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डॉ. रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेजा पत्र, जानिए क्या है मामला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र देश की रियासतों का भारत में विलय करने वाले सरदार पटेल "लौह पुरुष" और नक्सलवाद से देश को मुक्ति दिलाने वाले अमित शाह को लिखा "साध्य पुरुष" रायपुर  आज विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नक्सलवाद से मुक्ति पर जताया उनका आभार उन्होंने पत्र में लिखा कि 31 मार्च 2026 का यह ऐतिहासिक दिन राष्ट्र के लिए एक नई आशा और नई सुबह लेकर आया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और आपके दृढ़ संकल्प से दशकों से नक्सलवाद के कष्ट झेल रही भारत भूमि अब अलोकतांत्रिक विचारधारा से पूरी तरह मुक्त हुई है। संविधान विरोधी शक्तियों ने दशकों से भारत भूमि को भीतर से चोट पहुंचाई है। माओ और लेनिन जैसी लोकतंत्र विरोधी विचारधारा ने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक हजारों निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाया, विकास को बाधित कर आदिवासियों को मुख्यधारा से अलग करने का काम किया और इसका परिणाम हमनें छत्तीसगढ़ की धरती पर देखा है। जिस छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा बनने का सामर्थ्य था, उसे भुखमरी और पलायन के दौर से गुजरना पड़ा। इस परिस्थिति के लिए जितनी जिम्मेदार नक्सलवाद की विचारधारा थी, उतनी ही जिम्मेदार तत्कालीन केंद्र सरकार भी रही। उन्होंने आगे लिखा कि मुझे याद है जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में जाया करता था, तब यूपीए सरकार के मंत्री नक्सलवाद को राज्य की समस्या मानकर स्वयं को किनारे कर लेते थे हालांकि बाद में UPA सरकार के प्रधानमंत्री रहे श्री मनमोहन सिंह जी ने स्पष्ट रूप से यह माना कि नक्सलवाद किसी राज्य की समस्या नहीं बल्कि राष्ट्र की समस्या है और देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। वो इसे समस्या तो मानते थे लेकिन समाधान नहीं करते थे। छत्तीसगढ़ से जब सलवा जुडूम के तौर पर एक स्वफूर्त आंदोलन उठा तब महेंद्र कर्मा जैसे बस्तर के कांग्रेसी नेताओं ने भी नक्सलवाद का पुरजोर विरोध किया लेकिन उस दौर की केंद्र सरकार ने कभी खुलकर उनका समर्थन नहीं किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने आगे लिखा कि मैं मानता हूं कि यदि उस कालखंड में देश को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व मिला होता और गृहमंत्री के रूप में आपका सहयोग प्राप्त होता तो नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य को हम तब ही पूरा कर लेते लेकिन देर से ही सही पर जब 2014 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला उसी दिन से नक्सलवाद के समूल नाश की योजना प्रारंभ हुई और जब 2019 में आप केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर सामने आए तब हम छत्तीसगढ़वासियों का यह विश्वास दृढ़ हो गया कि अब सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरा देश नक्सलवाद के दंश से मुक्त होगा। 24 अगस्त 2024 को जब आपने देश से नक्सलवाद के समूल नाश की घोषणा की तब मेरे मन में एक बार यह विचार आया कि इतने कम समय में दशकों की समस्या का समाधान कैसे होगा, कहीं आपने इस घोषणा में जल्दबाजी तो नहीं कर दी है लेकिन जब मैंने पीछे पलट कर 5 अगस्त 2019 का वह दिन याद किया जब आपने आजादी के बाद से चली आ रही कश्मीर में धारा 370 की समस्या का किस प्रकार समाधान किया था, तो मेरा विश्वास और दृढ़ हो गया कि यदि देश से नक्सलवाद कोई समाप्त कर सकता है तो वह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल आप ही कर सकते हैं। आज आपके संकल्प से जब देश से नक्सलवाद समापन का लक्ष्य पूरा हो रहा है तब मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूं कि इस लक्ष्य की पूर्ति आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रबल रणनीति और संपूर्ण सहयोग के बिना कभी संभव नहीं हो सकती थी। आज मैं पूरे जिम्मेदारी के साथ यह बात लिख रहा हूं कि आजादी के नाद 562 रियासतों का भारत में विलय कराने वाले "लौह पुरुष" सरदार वल्लभ भाई पटेल के उपरांत यदि देश को कोई सबसे मजबूत गृहमंत्री मिला है तो वह आप "साध्य पुरुष" हैं। जिन्होंने राष्ट्रहित में हर असंभव कार्य को संभव किया है, सदियों के बाद जब भारत के इतिहास का उल्लेख होगा तब देश को आंतरिक रूप से सुरक्षित करने में आपके योगदान को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया जाएगा। अंत में उन्होंने लिखा कि अब जब बस्तर में नक्सलवाद खत्म हो चुका है, यहां विकास का नया दौर शुरू होगा। हमारे आदिवासी भाई-बहनों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और युवा वर्ग को शिक्षा व कौशल विकास के जरिए आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। अब बस्तर के लोग आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे और क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को प्रणाम करते हुए आपके योगदान, आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के नव आरंभ पर हृदय से शुभकामनाएं व्यक्त करता हूं और छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने हमारे छत्तीसगढ़ को न सिर्फ नक्सलवाद से मुक्ति दिलाई है बल्कि अब विकास की ओर एक नव दिशा में आगे बढ़ने में मार्ग प्रशस्त किया है।

बॉम्बे IIT की खोज ने एलपीजी संकट में दी राहत, जानिए कैसे है ये तकनीकी खोज खास

मुंबई  इन दिनों एलपीजी सिलिंडर क्राइसिस की परेशानी से सभी जूझ रहे हैं। लेकिन आईआईटी बॉम्बे, इस मुश्किल हालात में एलपीजी की कमी को बिल्कुल भी महसूस नहीं कर रहा है। इस खोज की बदौलत बॉम्बे आईआईटी के कैंपस में किचन के चूल्हे लगातार जल रहे हैं। यह खोज, बायोमास गैसिफिकेशन टेक्नोलॉजी, जिसमें गिरी हुई पत्तियों का इस्तेमाल करके कुकिंग गैस बनाई जाती है। बता दें आईआईटी बॉम्बे ने इस तकनीक को पेंटेंट भी करा रखा है। 2014 से चल रहा शोध संस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस बारे में पोस्ट भी किया गया है। इसके मुताबिक यह इनोवेशन दशकों के रिसर्च का परिणाम है। यह रिसर्च साल 2014 में, केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के नेतृत्व में शुरू हुई थी। महाजनी ने  बताया कि तब आईआईटी बॉम्बे के हरे-भरे मैदान में काफी ज्यादा सूखी पत्तियां गिरी रहती थीं। इन पत्तियों को डिस्पोज करना एक बड़ा टास्क हुआ करता था। इन सूखी पत्तियों को ठिकाने लगाने का रास्ता ढूंढते-ढूंढते हम गैसिफायर तक पहुंच गए। आसान नहीं था सफर इस पोस्ट में आगे बताया गया है कि यह यात्रा इतनी आसान नहीं है। शुरुआती ट्रायल्स में काफी ज्यादा धुआं हो रहा था। इसके चलते किचन स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसके मुताबिक एक बड़ी बाधा, क्लिंकर बनाने की थी। ठोस अवशेष के चलते ट्रैडिशन सिस्टम जाम हो जाते थे। इन असंतुलनों के बावजूद, टीम ने टेक्नोलॉजी पर काम करना जारी रखा। 2016 तक, उन्होंने एक पेटेंट प्राप्त गैसीफायर विकसित कर लिया। इसके बाद चीजें काफी आसान हो गईं। अब सफलतापूर्वक लागू साल 2017 में, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संदीप कुमार इस प्रोजेक्ट में शामिल हुए और एक बेहतर बर्नर डिजाइन पर काम किया। संस्थान की लिविंग लैब पहल ने कैंपस में टेस्टिंग की अनुमति दी। इससे टीम को सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सही करने और यूजर्स के बीच भरोसे को फिर से स्थापित करने में मदद मिली। निरंतर परीक्षण और सुधार के एक साल के बाद और आगे कुछ काम के बाद, 2024 तक यह सिस्टम स्टाफ कैंटीन में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया। अब मेस में भी लगाने का प्लान आज आलम यह है कि कैंटीन में एलपीजी का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी तक कम हो चुका है। इसकी थर्मल एफिशिएंसी 60 फीसदी तक है और उत्सर्जन बहुत कम होता है। इस तकनीक ने न केवल ईंधन की लागत घटाई है बल्कि यह सुनिश्चित भी किया है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो जाए, तो खाना पकाने का काम सहज रूप से जारी रह सके। इस सिस्टम से सालाना करीब आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है। पोस्ट में कहा गया है कि हॉस्टल की मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे एलपीजी की खपत में काफी कमी आ सकती है। इससे सालाना 50 लाख तक की बचत हो सकती है।

रायपुर: कुआं बना जीवन में बदलाव का कारण, अब सालभर होगी खेती

रायपुर कभी बारिश पर निर्भर रहने वाले जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड बम्हनीडीह के ग्राम सरवानी के किसान हेमंत साहू के जीवन में अब बड़ा बदलाव आया है। मनरेगा के तहत खेत में बने कुएं ने उनकी खेती को नई दिशा दी है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। हेमंत साहू बताते हैं कि पहले सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण वे साल में केवल एक फसल ही ले पाते थे। खेत अक्सर सूखे रहते थे और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाता था। भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। मनरेगा योजना के तहत उनके खेत में व्यक्तिगत कुआं निर्माण स्वीकृत हुआ। लगभग 2.99 लाख रुपये की लागत से बने इस कुएं ने स्थायी सिंचाई की समस्या को दूर कर दिया। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान 357 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे गांव के मजदूरों को काम मिला। कुएं के निर्माण के बाद अब हेमंत साहू सालभर खेती कर रहे हैं। उनके खेत में टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, करेला, खीरा और ककड़ी जैसी सब्जियों की खेती हो रही है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। हेमंत साहू का कहना है कि अब हर मौसम में खेती संभव हो गई है और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वासी हैं। श्री साहू की सफलता की इस बात का प्रमाण है कि सही योजना, स्थानीय सहयोग और मेहनत से ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मनरेगा ने न केवल सिंचाई की समस्या हल की, बल्कि किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

रोहिणी के बाद गौरी बनी मिसाल, Ex IPS की पत्नी ने पिता को दिया जीवनदान

पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले और पूर्व आईपीएस अफसर शिवदीप लांडे (Ex IPS Shivdeep Lande) ने सोमवार (30 मार्च) को अपनी पत्नी गौरी के लिए फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखा है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पत्नी ने अपने पिता को नया जीवन देने के लिए किडनी दान करने का संकल्प लिया। शिवदीप लांड (Shivdeep Lande Wife Name) ने फेसबुक पर लिखा कि गौरी, जीवन में बहुत सी कठिनाइयां आईं, विपत्तियों ने घेरा और बहुत विपरीत परिस्थितियां भी मुझे कभी विचलित नहीं कर पाई, मैं सदैव अटल रहा, लेकिन तुम्हारे एक निर्णय, सिर्फ एक निर्णय ने मुझे झकझोर कर रख दिया। अपने पिता को नया जीवन देने के लिए जब तुमने अपनी किडनी दान करने का निर्णय/संकल्प लिया। 'सुब कुछ तुमने अकेले संभाला…' उन्होंने आगे लिखा कि तुम्हारा अपने पिता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण, त्याग एवं जिद के आगे मैं नतमस्तक हूं। पिछले तीन महीनों में ऑपरेशन के लिए जरूरी दर्जनों मेडिकल टेस्ट, हजारों कागजों की भूलभुलैया, कानूनी जंजीरें, सब कुछ तुमने अकेले संभाला। मैं? बस मूक दर्शक बन तुम्हें निहारता रहा, और बस ये सोचता रहा कि भगवान बेटी को इंसान के जीवन में क्यों भेजता है? बकौल शिवदीप लांडे, शायद आज इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया वह यह कि शायद मां का साथ इंसान के जीवन में एक पड़ाव तक ही रहता है और पूरी उम्र उस मां की कमी को ईश्वर एक बेटी के रूप में पूरा करता है। पूरी उम्र। उन्होंने आगे लिखा– ""आज मुंबई के उस आईसीयू में… किडनी ट्रांसप्लांट के बाद… जब मैं तुम्हारे पास बैठा तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा हूं तो आंखों से बहता पानी… रुकने का नाम ही नहीं लेता। क्यों? क्यों नहीं रुकते ये आंसू? आज समझ आया। रिश्तेदारों में भाई छोड़ दे, बेटा पीठ दिखा दे, बहन मुड़ जाए, यहां तक कि पत्नी भी… जीवन-मृत्यु के इस युद्धक्षेत्र में साथ छोड़ दे, लेकिन बेटी? वो निस्वार्थ खड़ी रहती है। अपना जीवन दांव पर लगाकर भी। तुम्हारी आंखें बंद हैं, गौरी… लेकिन तुम्हारा प्यार तुम्हारा त्याग हर पिता को सिखाता है कि बेटी ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा आशीर्वाद है।"" रोहिणी ने भी डोनेट की थी अपनी किडनी बता दें कि रोहिणी आचार्य भी अपने पिता लालू यादव के लिए किडनी दान चुकी हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार से अलग ही रहती हैं। बिहार चुनाव के बाद रोहिणी और उनके परिवार के बीच खटास पैदा हो गई थी।

प्रदेश में पेट्रोल पंपों की जांच शुरू, अनावश्यक बंदी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

 भोपाल प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की कमी नहीं है, लेकिन कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब पेट्रोल पंपों को भी जांच के दायरे में लाया गया है और बिना कारण बंद रखने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की जा चुकी है। इस दौरान 2,933 गैस सिलिंडर जब्त किए गए हैं और नौ मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं 391 पेट्रोल पंपों की जांच में एक प्रकरण दर्ज किया गया है। पेट्रोल पंप बंद रखने पर सख्ती मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी पेट्रोल पंपों की नियमित निगरानी की जाए। यदि कोई पंप बिना उचित कारण बंद पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों को विशेष रूप से इस पर नजर रखने को कहा गया है। ईंधन का पर्याप्त भंडार सरकार के अनुसार प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। देश में कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है और सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट घरेलू और व्यावसायिक गैस की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय तक संचालन कर रहे हैं। पीएनजी कनेक्शन के लिए कंट्रोल रूम प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस कंपनियों ने कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। यहां उपभोक्ता अपनी शिकायतें और मांग दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से कंपनियों को आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। उपभोक्ताओं को राहत का दावा सरकार का कहना है कि सख्त निगरानी और बेहतर प्रबंधन से उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। साथ ही कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

चैंपियन आरसीबी में आया ठहराव, क्रुणाल बोले- हमें अपनी भूमिकाओं का पता, कोहली का जुनून है मिसाल

नई दिल्ली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के क्रुणाल पांड्या का कहना है कि टीम में पिछले साल की तुलना में ठहराव आया है। खिलाड़ियों को इस सत्र में अपनी भूमिकाओं के बारे में बखूबी पता है। विराट कोहली को लेकर उन्होंने कहा कि वह किसी भी पीढ़ी में पैदा होते तो महान खिलाड़ी ही होते। विराट कोहली किसी भी पीढ़ी में पैदा होते, महानतम खिलाड़ियों में ही होते: क्रुणाल पांड्या रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या का कहना है कि टीम में पिछले साल की तुलना में ठहराव आया है। खिलाड़ियों को इस सत्र में अपनी भूमिकाओं के बारे में बखूबी पता है। विराट कोहली को लेकर उन्होंने कहा कि वह किसी भी पीढ़ी में पैदा होते तो महान खिलाड़ी ही होते। आरसीबी ने 2025 में 18 साल में पहली बार इंडियन प्रीमियर लीग खिताब जीता था और पंजाब किंग्स के खिलाफ फाइनल में क्रुणाल प्लेयर ऑफ द मैच थे जिन्होंने चार ओवर में 17 रन देकर दो विकेट लिये थे। आरसीबी ने मैच छह रन से जीता था। क्रुणाल ने टीम द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा, ‘मेरा मानना है कि इस साल अधिक ठहराव आया है। पिछले साल यह नयी टीम थी और सभी एक दूसरे को समझ रहे थे। इस साल खिलाड़ियों को अपनी भूमिका, एक दूसरे की ताकत और कमजोरी बखूबी पता है।’ उन्होंने कहा, ‘जब मैं बड़े मौकों पर खेलता हूं तो मुझे लगता है कि अगर भगवान आपको यहां तक लाये हैं तो कोई कारण होगा और मुझे लगता है कि ये बड़े मौके मेरे लिये ही बने हैं। मुझे दबाव महसूस होता है लेकिन मैं सोचता हूं कि कैसे शांतचित रहूं और जरूरत के मुताबिक खेलूं।’ उन्होंने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा, ‘विराट अच्छा उदाहरण हैं। आप उसकी जीत की भूख और जुनून देख सकते हैं। विराट कोहली किसी भी पीढ़ी में पैदा होते, वह महानतम खिलाड़ियों में ही होते। उनका किसी और से मुकाबला ही नहीं है।’ डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी ने आईपीएल 2026 की शुरुआत जीत के साथ की है। 28 मार्च को हुए उद्घाटन मैच में उसने सनराइजर्स हैदराबाद को 6 विकेट से शिकस्त दी थी। एसआरएच ने जीत के लिए 202 रन का लक्ष्य दिया था लेकिन आरसीबी ने सिर्फ 15.4 ओवर में ही 4 विकेट खोकर उस लक्ष्य को हासिल कर लिया। आरसीबी की तरफ से इस मैच में विराट कोहली ने सिर्फ 38 गेंदों में 69 रनों की शानदार नाबाद पारी खेली थी। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 5 चौके और इतने ही छक्के जड़े थे। वह अपनी टीम की तरफ से टॉप स्कोरर रहे थे। उनके अलावा देवदत्त पड्डीकल ने तो अपनी बल्लेबाजी से कहर की बरपा दिया था। उन्होंने सिर्फ 26 गेंदों में 61 रन की जबरदस्त पारी खेली थी जिसमें 7 चौखे और 4 छक्के लगाए थे। रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु का अब अगला मुकाबला 5 अप्रैल को चेन्नई सुपर किंग्स से अपने ही होमग्राउंड बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में है। उसके बाद वह अपना तीसरा मैच खेलने के लिए गुवाहाटी जाएगी जहां उसका राजस्थान रॉयल्स के साथ 10 अप्रैल को मुकाबला है। वहां से आरसीबी की टीम मुंबई पहुंचेगी जहां 12 अप्रैल को वानखेड़े मैदान में उसका मुंबई इंडियंस से मैच है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से भत्तों और पेंशन में भारी बढ़ोतरी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की मंजूरी मिलने के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद अहम अपडेट सामने आया है. वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इसकी समय-सीमा और प्रक्रिया को लेकर जानकारी साझा की है. संसद में बोलते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. जब तक रिपोर्ट नहीं आती है तब तक इसकी संभावना लगाना कि इसे कब से लागू किया जाएगा, सही नहीं है. 8वें वेतन आयोग को लेकर कई लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी हैं जैसे इसके लागू होने से किन लोगों को फायदा मिलेगा, बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी या भत्तों और पेंशन किस तरह से बांटे गए हैं. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए जानते हैं इसका जवाब. कितनी बढ़ सकती है सैलरी? सैलरी में बढ़त की बात करें, तो इसे लेकर अभी तक कोई ऑफिशियल नोटिस नहीं आई है. लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी. वहीं, 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आसपास बढ़ोतरी हुई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्टर है. भत्तों में भी होगा इजाफा सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में भी संशोधन किया जा सकता है. इससे कर्मचारियों की लाइफस्टाइल और सेविंग्स दोनों में सुधार होगा. नए उम्मीदवारों को क्या फायदा मिलेगा? जो युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए 8वां वेतन आयोग एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है.  नई हायरिंग में बढ़ी हुई सैलरी और बेहतर सुविधाएं मिलने से सरकारी नौकरी पहले से ज्यादा आकर्षक बन जाएगी. बेसिक सैलरी में होगी बढ़ोतरी बेसिक सैलरी (Basic Pay) में, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने से न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है (मान लेते है कि ₹18,000 से बढ़कर ₹41,000 तक) हो सकती है. पेंशनर्स को भी मिलेगा लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारी ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

जनगणना 2026: 1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी, जानें कौन-से 33 सवाल होंगे आपसे पूछे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। 2027 जनगणना का पहला चरण क्या होगा केंद्र सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर पहले फेज का फ्रेमवर्क बना दिया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेज हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर बेस्ड होगा. जनगणना अधिकारी घरों की गिनती करेंगे और उनकी रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक इसका मकसद यह है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा तैयार हो. इससे सरकार को विकास योजनाएं ज्यादा टारगेटेड तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।  33 सवालों में क्या क्या शामिल रहेगा? इस बार पूछे जाने वाले सवाल घर की संरचना और परिवार की स्थिति को लेकर होंगे. मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस चीज की है, घर में कितने सदस्य रहते हैं और कितने विवाहित जोड़े हैं, यह दर्ज किया जाएगा. घर का मुखिया पुरुष है या महिला और वह किस सामाजिक वर्ग से है. यह भी पूछा जाएगा।  सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा. पीने का पानी, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की उपलब्धता दर्ज होगी. परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार जैसे साधन हैं या नहीं, यह भी जानकारी ली जाएगी. यहां तक कि रोजमर्रा में किस तरह का अनाज ज्यादा खाया जाता है. यह भी नोट किया जाएगा।  जवाब न देने पर क्या होगा? जनगणना एक लीगल प्रोसेस है और जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत सूचना देता है. तो जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रोसेस लागू होती है।  जनगणना का मकसद किसी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं है. असल मकसद यह समझना है कि देश के किस हिस्से में किन सुविधाओं की जरूरत है. सही जानकारी मिलने पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य योजनाओं का बजट सही ढंग से तय किया जा सकता है. इसलिए सहयोग देना आपके इलाके के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।  जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी– शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

भगवान महावीर के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत, हमारे मार्गदर्शक — मुख्यमंत्री साय

भगवान महावीर का सत्य-अहिंसा का संदेश हमारा पथ प्रदर्शक-मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री भगवान महावीर जनकल्याणक महोत्सव 2026 में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी तीर्थ में आयोजित भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने दादाबाड़ी परिसर स्थित जिनमंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने समाज सेवा, पत्रकारिता, शिक्षा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को “जैन रत्न अलंकरण” से सम्मानित किया और कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक परिवर्तन और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का सत्य और अहिंसा का संदेश समस्त मानवता के लिए पथ प्रदर्शक है, जो हमें त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज एक सुखद संयोग है कि भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक उपलब्धि की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद सबसे बड़ी बाधा रहा है और बस्तर जैसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र को लंबे समय तक विकास से वंचित रहना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और प्रभावी रणनीति के कारण आज नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने भगवान महावीर से प्रार्थना की कि छत्तीसगढ़ में शांति और विकास का यह वातावरण निरंतर बना रहे और भविष्य में कभी भी हिंसा का यह दौर वापस न आए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने सुशासन के संकल्प के साथ तेज गति से कार्य करते हुए विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री की गारंटियों को पूरा करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंदों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, किसानों के हित में किए गए वादों को निभाया जा रहा है, महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ा गया है तथा रामलला दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने जैन समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परमार्थ के क्षेत्र में जैन समाज का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत,  लोकेश कावड़िया, भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रेश शाह, विकास सेठिया, आनंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

1 अप्रैल से MP में बिजली और प्रॉपर्टी महंगी, आम आदमी की जेब पर होगा असर

भोपाल नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बिजली बिल में बढ़ोतरी, प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होना और रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में बदलाव जैसे फैसले सीधे आम आदमी के खर्च को प्रभावित करेंगे। वहीं, कचरा प्रबंधन के नए नियमों के तहत लापरवाही पर जुर्माना भी देना पड़ सकता है। सरकार और प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव व्यवस्था सुधारने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन इससे आम नागरिकों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और शहरी आबादी पर इन फैसलों का व्यापक असर देखने को मिलेगा। बिजली बिल में बढ़ोतरी नए नियमों के तहत बिजली की दरों में औसतन पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी स्लैब के अनुसार अलग-अलग होगी। जानकारी के अनुसार 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को करीब 80 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि 400 यूनिट तक खपत करने वालों का बिल 150 रुपये तक बढ़ सकता है। इससे गर्मी के मौसम में पहले से ही बढ़ी बिजली खपत के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा प्रॉपर्टी से जुड़ी कलेक्टर गाइडलाइन में करीब 12 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसका सीधा असर जमीन और मकान खरीदने वालों पर पड़ेगा। नई दरें लागू होने के बाद रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ेगा, जिससे घर खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी अधिक प्रभाव डाल सकती है। कचरा प्रबंधन के नए नियम शहरों में अब कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य किया जा रहा है। गीला, सूखा और अन्य प्रकार के कचरे को अलग नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम ने इसके लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिनके तहत घरों, होटलों और संस्थानों को कचरा पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा। इससे साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे रिजर्वेशन नियमों में बदलाव रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब वेटिंग टिकट और कंफर्मेशन से जुड़े नियमों को और पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही टिकट कैंसिलेशन और रिफंड प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी। नए नियमों के लागू होने से यात्रा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयकर प्रणाली में सुधार आयकर कानून को सरल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें टैक्स भुगतान और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान किया गया है। डिजिटल माध्यमों के जरिए भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और समय की बचत होगी। आम आदमी पर सीधा असर इन सभी बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन और बजट पर पड़ेगा। जहां एक ओर खर्च बढ़ेंगे, वहीं कुछ क्षेत्रों में सुविधाएं भी बेहतर होंगी। ऐसे में लोगों को अपने खर्च और योजनाओं में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।