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राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ गाया वंदे मातरम्

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ गाया वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत की 150वी वर्षगांठ पर राजभवन में हुआ आयोजन भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल शुक्रवार को राजभवन के बैंक्वेट हॉल में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने राजभवन के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गायन किया। राज्यपाल  पटेल ने आज़ादी के संघर्ष, बलिदान और प्रेरणा के प्रतीक  बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्र गीत वंदे मातरम् की वर्षगांठ की सभी को शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मती मीनाक्षी सिंह सहित राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी ने राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया।  

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह का किया शुभारम्भ

प्रधानमंत्री  मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह का किया शुभारम्भ राज्यपाल  मंगुभाई पटेल कार्यक्रम में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वें वर्ष स्मरणोत्सव समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को किया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल  मंगुभाई पटेल भोपाल राजभवन से वर्चुअली शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मती मीनाक्षी सिंह सहित राजभवन के अधिकारी उपस्थित थे।  

सीएम योगी का संदेश: वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं, राष्ट्रभक्ति का प्रेरणास्रोत है

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आजादी के आंदोलन का मंत्र बने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने इस दिवस को स्मृति दिवस के रूप में आयोजित करने के लिए देशवासियों को नई प्रेरणा दी। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था। उस दौरान विदेशी हुकूमत के द्वारा दी जाने वाली अनेक यातनाओं, प्रताड़नाओं की परवाह किए बिना भारत का हर नागरिक (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारी) वन्दे मातरम् गीत के साथ गांव, नगर, प्रभातफेरी के माध्यम से भारत की सामूहिक चेतना के जागरण के अभियान से जुड़ चुका था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बातें रखीं। इस दौरान राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन हुआ और स्वदेशी का संकल्प भी लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लोकभवन में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा। सीएम योगी ने कहा कि 1875 में रचा गया यह गीत केवल आजादी का ही गीत नहीं रहा, बल्कि देश के अंदर आजादी के मंत्र को बढ़ाने में भी सफल हुआ। वन्दे मातरम् गीत संस्कृत व बांग्ला की सामूहिक अभिव्यक्ति को भले ही प्रदर्शित करता हो, लेकिन यह संपूर्ण भारत को राष्ट्र माता के भाव के साथ जोड़ने का अमर गीत बन गया। इसने भारत की शाश्वत अभिव्यक्ति को देशवासियों के सामने प्रस्तुत किया था। सीएम ने कहा कि जब विदेशी हुकूमत ने 1905 में बंग-भंग के माध्यम से भारत की भुजाओं को काटने का दुस्साहिक निर्णय लिया था, उस समय भी इस गीत ने पूरे भारतवासियों को एकजुट होकर प्रतीकार करने की प्रेरणा दी। उसके बाद के कालखंड में जब भी किसी क्रांतिकारी ने फांसी के फंदे को चूमा, तब उसके मुख से वंदे मातरम् मंत्र ही निकलता रहा। वन्दे मातरम् ने किया संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व   सीएम योगी ने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान भी जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कोई स्लोगन, फ्लैग दिया तो वन्दे मातरम् उसका स्वर बना। वन्दे मातरम् संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने वाला मंत्र बना। इस गीत ने हर भारतीय के मन में यह भाव रचने का प्रयास किया कि व्यक्ति जाति-मत-मजहब से ऊपर उठकर राष्ट्र के बारे में सोच सके और राष्ट्रप्रथम के भाव के साथ राष्ट्रमाता के प्रति सामूहिक अभिव्यक्ति हो। सीएम योगी ने वंदे मातरम् को भारत की भक्ति-शक्ति के सामूहिक शाश्वत अभिव्यक्ति का सामूहिक स्वरूप बताया। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् के अमरगीत के साथ उसके 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हम सभी इसके रचयिता को भी याद कर रहे हैं। संविधान सभा ने इस गीत को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी। यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने में हुआ है सफल सीएम योगी ने कहा कि यह भले ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के आनंद मठ के उस अमर उपन्यास पर आधारित है, जिन्होंने भारत व बंगाल में उस दौरान भूख से तड़पती, अकाल-अभाव से ग्रसित जनता के उन स्वरों को, जिसे संन्यासियों ने बाद में आंदोलन का रूप दिया। लेकिन वास्तव में यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने व भारत की सामूहिक चेतना को आगे बढ़ाने में सफल हुआ है। आज इसके 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह गीत 150 वर्ष से भारत को प्रतिनिधित्व देते हुए नई राष्ट्रीयता का भाव पैदा करने में सफल हुआ है। कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है वन्दे मातरम् सीएम योगी ने कहा कि हम सब वन्दे मातरम् का हिस्सा हो सकते हैं। वन्दे मातरम् किसी उपासना विधि, किसी जाति-व्यक्ति का महिमा मंडन करने के प्रति नहीं, बल्कि हमारे कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है। सीएम ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान की ड्राफ्टिंग प्रति सौंपने का भी जिक्र किया। सीएम ने पीएम मोदी के उस कथन की चर्चा की औऱ कहा कि हम देश में रहते हैं, अधिकारों की बात करते हैं पर क्या कभी कर्तव्य के बारे में स्मरण किया है। कर्तव्य ऐसा हो, जो वर्तमान व भावी पीढ़ी के भविष्य को भी उज्ज्वल बना सके। वन्दे मातरम् राष्ट्रमाता के प्रति हमारे कर्तव्यों के प्रति हमें आग्रही बनाता है। उत्तर प्रदेश पिछले 8 वर्ष में जिन ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हुआ है, यह हमारे कर्तव्यों की ही अभिव्यक्ति है। नागरिक जब स्वार्थ से उठकर कर्तव्य के मार्ग पर बढ़ता है तो सही मायने में वह वन्दे मातरम् का गान कर रहा होता है सीएम योगी ने कहा कि जब एक शिक्षक अपने छात्र को संस्कारवान बनाता है, जब जवान विपरीत परिस्थितियों (सियाचीन ग्लेशियर में जो जवान खड़ा होगा, वहां तापमान माइनस 40 होगा और  मई-जून में राजस्थान के रेगिस्तान में जो जवान सीमाओं की रक्षा कर रहा होगा, वह 55 डिग्री टेंपरेचर में भी गर्मी की परवाह किए बिना सीमाओं की सुरक्षा के लिए जूझता है) का सामना करते हुए भी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अडिग खड़ा रहता है। जब किसान खेती की उर्वरता को बढ़ाते हुए अन्न उत्पादन करता है और जब भारत का हर नागरिक स्वार्थ से उठकर कर्तव्यों के मार्ग पर बढ़ता है तो सही मायने में वह वन्दे मातरम् का गान कर रहा होता है। इस दौरान मुख्य सचिव एसपी गोयल, प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार आदि मौजूद रहे।  

आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों व एजेंसियों को कार्रवाई के आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी आवारा पशुओं को सड़कों, राज्य के हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से हटाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे लेकर राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगरपालिकाओं को भी निर्देश जारी किया है। इतना ही नहीं कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आवारा पशुओं को हटाने के लिए हाईवे निगरानी टीमें बनाई जाएं जो उन्हें पकड़ कर सड़कों से हटाएगी और शेल्टर होम्स में रखेगी। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में आगे आवारा कुत्तों के मुद्दे पर भी आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में जगह दी जाए। साथ ही उन्हें टीकाकरण के बाद भी उसी इलाके में न छोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं।   सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों- जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कुत्तों के काटने के मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी की बात कही और आदेश दिया कि अधिकारी आवारा कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें शेल्टर में टीके दिए जाएं। इसके बाद उन्हें पुरानी जगहों पर न छोड़ा जाए। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के दोबारा न घुसने देने के इंतजाम भी तय हों। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 13 जनवरी को करेगी।  

पहले चरण में 8% ज्यादा मतदान — बिहार में फिर बदल सकती है सत्ता की तस्वीर?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 18 ज़िलों की 121 सीटों पर उतरे 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. गुरुवार को पहले चरण में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला. पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है. बिहार की सियासत में इस बार के मतदान को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक वोटिंग है. साल 2020 में पहले चरण में 56.1 फीसदी वोटिंग हुई, लेकिन उस समय पहले फेज में 71 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए हैं.  चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा। इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है। इस बार चुनाव में जिस तरह से मतदान बढ़ा है, उससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 ज़िलों की 121 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर और समस्तीपुर जिले में सबसे ज़्यादा मतदान रहा तो पटना में सबसे कम वोटिंग हुई है। मुजफ़्फरपुर में 70.96 फीसदी, समस्तीपुर में 70.63 फीसदी, मधेपुरा में 67.21 फीसदी, वैशाली में 67.37 प्रतिशत हुआ. सहरसा में 66.84 फीसदी, खगड़िया में 66.36 फीसदी, लखीसराय में 65.05 फीसदी, मुंगेर में 60.40 फीसदी, सीवान में 60.31 फ़ीसदी, नालंदा में 58.91 फीसदी और पटना जिले में 57.93 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस तरह से बिहार के पहले चरण में 64.69 फीसदी कुल मतदान रहा. बिहार में साढ़े 8 फीसदी मतदान रहा 2020 में पहले फेज में 3.70 करोड़ कुल वोटर थे, जिसमें से 2.06 करोड़ ने वोट किया था. लेकिन अबकी बार पहले फेज में कुल 3.75 करोड़ वोटर हैं, जो पिछली बार से 5 लाख अधिक हैं. इस बार की पहले चरण में 64.69 फासदी वोटिंग हुई. अब सियासी दल इस बढ़े वोटिंग पैटर्न को अपने-अपने लिहाज से मुफीद बता रहे हैं. बिहार में इससे पहले 1951-52 से 2020 तक सबसे अधिक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 फीसदी वोट पड़े थे जबकि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे अधिक 1998 में 64.60 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि इस बार बिहार में पहले चरण की सीटों पर हुए वोटिंग ने इसे भी पछाड़ दिया. बिहार का वोटिंग पैटर्न के क्या संकेत वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा-सीधा असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ता है. भारत के चुनावी इतिहास में आमतौर पर माना जाता है कि जब वोटिंग ज़्यादा होती है, तो जनता बदलाव (एंटी इंकम्बेंसी) चाहती है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता. चुनाव में देखा गया है कि कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन (प्रो इंकम्बेंसी) भी रहती है.  मतलब साफ  है कि वोटर्स की ये सक्रियता किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. एसआईआर के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. एसआईआर में तमाम वोट काटे गए हैं तो कुछ नए वोट जोड़े गए हैं. इस तरह फर्जी वोटर हटाए जाने की वजह से भी वोटिंग बढ़ने का कारण माना जा रहा है,  लेकिन बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदल जाती है.  बिहार में वोटिंग बढ़ने से बदली सरकार बिहार में विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 1951-52 से 2020 तक केवल तीन बार ही 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई. 1990 में 62.04, 1995 में 61.79 और अब से पहले सबसे अधिक रिकॉर्ड 2020 में 62.57 वोट पड़े थे, लेकिन इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अभी पहले चरण में 64.69 फ़ीसदी वोटिंग रही है. ऐसे ही अगले चरण में वोटिंग हुई तो बिहार के इतिहास में यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा. बिहार में अभी तक सबसे कम 42.60 फ़ीसदी भी 1951-52 में ही वोट पड़े थे. आजादी के बाद से लेकर अभी तक बिहार में जितने चुनाव हुए हैं, उसके वोटिंग पैटर्न को देखते हैं तो साफ जाहिर होता है कि बिहार में जब-जब मतदान में 5 फीसदी से ज़्यादा इजाफा हुआ है, उसका असर चुनाव पर पड़ा है. बिहार में सरकार बदल गई है, तीन बार देखा गया है कि वोटिंग बढ़ने से कैसे सत्ता पर सियासी असर पड़ा है.  बिहार में 5% से कैसे बदल जाती है सरकार बिहार में सबसे पहले 1967 के चुनाव में वोटिंग में इजाफा हुआ तो सरकार बदली. 1962 में 44.5 फ़ीसदी वोटिंग के मुकाबले 1967 में 51.5 फीसदी मतदान रहा.  इस तरह 7 फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई थी और कांग्रेस के हाथों से सरकार निकल गई थी बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी. 1967 के बाद 1980 में भी यही पैटर्न दिखा. वर्ष 1980 में 57.3 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1977 के चुनाव में 50.5 फ़ीसदी वोटिंग रही. इस तरह 6.8 फ़ीसदी ज़्यादा मतदान हुआ, जिसका नतीजा रहा कि सरकार बदल गई. जनता पार्टी को हार झेलना पड़ा और कांग्रेस वापसी कर गई. बिहार में इस बार समीकरण बदल गए हैं हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं. 2020 में एनडीए से अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा इस बार एनडीए के साथ थे तो मुकेश सहनी इस बार महागठबंधन के साथ हैं। इस बार 104 सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि 17 सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है. पहले चरण में आरजेडी 72 सीट पर है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजामा रहे हैं. वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में थे। इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट है. वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज़ में 57 सीट मैदान में है तो बीजेपी ने 48 सीट पर थी। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी … Read more

अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश

 नई दिल्ली/ अहमदाबाद     सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश जुड़े मामले पर सुनवाई की. इस अदालत ने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के पायलट-इन-कमांड, दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता से कहा, "देश में कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी." जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी 91 साल के पुष्कर सभरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. पुष्कर सभरवाल ने इस क्रैश की एक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग की है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें. हमदर्दी जताते हुए, बेंच ने याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल को भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए उनके बेटे को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है. इस साल जून में अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के लंदन जाने वाले विमान के पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा, "इस त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." बता दें कि इस विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान के पायलटों में से एक, कमांडर सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति से दुर्घटना की जांच कराने का अनुरोध किया गया था. याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में भारी खामियां हैं. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जांच दल ने व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में असमर्थ हैं. याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच में तथ्यों का चयनात्मक और अपूर्ण खुलासा, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा, तथा उन प्रणालीगत कारणों को दबाना शामिल है जो डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बिना किसी पुष्टिकारक साक्ष्य या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में यह अनुमान लगाया गया है कि यह घटना पायलट की गलती से हुई है. याचिका में भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जिससे इसके निष्कर्ष अविश्वसनीय हैं. आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष जांच चाहते हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएआईबी द्वारा की जा रही वर्तमान जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि वह विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम के नियम 12 के तहत न्यायिक निगरानी में जांच का निर्देश दे. न्यायमूर्ति ने कहा- "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दुर्घटना घटी और उन्होंने अपने बेटे को खो दिया. लेकिन उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे पर आरोप लगाया जा रहा है या उसे दोषी ठहराया जा रहा है. हम स्पष्ट कर देंगे, कोई भी उसे किसी भी चीज के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता." न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और रिपोर्ट में दोष बांटने का कोई सवाल ही नहीं है और वास्तव में, जांच का उद्देश्य दोष बांटना नहीं है और इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचना नहीं है. शंकरनारायण ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख का उल्लेख किया, जो इस जांच से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और जिसमें कहा गया है कि उनके मुवक्किल के बेटे पर हमला किया जा रहा है. न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि एक विदेशी प्रेस, आपके मुकदमे को अमेरिकी अदालत में डब्ल्यूएसजे के खिलाफ क्या कहना चाहिए था." वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएसजे एक भारतीय सरकारी सूत्र का हवाला दे रहा है. पीठ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और आरोप एक विदेशी प्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसका आक्षेप तथ्यात्मक रूप से गलत है. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग इसलिए की जा रही है क्योंकि वे केवल भारत को दोष देना चाहते हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि हमें इस घटिया रिपोर्टिंग को नज़रअंदाज करना चाहिए. पीठ ने जवाब दिया कि उनके समक्ष प्रस्तुत याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है. वरिष्ठ वकील ने बताया कि 3 अगस्त को, प्रतिवादी संख्या 3, जो प्रारंभिक जांच कर रहे हैं ने अपने मुवक्किल, जो अब 91 वर्ष के हैं, के घर दो अधिकारियों को भेजा. उन्होंने सवाल किया कि आपके बेटे का तलाक कब हुआ. उसे बताया गया कि करीब 15 साल पहले. इस पर यह थ्योरी बनायी जाने लगी कि वह अवसाद से ग्रस्त था इसीलिए आत्महत्या करने की कोशिश की. उनके मुवक्किल से भी उनकी पत्नी का निधन के बारे में पूछा गया. वरिष्ठ वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल से कहा कि इसलिए उनके बेटे को अवसाद है, जबकि उन्होंने जांचकर्ताओं के आचरण की आलोचना की. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि भारत कोई छोटा देश नहीं है, बल्कि 142 करोड़ लोगों वाला देश है. उन्होंने आगे कहा, "किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि पायलट की कोई गलती थी. त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बेटा पायलट था और उनका पोता भी पायलट है और वे राष्ट्र को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाना गलत है. प्रतिवेदन सुनने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा और 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित मामले के साथ इस मामले पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नजदीक उमरिया में दो बाघों ने गांव में मवेशियों को बनाया निशाना

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे पनपथा गांव के सरैया टोला में गुरुवार की शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब रहवासी क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो बाघों की चहल-कदमी देखी गई। अचानक बाघों को बस्ती की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाघों ने गांव के ही गेंदिया सिंह के एक मवेशी पर हमला कर शिकार किया था। मवेशी को निवाला बनाने के दौरान दोनों बाघ रहवासी क्षेत्र तक पहुंच गए। ग्रामीणों ने आपसी साहस दिखाते हुए तेज आवाजें और बर्तनों की खड़खड़ाहट से किसी तरह बाघों को जंगल की ओर खदेड़ा। सूचना मिलने पर वन विभाग और पार्क टीम मौके पर पहुंची, जिन्होंने क्षेत्र का मुआयना किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। टीम लगातार क्षेत्र में पेट्रोलिंग और निगरानी बनाए हुए है, ताकि बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। फिलहाल गांव में रात होते ही सन्नाटा और डर का माहौल है, जबकि ग्रामीण बाघों की दोबारा आमद की आशंका से अब भी सहमे हुए हैं।  

76 अधिकारियों का बड़ा जिम्मा, वन क्षेत्रपालों को मिला पदस्थापना आदेश

भोपाल  प्रशासनिक नजरिए से 7 नवंबर का दिन मध्यप्रदेश के लिए कुछ खास होगा। इस दिन प्रदेश को 8 सौ से ज्यादा नए अधिकारी, कर्मचारी मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन नव-चयनित सरकारी सेवकों को समारोहपूर्वक नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। शुक्रवार को राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। खास बात यह है कि यहां 76 वन क्षेत्रपालों को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही इन्हें प्रदेश के वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व दे दिया जाएगा। 7 नवम्बर को पूर्वान्ह 11.30 बजे से कार्यक्रम शुरु होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां वन एवं लोक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुल 877 अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। इनमें वन विभाग के 543 नव-नियुक्त वनरक्षक एवं वन क्षेत्रपाल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के 334 नव-नियुक्त विशेषज्ञ एवं नर्सिंग ऑफिसर शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा वर्ष 2024-25 से चयनित 75 निश्चेतना विशेषज्ञ, 62 सर्जरी विशेषज्ञ, 106 शिशु रोग विशेषज्ञ एवं 91 नर्सिंग ऑफिसर को नियुक्ति आदेश दिए जाएंगे। वन विभाग में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल, भोपाल द्वारा आयोजित वनरक्षक भर्ती परीक्षा वर्ष 2022-23 में चयनित 467 नव-नियुक्त वनरक्षकों को पदस्थापना आदेश दिए जाएंगे। इन्होंने वन प्रशिक्षण विद्यालयों में वानिकी प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है। साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वन क्षेत्रपाल भर्ती परीक्षा वर्ष 2020-21 से चयनित 76 वन क्षेत्रपाल को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएगे। इन्होंने देश की विभिन्न प्रशिक्षण अकादमियों में 18 माह का प्रशिक्षण पूरा किया है। द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी बता दें कि मध्यप्रदेश में वन क्षेत्रपाल (Range Forest Officer) द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। ये राज्य वन सेवा (State Forest Service – SFS) के अंतर्गत आते हैं जोकि वन मंडल अधिकारी (DFO) के अधीन रहकर कार्य करते हैं। प्राय: इन्हें एक वन रेंज (Forest Range) का प्रभार दिया जाता है। वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व वन क्षेत्रपालों का ही रहता है। वृक्षों की कटाई, वन उत्पादों का संग्रहण और वन क्षेत्र का प्रबंधन भी इनके कार्यों में शामिल है।

‘वंदे मातरम्’ को लेकर मचा घमासान: सरकारी स्कूलों में अनिवार्यता पर नेताओं में ठनी

जयपुर राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में हर सुबह वंदे मातरम् गीत गाने को अनिवार्य करने का आदेश दिया है। यह कदम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों के महत्व और पूरे साल देशभक्ति वर्ष मनाने के अभियान का हिस्सा है। शिक्षा विभाग ने कहा कि आदेश का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है। 15 नवंबर तक यह व्यवस्था सभी संस्थानों में लागू हो जाएगी, और इसकी निगरानी जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है। कांग्रेस ने किया विरोध वहीं, कांग्रेस ने इस निर्णय को लेकर विरोध जताया है। प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी व्यक्ति या संगठन की इच्छा से नहीं। उन्होंने चेताया कि इस तरह के फ़रमान आने वाले समय में संघ के ध्वज-प्रणाम या शस्त्र पूजा को भी मदरसों में लागू करने की कोशिश हो सकती है। ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हरसहाय यादव ने कहा कि सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें, शिक्षकों की कमी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के बावजूद सरकार इन असली मुद्दों पर चुप है। सरकार ने बचाव किया शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह निर्णय किसी धर्म या मजहब के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी शिक्षण संस्थानों में समान देशभक्ति माहौल तैयार करने के लिए लिया गया है। जयपुर में 'वंदे मातरम् @ 150' के भव्य आयोजन की तैयारी ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राजधानी जयपुर में आज भव्य आयोजन की तैयारी है। सवाई मानसिंह स्टेडियम (SMS Stadium) में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन होगा, जिसमें करीब 50 हजार लोग एक साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन करेंगे। यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और स्वदेशी भावना को समर्पित वर्षव्यापी अभियान "वंदे मातरम् @ 150" की शुरुआत है, जो 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में चलेगा।

150 साल पूरे ‘वंदे मातरम’ के: अमित शाह ने कहा—राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है यह गीत

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि 'वंदे मातरम' आज भी हर भारतीय के दिल में राष्ट्रभक्ति की अमर ज्वाला प्रज्वलित करता है। यह गीत देश में एकता, देशभक्ति और युवाओं में नई ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। अमित शाह ने यह बात 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कही। इस गीत के रचनाकाल (7 नवंबर 1875) से शुरू होकर अगले एक साल तक यानी 7 नवंबर 2026 तक इसका विशेष स्मरण वर्ष मनाया जाएगा। 'वंदे मातरम' भारत के आत्मा की आवाज- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, 'वंदे मातरम' सिर्फ शब्दों का समूह नहीं, यह भारत की आत्मा की आवाज है। अंग्रेजी शासन के खिलाफ इस गीत ने देश को एकजुट किया और आजादी की चेतना को प्रबल किया। इसने देश के वीर क्रांतिकारियों में मातृभूमि के प्रति गर्व, समर्पण और बलिदान की भावना जगाई।' अमित शाह ने कहा कि यह गीत आज भी देशवासियों के दिलों में राष्ट्रप्रेम की लौ जलाए हुए है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ मिलकर 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाएं, ताकि यह भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना रहे। पीएम मोदी आज राष्ट्रीय उत्सव का करेंगे उद्घाटन इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में वर्षभर चलने वाले इस राष्ट्रीय उत्सव का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी करेंगे। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 'वंदे मातरम' को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को 'बंगदर्शन' पत्रिका में पहली बार प्रकाशित किया था। बाद में उन्होंने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में शामिल किया। इस गीत को संगीतकार और कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वरबद्ध किया था। 'वंदे मातरम' भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया और आज भी यह देश की सांस्कृतिक, राजनीतिक और सभ्यतागत चेतना का अभिन्न हिस्सा है।   वंदे मातरम हमारे देश का गौरव है- मुख्तार अब्बास नकवी वहीं इस मौके पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 'वंदे मातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है और हमारे देश का गौरव है। अब अगर कुछ लोगों को अपना ईमान खतरे में लग रहा है, तो उनसे बड़ा बेईमान कोई नहीं है। जिस गीत को संविधान सभा ने राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया, उसे सम्मान दिया, जिस गीत को हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे जोश और उत्साह के साथ गाया, देश को आजाद कराया और अंग्रेजों को देश से खदेड़ा, अगर वही गीत किसी के ईमान को तोड़ता है, तो उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं हो सकता… यह साबित करता है कि राष्ट्र के प्रति आपके विचार और मूल्य कितने दूषित हैं।' 'वंदे मातरम' भारत की एकता का प्रतीक- प्रेम सिंह तमांग सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि 'वंदे मातरम' भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक और एकता, शक्ति व गर्व का अमर गीत है। उन्होंने बताया कि यह गीत 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अक्षय नवमी के दिन लिखा था। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा, 'वंदे मातरम ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लोगों के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला जगाई। यह गीत आज भी हमारी एकता और समर्पण का प्रतीक है।' उन्होंने सभी नागरिकों से इस वर्षभर चलने वाले राष्ट्रीय समारोह में शामिल होने की अपील की और कहा कि वंदे मातरम की अमर भावना हमें देशसेवा की प्रेरणा देती रहे। 'वंदे मातरम आज भी एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश' अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर तवांग में आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने इस गीत को ‘पवित्र गीत’ बताते हुए कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों के दिलों में जोश और भक्ति का भाव जगाने वाला गीत है। इस कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। सीएम खांडू ने कहा, 'वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति भक्ति का अमर आह्वान है, जिसने हर पीढ़ी को देशप्रेम से ओतप्रोत किया है।' उन्होंने कहा कि यह गीत आज भी एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देता है, जो हर भारतीय के हृदय में गूंजता रहेगा।