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नशे का बड़ा खेल बेनकाब: साबूदाने की आड़ में हेरोइन तस्करी, 2 आरोपी गिरफ्तार; असम से बिहार तक नेटवर्क

समस्तीपुर बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस और नारकोटिक्स सेल के एक संयुक्त अभियान ने एक नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके परिणामस्वरूप दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 6 लाख रुपए मूल्य की हेरोइन जब्त की गई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 21 मार्च, 2026 की सुबह एक विशेष खुफिया जानकारी मिली थी कि एक नशीले पदार्थों के गिरोह के सदस्य हेरोइन की एक खेप लेकर शाहपुर पटोरी रेलवे स्टेशन पर पहुंचेंगे। तेजी से कार्रवाई करते हुए, स्थानीय पुलिस अधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को मिलाकर एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने एक जाल बिछाया और स्टेशन के पास के इलाके की घेराबंदी कर दी। 4 डिब्बों में छिपाकर रखी थी हेरोइन अभियान के दौरान, दो व्यक्तियों (एक पुरुष और एक महिला) को स्टेशन के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते हुए पकड़ा गया। आरोपियों की पहचान वैशाली निवासी राहुल कुमार (26) और असम निवासी शांति देवी के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान, पुलिस ने हेरोइन जिसे स्थानीय रूप से 'कोटा' कहा जाता है बरामद की, जिसे साबूदाना (sago) के चार डिब्बों के अंदर छिपाकर रखा गया था। इसके अलावा, उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, नकदी, रेलवे टिकट और पहचान पत्र भी जब्त किए गए। बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आरोपी पूर्वोत्तर राज्यों से बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। पुलिस को एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की संलिप्तता का संदेह है और वह गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने तथा उनके आपराधिक संपर्कों का पता लगाने पर काम कर रही है। पटोरी पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज किया गया है, और आगे की जांच जारी है।  

बिहार राजनीति में हलचल: क्या रामनवमी पर BJP घोषित करेगी अपना CM चेहरा?

  पटना भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा समय देने के विचार में नहीं है। बिहार में इतिहास रचने के लिए वह खरमास के खत्म होने का इंतजार करे, यह भी शायद संभव नहीं हो। और, मौका है रामनवमी का तो तैयारी उसी हिसाब से हो रही है। जी हां, संभव है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने वाली पार्टी इस बार रामनवमी पर बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। रोज चौंका रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए राजी कराया है, यह राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन, अब यह भी लोग समझ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा को संशय में डाल रहे हैं। इधर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन किया और उधर समृद्धि यात्रा पर निकल गए। राज्यसभा चुनाव के दिन पटना में रहे, लेकिन वोटिंग के दौरान विधानसभा का रुख भी नहीं किया। और तो और, अगले दिन फिर समृद्धि यात्रा पर बिहार के लोगों से मिलने निकल गए। अलग-अलग जिले घूम रहे हैं। इस दौरान वह यह तो बता रहे हैं कि आगे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, लेकिन यह नहीं कह रहे हैं कि वह बिहार छोड़ने जा रहे हैं। अब तक कई कंधों पर हाथ रख चुके नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, यह उन्होंने कभी नहीं कहा। निशांत के राजनीति में आने पर भी उन्होंने एक बार भी कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ नीतीश समर्थक निशांत के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर अड़े हैं। हालांकि, नीतीश कुमार लगातार अलग-अलग संकेत देकर भाजपा को ही संशय में डाल रहे। समृद्धि यात्रा में उन्होंने सबसे ज्यादा भाजपाई डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख आगे की जिम्मेदारी संभालने की बात कही, जबकि भाजपा के अंदर से संघ-विद्यार्थी परिषद् बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे करने की चर्चा निकल रही है। नीतीश ने सम्राट चौधरी को पसंद बताया है। लेकिन, वह इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी व लेसी सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधे पर भी इसी अंदाज में हाथ रख चुके हैं। भाजपा की प्लानिंग अब आएगी सामने चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। पहले बात चल रही थी कि 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के बीच नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं होगा। लेकिन, अब भाजपा की तैयारी नवरात्र में ही अपने पहले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की है। बिहार भाजपा में नेताओं की चर्चा के दौरान अब भी रोज कई मुख्यमंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं, हालांकि नवरात्र का पहला दिन निकलते-निकलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि रामनवमी या उसके अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। नवरात्र के लिए राजनीतिक माहौल बनाया खरमास बाद नई सरकार की चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा के नए कार्यकाल के लिए अप्रैल में मौजूदा सांसदों का समय पूरा होने तक यहीं जमे रहेंगे। लेकिन, अब नवरात्र शुरू होते ही माहौल बदला है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय के नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास यह जानकारी पहुंचा दी गई है कि उन्हें 30 मार्च के पहले ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करनी है। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए 14 दिन ही उनके पास निर्णय के लिए बचते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता 30 मार्च के पहले ले लेंगे तो उसके बाद उन्हें नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखने का विकल्प हो सकता है या नहीं- इसपर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन चर्चाओं के बीच रामनवमी पर शपथ ग्रहण की चर्चा भाजपा में पटना से लेकर दिल्ली तक है।

बिहार की राजनीति में हलचल: ‘अगला CM चिराग पासवान’ वाले पोस्टरों से मचा बवाल

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच बिहार में पॉलिटिकल हलचल तेज हो गई है। इसी बीच चिराग पासवान को अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर पटना की सड़कों पर दिखे हैं। ये पोस्टर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिला अध्यक्ष इमाम गजाली ने लगाए हैं। पोस्टर, जिसमें चिराग पासवान के सिर पर ताज दिखाया गया है, पर नारे लिखे थे, जैसे, “उन्हें ताज पहनाओ, तभी बिहार का सुनहरा दौर आएगा। मोदी ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। चिराग बिहार के नए नेता होंगे। बिहार को चिराग की जरूरत है। अब, एक युवा मुख्यमंत्री बनाने का समय आ गया है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार बनाएगी, और चिराग मुख्यमंत्री होंगे।” यह पहली बार नहीं है जब पार्टी के समर्थकों ने चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की है। इससे पहले, जमुई से सांसद और चिराग पासवान के साले अरुण भारती ने भी चिराग को बिहार का नेतृत्व करते देखने की इच्छा जताई थी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर आखिरी फैसला NDA करेगा। इससे पहले, चिराग पासवान की मां राजकुमारी देवी ने सबके सामने इच्छा जताई थी कि वह उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि चिराग पासवान मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार से बेहतर काम करेंगे। उन्होंने अपने बेटे को आशीर्वाद देते हुए और लोगों से उनका समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, “हम जानते हैं कि चिराग मुख्यमंत्री बनेंगे। वह नीतीश कुमार से बेहतर काम करेंगे।”

बिहार की सियासत में हलचल: अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज है। सम्राट रविवार को शाह से मिलने पटना से दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार में नए सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है। चर्चा है कि अगला सीएम भारतीय जनता पार्टी से होगा। अमित शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया है, इस बारे में कोई स्पष्ट वजह तो सामने नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर उनसे चर्चा की जा सकती है। सम्राट बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। वह राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश के पास हुआ करता था। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संभावित सीएम पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद नए सिरे से सरकार का गठन किया जा सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान उसी समय होने की संभावना है।  

बिहार सरकार ने शुरू किया महिलाओं के रोजगार का सर्वे, 10 हजार रुपये लेने वाली महिलाओं की ड्यूटी पर जीविका कर्मचारी

 रजौली  रजौली प्रखंड क्षेत्र में 28000 महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता प्राप्त करने वाली महिलाओं के रोजगार की स्थिति जानने के लिए व्यापक सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर बनाना है। अब यह आकलन किया जा रहा है कि मिली आर्थिक सहायता का उपयोग किस प्रकार के व्यवसाय में किया गया और उसका वर्तमान स्वरूप क्या है। सर्वे की जिम्मेदारी जीविका समूह के कर्मियों को सौंपी गई है। जीविका कर्मी मोबाइल एप के माध्यम से लाभुक महिलाओं से सीधे संपर्क कर रहे हैं। वे उनसे व्यवसाय की प्रकृति, आय की स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं से संबंधित जानकारी जुटा रहे हैं। एकत्रित डेटा को तत्काल एप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जा सके। किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन समेत अन्य रोजगार के लिए लिए हैं रुपये प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई महिलाओं ने किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और सब्जी बिक्री जैसे छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने घर आधारित खाद्य सामग्री निर्माण का कार्य भी शुरू किया है। सर्वे के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि व्यवसाय कितना सफल रहा और किन लाभुकों को आगे अतिरिक्त मार्गदर्शन या वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि सही मूल्यांकन के आधार पर अगली किस्त का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे और उनके आर्थिक सशक्तिकरण का लक्ष्य पूरा हो सके। क्या कहते हैं जीविका बीपीएम? रजौली जीविका के बीपीएम मनीष कुमार ने बताया कि सभी महिलाओं को प्रशिक्षण कार्य जल्दी शुरू कर दिया जाएगा।  

नीतीश चले दिल्ली: बिहार की सियासत में बड़ा मोड़, क्या भाजपा संभालेगी सीएम की कुर्सी?

पटना बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके खुद यह जानकारी दी है। नीतीश के राज्यसभा जाने का मतलब है राज्य की सत्ता में बहुत कुछ बदलने जा रहा है। राज्य में नई सरकार बनेगी। महज 105 दिन पहले दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं नीतीश के कुर्सी छोड़ने से बिहार के लिए और क्या-क्या बदल जाएगा? 1. पहली बार बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।   2. हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा 1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है। 3. नौवीं बार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे नीतीश नीतीश कुमार बीते दो दशक के बिहार की सत्ता का पर्याय बने हुए हैं। इस दौरान उनकी पार्टी राज्य की पहले नंबर की पार्टी रही हो या तीसरे नंबर की मुख्यमंत्री नीतीश ही बनते रहे। 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश का पहला कार्यकाल महज सात दिन का रहा था। इसके बाद 2005 में राज्य के मुख्यमंत्री बने नीतीश ने अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। 2010 में उन्होंने प्रचंड जीत के साथ तीसरी बार शपथ ली, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। दरअसल, भाजपा ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित किया तो नीतीश ने अपनी राह बदल ली। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले उतरी और बुरी तरह हारी। पार्टी को राज्य की 40 में से महज दो सीटों पर जीत मिली। इस हार के बाद नीतीश ने कुर्सी छोड़ दी और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। महज नौ महीने बाद नीतीश ने फिर से सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली। इसके बाद 2015 का विधानसभा चुनाव नीतीश ने अपने धुर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर लड़ा और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया और एक बार फिर राज्य की बागडोर संभाली। 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद फिर से नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जबकि उनकी पार्टी सीटों के लिहाज से राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। 2022 में नीतीश ने फिर से लालू का साथ पकड़ा और फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले नीतीश फिर से भाजपा के साथ आ गए और फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2025 में विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश ने 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने महज 105 दिन बाद यह तय हो गया कि नीतीश नौवीं बार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। शायद ये आखिरी बार भी होगा। 4. बिहार की सियासत में पीढ़ीगत बदलाव आपातकाल के दौर में बिहार की सियासत में कई युवा चेहरे उभरे। ये चेहरे दशकों तक बिहार की सियासत का पर्याय रहे। लालू प्रसाद यादव, सुशील मोदी, रामविलास पासवान, शरद यादव, नीतीश कुमार इनमें सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। इन चेहरों में से रामविलास पासवान, सुशील मोदी और शरद यादव का निधन हो चुका है। लालू यादव चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने के बाद से सक्रिय सियासत से दूर हैं। अब इस पीढ़ी के आखिरी बड़े चेहरे नीतीश के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार की सियासत में एक पीढ़ी का लगभग अंत हो जाएगा। 5. बीस साल से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू पहली बार बैक सीट पर होगी पिछले बीस साल और चार चुनाव से बिहार की सत्ता की बागडोर जदयू के हाथ में है। अब अगर राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है तो जदयू के गठन के बाद यह पहली बार होगा जब जदयू सहयोगी के रूप में बिहार की सत्ता में होगी। 6. दूसरी बार जदयू का शीर्ष नेता बिहार की सत्ता का हिस्सेदार नहीं होगा ये दूसरा मौका होगा जदयू सत्ता की … Read more

आज बसिऔड़ा, कल गुलाल: बिहार में होली मनाने की परंपरा क्यों है सबसे अलग?

पटना मथुरा के बरसाने की लट्ठमार और वृंदावन की फूलों की होली तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसे देखने देश-विदेश से लोग आया करते हैं, लेकिन होली के मामले में बिहार भी पीछे नहीं है। यहां की होली भी रंग-बिरंगी है और रूप अनेक हैं। मतलब, बिहार के अलग-अलग इलाकों में होली कई अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। होली के त्योहार की शुरुआत इस बार 02 मार्च की रात होलिका दहन से हो चुकी है। आज गांव-देहात में धुरखेली जैसी परंपरा के तहत धूल-कीचड़ से होली की शुरुआत हो चुकी है। इस एक स्टोरी में जानिए, होलिका दहन और होली से बिहार में कहां-कैसे संस्कृति को जिंदा रखे हुए है। इसके साथ ही फगुआ या फाग कैसे रंग जमाता है, वह भी पढ़िए। होलिका दहन के पहले गांवों में गोइठा मांगने की रही है परंपरा बिहार के गांवों में होली के आगमन के पहले होलिका दहन करने के लिए घर-घर से चंदा के रूप में गोइठा मांगने की प्राचीन परंपरा रही है। इस परंपरा के तहत युवाओं, खासकर बच्चों की टोली अपने-अपने गांव में बोरियां लेकर घूमती और हर घर जाकर चंदा के रूप में गोइठा मांगती रही है। इस दौरान बच्चे और युवा, "अगजा गोसाईं गोड़ लागे ली, घूम-घूम के गोइठवां मांगे ली" का यह गीत गाते गांव में फिरते हैं। जैसे ही वे किसी के घर पर गोइठा मांगने पहुंचते हैं, तो उनका दूसरा गीत शुरू होता है। घर की मालकिन महिला को संबोधित करते हुए वे गाते हैं, "ए जजमानी तोरा सोने के केवाड़ी, दू (चार, पांच, दस की संख्या) गोइठा दा"। इसके बाद उस घर से गोइठा मिलने के बाद रुख अगले घर की ओर और गीत के वही बोल। यह सिलसिला होलिका दहन का दिन आने तक चलता रहता था। बच्चे और युवक चंदे में मिले गोइठों को अपने गांव में एक स्थान पर जमा करते हैं। इसके बाद जमा किए गए गोइठा होलिका दहन में जलाए जाते हैं। हालांकि, कई गांवों में होलिका दहन के लिए गोइठा मांगने की यह परंपरा अब लुप्त होती जा रही है। दरभंगा में डंफा की थाप पर होलिका दहन परिक्रमा की परंपरा दरभंगा के ग्रामीण इलाकों में डंफा (एक तरह का ढोल) की थाप पर पारंपरिक होली गीतों के गायन के साथ जलती हुई होलिका की परिक्रमा करने की समृद्ध परंपरा रही है। हालांकि, यह परंपरा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। कुछ गांवों में ही इस परंपरा का निर्वहन हो रहा है। फगुआ (फाग) गायन अब गांव से शहरों तक पहुंचा हुआ है होली के आगमन के पहले बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) के दिन से बिहार में फगुआ (फाग) गायन की समृद्ध परंपरा रही है। यह परंपरा आज भी जीवित है। इसके तहत गांवों में सार्वजनिक स्थान पर और शहरी इलाकों में देवी-देवताओं के मंदिरों के परिसर में फगुआ गाए जाते हैं। फगुआ गायन बसंत पंचमी से शुरू होकर होली तक चलता है। इस दौरान लोग राम-सीता, कृष्ण-राधा, शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं के होली खेलने के गीत गाते हैं। होली के दिन फाग गायन के समाप्त होने के बाद चैत्र (चैत) माह के शुरू होने के साथ ही चैता गायन शुरू होता है, जो रामनवमी तक चलता है। इस दौरान "चैत मासे लिहले जनमवा हो रामा चैत मासे…" आदि पारंपरिक लोकगीत उमंग के साथ गाए जाते हैं। बिहार में होली के साथ कुछ गंदी परंपराएं भी चली आ रही हैं। इनमें हंड़िया टांगने और कीचड़ वाली होली शामिल है। हंड़िया टांगने वाली परंपरा पूरी तरह शरारत से भरी है। इस परंपरा में गांवों में शरारती किस्म के युवक मिट्टी की हांडी की गर्दन में रस्सी बांधते हैं और हांडी में मल-मूत्र, गंदगी या कीचड़ भर कर रात में किसी घर के मुख्य दरवाजे पर टांग देते हैं। साथ ही दरवाजे पर कीचड़, गंदगी या मल-मूत्र बिखेर देते हैं। यहां तक कि किसी छोटे जानवर का मृत शरीर भी घर के दरवाजे पर टांग देते हैं। सुबह होते ही घर का मालिक या परिवार का कोई सदस्य जैसे ही दरवाजा खोलता है, वह हंड़िया से टकरा जाता है और सारी गंदगी उस पर गिर जाती है तथा पैर भी दरवाजे पर गिराई गई गंदगी से सन जाते हैं। स्वाभाविक है कि ऐसा जिस घर के साथ होगा, उस घर के लोग ऐसा करने वालों को गालियां देंगे; और ऐसा करने वाले लोग भी उसी टोले-मुहल्ले के होते हैं, जो गालियां सुनकर खुद मजे लेते हैं तथा उन्हें और गाली देने के लिए प्रेरित भी किया करते हैं। गांवों में शरारती किस्म के युवक हंड़िया टांगने वाला काम बहुधा उन्हीं घरों पर करते हैं, जिस घर के लोग चिढ़ने और गुस्सा करने वाले होते हैं। होली की दूसरी गंदी और गलत परंपरा कीचड़ तथा गंदगी वाली होली है। इस होली में लोग नाली के कीचड़, गोबर, मिट्टी, मल-मूत्र से होली खेलते हैं। इस तरह की होली झगड़े का भी सबब बन जाती है। सुखद बात यह है कि सभ्यता के विकास के दौर में होली से जुड़ी ये गलत परंपराएं अब समाप्त हो रही हैं।

रहस्यमय ढंग से गायब हुईं बिहार की 5 नाबालिग बच्चियां, लखनऊ में बरामद

सहरसा बिहार के सहरसा जिले से लापता हुई पांच लड़कियों का मामला सुलझा लिया गया है। ये पांचों लड़कियां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन से सुरक्षित बरामद कर ली गई हैं। 27 फरवरी को घास काटने के लिए घर से निकली इन लड़कियों के अचानक गायब होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। ऐसे मिली सफलता जांच के दौरान पुलिस को संदेह था कि लड़कियां ट्रेन के जरिए कहीं बाहर जा सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए एसआईटी ने प्रदेश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी कर दिया था और लड़कियों की तस्वीरें जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) को साझा की थीं। 28 फरवरी को जब ये लड़कियां लखनऊ के ऐशबाग स्टेशन पर देखी गईं, तो रेलवे पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने तुरंत उनकी पहचान कर ली और उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। आखिर लखनऊ कैसे पहुंचीं लड़कियां? लड़कियों के सकुशल मिलने की खबर मिलते ही उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं, सहरसा पुलिस की एक टीम उन्हें लाने के लिए लखनऊ रवाना हो चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घास काटने निकली ये पांच लड़कियां बिहार से इतनी दूर लखनऊ कैसे पहुंचीं? क्या इसके पीछे कोई साजिश है या वे स्वयं घर से निकली थीं? इन तमाम सवालों के जवाब अब बिहार पुलिस लड़कियों से पूछताछ के बाद ही साफ कर पाएगी। जांच में जुटी पुलिस सहरसा पुलिस का कहना है कि लड़कियों के सुरक्षित मिलने के बाद अब प्राथमिकता इस बात की जांच करना है कि वे घर से कैसे निकलीं और लखनऊ तक किन परिस्थितियों में पहुंचीं। पुलिस इस पूरे मामले के हर पहलू को खंगाल रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

बिहार में निवेश की बड़ी घोषणा: श्याम स्टील का 5,000 करोड़ का प्लांट, 8,000 लोगों को मिलेगा रोजगार

पटना बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की पहल पर श्याम स्टील ने राज्य में 5,000 करोड़ रुपए का निवेश करने पर सहमति जताई है। कंपनी गया-डोभी रोड स्थित प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे में एक अत्याधुनिक स्टील कारखाना स्थापित करेगी। यह जानकारी बृहस्पतिवार को उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दी। उन्होंने बताया कि श्याम स्टील इस परियोजना के तहत 10 लाख टन सालाना क्षमता की स्टील विनिर्माण इकाई लगाएगी। इस परियोजना से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ लगभग 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। डॉ. जायसवाल ने बताया कि निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार ने बेहतर प्रोत्साहन औद्योगिक नीति बनाई है, जिसके तहत निवेशकों को राज्य में लाने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार उन कंपनियों से सामग्री की खरीद को प्राथमिकता देगी, जिनकी उत्पादन इकाइयां बिहार में स्थापित होंगी। इसी नीति के तहत निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उद्योग विभाग के अनुसार, प्रस्तावित कारखाने के स्थापित होने से गया-डोभी औद्योगिक गलियारे के विकास को गति मिलेगी और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा। श्याम स्टील की ओर से उद्योग विभाग को दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, इस कारखाने के लिए 500 एकड़ जमीन की मांग की गई है।  

लाइब्रेरी में पढ़ रहा था छात्र, बाहर निकला तो बना दूल्हा! बिहार में पकड़ौआ विवाह का वीडियो वायरल

समस्तीपुर  बिहार से 'पकड़ौआ विवाह' का मामला फिर सामने आया है। यहां एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र को बंधक बनाकर उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कराई गई है। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं। जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर जिले के शाहपुर पटोरी थाना क्षेत्र के चकरांजली गांव की है। बताया जा रहा है कि 23 वर्षीय छात्र युवक घर से लाइब्रेरी जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा तो परिवार के लोग चिंतित हो गए। काफी तलाशने के बाद पता चला कि उसे गांव के ही कुछ लोगों ने रोक रखा है और जबरन शादी करवाई जा रही है। वायरल वीडियो में लड़का मंडप पर बैठा अचेत अवस्था में दिख रहा है। इसी हालत में ही उससे शादी की रस्में करवाई जा रही है। वीडियो में युवक खुद को कमरे में बंद बताए जाने और मदद की गुहार लगाते हुए नजर आ रहा है। वह दावा कर रहा है कि उसे करीब 24 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इधर पुलिस का कहना है कि अब तक पुलिस को लड़के के परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि छात्र और युवती के बीच पहले से जान-पहचान या कथित प्रेम संबंध हो सकता है। पुलिस ने कहा कि घटना की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिली है। वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। सत्यापन के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।