samacharsecretary.com

तमिलनाडु विधानसभा में दिए बयान पर बढ़ी उदयिनिधि की कानूनी मुश्किलें

नई दिल्ली सनातन के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाले डीएमके विधायक और तमिलनाडु के नेता विपक्ष उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय के सामने विधानसभा में सनातन को खत्म करना ही होगा कहने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गौरतलब है कि कुछ साल पहले भी उदयनिधि ने सनातन पर इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी। हालांकि, इस बार टिप्पणी तमिलनाडु विधानसभा के भीतर की गई है। लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर करते हुए उदयनिधि द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने वाली टिप्पणी का जिक्र है। यह अर्जी एक अवमानना याचिका के तहत दाखिल की गई है। शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ मामले में दायर एक रिट याचिका से कनेक्ट है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह अवमानना याचिका अमिता सचदेवा नाम की वकील ने दायर की। अर्जी में क्या कहा गया? अर्जी में कहा गया है कि हेट स्पीच और इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेश के बाद भी पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। हालांकि, यह याचिका उनके पुराने बयान पर 29 अप्रैल को दायर की गई थी, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ बेंच ने स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन अब फिर से इसमें जोड़ा गया है कि तमिलनाडु विधानसभा की कार्रवाही के दौरान भी उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही है। सनातन वाले बयान पर उदयनिधि की आई सफाई इससे पहले, सितंबर, 2023 में एक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी और इसे खत्म किए जाने की बात कही थी। तब भी मामले पर काफी विवाद हुआ था और भाजपा समेत तमाम दलों के नेताओं ने हमला बोला था। हालांकि, अब तमिलनाडु वाली टिप्पणी पर उदयनिधि की सफाई आई है। उन्होंने कहा है कि हम किसी भी भगवान की आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि जाति के आधार पर जो भेदभाव होता आया है, उसका विरोध करते हैं। 'मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं' एक्स पर एक पोस्ट में, विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि ने कहा, "जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में बात की, तो मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए। कुछ लोग इस बात के लिए मेरी आलोचना करते हैं। मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही उभरा था। इस लिहाज से, मैं एक छोटी सी सफाई देना चाहूंगा।'' अपनी सफाई देते हुए उदयनिधि ने कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब धर्म या पूजा का विरोध नहीं समझा जाना चाहिए। जब मैं कहता हूं कि जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को भी मंदिर नहीं जाना चाहिए। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में, बल्कि समाज में भी।"

प्राचीन पर्वत श्रृंखला से जुड़े थे भारत और अंटार्कटिका, वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में बड़ा दावा

सियोल  भारत लाखों साल पहले अंटार्कटिका का हिस्सा हुआ करता था। वैज्ञानिकों ने एक नई स्टडी में पाया है कि लाखों साल पहले ये महाद्वीप एक-दूसरे से अलग हुए थे, उससे पहले भारत और अंटार्कटिका एक विशाल प्राचीन पर्वत श्रृंखला के जरिए आपस में जुड़े हुए थे। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम-सालूर इलाके की प्राचीन चट्टानों के अध्ययन से पता चलता है कि उनमें और पूर्वी अंटार्कटिका में पाई जाने वाली चट्टानों में काफी समानता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन नतीजों से इस बात की पुष्टि होती है कि पूर्वी भारत और अंटार्कटिका कभी एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे, जिसे रेनर ईस्टर्न घाट ओरोजेन कहा जाता है। यह रिसर्च भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने की है। उन्होंने ग्रैनुलाइट का अध्ययन किया, जो एक तरह की मेटामॉर्फिक चट्टानें हैं। ये पृथ्वी के बहुत अंदर बहुत ज्यादा गर्मी और दबाव में बनती हैं। ये चट्टानें उन घटनाओं के सुराग सहेजकर रखती हैं, जो अरबों साल पहले हुई थीं। प्राचीन खनिजों ने कहानी को सहेजा टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, कोलकाता की प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक और गणितीय विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर शंकर बोस ने बताया कि रिसर्च टीम ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का विश्लेषण करने के लिए खनिज परीक्षण की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। भूविज्ञान संकाय के एक सदस्य ने बताया कि जिरकॉन अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है। यह बहुत गर्मी और दबाव में टिका रहता है, जबकि दूसरे खनिज नष्ट हो जाते हैं। अपनी इसी मजबूत प्रकृति के कारण जिरकॉन इन चट्टानों के भीतर एक छोटे टाइम कैप्सूल की तरह काम करता है। जिरकॉन क्रिस्टल के भीतर यूरेनियम और लेड जैसे रेडियोधर्मी तत्वों के क्षय का अध्ययन किया गया। इससे उन घटनाओं की सटीक जानकारी मिली, जो करोड़ों से लेकर अरबों साल पहले पूर्वी घाट क्षेत्र में घटित हुई थीं। आंध्र प्रदेश और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानें वैज्ञानिकों ने पाया कि आंध्र प्रदेश और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों की उम्र, खनिजों की बनावट और रासायनिक विशेषताएं एक जैसी हैं। इन दोनों ही क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन प्रमुख चरणों के एक जैसे प्रमाण मिले हैं। बोस ने कहा कि विजयनगरम और सालुर की चट्टानों ने भूवैज्ञानिक इतिहास के उन्हीं तीन मुख्य चरणों को दर्ज किया है, जिनकी पहचान पहले ही पूर्वी अंटार्कटिका में की जा चुकी है। अध्ययन के अनुसार, पहला चरण 1,000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ था, जब एक बड़े महाद्वीपीय टकराव के दौरान चट्टानें 1,000 डिग्री सेल्सियस के करीब तापमान के संपर्क में आई थीं। इससे विशाल पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष के बीच हुआ, उसमें चट्टानों के अंदर अधिक गर्मी और संरचनात्मक परिवर्तन शामिल थे। आखिरी यानी तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिज समृद्ध तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से होकर गुजरे और एक विशिष्ट रासायनिक निशान छोड़ गए, जो भारत और अंटार्कटिका दोनों में हैं। गोंडवाना टूटने से भारत और अंटार्कटिका अलग हुए वैज्ञानिकों का मानना है कि गोंडवाना के टूटने से भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। ये दोनों भूभाग तब तक आपस में जुड़े रहे, जब तक कि 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले सुपरकॉन्टिनेंट गोंडवाना टूटना शुरू नहीं हो गया। जैसे-जैसे भारतीय प्लेट उत्तर की ओर एशिया की तरफ खिसकी और अंटार्कटिका दक्षिण की ओर बढ़ा, आपस में जुड़ी हुई पर्वत श्रृंखला टूटकर अलग हो गई। आज ये क्षेत्र हजारों किलोमीटर लंबे महासागर से अलग किए गए हैं लेकिन चट्टानें अभी भी अपने साझा भूवैज्ञानिक अतीत के प्रमाण सहेजकर रखे हुए हैं।  

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई रेल रफ्तार, इंदौर-बुधनी लाइन परियोजना से सफर होगा आसान

भोपाल  इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में मांगलिया रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक ओर यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज रफ्तार से चल रहा है तो दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया। पत्रिका न्यूज टुडे की टीम ने मौके पर काम का जायजा लेकर हकीकत जानी। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से होते नजर आए तो कई काम अधूरे दिखाई दिए। वर्तमान में यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है जो भविष्य में बड़ी सुविधा बन सकती है। टीम जब स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म और बीच के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं। पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई के लिए हब स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बायप्रोड क्ट्स की सह्रश्वलाई के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक कनेक्टिविटी और लोडिंग सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। 10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट इंदौर के इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रॉसिंग और 7 नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा। इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता मिला। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर बेस मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है, आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है। ये भी जानें- पहले कैसा था रूट     अभी इंदौर से भोपाल या जबलपुर जाने के लिए ट्रेनों को उज्जैन और सीहोर के साथ ही संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) होकर जाना पड़ताहै। ऐसे में इस घुमावदार रास्ते की दूरी भी बढ़ जाती है।     वहीं उज्जैन-भोपाल रूट पहले से ही दिल्ली – मुंबई और अन्य रूट की ट्रेनों के कारण बेहद व्यस्त रहता है, इससे गाड़ियां लेट होती हैं। इससे ट्रेन के संचालन में कम से कम 20-30 मिनट का समय बर्बाद होता था। अब क्या बदलेगा, कैसे बचेंगे 2 घंटे     इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट यानी नई रेल लाइन करीब 204 किमी लंबी है। इसके बनने से इंदौर सीधे भोपाल-जबलपुर की मुख्य रेल लाइन से जुड़ेगा।     इंदौर बुधनी और आगे भोपाल या जबलपुर जाने की दूरी 45 किमी तक कम हो जाएगी। इसके बाद सीधे-सीधे 2 घंटे का सफर कम किया जा सकेगा।     मांगलिया को महा जंक्शन बनाया जाना है। यानी ये अब छोटा स्टेशन नहीं रहेगा। बल्कि मालवा और महाकौशल को जोड़ने एक विशाल बिजनेस और लॉजिस्टिक हब बन जाएगा। यहां से पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई पूरे देशभर में तेजी से की जा सकेगी।     10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय व्यापार को पंख लग जाएंगे

तीन सीटों की जीत से उत्साहित बीजेपी का बड़ा प्लान, केरल में नया राजनीतिक एजेंडा जारी

केरल केरल विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा जारी किया है. पार्टी ने इस एजेंडे में पिछड़े हिंदू समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ अपने राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से तय करने पर जोर दिया है. यह राजनीतिक प्रस्ताव शनिवार को तिरुवनंतपुरम में हुई केरल बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में पारित किया गया. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने की. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 13 सूत्रीय एजेंडे में राज्य की क्रिश्चियन कम्युनिटी के बीच कोई स्पेशल आउटरीच प्रोग्राम चलाने का उल्लेख नहीं किया गया है. केरल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने चर्च और क्रिश्चियन कम्युनिटी के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश की थी. सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने क्रिश्चियन कम्युनिटी से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है, लेकिन चर्च नेतृत्व के साथ संस्थागत स्तर पर संबंध मजबूत करने की रणनीति से पीछे हट गई है. इसकी एक बड़ी वजह कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ चर्च नेतृत्व की बढ़ती राजनीतिक नजदीकी मानी जा रही है. इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 का चर्च द्वारा विरोध भी बीजेपी के लिए चुनावी अभियान में असहज स्थिति का कारण बना. बीजेपी ने अपने नए एजेंडे में ओबीसी आरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाया है. पार्टी का कहना है कि धर्म के आधार पर ओबीसी आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए और आरक्षण केवल ओबीसी, एससी, एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सीमित रहना चाहिए. पार्टी का आरोप है कि केरल में अल्पसंख्यक समुदाय का एक वर्ग ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ ले रहा है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए. राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी पिछड़ा वर्ग आरक्षण को धर्म आधारित आरक्षण में बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति 'सबके लिए न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं' है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि राज्य सरकार मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी के दबाव में तुष्टिकरण की राजनीति करती है तो बीजेपी उसका कड़ा विरोध करेगी. बीजेपी ने अपने 13 सूत्रीय एजेंडे में सबरीमला मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है. पार्टी ने सबरीमला गोल्ड लूट मामले में सीबीआई जांच की मांग की है और महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की है. इसके अलावा मंदिरों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों का ऑडिट कराने की मांग की गई है. पार्टी ने शिक्षा संस्थानों में निवेश बढ़ाने, बच्चों को धार्मिक कट्टरपंथी संगठनों, आतंकवादी संगठनों और नशे के प्रभाव से बचाने के लिए कदम उठाने की भी बात कही है. बीजेपी का दावा है कि केरल में अब एलडीएफ और यूडीएफ के अलावा तीसरा राजनीतिक विकल्प उभर चुका है और जनता ने उसे स्वीकार करना शुरू कर दिया है.   हालांकि चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में बीजेपी की सीटें बढ़ने के बावजूद उसके वोट शेयर में बड़ा उछाल नहीं आया. पार्टी को 2026 विधानसभा चुनाव में 11.42 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 2021 में उसे 11.30 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे. पार्टी का लक्ष्य 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर राज्य की बड़ी राजनीतिक ताकत बनने का था, लेकिन वह इससे काफी पीछे रह गई. हालांकि, इस केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपने लिए सकारात्मक पक्ष भी देख रही है. राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक राज्य की 21 सीटें ऐसी रहीं, ​जहां बीजेपी को 20 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, वहीं 10 ऐसी सीटें भी रहीं, जहां पार्टी को 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले.

हाई बीपी बना किडनी रोग का बड़ा कारण, युवाओं में तेजी से बढ़ रहा खतरा

 लखनऊ गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे करीब 80 फीसदी रोगी उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। राजधानी लखनऊ स्थित पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है। डेढ़ माह के दौरान ओपीडी में आए छह हजार मरीजों में से 4800 में उच्च रक्तचाप पाया गया। इनमें से अधिकांश को अपने बढ़े हुए रक्तचाप की जानकारी नहीं थी। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर बताया है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, जिससे रोगी अनजान रहते हैं। बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए आते हैं लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप गुर्दा रोग, दिल का दौरा और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ाता है। गुर्दे की बीमारी, थायराइड विकार और कुछ हार्मोन की अधिकता भी रक्तचाप बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। संस्थान के बाह्य रोगी विभाग में रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए आते हैं। डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि उच्च रक्तचाप के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। इससे गुर्दे की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और जानलेवा बीमारियों का जोखिम बढ़ता है। तनाव खराब कर रहा युवाओं की किडनी मड़ियांव निवासी एक 40 वर्षीय युवक की दोनों गुर्दे लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप के कारण खराब हो गए। वह अब हफ्ते में एक या दो बार डायलिसिस करवा रहा है। इसी तरह, अस्पतालों में 30 से 45 वर्ष तक के युवाओं में उच्च रक्तचाप के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस आयु वर्ग में कई लोगों में गुर्दे संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। ये हैं कारण गुर्दा रोग, हार्मोनल और थायराइड विकार, मोटापा, गर्भावस्था तथा बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं। बचाव के उपाय     रोजाना पांच ग्राम से ज्यादा नमक न खाएं और नियमित कसरत करें।     रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को काबू में रखें।     धूम्रपान व शराब से दूरी बनानी चाहिए। ओपीडी में आ रहे 40 फीसदी युवा केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत ने बताया कि पिछले पांच से दस वर्षों में युवाओं में हाइपरटेंशन के मामलों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। ओपीडी में रोज 150 मरीज आते हैं। इसमें से करीब 50 फीसदी से अधिक हाइपरटेंशन के मरीज होते हैं। इसमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज 25 से 40 वर्ष के बीच में होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें हाई बीपी है। धिक स्क्रीन टाइम से भी बढ़ रही बीपी डॉ. विश्वजीत ने बताया लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालिन ज्यादा रिलीज होते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज लगातार सिर दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखाई देना, थकान, बेचैनी और सीने में दर्द।

उत्तर भारत में भीषण लू का अलर्ट, 22 मई तक गर्मी से नहीं मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में आने वाले दिनों में भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 22 मई तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में लू से लेकर गंभीर लू (सीवियर हीटवेव) की स्थिति बनी रह सकती है। दिल्ली-NCR में 45 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले तीन दिनों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। रविवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। इसके बाद आसमान साफ रहने से गर्मी और बढ़ेगी और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। रात के समय भी गर्म हवाएं चलने और तापमान अधिक रहने से लोगों को राहत मिलने की संभावना कम है। क्या होती है हीटवेव? मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाए और सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या अधिक ऊपर चला जाए, तो उसे हीटवेव माना जाता है। यदि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाए, तो उसे सीधे लू की स्थिति माना जाता है, चाहे सामान्य तापमान से अंतर कितना भी हो। स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर तेज गर्मी और लू के कारण डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। गर्मी से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय     दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।     पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।     हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें।     बाहर निकलते समय टोपी, छाता या गमछे का इस्तेमाल करें।     बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। राहत के आसार नहीं मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।  

लखनऊ: एलडीए की एकमुश्त समाधान योजना में आवंटियों को मिली छूट, 11 लोग सम्मानित

लखनऊ राजधानी लखनऊ में एलडीए की एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) आवंटियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। शनिवार को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने ओटीएस के सफल आवेदकों को पारिजात सभागार में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस योजना का एक बड़ा लाभ सीतापुर रोड के आवंटी शिव प्रताप सिंह को मिला। समय पर भुगतान न होने के कारण चक्र वृद्धि और दंड ब्याज मिलाकर उनका बकाया 2.36 करोड़ रुपये हो गया था। ओटीएस में आवेदन करने पर उन्हें ब्याज माफी के साथ 37 लाख रुपये की सीधी छूट मिली। इसी तरह गोमती नगर की मंजू सोनी को 67 हजार रुपये और बसंत कुंज योजना की चेतना को 58 हजार रुपये की राहत मिली। सकारात्मक सहभागिता के लिए ऐसे 11 आवंटियों को सम्मानित किया गया। यह योजना 18 अप्रैल से शुरू हुई थी और 17 जुलाई तक चलेगी। अब तक 573 आवंटियों ने आवेदन किया है। इसके सापेक्ष 31.18 करोड़ रुपये की डिमांड जनरेट की गई है। वित्त नियंत्रक दीपक सिंह के अनुसार, प्राधिकरण भवन के कमेटी हॉल में विशेष हेल्प डेस्क बनाई गई है।  

बिहार बना 5जी का नया हब, गांव-गांव पहुंचा हाई-स्पीड इंटरनेट

पटना देश में 5जी नेटवर्क सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। खास बात यह है कि जिस बिहार को अक्सर विकास की दौड़ में पीछे बताया जाता है, वह 5जी कवरेज के मामले में देश के टेक हब कर्नाटक और बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी आगे है। बिहार में अब 94.52% आबादी 5जी नेटवर्क की पहुंच में आ चुकी है। जबकि राष्ट्रीय औसत 86.18 प्रतिशत है। देश के आईटी हब कर्नाटक में यह कवरेज सिर्फ 79.92% है, जबकि यूपी में 85.25 % लोग 5जी से जुड़ पाए हैं। बेंगलुरु दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के दफ्तर हैं। फिर भी वहां का ग्रामीण इलाका 5जी की रफ्तार से दूर है। बिहार में ग्रामीण इलाकों में 5जी सेवाओं पर हुआ काम बिहार में 5जी सेवाओं की बेहतर कवरेज की सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीकॉम कंपनियों ने बिहार में ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता दी, जबकि कर्नाटक में शहरी क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया। बिहार में कंपनियों और सरकार ने मिलकर गांव-गांव तक 5जी नेटवर्क पहुंचाने में कवायद की है। केन्द्र सरकार के भारत नेट परियोजना के तहत बिहार के लगभग 8,860 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है, जिस पर 812 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। योजना का मकसद हर गांव में तेज इंटरनेट पहुंचाना है। बिहार ने इसे सफलतापूर्वक अमल में लाया। इसका नतीजा है कि आज बिहार के दूरदराज के गांवों में बैठे लोग भी अब 5जी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूरसंचार दिवस का क्या है इतिहास यह दिवस पहली बार 1969 में मनाया गया था, जो 1865 में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में चुना गया। इसका उद्देश्य लोगों को दूरसंचार के महत्व, डिजिटल विभाजन को पाटने और नई तकनीकों के बारे में जागरूक करना है। यह दिन सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से दुनिया को जोड़ने और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश देता है। राष्ट्रीय राजमार्गों-ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बिहार में भले ही 5जी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। लेकिन नेटवर्क कनेक्विटी अब भी कई जगहों पर ठीक नहीं है। राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1750 किलोमीटर क्षेत्र में 424 स्थान ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल उपलब्ध नहीं है। इन जगहों पर टावरों के बीच की दूरी इतनी अधिक है कि नेटवर्क पहुंच ही नहीं पाता। दूरसंचार के मानक के अनुसार शहरी टावरों के बीच की दूरी 500 से 800 मीटर के बीच होनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर यह 1.5 से 2 किलोमीटर से भी अधिक है। गांवों में 3 से 5 किलोमीटर, जो 7 से 8 किलोमीटर तक भी है। इससे नेटवर्क की समस्या अब भी कई जगहों पर है। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया ट्राई ने नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जनवरी में इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट कराया। यह टेस्ट समस्तीपुर जिले में किया गया। सबसे बड़ी चिंता बीएसएनएल को लेकर सामने आई। बीएसएनएल से केवल 36.89% कॉल ही लग पाया, जबकि 10.04% कॉल ड्राप हो गई। एयरटेल और जियो ने 99% से अधिक कॉल सफलता दी। डाउनलोड स्पीड में भी बड़ा अंतर सामने आया। जियो ने 158 एमबीपीएस, एयरटेल ने 101 एमबीपीएस, जबकि बीएसएनएल का केवल 12 एमबीपीएस स्पीड रहा। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार सीवान, रोहतास, कैमूर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और सीमावर्ती इलाकों में टावरों के बीच अधिक दूरी है।

भोजशाला विवाद में बड़ा फैसल,अयोध्या जैसी बहस, हिंदू-मुस्लिम पक्ष के लिए क्या बदलेगा?

 नई दिल्ली मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इंदौर खंडपीठ ने अपने 242 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि 11वीं शताब्दी का यह परिसर मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने अब हिंदुओं को परिसर में प्रतिदिन पूजा का विशेष अधिकार देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने क्या कहा? जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और अभिलेख यह साबित करते हैं कि विवादित स्थल भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र था। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक संदर्भ यह स्थापित करते हैं कि यह क्षेत्र देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर और संस्कृत अध्ययन का केंद्र था। हिंदू पूजा की परंपरा समय-समय पर नियंत्रित जरूर हुई, लेकिन कभी समाप्त नहीं हुई।" बेंच ने 28 मार्च को स्वयं स्थल का निरीक्षण भी किया था। अदालत ने विवादित परिसर को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए कहा कि इसका प्रभाव 18 मार्च 1904 से माना जाएगा। ASI को फटकार हाईकोर्ट ने ASI की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एजेंसी ने अपने वैधानिक दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया और भोजशाला परिसर के संरक्षण में जानबूझकर लापरवाही बरती। कोर्ट ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को संरक्षित घोषित करने से पहले ASI की जिम्मेदारी होती है कि वह उस स्थल की मूल प्रकृति, स्वरूप और धार्मिक चरित्र का सही निर्धारण करे। केंद्र और ASI को क्या निर्देश दिए गए? अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर का प्रशासन और प्रबंधन संभालने का निर्देश दिया है। इसके मुताबिक, ASI को संरक्षण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के नियमन का पूर्ण अधिकार होगा। परिसर को संस्कृत अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि लंदन म्यूजियम में रखी गई देवी सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग पर विचार किया जाए। अयोध्या फैसले की झलक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों की व्याख्या अनुभव, ऐतिहासिक समझ और विवेकपूर्ण निर्णय के आधार पर की जानी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों का दायित्व है कि वे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों का संरक्षण करें और संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करें। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा इस मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी सहित मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दीं। MKWS के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका आरोप है कि अदालत ने जिन रिपोर्टों पर भरोसा किया, वे एकतरफा थीं। मुस्लिम पक्ष के वकील अशर वारसी ने कहा कि ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है। वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह परिसर 700 वर्षों से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को पलट देगा। जैन समुदाय के दावे पर अदालत की टिप्पणी मामले में जैन समुदाय ने भी दावा किया था कि यह स्थल मूल रूप से मध्यकालीन जैन मंदिर था। अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में जैन और हिंदू परंपराएं सदियों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन दोनों में समान आध्यात्मिक तत्व मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि खुदाई में जैन तीर्थंकर की प्रतिमा मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि दोनों परंपराओं की मूर्तियां अक्सर एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों में पाई जाती रही हैं। राजनीतिक प्रतिक्रिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत पाठशाला मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्ष 2003 में ASI ने व्यवस्था बनाई थी कि हिंदू मंगलवार को पूजा करेंगे और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। अब हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को खत्म करते हुए हिंदू पक्ष को दैनिक पूजा का अधिकार दे दिया है।  

अंकारा में बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन, माइकल रुबिन ने जताई भारत पर खतरे की आशंका

अंकारा तुर्की ने हाल ही में इस्तांबुल में रक्षा और एयरोस्पेस प्रदर्शनी में अपनी नई यिल्दिरिमहान इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का अनावरण किया है। मिसाइल का परीक्षण इस साल के आखिर में किया जाएगा। तुर्की का कहना है कि यह मिसाइल मैक 25 की गति से 3,000 किलोग्राम वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। तुर्की के दावे सही हैं तो यह मिसाइल यूरोप, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और भारत को निशाना बना सकती है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि यह भारत के लिए चिंता का सबब है क्योंकि तुर्की प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन ने पश्चिम एशिया से आगे बढ़ते हुए कश्मीरी अलगाववादी आंदोलन को अपना मुद्दा बना लिया है। विदेश नीति के जानकार माइकल रुबिन ने संडे गार्डियन में अपने लेख में कहा है कि भारतीय अधिकारियों को तुर्की से यह सवाल पूछना चाहिए कि उनको इतनी लंबी मारक क्षमता की मिसाइल की जरूरत क्यों है। तुर्की के प्रतिद्वंद्वी- ग्रीस, साइप्रस, इजरायल, मिस्र, आर्मेनिया और ईरान तो पहले ही उसकी टायफून मिसाइलों की मारक सीमा के भीतर आते हैं। तुर्की को क्यों है मिसाइल की जरूरत रुबिन का कहना है कि अपनी सीमाओं के पास हमला करने के लिए ICBM विकसित नहीं की जाती है। इस बात की संभावना नहीं है कि तुर्की को आइसलैंड या इंडोनेशिया पर हमले की जरूरत पड़ेगी। नाटो सदस्य होने के नाते तुर्की को रूस का मुकाबला करने के लिए अपनी खुद की लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में भारत ही तुर्की का संभावित लक्ष्य बचता है। रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस्तांबुल मेयर और तुर्की के राष्ट्रपति के तौर पर खुद को 'इस्लामी शासन' को बढ़ावा देने वाले के तौर पर पेश किया है। वह खुद को शरिया का सेवक बता चुके हैं। तुर्की में मजबूत होने के बाद से एर्दोगन ने दुनिया में अपनी महत्वाकांक्षा दिखाई है। उन्होंने ना सिर्फ पश्चिम एशिया में पैर फैलाए हैं बल्कि एशिया पर भी नजर जमा रखी ह कश्मीर पर एर्दोगन की नजर! रुबिन का दावा है कि एर्दोगन की इस्लामी महत्वाकांक्षा पश्चिम एशिया से आगे बढ़ते हुए कश्मीरी अलगाववादी आंदोलन तक आ गई हैं। उनका मानना है कि कश्मीरी में अलगाववाद और आतंकवाद जायज है। साल 2020 में एर्दोगन ने जोर देकर कहा था कि कश्मीर हमारे लिए उतना ही नजदीक है जितना तुर्की हमारे लिए है। एर्दोगन ने कश्मीर को एक ज्वलंत मुद्दा बताया है। तुर्की ने कश्मीरी छात्रों को स्कॉलरशिप देना बढ़ा दिया है ताकि उन्हें तुर्की-शैली के इस्लामी विचारों में ढाला जा सके और शायद उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी दिया जा सके। एर्दोगन जिस तरह से नव-ओटोमनवाद को बढ़ावा देते हैं, उसी तरह वे इसमें विश्वास रखते हैं कि भारत पर मुसलमानों का शासन होना चाहिए। पाकिस्तान के जरिए भारत पर निशाना हालिया समय में कश्मीर को लेकर तुर्की के बयानों में नरमी देखी गई है। इसे किसी बड़े तूफान से पहले की शांति भी कहा जा सकता है। तुर्की शायद भारत पर सीधे हमला ना करे लेकिन वह पाकिस्तान की रक्षा और कश्मीर से जुड़े आतंकी गुटों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए अपनी मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।