samacharsecretary.com

थमी नहीं बांग्लादेश में हिंसा: अल्पसंख्यक हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में कट्टरपंथियों के मन से कानून का भय पूरी तरह से खत्म हो चुका है। ताजा मामले में सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला में एक हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डेके घर में आग लगा दी गई। इसकी वजह से पीड़ित के परिवार और आसपास के लोगों में डर और घबराहट फैल गई। हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि घर में तेजी से आग की लपटें दिख रही थीं और परिवार के सदस्य भागने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला के नंदिरगांव यूनियन के बहोर गांव में इस्लामी समूह ने कथित तौर पर एक स्कूल टीचर के घर में आग लगा दी। एक अन्य मामले में इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक हिंदू शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 27 साल के ऑटो रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव के खेत से मिली। परिवार वालों और पुलिस के हवाले से बांग्लादेश के अखबार डेली मनोबकांठा ने बताया कि समीर रविवार शाम को अपने ऑटो रिक्शा से निकला था। जब वह देर रात तक घर वापस नहीं आया, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे अलग-अलग जगहों पर ढूंढना शुरू कर दिया। बाद में, वहां के लोगों को उपजिला के सदर यूनियन के तहत जगतपुर गांव के एक खेत में समीर की बॉडी मिली। खबर मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद किया। यह 24 दिनों में नौवीं घटना थी, जिसमें पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा को अंजाम दिया गया। ऐसे हालात को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जाहिर की जा रही है। इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर बार-बार होने वाले हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता जताई थी। भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में स्थिति पर नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा की ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी का आह्वान, किसी एक खेल को गोद लें विश्वविद्यालय-महाविद्यालय

मैच देखकर बढ़ाया मुख्यमंत्री ने महिला खिलाड़ियों का उत्साह खेल गतिविधियों को बढ़ाने से नशे से दूर रहेंगे युवा : सीएम योगी पीएम मोदी के मार्गदर्शन में देश में दिख रही नई खेल संस्कृति : सीएम योगी गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का आह्वान किया है कि वे किसी एक खेल को गोद लेकर उससे जुड़ी प्रतिभाओं को तराशें। खेल के जरिये स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कराकर अनुशासन और खेल भावना को मजबूत करने में योगदान दें। सीएम योगी शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) प्रतियोगिता के औपचारिक उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल गतिविधियों को बढ़ाने से युवा नशे से दूर रहेंगे, तमाम विकृतियों से बचे रहेंगे। युवा खेलेगा तो खिलेगा, और यही युवा देश को आगे बढ़ाने में, 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में योगदान देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने खेलों के माध्यम से भी विकसित भारत बनाने के अभियान में भरपूर प्रयास किए हैं। प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेरठ में बन चुकी है। मेरठ में हर प्रकार के स्पोर्ट्स आइटम बन रहे हैं और इसे सरकार ने ओडीओपी में शामिल किया है। पीएम मोदी की खेलों में अपार रुचि सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विगत 11 वर्षों में देश में एक नई खेल संस्कृति ने जन्म लिया है। 2014 के पहले खेल की गतिविधियां और प्रतियोगिताएं सरकार के एजेंडे का हिस्सा नहीं होती थीं। खेल और खिलाड़ियों की उपेक्षा होती थी। अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर न होने से खिलाड़ी खेल से पलायन करने को विवश होते थे। कुंठित, हताश और निराश रहते थे। जबकि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खेल और खिलाड़ियों का प्रोत्साहन देखते ही बनता है। पीएम मोदी ने खेलो इंडिया, फिट इंडिया और सांसद खेल प्रतियोगिता जैसे अभियानों से स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की प्रेरणा दी है। गांव-गांव तक खेल प्रतिभाओं को मंच दिया है। प्रधानमंत्री स्वयं विभिन्न खेलों में देश की विजेता टीमों के खिलाड़ियों के साथ बैठते हैं, प्रतियोगिता से पहले भी उनका हौसला बढ़ाते हैं। स्वस्थ शरीर से ही प्राप्त होंगे जीवन के सभी साधन मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा ने खेलकूद को सदैव महत्व दिया है। भारत की ऋषि परंपरा के उद्घोष ‘शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्’ का उद्धरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा जीवन के जितने भी साधन हैं, उन्हें स्वस्थ शरीर से ही प्राप्त किया जा सकता है। शरीर स्वस्थ रखने के लिए खेलकूद की गतिविधियों से जुड़ना होगा। नियम, संयम और अनुशासन से शरीर पर ध्यान देना होगा। स्वस्थ शरीर से ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि खेलकूद को तमाम परिवारों ने जीवन का हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बेटे-बेटी में भेदभाव नहीं है। आज बच्चा (बेटा या बेटी) खेल में रुचि दिखाता है, तो अभिभावक प्रोत्साहित करते हैं, उसके अनुरूप संसाधन की व्यवस्था करते हैं। यूपी ने बढ़ाया खेल इंफ्रास्ट्रक्चर सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाया गया है। प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान व ओपन जिम, ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, जिला स्तर पर स्टेडियम बनाने के कार्य युद्धस्तर पर आगे बढ़े हैं। खेल गतिविधियां अनौपचारिक न रहें, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बनें, इसके लिए सरकार ने 96000 से अधिक युवक मंगल दलों और महिला मंगल दलों को स्पोर्ट्स किट वितरित की हैं। 500 से अधिक खिलाड़ियों को दी सरकारी नौकरी खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की तत्परता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ओलंपिक में प्रदेश के प्रतिभागी खिलाड़ी को सरकार 10 लाख रुपये देती है। ओलंपिक एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता को 6 करोड़ रुपये का पुरस्कार और क्लास वन जॉब देने की व्यवस्था बनाई गई है। ओलंपिक की टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले यूपी के खिलाड़ी को 3 करोड़ और एकल स्पर्धा में रजत पदक विजेता को भी 3 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। ऐसे ही ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता सहित एशियाड, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप के पदक विजेताओं को भी नकद पुरस्कार दिए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक 500 से अधिक पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी दे चुकी है। खिलाड़ियों को डिप्टी एसपी, तहसीलदार और क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी के पद पर भी नियुक्त किया गया है। कॉमनवेल्थ और ओलंपिक के अनुरूप करें तैयारी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में होंगे। हर राज्य और खिलाड़ियों को इसके अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। भारत 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी के लिए भी आवेदन कर रहा है। कॉमनवेल्थ और ओलंपिक में अधिक पदक जीतने की तैयारी अभी से करनी होगी। गुरु गोरक्षनाथ की धरा पर किया खिलाड़ियों का अभिनंदन अपने संबोधन में सीएम योगी ने प्रदेश सहित देश के 14 राज्यों से आईं बास्केटबाल की महिला खिलाड़ियों का गुरु गोरखनाथ की पावन साधनास्थली पर स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने गोरखपुर को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध धरा बताने के साथ आजादी के आंदोलन में चौरीचौरा की घटना, वैदिक साहित्य के विश्व में सबसे बड़े प्रकाशन केंद्र 'गीता प्रेस' की महत्ता बताई। साथ ही अमर सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल तथा बंधु सिंह से इस जिले के किसी न किसी रूप में जुड़ाव का उल्लेख करते हुए गोरखपुर को महान उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर अनेक विभूतियों की पावन धरा है। मंचीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद की खेल विवरणिका का विमोचन भी किया। गुब्बारे उड़ाकर व बास्केटबॉल कोर्ट में बॉल उछाल कर किया उद्घाटन, खिलाड़ियों से परिचय भी किया मंचीय कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुब्बारे उड़ाकर तथा बास्केटबॉल कोर्ट में फीता काटकर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने स्वयं भी बास्केटबॉल कोर्ट में बॉल उछाली। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर विश्वविद्यालय और शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ की खिलाड़ियों से परिचय भी प्राप्त किया। मंचीय कार्यक्रम पूर्ण होने के बाद सीएम योगी ने फर्स्ट हाफ का मैच देखा और ताली बजाकर … Read more

भारतीय अर्थव्यवस्था पर IMF की मुहर, भाजपा बोली—राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को जवाब

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रशंसा किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि आईएमएफ का भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करना राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब है। सीआर केसवन ने राहुल गांधी को 'लीडर ऑफ पेसिमिज्म' (एलओपी) बताते हुए कहा, "उन्होंने जानबूझकर झूठ बोला और भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा-भला कहा। क्या वे अब देश और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे?" भाजपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "आईएमएफ की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब और झटका है। उन्होंने देश की शानदार प्रगति और विकास को कम आंकने की कोशिश की थी। राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार रही है, क्योंकि अपने छोटे, नाकाम राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत को गाली देने और बदनाम करने में उन्हें कोई पछतावा या शर्म नहीं है।" ज्ञात हो कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कुछ महीने पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' करार दिया था। राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा, "सब जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मरी हुई अर्थव्यवस्था है। इस बारे में पूरी दुनिया जानती है।" हालांकि, आईएमएफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हाल की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से बढ़ी है। आईएमएफ ने यह भी कहा कि वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है। भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूछे गए सवाल पर आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोजेक ने कहा, "भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो।" कोजेक ने आगे कहा, "हमने देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है।" इससे पहले, भारत ने पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 7.8 प्रतिशत और 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ रेट दर्ज की। इसकी तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत से काफी ऊपर ग्रोथ रहने का अनुमान है। एक प्रमुख एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की कुल ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

योगी सरकार की योजनाओं से गांवों में बदली विकास की तस्वीर

शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कौशल विकास तक दिखाई दे रहा समग्र बदलाव पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, खेल स्टेडियम, सोलर प्लांट और बालिकाओं की सुरक्षा को मिल रहा बल सरकारी धन से गांवों में बन रही आत्मनिर्भर विकास संरचना लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी लगन से आकांक्षात्मक विकास खंडों की तस्वीर बदलने में जुटी है। विकास अब कागज़ों से निकलकर गांवों की ज़मीन पर नजर आ रहा है। प्रदेश के कई पिछड़े व आकांक्षात्मक विकास खंडों में केंद्र व राज्य सरकार से प्राप्त प्रोत्साहन राशि का सदुपयोग कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, ऊर्जा, कौशल तथा आधारभूत सुविधाओं में ठोस बदलाव किया गया है। परिणाम यह है कि जो क्षेत्र कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते थे, वे अब प्रेरणादायी विकास मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार ने आकांक्षात्मक ब्लॉकों को परिणाम आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया है। शिक्षा से सशक्तिकरण, गांवों में ज्ञान के नए केंद्र विकास खंडों को मिल रही प्रोत्साहन राशि से विकास के व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बरेली के मझगवां विकास खंड में दो उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की रचनात्मक क्षमता और वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए एस्ट्रोनॉमी लैब का निर्माण किया गया है। इससे ग्रामीण बच्चों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का अवसर मिला। न्याय पंचायत गैनी में छात्रों के शैक्षिक विकास के लिए पुस्तकालय का निर्माण कराया गया। खेल और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा मझगवां (बरेली) में ही ग्राम पंचायत बेहटा बुजुर्ग में शारीरिक व सामाजिक विकास के दृष्टिगत मिनी स्टेडियम व ओपन जिम का निर्माण किया गया। यह पहल ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़ने के साथ ही नशामुक्त, स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बालिकाओं की सुरक्षा और सुविधा पर विशेष फोकस प्रोत्साहन राशि का सदुपयोग बदायूं के वजीरगंज विकास खंड में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भी देखा गया, जहां छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीसी रोड तथा बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया। यह योगी सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें ‘बेटी की सुरक्षा और शिक्षा’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। स्वच्छ ऊर्जा से प्रशासनिक सशक्तिकरण इसी प्रकार बलिया के सोहांव विकास खंड में विकास खंड कार्यालय भवन पर 10 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल सिस्टम स्थापित किया गया है। इससे न केवल बिजली खर्च में कमी आई है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में ग्रीन एनर्जी मॉडल को भी बढ़ावा मिला है। स्वास्थ्य, पोषण और कौशल विकास में समन्वित प्रयास आकांक्षात्मक ब्लॉकों में स्वास्थ्य एवं पोषण, पेयजल, मानव संसाधन विकास और कौशल उन्नयन जैसे क्षेत्रों में लक्षित निवेश किया गया है। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों से जुड़े संकेतकों पर विशेष ध्यान देते हुए योजनाओं को लागू किया जा रहा है, ताकि सामाजिक विकास के साथ मानव विकास सूचकांक में भी सुधार हो। योगी मॉडल: प्रोत्साहन से परिणाम आधारित विकास आकांक्षात्मक विकास खंडों में दिख रहा यह परिवर्तन योगी सरकार के सुशासन, पारदर्शिता और निगरानी आधारित मॉडल का परिणाम है। यहां प्रोत्साहन राशि का उपयोग केवल निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि स्थायी लाभ, सामुदायिक भागीदारी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। आज उत्तर प्रदेश के ये आकांक्षात्मक ब्लॉक संदेश दे रहे हैं कि सरकारी धन यदि सही योजना, ईमानदार क्रियान्वयन और स्पष्ट विजन के साथ खर्च हो, तो वही क्षेत्र प्रेरणादायी विकास की मिसाल बन सकता है। योगी सरकार का यह मॉडल आने वाले समय में प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक रोल मॉडल बनता दिख रहा है।

वोट कटने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, कहा– लोकतंत्र से हो रहा खिलवाड़

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा में करीब 90,000 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें बिल्कुल सही हैं। उनके वोटरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मुझे जानकारी मिली है कि केवल मालदा में ही 90,000 नाम हटाए जा सकते हैं। सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदाय जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध लोगों के नाम भी नहीं छोड़े जा रहे हैं।” शुक्रवार सुबह से मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में तनाव बना हुआ है। यह तनाव तब शुरू हुआ, जब पड़ोसी राज्य झारखंड में कथित तौर पर मारे गए एक स्थानीय प्रवासी मजदूर का शव वापस लाया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन लोग हैं। फिर भी मैं सभी से अपील करती हूं कि शांति बनाए रखें और किसी भी उकसावे में न आएं। पश्चिम बंगाल में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रही हूं। मेरी सरकार और तृणमूल कांग्रेस ऐसे प्रवासी मजदूरों के परिवारों के साथ खड़ी है।” हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एफआईआर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों की कथित दखलअंदाजी जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया। ये नोटिस ईडी की उन याचिकाओं पर जारी किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले हफ्ते हुई तलाशी के दौरान जांच में रुकावट डाली गई थी।

चिकित्सा क्षेत्र में इतिहास, PGI चंडीगढ़ ने 2 वर्षीय बच्चे के ब्रेन ट्यूमर का किया सफल ऑपरेशन

चंडीगढ़ दुनिया में पहली बार पीजीआई चंडीगढ़ के दो विभागों के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने सबसे बड़े और दुर्लभ मेनिन्जियो ट्यूमर की एंडोस्कोपी के जरिए सफल सर्जरी कर इतिहास रच दिया है। यह ट्यूमर सिर के निचले हिस्से (स्कल बेस) में बनने वाला अत्यंत दुर्लभ ब्रेन मेनिन्जियोमा था। इस जटिल सर्जरी को न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. धंडापानी और ईएनटी (ओटोलैरिंगोलॉजी) विभाग के प्रो. अनुराग की टीम ने करीब 9 घंटे की मैराथन सर्जरी के दौरान अंजाम दिया। यह सर्जरी सोनीपत के 2 वर्षीय बच्चे पर नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक तकनीक से की गई। सर्जरी की सफलता के बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने न सिर्फ अपनी विशेषज्ञता साबित की, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भारत को एक बार फिर दुनिया में अग्रणी साबित किया है। इससे पहले वर्ष 2020 में स्पेन में इसी तकनीक से सर्जरी की गई थी, लेकिन उस समय मरीज की उम्र 12 साल थी और ट्यूमर का आकार भी छोटा था। दुर्लभ ट्यूमर के कारण कई समस्याओं से जूझ रहा था बच्चा 2 साल का यह बच्चा लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित था, लेकिन परिवार को बीमारी की जानकारी नहीं थी। बच्चे की बाईं आंख का बाहर की ओर निकल आना, आंखों की मूवमेंट रुकना, तेज खर्राटे, नाक में बार-बार गांठ दिखना और आंखों से अधिक पानी आना जैसे लक्षण सामने आ रहे थे। जब परिजन बच्चे को पीजीआई लाए तो डॉक्टरों ने सीटी स्कैन और एमआरआई करवाई, जिसमें पता चला कि बच्चे के सिर के निचले हिस्से में 7 सेंटीमीटर का ट्यूमर है, जो साइनस, ब्रेन और ऑर्बिट (आंख की कोटर) तक फैल चुका था। बायोप्सी के बाद पुष्टि हुई कि यह बेहद दुर्लभ मेनिन्जियो ट्यूमर है। बेहद चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी मेडिकल साइंस में स्कल बेस मेनिन्जियो ट्यूमर की सर्जरी को अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है, खासकर 2 साल के बच्चे में यह जोखिम और भी ज्यादा था। सर्जरी के दौरान हाइपोथर्मिया, अत्यधिक रक्तस्राव और फ्लूइड डिस्टरबेंस से बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। इन जोखिमों को देखते हुए ईएनटी, न्यूरोसर्जरी और न्यूरो-एनेस्थीसिया विभागों की एक विशेष टीम बनाई गई। एंडोस्कोपिक तकनीक से टाला गया बड़ा जोखिम रवायती ओपन सर्जरी के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने सभी सुरक्षित विकल्पों पर विचार कर एंडोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान यह सामने आया कि ट्यूमर नाक के जरिए मैक्सिलरी साइनस और सामने की गाल की हड्डी तक फैल चुका था। इसके बाद उन्नत एंडोस्कोपिक तकनीक, 45 डिग्री नेविगेशन एंगल वाले एंडोस्कोप और विशेष उपकरणों की मदद से ब्रेन के बेहद करीब फंसे ट्यूमर को सावधानीपूर्वक निकाला गया। डॉक्टरों ने बताया कि ट्यूमर में अत्यधिक रक्त वाहिकाएं और कई हड्डियों तक फैलाव था, इसके बावजूद टीम ने पूरी सतर्कता के साथ 9 घंटे में नाक के रास्ते ट्यूमर को पूरी तरह निकालने में सफलता हासिल की, जिससे ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी।   पूरी तरह स्वस्थ है बच्चा सर्जरी के अंतिम चरण में स्कल बेस में बने सभी लेयर्स को रिपेयर किया गया। सर्जरी के बाद की गई एमआरआई में पुष्टि हुई कि ट्यूमर पूरी तरह निकाल दिया गया है। फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पीजीआई के डॉक्टरों की इस अद्भुत और ऐतिहासिक सर्जरी को चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।  

रेल यात्रियों के लिए बड़ी सौगात: वंदे भारत स्लीपर में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं, पहली यात्रा में ही बन जाएंगे फैन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे पिछले 11 साल से यात्रियों की सुविधा को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारतीय रेलवे ने इस दौरान अपनी यात्रा में कई नए अध्याय जोड़े हैं। पिछले कुछ सालों में रेलवे ने रेलगाड़ियों की गति, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और साथ ही रेल डिब्बों और इंजन के विकास के साथ कैसे रेलवे की यात्रा यात्रियों के लिए सुखद, सुविधाजनक और समय बचाने वाली हो, इसको लेकर प्रयास किए हैं।  रेलवे ने इस विकास यात्रा में कई हाई स्पीड और सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को पटरी पर उतारा है, जिनमें हमसफर, वंदे भारत और साथ ही अमृत भारत जैसी ट्रेनें हैं, जो समय के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से या तो शुरू की जा चुकी हैं या इनकी शुरुआत की जा रही है। अब रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई रूटों पर नई स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला लिया है। अभी तक वंदे भारत ट्रेनें केवल बैठकर यात्रा करने के लिए डिजाइन की गई थीं। लेकिन, अब लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए और उनकी यात्रा को सुखद और सुविधाजनक बनाने के लिए स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला रेलवे ने लिया है। इस स्लीपर वंदे भारत ट्रेन के परिचालन और इसकी स्पीड की वजह से लंबी दूरी की यात्राओं में यात्रियों का 3 घंटे से ज्यादा का समय बचेगा और साथ ही यात्रियों की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक और लग्जरी होगी। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को हरी झंडी दिखाएंगे और 18 जनवरी को हावड़ा से कामख्या के लिए इस ट्रेन की नियमित सेवा शुरू हो जाएगी। इसमें स्लीपर के साथ एसी1, एसी2 और एसी3 कोच भी शामिल होंगे। इस ट्रेन के इंटीरियर को जहां भारतीय संस्कृति से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट और बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल किया गया है। यानी यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए इस ट्रेन में ड्राइवर के केबिन में भी एडवांस कंट्रोल और सुरक्षा सिस्टम लगे होंगे। ट्रेन का बाहरी लुक भी एरोडायनामिक होगा, यानी यह हवा को चीरता हुआ आगे बढ़ेगा। इसके बाहरी दरवाजे भी ऑटोमेटिक तरीके से खुलेंगे और बंद होंगे। बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) के इस्तेमाल की वजह से वंदे भारत स्‍लीपर में साथ बैठे यात्री को सर्दी-जुकाम है तो साथी यात्री को कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि अब नई तकनीक से वायरस की छुट्टी होगी। रेल मंत्रालय से अब जो जानकारी निकलकर सामने आई है, उसकी मानें तो इसके कोच में यूवीसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जिससे हवा में वायरस डिसइंफेक्टेंट हो जाएंगे। यानी यह उपकरण हवा को खींचेगा और फिर उसे फ्रेश करके दोबारा कोच में छोड़ देगा। वैसे इस लग्जरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की गति की बात करें तो इसकी अधिकतम गति सीमा 180 किमी/घंटा होगी, जबकि नियमित सेवा में यह 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी। इस स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को कई प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। यात्रियों को इसमें हाई क्वालिटी वाले कंबल कवर और एडवांस्ड बेडरोल यात्रा के दौरान दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस ट्रेन में यात्रियों को कैटरिंग की सर्विस भी दी जाएगी। इसके साथ ही यह भी जानकारी है कि इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से 1 लीटर रेल नीर बोतल के साथ एक अखबार भी मिलेगा, जिसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं किया जाएगा। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें यात्री अपनी आरामदायक यात्रा का इसलिए भी आनंद ले सकेंगे क्योंकि इसमें कोई आरएससी (आरएसी) या वेटिंग लिस्ट का झंझट नहीं होगा, इसके साथ ही पार्ट कन्फर्म टिकट की भी इसमें व्यवस्था नहीं होगी। यानी इसमें केवल पूर्णतः कंफर्म टिकट ही प्राप्त होगा और इसी के साथ यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। मतलब अब टिकट कंफर्म है तो चार्ट बनने के इंतजार वाले सिस्टम से यात्रियों को मुक्ति मिलेगी। इस ट्रेन में यात्रियों की आरामदायक यात्रा के लिए बेहतर कुशनिंग के साथ आरामदायक बर्थ और शोर कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यानी इसमें एर्गोनोमिक बर्थ की सुविधा मिलेगी। साथ ही इस यात्रा में यात्रियों के लिए सभी ऑनबोर्ड स्टाफ निर्धारित यूनिफॉर्म में ट्रेन पर तैनात रहेंगे। इस ट्रेन के बारे में जो विशेष जानकारी मिल पाई है, उसके अनुसार इसकी यात्रा सेवा के दौरान नो वीआईपी कोटा ऑप्शन बना रहेगा। यानी इस ट्रेन में वीआईपी या इमरजेंसी कोटा की अनुमति नहीं होगी। यहां तक कि वरिष्ठ रेल अधिकारी भी पास का इस्तेमाल करके इसमें यात्रा नहीं कर पाएंगे। यानी इसमें केवल चार कोटा होंगे, महिला कोटा, दिव्यांग कोटा, वरिष्ठ नागरिक कोटा, और ड्यूटी पास कोटा। इसके अलावा इसमें कोई कोटा मान्य नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों का सफर अब सिर्फ तेज और आरामदायक नहीं, बल्कि स्वाद से भरपूर भी होने वाला है। भारतीय रेलवे की तरफ से अब वंदे भारत ट्रेनों में वही खाना परोसा जाएगा, जो उस इलाके की पहचान है, जहां से ट्रेन की शुरुआत होगी। बात करें तो वंदे भारत स्लीपर का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा ज्यादा होगा। जानकारी के मुताबिक इसका न्यूनतम किराया 400 किमी की दूरी के आधार पर तय किया गया है।

यूपी में ठंड का कहर जारी, अब भारी बारिश की चेतावनी; इन इलाकों में अलर्ट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मौसम लगातार बदल रहा है। इन दिनों सुबह और शाम के समय प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहता है। कोहरे की वजह से दृश्यता काफी कम हो जाती है, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम कुछ साफ हो जाता है और लोगों को थोड़ी राहत मिलती है। वहीं पश्चिमी यूपी में ठंडी और बर्फीली हवाओं के कारण ठिठुरन और गलन बढ़ गई है। इसी बीच मौसम विभाग ने आने वाले दिनों बारिश का भी अलर्ट जारी किया है। बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले पांच से छह दिनों में पूरे राज्य में न्यूनतम तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 19 और 20 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बारिश हो सकती है। बारिश के कारण ठंड और ज्यादा बढ़ सकती है। विभाग के अनुसार, शनिवार को भी कोहरे के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं रविवार से मौसम में बदलाव आने की संभावना है और पश्चिमी यूपी में बारिश हो सकती है। इन जिलों में चेतावनी मौसम विभाग ने सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, हापुड़, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, बस्ती और अंबेडकर नगर जिलों में घने से अत्यंत घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में कई जगह दृश्यता शून्य तक जा सकती है। इसके अलावा नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, हाथरस, एटा, कासगंज, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया और गाजीपुर में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।  

स्टार्टअप इंडिया की बड़ी सफलता: 2 लाख पंजीकृत स्टार्टअप, 21 लाख से अधिक नौकरियां सृजित

नई दिल्ली देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

PWD–NHAI ने हटाए अवैध निर्माण, NH-89 पर फिर से खुला रास्ता

अजमेर नेशनल हाईवे-89 पर अतिक्रमण के खिलाफ बुधवार को प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की। देवनगर नागौर गांव से गुजर रहे NH-89 पर PWD और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान करीब 22 किलोमीटर लंबे हिस्से में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीनों का व्यापक उपयोग किया गया और हाईवे की जद में आ रहे मकान, दुकानें व अन्य निर्माण हटाए गए। ढाई माह पहले दिए गए थे नोटिस नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि हाईवे किनारे अतिक्रमण करने वालों को करीब ढाई माह पहले नोटिस जारी किए गए थे। नियमों के तहत जिन मकानों और दुकानों को हटाया जाना था, उनके मालिकों को मुआवजा भी दिया जा चुका था। इसके बावजूद कई लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, जिसके बाद मजबूरन प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि NH-89 पर लगातार बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए हाईवे की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी था। अतिक्रमण के कारण न केवल ट्रैफिक बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था।   भारी पुलिस जाप्ते में हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय थाना प्रभारी विक्रम सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा। पुलिस ने पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी और कार्रवाई को शांतिपूर्वक संपन्न कराया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लोगों ने विरोध का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रित रही। हाईवे सुरक्षा और विकास पर जोर PWD और NHAI अधिकारियों ने दो टूक कहा कि नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाईवे की सुरक्षा, सुचारु यातायात और भविष्य के विकास कार्यों के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भी अन्य हिस्सों में अतिक्रमण के खिलाफ इसी तरह सख्त अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। जहां कुछ लोगों ने इसे विकास और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया, वहीं प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और सहयोग की मांग की। फिलहाल NH-89 पर अतिक्रमण हटने से यातायात पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो गया है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान हाईवे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।