैयद अब्दुल हसीब ने तर्क दिया था कि आसपास के क्षेत्र में वैकल्पिक आवास की कमी के कारण वर्तमान मामले में यथास्थान पुनर्वास संभव नहीं है, और इसलिए, तीन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 717 निवासियों को सावदा घेवरा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। अदालत ने कहा- तुरंत लें फ्लैट नए स्थान पर प्रभावित लोगों को कम से कम समस्याएं हों, इसके लिए हाई कोर्ट ने कहा कि डीयूएसआईपी की नीति का पाल न किया जाए। अदालत ने कहा कि जिन्होंने वैकल्पिक आवंटन को स्वीकार नहीं किया है, वे तुरंत दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद आवंटित फ्लैट लें। अदालत ने यह भी नोटिस किया कि 192 निवासियों ने आवंटन पत्र स्वीकार कर लिए थे और 136 ने आवंटित फ्लैट में शिफ्ट हो चुके हैं।

SOG की बड़ी कार्रवाई, 10 से ज्यादा गिरफ्तार, नौकरी तक पहुंचा फर्जीवाड़ा

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री मामले की जांच में नए तथ्यों के खुलासे हुए हैं. राजस्थान सरकार ने अवैध पीएचडी डिग्रियों की लिस्ट तैयार करना शुरू कर दिया है. 425 अवैध पीएचडी डिग्रियों की जांच के बाद यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है. एसओजी पूरे फर्जी डिग्री रैकेट और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है. एसओजी को संदेह है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कई अन्य विश्वविद्यालयों की  भी फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई गई है. 10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार आरपीएससी की प्राध्यापक भर्ती-2022 में लगाई गई फर्जी डिग्री के सत्यापन के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ. बताया जा रहा है कि कमला कुमारी नामक महिला अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत डिग्री जांच में फर्जी पाई गई थी. इसके बाद एसओजी ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और पूर्व प्रेसिडेंट भी शामिल हैं. सरकारी नौकरी में जमकर हुआ फर्जी डिग्री का इस्तेमाल पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों डिग्रियां बेची गईं. आरोपियों ने फर्जी पीएचडी, एमए और अन्य डिग्रियां तैयार कर उसे स्टूडेंट्स को बेचा. आशंका है कि इन डिग्रियों के जरिए कई अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली. मामले में मास्टरमाइंड आरोपी वीरेंद्र सिंह पवार से पूछताछ में अब यह खंगाला जा रहा है कि कितने फर्जी डिग्री होल्डर है और कितने लोग नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है. साथ ही ऐसी कितनी प्रिंटिंग प्रेस है, जहां पर फर्जी डिग्री छपवाई गई उसकी भी लिस्ट तैयार की जा रही है.   सीएम से शिकायत करने की बात कह चुके हैं किरोड़ीलाल मीणा पहली बार नहीं है, जब किरोड़ीलाल मीणा खफा नजर आ रहे हैं. पिछले साल, वो खुद अपनी टीम के साथ गए थे और जो 200 से अधिक अभ्यर्थियों की कॉपियां सीज करके ले गए. किरोड़ी लाल मीणा ने SOG की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि एसओजी तमाशा कर रही है और यह अब तमाशा नहीं चलेगा. इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी.

बिहार में दवा दुकानें रहेंगी बंद, ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन

 पटना ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठनों ने 20 मई को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान थोक और खुदरा दोनों प्रकार की दवा दुकानें बंद रहेंगी। हड़ताल के कारण मरीजों और आम लोगों को दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि आनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक दवा कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठनों की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करें और छोटे दवा कारोबारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। प्रदेश अध्यक्ष पीके सिंह और महासचिव राजेश आर्या ने बताया कि 19 मई की देर रात से ही दवा दुकानदार हड़ताल पर चले जाएंगे। 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष रखेंगे मांग वहीं पटना इकाई के अध्यक्ष अर्जुन कुमार यादव ने सभी दवा विक्रेताओं से आंदोलन में एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 16 से 19 मई तक दवा दुकानदार काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जबकि 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे। संगठनों ने आम लोगों से अपील की है कि वे जरूरत की दवाइयां पहले से खरीदकर रख लें, ताकि हड़ताल के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

थाने पर पथराव केस में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार

अलवर अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाकर सड़कों पर रौब झाड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन अलवर के गोविंदगढ़ में यही शौक अब कई परिवारों के लिए मुसीबत बन गया है. पिछले बुधवार को एक बाइक जप्त होने से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते थाने पर पथराव और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट तक पहुंच गया. इस घटना के बाद पुलिस ने जो एक्शन लिया उसने कोर्ट का सख्त रुख इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. ताजा अपडेट के मुताबिक, पुलिस ने सनी सिंह, दीपक सिंह, दलजीत सिंह और गुरदीप सिंह नाम के चार और आरोपियों को धर दबोचा है. इन चारों को जब अनुसूचित जाति-जनजाति विशेष न्यायालय (SC/ST Court) में पेश किया गया, तो कोर्ट ने उन्हें सीधा न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. सरकारी वकील योगेंद्र खटाना ने कोर्ट को बताया कि इन लोगों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि वर्दी का सम्मान न करते हुए पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया. जेल की सलाखों के पीछे अब तक 12 चेहरे गोविंदगढ़ थाने पर हुए इस हमले में शामिल चेहरों की पहचान पुलिस वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर कर रही है. अब तक की कार्रवाई में कुल 12 बालिग आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं, जबकि इस उपद्रव में शामिल एक नाबालिग को भी कानून के दायरे में लेते हुए किशोर न्यायालय बोर्ड के सामने पेश किया गया है. पुलिस का यह कड़ा रवैया उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो भीड़ का हिस्सा बनकर कानून तोड़ने की हिम्मत करते हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. एक छोटी सी गलती कैसे बन गई बड़ी आफत यह पूरा मामला महज एक मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइक को जप्त करने से शुरू हुआ था. उस वक्त भीड़ के आवेश में आकर थाने पर पत्थर फेंकना और पुलिसकर्मियों से उलझना इन युवकों के भविष्य पर भारी पड़ गया है. लोक अभियोजक योगेंद्र खटाना के अनुसार, पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को भी कोर्ट ने जमानत न देकर सीधे जेल भेज दिया था.

भोपाल एयरपोर्ट से नई उड़ानों की तैयारी: श्रीनगर-चेन्नई समेत कई रूट्स के लिए मांगे गए प्रस्ताव

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एयरपोर्ट से जल्द ही कोलकाता, जयपुर, देहरादून, केरलम, चेन्नई सहित देश के बड़े शहरों सीधे हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ने जा रहे हैं. बड़े शहरों के अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो सकती हैं. इन उड़ानों के लिए प्रदेश सरकार ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए कंपनियों को विशेष लाभ भी दिया जाएगा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन उड़ानों के लिए कंपनियों से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. प्रपोजल के लिए 29 मई तक का समय दिया गया है। भोपाल से जुड़ेगा हर बड़ा शहर भोपाल के राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. आंकड़ों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हर दिन करीबन 5 हजार से ज्यादा यात्री आवागमन कर रहे हैं. एयरपोर्ट से हर साल आवागमन करने वाले करीबन 8 लाख से ज्यादा यात्रियों की संख्या होती है. एयरपोर्ट से अभी देश के दिल्ली, हैदराबाद सहित चुनिंदा शहरों के लिए ही सीधी फ्लाइट उड़ान भरती है, लेकिन जल्द ही एयरपोर्ट से देश के सभी बड़े शहरों के बीच फ्लाइट उड़ान भरती दिखाई देगी। इसके लिए एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. राजा भोज एयरपोर्ट प्रबंधन ने श्रीनगर, चेन्नई, केरल, देहरादून, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़ जम्मू सहित सभी बड़े शहरों के बीच हवाई सफर शुरू हो सकता है। सांसद भी ले चुके मीटिंग कुछ दिन पहले एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें सांसद एवं कमेटी अध्यक्ष आलोक शर्मा की मौजूदगी में सुविधाओं, यात्री अनुभव, एयर-कनेक्टिविटी, स्वच्छता, ट्रैफिक व्यवस्था और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की थी। इससे पहले कमेटी के सदस्य मीक ने ऑनलाइन सुझाव मांगे थे। जिनमें हरीश मूलचंदानी, रजत सिंह, संदीप शर्मा, समीर सबरवाल, संजीव ठाकुर, अरुणेश्वर सिंहदेव, अलका कुमार, राजेश बहुगुणा, सुनील मालवीय, अमित दाधीच आदि ने अपने सुझाव दिए थे। इसके बाद मीक ने बैठक में यह सुझाव रखें। इनमें एयरपोर्ट पर बड़े बैकलिट डिस्प्ले, बेहतर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, रिक्लाइनर और चेन्नई के लिए नॉन-स्टॉप फ्लाइट का सुझाव भी शामिल हैं।साथ ही पार्किंग व्यवस्था, वार्षिक फायर सेफ्टी ऑडिट और आपात स्थितियों में स्टाफ ट्रेनिंग पर जोर दिया। कोलकाता, चंडीगढ़, गोवा, श्रीनगर, जम्मू, जयपुर, उदयपुर और चेन्नई के लिए नियमित उड़ानों की मांग रखी। फ्लाइट संख्या, शहरों की कनेक्टिविटी, टर्मिनल विस्तार और मेट्रो कनेक्टिविटी का सुझाव दिया गया था। भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट। ये सुझाव भी आए मीटिंग में हैदराबाद होते हुए चेन्नई, कोलकाता होते हुए बागडोगरा, लखनऊ होते हुए देहरादून, जयपुर होते हुए जम्मू और वाराणसी होते हुए अयोध्या जैसे व्यवहारिक रूट सुझाए गए थे। वहीं, राजा भोज एयरपोर्ट को “हेल्दी एयरपोर्ट” बनाने के लिए फ्रूट्स बार, पोहा स्टॉल और स्थानीय स्वाद को बढ़ावा देने का सुझाव मिला था। आगमन क्षेत्र के बाहर शौचालयों की स्वच्छता पर ध्यान दिलाया। एविएशन फ्यूल में राहत, एयरपोर्ट से शहर तक एसी बस सेवा, स्थानीय इतिहास, व्यंजन और पारंपरिक कारीगरी के प्रदर्शन के सुझाव रखे थे। कई विषयों पर पहले से सुझाव भी हुआ था। एयरलाइंस ऑपरेटर्स को मिलेगी राहत एयरपोर्ट प्रबंधन ने इसके लिए सभी एयरलाइंस ऑपरेटर्स से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए ऑपरेटर्स को वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. इसमें घरेलू उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप पर दिया जाएगा. यह अधिकतम 10 लाख तक होगा. अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप होगा, जो अधिकतम 15 लाख रुपए तक होगा. 6 माह का सपोर्ट अतिरिक्त 6 माह तक और बढ़ाया जा सकेगा. राज्य शासन ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से 29 मई तक प्रपोजल मांगे हैं। मिलेगी शहर के विकास को गति उधर सरकार के इस फैसले को राजा भोपाल विमानतल सलाहकार समिति के सदस्य मनोज सिंह मीक ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि "हाल ही में भोपाल सांसद आलोक शर्मा के नेतृत्व में हुई समिति की बैठक में बड़े शहरों के बीच उड़ान सेवाओं को जरूरी बताया गया था. शासन द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की पहल से एयरलाइंस को भोपाल जैसे केन्द्र से जुड़ने का ठोस आधार मिलेगा. भोपाल मध्य भारत का स्वाभाविक कनेक्टिविटी सेंटर है. बेहतर उड़ान सेवाएं पर्यटन, निवेश, उद्योग, शिक्षा, मेडिकल यात्रा, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक और नॉलेज एंड एआई सिटी की संभावनाओं को गति मिलेगी।

हाईकोर्ट जज की अनोखी पहल: कार नहीं, साइकिल से पहुंचे अदालत; हर तरफ हो रही चर्चा

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल ने अपनी सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। जस्टिस बंसल सरकारी वाहन छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे, जिसे देखकर राहगीर से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक हर कोई हैरान रह गया। आमतौर पर न्यायाधीशों के साथ प्रोटोकॉल और वाहनों का काफिला जुड़ा रहता है, लेकिन जस्टिस बंसल ने अलग संदेश देते हुए सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाया। बताया जा रहा है कि जस्टिस बंसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील से प्रेरित हैं। पीएम मोदी लगातार ‘मिशन लाइफ’ के तहत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की बात करते रहे हैं। जस्टिस बंसल ने उसी संदेश को व्यवहार में उतारते हुए साइकिल से अदालत पहुंचकर लोगों को प्रदूषण कम करने और फिट रहने का संदेश दिया है। उनकी इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। जस्टिस बंसल की साइकिल यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनकी जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समाज के उच्च पदों पर बैठे लोग यदि इस तरह की पहल करेंगे तो आम जनता भी प्रेरित होगी। उनकी यह पहल उन लोगों के लिए भी संदेश मानी जा रही है जो छोटी दूरी के लिए भी वाहनों का उपयोग करते हैं। जज के साथ सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर सामान्य तौर पर हाई कोर्ट के जस्टिस का काफिला जब भी निकलता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है. काफिले में जज साहब की गाड़ी के साथ पायलट भी चलता है. जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में काम करने वाले सभी जज रहते हैं और सभी लोग सामान्य तौर पर अपनी कार से ही बंगले से हाई कोर्ट तक आते हैं. लेकिन मंगलवार सुबह का नजारा कुछ अलग था. जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल अपनी साइकिल पर बंगले से निकले और साइकिल से ही वह हाई कोर्ट पहुंचे. उनके साथ में उनके सुरक्षाकर्मी भी थे। सुबह रोजाना करते हैं साइकिलिंग जस्टिस डीडी बंसल ने बताया "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि लोग पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह साइकिल से ही अपने बंगले से हाई कोर्ट तक जाएंगे. साइकिल चलाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है. बचपन में भी साइकिल से ही स्कूल जाते थे. अभी भी डुमना रोड पर वह रोजाना साइकलिंग करते हैं. इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ उन्होंने शहर के भीतर भी कई बार साइकिलिंग की है। तेज गर्मी के बावजूद असुविधा नहीं हुई जस्टिस डीडी बंसल का कहना है "ऐसा नहीं है कि हाई कोर्ट जज साइकिल से नहीं चल सकते. भले ही गर्मी है, थोड़ी सी परेशानी होती है लेकिन साइकिलिंग करना अच्छी बात है और उन्हें सिविल लाइन से हाई कोर्ट तक लगभग 3 किलोमीटर गर्मी में साइकिल चलाने में कोई असुविधा नहीं हुई." मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे दूसरे लोगों को भी अमल करना चाहिए. खासतौर पर अधिकारी-कर्मचारियों और नेताओं को, क्योंकि उनके राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा ईंधन की बर्बादी होती है।

सादगी और पर्यावरण का संदेश: लाव-लश्कर छोड़ ई-रिक्शा में पहुंचे निगम अध्यक्ष

भोपाल इजराइल-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों को देखते PM मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील की है। जिसका असर अब स्थानीय तौर पर नजर आने लगा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण लाव लश्कर छोड़ ई रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। उनकी सागदी की तस्वीरे अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।दरअसल, सत्येंद्र भूषण को मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में पदभार ग्रहण करने के लिए सत्येंद्र भूषण लग्जरी गाड़ियों की बजाय बैटरी चलित ई-रिक्शा से रवाना हुए। वे भोपाल के अवधपुरी स्थित अपने निजी आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर भाजपा कार्यालय पहुंचे। हालांकि उनके साथ कई समर्थक गाड़ियों से पहुंचे। बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष BJP नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर के पदभार ग्रहण को लेकर जमकर किरकिरी हुई थी। पीएम मोदी की अपील को दरकिनार करते हुए भौकाल जमाने के लिए सौभाग्य सिंह ने उज्जैन से भोपाल तक 700 गाड़ियों का लंबा काफिला निकाल दिया। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर जमकर सवाल उठे और उनकी तस्वीरें वायरल हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि एक तरफ नरेंद्र मोदी देश को पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने का ज्ञान देते हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता अपील की धज्जियां उड़ाते हैं।

जल संरक्षण में देवास का कमाल: मोरूखेड़ी ग्राम पंचायत ने शुरू की अनोखी पहल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान देवास जिले की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने पेश की जल संरक्षण की मिसाल 350 कंटूर ट्रेंच से लगभग 13 लाख लीटर वर्षा जल का किया जायेगा संचयन देवास देवास जिले में संचालित ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पंचायत देवास की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी में जनभागीदारी से पंचायत क्षेत्र की पहाड़ी पर कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य किया गया है। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में किए जा रहे इस कार्य के तहत कुल 350 कंटूर ट्रेंच बनाई गई हैं। इन ट्रेंचों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन किया जा सकेगा। इसके अलावा ग्राम पंचायत में 03 पेरकोलेशन टैंक, 02 डगवेल, 05 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 01 बोरिंग रिचार्ज एवं 02 चेक डेम का निर्माण भी किया गया है। इन संरचनाओं से लगभग 07 लाख लीटर जल का अतिरिक्त संचयन होगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत निर्मित की जा रही इन संरचनाओं से वर्षा जल रुकने के साथ ही भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र के आसपास के कुएं एवं बोरिंग पुनर्जीवित होंगे तथा ग्रामीणों को भविष्य में पेयजल और सिंचाई की समस्या से स्थायी राहत मिलने की संभावना है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी की यह पहल जल संरक्षण एवं जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।