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भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार, दोपहर 1 से 3 बजे तक दो मंत्री करेंगे कार्यकर्ताओं से मुलाकात

भोपाल  कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई। उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा। कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध     2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार     3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल     4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी     5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल  

संगीत सोम ने मौलाना मदनी के विवादित बयान पर जताया गुस्सा, बोले- ‘सनातनी दौड़ा-दौड़ा कर मारेगा’

 मेरठ  यूपी के मेरठ में बीजेपी के पूर्व विधायक और फायर ब्रांड नेता संगीत सिंह सोम ने मौलाना मदनी द्वारा दिए गए जिहाद वाले बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो बीमार मौलाना हैं. उनकी मानसिकता बीमार है. संगीत सोम ने आरोप लगाते हुए कहा कि मदनी एक ऐसे संस्थान से आते हैं जहां से हमेशा आतंकी निकलते हैं, वह अपनी मानसिकता नहीं बदल सकते.  सोम ने कहा- 'ये लोग संविधान की बात करते हैं लेकिन पत्नी रखेंगे चार. बात संविधान की करेंगे और संविधान को ही अपने तरीके से मोड़ना चाहते हैं. देश में जब-जब आतंक होता है, उसको सही ठहराते हैं. मैं सलाह देना चाहता हूं कि कहीं ऐसा ना हो कि देश के सनातनी सड़कों पर उतर आएं और तुम जैसे मौलानाओं को दौड़ा-दौड़ा कर मारना शुरू कर दें. यहां से पाकिस्तान तक दौड़ाकर ले जाएं और वहीं तुम्हारे घर में घुसा के आएं.' संगीत सोम ने आगे कहा कि इनकी समझ में अभी आ नहीं रहा है, मैं एक बार फिर दोहरा रहा हूं, होश में आ जाओ. वैसे… इनके बारे में टिप्पणी करना बेकार है. ये किसी तरीके से संविधान को नहीं मानते और ये अपनी इस मानसिकता से बाहर भी नहीं आना चाहते हैं.  मदनी के 'जिहाद' वाले बयान पर भड़के संगीत सोम दरअसल, मदनी ने कहा था कि 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा'. इसपर संगीत सोम ने कहा कि ये लोग देश का संविधान अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं और जहां संविधान की बात आती है, वहां शरिया कानून की बात करते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब चार बीवी और 21 बच्चे रखने की बात आती है, तब संविधान याद नहीं आता, लेकिन जिहाद को सही ठहराना चाहते हैं. सोम ने कहा, "पूरी दुनिया में अगर मुस्लिम कहीं सुरक्षित हैं तो वह भारत में हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग "खाते भारत की हैं और गाते पाकिस्तान की हैं." सोम ने सीधे तौर पर कहा कि आतंकी मदरसों से निकलते हैं, खासकर देवबंद से, और देश में मदरसे बंद होने चाहिए. संगीत सोम ने चेतावनी दी कि अगर मौलाना नहीं सुधरे, तो "यहां का सनातनी सड़कों पर उतर के इनको दौड़ा-दौड़ा कर मारेगा और दौड़ा-दौड़ा के पाकिस्तान तक छोड़कर आएगा." उन्होंने घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर भेजने की भी बात कही. मदनी का बयान- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक कार्यक्रम में न्यायपालिका के हालिया फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 'बाबरी मस्जिद और तलाक जैसे मामलों के फैसलों से ऐसा लगता है कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं.' उन्होंने आगे कहा था कि अदालतों के कई ऐसे फैसले सामने आए हैं, जिनमें संविधान में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुले तौर पर उल्लंघन हुआ है.

आंसू छलकते रहे, अरविंद केजरीवाल ने नहीं सुनवाई: राजेश गुप्ता ने AAP छोड़ BJP में शामिल

नई दिल्ली दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली के पार्टी उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय प्रवक्ता और विधानसभा की याचिका एवं अनुमान समिति के पूर्व अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने भाजपा का दामन थाम लिया है. गुप्ता AAP के कर्नाटक प्रभारी भी थे, ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय में औपचारिक रूप से सदस्यता ली. यह कदम दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद AAP के कई नेताओं के पलायन का हिस्सा लग रहा है. बीजेपी में शामिल होने के बाद गुप्ता ने कहा, ‘आप ने अपनी मूल विचारधारा से भटककर भ्रष्टाचार में डूब गई है. भाजपा के साथ विकास और राष्ट्रवाद की राह पर चलेंगे.’ भाजपा नेता बैजयंत पांडा ने उनका स्वागत करते हुए कहा, ‘आप का ‘आपदा’ अब भाजपा की ताकत बनेगा.’

सचिन पायलट बोले—SIR प्रक्रिया लोकतंत्र पर प्रहार, चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी टिप्पणी

जगदलपुर  कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने जगदलपुर प्रवास के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर सीधा राजनीतिक हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर प्रहार है. सचिन पायलट ने दावा किया कि जिस तरह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लाखों वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे, उसी पैटर्न को अब छत्तीसगढ़ में लागू करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार सबूत और दस्तावेज प्रस्तुत कर रही है, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट और ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आ रही. चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल पायलट ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी गंभीर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन कई अहम सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को इसमें स्पष्टता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा सीधे-सीधे लोकतंत्र से जुड़ा है. बीजेपी पर भी साधा निशाना पत्रवार्ता में उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि घुसपैठ का मुद्दा केवल चुनाव के समय उठाया जाता है, जबकि 11 साल के शासन में केंद्र सरकार कितने लोगों को देश से बाहर कर सकी—इसका आंकड़ा देने से बचती है. “दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के वोटर सुरक्षित रहेंगे” पायलट ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के मतदाताओं का नाम सूची से कटने नहीं देगी. उन्होंने कहा कि इन समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. नक्सल विरोधी अभियान पर भी बोले पायलट पत्रवार्ता के दौरान उन्होंने बस्तर में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. पायलट ने कहा कि कांग्रेस ने बस्तर में कई बड़े नेता खोए हैं और पार्टी हमेशा हिंसा के खिलाफ खड़ी रही है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जगदलपुर में पायलट के इस बयान ने SIR प्रक्रिया को लेकर सियासत को और तेज कर दिया है. पूर्व विधायक गुलाब कमरो का कटा नाम : महंत नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बड़ा खुलासा किया कि भरतपुर के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का नाम उनके ही पैतृक गांव की मतदाता सूची से हटा दिया गया है. महंत ने बताया कि कई बार खोजबीन के बाद उनका नाम रायगढ़ जिले के एक गांव की मतदाता सूची में पाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस के पूर्व विधायक तक चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं, तो आम लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

राजस्थान भाजपा में बदलाव: नई कार्यकारिणी में शामिल हुए युवा और अनुभवी नेता

जयपुर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के निर्देश पर भाजपा राजस्थान की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। इस नई टीम में संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, अनुभव और युवा ऊर्जा का समावेश किया गया है। उपाध्यक्ष पद पर 9 नेताओं की नियुक्ति प्रदेश कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर इन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है—     सरदार सुरेन्द्रपाल सिंह टी.टी. (श्रीगंगानगर)     नाहरसिंह जोधा (पाली)     मुकेश दाधीच (झुंझुनू)     बिहारी लाल विश्नोई (बीकानेर)     छगन माहूर (कोटा)     हकरू माईडा (बांसवाड़ा)     डॉ. ज्योति मिर्धा (नागौर)     अल्का मुन्दड़ा (उदयपुर)     सरिता गेना (अजमेर) चार महामंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी महामंत्री पद पर निम्न नियुक्तियां की गईं—     श्रवण सिंह बगड़ी (सीकर)     कैलाश मेघवाल (हनुमानगढ़)     भूपेन्द्र सैनी (दौसा)     मिथिलेश गौतम (अजमेर) मंत्री पद पर 7 नेताओं की तैनाती मंत्रियों की नई सूची में शामिल—     नारायण मीणा (जयपुर)     अजीत मांडन (जयपुर)     अपूर्वा सिंह (बीकानेर)     आईदान सिंह भाटी (जैसलमेर)     एकता अग्रवाल (जयपुर)     नारायण पुरोहित (सिरोही)     सीताराम पोसवाल ‘गुर्जर’ (सवाई माधोपुर) कोषाध्यक्ष व अन्य संगठनात्मक पद     कोषाध्यक्ष: पंकज गुप्ता (चुरू)     सह-कोषाध्यक्ष: डॉ. श्याम अग्रवाल (जयपुर)     प्रकोष्ठ प्रभारी: विजेन्द्र पूनिया (हनुमानगढ़) प्रवक्ता दल में 7 नए चेहरे शामिल     कैलाश वर्मा (जयपुर देहात)     कुलदीप धनकड़ (जयपुर देहात)     रामलाल शर्मा (जयपुर देहात)     दशरथ सिंह (बीकानेर)     मदन प्रजापत (देहात)     राखी राठौड़ (जयपुर)     स्टेफी चौहान (जयपुर)

महाराष्ट्र में बीजेपी की झोली भर गई, चुनावी जंग में बिना खड़े हुए मिली सफलता; विपक्ष ने जताई नाराजगी

मुंबई  बिहार विधानसभा चुनाव में शानदान जीत के बाद अब महाराष्ट्र में बीजेपी को बड़ी खूबखबरी मिल गई है. पार्टी ने 2 दिसंबर को होने वाले नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव से पहले ही बढ़त बना ली है. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने बताया कि पार्टी के 100 पार्षद बिना किसी मुकाबले के ही जीत गए हैं. इसके अलावा तीन नगर परिषद अध्यक्ष भी बिना चुनाव के ही चुने गए हैं. चव्हाण ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को दिया है. चव्हाण के अनुसार निर्विरोध जीतने वाले इन 100 पार्षदों में 4 कोंकण क्षेत्र से 49 उत्तर महाराष्ट्र से 41 पश्चिम महाराष्ट्र से 3-3 मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र से हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि मतदान से पहले ही इतनी सीटें मिलना बीजेपी संगठन की मजबूती को दर्शाता है. बीजेपी के ही उम्मीदवार कैसे जीत रहे? हालांकि बीजेपी के इस दावे पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का कहना है कि निर्विरोध चुनाव पर आपत्ति नहीं है, लेकिन बार-बार केवल बीजेपी के ही उम्मीदवार बिना मुकाबले कैसे जीत रहे हैं? विपक्ष का आरोप है कि पैसे, ताकत और सत्ता का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है. विवाद इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि कई जगह बीजेपी नेताओं के परिजन भी बिन मुकाबला जीत गए हैं. जामनेर में जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन नगर परिषद की अध्यक्ष बिना चुनाव के ही चुनी गईं, क्योंकि उनके सामने खड़े सभी उम्मीदवारों ने अंतिम समय पर नाम वापस ले लिया. कांग्रेस नेता का बड़ा आरोप धुले जिले में मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल की मां नयन कुंवर रावल भी विरोधी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद अध्यक्ष बन गईं. चिखलदरा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चचेरे भाई अल्हद कालोटी भी बिना मुकाबले पार्षद चुन लिए गए. कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर का आरोप है कि अन्य उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए धमकाया गया. इन घटनाओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. बीजेपी इसे अपनी लोकप्रियता और जनता के समर्थन का नतीजा मान रही है, जबकि विपक्ष दावा कर रहा है कि लोकतंत्र को दबाने की कोशिश हो रही है, क्योंकि नामांकन वापस लेने या रद्द होने का फायदा हर बार केवल बीजेपी को ही मिलता है. राज्य में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा और मतगणना 3 दिसंबर को की जाएगी. इसके साथ-साथ यह विवाद भी चुनावी माहौल का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है.

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मजबूत की अपनी दावेदारी, BJP अध्यक्ष पद की रेस में बढ़त

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं ले सकी है। हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इस पद पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। इसकी बड़ी वजह बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन है। हालांकि, इसे लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। भाजपा ने बिहार में प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया था। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बिहार में यह जीत भाजपा और आरएसएस में अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान खत्म करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन क्षमता और चुनाव प्रबंधन ने उन्हें इस पद की दौड़ में आगे कर कर दिया है। चुनाव से पहले वह लंबे समय तक बिहार में रहे। एक ओर जहां उन्होंने बागियों को नामांकन वापस लेने में मनाया। वहीं, कैडर को भी मजबूत करने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्र बताते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार चुनाव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को मजबूती दी है, जिसपर लोकसभा चुनाव के दौरान मिले झटके के चलते असर पड़ा था। अखबार से बातचीत में एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मोदी जी अब आरएसएस को मनाने में सफल हो सकते हैं कि भाजपा का अध्यक्ष उनकी चॉइस का हो।' एक और नाम था आगे जुलाई में इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी आगे चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, जब भाजपा ने यादव और प्रधान का नाम आगे बढ़ाया, तो आरएसएस ने मंजूरी देने से पहले विचार विमर्श की जरूरत बताई थी। कहा जाता है कि प्रधान ने ही ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा को बीजू जनता दल से अलग होकर चुनाव लड़ने के लिए मनाया था, जिसके बाद भाजपा राज्य में सत्ता बनाने में सफल हुई। रिपोर्ट में एक भाजपा नेता के हवाले से बताया गया है, 'इससे पहले संकेत मिल रहे थे कि दक्षिण से नेता भाजपा अध्यक्ष बना सकता है। उप राष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन के चुनाव के बाद यह माना जाने लगा है कि पार्टी प्रमुख उत्तर से होगा।' मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका था, लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विस्तार दिया गया।

लोहा नगर परिषद चुनाव में बीजेपी की रणनीति—एक ही परिवार के छह उम्मीदवार मैदान में

मुंबई  महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं. निकाय चुनावों के बीच सत्ताधारी महायुति में रार खुलकर सामने आ गई है. इस रार की वजह बनी है नांदेड़ जिले की लोहा नगर परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नांदेड़ की इस नगरपालिका परिषद के चुनाव में एक ही परिवार के छह सदस्यों को उम्मीदवार बना दिया है. इसे लेकर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार) ने अपने सहयोगी दल के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. एनसीपी (एपी) के विधायक प्रताप पाटिल चिखलिकर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि एक ही परिवार के छह सदस्यों को टिकट देना उम्मीदवारों की उपलब्धता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने तंज करते हुए कहा है कि बड़े नेता जब उपयुक्त उम्मीदवार नहीं खोज पाते हैं, तब ऐसा ही होता है. नांदेड़ में पत्रकारों से बात करते हुए चिखलिकर ने कहा कि जब राज्य और जिले का खुद को बड़ा नेता मानने वाले लोग उम्मीदवार नहीं ढूंढ पाते, तब छह नहीं तो 10 लोग एक ही परिवार के खड़े कर दिए जाते हैं. उन्होंने बिलोली नगर परिषद में कोई उम्मीदवार नहीं उतारने के बीजेपी के फैसले पर भी सवाल खड़े किए हैं. गौरतलब है कि परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाने वाली बीजेपी ने काउंसिल प्रेसिडेंट से पार्षद तक, एक ही परिवार के छह लोगों को उम्मीदवार बनाया है. ऐसा तब है, जब लोहा नगर परिषद के कुल 10 वार्ड के लिए 20 सदस्य चुने जाने हैं. गजानन सूर्यवंशी को बीजेपी ने काउंसिल प्रेसिडेंट कैंडिडेट बनाया है. गजानन सूर्यवंशी की पत्नी गोदावरी वार्ड 7ए, भाई सचिन वार्ड 1ए, भाभी सुप्रिया वार्ड 8ए, रिश्तेदार वाघमारे वार्ड 7बी, भतीजे की पत्नी व्याहारे वार्ड 3 से चुनाव लड़ रहे हैं. महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए चुनाव हो रहे हैं. 2 दिसंबर को मतदान होना है और नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे. नांदेड़ कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व सीएम अशोक चव्हाण का गृह जिला है और इस बार के निकाय चुनाव में उनकी साख दांव पर है.

बिहार कैबिनेट विस्तार से पहले अटकलें तेज: मैथिली ठाकुर पर BJP लगा सकती है बड़ा दांव

रांची बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा (JDU) और जदयू (JDU) मंत्रियों के नाम पर मंथन कर रही है। बात करें भाजपा की तो वह इस बार युवा, महिलाएं और सामाजिक रूप से प्रभावशाली वर्गों को कैबिनेट में बड़ा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी में है। इसी रणनीति के तहत मैथिली ठाकुर, श्रेयसी सिंह समेत कई नए चेहरों के नाम लगातार सुर्खियों में हैं। दरभंगा के अलीनगर से जीतकर आईं 25 वर्षीय लोकगायिका और BJP MLA मैथिली ठाकुर नई कैबिनेट के सबसे चर्चित नामों में शामिल हो गई हैं। पहली बार चुनाव लड़कर उन्होंने RJD उम्मीदवार विनोद मिश्रा को 11,730 वोटों से हराया और 2025 के चुनाव में सबसे युवा विधायकों में जगह बनाई। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उनकी बढ़ती लोकप्रियता, सांस्कृतिक पहचान और युवाओं में गहरी पकड़ को देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि वे कला-संस्कृति, युवा मामलों या सामाजिक न्याय जैसे अहम विभागों की दावेदार हो सकती हैं। शपथ ग्रहण में साफ होगा कैबिनेट का चेहरा नीतीश कुमार अपनी 10वीं पारी के रूप में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। नए मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल होंगे, इसका खुलासा शपथ ग्रहण समारोह में होगा, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि बिहार की नई राजनीति में मैथिली ठाकुर की एंट्री प्रभावशाली साबित हो सकती है।

नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल की कमान, भाजपा ने सम्राट चौधरी को बनाया नेता—विजय सिन्हा उपनेता

पटना जनता दल यूनाईटेड के नवनिर्वाचित विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को फिर से अपना नेता चुन लिया है। बुधवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री आवास में जदयू के विधायक दल की बैठक हुई। साढ़े 11 बजे जदयू के विधायकों ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि बिहार की जनता उत्साहित है, उन्होंने नीतीश कुमार अपना नेता चुना है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी की पहली और अंतिम पसंद नीतीश कुमार ही हैं। नई सरकार में मंत्री बनाए जाने के सवाल पर रजक ने कहा कि इसका फैसला नीतीश कुमार करेंगे। विधायक दल की बैठक से पहले जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि यह बिहार के लिए बहुत अच्छा दिन है। हमारे अभिभावक नीतीश कुमार जी हैं और वह सभी के कल्याण के लिए काम करेंगे। इधर, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की बैठक पार्टी कार्यालय में हो रही है। भाजपा के विधायकों ने सम्राट चौधरी के विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी वह डिप्टी सीएम बनेंगे। वहीं विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया है। वह भी दूसरे डिप्टी सीएम बन सकते हैं। लेकिन, दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए फिलहाल मंथन जारी है। भाजपा दोनों डिप्टी सीएम का पद अपने पास रखना चाहती है। इधर, 19 सीट लाने वाली चिराग पासवान की पार्टी एक डिप्टी सीएम समेत तीन मंत्री का पद चाहती है। इस मुद्दे पर भी बातचीत चल रही है। दोपहर 3.30 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक होगी। इसमें भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाईटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, लोक जनशक्ति पार्टी के सभी नव निर्वाचित विधायक और नीतीश कुमार, चिराग पासवान, संतोष सुमन, उपेंद्र कुशवाहा, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा मौजूद रहेंगे। इधर, कुछ ही देर में गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचेंगे। वह भारतीय जनता पार्टी की बैठक में शामिल होंगे।