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गुजारा-भत्ता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता’

ग्वालियर  शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है। मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।  दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह     कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक 'अकुशल श्रमिक' के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।     पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है। क्या होता है गुजारा भत्ता जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है। ये भी जानें -मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है। -यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है। -यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।

UPI पेमेंट में पिन डालने की परेशानी खत्म, अब ऐसे करें पेमेंट—पूरी जानकारी जानें

  नई दिल्‍ली  भारत के यूपीआई इकोसिस्‍टम में आए दिन बदलाव होता रहा है, जिस कारण यूपीआई का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ICICI बैंक, फोनपे और क्रेड जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म ऐसे फीचर्स पेश कर रहे हैं, जिसके तहत यूजर्स बिना यूपीआई पिन डाले UPI पेमेंट कर सकते हैं।  नए फीचर्स यूजर्स को यूपीआई पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस की पहचान का उपयोग करके पेमेंट करने की मंजूरी देते हैं. इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को तेज, अधिक आसान और सुरक्षित बनाना है. खासकर डेली पेमेंट के लिए।  क्‍या है ये नया फीचर?  बायोमेट्रिक UPI अथेंटिफिकेशन से छोटे लेन-देन के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है. इसके बजाय, यूजर्स फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे की पहचान जैसी चीजों का उपयोग करके पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, नियामक मानदंडों के अनुसार, यह सुविधा ₹5,000 तक के लेनदेन के लिए सीमित है. इससे अधिक राशि के लिए, पिन-दर्ज करना अनिवार्य होगा।  ICICI बैंक ने किया रोलआउट ICICI बैंक ने अपने iMobile ऐप पर यह फीचर शुरू कर दिया है, जिससे कस्‍टमर्स बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके पर्सनल लेन-देन, QR कोड बेस्‍ड पेमेंट और ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. यह फ़ीचर ऐप के अपडेटेड वर्ज़न (Android वर्ज़न 30+ और iOS 28.2+) पर उपलब्ध है और यह नए डेटा को इकट्ठा करने के बजाय यूज़र के डिवाइस पर पहले से सेफ स्टोर किए गए बायोमेट्रिक डेटा पर निर्भर करता है. ये फीचर ऐसा है, जिसके तहत आप जब चाहे बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन को चालू या बंद कर सकते हैं. जरूरत पड़ी तो पिन अथेंटिफिकेशन फिर से शुरू कर सकते हैं।  PhonePe और CRED PhonePe ने UPI पेमेंट के लिए बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन भी शुरू किया है, जिससे एक टच में पेमेंट का अनुभव मिलता है. यह सुविधा पिन भूल जाने और गलत इनपुट जैसी आम समस्याओं में काम आती है. स्मार्टफोन की अंतर्निहित सुरक्षा का लाभ उठाते हुए, यह भीड़भाड़ वाले स्थानों में पिन लीक होने जैसे रिस्‍क को कम करता है।  महत्वपूर्ण बात यह है कि PhonePe यूजर्स को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने की स्थिति में पिन अथेंटिफिकेशन का विकल्प देता है. यह सुविधा व्यापारी भुगतान, क्यूआर स्कैन और यहां तक ​​कि बैलेंस चेक समेत कई उपयोगों में काम करती है. CRED ने NPCI के साथ साझेदारी में इसी तरह की बायोमेट्रिक UPI सुविधा शुरू की है, जो निर्बाध और सुरक्षित भुगतान की दिशा में व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का संकेत देती है। 

सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली पुलिस की गलती, कोर्ट में सवाल उठे

इंदौर   राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi Murder Case) को एक साल पूरे होने वाले है लेकिन इस हाईप्रोफाइल केस में अभी भी कई ट्विस्ट सामने आ रहे है। इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी और मृतक राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम रघुवंशी को कोर्ट ने शर्तों के आधार और 50 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी है। सोनम रघुवंशी के पिता देवी सिंह ने उसकी जमानत कराई। सोनम की जमानत की खबर सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोग एक ही सवाल गूंज रहा है- 'आखिर सोनम को जमानत कैसे मिली? बताया जा रहा है कि सोनम रघुवंशी को जमानत शिलॉन्ग पुलिस की एक गलती के कारण मिली है। बता दें कि, इससे पहले सोनम की 3 बार जमानत रद्द हो चुकी है। पुलिस की एक गलती और सोनम को मिली जमानत मिली जानकारी के अनुसार, राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम शिलॉन्ग पुलिस की कमजोर विवेचना के चलते इतने कम समय में जेल से बाहर आने में सफल हुई है। पूर्वी खासी हिल्स जिला न्यायालय ने शिलॉन्ग पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने चालान में धाराएं अलग-अलग लिखी थीं। बताया जा रहा कि यह पुलिस की टाइपिंग मिस्टेक थी। इसके अलावा गिरफ्तारी की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और ट्रायल में भी देरी की गई। शिलांग के सत्र न्यायालय ने जमानत देते हुए अपनी टिप्पणी में कहा- पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण बताने वाला फार्म सही तरीके से नहीं भरा था। कई जगह अलग-अलग धाराएं लिखी गई थीं। ट्रायल में भी पुलिस ने देरी की है। पुलिस ने और कहा कि गलती? जिला कोर्ट ने ये भी पाया कि ,गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट नहीं बताए गए हैं। कोर्ट ने पाया कि, आरोपी को गिरफ्तारी के समय जिन धाराओं और तथ्यों के आधार पर पकड़ा गया, उनकी सही और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। दस्तावेज़ों में भी ये साफ नहीं था कि, किन धाराओं के तहत गिरफ्तारी की गई है, जिससे आरोपी को अपने बचाव का पूरा मौका नहीं मिल गया। बता दें कि, गिरफ्तारी के कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22 (1) का उल्लंघन माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, ये आरोपी का मौलिक अधिकार है कि उसे तुरंत गिरफ्तारी का कारण बताया जाए। कोर्ट ने पकड़ी एक और बड़ी गलती इसके अलावा जिला कोर्ट ने एक और बड़ी गलती पकड़ी। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है जिससे ये पता चल सके की जिस समय सोनम को गाजीपुर कोर्ट ने पेश किया गया तब उसकी तरफ से कोई वकील मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि उस समय अगर वकील मौजूद होता तो ये आपत्ति पहले ही उठाई जा सकती थी। इन शर्तों के आधार पर मिली जमानत     सोनम किसी सबूत के साथ छेडख़ानी नहीं करेगी।     हर तारीख पर कोर्ट में उपलब्ध होगी।     कोर्ट के क्षेत्राधिकार (शिलांग से बाहर) से बिना कोर्ट की इजाजत नहीं जा सकेगी।     50 हजार रुपए के बांड कोर्ट में जमा करेगी। क्या है मामला इंदौर के सहकार नगर, कैट रोड निवासी राजा रघुवंशी की 23 मई 2025 को शिलांग के टूरिस्ट प्लेस में हत्या हुई थी। ऑपरेशन हनीमून के तहत स्थानीय पुलिस ने आरोपी सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह, उसके साथी विशाल चौहान, आकाश राजपूत, आनंद कुर्मी सभी निवासी नंदबाग को गिरफ्तार किया था। केस में कई माह से आरोपी जेल में हैं। 

जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से गोचा नदी के स्टॉप डैम की तस्वीर हुई बदल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चल रहे इस अभियान ने प्रदेशभर में जल संरचनाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन को नई गति दी है। इसी अभियान के अंतर्गत गुना जिले के जनपद पंचायत राघौगढ़ की ग्राम पंचायत मोररवास में जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट जैसी चुनौती का समाधान संभव है। सूखे स्टॉप डैम में लौटी जीवन की धारा गोचा नदी पर स्थित स्टॉप डैम में पूर्व में पानी का ठहराव नहीं हो पाता था और वर्षा जल बहकर अन्य स्थानों पर चला जाता था। परिणामस्वरूप ग्रामीणों एवं पशुधन को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि से बोरी बंधान का कार्य 6 से 11 अप्रैल के बीच पूर्ण किया गया। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से अब स्टॉप डैम में जल ठहराव बढ़ा है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। श्रमदान से बना जनआंदोलन इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया और जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में यह कार्य सामूहिक रूप से पूर्ण किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ। मवेशियों एवं वन्य जीवों को मिला सहारा बोरी बंधान से जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे अब मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए भी पानी की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। जो स्थान पहले सूखा रहता था, वह अब जीवनदायी जल स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है। प्रेरणादायक मॉडल गोचा नदी स्टॉप डैम का यह परिवर्तन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है और यह संदेश देती है कि सामूहिक प्रयास, जनसहयोग एवं सकारात्मक सोच से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।  

मोहन सरकार में मंत्रिमंडल में बदलाव, इन नामों को मिल सकता है मौका!

इंदौर   मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर दो दिन पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कवायद शुरू हो गई है जिसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों का कोरम पूरा हो जाएगा। इसमें बड़ा फेरबदल होने की भी संभावनाएं जताई जा रही है जिसमें नई मंत्री बनाए जाने के साथ कुछ की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई साल होने जा रहे हैं। इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में 31 मंत्री हैं, जबकि 35 बनाए जा सकते हैं। चार पदों को भरा जाएगा जिसके साथ कुछ मंत्रियो को मुक्त करके नए बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी इस बात को मजबूत यूं भी माना जा रहा है कि दो दिन पहले डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक समन्वय समिति की बैठक हुई थी जिसमें संघ के कई बड़े दिग्गज नेता मौजूद थे और माना जाता है कि कोई भी बड़े फैसले से पहले समिति में बात रखी जाती है। इस बात से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दिनों दिल्ली के लगातार दौरे को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी मानी जा रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहानी सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर का नाम भी है जिसमें मालिनी गौड़ प्रमुखता से है तो दूसरे पायदान पर मनोज पटेल है। हालांकि विधायक उषा ठाकुर भी खासा प्रयास कर रही हैं जिसके लिए उन्होंने भोपाल-दिल्ली एक कर रखा है। उनके अलावा संभाग से अर्चना चिटनीस का नाम भी है। वहीं भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, बृजेंद्र सिंह यादव और रीति पाठक के नाम भी मंत्री बनने वाले विधायकों की फेहरिस्त में हैं। ये नाम तो मंत्री बनने के दावेदारों के है, लेकिन कुछ नाम ऐसे दिग्गजों के भी हैं जिनके इस्तीफे भी हो सकते हैं। संतुलन बनाने का होगा प्रयास मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। हालांकि निगम मंडल और प्राधिकरणों में जो नियुक्ति हो रही है जिसमें मोहन सरकार व भाजपा का संगठन इस बात का बारीकी से ध्यान रख रहा है। भविष्य में होने वाले चुनाव को लेकर भी अभी से बिसात जमाई जा रही है ताकि सभी वर्गों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सरकार को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने  हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कुछ बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। SC ने कहा है कि कोर्ट सरकार को इस मामले में कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उच्चतम न्यायालय ने इस दौरान देश भर में नफरती भाषण पर रोक लगाने के लिए कोई भी नई दिशा-निर्देश जारी करने से मना कर दिया। SC ने कहा कि अदालतें संसद या राज्य विधानसभाओं को नए कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकतीं। वे ज्यादा से ज्यादा सुधार की जरूरत की ओर ध्यान आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन कानून बनाने का फैसला सरकार का ही होगा। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई चल रही थी। इनमें केंद्र सरकार को हेट स्पीच के लिए लागू मौजूदा कानून की जांच करने और इन्हें और ज्यादा असरदार बनाने का निर्देश देने की मांग वाली याचिकाएं भी थीं। याचिका खारिज करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा, "हालांकि अदालत कार्रवाई की जरूरत की ओर ध्यान दिला सकती है, लेकिन वह विधायिका को कानून बनाने का काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।” पीठ ने आगे इस बात पर जोर दिया कि कानून बनाना और उसे लागू करना पूरी तरह से लेजिस्लेचर के अधिकार क्षेत्र में आता है। बेंच ने कहा, “ज्यादा से ज्यादा, कोर्ट विधायिका का ध्यान बढ़ती हुई चिंता की ओर दिला सकती है और यह सिफारिश कर सकती है कि उचित उपायों पर विचार किया जाए। लेकिन सरकार इन टिप्पणियों पर कार्रवाई करती है या नहीं, और किस तरीके से करती है, यह पूरी तरह से उनके विवेक पर निर्भर करता है।” हेट स्पीच पर पहले से कानून कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि हेट स्पीच की समस्या से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है या मौजूदा कानूनी ढांचे में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कोई सिस्टम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असली चिंता कानून का अभाव नहीं, बल्कि उसे लागू करने को लेकर है। पीठ ने कहा कि कई स्तरों पर कानन बनाए गए हैं। अगर पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज करती है, तो पीड़ित व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकता है और उसके बाद मजिस्ट्रेट के पास गुहार लगा सकता है। पीठ ने आगे कहा कि समस्या कानूनी प्रावधानों की कमी से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके लागू न होने से पैदा होती है।

तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान बढ़ी आय और सम्मान

रायपुर तेन्दूपत्ता से बदली जिंदगी, बढ़ी आय और सम्मान तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक अत्यंत सशक्त और महत्वपूर्ण आधार है। इसे जंगलों का हरा सोना भी कहा जाता है। यह कार्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है और विशेष रूप से भीषण गर्मी के महीनों में जब अन्य रोजगार के साधन कम होते हैं, तब यह आय का एक बड़ा जरिया बनता है। छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता संग्रहण आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए आजीविका का एक मजबूत आधार है। यहां उत्पादित तेन्दूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।  कटघोरा वनमण्डल में यह कार्य संगठित रूप से संचालित हो रहा है, जहां 7 परिक्षेत्रों में 44 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां सक्रिय हैं। हर वर्ष मई के पहले सप्ताह से तेन्दूपत्ता संग्रहण शुरू होता है। इससे पहले फड़ों (संग्रहण केंद्रों) का चयन और शाखा कर्तन का कार्य किया जाता है, जिससे अच्छी गुणवत्ता के पत्ते प्राप्त हों। वर्ष 2026 में केवल शाखा कर्तन कार्य के लिए ही 47 लाख 54 हजार रूपए से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिला।     वर्ष 2025 में कटघोरा वनमण्डल के 486 फड़ों में 78, हजार 300 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 71,737 मानक बोरा (94.02 प्रतिशत) तेन्दूपत्ता संग्रहण किया गया। इस कार्य में 66 हजार 331 संग्राहकों ने भाग लिया, जिन्हें 5 हजार 500 रूपए प्रति मानक बोरा की दर से कुल 39 करोड़ 45 लाख रूपए से अधिक पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया गया। इससे भुगतान में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़े हैं। सरकार की पहल से तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर भी बढ़ा है। वर्ष 2023 में 4 हजार  रूपए प्रति मानक बोरा मिलने वाली दर को वर्ष 2024 से बढ़ाकर 5 हजार 500 रूपए कर दिया गया, जो वर्ष 2026 में भी लागू है। इसके साथ ही तेन्दूपत्ता व्यापार से होने वाली आय का 80 प्रतिशत हिस्सा संग्राहकों को बोनस के रूप में दिया जाता है। वर्ष 2019 से 2022 के बीच करोड़ों रूपए का बोनस सीधे हजारों संग्राहकों के खातों में पहुंचाया गया, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। तेन्दूपत्ता संग्राहकों के कल्याण के लिए कई जनहितकारी योजनाएं  चरणपादुका योजना के तहत वर्ष 2025 में 63 हजार 636 महिला संग्राहकों को निःशुल्क जूते प्रदान किए गए। राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना में 84 संग्राहकों को 1.07 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता दी गई। समूह बीमा योजना के तहत 90 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई और शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से सैकड़ों बच्चों को लाखों रूपए की छात्रवृत्ति दी गई, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिली।  इन योजनाओं का प्रभाव यह है कि अब तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल एक मौसमी काम नहीं रहा, बल्कि यह स्थायी आय और सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन गया है। संग्राहकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है और जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार दिखाई दे रहा है। यह सफलता दिखाती है कि जब शासकीय योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो जंगल से जुड़ी आजीविका भी सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग बन सकती है।

2 मई से MP में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, पुराने आवेदकों के लिए प्रोफाइल अपडेट जरूरी, चयन मेरिट के आधार पर

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MP अतिथि शिक्षक भर्ती (Guest Teacher Recruitment) की प्रक्रिया का बिगुल फूंक दिया है। इस बार विभाग ने पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0 शुरू किया गया है। 2 मई 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश भर के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में विषयवार पद करीब 10 हजार पदों को भरने की तैयारी है। हाल ही में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए यह बड़ी खबर है, क्योंकि अब चयन का आधार पूरी तरह से डिजिटल स्कोर कार्ड और मेरिट होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के किसी भी आवेदक का स्कोर कार्ड जनरेट नहीं होगा, जिससे वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी इच्छुक कैंडिडेट्स को तय समयसीमा में जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभाग ने पदों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं की है, लेकिन यह प्रक्रिया प्रदेश के स्कूलों में विषयवार रिक्त करीब 10 हजार पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार चयन किया जाएगा। एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। पोर्टल 3.0 पंजीकरण और प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया इस वर्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।  1. नए आवेदकों के लिए (For New Applicants) जो अभ्यर्थी पहली बार अतिथि शिक्षक के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें पोर्टल 3.0 पर फ्रेश रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से अपनी आईडी जनरेट करनी होगी। 2. पूर्व रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए (For Old Applicants) पहले से पंजीकृत उम्मीदवारों को अपनी पुरानी आईडी से लॉगिन कर प्रोफाइल अपडेट (Profile Update) करना अनिवार्य है। इसमें उन्हें अपनी नवीनतम शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक डिग्री (B.Ed/D.El.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के अंक अपडेट करने होंगे। डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और स्कोर कार्ड अतिथि शिक्षक भर्ती में सबसे जरूरी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन है। बिना वेरिफिकेशन के आवेदक का स्कोर कार्ड (Score Card) जनरेट नहीं होगा, और बिना स्कोर कार्ड के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना असंभव है। पुराने कैंडिडेट्स को करनी होगी प्रोफाइल अपडेट भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से “अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0” पर की जाएगी। नए आवेदकों को पहले पंजीयन करना होगा, जबकि पुराने उम्मीदवारों को अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसके बाद सभी आवेदकों को अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। प्रोफाइल लॉक करने के बाद आवेदकों को संकुल प्राचार्य के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। सत्यापन के बाद ही स्कोर कार्ड तैयार किया जाएगा, जो मेरिट तय करने का आधार बनेगा। साथ ही, इस बार पहले ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया     आवेदकों को पोर्टल पर अपने डाक्यूमेंट्स अपलोड करने के बाद संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) के पास मूल डाक्यूमेंट्स के साथ जाना होगा।     प्राचार्य ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर जानकारी को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करेंगे।     यदि आवेदन रिजेक्ट होता है, तो आवेदक उसे सुधार कर दोबारा जमा कर सकता है। चयन का आधार: मेरिट और स्कोर कार्ड  अतिथि शिक्षकों का चयन मेरिट के आधार पर होगा।      शैक्षणिक योग्यता (Academic Record): 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट के अंक।     व्यावसायिक योग्यता: बी.एड (B.Ed) या डी.एल.एड के अंक।     पात्रता परीक्षा (TET): शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों को विशेष वेटेज दिया जाएगा।     अनुभव: पूर्व में अतिथि शिक्षक के रूप में किए गए कार्य का अनुभव अंक। सावधानियां और निर्देश      अधूरी योग्यता: यदि बी.एड या अन्य कोर्स का रिजल्ट वेटिंग है, तो वेरिफिकेशन नहीं होगा।     मल्टीपल आईडी: यदि किसी आवेदक के पास एक से अधिक आईडी है, तो अनुभव प्रमाण पत्र मर्ज कराना अनिवार्य है।     डाक्यूमेंट्स: बिना ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी   लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर कार्रवाई की जाएगी। नाराजगी देख बदली व्यवस्था अतिथि शिक्षकों ने 29 अप्रैल को भोपाल के अंबेडकर पार्क में बड़ा आंदोलन किया था। अतिथि शिक्षक सरकार द्वारा वार्षिक अनुबंध का वादा तोड़ने और डीपीआई द्वारा 30 अप्रैल से कार्यमुक्त करने से नाराज हैं। उनके आंदोलन से प्रदेश में सरकार की छवि पर खराब असर पड़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया है। उनकी नाराजगी को संभालने के लिए डीपीआई द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में नया आदेश जारी किया है। 

आज से शुरू होगा सुशासन तिहार 2026: 01 मई से 10 जून तक प्रदेश भर में चलेगा अभियान

रायपुर  छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” की शुरुआत आज से होने जा रही है। यह अभियान 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे।                 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आमजन को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पहले चरण में लंबित मामलों के निराकरण पर जोर                अभियान के पूर्व चरण में ही कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 30 अप्रैल तक सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित करें। इसमें—  * नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण * मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान * हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान * आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र * बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल (हैंडपंप) समस्याएं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रदेशभर में लगेंगे समाधान शिविर सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून तक लगेंगे शिविर  * ग्रामीण क्षेत्रों में 15–20 ग्राम पंचायतों के समूह में शिविर * शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर आधारित आयोजन * मौके पर ही आवेदन स्वीकार और लाभ वितरण * अधिकतम एक माह में आवेदनों का निराकरण                  शिविरों में शासन की योजनाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी और प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और सीधा संवाद                 अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। CM करेंगे औचक निरीक्षण और समीक्षा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर— * विकास कार्यों का औचक निरीक्षण * हितग्राहियों से सीधा फीडबैक * जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें करेंगे                निरीक्षण के बाद वे प्रेसवार्ता के माध्यम से जानकारी साझा करेंगे और नागरिकों व सामाजिक संगठनों से सुझाव भी लेंगे। व्यापक प्रचार से बनेगा जन आंदोलन   जनसम्पर्क विभाग और जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। डिजिटल, प्रिंट और स्थानीय माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा

महाकाल मंदिर का लड्डू अब बनेगा हाईटेक मशीन से, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा। लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है। मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।