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किसान मुद्दों पर प्रदेश में गर्माई राजनीति, कांग्रेस करेगी आज आंदोलन और जाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आज 7 मई को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमें मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे जाम कर किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे कई जिलों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया के पहले 14 दिनों में केवल 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, रजिस्ट्रेशन पर्ची अपलोड करने और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को गेहूं का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। साथ ही, जिन किसानों ने कम कीमत पर गेहूं बेचा है, उन्हें अंतर की राशि “भावांतर योजना” के तहत सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। इसके अलावा, पार्टी ने मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस के इस आंदोलन के कारण 11 जिलों में करीब 747 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के हित में किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

इंदौर में सड़क विकास: मधु मिलन–छावनी मार्ग होगा 60 फीट चौड़ा, अवरोध हटाने की तैयारी

इंदौर  मधुमिलन-छावनी मार्ग पर वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या रहती थी, लेकिन अब यह समस्या हल होगी। नगर निगम ने इस मार्ग को 60 फीट चौड़ा करने का मन बना लिया है और इसके लिए दो-तीन दिन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण भी हटाने की तैयारी की जा रही है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाने से पहले रहवासियों से मिलने पहुंचे और रहवासियों से आग्रह किया कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। कुछ रहवासी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार हो चुके हैं। भार्गव ने बताया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी तक का यह मार्ग शहर के ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत इस सड़क को प्रथम चरण में 60 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद यातायात की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।   उन्होंने यह भी बताया कि 60 फीट चौड़ाई को लेकर क्षेत्र के अधिकांश रहवासी सहमत हैं, जिससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई थी और तब मथुरवाला स्वीट्स का निर्माण भी तोड़ा गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला हो गया और सड़क चौड़ी नहीं हो पाई थी।

लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश में 9 मई को नेशनल लोक अदालत आयोजित

नेशनल लोक अदालत लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए प्रदेश में 9 मई को नेशनल लोक अदालत संपत्ति एवं जल कर के सरचार्ज (अधिभार) में मिलेगी 100 प्रतिशत तक की छूट भोपाल मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदेश में 9 मई शनिवार को 'नेशनल लोक अदालत' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। नागरिकों के कल्याण और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। नेशनल लोक अदालत में नागरिकों को विशेष सुविधा प्रदान करते हुए संपत्तिकर, जलकर एवं अन्य उपभोक्ता कर के लंबित प्रकरणों में देय अधिभार (सरचार्ज) पर 100 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व छूट प्रदान की जा रही है। योजना के प्रावधानों के अंतर्गत 50 हजार रुपये तक के संपत्तिकर और 10 हजार रुपये तक के जल कर की बकाया राशि वाले प्रकरणों में सरचार्ज पूर्णतः माफ किया जाएगा। इससे अधिक की बकाया राशि होने पर निर्धारित स्लैब के अनुरूप सरचार्ज में 25 से 75 प्रतिशत तक की रियायत का प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक की बकाया राशि पर यह विशेष छूट वन टाइम सेटलमेंट के रूप में देय होगी। इसयोजना का लाभ प्राप्त करने वाले नागरिकों को छूट के उपरांत शेष राशि अधिकतम दो आसान किश्तों में जमा करने की सुविधाजनक व्यवस्था प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत कम से कम 50 प्रतिशत राशि लोक अदालत के दिन ही जमा करना अनिवार्य होगा। राज्य शासन ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस नेशनल लोक अदालत में सहभागिता कर अपने लंबित प्रकरणों का निराकरण करवाएं और शासन द्वारा प्रदाय की जा रही इस विशेष छूट का अधिकतम लाभ उठाएं।    लोक अदालत के माध्यम से नगरीय निकायों के लंबित प्रकरणों का त्वरित एवं सुलभ निराकरण किया जाएगा, जिससे आमजनों को व्यापक राहत मिलेगी। शासन की इस जन-कल्याणकारी पहल से नागरिकों को न केवल करों के भारी बोझ से मुक्ति प्राप्त होगी, बल्कि इसके फलस्वरूप नगरीय निकायों को भी एकमुश्त राजस्व की प्राप्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

मध्य प्रदेश के नौरादेही टाइगर रिजर्व में अनोखी पहल, एक्स-आर्मी मैन संभालेंगे वन्यजीव सुरक्षा

सागर  मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व की बात करें, तो ये तीन जिलों में फैला हुआ है. नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण को टाइगर रिजर्व में तब्दील तो कर दिया गया है. लेकिन 2 साल से ज्यादा वक्त बीतने के बाद भी आज यहां पर वही फील्ड स्टाफ काम कर रहा है. जो नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य के समय पर कर रहा था. जबकि नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य का क्षेत्रफल आज के टाइगर रिजर्व से आधा भी नहीं था. ऐसे में टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या और आने वाले मेहमान चीतों की सुरक्षा की चिंता लाजिमी है।  वहीं पिछले दिनों में कुछ ऐसे घटनाक्रम भी सामने आए हैं. जो वन अपराधियों के बेलगाम हौसले की तरफ इशारा करते हैं. ऐसी स्थिति में वन अपराध जैसे लकड़ी तस्करी और वन्यजीवों के शिकार के साथ-साथ बाघों और आने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन ने भूतपूर्व सैनिकों की मदद लेना शुरू किया है. टाइगर रिजर्व की सुरक्षा की कमान वनरक्षक तो संभाली रहे हैं. वहीं अब एक्स आर्मी मैन वन रक्षकों के कंधे से कंधे मिलाकर वन और वन्यजीव की सुरक्षा करेंगे।  वन्यजीवों की सुरक्षा और वन अपराध चिंता का विषय नौरादेही टाइगर रिजर्व की बात करें, तो इसका कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर है. यह सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले तक फैला हुआ है. यहां बाघों का कुनबा 30 पहुंच गया है. चीता प्रोजेक्ट के तहत इसे मध्य प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के तौर पर विकसित किया जा रहा है. जुलाई में यहां चीता छोड़े जाना प्रस्तावित है. ऐसे में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ यहां की बेशकीमती वनसंपदा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है।  वन्यप्राणियों की सुरक्षा पूर्व सैनिकों के जिम्मे  राष्ट्रीय बाघ संरक्षण योजना में 2018 में शामिल किए जाने और यहां चीतों के तीसरा घर बनाने का फैसला केंद्र और राज्य सरकार ने तो कर लिया. लेकिन सुरक्षा और प्रबंधन की दृष्टि से यहां वन अमले की पदस्थापना आज तक नहीं की गयी है. ये जब वन्यजीव अभ्यारण्य था, वहीं वन अमला आज भी यहां सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा है. यहां या तो श्रमिक या आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लिया जा सकता है. ऐसे में वन अपराध रोकना और वनसंपदा की सुरक्षा के लिए प्रबंधन एक्स आर्मी मैन की तैनाती की गयी है. जो वन अमले के साथ सुरक्षा का दायित्व भी संभाल रहे हैं।  क्या कहना है प्रबंधन का नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह कहते हैं कि, ''पहली बात तो ये कोई नया प्रयोग नहीं है, मध्य प्रदेश के दूसरे टाइगर रिजर्व और जब नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य हुआ करता था. तब भी यहां एक्स आर्मी मैन जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के जरिए नियुक्त किए गए थे और वो वनकर्मियों के साथ कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर वन्यप्राणी क्षेत्र की सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं. ये बात कोई छिपी नहीं है कि हमारी सेना और सेना के जवानों का एक अनुशासन है और काम करने का अपना तरीका है।  जब हम उनके साथ जुड़कर वनकर्मी काम करते हैं, तो उनका अनुशासन और दक्षता का स्तर ऊपर होता है. सेना की दक्षता है, वो हमारे क्षेत्र में मेहनत के साथ जुटती है तो अपराधी तत्व डिफेंस में आ जाते हैं. वो जानते हैं कि कोई भी तरह का अपराध करेंगे, तो सेना के लोग छोड़ेगे नहीं. हमारी वन और वन्यप्राणी सुरक्षा मजबूत होती है. पूर्व में हम पेंच, कान्हा और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ये प्रयोग हो चुका है। 

बिजली ट्रांसफर हुआ आसान, MP बिजली विभाग ने लॉन्च किया ऑनलाइन आवेदन सिस्टम

भोपाल  मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कर्मचारियों को बड़ी डिजिटल सौगात दी है। अब स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और पेपरलेस बनाते हुए कंपनी ने 'एम्प्लाई ट्रांसफर माड्यूल' लॉन्च किया है। प्रमुख जानकारी: अंतिम तिथि: आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की गई है। पात्रता: ऐसे कर्मचारी जिनका वर्तमान पदस्थापना स्थान पर 1 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। आवेदन का आधार: व्यक्तिगत कारण, गंभीर बीमारी, पति-पत्नी का अन्य शासकीय सेवा में होना या आपसी स्थानांतरण (Mutual Transfer) के आधार पर आवेदन किए जा सकेंगे। हालांकि, जिन कर्मचारियों की एक ही स्थान पर पदस्थापना अवधि एक वर्ष से कम है, उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन व प्रशासन) राकेश शर्मा ने बताया कि इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को सुविधा और पारदर्शिता दोनों मिलेगी। आनलाइन आवेदन में दिए गए विकल्पों के आधार पर कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होंगे।

ट्रैफिक सुधार के तहत भोपाल-इंदौर बसें चलेंगी नए रूट पर, 8 मई से बदलाव

 सागर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। भोपाल और इंदौर जाने वाली बसों के रूट में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है, जो 8 मई से प्रभावी होगी। नए रूट के तहत बसें अब शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से नहीं गुजरेंगी, जिससे मोतीनगर और आसपास के इलाकों में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। क्या हुआ बदलाव? नई व्यवस्था के अनुसार, भोपाल और इंदौर जाने वाली बसें अब राहतगढ़ बस स्टैंड नहीं जाएंगी। ये बसें पुराने मुख्य बस स्टैंड से रवाना होकर मोतीनगर चौराहे पहुंचेंगी और वहां से सीधे लेहदरा नाका स्थित नए बस स्टैंड होते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगी। जाम से मिलेगी राहत: वर्तमान में ये बसें रेलवे पुल के नीचे और राहतगढ़ बस स्टैंड तक जाकर वापस मुड़ती थीं, जिससे मोतीनगर थाना, बड़ी माता मंदिर और विजय टाकीज क्षेत्र में भारी जाम की स्थिति बनती थी। नए रूट से शहर के अंदरूनी इलाकों में यातायात का दबाव कम होगा और बसों का अनावश्यक घुमाव खत्म होने से यात्रा के समय में भी बचत होगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जनसुविधा: उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के बाहर लेहदरा नाका और मेनपानी में करीब 20 करोड़ की लागत से नए बस स्टैंड बनाए गए थे। यात्रियों और बस ऑपरेटर्स की असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने शहर के भीतर ट्रैफिक सुधार और नए बस स्टैंडों के उपयोग के बीच यह संतुलित रास्ता निकाला है।

सरकार देगी मुफ्त ट्रेनिंग, भोजन और आवास के साथ स्टाइपेंड भी: राज्यमंत्री गौर

फ्री ट्रेनिंग में रहना-खाना मुफ्त, स्टाइपेंड भी देगी सरकार : राज्यमंत्री गौर सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए 11 मई तक करें ऑफलाइन आवेदन, भोपाल मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सेना, पुलिस, होमगार्ड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए निशुल्क ट्रेनिंग देने जा रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' में उन्हें 45 दिन का निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस योजना से प्रदेश के 4000 ओबीसी युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए 11 मई की शाम 6 बजे तक आवेदन किए जा सकते हैं। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के ओबीसी वर्ग के युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प को साकार करते हुए सैन्य बलों में भर्ती की निःशुल्क कोचिंग के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026' युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक सौगात है। उन्होंने प्रदेश के ओबीसी वर्ग के प्रतिभावान युवक-युवतियों से इस योजना में बढ़-चढ़कर आवेदन करने की अपील की है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन और निःशुल्क रखी गई है। उम्मीदवार, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट  ( www.bcwelfare.mp.gov.in)  से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 20 चयनित जिलों में स्थित पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के 'सहायक संचालक कार्यालयों' से भी निःशुल्क आवेदन फॉर्म प्राप्त किए जा सकते हैं। इन फॉर्म को सही तरीके से भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ 11 मई या उससे पहले इन्हीं कार्यालयों में जमा करना होगा। योजना के लिए कौन पात्र होगा? आवेदन करने के लिए युवा का मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना और अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमीलेयर) श्रेणी में आना अनिवार्य है। आवेदक का न्यूनतम 12वीं कक्षा पास होना जरूरी है। शारीरिक मापदंड के तहत पुरुषों की न्यूनतम ऊंचाई 168 सेंटीमीटर और महिलाओं की 155 सेंटी मीटर होनी चाहिए। साथ ही, आवेदक के पैरों के तलवे चपटे (फ्लैट फुट) नहीं होने चाहिए और 'सावधान' की मुद्रा में खड़े होने पर दोनों घुटने आपस में टकराने (नॉक नीज़) नहीं चाहिए। आवेदन यदि 4000 से अधिक प्राप्त होते हैं, तो चयन 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों (मेरिट) के आधार पर किया जाएगा। अंक समान होने की स्थिति में अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान मिलेंगी कई सुविधाएं चयनित युवाओं को ट्रेनिंग के दौरान कई शानदार सुविधाएं निशुल्क दी जाएंगी। प्रशिक्षणार्थियों को 45 दिन के आवासीय प्रशिक्षण में नाश्ता, दोनों समय का भोजन और अध्ययन सामग्री विभाग की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण अवधि में जेब खर्च के लिए पुरुष अभ्यर्थियों को 1,000 रुपए प्रतिमाह और महिला अभ्यर्थियों को 1,100 रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा। योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कुल 4000 सीटों में से 35 प्रतिशत सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। ट्रेनिंग प्रोग्राम को रिजल्ट ओरिएंटेड बनाया गया है। इसमें युवाओं को हर दिन लगभग 4 घंटे सैद्धांतिक विषयों की तैयारी कराई जाएगी। इसके अलावा, सुबह और शाम मिलाकर प्रतिदिन 3 घंटे दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद और गोला फेंक जैसी शारीरिक ट्रेनिंग दी जाएगी। शुरुआत में यह ट्रेनिंग प्रदेश के 20 जिलों (भोपाल, रायसेन, इंदौर, खंडवा, उज्जैन, मंदसौर, सागर, टीकमगढ़, जबलपुर, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, गुना, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, सतना, नर्मदापुरम, बैतूल, मुरैना और भिंड) के 40 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इन केंद्रों में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी।

एम्स भोपाल का प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री शुक्ल से मिला, प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मजबूत बनाने पर विमर्श

उप मुख्यमंत्री शुक्ल से एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के सुदृढ़ीकरण पर हुआ विमर्श भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मंत्रालय में एम्स भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सतत प्रयास कर रही है। ऑर्गन डोनर्स को "गार्ड ऑफ ऑनर" प्रदान कर तथा उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के अवसर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑर्गन डोनेशन से हम कई जिंदगियों में आशा का नया प्रकाश ला सकते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आमजन में ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान, कार्यशालाएँ एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें। राज्य सरकार ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एम्स के तकनीकी सहयोग एवं सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने एम्स द्वारा अब तक किए गए ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं एवं जागरूकता गतिविधियों की सराहना भी की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर सहित समस्त प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित किया। बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज में वृद्धि करने और हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट को शामिल करने के विषय पर चर्चा हुई। साथ ही प्रत्यारोपण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। अंग प्राप्ति प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान एवं त्वरित रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर तकनीकी सहयोग के विषयों पर विमर्श किया गया। इस दिशा में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिये एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी रखा गया, जिससे अंग प्राप्ति एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने एवं जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्राप्त सुझावों पर शीघ्र यथोचित कार्यवाही की जाएगी। बैठक में प्रत्यारोपण सर्जरी में आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। एम्स की टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट में अब तक की गई प्रगति, लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने राज्य सरकार की ओर से इन सेवाओं के विस्तार हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। बैठक में एम्स के निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर डिप्टी डायरेक्टर संदेश कुंअर जैन, चिकित्सा अधीक्षक डॉ विकास गुप्ता सहित ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम के सदस्य उपस्थित थे।  

चुनावी जादू: सीएम मोहन ने 7 सीटों पर किया प्रचार, 6 पर मिली जीत; 5 नेताओं को मिली थी जिम्मेदारी

भोपाल  राजनीति में कई बार नारे नहीं, आंकड़े ज्यादा जोर से बोलते हैं. बंगाल चुनाव नतीजों के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर ऐसा ही एक आंकड़ा खास दिलचस्पी से चर्चा में है 7 में से 6. ये वो स्ट्राइक रेट है, जो पश्चिम बंगाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चुनावी अभियान से जोड़ा जा रहा है. बंगाल जैसे राज्य में, जहां भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है, डॉ. यादव के प्रचार वाले इलाकों का हिसाब-किताब अब पार्टी के भीतर राजनीतिक महत्व रखता है।  डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल में कुल सात विधानसभा सीटों पर प्रचार किया. इनमें से भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की. यानी बंगाल में उनका स्ट्राइक रेट करीब 86 प्रतिशत रहा. इस गणित का सबसे मजबूत हिस्सा बांकुरा जिले से सामने आया. डॉ. यादव ने यहां पांच विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था और भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराने के दौरान भी मौजूद रहे थे. नतीजा यह रहा कि भाजपा ने इन पांचों सीटों पर जीत हासिल की।  बांकुरा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट का गणित सलतोरा सीट पर भाजपा की चंदना बाउरी ने टीएमसी उम्मीदवार को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. छातना में सत्यप्रकाश मुखोपाध्याय ने 47 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. बांकुरा सीट पर नीलाद्रि शेखर दाना ने टीएमसी उम्मीदवार को 54 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया. बरजोरा में बिलेश्वर सिन्हा ने 40 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जबकि ओंदा सीट पर अमरनाथ शाखा भी विजयी रहे. यानी बांकुरा में आंकड़ा साफ रहा 5 सीटें, 5 जीत, यहां डॉ. मोहन यादव का स्ट्राइक रेट 100 प्रतिशत रहा।  बांकुरा से शुरू किया चुनावी अभियान, जिले की सभी सीटें जीती बीजेपी डॉ. मोहन यादव का बंगाल चुनाव अभियान 2 अप्रैल को बांकुरा जिले से शुरू हुआ। सीएम ने बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन में हिस्सा लिया और संयुक्त जनसभा को संबोधित किया। यही क्लस्टर आगे चलकर भाजपा के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। मेदिनीपुरी में जीते, कमरहाटी में हारे 18 अप्रैल को सीएम ने कोलकाता और मेदिनीपुर में प्रचार किया। सीएम ने कमरहाटी में बीजेपी उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। मेदिनीपुरी में तो बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष 30 हजार के बडे़ अंतर से टीएमसी केंडिडेट को हराकर जीत गए। लेकिन, कमरहाटी में अरुप चौधरी टीएमसी उम्मीदवार से चुनाव हार गए। बीजेपी ने चुनिंदा नेताओं को भेजा बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनिंदा नेताओं को ही भेजा था। सीएम डॉ मोहन यादव के अलावा केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद डॉ उमेश नाथ महाराज को भी भेजा था। तीखे प्रहार और धर्मयुद्ध का आह्वान प्रचार के दौरान डॉ. यादव ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा था, “ममता दीदी बंगालियों का हक बांग्लादेश को देने पर तुली हैं. इसलिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि धर्मयुद्ध है. इस वातावरण में श्रीराम का मंत्र हम सबको शक्ति दे रहा है।  गढ़ में सेंध और खड़गपुर की बड़ी जीत 18 अप्रैल को डॉ. यादव ने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के समर्थन में भी प्रचार किया था. कमरहाटी सीट को लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. यहां शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार की बढ़त ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी, हालांकि करीबी मुकाबले में अरूप चौधरी करीब 5 हजार वोटों से हार गए. लेकिन खड़गपुर सदर में भाजपा नेता दिलीप घोष ने जीत दर्ज की और टीएमसी उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया. इस तरह बंगाल का चुनावी समीकरण कुछ यूं रहा बांकुरा में 5 में 5, खड़गपुर सदर में 1 में 1 और कमरहाटी में 1 हार . कुल मिलाकर 7 में 6 सीटें भाजपा के खाते में गईं।  बिहार और हरियाणा में भी चला मोहन यादव का सिक्का प्रतिशत में देखें तो यह आंकड़ा करीब 85.7 प्रतिशत बैठता है. यह लगभग वैसा ही है जैसा बिहार चुनाव में डॉ. यादव के प्रचार वाले क्षेत्रों में देखा गया था. बिहार में उन्होंने 25 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया था, जिनमें से भाजपा ने 21 सीटें जीतीं. वहां उनका स्ट्राइक रेट 84 प्रतिशत रहा था. हरियाणा चुनाव में भी डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने स्टार प्रचारक के रूप में भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा जैसे क्षेत्रों में उतारा था, जहां पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली।  बंगाल नतीजों के बाद बातचीत में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनता ने अन्याय, अत्याचार और कुशासन से मुक्ति के लिए वोट दिया है और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब भाजपा के लिए “मास्कॉट” बनते जा रहे हैं, तो उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. उन्होंने कहा, “हमारे केवल एक ही मास्कॉट हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. अब 17 राज्यों में हमारे मुख्यमंत्री होंगे. स्वतंत्रता के बाद के दौर में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।  विपक्ष पर प्रहार और जीत का उत्सव उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा निशाना साधा. डॉ. यादव ने कहा, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे. ममता दीदी ने हमारी बहनों का मजाक उड़ाया, सोनिया जी ने भी उनका उपहास किया. पांच पीढ़ियों ने महिलाओं के साथ अन्याय किया, अब जनता ने उस अन्याय का बदला लिया है. बताइए, अगर बंगाल में ‘जय श्रीराम' का नारा नहीं लगेगा, तो फिर कहां लगेगा? अपने अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की खुशी अब “माउंट एवरेस्ट से भी ऊपर” पहुंच गई है. उन्होंने कहा, “यहां मिठाई से जश्न मनाने की परंपरा है. हम झालमुड़ी भी खाएंगे, कलाकंद भी खाएंगे और मिठाइयां भी खाएंगे। 

अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन संपत्ति का हक नहीं: हाईकोर्ट

इंदौर  अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। कोर्ट ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज कर दी। रतलाम जिला अस्पताल में पदस्थ ड्राइवर रमेशवान गोस्वामी का 22 जून 2020 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा प्रस्तुत किया। दोनों के दावे सामने आने पर विभाग ने 23 जनवरी 2024 और 6 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा। इसे चुनौती देते हुए भाई-बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों ने रखे तर्क रितेश की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम पिता ने सेवा के दौरान नामिनी के तौर पर शामिल किया था। पूरा परिवार पिता की आय पर निर्भर था और उनकी बहन शादीशुदा होने के कारण अलग रहती है। अनीता हलफनामा देकर उन्हें नियुक्ति की सहमति दे चुकी है। अनीता ने खुद को वैध वारिस बताते हुए सेवा लाभों में बराबरी का अधिकार जताया और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को फर्जी बताया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला भी दिया, जिसमें कहा है कि नामिनी संरक्षक होता है, मालिक नहीं। सरकार की ओर से दलील दी थी कि दोनों के दावे होने के कारण सही वारिस तय करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा गया। नीति में सबकुछ स्पष्ट हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अनुकंपा नियुक्ति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। यह नियुक्ति राहतकारी नीति है। विभाग द्वारा सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगना मनमाना और कानून के विपरीत है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2014 में अनुकंपा नियुक्ति नीति बनी थी। कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी, इसलिए उस समय की नीति ही लागू होगी। 2023 में नीति में हुआ बदलाव इस पर लागू नहीं होगा। 2014 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राथमिकता क्रम तय है। इसमें पति/पत्नी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा-तलाकशुदा पुत्री और अंत में कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियुक्ति से पहले रितेश को हलफनामा देना होगा कि वे अपनी मां और अन्य आश्रितों का भरण-पोषण करेंगे। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।