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शराब और बीयर की कीमत बढ़ने की संभावना, 20% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव

मुंबई  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल या शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के शराब उद्योग पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ने लगा है। देश की कई बड़ी शराब और बीयर कंपनियों ने राज्य सरकारों से कीमतें बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बोतल, कैन, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि अब इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर और वाइन की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है। देश की प्रमुख इंडस्ट्री संस्था (Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies-CIABC) और (Brewers Association of India) ने कई राज्यों को पत्र लिखकर राहत की मांग की है। बीयर कंपनियों के संगठन BAI ने सरकारों से 15% से 20% तक कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है ताकि बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम किया जा सके। संगठन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी (Vinod Giri) के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट के बाद ग्लास बोतलों की कीमत करीब 20% तक बढ़ गई है, जबकि पेपर कार्टन लगभग दोगुने महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा LDPE, BOPP और चिपकाने वाले मटेरियल्स की कीमतों में भी 20-25% तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा दबाव ग्लास उद्योग पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब में गैस सप्लाई कम होने से कई फैक्ट्रियां संकट में हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें अब महंगे LNG और LPG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। बीयर कंपनियों के सामने एल्यूमीनियम कैन की कमी भी बड़ी चुनौती बन रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट से एल्यूमीनियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में कैन और ग्लास की भारी कमी हो सकती है। इस संकट का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट और फ्रेट लागत भी करीब 10% बढ़ चुकी है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है। अनंत एस अय्यर (Anant S Iyer) का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने शराब उद्योग पर महंगाई का बड़ा दबाव बना दिया है। कंपनियों ने सरकारों से अंतरिम राहत के तौर पर टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग लेवी में कटौती की भी मांग की है। अगर सरकारें कीमत बढ़ाने की अनुमति देती हैं, तो आने वाले समय में बीयर, व्हिस्की और वाइन जैसी शराबों के दाम आम ग्राहकों के लिए और महंगे हो सकते हैं।

भूजल बचाने निगम की पहल: 15 हजार इमारतों में लगाए जाएंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

इंदौर  इंदौर में गर्मी के बढ़ते प्रकोप के साथ ही पानी की किल्लत विकराल रूप धारण करने लगी है। स्थिति यह है कि नर्मदा के नलों में अब कम दबाव से पानी की आपूर्ति हो रही है और शहर के 30 से 40 प्रतिशत इलाकों में बोरिंग भी पूरी तरह सूख चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने भूजल स्तर सुधारने और बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया है। निगम प्रशासन ने अब शहर के तमाम आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। अभियान के पहले चरण में 600 से अधिक बहुमंजिला इमारतों और बड़े भवनों को चिह्नित कर नोटिस थमाए गए हैं। आगामी दो महीनों के भीतर निगम ने 15,000 भवनों में यह सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है और आम नागरिकों से भी इसे स्वेच्छा से अपनाने की अपील की जा रही है।  शहरी क्षेत्रों में जमीन के भीतर का पानी खत्म होता जा रहा बढ़ती हुई आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए नर्मदा के चौथे चरण का कार्य तो प्रारंभ कर दिया गया है, परंतु सबसे बड़ी चुनौती पानी की वास्तविक उपलब्धता को लेकर बनी हुई है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि पानी की टंकियों को पूर्व की भांति ही भरा जा रहा है, किंतु धरातल पर परिस्थितियां इसके विपरीत नजर आ रही हैं। शहरी क्षेत्रों में जमीन के भीतर पानी का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। इसी गिरावट को रोकने के उद्देश्य से नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्जिंग की व्यापक पहल की है। भूजल स्तर में सुधार के लिए दीर्घकालिक योजना भूजल बोर्ड की हालिया रिपोर्ट में निगम के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, पानी का दोहन प्रतिशत 119 से कम होकर 117 पर आ गया है। भविष्य की जरूरतों और जल संकट के स्थाई समाधान के लिए निगम ने लंबी अवधि की योजना पर ध्यान केंद्रित किया है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, बड़ी इमारतों में इस प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में लगभग 800 भवन स्वामियों और मल्टी संचालकों ने सूचित किया है कि उन्होंने सिस्टम लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए 30 जून तक की समय सीमा तय की गई है। निर्माण कार्यों और व्यावसायिक उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लागू किए बढ़ती गर्मी में घरेलू खपत के साथ-साथ निर्माण कार्यों और गैरेज जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में पानी का बेतहाशा उपयोग हो रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने निर्माण कार्यों और ऑटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों पर बोरिंग या नर्मदा जल के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इसके विकल्प के रूप में निगम ने शहर के 35 अलग-अलग स्थानों पर ट्रीटेड वॉटर के हाईडेंट पॉइंट बनाए हैं, जहां से व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी लिया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त कार धोने या किसी भी रूप में पानी का दुरुपयोग करने वालों पर चालानी कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। ज्ञात हो कि निगम ने दो वर्ष पूर्व भी एक लाख वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का बड़ा अभियान चलाया था। 

टकराव के बावजूद अमेरिका को 90 अरब डॉलर का फायदा, ट्रंप की रणनीति रंग लाई

तेहरान  ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है।  अमेरिका की लिथियम खोज क्यों है खास रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2.3 मिलियन मीट्रिक टन लिथियम ऑक्साइड मौजूद है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि आने वाली कई पीढ़ियों तक अमेरिका की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यही वजह है कि इस खोज को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह लिथियम मुख्य रूप से कैरोलिना क्षेत्र के ‘टिन-स्पोड्यूमीन बेल्ट’ में पाया गया है. यह इलाका पहले भी दुनिया का प्रमुख लिथियम स्रोत रह चुका है, लेकिन समय के साथ यहां खनन गतिविधियां कम हो गई थीं. अब एक बार फिर यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा के नक्शे पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. खास बात यह है कि यहां पाया जाने वाला स्पोड्यूमीन एक ऐसा खनिज है, जिससे सीधे लिथियम निकाला जा सकता है, जो बैटरियों के लिए बेहद जरूरी होता है।  चीन की नहीं होगी जरूरत  रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक अमेरिका अपनी लिथियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता रहा है. खासकर चीन और चिली जैसे देशों पर उसकी निर्भरता ज्यादा रही है. लेकिन इस नई खोज के बाद अमेरिका के पास मौका है कि वह अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करे और विदेशी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दे. दुनिया भर में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है. इसकी वजह है इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक लिथियम की मांग में करीब 40 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है. अनुमान है कि इस भंडार से करीब 13 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां तैयार की जा सकती हैं।   

उपभोक्ताओं के लिए राहत: शादी समारोह में फटाफट मिलेगा सिलेंडर

भोपाल  बीते दो महीनों से चल रही गैस सिलेंडर की समस्या से उपभोक्ताओं को राहत मिलने वाली है। अगर आपके घर में शादी-समारोह या कोई फंक्शन है और कमर्शियल गैस सिलेंडर चाहिए तो अब नई व्यवस्था शुरु कर दी गई है। अगर आपको फंक्शन के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर चाहिए तो अब सीधे गैस एजेंसी पर कैटरर्स के माध्यम से आवेदन कराना होगा। खाद्य एवं आपूर्ति प्रशासन की ओर से कमर्शियल सिलेंडर्स देने की व्यवस्था में बदलाव किया है। डॉयरेक्ट करना होगा आवेदन अब कलेक्टर या एसडीएम को आवेदन करने की बजाय सीधे गैस एजेंसी को आवेदन देना होगा। कैटरर्स शादी के आमंत्रण कार्ड के साथ आवेदन देकर जरूरत बताएगा। संचालक उपलब्ध सिलेंडर के अनुसार, कितने देने हैं तय करेगा। कम से कम दो सिलेंडर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ सरकारी संस्थानों की जरूरत के लिए देना तय किया था, लेकिन अब मांग के अनुरूप भी देना शुरू किया जा रहा है। जिला खाद्य आपूर्ति संचालक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, लोगों की सुविधा और स्थिति के अनुसार प्रक्रिया तय की जा रही है। गैस सिलेंडर के रेट बढ़े अपभोक्ताओं को जानकारी के लिए बता दें कि पूरे मध्यप्रदेश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 993 रुपए महंगा हो गया है। भोपाल में 3074 रुपए, इंदौर में 3179 रुपए, जबलपुर में 3290 रुपए, ग्वालियर में 3296 रुपए और उज्जैन में 3241 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। दो महीने में रेट 1248 रुपए बढ़ चुके हैं। अब इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। कमर्शियल सिलेंडर के रेट ऐसे समय बढ़े हैं, जब होटल, रेस्टोरेंट-ढाबों को जरूरत की 50 प्रतिशत गैस ही मिल रही है। जुलाई तक प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शादियां होनी हैं, ऐसे में लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पडे़ंगे। बता दें कि कमर्शियल गैस सिलेंडर 2 महीने में साढ़े 12 सौ रुपए तक महंगा हुआ है। यानी पहले की तुलना में 60% रेट बढ़े हैं। फरवरी तक सिलेंडर 1800 रुपए में मिल जाता था, लेकिन अब 50 प्रतिशत आपूर्ति ही हो रही है। कमर्शियल गैस नहीं मिलने से डीजल भट्‌टी और इंडक्शन का उपयोग हो रहा है। इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ा हुआ है। अब खाने के रेट बढ़ाने पड़ेंगे। जीतू पटवारी ने साधा निशाना गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे और नारा दिया गया था बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार, लेकिन आज वही सरकार महंगाई को चरम पर पहुंचाने का काम कर रही है। अब चुनाव के बाद राहत की जगह महंगाई मिल रही। फरवरी माह से अब तक व्यावसायिक गैस सिलेंडर के दामों में 1,380 तक की बढ़ोतरी हुई है, जो केवल तीन महीनों में लगभग 81 प्रतिशत की वृद्धि है।

NCRB रिपोर्ट: दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार 4 साल सबसे अधिक

नई दिल्ली भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित महानगरों की सूची में पहले नंबर पर आ गई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली लगातार चौथे वर्ष देश के सबसे असुरक्षित महानगर के रूप में उभरी है. रिपोर्ट बताती है कि अन्य मेट्रो शहरों के मुकाबले दिल्ली में सबसे ज्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध किए गए हैं।  एनसीआरबी के आंकड़ों में भले ही दिल्ली में कुल आईपीसी और बीएनएस अपराधों में 15.1% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई और 2023 के 3.2 लाख से ज्यादा मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या लगभग 2.8 लाख रह गई लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध में यह अभी भी बाकी मेट्रो शहरों से आगे निकल गई है. राजधानी में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों की गंभीरता और उनकी तीव्रता चिंता का विषय बनी हुई है।  महिलाओं के खिलाफ अपराध दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या 7,827 मामलों में पहुंच गई है. सबसे ज्यादा परेशान करने वाला आंकड़ा बलात्कार का है, जब दिल्ली में करीब 1,058 मामले दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा अन्य महानगरों जयपुर (497) और मुंबई (411) की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है. 6 मामलों के साथ गैंग रेप या रेप के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराधों में भी दिल्ली टॉप पर है. POCSO मामलों में भी दिल्ली (1,553) ने मुंबई (1,416) को पीछे छोड़ दिया है. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।  रेप के मामले कम हुए लेकिन बाकी शहरों से ज्यादा 2024 में दिल्ली में 1,058 बलात्कार के मामले दर्ज हुए. यह संख्या जयपुर (497) और मुंबई (411) से दोगुनी से भी ज्यादा है. हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में मामलों में मामूली कमी आई है. 2023 में 1,094 और 2022 में 1,212 मामले दर्ज हुए थे. लेकिन यह कमी इसलिए मामूली है क्योंकि दिल्ली इन सभी से आगे है. NCRB के अनुसार दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ कुल 13,396 मामले दर्ज हुए, जो अन्य महानगरों से कहीं ज्यादा हैं।  अपहरण और घरेलू हिंसा की स्थिति भी गंभीर दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपहरण और अपहरण के 3,974 मामले दर्ज हुए. इनमें पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 4,647 मामले, छेड़छाड़ के 755 मामले, यौन उत्पीड़न के 316 मामले और स्टॉकिंग के 178 मामले सामने आए. सात मामले बलात्कार के साथ हत्या के भी दर्ज किए गए. दिल्ली पुलिस के पास 31,000 से अधिक मामले जांच के अधीन हैं, जो देश के 19 बड़े शहरों के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई है।  बच्चों पर बढ़ता खतरा दिल्ली बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद चिंताजनक स्थिति में है. 2024 में बच्चों के खिलाफ 7,662 अपराध दर्ज हुए हैं. यह आंकड़ा प्रति एक लाख बच्चों पर 138.4 अपराध दर राष्ट्रीय औसत (42.3) से बहुत अधिक है. चार्जशीट दर मात्र 31.7% रही, जबकि औसत 61.4% है।  यूपी में सबसे ज्यादा महिला अपराध, शहर में दिल्ली सबसे असुरक्षित महिलाओं के मामले में दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित शहर बनकर उभरा है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की 19 मेट्रोपॉलिटन सिटीज में दिल्ली में सबसे ज्यादा 2024 में 13396 अपराध दर्ज किए गए हैं. इन 19 बडे शहरों में मध्य प्रदेश का इंदौर 8वें स्थान पर है. हालांकि 2023 के मुकाबले 2024 में महिला अपराधों में कमी आई है. 2023 में इंदौर में 1919 अपराध घटित हुए थे, जबकि 2024 में 1884 मामले दर्ज किए गए।  बच्चों से जुड़े अपराध में एमपी तीसरे नंबर पर बच्चों से जुड़े अपराध देश में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 24 हजार 171 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर 22 हजार 222 अपराधों के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. 2024 में मध्य प्रदेश में 21 हजार 908 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए. इन राज्यों में जितने बच्चों से जुड़े अपराध हैं, जांच की गति भी उतनी ही धीमी है. मध्य प्रदेश में चार्जशीट प्रस्तुत करने की दर ही 55 फीसदी है. जबकि महाराष्ट्र में 52 फीसदी और राजस्थान में 49.2 फीसदी मामलों की ही चार्जशीट कोर्ट में पेश हो पाती है।  एससी-एसटी अपराध में कौन राज्य टॉप पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में है. अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ होने अपराध सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए. यूपी में 2024 में 14 हजार 642 मामले दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है. एमपी में 7 हजार 765 और बिहार में 7 हजार 565 मामले दर्ज किए गए. जबकि राजस्थान में 7008 मामले दर्ज हुआ हैं।  वहीं अनुसूचित जनजाति यानि ST के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए. एमपी में 3165, इसके बाद राजस्थान में 2 हजार 282 और 830 अपराधों के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।  क्या सुधर रही है स्थिति? टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में अपराधों की उच्च संख्या रिपोर्टिंग और जागरूकता बढ़ने का परिणाम है. कुल अपराधों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. दिल्ली में अपराध दर 176.8 प्रति लाख है, जो अन्य महानगरों से काफी ऊंची है।  ऐसे में NCRB 2024 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि दिल्ली में कानून व्यवस्था और महिला-बाल सुरक्षा को मजबूत करने की तत्काल जरूरत है. मात्र आंकड़ों में कमी से सुरक्षा की भावना नहीं बढ़ती. आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। 

ऐतिहासिक गोंड महल को पर्यटक आकर्षण में बदला जाएगा, जगदीशपुर में मिलेगा लग्जरी अनुभव

भोपाल  इतिहास, स्थापत्य कला और विरासत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मध्य प्रदेश में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी भोपाल के पास स्थित गोंड महल को अब आलीशान हेरिटेज होटल में बदला जाएगा। करीब 400 साल पुरानी यह ऐतिहासिक इमारत जल्द ही नए स्वरूप में पर्यटकों का स्वागत करती नजर आएगी। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास की योजना पर काम कर रहा है। निगम महल के हस्तांतरण, सुंदरीकरण और संचालन के लिए निजी साझेदार की तलाश में जुटा है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए इसे विश्वस्तरीय हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा सके। गोंड और राजपूत स्थापत्य का अद्भुत संगम भोपाल से करीब 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड स्थित जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लाम नगर) का यह महल लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है और गोंड व राजपूत स्थापत्य शैली का शानदार उदाहरण माना जाता है। तीन मंजिला इस भव्य इमारत की खासियतें इसे बेहद खास बनाती हैं: – विशाल केंद्रीय आंगन – मेहराबदार बरामदे – अलंकृत लकड़ी के स्तंभ – प्राचीन हम्माम (भाप स्नान) – जल पंप और अस्तबल – छोटी गौशाला – जालीदार खिड़कियां और पुष्प आकृतियां महल आज भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। इतिहास के पन्नों से जुड़ा जगदीशपुर जगदीशपुर का इतिहास 15वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इस किलेबंद बस्ती की स्थापना गोंड शासकों ने की थी और वर्ष 1715 तक यहां गोंड राजाओं का शासन रहा। बाद में भोपाल रियासत के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर इसका नाम बदलकर इस्लाम नगर कर दिया था। वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने इसका ऐतिहासिक नाम पुनः बहाल करते हुए इसे फिर से जगदीशपुर नाम दिया। भोपाल की दूसरी हेरिटेज होटल परियोजना गोंड महल भोपाल संभाग की दूसरी ऐतिहासिक इमारत होगी जिसे हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे पहले सदर मंजिल को होटल में बदला जा चुका है। वहीं मिंटो हाल को कन्वेंशन सेंटर और मोती महल को संग्रहालय के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गोंड महल को हेरिटेज होटल में बदलने से न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान भी वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।  

सूचना-संदेश पर बैन, बीजेपी का कड़ा फैसला सोशल मीडिया पर लागू

इंदौर  भाजपा में बैठक व अन्य आयोजनों की सूचना वाट्सऐप पर डालकर जिम्मेदार इतिश्री कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि कोई भी कार्यक्रम हो उसकी जानकारी फोन लगाकर दी जाएगी। यहां तक कि पैमाना भी तय किया गया है कि कौन किसको फोन लगाएगा। पार्टी का मानना है कि वरिष्ठों के लिए कार्यकर्ताओं में सम्मान का भाव जरूरी है। बैठकों का दौर आज खत्म भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक कसावट और कार्यकर्ताओं में परिवार भाव बनाए रखने के लिए हर माह विभिन्न स्तर की बैठकों का फॉर्मूला दिया है। 1 से 6 तारीख के बीच जिला, 7 से 11 मंडल और 11 से 15 मोर्चा-प्रकोष्ठ और 21 से 25 के बीच बूथों की बैठकें होंगी। इंदौर नगर में मंडल स्तर की बैठकों का दौर आज खत्म हो जाएगा। बड़ी बात ये है कि सभी मंडलों में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा व उनके कुछ प्रमुख पदाधिकारी जा रहे है। बैठकों में नगर से राष्ट्रीय पदाधिकारी, मोर्चा प्रकोष्ठ के नेता, मंडल अध्यक्ष से पदाधिकारी, मंडल व शक्ति केंद्र प्रभारी और वार्ड संयोजक व पालकों को बुलाया गया। बैठक में मंडल अध्यक्ष व उनकी टीम को निर्देश दिए गए कि अब बैठक हो या अन्य आयोजन की सूचना सोशल मीडिया यानी वाट्सऐप पर नहीं होगी। अब सभी को सूचना फोन लगाकर देना होगी। मंडल अध्यक्ष को नगर से ऊपर के पदाधिकारियों को फोन लगाएंगे तो अन्य पदाधिकारियों को भी ये काम दिया जाए। नगर अध्यक्ष मिश्रा का कहना था कि वाट्सऐप पर सूचना डालकर हम औपचारिकता पूरी नहीं करना है। फोन लगाने से संपर्क और आत्मीयता भी बढ़ेगी जो संगठन की मंशा है। कार्यकर्ताओं के बूते पर बंगाल की जीत कल लक्ष्मण सिंह गौड़ मंडल व भगत सिंह मंडल में बैठक हुई। विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि हमें अपने अपने बूथों पर प्रवास और समीक्षा करना चाहिए। आज पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत में बूथ के कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही है, इसलिए कार्यकर्ता मेरा बूथ – सबसे मजबूत के मंत्र के साथ काम करें। पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने कहा कि हमारे कार्यपद्धति के तीन मूलमंत्र रहे हैं प्रवास, संपर्क और संवाद। मंडल, शक्ति केन्द्रों और बूथों पर कार्यकर्ता इन मूल मंत्रों को लेकर जाए, जिससे संगठन और अधिक मजबूत हो। कार्यकर्ता के घर जाने का अभियान भाजपा संगठन ने कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और सक्रिय रहने का एक फॉर्मूला और दिया है। अब वार्ड स्तर पर टोली बनाई जाए जो मंडल अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी को लेकर कार्यकर्ताओं को घर मिलने भी जाए। मिश्रा ने कहा कि हम सिर्फ काम के समय ही जाते हैं जो ठीक नहीं है। हमको मालूम नहीं कि कार्यकर्ता किस परिस्थिति में रहकर काम कर रहा है।

हाईकोर्ट में सुरक्षित फैसला, प्राइमरी शिक्षक भर्ती की नई मेरिट लिस्ट बनेगी

जबलपुर  प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से फीसदी बोनस अंक दिए जाने के आरोप लगा है। बीते दिन इस मामले को लेकप मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि मामले में आरोप है कि बिना आवश्यक आरसीआई (RCI) सर्टिफिकेट के करीब 15 हजार उम्मीदवारों को बोनस अंक दे दिए गए, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भर्ती प्रक्रिया कुल 13,089 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसके बाद जारी की गई मेरिट लिस्ट को अब अदालत में चुनौती दी गई है। ये है पूरा मामला नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो उम्मीदवारों ने याचिका में कहा कि प्राइमरी स्कूल शिक्षक चयन परीक्षा 2025 भर्ती विज्ञापन के तहत केवल उन उम्मीदवारों को 5 फीसदी बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा है। चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त कर लिए हैं। भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया गया कि पूरे प्रदेश में आरसीआइ के पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। लगभग 15,000 उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है। याचिका में 27 फरवरी, 2026 को जारी दोषपूर्ण मेरिट लिस्ट को निरस्त करने की मांग की गई। केवल वैध आरसीआई प्रमाण-पत्र धारकों को ही बोनस अंक देकर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया। संचालनालय को संदेह लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18,000 उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। सुधार के लिए पोर्टल खोलने के बाद भी मंडल के द्वारा उम्मीदवारों से आरसीआई की पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया। इसके चलते बड़ी संख्या में फर्जी बोनस वाले अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट में आ गए। याचिका में 27 फरवरी 2026 को जारी मेरिट लिस्ट को रद्द करने की मांग की गई। भर्ती प्रकिया पर उठे सवाल इस पूरे विवाद नें शिक्षक भर्ती प्रकिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही सरकारी चय प्रणाली पर भी गंभीर सवार खड़े कर दिए गए हैं। हाइकोर्ट ने जो संकेत दिए हैं उससे लगता है कि मेरिट लिस्ट दोबारा से बनानी पडे़गी।

किरायेदार और मकान मालिक ध्यान दें: चंडीगढ़ में रेंट एग्रीमेंट जरूरी

चंडीगढ़  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासनिक और विनियामक ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय (MHA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत, केंद्र सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 का उपयोग करते हुए पड़ोसी राज्यों के पांच प्रमुख कानूनों को चंडीगढ़ में विस्तारित कर दिया है।  इन सुधारों का प्राथमिक उद्देश्य शहर में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है, जिससे वर्षों से चले आ रहे पुराने और अप्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का अंत होगा. इन बदलावों में सबसे प्रमुख 'असम किराएदारी अधिनियम, 2021' को अपनाना है, जिसने आजादी से पहले के 1949 के कानून की जगह ली है. अब चंडीगढ़ में रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होंगे और किरायेदारों को बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा मिलेगी, जिसे मकान मालिक किसी भी विवाद की स्थिति में काट नहीं सकेगा. यह नया ढांचा न केवल पारदर्शी है, बल्कि विवादों के समयबद्ध निपटारे का भी वादा करता है।  प्रशासनिक सुधारों की यह कड़ी केवल किराएदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और पारदर्शिता के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी छूती है, चंडीगढ़ में अब 'पंजाब मानव तस्करी रोकथाम अधिनियम' लागू हो गया है, जो विशेष रूप से उन 'डंकी रूट्स' और धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों पर नकेल कसेगा जो युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगते हैं. साथ ही, चंडीगढ़ नगर निगम की सिफारिश पर 1986 के पुराने दिल्ली फायर सेफ्टी नियमों को हटाकर 'हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट, 2022' को अपनाया गया है।  इससे अस्पतालों और ऊंची इमारतों के लिए फायर एनओसी (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल होगी और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा. इसके अतिरिक्त, संपत्ति के सही मूल्यांकन के लिए स्टैम्प ड्यूटी कानूनों में संशोधन और ग्रामीण क्षेत्रों के मालिकाना हक को औपचारिक रूप देने के लिए नए भूमि रिकॉर्ड कानून लागू किए गए हैं. सामूहिक रूप से, ये सभी उपाय चंडीगढ़ में एक जवाबदेह, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शासन की नई नींव रखेंगे। 

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन, ग्रामीण जीवन बदलने में समूह योजनाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल जीवन मिशन को गति, ग्रामीण जीवन में परिवर्तन का आधार बन रहीं समूह योजनाएं श्योपुर में सुदृढ़ जल अधोसंरचना का विस्तार, हर घर तक नल जल पहुंचाने की दिशा में हो रहे तेज प्रयास : मंत्री श्रीमती उइके भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में श्योपुर जिले में समूह जल प्रदाय योजनाएं तेजी से आकार ले रही हैं, जो दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इन योजनाओं के माध्यम से हर घर तक नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में व्यापक सुधार हो रहा है। श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना, बड़े स्तर पर जल आपूर्ति की सुदृढ़ व्यवस्था म.प्र. जल निगम मर्यादित द्वारा क्रियान्वित श्योपुर चंबल समूह जल प्रदाय योजना जिले की प्रमुख पेयजल परियोजनाओं में शामिल है। 782.11 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 377 गांवों को कवर करते हुए 8 लाख से अधिक आबादी को लाभान्वित करने की दिशा में कार्य कर रही है। योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे घर-घर जल उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित हो रही है। योजना में ग्राम बरोठा, जिला मुरैना में 90.51 एमएलडी क्षमता का इंटेक वेल तथा ग्राम श्यारदा, विकासखण्ड विजयपुर में 71.44 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र विकसित किया जा रहा है। साथ ही 86 उच्चस्तरीय टंकियों के निर्माण का कार्य निर्धारित है, जिनमें से कई पर कार्य प्रगति पर है। जल आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए विस्तृत पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसमें रॉ वाटर पंपिंग मेन, क्लीयर वाटर पंपिंग मेन तथा ग्रेविटी मेन के माध्यम से सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके अतिरिक्त एचडीपीई पाइप आधारित जल वितरण नेटवर्क गांवों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे प्रत्येक घर तक जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और चरणबद्ध तरीके से अधोसंरचना विकसित की जा रही है। मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना, ग्रामीण अंचलों के लिए प्रभावी समाधान श्योपुर जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत मूँझरी समूह जल प्रदाय योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 171.24 करोड़ रु. की लागत से विकसित यह योजना 120 गांवों को कवर करते हुए लगभग 1.70 लाख आबादी को लाभान्वित करने के उद्देश्य से क्रियान्वित की जा रही है। योजना में लगभग 10 हजार घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधे घर पर जल उपलब्ध हो सकेगा। योजना का जल स्रोत मूँझरी बांध है, जो क्षेत्र में स्थायी जल आपूर्ति का आधार बन रहा है। योजना के विभिन्न घटकों पर कार्य प्रगति पर है और अधोसंरचना निर्माण के साथ जल वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में योजना की भौतिक प्रगति 31.66 प्रतिशत तथा वित्तीय प्रगति 25.42 प्रतिशत है, जो इसके सुव्यवस्थित क्रियान्वयन को दर्शाती है। ग्रामीण जीवन में बदलाव का आधार बन रहीं योजनाएं श्योपुर जिले में इन समूह जल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन केवल पेयजल उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव का आधार बन रहा है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य स्तर में सुधार हो रहा है, महिलाओं और बच्चों को जल संग्रहण के श्रम से राहत मिल रही है और गांवों में समग्र विकास को गति मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक परिवार तक नल से जल पहुंचाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती उइके के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति की मजबूत और स्थायी व्यवस्था स्थापित हो सके।