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सीपत चौक में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण उजागर, 54 सिलेंडर जब्त

सीपत चौक में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण उजागर, 54 सिलेंडर जब्त कलेक्टर के निर्देश पर ताबड़तोड़ कार्रवाई   गैस रिफिलिंग का गोरखधंधा पकड़ा गया बिलासपुर  कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर शुक्रवार की सुबह सीपत चौक में अवैध गैस सिलेंडर भंडारण और रिफिलिंग के खिलाफ बड़ी छापामार कार्रवाई की गई। खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर के मार्गदर्शन में एएफओ अजय मौर्य एवं विनीता दास के नेतृत्व में टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए एक बड़े गोरखधंधे का पर्दाफाश किया।        खाद्य नियंत्रक श्री कुजूर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान महामाया गैस चूल्हा सुधारक एवं विक्रेता तथा गर्ल्स हॉस्टल संचालक लव निमेष जायसवाल के कब्जे से 19 नग 14.2 किलोग्राम के भरे एवं आंशिक भरे घरेलू गैस सिलेंडर तथा 35 नग 5 किलोग्राम के घरेलू एवं व्यावसायिक सिलेंडर, इस प्रकार कुल 54 गैस सिलेंडर जब्त किए गए। मौके से 7 नग रिफिलिंग बंशी (नोजल), एक इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन सहित अन्य उपकरण भी बरामद हुए। जांच में सामने आया कि बिना वैध अनुमति के गैस सिलेंडरों का भंडारण एवं रिफिलिंग कर अवैध रूप से विक्रय किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने के साथ ही आमजन की जान-माल को खतरा बना हुआ था। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी जब्त सामग्री को सुरक्षित किया और मौके से गुजर रही कोनी इंडेन की डिलीवरी वैन को रुकवाकर संबंधित एजेंसी के सुपुर्द किया। इसी क्रम में विजय स्टील नामक प्रतिष्ठान जिसके मालिक सनटी अग्रवाल है से भी 2 घरेलू गैस सिलेंडर, 3 रिफिलिंग बंशी एवं एक तौल मशीन जब्त की गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चुनाव आयोग सख्ती: खर्च विवरण नहीं देने पर 115 प्रत्याशी अयोग्य

चंडीगढ़ हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए 115 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये सभी उम्मीदवार अगले पांच वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह कदम उन प्रत्याशियों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने चुनाव खर्च का अनिवार्य विवरण समय पर जमा नहीं कराया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खर्च का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और निष्पक्ष बनाना है। नियमों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण जमा कराना अनिवार्य होता है। तय समय सीमा में यह जानकारी उपलब्ध न कराने पर उम्मीदवार को आगामी चुनावों के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसी क्रम में राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में अयोग्य उम्मीदवारों की सूची अपडेट करते हुए 115 प्रत्याशियों को पांच वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार भी नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती जाएगी। उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का विधिवत रजिस्टर बनाए रखने और हर विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे इस संबंध में पर्यवेक्षकों से मार्गदर्शन भी ले सकते हैं, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। निकाय उम्मीदवार कितना पैसा खर्च कर सकते हैं आयोग समय-समय पर उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा तय करता आया है। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार तय सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते। नगर निगम महापौर के लिए उम्मीदवार अधिकतम 30 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। निगम में पार्षद के उम्मीदवार साढ़े 7 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। वहीं नगर काउंसिल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार 20 लाख रुपये, नगर काउंसिल के मेंबर की खर्च सीमा चार लाख रुपये तय की गई है। पंचायती राज में सरपंच के लिए यह सीमा 2 लाख रुपये और जिला परिषद सदस्य के लिए 6 लाख रुपये रखी गई है। चुनाव परिणाम आने के 30 दिनों के भीतर यदि उम्मीदवार खर्च का ब्योरा जमा नहीं करते हैं तो जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से नोटिस जारी किया जाता है। उसके बाद भी खर्च का ब्यौरा नहीं देते हैं तो जिला अधिकारी उन्हें अयोग्य घोषित कर देते हैं और इसकी जानकारी राज्य चुनाव आयोग को भिजवाई जाती है। कहां कितने उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए गए चुनाव आयोग के मुताबिक सोनीपत नगर निगम के 18 उम्मीदवार, नगर परिषद झज्जर के 5, नूंह नगर परिषद के 14, पुन्हाना नगर पालिका के 17, नगर पालिका फिरोजपुर झिरका के पांच, नगर परिषद नारनौल के 41, नगर पालिका राजौंद के 13, नगर पालिका टोहाना के एक उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया गया है।  

पंजाब में 30 अप्रैल से जनगणना की शुरुआत, 15 मई से 67000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर करेंगे सर्वे

चंडीगढ़  जनगणना का पहला चरण 15 मई से 13 जून के बीच आयोजित किया जाएगा। इस कार्य के लिए तरनतारन जिला प्रशासन द्वारा लगभग 2500 गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है। डिप्टी कमिश्नर सह-प्रधान जनगणना अधिकारी राहुल ने बताया कि जनगणना कार्य में लगे कर्मियों का प्रशिक्षण विभिन्न स्तरों पर शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, “जनगणना के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”उन्होंने यह भी बताया कि पूरी प्रक्रिया को ‘डिजिटल मोड’ के जरिए हाई-टेक तरीके से पूरा किया जाएगा। इस योजना के तहत, स्वयं-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) के लिए ऑनलाइन पोर्टल 30 अप्रैल से 14 मई तक खुला रहेगा, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकता है। इसके बाद 15 मई से 13 जून तक गणनाकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। वास्तविक जनसंख्या की गिनती का दूसरा चरण नौ फरवरी 2027 में होगा, जिसमें हर व्यक्ति का डेटा दर्ज किया जाएगा। इसके लिए विभाग की तरफ से कुल 67 हजार मुलाजिम तैनात किए जाएंगे। लोकल बॉडी विभाग के सचिव मनजीत सिंह बराड़ व निदेशक जनगणना नवजोत खोसा ने यह जानकारी शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी। मोबाइल ऐप से होगी पूरी प्रक्रिया यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें डेटा जुटाने के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और सटीक बनेगी। कर्मचारी घर की स्थिति, दीवार और छत के मटेरियल, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं के साथ-साथ टीवी, वाहन जैसे संसाधनों की जानकारी भी जुटाएंगे। कुल 33 सवालों का जवाब देना होगा। 67000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त राज्य में जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत लगभग 51,561 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) बनाए जा चुके हैं। इस कार्य के लिए करीब 67,000 एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें लगभग 56,544 एन्यूमरेटर और 10,368 सुपरवाइजर शामिल हैं। इन नियुक्तियों में स्कूल शिक्षक, क्लर्क तथा राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारी भी शामिल हैं। प्रत्येक एन्यूमरेटर को लगभग 700 से 800 लोगों का डेटा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं, एक सुपरवाइजर के अधीन करीब 6 एन्यूमरेटर काम करेंगे और उनकी निगरानी करेंगे। स्वगणना के लिए केंद्र सरकार के पोर्टल पर जाना है। जिसमें लॉगिन कर 16 भाषाओं में जवाब दे पाएंगे। पोर्टल सुबह छह से 12 बजे तक एक्टिव रहेगा स्व गणना के लिए किसी ऐसे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल न करें जो पहले से किसी अन्य परिवार द्वारा इस्तेमाल किया गया हो। परिवार के मुखिया के लिए नकली या अस्थायी नाम न डालें, क्योंकि बाद में इसे बदला नहीं जा सकता। अपना लॉगिन OTP किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को सेंसस अफसर ही क्यों न बताए। आधार, पैन या बैंक डिटेल जैसे संवेदनशील दस्तावेज अपलोड या साझा न करें (इनकी आवश्यकता नहीं है)। उन परिवार के सदस्यों को शामिल न करें जो स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं या काम/पढ़ाई के लिए बाहर रह रहे हैं। मैप पर अपनी लोकेशन गलत तरीके से न चुनें; यह आपकी असली रहने की जगह होनी चाहिए। कोई भी सवाल खाली न छोड़ें; सिस्टम आमतौर पर आगे बढ़ने नहीं देता। यह न मानें कि प्रक्रिया पूरी हो गई है, जब तक आपको SE ID के साथ सफलता स्क्रीन न दिख जाए। रात 12 बजे के बाद पोर्टल का उपयोग न करें, क्योंकि यह केवल सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक ही सक्रिय रहता है। जानकारी भरते हुए पब्लिक आईडी का प्रयोग न करे फाइनल सबमिशन के बाद डेटा एडिट करने की कोशिश न करें। सुरक्षा के लिए यह लॉक हो जाता है। ऑनलाइन सबमिट करने के बाद आने वाले एन्यूमरेटर (गणनाकर्मी) को नजरअंदाज न करें, उनकी विजिट सत्यापन के लिए होती है। अगर आपका SE ID खो जाए तो घबराएं नहीं। आप इसे अपने मोबाइल नंबर से पोर्टल पर दोबारा प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे मेहमानों की जानकारी न दें जो केवल कुछ दिनों के लिए आए हुए हैं। निजी जानकारी भरते समय पब्लिक या असुरक्षित Wi-Fi (जैसे कैफे में) का उपयोग न करें। घर में रहने वाले सभी विवाहित जोड़ों का अलग-अलग उल्लेख करना न भूलें। आखिरी दिन (14 मई) तक सबमिट करने का इंतजार न करें, क्योंकि उस समय सर्वर पर ज्यादा लोड हो सकता है। डॉटा भरने के बाद एक 21 अंकों का नंबर आएगा। इसे संभाल कर रखना है। पंजाब में 30 अप्रैल से शुरू होगी हेल्पलाइन जनगणना 2027 के लिए हेल्पलाइन लोगों की मदद के लिए 30 अप्रैल से शुरू होगी। अगर आपको खुद जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) या घर की जानकारी देने (हाउस लिस्टिंग) में कोई दिक्कत हो, तो आप यहां सवाल पूछ सकते हैं। शिकायत कर सकते हैं या अधिकारी से बात भी कर सकते हैं। इसे लिए 1855 नंबर पर कॉल करनी होगी। यह सेवा 24 घंटे चालू रहेगी और 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी। जरूरत पड़ने पर आपकी कॉल सीधे जनगणना विभाग के अधिकारी तक पहुंचाई जा सकती है। यह सुविधा सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक सोमवार से शनिवार उपलब्ध रहेगी। एन्यूमरेटर और लोगों की यह जिम्मेदारी तय एन्यूमरेटर जो व्यक्ति घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करता है। लोगों से आराम से और साफ तरीके से सवाल पूछेगा। फॉर्म जमा करने से पहले सब कुछ चेक करेगा कि सही है या नहीं। आपकी दी गई जानकारी को गोपनीय रखेगा। दूसरा जिसके घर जनगणना वाले उसकी जिम्मेदारी है उसे दूसरा सही और पूरी जानकारी देनी है। अगर कोई बात समझ न आए तो पूछ लेना है। पंजाब में पहली ड्रग जनगणना भी पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से भारत की पहली व्यापक 'ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना' शुरू की है, जिसका उद्देश्य 65 लाख परिवारों का सर्वेक्षण कर नशे के खिलाफ 'डेटा-आधारित' पुनर्वास नीतियां बनाना है। लगभग 28,000 सरकारी कर्मचारियों द्वारा तीन महीने में पूरी की जाने वाली इस ₹150 करोड़ की पहल का लक्ष्य नशा मुक्ति के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना है। अलग-अलग नगर निगमों में HLBs (हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स) की संख्या पठानकोट – 344 बटाला – 285 अमृतसर – 2324 कपूरथला – 142 फगवाड़ा – 225 जालंधर – 1689 होशियारपुर – 263 साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) – 674 … Read more

योगी सरकार का महत्वपूर्ण कदम, प्रदेश में 5 नए स्पोर्ट्स स्टेडियम की शुरुआत होगी

योगी सरकार का बड़ा कदम: प्रदेश को जल्द मिलेंगे 5 नए स्पोर्ट्स स्टेडियम गाजीपुर, चंदौली, हापुड़, सम्भल और शामली में जारी है स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण स्टेडियम निर्माण और आधुनिक सुविधाओं से खिलाड़ियों को मिल रहा बड़ा मंच खेल व खिलाड़ियों को लगातार प्राथमिकता पर प्रोत्साहन दे रही है योगी सरकार लखनऊ  योगी सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास को लेकर लगातार ठोस कदम उठा रही है। प्रदेश को जल्द ही 5 नए स्पोर्ट्स स्टेडियम मिलने जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों को अपने ही जिलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। सरकार खेल विभाग के माध्यम से प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार विशेष जोर दे रही है। प्रदेश के 71 जिलों में इस समय 84 स्पोर्ट्स स्टेडियम संचालित हो रहे हैं, जबकि 5 नए स्टेडियम निर्माणाधीन हैं। जिसमें गाजीपुर में नवीन स्टेडियम का निर्माण (द्वितीय), चंदौली में स्पोर्ट्स स्टेडियम, हापुड़ में स्पोर्ट्स स्टेडियम, संभल में स्पोर्ट्स स्टेडियम, और शामली में स्पोर्ट्स स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिल सकेगा।  हापुड़ के स्पोर्ट्स स्टेडियम का कार्य 70% पूरा वहीं निर्माण कार्य की प्रगति की बात करें तो गाजीपुर में नया स्टेडियम लगभग 99.9% पूरा हो चुका है, हालांकि जिलाधिकारी द्वारा बताई गई कुछ कमियों का निस्तारण अभी शेष है। हापुड़ में स्टेडियम का निर्माण करीब 70% पूरा हो चुका है, जबकि संभल में यह कार्य 26% और शामली में कार्य शुरू हो चुका है। चंदौली में स्टेडियम निर्माण के लिए फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है। निर्माण कार्य पूर्ण होने और हैंडओवर के बाद ही इनका लोकार्पण किया जाएगा। गाजीपुर को छोड़कर बाकी चार जनपदों में स्टेडियम निर्माण को वर्ष 2025-26 में स्वीकृति मिली है। यह परियोजनाएं प्रदेश में खेल अवसंरचना को नई दिशा देने का काम करेंगी। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने पर योगी सरकार का फोकस योगी सरकार का फोकस सिर्फ स्टेडियम निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने पर भी है। खेल विभाग द्वारा स्टेडियम के साथ-साथ मल्टीपर्पज हॉल, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन और टेनिस कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, जिम, हॉकी और फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की जा रहीं हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर संसाधन और सुविधाएं मिलने से खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश के खिलाड़ी राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। नए स्टेडियम बनने से खिलाड़ियों को अपने ही जिले में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं यूपी के खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दी जा रहीं हैं। साथ ही प्रदेश में खेल अवसंरचना को सशक्त बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। सीएम योगी के मार्गदर्शन में 5 नए स्पोर्ट्स स्टेडियमों का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इन स्टेडियमों के तैयार होने से खिलाड़ियों को अपने ही जनपद में आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण का अवसर प्राप्त होगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

मई 2026 में बनेंगे तीन राजयोग, धन और करियर में बड़े बदलाव के संकेत

मई 2026 सिर्फ एक सामान्य महीना नहीं है, बल्कि यह समय ज्योतिष के अनुसार बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है. इस महीने गजलक्ष्मी राजयोग, मालव्य राजयोग और लाभ दृष्टि राजयोग जैसे तीन शक्तिशाली योग बन रहे हैं. खास बात यह है कि ये योग अलग-अलग तारीखों पर बनते हुए पूरे महीने को एक पॉजिटिव फ्लो देते हैं, जिससे धन, करियर और जीवन में लगातार ग्रोथ के संकेत मिलते हैं. 2 मई से लाभ दृष्टि राजयोग महीने की शुरुआत ही एक मजबूत योग से होती है. 2 मई को शनि और शुक्र की खास स्थिति से लाभ दृष्टि राजयोग बनता है. यह योग बताता है कि जो मेहनत आप लंबे समय से कर रहे थे, उसका फल अब मिलने लगेगा. रुके हुए काम आगे बढ़ेंगें, करियर या बिजनेस में स्थिरता आएगी. यह समय धैर्य रखने वालों के लिए खास लाभ देने वाला हो सकता है. किन राशियों को फायदा? मेष राशि: रुका हुआ काम पूरा होगा, करियर में स्थिरता आएगी वृषभ राशि: आर्थिक स्थिति सुधरेगी, नियमित आय के स्रोत बनेंगे कन्या राशि: नौकरी में सुधार और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं मकर राशि: मेहनत का पूरा फल मिलेगा, प्रमोशन के योग 14 मई से गजलक्ष्मी राजयोग जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ता है, 14 मई से गुरु और शुक्र की युति गजलक्ष्मी राजयोग बनाती है, जो 8 जून तक प्रभावी रहेगा. यह वह समय है जब आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं. अचानक धन लाभ, निवेश से फायदा और लाइफस्टाइल में सुधार देखने को मिल सकता है. जो लोग लंबे समय से किसी बड़े मौके का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह समय दरवाजे खोल सकता है. किन राशियों को फायदा? मिथुन राशि: सबसे ज्यादा लाभ, आय में बढ़ोतरी और नए मौके कर्क राशि: धन संचय के योग, परिवार में सुख-समृद्धि सिंह राशि: प्रतिष्ठा के साथ आर्थिक लाभ तुला राशि: लग्जरी लाइफस्टाइल और सुख-सुविधाओं में इजाफा धनु राशि: निवेश से अच्छा रिटर्न और भाग्य का साथ पूरे महीने बना रहेगा मालव्य राजयोग का असर इन दोनों योगों के बीच शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण पूरे मई में मालव्य राजयोग का प्रभाव भी बना रहता है. यह योग जीवन में सुख-सुविधाएं, आकर्षण और करियर में ग्रोथ लेकर आता है. खासकर जो लोग क्रिएटिव या पब्लिक डीलिंग वाले काम में हैं, उन्हें इसका फायदा ज्यादा मिल सकता है. किन राशियों को फायदा? वृषभ राशि: पर्सनालिटी में निखार, धन और सुख में वृद्धि मिथुन राशि: करियर में ग्रोथ और नई पहचान तुला राशि: रिश्तों में मजबूती और जीवन में संतुलन कुंभ राशि: क्रिएटिव फील्ड में सफलता और नए अवसर मीन राशि: मानसिक शांति और आर्थिक सुधार

अमृतसर में पुलिस और BSF ने किया बड़ा पकड़, सीमा से 980 ग्राम हेरोइन बरामद, तस्करों का नेटवर्क भी निशाने पर

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर जिले में नशा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां थाना भिंडी सैदां की पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित क्षेत्र से 980 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें तस्करों द्वारा सीमा के रास्ते नशीले पदार्थों की खेप भेजे जाने की जानकारी मिली थी। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई हैं। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें पहले से इनपुट मिला था कि कुछ तस्कर सीमा क्षेत्र का इस्तेमाल कर हेरोइन की खेप पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर थाना भिंडी सैदां की टीम और BSF के जवानों ने संयुक्त रूप से इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान एक संदिग्ध स्थान से 980 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। बरामद हेरोइन की कीमत करोड़ों में बरामद की गई 980 ग्राम हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। हालांकि अभी तक किसी तस्कर की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस मामले में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाएगा। इस बरामदगी को सीमा पार से होने वाली तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। तस्करी नेटवर्क की जांच तेज पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह हेरोइन कहां से आई और इसे कहां भेजा जाना था। इसके साथ ही सीमा पार के तस्करी नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे गिरोह को पकड़ा जा सके। सीमा क्षेत्र में बढ़ेगी निगरानी पुलिस और BSF अधिकारियों ने कहा है कि अमृतसर के सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। आने वाले समय में भी इस तरह के संयुक्त अभियान जारी रहेंगे, ताकि नशा तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

लुधियाना: 44 शिक्षकों को BLO ड्यूटी जॉइन करने का आदेश, गैरहाजिर रहने पर सैलरी पर असर और FIR की धमकी

लुधियाना लुधियाना में नगर निगम (लुधियाना ईस्ट) ने 44 शिक्षकों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें 24 अप्रैल को हर हाल में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ड्यूटी पर रिपोर्ट करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि ड्यूटी पर हाजिर न होने की स्थिति में वेतन रोक के आदेश।  स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत BLO ड्यूटी के लिए हैं नियुक्त अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी शिक्षक पहले से ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत BLO ड्यूटी के लिए नियुक्त किए जा चुके हैं, लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद कई शिक्षक ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इसके चलते प्रशासन ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गैरहाजिरी को सर्विस रूल्स का उल्लंघन माना जाएगा और किसी भी तरह का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। शिक्षकों में नाराजगी, कहा- पहले ही काम का बोझ ज्यादा इस फैसले के बाद शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही कई तरह की ड्यूटी में लगे हुए हैं। जमालपुर अवाना के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि वे इस समय ब्लॉक स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। साथ ही 24 अप्रैल को साहनेवाल में होने वाले ‘सिख्या क्रांति’ कार्यक्रम के लिए कोऑर्डिनेटर भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने कई बार लिखित में अपनी स्थिति बताई है, लेकिन फिर भी नई-नई ड्यूटी दी जा रही है। मातृत्व अवकाश पर शिक्षिका को भी लगाया ड्यूटी पर एक और मामले में उसी स्कूल की एक शिक्षिका, जो मातृत्व अवकाश (गर्भावस्था) पर हैं, उन्हें भी BLO ड्यूटी के लिए तैनात कर दिया गया है। इससे शिक्षकों में रोष और बढ़ गया है। एडमिशन सीजन में बढ़ी परेशानी शिक्षकों का कहना है कि इस समय स्कूलों में दाखिले का पीक सीजन चल रहा है। इसके अलावा कई शिक्षक पहले से जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं, जिससे स्कूलों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का पक्ष: चुनावी ड्यूटी जरूरी डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (एलीमेंट्री) मनोज कुमार ने मीडिया से शिक्षकों की परेशानी को स्वीकार करते हुए कहा कि BLO और जनगणना ड्यूटी बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर्स को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों को स्कूलों से रिलीव कर इन ड्यूटी पर भेजा जाए। वहीं, नगर निगम (लुधियाना ईस्ट) के जॉइंट कमिश्नर अमनप्रीत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।  

‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ वेब सीरीज पर बैन, पंजाब पुलिस और परिवार ने किया विरोध, माहौल बिगड़ने का दिया था हवाला

चंडीगढ़  गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) की लाइफ पर बेस्ड सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ इन दिनों काफी चर्चा में बनी हुई है। जी5 (Zee5) की इस सीरीज को लेकर एक के बाद एक अपडेट सामने आ रहे हैं। अभी हाल ही में सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब का ट्रेलर रिलीज हुआ था। सीरीज का ट्रेलर रिलीज होते ही विवाद खड़ा हो गया। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब को बैन करने की मांग उठने लगी। पंजाब पुलिस, कांग्रेस नेता और फिर लॉरेंस के घरवालों ने भी इस सीरीज को बैन करने के लिए कहा। लेकिन इसके बाद भी मेकर्स अपने कदम पीछे हटाने के लिए तैयार नहीं थे। अब इन सब के बीच सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' की रिलीज पर लगी रोक जी5 की सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब एक बार फिर से खबरों में आ गई है। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब को बैन करने की मांग उठ रही थी। अब लॉरेंस ऑफ पंजाब वेब सीरिज अब OTT प्लेटफार्म Zee 5 पर रिलीज नहीं होगी, भारत सरकार ने इसकी रिलीज पर रोक लगा दी है। आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भारत सरकार की तरफ से ये जानकारी दी गई। 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' को प्रसारित न किए जाने के केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ही Zee 5 को निर्देश दिए है।  चचेरे भाई ने कही थी बात हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने भी इस सीरीज पर बैन लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस सीरीज के लिए परिवार से कोई अनुमति नहीं ली गई है। ANI से बात करते हुए रमेश बिश्नोई ने कहा 'न परिवार से अनुमति ली गई है, न सरकार से। ऐसे बनाकर वे क्या साबित करना चाहते हैं?' चर्चा में रहता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई खबरों में बना रहता है। अभी हाल ही में डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर हुई फायरिंग के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया था। इससे पहले सलमान खान के घर पर भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग ने हमला किया था। पंजाब पुलिस चाहती है डॉक्यू सीरीज पर रोक पंजाब पुलिस ने भी औपचारिक रूप से सूचना और प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया है। वह ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर रोक चाहते हैं। यह सीरीज 27 अप्रैल को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होने वाली है। स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (साइबर क्राइम) वी. नीरजा द्वारा भेजे गए एक आधिकारिक संदेश में कहा गया, ‘स्टेट पुलिस ने डॉक्यूमेंट्री के कंटेंट पर गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके आपराधिक सफर को दिखाती है। कहा जा रहा है कि इस सीरीज में हाई-प्रोफाइल अपराधों के नाटकीय चित्रण और असल जिंदगी के संदर्भ शामिल हैं। इसमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या और अन्य हिंसक घटनाएं भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार डॉक्यू सीरीज अपराध का महिमामंडन करती है  पंजाब पुलिस के अनुसार यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज संगठित अपराध का महिमामंडन और उसे आसान बनाकर पेश कर सकती है। जिससे युवा दर्शकों पर बुरा असर पड़ सकता है और वे आपराधिक गतिविधियों को सामान्य समझने लगेंगे। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह का कंटेंट अपराध कम करने प्रयासों को कमजोर करता है।  पंजाब पुलिस ने विशेष रूप से ओटीटी प्लेटफॉर्म को कहा है कि वे इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज को स्ट्रीम न करें। इसके ट्रेलर को भी लोगों की पहुंच से हटा दें।  मेकर्स ने रखा अपना पक्ष  इस पूरे विवाद के बीच डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के मेकर्स ने कहा, ‘यह सीरीज दिखाती है कि कैसे महत्वाकांक्षा, सत्ता और लोगों की सोच मिलकर एक नए जमाने का डिजिटल सिंडिकेट तैयार करती है। इस पूरे माहौल में लॉरेंस बिश्नोई को एक केस स्टडी के तौर पर लिया गया है। लेकिन यह कहानी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर, उससे आगे बढ़कर बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों की पड़ताल करती है। उनके नतीजों पर रोशनी डालती है।’  

बिहार विधानसभा में आज फ्लोर टेस्ट, सम्राट सरकार बहुमत के करीब

पटना बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का पहला टेस्ट है. बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. इसके लिए विधायक बिहार विधानसभा पहुंचने लगे हैं. जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने दावा किया है कि सम्राट सरकार को बहुमत हासिल है औरा सदन में केवल औपचारिकता पूरी होनी है. श्याम रजक का दावा आधारहीन भी नहीं. बिहार विधानसभा का नंबर गेम सम्राट सरकार के पक्ष में है. 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए के पास 201 विधायकों का संख्याबल है, जो बहुमत के लिए जरूरी 122 के आंकड़े से कहीं ज्यादा है. पार्टियों के हिसाब से देखें तो बीजेपी के 88, जेडीयू के 85, इन दो प्रमुख दलों के ही 173 विधायक हैं. चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के चार विधायक हैं. एनडीए के पास बिहार विधानसभा में 202 विधायकों का संख्याबल था. नितिन नवीन बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद अब राज्यसभा जा चुके हैं. नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. विपक्ष की बात करें, तो बिहार विधानसभा में विपक्षी दलों के 41 विधायक हैं, जिनमें 35 विधायक महागठबंधन के हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) 25 विधायकों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. कांग्रेस के छह, भाकपा माले के दो, माकपा और आईईपी के एक-एक विधायक हैं. असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस -ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के भी एक विधायक हैं. महज औपचारिकता माने जा रहे इस विश्वासमत के लिए सत्तापक्ष के साथ ही विपक्ष ने भी व्हिप जारी किया है. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा में सरकार की ओर से सीएम सम्राट चौधरी एक लाइन का विश्वास प्रस्ताव पेश किया है.

शास्त्रीनगर में तनाव: दुकानों को बचाने महिलाएं, पुलिस तैनात

मेरठ मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में दुकानों और मकानों को बचाने के लिए महिलाओं का चल रहा धरना शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी है। गुरुवार को हालांकि शासन के उच्चाधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद आंदोलनकारियों के तेवर कुछ नरम पड़ते नजर आए। महिलाओं ने सरकार पर भरोसा जताते हुए राहत की उम्मीद जताई है सात टीमों ने शुरू की नोटिस की कार्रवाई शुक्रवार सुबह आवास विकास परिषद की सात अलग-अलग टीमों ने सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले आरटीओ रोड क्षेत्र की कई दुकानों को नोटिस दिए गए। कार्रवाई के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए सेक्टर-2 में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के चलते बाजार क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। 14वें दिन भी जारी रहा महिलाओं का धरना सेंट्रल मार्केट में अपनी दुकानों और घरों को बचाने के लिए महिलाएं पिछले 14 दिनों से धरने पर बैठी हुई हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, आवास एवं विकास परिषद के चेयरमैन पी. गुरु प्रसाद और आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह ने व्यापारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। अधिकारियों ने व्यापारियों से जरूरी दस्तावेज भी एकत्र किए और समाधान का आश्वासन दिया। इसी के बाद धरना स्थल पर आंदोलनकारियों का रुख कुछ नरम दिखाई दिया। वहीं आज सुबह से महिलाएं फिर से धरने पर पहुंच गईं। सांसद अरुण गोविल के पहुंचने की चर्चा नोटिस की कार्रवाई और पुलिस तैनाती के बीच इलाके में अरुण गोविल के मौके पर पहुंचने की चर्चा भी तेज हो गई है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बाजार क्षेत्र में लोग सांसद के आने की संभावना को लेकर चर्चा कर रहे हैं।