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CM भगवंत मान की शुकराना यात्रा जारी, अमृतसर में माथा टेककर लिया आशीर्वाद, फूलों से हुआ स्वागत

अमृतसर. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ओर से निकाली जा रही शुकराना यात्रा के लिए अमृतसर पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर रईया से लेकर श्री हरिमंदिर साहिब तक पूरी तैयारियां की गई। शुकराना यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का पहला स्वागत रईया में हुआ। जहां हल्का बाबा बकाला के विधायक दलबीर सिंह टोंग की अगुवाई में विशेष कार्यक्रम रखा गया। अमृतसर व आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। गांवों से भी जत्थों के रूप में समर्थक लगातार कार्यक्रम स्थल पहुंचे। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के स्वागत को यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गईं।  सीएम की यात्रा के लिए सुरक्षा घेरा तैयार रईया से लेकर अमृतसर तक जीटी रोड पर सुरक्षा के मद्देनजर विशेष प्रबंध किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई है ताकि यातायात और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। आसपास की इमारतों और ऊंचे स्थानों पर पंजाब पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में संभाली जा रही है। डीआईजी संदीप गोयल और अमृतसर देहाती के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी निभा रहा है। कार्यक्रम स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जालंधर से शुरू की आज यात्रा सीएम भगवंत मान ने दूसरे दिन की यात्रा जालंधर से शुरू की है। जालंधर सेंट्रल से शुकराना यात्रा शुरू करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा बेअदबी मामले में अगर कोई मानसिक रोगी होता है तो उसके परिजनों पर मामला दर्ज किया जाएगा, उन्होंने कहा ऐसा नहीं है कि घर से किसी रोगी को सीखा कर बेअदबी के लिए बाहर भेज दो और खुद इसे दूर हो ऐसे मामलों में परिजनों पर मामला दर्ज होगा। कल फतेहगढ़ साहिब में होगी यात्रा समाप्त तीन दिवसीय शुकराना यात्रा का आज दूसरा दिन है। आज ये यात्रा जालंधर से शुरू हुई है। जानें कहां-कहां जाएगी ये यात्रा- वीरवार- जालंधर, बाबा बकाला, अमृतसर, तरनतारन, जीरा, फरीदकोट और कोटकपूरा से होकर निकलेगी। शुक्रवार- मुख्यमंत्री का काफिला बठिंडा, तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, सरदूलगढ़, मानसा, बरनाला, सुनाम, संगरूर, समाना और पटियाला पहुंचेगा। यात्रा का समापन श्री फतेहगढ़ साहिब में होगा।

ACB का एक्शन जारी: 15 ठिकानों पर छापेमारी के बाद पूर्व मंत्री हिरासत में

जयपुर जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया. 960 करोड़ रुपए से जुड़े मामले में एसीबी ने कार्रवाई की है. इससे पहले एसीबी रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है. अब मामले में ये बड़ी कार्रवाई की गई है.   15 ठिकानों पर पड़े थे छापे इसी मामले में ईडी ने 2025 में पूर्व मंत्री को गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. 17 फरवरी को एसीबी ने करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया था. 960 करोड़ के घोटाले का आरोप जेजेएम योजना के तहत आरोप है कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल ने फर्जी दस्तावेज से टेंडर हासिल किए थे. इन दोनों फर्मों के प्रोपराइटर महेश मित्तल और पदमचंद जैन पर आरोप है कि उन्होंने इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे. आरोप है कि इन सभी में पूर्व मंत्री महेश जोशी भी शामिल थे.   किरोड़ी लाल मीणा ने दिया था धरना दरअसल पूरा मामला 20 जून 2023 से शुरू हुआ. जब डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजधानी जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर इस मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दो दिन तक धरना दिया. मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा. कई अन्य नेता भी अशोक नगर थाने पहुंचे. जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई. 2023 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी यह मामला सियासी गलियारों में खूब चर्चा का विषय बना. 

केजीएमयू की बड़ी सफलता: जटिल सर्जरी में मासूम बच्चे को मिली नई जिंदगी

लखनऊ  किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। विभाग के डॉक्टरों ने महज 10 किलोग्राम वजन के एक छोटे बच्चे के शरीर से डेढ़ किलोग्राम का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल और जोखिम भरा था, क्योंकि बच्चे के कुल वजन का लगभग पंद्रह प्रतिशत हिस्सा अकेले ट्यूमर का था। ऐसे में सर्जरी के दौरान हर पल सतर्कता बरतना अनिवार्य था। ऑपरेशन की टीम पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेडी रावत के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने यह सर्जरी बड़ी कुशलता और धैर्य के साथ संपन्न किया। ऑपरेशन में सीनियर रेजिडेंट डॉ. श्रेया श्रीवास्तव, डॉ. मानिष राजपूत तथा अन्य चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहायक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सुधा सिंह सहित पूरी टीम ने ऑपरेशन को सफल बनाने में अथक परिश्रम किया। बच्चे की सेहत सर्जरी के बाद बच्चे की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और वह खतरे से बाहर है। बच्चे की मां ने डॉक्टरों की टीम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है। केजीएमयू प्रशासन ने भी पीडियाट्रिक सर्जरी टीम की इस उपलब्धि की सराहना की है और इसे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया है।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर CM विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है। मुख्यमंत्री साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिशः नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

विदेश में फंसे युवाओं के लिए राहत योजना, विशेष सहायता कोष बनाने की तैयारी

चंडीगढ़ विदेशों में बेहतर भविष्य की तलाश में गए हरियाणा के युवाओं की मौतों और उनके परिवारों की बेबसी के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता कोष बनाने का फैसला किया है। हाल के महीनों में सामने आए दर्दनाक मामलों खासकर यूक्रेन-रूस युद्ध में फंसे युवाओं ने इस जरूरत को और अधिक गंभीर बना दिया है, जहां परिवारों को शव वापस लाने के लिए महीनों इंतजार और भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसमें सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और शर्तें स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित नीति के तहत केवल वैध वीजा पर विदेश गए लोगों को ही कवर किया जाएगा। सरकार न सिर्फ आर्थिक मदद देगी, बल्कि विदेशों में फंसे लोगों और उनके परिजनों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। इसके लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ समन्वय कर शवों को भारत लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेश में दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में परिवारों को भारी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रूस से शव लाने में ही 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जो कई परिवारों के लिए काफी मुश्किल होता है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही रूस से हरियाणा के चार युवाओं के शव लाए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इसे लेकर काफी चिंता जता चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में कोई नीति बनाने को कहा था। इस पर अधिकारियों ने अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब जल्द ही उच्च अधिकारी इसमें निर्णय लेंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठक होने वाली है।  

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: अब नहीं होगी बार-बार रिचार्ज की झंझट

लखनऊ यूपी के बिजली ग्राहकों को बड़ी सौगात देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्ट पेड में बदलने का ऐलान हुआ है। प्रीपेड से पोस्टपेड में करने की तारीख भी आ गई है। प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने की पूरी प्रक्रिया एक रात में पूरी हो जाएगी। 9 मई की रात से प्रक्रिया शुरू होगी और 10 मई तक सभी मीटर पोस्टपेड हो जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार पोस्टपेड होने पर बिजली ग्राहकों की कई समस्याओं का हल हो जाएगा। उपभोक्ताओं को मीटर तेज चलने, अधिक बिल आने और बिना बिजली उपयोग के बैलेंस कटने जैसी शिकायतों से मुक्ति मिल जाएगी। बचा बैलेंस बिजली बिल में जुड़ेगा लोगों को यह शंका है कि प्रीपेड में कराए गए रिचार्ज का क्या होगा? अधिकारियों के अनुसार प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जैसे ही प्रीपेड मीटर कन्वर्ट होंगे, वैसे ही उनका बचा बैलेंस महीने के अंतिम में बनने वाले बिल में स्वत: जुड़ जाएगा। इसका पूरा डिटेल बिजली बिल में अंकित होगा। पूर्वांचल में एमडी कर रहे निगरानी पूर्वांचल के जिलों में स्मार्ट मीटरों के मोड परिवर्तन की निगरानी पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार खुद करेंगे। पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 30 लाख 17 हजार 147 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। वाराणसी जोन प्रथम के 11 डिविजनों में 2.20 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों उपभोक्ता हैं। एमडी मीटर लगाने वाली कंपनी जीएमआर और जीनस के अफसरों के साथ मोड परिवर्तन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। चार लाख उपभोक्ता नहीं कर रहे थे मीटर रिचार्ज पूर्वांचल के 4.11 लाख उपभोक्ता प्रीपेड मीटर रिजार्च नहीं कर रहे थे। बनारस में इनकी संख्या लगभग 12 हजार थी। जांच में सामने आया कि मीटर चार्ज न कराने वाले अनेक उपभोक्ता बिजली चोरी कर रहे हैं तो कुछ खाली परिसर पर मीटर लगे थे। विभाग ने बिजली चोरी करने वालों पर केस कराया था। उपभोक्ताओं से वापस लेंगे सिक्योरिटी मनी मीटर पोस्टपेड होने के बाद उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी मनी ली जाएगी। यह राशि बिजली बिल में जोड़कर भेजी जाएगी। बड़े उपभोक्ताओं से सिक्योरिटी मनी किस्त में ली जाएगी। स्मार्ट मीटर की खामियां जस की तस : उपभोक्ता परिषद  वर्ष 2019 से 2022 के बीच लगे 12 लाख स्मार्ट मीटरों में जो खामियां केंद्र सरकार की टीम ने पाई थीं, वही कमियां मौजूदा समय में लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटर की पुरानी खामियों को नजरअंदाज कर के प्रदेश भर में नए सिरे से स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों की जांच केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने की थी। सितंबर 2023 में टीम ने रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में जो कमियां गिनाई गई थीं, वे अब लग रहे स्मार्ट मीटरों में भी हैं। अवधेश ने कहा कि अगर आरडीएसएस के तहत लग रहे इन स्मार्ट मीटरों में उपभोक्ता हितों के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया होता तो पूरी परियोजना सवालों के घेरे में नहीं आती। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि उपभोक्ताओं को तीन से छह महीने के विलंब से एसएमएस अलर्ट नहीं मिल रहे। चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता बरती गई थी। उपभोक्ताओं पर नियमविरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा था। मीटर नेटवर्क में बाधा थी, जिससे डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा था।

डीजीपी मकवाणा: रेलवे, पुलिस और प्रशासन के समन्वय से सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन

रेलवे–पुलिस–प्रशासन के समन्वय से सुनियोजित भीड़ प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के साथ होगा सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन – डीजीपी मकवाणा सिंहस्थ 2028 की तैयारियों हेतु रेलवे अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समन्वय बैठक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर आधुनिक तकनीक और ICCC व्यवस्था लागू करने की तैयारी भोपाल सिंहस्थ 2028 के सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित आयोजन के दृष्टिगत आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में पुलिस, रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी सिंहस्थ के दौरान संभावित अत्यधिक भीड़, यातायात प्रबंधन, रेल संचालन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आधारभूत संरचना के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना पर चर्चा की गई। विशेष रूप से पूर्व में आयोजित महाकुंभ-2025, प्रयागराज के अनुभवों से सीख लेते हुए आधुनिक तकनीकों, बेहतर समन्वय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक रहने की संभावना है, जिसके लिए पूर्व से ही व्यवस्थित एवं चरणबद्ध योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन के लिए संयुक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा शाही स्नान एवं अन्य प्रमुख अवसरों पर विशेष ट्रैफिक एवं भीड़ नियंत्रण योजना तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्राउड मैनेजमेंट के तहत एंट्री एवं एग्जिट मार्ग पृथक-पृथक रखे जाएं तथा अंतिम समय में प्लेटफॉर्म परिवर्तन से बचा जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो। पुलिस महानिदेशक ने उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल के साथ-साथ ओंकारेश्वर रोड एवं सीहोर क्षेत्र के स्टेशनों को भी ध्‍यान में रखते हुए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया। उन्होंने फुटओवर ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने, पर्याप्त संकेतक, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम एवं अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डीजीपी ने अपराध नियंत्रण के संबंध में जीआरपी एवं आरपीएफ को विशेष सतर्कता बरतने, इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने तथा सभी स्टेशनों, होल्डिंग एरिया एवं पार्किंग स्थलों पर सीसीटीवी कवरेज एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए संयुक्त टीमें सदैव तैयार रहें, जिससे किसी भी स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उत्तरप्रदेश डीजी (रेल) प्रकाश डी. ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव साझा करते हुए बताया कि बड़े आयोजनों में भीड़ का सटीक आकलन (क्राउड असेसमेंट) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने 2013 की घटना सहित पूर्व घटनाओं से सीख लेते हुए मल्टी-लेवल क्राउड मैनेजमेंट, प्लेटफॉर्म सुरक्षा, पृथक एंट्री-एग्जिट, कलर कोडिंग, साइनएज, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं होल्डिंग एरिया आधारित भीड़ नियंत्रण व्यवस्था को अत्यंत प्रभावी बताया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), रियल-टाइम मॉनिटरिंग, व्हाट्सएप/डिजिटल समन्वय एवं स्पेशल ट्रेनों के प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क में किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए भीड़ को विभिन्न स्तरों पर फिल्टर एवं नियंत्रित करना आवश्यक है। डीजी आरपीएफ सुसोनाली मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ जैसे आयोजन में विभिन्न रेलवे जोनों—विशेष रूप से वेस्टर्न, वेस्ट सेंट्रल एवं सेंट्रल रेलवे के मध्य सुदृढ़ समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि रेलवे द्वारा प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाता है तथा किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। उन्होंने अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन, रेलवे बोर्ड स्तर पर सतत मॉनिटरिंग, संयुक्त प्रशिक्षण, एनडीआरएफ के साथ समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र एवं इंटेलिजेंस सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। साथ ही बड़े आयोजनों में आंतरिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। रतलाम मंडल रेल प्रबंधक अश्‍विनी कुमार ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे द्वारा संभावित भीड़, यात्री आवागमन के समय एवं विभिन्न मार्गों के विश्लेषण के आधार पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरकनेक्टिविटी एवं संचालन में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं तथा प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय एवं फीडबैक आधारित सुधार किए जा रहे हैं। उज्जैन में प्रस्तावित व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए पुलिस अधीक्षक उज्जैन प्रदीप शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन 09 अप्रैल से 08 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। शाही स्नान के अवसरों पर एक ही दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला विकसित किया जा रहा है तथा घाटों का विस्तार लगभग 37 किलोमीटर तक किया जा रहा है। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार एक किलोमीटर घाट पर निर्धारित समय में हजारों श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता विकसित कर बड़े स्तर पर भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर इंदौर-देवास मार्ग से सर्वाधिक आवागमन तथा रेलवे के माध्यम से 2 से 2.5 करोड़ यात्रियों के आगमन की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें नए फुट ओवर ब्रिज, सैटेलाइट स्टेशन विकास, त्रिस्तरीय पार्किंग, होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, साइडिंग लाइन, जल आपूर्ति व्यवस्था एवं ऑप्टिकल फाइबर आधारित संचार तंत्र का निर्माण शामिल है। ट्रेन संचालन के लिए विशेष रणनीति के तहत 2016 की तुलना में तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पेंडुलम मूवमेंट आधारित शॉर्ट-डिस्टेंस मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल-हेडेड ट्रेन संचालन, दिशा-आधारित प्लेटफॉर्म निर्धारण एवं लंबी दूरी की ट्रेनों का पूर्व नियोजित डायवर्जन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी एवं एआई आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम, बैकअप पावर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, साइबर सुरक्षा, वेंडर मैनेजमेंट एवं एक्सेस कंट्रोल को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही RPF-GRP के संयुक्त प्रशिक्षण, मेडिकल टीमों की उपलब्धता एवं त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में सभी अधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि पूर्व अनुभवों, तकनीक के प्रभावी उपयोग, सुदृढ़ समन्वय एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से सिंहस्थ 2028 का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न … Read more

सीनियर IAS अधिकारियों का पुनर्वितरण, ACS होम ने संभाला सामान्य प्रशासन विभाग, अतिरिक्त जिम्मेदारी जनसंपर्क

भोपाल   मध्य प्रदेश में एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई है।  ACS संजय कुमार शुक्ल अपर मुख्य सचिव गृह , ACS शिवशेखर शुक्ला अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन और अरविंद दुबे संचालक जनसंपर्क (अतिरिक्त प्रभार)होंगे। इस बाबत आदेश भी जारी  हो गए हैं। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले और नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत दो वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, वहीं एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी  संजय कुमार शुक्ल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसके साथ ही शुक्ल को विमानन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं दूसरी ओर  1994 बैच के ही वरिष्ठ अधिकारी शिवशेखर शुक्ल को अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें संस्कृति विभाग एवं आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान का प्रभार दिया गया है।

आगरा का पेठा से बनारस की लस्सी तक प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजन को ब्रांड बनाने की तैयारी

योगी सरकार की ओडीओसी योजना में यूपी के 75 जिलों का स्वाद: हर जनपद का पारंपरिक व्यंजन बनेगा पहचान आगरा का पेठा से बनारस की लस्सी तक प्रदेश के हर जिले के खास व्यंजन को ब्रांड बनाने की तैयारी योगी सरकार ने की 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की व्यापक मैपिंग, ब्रज से बुंदेलखंड और पूर्वांचल तक हर क्षेत्र के स्वाद को मिलेगा मंच स्थानीय खानपान से पर्यटन, रोजगार और छोटे कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार, ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ के रूप में देश-विदेश में पहचान बनाने की रणनीति लखनऊ उत्तर प्रदेश के विविध स्वाद और समृद्ध खानपान परंपरा को नई पहचान देने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ओडीओपी की तर्ज पर ‘एक जनपद एक व्यंजन (ओडीओसी)’ के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों की व्यापक मैपिंग कर ली गई है, जिससे अब हर जिले की अपनी एक खास फूड आइडेंटिटी तय हो गई है। इस पहल में आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, वाराणसी की लस्सी, जौनपुर की इमरती, गोरखपुर के समोसे, मेरठ की रेवड़ी-गजक, लखनऊ का मलाई मक्खन, सहारनपुर का शहद और मुजफ्फरनगर का गुड़ जैसे प्रसिद्ध व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है। इसके साथ ही अन्य जिलों के स्थानीय और पारंपरिक स्वाद जैसे कासगंज की सोन पापड़ी, अयोध्या की दही-जलेबी, बलिया का सत्तू, चित्रकूट का मावा और बागपत का घेवर भी इस सूची में शामिल किए गए हैं। हर क्षेत्र का अलग स्वाद, एक ही पहचान हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ओडीओसी को लागू करने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। योजना के तहत ब्रज क्षेत्र की मिठास, अवध की समृद्ध कचौड़ी-समोसा संस्कृति, पूर्वांचल का देसी स्वाद और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन, इन सभी को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ की अवधारणा को मजबूत किया जा रहा है। इससे प्रदेश के खानपान की विविधता को एकीकृत पहचान मिलेगी। इस पहल का सीधा फायदा स्थानीय कारीगरों, हलवाई, छोटे दुकानदारों और फूड उद्यमियों को मिलेगा। पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे कारोबार को मजबूती मिलेगी। पर्यटन में भी आएगा उछाल योगी सरकार ओडीओसी को पर्यटन से जोड़कर फूड टूरिज्म को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। अब पर्यटक किसी जिले में जाएंगे तो वहां के प्रसिद्ध व्यंजन का अनुभव लेना भी उनकी यात्रा का हिस्सा होगा। योगी सरकार की योजना है कि इन व्यंजनों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जाए। इससे न सिर्फ यूपी के स्वाद को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक छवि भी और मजबूत होगी। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रमुख व्यंजन 1. आगरा: पेठा /नमकीन (दालमोठ)/गजक/ पराठा 2. फिरोजाबाद: आलू उत्पाद/ आलू टिक्की/कचौड़ी 3. मैनपुरी: सोहन पापड़ी/भुना हुआ आलू  4. मथुरा: पेड़ा/छप्पन भोग/माखन मिश्री/ रबड़ी 5. अलीगढ़: डेयरी उत्पाद/कचौड़ी/इमरती/इगलास के चमचम 6. हाथरस: रबड़ी 7. कासगंज: मूंग का दलमा/कलाकंद/सोन पपड़ी/सोरों की मोठ की चाट 8. एटा: चिकोरी/घेवर पूड़ी 9. अयोध्या: कचौरी/टिकिया/ पेड़ा/कुल्हड़ वाली दही जलेबी 10. सुलतानपुर: पेड़ा/समोसा/पूड़ी और कोहड़े की सब्जी/लाल पेड़ा 11. बाराबंकी: चंद्रकला मिठाई/लाल पेड़ा 12. अमेठी: समोसा/गुड़ की खीर/गुलगुला/बड़ी वाली पूड़ी 13. अंबेडकर नगर: बालूशाही/चाट/खजाना/लाल गन्ने की गोटी 14. आजमगढ़: तहरी (मूंग दाल की)/सफेद गाजर का हलवा/लौंगलता 15. बलिया: सत्तू आधारित उत्पाद/बाटी-चोखा 16. मऊ: लिट्टी-चोखा/गोंठा की भेली 17. बरेली: सेवइयां/बर्फी/ छोले-भटूरे/ चाट 18. बदायूं: खोआ आधारित मिठाई/पेड़ा/ पेड़े/लौंज 19. पीलीभीत: जलेबी/खोआ मिठाई/लस्सी/लौंज 20. शाहजहांपुर: लौंग बर्फी/गुड़/समोसे/खुरचन 21. बस्ती: ठेकुआ/पूरी-सब्जी/सिरका/गुड़ 22. संत कबीर नगर: खोआ आधारित मिठाई/समोसा/पेड़ा 23. सिद्धार्थनगर: खोआ आधारित मिठाई (राम-कचौरी)/मखाना/कालानमक चावल/रामकटोरी 24. बांदा: सोहन हलवा/बालूशाही 25. चित्रकूट: मावा 26. हमीरपुर: बुंदेली व्यंजन (दाल भरे/डुबरी फरा/महुआ बर्फी/माड़े/सन्नाटा) 27. महोबा: दाल बाफला/तिलकुट/देसावरी पान/खजूर का गुड़ 28. गोड़ा: इटियाथोक का दही बड़ा व कचौड़ी 29. बहराइच: चमचम 30. बलरामपुर: नारियल बर्फी/कलाकंद/ घमंजा/ चाट 31. श्रावस्ती: इमरती 32. गोरखपुर: लिट्टी-चोखा/लहसुन वाले छोले समोसे/ बर्फी 33. महाराजगंज: लिट्टी-चोखा/खोआ आधारित मिठाई (राम-कचौरी)/गुड़/मीठा समोसा 34. देवरिया: मालपूआ/लिट्टी-चोखा/दही/गुड़ की जलेबी 35. कुशीनगर: केला चिप्स/पेड़ा/लाल खोरमा 36. झांसी: दाल बाफला/बालूशाही 37. जालौन: रसगुल्ले/गुझिया 38. ललितपुर: दूध हलवा/बाजरे की रोटी 39. कानपुर: समोसा/लड्डू/मलाई मक्खन (मलइयो) 40. कानपुर देहात: खाद्य तेल/लस्सी 41. औरैया: शुद्ध देसी घी/दूध बर्फी मिठाई/बालूशाही/ गुड़ 42. इटावा: सरसों आधारित उत्पाद (सरसों की चटनी/सलाद) मट्ठा के आलू/खीर मोहन 43. फर्रुखाबाद: दालमोठ/भुने आलू 44. कन्नौज: गट्टा मिठाई/खोआ का पेड़ा 45. लखनऊ: रेवड़ी/आम उत्पाद/चाट/मलाई मक्खन 46. हरदोई: आलू पूरी/लड्डू/लाओझड़  47. लखीमपुर खीरी: केला/गुड़/खोआ पेड़ा/खीर मोहन/रसगुल्ले 48. रायबरेली: मसाले 49. सीतापुर: मक्खन मलाई/समोसा/मिर्ची पकौड़ा/पेड़ा 50. उन्नाव: काला जामुन/समोसा/कचौड़ी/त्रिलोक परी 51. मेरठ: रेवड़ी/गजक/नानखटाई 52. गाजियाबाद: सोया चाप/मिर्ची का अचार 53. गौतम बुद्ध नगर: केक/बेकरी उत्पाद 54. हापुड़: पापड़ 55. बुलंदशहर: कचौरी/खुरचन/पेड़ा 56. बागपत: बालूशाही/घेवर 57. मिर्जापुर: लाल पेड़ा/बालूशाही/रसगुल्ला/पेड़ा 58. भदोही (संत रविदास नगर): दाल पीठा/ठेकुआ/खोआ पेड़ा/गुझिया/रबड़ी 59. सोनभद्र: गुलाब जामुन 60. मुरादाबाद: दाल 61. रामपुर: हल्दी हलवा (हलवा) 62. अमरोहा: आम पन्ना/आम चटनी/सेव/लड्डू 63. संभल: सेवइया/गजक/सोनपापड़ी 64. बिजनौर: गजक/सिंघाड़ा कचौरी/सोनपापड़ी और बतीसा 65. प्रयागराज: सब्जी-कचौरी/समोसा/रसगुल्ला 66. फतेहपुर: बेड़मी पूरी-सब्जी/पेड़ा/सूतफेनी 67. कौशांबी: गुड़ से बनी मिठाई/चाट/बर्फी/मुंगौरा 68. प्रतापगढ़: आंवला आधारित उत्पाद/गुलाब जामुन 69. वाराणसी: तिरंगा बर्फी/ठंडाई-लस्सी/कचौरी/बनारसी पान/लौंग लत्ता/मलइयो  70. जौनपुर: इमरती/मिठाई एटमबम/जौनपुरी मूली 71. गाजीपुर: मिर्च का अचार/मटर चाट/रसगुल्ला/जलेबी 72. चंदौली: काले चावल के उत्पाद (जैसे खीर)/गुलाब जामुन/लस्सी 73. सहारनपुर: शहद आधारित उत्पाद/चाट/घेवर 74. मुजफ्फरनगर: गुड़/चाट (टिक्की)/पेड़ा 75. शामली: गुड़ आधारित उत्पाद/चाट/मिठाई

मनातू की नई कहानी: नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब बन रहा शिक्षा का केंद्र

तरहसी (पलामू)  कभी नक्सलवाद, बारूद और दहशत के लिए कुख्यात रहा पलामू जिले का मनातू इलाका आज शिक्षा और उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है। यहां मनातू थाना परिसर में शुरू हुई सामुदायिक कोचिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले तो कठिन से कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। इस पहल से जुड़े सभी 25 छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वर्षों तक जिस क्षेत्र में शाम ढलते ही सन्नाटा डर में बदल जाता था, वहीं आज बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। मनातू थाना परिसर, जो कभी सुरक्षा और अपराध की चर्चाओं तक सीमित था, अब शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। पुलिस नहीं गुरुजी, थाना बना पाठशाला तत्कालीन थाना प्रभारी निर्मल उरांव ने अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा को मिशन बना लिया। उनके प्रयासों से थाना परिसर में सामुदायिक कोचिंग की शुरुआत की गई, जहां पुलिसकर्मी न केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं, बल्कि छात्रों को पढ़ाई में मार्गदर्शन भी देते हैं। यह कोचिंग मुख्य रूप से मजदूर और किसान परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई थी, जो आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिला, जिसका परिणाम आज शत-प्रतिशत सफलता के रूप में सामने आया है। रेशमी कुमारी ने हासिल किया 70 प्रतिशत अंक इस कोचिंग की छात्रा रेशमी कुमारी ने साइंस संकाय में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने बताया कि उनके पिता मजदूरी करते हैं और यदि पुलिस की यह पहल नहीं होती तो उनका आगे पढ़ना मुश्किल था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्मल उरांव बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं कराते थे, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते थे। उनका संदेश था.जिस हाथ में कलम मजबूत हो, वहां अंधेरा ज्यादा देर टिक नहीं सकता। ”मनातू की यह कहानी आज इस बात का प्रमाण बन गई है कि जब खाकी सिर्फ कानून नहीं, बल्कि बदलाव की जिम्मेदारी भी उठाती है, तो सबसे कठिन हालात में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। नक्सल से शिक्षा की ओर बदलता मनातू मनातू, जो कभी अफीम की खेती और नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब शिक्षा और विश्वास की नई पहचान बन रहा है। ग्रामीणों ने पहली बार पुलिस और जनता के बीच इतना आत्मीय और सकारात्मक रिश्ता महसूस किया है। पलामू एसपी कपिल चौधरी ने सभी सफल छात्रों को बधाई दी और कहा कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी मेहनत करने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।