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इस बार गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली की झांकी नहीं, सरकार ने प्रस्ताव नहीं भेजा

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड को लेकर राज्य सरकारों द्वारा रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। रक्षा मंत्रालय ने इस बार हरियाणा की झांकी के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। वहीं, 26 जनवरी की परेड में दिल्ली की झांकी शामिल नहीं होगी, क्योंकि दिल्ली सरकार ने इस वर्ष झांकी के लिए कोई प्रस्ताव भेजा ही नहीं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष, यानी 76वें गणतंत्र दिवस परेड में पाँच वर्षों के अंतराल के बाद दिल्ली की झांकी शामिल की गई थी, जो शिक्षा मॉडल पर आधारित थी। दरअसल, गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए राज्य सरकारें अपने प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजती हैं। लेकिन इस बार दिल्ली सरकार ने कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया, जिसके कारण 77वें गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर राजधानी की झांकी नहीं दिखाई देगी। गौर करने वाली बात यह है कि पाँच वर्ष बाद 76वें गणतंत्र दिवस (2025) में शिक्षा मॉडल पर आधारित दिल्ली की झांकी परेड में शामिल हुई थी। इससे पहले 2020 से 2024 तक लगातार परेड में दिल्ली को स्थान नहीं मिल पाया था। इनमें प्रत्येक राज्य की झांकी अपनी संस्कृति, विरासत और जीवनशैली को प्रदर्शित करती नज़र आएगी। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड स्थित कालिंजर किले का प्रदर्शन किया जाएगा। विंध्य पर्वतमाला पर स्थित यह प्राचीन एवं अभेद्य किला बांदा जिले में है, जिसका निर्माण चंदेल शासकों के काल में हुआ था। यह किला बुंदेलखंड के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस राज्य की भी नहीं दिखेगी झांकी हालांकि दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा की झांकी भी इस बार गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं होगी। हरियाणा सरकार ने रक्षा मंत्रालय को कुल पाँच प्रस्ताव भेजे थे। प्रारंभिक चरण में हिसार जिले के पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी पर आधारित प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन बाद में रक्षा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया। कितने राज्यों को मिली स्वीकृति? झांकियों के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने तीन दौर की बैठकों के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल करने की स्वीकृति दे दी है। माना जा रहा है कि इन राज्यों की सूची लगभग अंतिम मानी जा रही है और अब इसमें बदलाव की संभावना बहुत कम है। पश्चिम बंगाल , उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, पंजाब, पुडुचेरी, ओडिशा, नागालैंड, मणिपुर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, असम

प्रदूषण का कहर: दिल्ली में बच्चों के लिए साँस लेना बना चुनौती

  नई दिल्ली  राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि शहर के छोटे निवासी लगातार पुरानी सांस की बीमारियों और श्वसन संबंधी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से बच्चों के विकसित हो रहे फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसमें हल्की ब्रोंकाइटिस से लेकर तीव्र श्वसन नली की सूजन और गंभीर सर्जरी तक की स्थिति देखी जा रही है। प्रदूषण के कारण बच्चों में सांस की समस्याएं बढ़ रही हैं हाल ही में एक मां ने बताया कि दिल्ली आने के बाद प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने के कारण उनके पांच साल के बच्चे को टॉन्सिल की सर्जरी करानी पड़ी। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामले पूरे इलाके में बढ़ रहे हैं। डॉक्टर ने तीन साल के एक बच्चे का उदाहरण दिया, जिसे भयंकर धुंध के दौरान तीव्र ब्रोंकियोलाइटिस की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया। उन्होंने कहा, "खांसी से शुरू हुई समस्या धीरे-धीरे सांस लेने में तकलीफ़ में बदल गई। कोई संक्रमण नहीं पाया गया। यह प्रदूषण के कारण हुई श्वसन नली की सूजन थी। बता दें की उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग में पांच साल के एक बच्चे को भी प्रदूषित हवा के कारण गंभीर श्वसन समस्याओं का सामना करना पड़ा। जांच में एडेनॉइड्स बढ़े हुए पाए गए और सर्जरी की संभावना जताई गई। गाजियाबाद के अस्पताल में छह महीने के एक बच्चे को गंभीर घरघराहट वाली ब्रोंकाइटिस के कारण लाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी श्वास नलिकाएं उत्तेजित और संकरी हो गई थीं। नेबुलाइजेशन और मेडिकल देखभाल के बाद उसकी हालत अब स्थिर है। प्रदूषण बच्चों की रोज़मर्रा की जिंदगी भी प्रभावित कर रहा है राज नगर एक्सटेंशन में रहने वाले 11 साल के एक बच्चे के पिता ने बताया कि उनके बेटे को बाहर खेलने के दौरान केवल कुछ मिनटों में ही सांस फूलने लगी। डॉक्टरों ने बताया कि यह किसी संक्रमण के कारण नहीं, बल्कि प्रदूषण की वजह से श्वास नलियों में जलन की प्रतिक्रिया थी। गाजियाबाद में सात साल की एक बच्ची को लगातार घरघराहट की शिकायत हुई। उसे बार-बार नेबुलाइजेशन , ओरल (Oral) और अंतःशिरा स्टेरॉयड्स  लेने पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण न केवल मौजूदा बीमारियों को बढ़ा रहा है, बल्कि नई बीमारियों को भी जन्म दे रहा है। गुड़गांव के आर्टेमिस अस्पताल में ईएनटी विभाग के प्रमुख ने 13 वर्षीय एक बच्चे का उदाहरण साझा किया, जो हाल ही में सिंगापुर से आया था। वहां उसे कोई श्वसन समस्या नहीं थी, लेकिन दिल्ली में आने के तुरंत बाद उसे एडेनॉइड हाइपरट्रॉफी हो गई। गंभीर और दुर्लभ मामलों की बढ़ती संख्या अक्टूबर के अंत से नवंबर तक, प्रदूषण के सबसे खराब हफ्तों में किशोरों में पल्मोनरी एम्बोलिज़्म (फेफड़ों में थक्का) के मामले भी सामने आए। मैक्स, वैशाली में पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख ने बताया कि 17 वर्षीय एक लड़के में अत्यधिक प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क के कारण पैरों में थक्के बन गए, जो फेफड़ों तक पहुंच गए। यदि इलाज समय पर न होता, तो यह जानलेवा हो सकता था। प्रदूषण से बचने के लिए विशेषज्ञों की चेतावनी डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है और बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि विकसित होते फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और लंबे समय तक विषाक्त वातावरण में रहने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी, पाक हैंडलर ने तैयार किया 6 हमलों का प्लान, पकड़ में आया नेटवर्क

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने देशभर छह स्थानों पर ग्रेनेड हमले की साजिश का भंडाफोड़ किया है। पकड़े गए आरोपी आईएसआई समर्थित पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के इशारे पर दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में ग्रेनेड हमले की साजिश रच रहे थे। तीन संदिग्धों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि इनके निशाने पर तीन राज्यों के छह संवेदनशील स्थान थे। यह मॉड्यूल दिल्ली के अलावा पंजाब और यूपी के कई सार्वजनिक स्थानों पर ग्रेनेड से हमला कर बड़ी तबाही मचाने की फिराक में था। स्पेशल सेल ने इन संदिग्धों से मिले मोबाइल, चैट और वीडियो क्लिपिंग की जांच में छह संभावित टारगेट की पहचान की है। इनमें तीन स्थान पंजाब से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि दो यूपी और एक दिल्ली में है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक संदिग्धों ने इन स्थानों की रेकी कर रूट मैप, वीडियो और तस्वीरें भट्टी को भेजी थीं। इस खुलासे के बाद तीनों राज्यों में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया के जरिए भर्ती जांच में पता चला है कि पाकिस्तान में बैठा शहजाद भट्टी सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल के जरिए भारतीय युवाओं को निशाने पर लेता था। उनकी आर्थिक जरूरतों और बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हें गैंगस्टर से लेकर आतंकी गतिविधियों तक में झोंक दिया जाता था। भट्टी और उसके साथी पहले युवाओं को पैसे कमाने का झांसा देते, फिर छोटे-छोटे काम देकर उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल करते थे। इसके बाद उन्हें टारगेट की रेकी, हथियारों की डिलीवरी, ठिकानों की तलाश और हमले की योजना का हिस्सा बनाया जाता था। पकड़े गए युवकों ने स्वीकार किया कि भट्टी सोशल मीडिया ऐप्स, ऑडियो कॉल और एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए लगातार संपर्क में रहता था। वह भारत में अपनी मौजूदगी के बिना ग्राउंड ऑपरेटर्स के जरिए पूरे मॉड्यूल को नियंत्रित करता था। पुलिस का मानना है कि यह एक पूरी तरह विदेशी संचालित आतंकी मॉड्यूल है, जिसका उद्देश्य भारत में अस्थिरता फैलाना था। छह स्थानों की तस्वीरें, रूटमैप और वीडियो बरामद स्पेशल सेल को जांच में छह संदिग्ध स्थानों की फोटो और वीडियो क्लिप मिली हैं। इनमें भीड़भाड़ वाले बाजार, पुलिस स्टेशन, प्रशासनिक भवन और वह स्थल शामिल हैं जहां सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही रहती है। जांच एजेंसियां इन सभी डाटा को फोरेंसिक तरीके से विश्लेषित कर रही हैं। इन सुरागों के आधार पर दिल्ली, पंजाब और यूपी पुलिस ने दर्जनों छापेमार टीमें बनाई हैं। दिल्ली से लेकर गुरदासपुर, अमृतसर, बिजनौर और नोएडा तक कई ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि मॉड्यूल के दो से तीन सदस्य अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश तेज कर दी गई है। गिरोह के और लिंक तलाशे जा रहे पूछताछ में सामने आया है कि भट्टी पंजाब के गैंगस्टरों से लेकर पाकिस्तान में बैठे आईएसआई समर्थित नेटवर्क से सीधे जुड़ा हुआ है। वह अपने साथियों के जरिए फंडिंग, हथियार सप्लाई और नए युवाओं की भर्ती का काम संभालता था। जांच एजेंसियों ने भट्टी के दो अन्य संपर्कों की पहचान कर ली है, जिन्हें जल्द ही पंजाब पुलिस के साथ साझा किया जाएगा। वहीं दिल्ली और यूपी में भी इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोकल लिंक तलाशे जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह मॉड्यूल छोटी रकम के बदले युवाओं को आतंकी गतिविधियों में उतारने वाला बेहद खतरनाक तंत्र है। इसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ग्रेनेड हमला कर दहशत फैलाना और देश को अस्थिर करना था। गुरदासपुर पुलिस स्टेशन पर हमले की तैयारी में था हरगुनप्रीत फिरोजपुर के कोहाला गांव का रहने वाला हरगुनप्रीत सिंह उर्फ गुरकरणप्रीत 12वीं पास है। वह अपने एक दोस्त के जरिए भट्टी के संपर्क में आया। पैसों के लोभ में वह गुरदासपुर पुलिस स्टेशन पर हमले के लिए तैयार हो गया। वह साथी मोहन के साथ गुरदासपुर पहुंचा और विकास से ग्रेनेड व हथियार लेकर रेकी की। 25 नवंबर की शाम उसने सिटी पुलिस स्टेशन के बाहर ग्रेनेड फेंका, जबकि उसका साथी मोटरसाइकिल चलाता रहा। पुलिस का मानना है कि इस हमले के जरिए मॉड्यूल अपनी सक्रियता साबित करना चाहता था, ताकि भट्टी को पाकिस्तान से और फंडिंग मिल सके। आसिफ ढाई महीने पहले इंस्टाग्राम के जरिए भट्टी के संपर्क में आया था उत्तर प्रदेश के बिजनौर के मच्छमार गांव का रहने वाला 5वीं कक्षा पास आसिफ उर्फ आरिश करीब ढाई महीने पहले इंस्टाग्राम के जरिए भट्टी के संपर्क में आया। भट्टी ने पहले उसे ग्राउंड ऑपरेटर्स के वीडियो भेजे, फिर पंजाब में ग्रेनेड फेंकने का टास्क दिया। आसिफ को लोकेशन मैप, टारगेट की तस्वीरें और रूट प्लान भेजा गया। वह विकास से भी जोड़ा गया था। कुछ दिनों पहले भट्टी ने उसे ‘अगले निर्देश’ का इंतजार करने को कहा था। पुलिस मान रही है कि उसकी भूमिका यूपी और दिल्ली में टारगेट चुनने से लेकर विस्फोटक पहुंचाने तक की हो सकती थी। मध्य प्रदेश के दतिया का रहने वाला 24 वर्षीय विकास प्रजापति उर्फ बेटू इंद्रगढ़ की अनाज मंडी में मजदूरी करता था। इंस्टा पर भट्टी की गैंगस्टर वाली छवि से प्रभावित होकर वह उससे जुड़ गया। भट्टी ने वीडियो कॉल पर उसे पार्सल खोलने का तरीका सिखाया, जिसमें ग्रेनेड भरा था। विकास को डिलीवरी कन्फर्मेशन के बदले नकद और हथियार दिए गए। उसने गुरदासपुर सिटी पुलिस स्टेशन और अमृतसर टाउन हॉल पुलिस स्टेशन की रेकी कर वीडियो भट्टी को भेजे। भट्टी ने विकास से कहा था कि वह ग्रेनेड हरगुनप्रीत और उसके साथी तक पहुंचाए और ऑपरेशन के लिए मोटरसाइकिल की व्यवस्था करे।

दिल्ली की हवा में सुधर के संकेत, AQI गिरा—एनसीआर का प्रदूषण स्तर कैसा?

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 222 दर्ज किया गया, जिसे 'खराब' श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह, आईटीओ में भी एक्यूआई 269 तक पहुंच गया है, जो गंभीर वायु प्रदूषण का संकेत है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए इन आंकड़ों ने राजधानीवासियों की चिंता बढ़ा दी है। सर्दियों के आगमन के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या हर साल गहराती जाती है। विभिन्न कारकों, जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के कारण हवा की गुणवत्ता तेजी से गिरती है। इस वर्ष भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ जैसे पर्यटक आकर्षणों और सरकारी प्रतिष्ठानों वाले क्षेत्रों में जहरीले स्मॉग की चादर बिछ जाना, इस बात का प्रमाण है कि समस्या कितनी विकट हो चुकी है। 7 दिन बाद 8 डिग्री के नीचे गिरेगा पारा, बढ़ेगी ठिठुरन राजधानी में आने वाले दिनों में न्यूनतम पारा 8 डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंचेगा। मौसम विभाग के अनुसार, इस बीच मौसम साफ रहने का अनुमान है। हालांकि, सुबह में हल्की से मध्यम धुंध या कोहरा देखने को मिल सकता है। 4 से 5 दिसंबर तक तापमान में बदलाव आएगा, जो 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। राजधानी में खिली धूप के बाद भी ठिठुरन बढ़ गई है। ऐसे में न्यूनतम के साथ-साथ अब अधिकतम तापमान में भी गिरावट है। शनिवार को सुबह से ही मौसम में ठंडक थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे दिन में सूरज की गर्मी का हल्का अहसास हुआ। इसी बीच अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक रहा। भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो मौसम के औसत से 0.1 डिग्री अधिक है। दिल्ली में अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 36 प्रतिशत रही। वहीं, रिज सबसे ठंडा इलाका रहा। यहां न्यूनतम पारा 9.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी का अनुमान है कि रविवार को सुबह धुंध व कोहरे के साथ आसमान साफ रहेगा। तेज बयार से प्रदूषण में आया कुछ सुधार राजधानी में हवा की तेज गति से वायु प्रदूषण में कुछ कमी आई है। शनिवार सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे के बीच आसमान में स्मॉग की हल्की चादर भी दिखाई दी। कम दृश्यता के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 दर्ज किया गया जो यह हवा की बेहद खराब श्रेणी में रही। इसमें शुक्रवार की तुलना में 64 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को एनसीआर में इतना रहा प्रदूषण का स्तर एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 310 दर्ज किया गया। ग्रेटर नोएडा में 288, गाजियाबाद में 299 और गुरुग्राम में 262 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 212 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 18.78 फीसदी रहा। इसके अलावा पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण 1.26, निर्माण गतिविधियों से 2.88, पेरिफेरल उद्योग से 4.38 और आवासीय इलाकों की भागीदारी 4.83 फीसदी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शनिवार को हवा उत्तर से उत्तर पश्चिम दिशा से 15 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1250 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 6900 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 257.6 और पीएम2.5 की मात्रा 140.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि मंगलवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में ही बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

266 करोड़ की केशकाल बाइपास सड़क परियोजना में अड़चन

रायपुर बस्तर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक 30 में केशकाल घाट के विकल्प के रूप में 266 करोड रुपए की लागत से बनने वाली फोरलेन सड़क 7 साल बाद भी अधूरी पड़ी है. इस परियोजना को बनाने के लिए राजमार्ग विभाग को स्क्रीनिंग कमेटी नई दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार है. इधर केशकाल घाट में लगने वाले जाम से प्रतिदिन कम से कम 20 हजार लोग परेशान हो रहे हैं. 11.38 किमी लंबी फोरलेन युक्त बाइपास सड़क को बनाने का कार्य 7 साल पहले शुरू किया गया था, किंतु ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया, इसलिए कार्य अधूरा पड़ा है. बताया गया कि वर्ष 1918 में केशकाल घाट के चौथे मोड़ से लेकर सिंघनपुर की तरफ 11.38 किमी लंबी बाइपास सड़क बनाने का ठेका राजमार्ग विभाग ने मुंबई की वालेचा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया था. उसने अपना यह कार्य चेन्नई की किसी श्रीराम कंट्रक्शन को दे दिया था. करीब ढाई किमी लंबा अर्थवर्क करने के बाद यह कंपनी कारोबार समेटकर भाग गई है. तब से बाइपास का निर्माण अधूरा पड़ा है. 6 महीने पहले भेजी गई है फाइल बताया गया कि 266 करोड रुपए की लागत से 11.38 किमी लंबी बाईपास सड़क को फोर लाइन करना है. इस मार्ग में दो बड़े पुल और सात मध्यम पुल का निर्माण भी किया जाना है. पूरी फॉर्मेलिटी करने के बाद रिपोर्ट नईदिल्ली स्थित स्क्रीनिंग कमेटी को भेजी गई है. बताया गया की 6 महीने पहले भेजी गई इस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है इसलिए बाईपास निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. 20 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही इधर केशकाल घाट में लगातार जाम लगने की वजह से हजारों लोग परेशान हो रहे हैं बताया गया कि प्रतिदिन कम से कम 20 हजार लोग केशकाल घाट होकर आना-जाना करते हैं इसलिए नेशनल हाईवे क्रमांक 30 को बस्तर की जीवन रेखा कहा जाता है. इस संदर्भ में बस्तर का नागरिकों का कहना है कि बाईपास निर्माण के लिए भी बड़े आंदोलन की दरकार है. 6.97 करोड से संवर रही बस्तर की सड़क केशकाल नगरवासियों द्वारा आंदोलन और चक्का जाम करने के बाद अब राजमार्ग विभाग ने केशकाल की सड़क मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है. इसके लिए 6 कार्य तेजी से जारी है. इस संदर्भ में लोगों का कहना है कि शासन को लोगों की समस्या नजर क्यों नहीं आती. हर बार सरकार को जगाने के लिए जनआंदोलन जरूरी हो गया है.

‘महारानी 4’ का ट्रेलर रिलीज, इस बार दिल्ली की राजगद्दी के लिए लड़ाई लड़ेंगी भारती देवी

नई दिल्ली,  बॉलीवुड एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ‘महारानी 4’ के साथ एक बार फिर ओटीटी पर तूफान लाने के लिए तैयार हैं। इसका नया ट्रेलर सोशल मीडिया पर रिलीज कर दिया है। इस सीजन में पहले से भी ज्यादा राजनीतिक षड्यंत्र देखने को मिल रहे हैं, लेकिन भारती देवी हार नहीं मानने वाली हैं, बल्कि दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश करेंगी। ‘महारानी 4’ का लेटेस्ट ट्रेलर रिलीज हो गया है जिसमें इस बार भारती देवी अकेली नहीं, बल्कि अपने कुनबे के साथ दिख रही हैं। सीरीज में भारती सिंह की बेटी और बेटे की एंट्री हो चुकी है। भारती सिंह की बेटी का किरदार श्वेता प्रसाद ने निभाया है, जो मां की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन इस बार भारती देवी दिल्ली की राजगद्दी यानी प्रधानमंत्री बनने की लड़ाई लड़ती दिखेंगी। सीरीज में ट्विस्ट ये भी है कि 10 साल पुराने केस में भारती देवी को फंसाने की कोशिश की जाएगी। अब भारती देवी इन परिस्थितियों से कैसे लड़ती हैं, ये तो सीरीज देखने के बाद ही पता चलेगा। ‘महारानी 4’ को सात नवंबर से सोनी लिव पर स्ट्रीम किया जाएगा। गौर करने वाली बात ये भी है कि सीरीज को बिहार चुनाव के दौरान स्ट्रीम करने का फैसला लिया गया। 6 नवंबर को बिहार में पहले चरण के विधानसभा चुनाव हैं और 7 नवंबर से दर्शक सीरीज को देख पाएंगे। ‘महारानी’ का हर सीजन बिहार की राजनीति पर बना है और बिहार चुनाव के दौरान सीरीज को रिलीज करना मेकर्स को फायदा पहुंचा सकता है। बता दें कि ‘महारानी’ के तीनों सीजन को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। पहले सीजन में भारती देवी अकेली सत्ता और अपने आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करती दिखीं थी, लेकिन अब उनका पूरा परिवार उनके साथ है, जो बिहार की राजनीति में उथल-पुथल लेकर आएगा। हालांकि भारती सिंह का बेटा बिहार का सीएम बनना चाहता है, ऐसे में भारती देवी अपने परिवार की अंदरूनी लड़ाई भी लड़ती दिखेंगी। इस बार सीरीज में कुछ नए चेहरों को भी जोड़ा गया है। इस बार सीरीज में श्वेता बसु, प्रमोद पाठक, शार्दुल भारद्वाज, अमित सियाल, कनी कुसरुति और विनीत कुमार जैसे कलाकारों को भी शामिल किया गया है।  

दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खबर: प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां होंगी बंद

नई दिल्ली दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। 1 नवंबर से राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों (कमर्शियल व्हीकल्स) का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहेगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) (सीएक्यूएम) ने शुक्रवार को यह फैसला लिया और आदेश दिया कि सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि कोई गाड़ी नियम तोड़कर न घुसे। सीएक्यूएम की 25वीं बैठक में यह तय किया गया कि अब दिल्ली में सिर्फ BS-VI, CNG, LNG या इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही माल ढोने के लिए प्रवेश कर पाएंगी। हालांकि, दिल्ली में रजिस्टर्ड BS-IV श्रेणी की हल्की, मझोली और भारी गाड़ियां को थोड़ी राहत दी गई है। उन्हें 31 अक्तूबर 2026 तक अस्थायी रूप से चलने की अनुमति दी जाएगी। पराली जलाने पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई सीएक्यूएम ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश (एनसीआर क्षेत्र) और राजस्थान के जिलों के अधिकारियों को अब सीधा अधिकार दिया गया है कि अगर कोई अधिकारी पराली जलाने पर कार्रवाई नहीं करता, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसका मकसद है कि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर तुरंत रोक लगाई जा सके। पुरानी डीजल और पेट्रोल गाड़ियों पर फिलहाल राहत सीएक्यूएम ने यह भी कहा कि 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को हटाने वाले अपने पुराने आदेश को फिलहाल स्थगित रखा जाएगा। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद किया गया है जिसमें अदालत ने इन गाड़ियों के मालिकों पर जबरदस्ती कार्रवाई रोकने के आदेश दिए हैं। सर्दियों के लिए एक्शन प्लान की समीक्षा बैठक में आयोग ने दिल्ली और एनसीआर राज्यों के विंटर एक्शन प्लान की भी समीक्षा की। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को आदेश दिया गया है कि वे फसलों के अवशेष के प्रबंधन को और सख्ती से लागू करें और निगरानी बढ़ाएं ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके। ग्रीन पटाखों पर भी नियंत्रण के आदेश सीएक्यूएम ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि ग्रीन पटाखों की बिक्री केवल 18 से 20 अक्तूबर तक ही एनसीआर के चुने हुए स्थानों पर हो सकेगी। वहीं, पटाखे फोड़ने की अनुमति सिर्फ दिवाली की रात और उसके पहले की शाम कुछ तय घंटों में ही होगी। CPCB और राज्य बोर्ड करेंगे निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश दिया गया है कि वे 14 से 25 अक्तूबर के बीच वायु गुणवत्ता पर नजर रखें। इसके साथ ही उन इलाकों से रेत और पानी के सैंपल भी लिए जाएंगे जहां पटाखों का अधिक उपयोग होता है। सभी एजेंसियों को कहा गया है कि वे ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपायों की लगातार समीक्षा करें। और उन्हें सख्ती से लागू करें ताकि सर्दियों में दिल्ली की हवा और जहरीली न बने।

दिल्ली में सियासी हलचल: अमित शाह से मिले उपेंद्र कुशवाहा, मौजूद थे नित्यानंद राय

विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) के भीतर सीट बंटवारे से असंतुष्ट उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे हैं। वहीं नित्यानंद राय भी मौके पर मौजूद हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कुशवाहा अपनी पार्टी को आवंटित छह सीटों से खुश नहीं हैं। वह महुआ सीट एनडीए के एक अन्य घटक, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अध्यक्षता वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को आवंटित किए जाने से भी खुश नहीं हैं। पटना में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा कुशवाहा को मनाने की कोशिशें नाकाम रहीं। बता दें कि केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और राज्य के अन्य भाजपा नेताओं ने मंगलवार शाम यहां कुशवाहा से मुलाकात की। बैठक देर रात तक चली, जिसके बाद कुशवाहा ने संवाददाताओं से कहा, "इस बार एनडीए में कुछ भी ठीक नहीं है…एनडीए नेताओं ने मंगलवार को दावा किया था कि गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों का बंटवारा सौहार्दपूर्ण ढंग से हो गया है और चर्चा अंतिम चरण में है। हालाँकि, इसके तुरंत बाद छोटे सहयोगियों में असंतोष सामने आ गया।

10 नई मुफ्त एम्बुलेंस सेवाओं के साथ दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए रेखा सरकार ने अहम कदम उठाया है। रविवार (5 अक्टूबर) को दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने ‘आकाश कम्युनिटी लाइफ सेवर्स (ACLS) निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा’  के तहत 10 नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल द्वारा शुरू की गई यह पहल दिल्ली-NCR में त्वरित चिकित्सा सहायता मुहैया कराने और समय पर आपातकालीन सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ दिल्ली के द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर अस्पताल में आयोजित समारोह से किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आईपीएस अधिकारी रॉबिन हिबू, आकाश हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष चौधरी और स्वास्थ्य क्षेत्र की कई नामी हस्तियां मौजूद रहीं। दिल्ली-NCR में शुरू की गई 10 मुफ्त एम्बुलेंस सेवाएं अत्याधुनिक तकनीक और आवश्यक आपातकालीन उपकरणों से सुसज्जित हैं। प्रत्येक एम्बुलेंस में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं: कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, वेंटिलेटर, सक्शन मशीन, इन्फ्यूजन पंप, ग्लूकोमीटर, पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर, व्हीलचेयर, स्कूप स्ट्रेचर और स्पाइन बोर्ड, प्रशिक्षित पैरामेडिक स्टाफ और आपातकालीन दवाएं. ये एम्बुलेंस एआई, जीपीआरएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी से लैस हैं, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित सेवा सुनिश्चित की जा सकेगी। सेवा का लाभ लेने के लिए लोग टोल-फ्री नंबर 1800-303-8888 पर कॉल कर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने किया एम्बुलेंस सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने सरकारी और निजी भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि जब सरकारी संस्थान निजी अस्पतालों या संस्थाओं के साथ मिलकर जनता को सेवाएं प्रदान करते हैं, तो उस राज्य की दशा और दिशा दोनों बदल जाती है। चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग के लिए हम इस एम्बुलेंस सेवा के शुभारंभ का स्वागत करते हैं।” एक कॉल पर मरीज तक पहुंचेगी एम्बुलेंस स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस नई एम्बुलेंस सेवा के शुरू होने से आदर्श प्रतिक्रिया समय 30 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कॉल करते ही एम्बुलेंस तुरंत मरीज तक पहुंच सके। डॉ. सिंह ने कहा कि राजधानी में कॉलर सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम चल रहा है और आकाश हॉस्पिटल समेत अन्य संस्थानों से भी उन्होंने आग्रह किया कि इस दिशा में और तेजी से सुधार करें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह एम्बुलेंस सेवा दिल्ली के लिए बेहतर सुविधा के साथ एक प्रशंसनीय कदम है। उन्होंने सभी संस्थाओं से अपील की कि भविष्य में ऐसे ही सहयोगात्मक प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ACLS एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है और इसके लिए दिल्ली की जनता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नजर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि त्योहारी सीजन में राजधानी दिल्ली में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं और मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि राजधानी के विभिन्न स्थानों और बड़ी मंडियों में छापेमारी की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और आगे भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि त्योहारों के दौरान जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने मिलावटखोरों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था जो मिलावटी या नकली खाद्य पदार्थ बेचते हुए पकड़ा जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। डॉ. सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी की टीमें पूरी तैयारी के साथ लगातार छापेमारी में जुटी हैं और राजधानी में मिलावट करने वाला कोई भी बच नहीं पाएगा।

दिल्ली-NCR के लिए बड़ी खबर: जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली तक बनेगा सुपरफास्ट एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक नया 30 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जो जेवर एयरपोर्ट से सीधे दिल्ली तक पहुंचेगा। यह नया एक्सप्रेसवे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाया जाएगा और यमुना नदी को पार करते हुए पुस्ता रोड के जरिए दिल्ली तक पहुंचेगा। यह सड़क नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए दिल्ली के यातायात को आसान बनाएगी। परियोजना को किसने बढ़ावा दिया? इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के प्रयासों से हुई थी। अब इस योजना को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी समर्थन मिल गया है। हाल ही में जेवर एयरपोर्ट के दौरे पर उन्होंने फंडिंग देने का ऐलान भी किया। यात्रा का समय घटेगा अभी जेवर से दिल्ली तक पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते हैं। नए एक्सप्रेसवे से यह दूरी सिर्फ 30 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। 1.20 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा नितिन गडकरी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-NCR में चल रहे 1.20 लाख करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। अब तक इनमें से आधा काम पूरा हो चुका है। आने वाले समय में सरकार यहां 40 से 50 हजार करोड़ रुपये और निवेश करने को तैयार है। भीड़भाड़ होगी कम नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रोजाना लगभग 5 लाख वाहन चलते हैं। इनमें से करीब 2 लाख वाहन डीएनडी से गुजरते हैं। चिल्ला बॉर्डर, कालिंदी कुंज और सेक्टर 15, 16, 18, 37 जैसे क्षेत्रों से भी भारी ट्रैफिक आता है। पीक ऑवर में अक्सर जाम लग जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। नया एक्सप्रेसवे इन वाहनों को बायपास कराकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक ले जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के लिए खास एक्सप्रेसवे यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। यूपी सरकार के अनुसार, 2025 के अंत तक एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो जाएगा, जिसके बाद इस एक्सप्रेसवे की जरूरत और बढ़ जाएगी। कौन बनाएगा एक्सप्रेसवे? नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी से फंडिंग को लेकर चर्चा की गई है। तीनों अथॉरिटीज़ का सुझाव है कि यह प्रोजेक्ट NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को सौंपा जाए ताकि केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से मिलने वाली फंडिंग का सही उपयोग हो सके।  दिल्ली-NCR के लोगों को ट्रैफिक की परेशानी से राहत देने और जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए यह नया एक्सप्रेसवे एक गेमचेंजर साबित हो सकता है।