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सोयाबीन किसानों को राहत, खरीफ 2026 में भावांतर योजना लागू करने की स्वीकृति

जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति : अन्नदाताओं के हक में बड़ा फैसला प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए 27,050 करोड़ रूपये की स्वीकृति जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रूपये की स्वीकृति निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यालय स्थापना के लिए 24 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076 करोड़ 37 लाख रूपये की स्वीकृति विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए 15,557.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़ रूपये की स्वीकृति आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रूपये की स्वीकृति राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रूपये की स्वीकृति राज्य सूचना आयोग की स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 71 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। कैबिनेट ने राज्य में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए शत-प्रतिशत शासकीय स्वामित्व वाली 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी' के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 'पीएम-आशा' योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई।मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये तथा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की योजनाओं की निरंतरता को मंजूर की गई। प्रदेश में आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 5,232 करोड़ रुपये एवं शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की निरंतरता की स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा व मैहर में महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों तथा जनजातीय सांदीपनि विद्यालयों के छात्र परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा। कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा। इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को 'मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013' के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनाँमिक हबो के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा। विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। सोयाबीन उपार्जन पर उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' ( पीएम-आशा) के तहत संचालित 'प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम' (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक … Read more

राहुल गांधी पर मंत्री विश्वास सारंग का तीखा बयान, देश को कमजोर करने का लगाया आरोप

भोपाल  मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश की अर्थव्यवस्था और व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और कल्याण के कार्य हो रहे हैं तथा अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है। इसके बावजूद विपक्ष देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि उन्हें लगता है कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेता देश की अर्थव्यवस्था तथा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर भारत को कमजोर करना चाहते हैं। मैं यह बात पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर नहीं बल्कि भारत के नागरिक के रूप में कह रहा हूं। राहुल गांधी कठपुतली बन गए हैं सारंग ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाने के लिए देश-विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। देश के देशभक्त नागरिक भारत को विकास के रास्ते से भटकने नहीं देंगे और न ही किसी को देश में अव्यवस्था फैलाने की अनुमति देंगे। विपक्ष नाकामिया छिपाने एसआईआर को मुद्दा बना रहा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए सारंग ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को विरोध करने और अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। विपक्ष अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एसआईआर को मुद्दा बना रहा है। राहुल गांधी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संस्थागत संरचना की पर्याप्त जानकारी नहीं है। संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता को संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है। चुनाव आयोग का अपना अलग कर्मचारी कैडर नहीं होता। आयोग के फैसलों को लागू करने में राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया भी राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें लेखपाल, शिक्षक और उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) जैसे अधिकारी शामिल हैं। …तो कांग्रेस कई राज्यों में कैसे जीतती? सारंग ने सवाल उठाया कि, यदि चुनाव आयोग चुनावों में हेरफेर करता, तो कांग्रेस विभिन्न राज्यों में चुनाव कैसे जीतती? उन्होंने प्रियंका गांधी के लोकसभा पहुंचने और हिमाचल प्रदेश, केरल तथा कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें बनने का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले विपक्ष को तथ्यों और ठोस आधार के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। चुनाव आयोग की आलोचना करने के बजाय कांग्रेस को अपनी चुनावी विफलताओं और राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए।

मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं के 4,878 पदों पर होगी भर्ती, आदिवासी जिलों पर विशेष फोकस

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी और शहरी इलाकों में जमीनी स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 4,878 आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के चयन को मंजूरी दे दी है। अगस्त 2022 के बाद यह पहला मौका है जब इतने बड़े पैमाने पर यह भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिससे राज्य के दूर-दराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी हद तक बढ़ेगा। 614 सुपरवाइजरों की भी भर्ती इस नए भर्ती अभियान के तहत कुल 4,264 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 614 पद उनके पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के लिए तय किए गए हैं। भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनका विभाजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है, ताकि हर जरूरतमंद तक स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें। ग्रामीण और शहरी इलाकों में क्या होगा बंटवारा? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चुनी जाने वाली कुल आशा कार्यकर्ताओं में से 3,062 कार्यकर्ताओं की तैनाती ग्रामीण इलाकों में की जाएगी, जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई तरह की चुनौतियां बनी रहती हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों की बस्तियों और वार्डों के लिए 1,202 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, ताकि शहरी गरीबों को भी बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके। आदिवासी जिलों पर रहेगा विशेष जोर दुरुस्त स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत वाले प्रदेश के 20 आदिवासी-प्रधान जिलों के लिए कुल 1,251 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 1,051 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 200 पद पर्यवेक्षकों के शामिल हैं। इन आदिवासी जिलों के ग्रामीण अंचलों में 956 आशा कार्यकर्ता और शहरी हिस्सों में 95 कार्यकर्ता मोर्चा संभालेंगी, जिससे वहां मातृ मृत्यु दर और शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग और जनता के बीच की मजबूत कड़ी विशेषज्ञ मानते हैं कि आशा कार्यकर्ता स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करती हैं। वे गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के दौरान मिलने वाली जरूरी जांच (एंटीनेटल केयर), संस्थागत प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और पोषण तथा हेल्थकेयर के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इस नई भर्तियों से न केवल रिमोट इलाकों में हेल्थ सर्विस डिलीवरी मजबूत होगी, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी समय पर आम जनता तक पहुंच सकेगी।

MP के ग्लोबल स्किल पार्क के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट, 97% तक दर्ज हुआ प्लेसमेंट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्लोबल स्किल पार्क के अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट प्राप्त प्रशिक्षणार्थियों को दी बधाई गल्फ क्षेत्र में कार्य करेंगे 27 प्रशिक्षणार्थी संस्थान में संचालित है 9 तकनीकी पाठ्यक्रम संस्थान में प्रशिक्षित युवाओं की गत वर्षों में दर्ज की गई 97 प्रतिशत प्लेसमेंट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क भोपाल के 27 प्रशिक्षणार्थियों ने मंत्रालय में भेंट की। संस्था के इन प्रशिक्षणार्थियों ने गल्फ क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके सफल करियर तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात के दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने अपने तकनीकी प्रशिक्षण, चयन प्रक्रिया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार प्राप्त करने की यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित थे। संस्थान उपलब्ध करा रहा है तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योग केंद्रित कौशल विकास सुविधाएं उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षणार्थियों में एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड ऑटोमेटिव टेक्नोलॉजी तथा एडवांस्ड मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। इन प्रशिक्षणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नियुक्ति, एसएसआर ग्लोबल स्किल्स पार्क में प्रदान किए जा रहे तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योग केंद्रित कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्थान में पिछले वर्षों के दौरान लगभग 97 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज की गई। यहां प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को विभिन्न तकनीकी एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश की 10 आईटीआई के लिए हब के रूप में कार्य कर रहा है ग्लोबल स्किल पार्क मंत्री टेटवाल ने इस अवसर पर बताया कि संस्थान में 9 उन्नत तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल डिवाइसेस एंड IoT इंटीग्रेशन), एडवांस्ड एयर कंडीशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन एडवांस्ड नेटवर्किंग एंड सिस्टम्स एडमिनिस्ट्रेशन, एडवांस्ड मैकेनिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मेकाट्रॉनिक्स एंड इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, एडवांस्ड मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल सर्विसेज तथा एडवांस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग (CNC एंड प्रिसिजन इंजीनियरिंग) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संस्थान प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 और हब एंड स्पोक मॉडल के अंतर्गत भी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह संस्थान प्रदेश की 10 आईटीआई के लिए हब के रूप में भी कार्य कर रहा है।  

यादव ने सचिव जनसंपर्क विभाग का कार्यभार ग्रहण किया

यादव ने सचिव जनसंपर्क विभाग का कार्यभार ग्रहण किया भोपाल भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी भरत यादव ने गुरुवार को मंत्रालय,वल्लभ भवन में सचिव जनसंपर्क विभाग का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उप सचिव कैलाश बुन्देला ने यादव का स्वागत किया। नवागत सचिव भरत यादव ने विभागीय कार्यों की जानकारी भी ली तथा आवश्यक निर्देश दिये।विभाग के कर्मचारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

MP में लाडली बहना योजना का पोर्टल फिर खुलने के संकेत, नए नाम जुड़ने का इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में 14 अक्टूबर को लाडली बहनों के खाते में उमरिया से सीएम मोहन यादव ने योजना की 41वीं किस्त ट्रांसफर की है। इसके साथ ही लाडली बहना योजना की लभार्थियों के खाते में 1500-1500 रुपए पहुंच गए हैं। योजना की शुरुआत के बाद से नए लाभार्थियों के नाम नहीं जुड़े हैं। अब सरकार के मंत्री ने यह संकेत दिए हैं कि जल्द ही पोर्टल खुलेंगे। लाडली बहना योजना में जुड़ेंगे नए नाम मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि लाडली बहनों के खाते में राशि भेजी गई है। उन्होंने कहा कि सीएम मोहन यादव ने यह भी घोषित किया है कि निकट भविष्य में जो लाडली बहना, लाडली बहना योजना से बच गई हैं। उनके नाम भी लाडली बहना पोर्टल पर अंकित किए जाएंगे। जल्द ही खुलने वाला है पोर्टल मंत्री ने कहा कि लाडली बहना योजना को लेकर पोर्टल जल्द ही खुलने वाला है। नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि जो बहनें इस योजना का लाभ लेने से बच गई हैं, उन्हें हम इस योजना से जोड़ेंगे। वहीं, पोर्टल कब से खुलेंगे, इसे लेकर उन्होंने कहा कि इसकी समय सीमा अभी तय नहीं है। सीएम ने क्या दिए हैं निर्देश मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने बताया कि सीएम मोहन लाल यादव ने अधिकारियों को यह आकलन करने के निर्देश दिए हैं कि वर्तमान में कितनी पात्र महिलाएं इस योजना के लाभ से बाहर रह गई हैं. इस आंतरिक रिपोर्ट और समीक्षा के बाद पोर्टल को दोबारा खोलने को लेकर आधिकारिक फैसला लिया जाएगा।  योजना में नए नाम जोड़ने की तैयारी के बीच अभी पंजीयन की समय-सीमा घोषित नहीं की गई है. मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, पहले योजना में छूटी हुई महिलाओं की संख्या का आकलन किया जाएगा. इसके बाद पंजीयन की प्रक्रिया और पोर्टल खोलने की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।  62000 करोड़ रुपए की राशि भेजी जा चुकी मध्य प्रदेश की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को योजना की 41वीं किश्त की सौगात मिल गई है। राज्य सरकार बहनों के बैंक खातों में हर माह 1500 रुपए की राशि ट्रांसफर कर रही है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। बुधवार को भेजे गए 1834 करोड़ वहीं, बुधवार को उमरिया से सिंगल क्लिक के माध्यम से 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 41वीं किस्त की 1834 करोड़ की राशि अंतरित की गई है। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों में प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग का बजट केवल 350 करोड़ रुपए था, लेकिन हमारी सरकार ने 47 हजार करोड़ के बजट का प्रावधान महिला कल्याण के लिए किया है। योजना की शुरुआत से नहीं जुड़े हैं नए नाम गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की शुरुआत 2023 में हुई थी। उस समय लाभार्थियों की संख्या 1.31 करोड़ थी। उम्र की सीमा 60 वर्ष है। समय के साथ लाभार्थियों की संख्या घटती गई। अब मध्य प्रदेश में लभार्थियों की संख्या 1.25 करोड़ है। शुरुआत में योजना की लभार्थियों को 1000 रुपए मिलते थे। अब हर महीने 1500 रुपए मिल रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने इसे 3000 रुपए तक ले जाने का वादा किया है। लाड़ली बहना योजना: महिलाओं को अब क्या करना चाहिए? जिन महिलाओं का नाम अभी तक योजना में शामिल नहीं हुआ है, उन्हें सरकारी घोषणा पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल पोर्टल खुलने की तारीख तय नहीं हुई है। इसलिए किसी अनधिकृत वेबसाइट या व्यक्ति को पंजीयन के नाम पर पैसे देने से बचें। नए आवेदन शुरू होने पर पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांचें। केवल पोर्टल खुलने की घोषणा से यह तय नहीं होता कि हर आवेदक को योजना का लाभ मिल जाएगा। लाभ के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। Ladli Behna Yojana Update का मुख्य बिंदु यह है कि मध्य प्रदेश सरकार छूटी हुई महिलाओं की संख्या जुटाने और उनके पंजीयन की संभावनाओं पर काम कर रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पोर्टल कब खुलेगा और नए नाम जोड़ने के लिए क्या नियम तय किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में मकान-दुकान बनाने वालों को राहत, बिल्डिंग परमिशन में नजूल NOC का झंझट होगा खत्म

भोपाल   मध्य प्रदेश में नया मकान, दुकान या अन्य भवन निर्माण कराने वालों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन के साथ नजूल एनओसी (Nazul NOC) की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्तावित संशोधन पर आम लोगों से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि, अभी यह बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम अधिसूचना जारी होने और संशोधन लागू होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी। 15 दिन में दे सकेंगे दावे-आपत्तियां और सुझाव नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण की अनुमति से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए मसौदा जारी किया है। इसमें आम नागरिकों और संबंधित पक्षों को प्रस्ताव पर अपनी राय देने का अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में प्राप्त दावे-आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार संशोधन लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। नक्शा पास कराने के लिए नहीं लगानी होगी नजूल NOC की प्रमाणित प्रति प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर भवन निर्माण का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया पर पड़ेगा। फिलहाल मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के तहत निर्माण अनुमति के आवेदन के साथ नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति देना जरूरी है। यदि प्रस्तावित संशोधन लागू हो जाता है, तो आवेदन के साथ यह दस्तावेज लगाने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे आवेदकों को दस्तावेज जुटाने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। अभी निर्माण अनुमति के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं? मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 16 के उपनियम (11) के तहत भवन निर्माण की अनुमति के आवेदन के साथ भू-स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज देने होते हैं। इनमें शामिल हैं:     विक्रय विलेख या पट्टा विलेख: जमीन के स्वामित्व से संबंधित रजिस्ट्री या पट्टे का दस्तावेज।     खसरा, नक्शा और खतौनी अभिलेख: भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड।     नजूल NOC की प्रमाणित प्रति: मौजूदा नियम के तहत जरूरी दस्तावेज, जिसे हटाने का प्रस्ताव है।     प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर तीसरे दस्तावेज की अनिवार्यता समाप्त हो सकती है, जबकि पहले दो श्रेणियों के दस्तावेज देने होंगे। नियम 16 के उपनियम (11) में क्या बदलाव होगा? ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, नियम 16 के उपनियम (11) के खंड (ग) को हटाने का प्रस्ताव है। इसी खंड में नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता शामिल है। वहीं, खंड (क) और खंड (ख) में बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इसका अर्थ है कि संशोधन लागू होने के बाद भी आवेदकों को रजिस्ट्री या पट्टा विलेख और भूमि से संबंधित खसरा, नक्शा व खतौनी जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आम लोगों को क्या फायदा होगा? प्रस्तावित बदलाव से मकान, दुकान और अन्य भवन बनवाने वालों के लिए निर्माण अनुमति की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जुटाने की बाध्यता हटने से कागजी कार्रवाई कम हो सकती है और आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय बच सकता है। ये है अभी पुराना नियम मप्र भूमि विकास नियम 2012 के नियम 16(11) के तहत निर्माण अनुमति आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाणित करने वाले 3 दस्तावेज अनिवार्य हैं। इनमें विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री), खसरा-नक्शा और खतौनी अभिलेख तथा नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति शामिल है। संशोधन के लिए ये प्रस्ताव संशोधन प्रस्ताव के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक नियम 16 के उपनियम (11) के इसी खंड (ग) को पूरी तरह विलोपित किया जाएगा। जबकि खंड क और ख यथावत रहेंगे। यानी अब आवेदकों को केवल रजिस्ट्री/पट्टा और खसरा, खतौनी-नक्शा ही आवेदन के साथ लगाना होगा। 15 दिन में मांगे सुझाव और दावे-आपत्तियां सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता, जानकारों और प्रभावित पक्षों से दावे-आपत्तियां और सुझाव बुलाए हैं। इसके लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। जैसे ही यह 15 दिन की समय-सीमा पूरी होगी, सरकार इन सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगी। इसके तुरंत बाद इस संशोधन को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इससे आम नागरिकों का समय बचेगा। साथ ही घर बनाने की शुरुआत बिना किसी फालतू कागजी झंझट के हो सकेगी। (Nazul NOC) नजूल एनओसी क्या है? नजूल एनओसी (Nazul NOC) राजस्व विभाग की ओर से जारी किया जाने वाला एक अनापत्ति प्रमाण पत्र है। इससे पता चलता है कि जिस जमीन पर आप घर या दुकान बनाना चाहते हैं, वह सरकारी नजूल जमीन नहीं है। साथ ही, उस पर निर्माण को लेकर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। बिल्डिंग परमिशन देते समय प्रशासन यह दस्तावेज इसलिए मांगता था, ताकि सरकारी या लीज पर दी गई जमीन पर अवैध निर्माण न हो। लेकिन कई बार अपनी रजिस्ट्री वाली जमीन के लिए भी लोगों को यह कागज बनवाने में महीनों लग जाते थे। इसके लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। 1. मध्य प्रदेश में अब बिल्डिंग परमिशन लेने के लिए कौन से दस्तावेज लगेंगे? नए नियम के लागू होने के बाद आपको केवल दो प्रमुख दस्तावेजों की जरूरत होगी। पहला आपकी जमीन का विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री)। दूसरा खसरा नक्शा तथा खतौनी अभिलेख। नजूल एनओसी की अनिवार्यता खत्म की जा रही है। 2. एमपी में नजूल एनओसी खत्म करने का यह नया नियम कब से लागू होगा? सरकार ने संशोधन के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता से 15 दिन के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इस 15 दिन की अवधि के बाद प्राप्त सुझावों पर विचार कर इस नियम को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। 3. एमपी में नजूल एनओसी खत्म होने से आम आदमी को क्या फायदा मिलेगा? पहले घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए नजूल विभाग से एनओसी की प्रमाणित प्रति लेना अनिवार्य था। इसमें बहुत समय खराब होता था। दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस एनओसी की बाध्यता खत्म होने से बिल्डिंग परमिशन का काम बेहद आसान और तेज गति से हो सकेगा।  

मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

 इंदौर  मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी। पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा। आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें 1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं? आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा। निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं। 2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे। इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं। 3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। 4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा? नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा। 5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। 6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है। 7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है। 8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा? नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है। कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।। 1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे। 2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं। नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। 3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा। जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा। 4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा। … Read more

वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए 35 गांवों के आदिवासी, जमीन के दस्तावेज लेकर भोपाल आएंगे

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 35 गांवों के आदिवासी इकट्‌ठा होकर भोपाल आ रहे हैं। वे यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलेंगे। उन्हें वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में बताएंगे। वे कब्जे की जमीन के दस्तावेज भी दिखाएंगे। वन विभाग ने पिछले दिनों सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए थे। कुएं को मिट्टी से भर दिया था।इसके बाद शिवराज ​सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे थे। वन विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ धरना भी दिया था। अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाए, कार्रवाई करें गांव में तीन दिन से आंदोलन चल रहा है। इसमें शामिल रमेश बारेला ने बताया कि धरने का तीसरा दिन है। उनकी प्रमुख मांग है कि कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। वर्षों से जिस जमीन पर कुआं बनाकर खेती कर रहे थे, उस जमीन का वैध अधिकार यानी पट्टा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के रहने, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करने के साथ फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।बारेला ने कहा कि आदिवासी परिवार बाहर से आकर नहीं बसे। उसी वन क्षेत्र में रहते आए हैं, जहां उनके पूर्वज रहते थे। जंगल से उनकी आजीविका जुड़ी है। मकान टूटने से 12 परिवार बेघर हो गए हैं। 35 से अधिक गांवों में खेती रोकने का आरोप आदिवासी समाज का आरोप है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। समाज ने इटावा खुर्द, जामुल झील पानी, पांगरी, छापरी, कोसमी, सनकोटा, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर, लावापानी, बोरपानी, डोंगला पानी, बेड़ापानी, सिराली, बावड़ी खेड़ा, अमीरगंज, सुरई, खजूरी, आमाझिर, चतरकोटा, ठीकरी खेड़ा, यारनगर, मथार, भूरीटेक कावड़, ढाबा, पाट तलाई, भिलाई, मोगरा खेड़ा, भूराखेड़ा, सेवनिया, मंजाखेड़ी छाप, मोगली भुराट, गाडरीपुरा, झोलियापुरा और बीलपाटी समेत कई गांवों का उल्लेख किया है। खिवनी से विदिशा तक बेदखली की शिकायतें आदिवासी समाज ने खिवनी अभयारण्य, बुधनी के यार नगर और कोसमी के अलावा विदिशा जिले के ग्यारसपुर, मेहंदीपुर, डगरवाड़ा, बदनपुर, शमशाबाद, लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। समाज का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यार नगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। वहीं विदिशा के ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है।आदिवासी समाज ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, पुराने पट्टों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों के परीक्षण तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है।रमेश बारेला ने स्पष्ट किया कि कृषि मंत्री के पदयात्रा में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक, आदिवासी समाज के लोग ही पदयात्रा करेंगे। प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कब्जे अवैध बताए दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने गलत तरीके से वन भूमि पर कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे जिलों से आए लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर सागौन के पौधे काटे और खेती के लिए झोपड़ियां बनाईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी।वर्ष 2021 में निगम ने इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया गया। गूगल अर्थ की तस्वीरों को बनाया आधार जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइम लाइन तस्वीरों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 तक संबंधित वन भूमि खाली दिखाई दे रही थी, जबकि वर्ष 2022 से वहां झोपड़ियां बनाकर खेती के लिए कब्जा किए जाने के संकेत मिले। रिपोर्ट में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों का उल्लेख है। भैंरोंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान बेदखल किए गए सभी 9 कब्जा धारियों के मूल गांव सिंधपुर और हल्लीबन नगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आईडी कार्ड दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान 9 झोपड़ियां हटाकर संबंधित जमीन को मलबे से भर दिया गया। पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी भी कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, भैंरोंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र में कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 की 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। कार्रवाई के विरोध में वन विकास निगम के डिपो के बाहर तीन दिन से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। अब आदिवासी समाज मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए भोपाल कूच की तैयारी में है।

स्कॉर्पियो में गुप्त बॉक्स बनाकर रखे थे 1.29 करोड़ रुपये, तीन थानों की पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा

मंदसौर/गरोठ मंदसौर पुलिस ने बिना नंबर की स्कॉर्पियो से एक करोड़ 29 लाख कैश पकड़ा है। रकम कार में अलग-अलग बॉक्स बनाकर छिपाई गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश के दो लोगों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ कर रही है कि रकम किसकी है, कहां से आई और कहां ले जाई जा रही थी? इसके नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े होने की आशंका है। दरअसल, शामगढ़ थाना पुलिस को टिप मिली थी कि बरखेड़ा उदा गांव के सरपंच भवानी शंकर मीणा के घर दो संदिग्ध लोग पहुंचे हैं। उनकी स्कॉर्पियो में अवैध कैश है। सूचना पर शामगढ़, सुवासरा और भानपुरा थानों की संयुक्त टीम ने सरपंच के घर को घेर लिया। भवानी शंकर मीणा (49), मोहम्मद इस्लाम (47) और सूर्य प्रकाश गंगवार (59) को गिरफ्त में ले लिया। बारीकी से जांच की तो मिले गुप्त खाने इस्लाम और सूर्य प्रकाश उत्तर प्रदेश में बरेली के रहने वाले हैं। पुलिस ने उनसे एमपी आने की वजह पूछी तो वे गोलमोल जवाब देने लगे। इसके बाद पुलिस उनकी गाड़ी को शामगढ़ थाने ले आई। यहां मैकेनिक को बुलाकर कार की बारीकी से जांच कराई गई। इसमें गाड़ी के अंदर खास तौर पर बनाए गए गुप्त खानों से कुल 1 करोड़ 29 लाख रुपए कैश निकला। पुलिस ने आयकर विभाग को दी जानकारी पुलिस ने केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। नशे के नेटवर्क के बारे में तहकीकात की जा रही है। आयकर विभाग को भी इसकी जानकारी दे दी है।