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पटरी नवीनीकरण तेज, भोपाल मंडल में 100 किमी से अधिक ट्रैक का सुधार, यात्रियों के लिए सुरक्षा बढ़ाई

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

यात्रियों के लिए नया नियम: 75,000 रुपये से ऊपर के सामान पर चार्ज देना होगा

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में 'ड्यूटी फ्री' आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का 'ड्यूटी फ्री' सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

संघ और दिल्ली की बैठक के बाद MP में निगम-मंडलों में नियुक्तियों की तैयारी, जल्द जारी होगी सूची

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निगम–मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सत्ता और संगठन ने दिल्ली के निर्देश पर नामों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है, जिस पर संघ से भी मंथन किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक सूची दिल्ली भेज दी गई है और वहां से हरी झंडी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इस असंतोष को देखते हुए जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 12 प्रमुख निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की योजना बनाई गई थी। नाम भी तय हो गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के चलते प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। दिल्ली का साफ संदेश—छोटी नहीं, बड़ी सूची लाओ सूत्र बताते हैं कि नियुक्तियों में हो रही देरी की शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली से साफ संदेश आया कि अब 10–12 नामों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एकमुश्त बड़ी सूची भेजी जाए ताकि अधिकतर निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में एक साथ नियुक्तियां की जा सकें। सीएम हाउस में हुई मैराथन बैठक राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मैराथन बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में निगम–मंडलों और प्राधिकरणों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित नामों पर गहन चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।अब सबकी निगाहें दिल्ली से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा और सत्ता–संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा।  

‘सपा को सामाजिक न्याय नहीं, सिर्फ अपने परिवार की फिक्र’ — योगी आदित्यनाथ का हमला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को 'पीडीए' से ज्यादा 'परिवार' की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, "पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो 'परिवार' है…!" मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।" उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?" योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।" योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।

विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिका में तीन दिन, ऊर्जा व सुरक्षा पर गहन चर्चा

नई दिल्ली   भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज से तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह यात्रा 2 से 4 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान वह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में भाग लेंगे। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव, और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा और नई तकनीकों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने उम्मीद जताई थी कि सर्जियो गोर भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।  इसके अलावा, 25 जनवरी को जयशंकर ने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी, जिसमें माइक रोजर्स, एडम स्मिथ और जिमी पैट्रोनिस शामिल थे। इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।इससे पहले, 13 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत में नागरिक परमाणु ऊर्जा, व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की समीक्षा की गई थी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया था और कहा था कि दोनों देशों ने व्यापार वार्ता, क्रिटिकल मिनरल्स और आने वाले महीनों में संभावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की है। जयशंकर की यह अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

CM योगी का क्रांतिकारी कृषि मॉडल: जानिए कैसे डबल फसल से दोगुनी कमाई होगी

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।  

उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात: जेवर एयरपोर्ट इस दिन से होगा शुरू, PM मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एयरपोर्ट तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस महीने एयरपोर्ट का उद्घाटन कर किया जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। लगभग 1,300 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का संचालन शुरू में सितंबर 2024 में शुरू होने वाला था और यह कई डेडलाइन चूक चुका है। निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही सबसे अधिक 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद अब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र चालू होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार जेवर एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने के लिए तैयार है। यह एयरपोर्ट नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जिसमें स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रारंभिक चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक आर्थिक हब का काम करेगा। यह एयरपोर्ट न केवल बुनियादी सुविधाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए रोजगार और संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोलेगा।  

29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

अन्तःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करें, अन्नदाता की आय में होगा कई गुना इजाफा: मुख्यमंत्री गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों के लिए लाभकारी: मुख्यमंत्री 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका 'गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तःफसली खेती' को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि 'बहु-गुणित' करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि 'गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि  कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।

प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: मुख्यमंत्री प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य करें; मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, उपकार और निजी उद्योग को एक मंच पर लाने का निर्देश, बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म रिलीज़ प्रक्रिया तेज हो कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास से जोड़ने और हर क्लाइमेटिक ज़ोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के निर्देश प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण तेज़ हो, प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के मुख्यमंत्री के निर्देश अगले पाँच वर्षों में पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की योजना, टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक 'बीज नीति' समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति कोई भी ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुँचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह मानक होना चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता बताई। फसल विविधीकरण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार करने को कहा। इसी क्रम में प्रदेश में अगले पांच वर्षों में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय बन सके। मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।

संसद में चीन मुद्दे पर टकराव: राहुल के दावे पर गरजे राजनाथ, दे डाला खुला चैलेंज

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानपर लोकसभा में हंगामा मच गया है। उन्होंने सोमवार को पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के नाम पर दावा करते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सेना के टैंक भारतीय सीमा के पास हैं। इसके लिए उन्होंने एक पुस्तक का हवाला देने की बात कही, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें चैलेंज कर दिया। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी को चुनौती दी और कहा कि आप बताएं कि आखिर यह पुस्तक प्रकाशित हुई भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी पुस्तक के आधार पर यहां बात नहीं की जा सकती, जो प्रकाशित ही नहीं हुई है। मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि यह पुस्तक पब्लिश हुई थी या नहीं। अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई।   राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह मनोज नरवणे की पुस्तक के आधार पर यह बात कह रहे हैं। इस पर डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि वह पुस्तक को प्रस्तुत कर दें। यदि कोई पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है तो फिर उसके आधार पर ऐसे दावे कैसे किए जा सकते हैं। वहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैंने पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का हवाला दिया है, जो प्रकाशित ही नहीं हुए हैं। इस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की स्पीच का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भी इस सदन से बाहर के संदर्भों की बात की थी। इस पर होम मिनिस्टर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने किसी मीडिया रिपोर्ट या फिर विषय से हटकर किसी पुस्तक का जिक्र नहीं किया था। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी स्पीच में 2004 से 2014 तक राष्ट्रपति के अभिभाषणों पर बात की थी। उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था, जो आपत्तिजनक था। राजनाथ सिंह और अमित शाह के ऐतराज के बाद भी राहुल गांधी ने अपना आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ये लोग तो आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं, लेकिन एक कोट का जिक्र करने से डरते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर इसमें ऐसा क्या लिखा है कि यह सरकार उसका जिक्र तक नहीं करने देना चाहती। अखिलेश यादव ने भी दिया दखल- बोलने देने से परेशानी क्या है? राहुल गांधी की स्पीच को लेकर बवाल बढ़ा तो अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि चीन का मसला संवेदनशील है और उससे सावधान रहने की जरूरत है। डॉ. लोहिया भी ऐसा कहते थे और मुलायम सिंह यादव भी उसे लेकर चिंतित थे। ऐसे में नेता विपक्ष यदि चीन को लेकर कुछ कहना चाहते हैं तो उन्हें रोकना नहीं चाहिए। वहीं राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि किसी पुस्तक के प्रकाशन पर ही रोक लगी है तो फिर उसका जिक्र सदन में नहीं होना चाहिए। ऐसा करना गलत है और सदन की गरिमा के खिलाफ है। राहुल गांधी बार-बार इसी मसले पर बोलना चाहते थे, लेकिन सदन में लगातार हंगामा होता रहा और राजनाथ सिंह ने कई बार खड़े होकर ऐसी पुस्तक के जिक्र पर आपत्ति जताई, जो प्रकाशित ही नहीं हुई। मैं आपका सलाहकार नहीं हूं, राहुल गांधी को स्पीकर की नसीहत अंत में बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है।