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ग्रेटर नोएडा में जाम से मिलेगी राहत, हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और जेवर एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा में बढ़ते औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ने मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने और मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने की योजना पर चर्चा हुई है।  ग्रेटर नोएडा की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक करीब 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्रस्ताव दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के निर्माण से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और दोनों के बीच सफर का समय घटकर करीब 30 से 45 मिनट रह सकता है।  प्रस्ताव के तहत मौजूदा कनेक्टिविटी को करीब 15 किलोमीटर तक आगे बढ़ाकर ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और आवागमन को गति मिलने की उम्मीद है।  लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट तक एलिवेटेड रोड GNIDA ने मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) से जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक छह लेन की एलिवेटेड रोड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. यह सड़क वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाई जाएगी।  इस कॉरिडोर को मुख्य रूप से मालवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे लॉजिस्टिक्स हब से निकलने वाले सामान को सीधे एयरपोर्ट के एयर कार्गो टर्मिनल तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे माल परिवहन में समय की बचत होने के साथ शहर की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।  मास्टर प्लान 2041 में बदलाव की तैयारी ये सभी प्रस्ताव ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन की योजना का हिस्सा हैं. इसका मुख्य उद्देश्य शहर में मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग करना है. सोमवार को लखनऊ में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा की गई. बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार भी मौजूद रहे।  GNIDA के मुताबिक, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब ग्रेटर नोएडा की आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं, इनके विकसित होने के बाद क्षेत्र में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स हब से एयरपोर्ट के बीच यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने की उम्मीद है।  कुल मिलाकर, प्रस्तावित सड़क और एलिवेटेड कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा में फ्रेट ट्रैफिक को यात्री यातायात से अलग करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब, गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को नया बूस्ट मिल सकता है।   

CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, सत्य निकेतन हादसे के घायलों को ₹5 लाख की आर्थिक मदद

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने हादसे के पास स्थित एक अन्य इमारत को भी ध्वस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों को 5 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बिल्डिंग हादसे में घायल हुए लोगों से मुलाकात के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर पहुंची थी। घायलों से मुलाकात के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि घायलों की आर्थिक मदद के लिए राहत कोष से 5 लाख रुपये की मदद की जाएगी। साथ ही सीएम ने प्रशासन को आसपास की इमारतों की सुरक्षा जांच करने और जरूरत पड़ने पर खतरनाक बिल्डिंगो को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। MCD के 4 अधिकारी सस्पेंड इमारत ढहने की घटना के बाद नगर निकाय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, जिसके तहत एमसीडी के दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों अधीक्षण अभियंता रणबीर सिंह, अधिशासी अभियंता ललित कुमार गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित कर दिया गया। एमसीडी ने पूरी दिल्ली में इमारतों, विशेष रूप से ऊंचाई और मंजिल सीमाओं का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं के निरीक्षण का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अधिकारियों को शहर में सभी पांच मंजिला ढांचों को सील करने का निर्देश दिया है। बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को इस इमारत के गिरने से सात लोगों के मौत हो गई थी। जबकि 3 लोग अभी भी अस्पताल में गंभीर है। इस इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट व्यवस्था के रूप में किया जा रहा था। पुलिस ने FIR दर्ज कर इस बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था।

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बार-बार ऐसी घटनाओं को लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले पर एमकिस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अदालत को हादसे की जानकारी दी. उन्होंने सत्य निकेतन में अप्रैल 2022 में भी बिल्डिंग गिरने का हवाला देते हुए राजधानी के सभी PG हॉस्टलों, निजी हॉस्टलों की सुरक्षा जांच और ऑडिट- निरीक्षण करने की सिफारिश की।  एमिक्स क्यूरी की रिपोर्ट में कहा गया है? सत्‍य निकेतन में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं. सत्य नितेकन दिल्ली यूनिविर्सिटी साउथ कैंपस के पास स्थित है, यह छात्रों के रहने के लिए एक बड़ा केंद्र बन चुका है।  यहां बड़ी संख्या में पीजी, प्राइवेट होस्टल, मेस खाने-पीने की दुकानें और दूसरे व्यवसायिक संस्थान चल रहे हैं।  अप्रैल 2022 में यहां एक बिल्डिंग गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी और 4 लोग घायल हुए थे।   अब दोबारा ऐसी घटना होने से यह गंभीर सवाल उठता है कि इमारतों की नियमित जांच, खतरनाक इमारतों की पहचान और भवन नियमों को लागू करने की व्यवस्था सही तरीके से काम कर रही है या नहीं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में कॉलेज और यूनिवर्सिटी के आसपास मौजूद सभी PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के रहने की ऐसी जगहों की समय सीमा के अंदर सुरक्षा जांच की जानी चाहिए।  – बिल्डिंग का नक्शा, निर्माण, बेसमेंट, जमीन का उपयोग, मजबूती, आग से सुरक्षा और आने-जाने के रास्ते जैसे सुरक्षा मानकों की जांच होनी चाहिए।  रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है।  रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में बहुमंजिला इमारत ढह गई थी.  करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं. इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze' नाम से बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों के बचाए जाने की जानकारी दी गई है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे की सटीक वजह की जांच जारी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और हादसे से ठीक पहले वहां पानी भरने की भी सूचना थी.  दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 290 और 125 के तहत FIR दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान में गिरफ्तार कर लिया गया।  हादसे के सिलसिले में MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं।  अमीकस क्यूरी ने बताया है कि सत्य निकेतन से सटी एक अन्य इमारत P-213 को भी खतरनाक पाया गया है और MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं।  दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों की जांच की सिफारिश रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में PG, निजी हॉस्टल और अन्य छात्र आवास चल रहे हैं. कई बार रिहायशी संपत्तियों में अतिरिक्त निर्माण, बदलाव या उपयोग में परिवर्तन कर इन्हें संचालित किया जाता है. इसलिए इनकी जांच में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, वास्तविक निर्माण और मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, भूमि उपयोग, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रवेश-निकास की जांच होनी चाहिए।  रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई हुई.  हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी PG हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट में यह बताना होगा कि PG हॉस्टल वाली इमारतें जरूरी अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन तो नहीं हुआ।  हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक की नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि निर्माण और मरम्मत का काम बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप कराना संबंधित प्राधिकरण का दायित्व है।  कोर्ट ने MCD को यह भी जांचने को कहा है कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनी थीं या नहीं. अगर निर्माण बिना अनुमति या बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है.  मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।  दरअसल सुप्रीम कोर्ट दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में हुए अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई कर रहा है. इससे पहले अदालत दिल्ली, जयपुर और पटना समेत कई इलाकों में अवैध निर्माणों को लेकर कड़े आदेश जारी कर चुका है। 

दिल्ली वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, हजारों नाम ड्राफ्ट रोल से गायब; ASDD सूची में भी गड़बड़ी

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कई गड़बड़ियां सामने आ रही है। कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए है। मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद ने वोटर लिस्ट में नाम कांता प्रसाद होने के चलते उसे बदलने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, उसका निपटारा नहीं हो सका। जब ड्राफ्ट रोल जारी हुआ तो उन्हें मृतक की सूची में डाल दिया गया। अब वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे क्या करें। 'जन सरोकार', 'एमकेएसएस' और 'वोटर अधिकार मंच' के बैनर तले वॉलंटियर्स ने वाई-ब्लॉक के 8 पोलिंग बूथों पर करीब 10 हजार वोटरों का घर-घर जाकर सर्वे किया। हाल में दिल्ली में चल रहे SIR में मिल रहीं गड़बड़ियां कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद के आवेदन को मृतक की सूची में डाल दिया गया। घर पर रह रहे लोगों को सरकारी कागज में शिफ्टेड दिखा दिया गया आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान इस पीपुल्स ऑडिट की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें खुलासा हुआ कि सैकड़ों ऐसे लोग जो अपने घरों पर रह रहे हैं, उन्हें सरकारी कागजों में शिफ्टेड दिखा दिया गया। कुछ को डेथ की सूची में भी डाला गया है। ऑडिट आंकड़ों के मुताबिक वाई ब्लॉक के लगभग 9,600 रजिस्टर्ड वोटरों में से सिर्फ 5,800 लोगों के नाम ही ड्राफ्ट SIR रोल में मिल सका। वहीं करीब 2,800 लोगों को एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लीकेट (ASDD) की लिस्ट में डाल दिया गया, जबकि 1,800 से ज्यादा वोटर ऐसे निकले जिनका नाम न तो ड्राफ्ट रोल में था और न ही ASDD लिस्ट में, हालांकि उन्होंने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डाला था। सुप्रीम कोर्ट में पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई जन सुनवाई के दौरान पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन लोकुर, बेजवाड़ा विल्सन, एनी राजा और जनरल अनिल वर्मा समेत कई जानी-मानी हस्तियों की जूरी के सामने पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। हाउस नंबर 2267 के निवासी कांता प्रसाद ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और पिछली बार वोट भी दिया था, लेकिन नाम सुधरवाने की अर्जी देने के बावजूद उन्हें वोटर लिस्ट में डेथ में दर्ज कर दिया गया। आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 में दिल्ली में 1.56 करोड़ वोटर थे, जो SIR शुरू होने तक घटकर 1.45 करोड़ रह गए, यानी सीधे 11 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम कट गए। बीएलओ ने दूसरे फॉर्म तक नहीं दिए वोटर अधिकार मंच की एक अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बीएलओ पर सबकुछ निर्भर था। बीएलओ ने जिनके फॉर्म गुम हो गए, उन्हें दूसरे फॉर्म तक मुहैया नहीं कराए। अगर ड्राफ्ट रोल से पहले वॉर्ड कमेटियों या ग्राम सभाओं की मदद ली जाती, तो कई लोगों के बारे में सटीक जानकारी मिलती।

दिल्ली बिल्डिंग हादसे के बाद पहली बार DC रैंक के अधिकारी पर गिरी गाज, MCD ने किया सस्पेंड

नई दिल्ली  सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह सहित पांच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। MCD के इतिहास में पहली बार किसी डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी को सस्पेंड किया गया है। सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में सस्पेंड किए गए साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वह करीब तीन साल पहले डेपुटेशन पर MCD में आए थे। पहले उन्हें सिविल लाइन जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। उनके कार्यकाल में ही जनवरी 2025 को बुराड़ी इलाके में पांच मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त हुई थी। इस हादसे में भी 7-8 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें करीब आठ महीने पहले साउथ जोन का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया था। बुराड़ी में भी इनके रहते गिरी थी 5 मंजिला इमारत सस्पेंड किए गए सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रणवीर सिंह को साल 2019 में 56जे के तहत नौकरी से निकाल दिया गया था। वह लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद कुछ महीने पहले ही बहाल हुए थे, उन्हें साउथ जोन में तैनात किया गया था। एग्जिक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल अभी कुछ महीने पहले ही असिस्टेंट इंजीनियर से प्रमोट होकर एग्जिक्यूटिव इंजीनियर बने थे। अप्रैल 2026 से वह साउथ जोन के बिल्डिंग विभाग दो में तैनात थे। सस्पेंड होने वाले असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार लगभग तीन साल से बिल्डिंग विभाग दो में तैनात हैं। PMO ने तुरंत रिपोर्ट मांग ली थी MCD के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद PMO ने रिपोर्ट मांग ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्टाफ को घर से बुलाकर बिल्डिंग हादसे की डिटेल रिपोर्ट तैयार कर रविवार रात में ही पीएमओ को भेजी गई। इसके बाद अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लिया गया। यह मामला सीनियर स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

लालकिला की रामलीला में फिल्मी सितारों का जलवा, रावण बनेंगे राजप्रेमी और नारद का किरदार निभाएंगे पेटल

नई दिल्ली रामलीलाओं की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। विभिन्न रामलीलाएं अपने यहां आयोजन को लेकर कई प्रयोग कर रही है। कहीं रावण दहन पर फोकस रहेगा, कहीं फिल्मी कलाकार मुख्य किरदार निभाएंगे। द्वारका सेक्टर-10 में इस साल रामलीला का 15वां आयोजन भव्य स्तर पर किया जाएगा। द्वारका श्री रामलीला सोसायटी की ओर से रविवार को सेक्टर-10 स्थित रामलीला मैदान में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया गया। भूमि पूजन कार्यक्रम में सोसायटी के चेयरमैन और मुख्य संरक्षक आकाश राजेश गहलोत समेत पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पूजा-अर्चना और हवन किया। इस बार रामलीला का प्रमुख आकर्षण 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा। आकाश राजेश गहलोत ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण पर्व है राजप्रेमी बनेंगे रावण, पेटल निभाएंगे नारद का किरदार लालकिला मैदान में इस बार होने वाली लव कुश रामलीला में फिल्म और टीवी जगत के चर्चित कलाकार अलग-अलग किरदार निभाएंगे। अभिनेता राजप्रेमी रावण जबकि पेटल कंवरजीत सिंह नारद मुनि की भूमिका में नजर आएंगे। अभिनेता और गायक शंकर साहनी केवट का किरदार निभाएंगे। 11 से 21 अक्टूबर तक होगी लव कुश रामलीला, 20 अक्टूबर को रावण दहन लव कुश रामलीला कमेटी के प्रेसिडेंट अर्जुन कुमार ने कहा कि रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा और 20 अक्टूबर को रावण दहन किया जाएगा। रामलीला के लिए 140 फुट लंबे, 60 फुट चौड़े और 45 फुट ऊंचे चार मंजिला मंच का निर्माण किया जा रहा है। इसे मदुरै के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। वहीं, कमेटी चेयरमैन पवन गुप्ता ने बताया कि इस महीने की 20 सितंबर को भूमि पूजन होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि इसमें केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोगों को भी आमंत्रित किया गया है।

दिल्ली में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 मौतें, CM रेखा गुप्ता के निर्देश पर 5 अफसर निलंबित

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को गिरी 5 मंजिला इमारत मामले में दिल्ली सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के मुताबिक, सीएम रेखा गुप्ता के सख्त निर्देश के बाद एमसीडी ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। जिसमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, रणवीर सिंह, ललित कुमार गोयल, सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। बिल्डिंग के मालिक की तलाश के लिए गठित की गई 10 टीमें वहीं बिल्डिंग के गिरने से हुए हादसे के संबंध में भवन मालिक हरिराम बंसल को गिरफ्तार करने के लिए 10 अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद उसे ढूंढने और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इन टीमों में स्थानीय जिला पुलिस और विशेष स्टाफ के कर्मियों के साथ-साथ जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी 10 टीमों का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अतिरिक्त डीसीपी) रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी अभियान की निगरानी कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर तलाशी का समन्वय कर रहे हैं। सत्य निकेतन हादसे ने खोली सिस्टम की पोल पुलिस के अनुसार, हरिराम का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने के प्रयासों के तहत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने दर्ज की FIR पुलिस ने रविवार को हरिराम बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ इमारत गिरने के संबंध में एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार, इमारत का उपयोग पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में किया जा रहा था और बेसमेंट में कथित तौर पर नवीनीकरण का काम चल रहा था, तभी अचानक इमारत गिर गई। इस घटना में सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 12 लोगों को बचा लिया गया है और हादसे वाली जगह पर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है।

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट की फटकार, ‘सिर्फ मालिक नहीं, MCD भी जिम्मेदार’

 नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी।  यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए।  हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है।  HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है।  इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा. चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली HC ने खारिज की याचिका; 21 सितंबर तक जेल में रहेंगे

नई दिल्ली एससी-एसटी और पॉक्सो ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को डबल झटका लगा है। एक तरफ उसे निचली अदालत ने उसे 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है तो दूसरी तरफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर करके राहत की उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया। स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कराने के लिए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जस्टिस नवीन चावला और रविंद्र डुडेजा की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने तत्काल इस पर सुनवाई को सहमति दी थी। दूसरी तरफ, अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह की अदालत ने मारपीट मामले में हिंदुत्ववादी 'इन्फ्लुएंसर' स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अब भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी है। भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया गया था। दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट के आरोप में भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। रविवार को भारद्वाज को एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। कैसे गिरफ्तार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, 'वह पिछले तीन दिन से हिरासत में है, मैं अनुरोध करता हूं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आज ही सूचीबद्ध की जाए।' दिल्ली पुलिस ने 5 जून को भारद्वाज को तब गिरफ्तार किया गया जब उसके एक वीडियो की वजह से करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की घटना ने अचानक तूल पकड़ लिया। सीजेपी आंदोलन के दौरान भारद्वाज और एक दलित शख्स के बीच मारपीट हुई थी। भारद्वाज ने हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उसने मारपीट करके सिर फोड़ दिया, लेकिन राजनीतिक पहुंच की वजह से बच गया। उसने कहा था, ‘मैंने सिर फोड़ दिया… क्या आप जानते हैं कि यह अपराध किस धारा के तहत आता है? धारा 307। उसे 7 टांके लगे थे।’ इसके बाद सीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने पर धरना देकर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने उसके खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया था। पॉक्सो ऐक्ट में क्यों केस शुक्रवार को पुलिस ने नाबालिग छात्रा की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक नई शिकायत दर्ज की। शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी प्राथमिकी में जोड़ी है। पीड़िता ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें भेजी गईं।

दिल्ली में पुरानी इमारतों पर बड़ा एक्शन, 20-30 साल पुराने भवनों में नहीं चलेंगे हॉस्टल और नर्सिंग होम

नई दिल्ली दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में कई लोग घायल भी हो गए. यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई. जो ब्लिडिंग गिरी, उसमें पीजी चलता था. जिसमें कई कॉलेज छात्र रहा करते थे. इस हादसे के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. इधर आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी पॉलिसी बना रहे हैं जिसके तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा।  सीएम ने आगे कहा कि इसके बिना उन्हें उस जगह पर कोई भी सार्वजनिक सेवा या सुविधा—जैसे PG अकोमोडेशन, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य गतिविधि—चलाने का अधिकार नहीं होगा. इस संबंध में कड़े नियम लागू किए जाएंगे।  जिम्मेदार अधिकारी किए जाएंगे सस्पेंड दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन के हादसे पर यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. सभी अधिकारियों और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़े निर्देश दिए गए हैं; इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।  जिम्मेदार अधिकारियों का सस्पेंशन आज हीः सीएम सीएम ने यह भी कहा कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे. हम इन छात्रों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को कोई परेशानी न हो. सरकार की ओर से हम सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।  मंत्री बोले- स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अनिवार्य की नीति बनेगी दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर कहा, "बचाए गए 12 लोगों में से 6 की मौत हो गई है. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं. आज मुख्यमंत्री ने मेयर और MCD कमिश्नर के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि यहां चल रहे PG, हॉस्टल और सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाली नीति तुरंत बनाई जाए. स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के बिना उन्हें काम करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।