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तलाक की अफवाहों पर भड़कीं भारती सिंह, हर्ष लिम्बाचिया के साथ रिश्ते पर दिया बड़ा बयान

 मशहूर कॉमेडी क्वीन भारती सिंह हमेशा अपने जोक्स और मजेदार अंदाज से सबको हंसाती हैं. लेकिन हाल ही में इंटरनेट पर ऐसी खबरें सामने आईं, जिनमें दावा किया गया कि भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिम्बाचिया के बीच अनबन चल रही है और दोनों का तलाक होने वाला है. जैसे ही यह अफवाहें तेजी से फैलने लगीं, भारती सिंह ने अपने यूट्यूब व्लॉग के जरिए खुद सामने आकर सच बताया. “हम दोनों के बीच में दरारें आने लगी हैं” अपने व्लॉग की शुरुआत में भारती ने मजाकिया अंदाज में वही बातें कही जो अफवाहों में चल रही थीं. उन्होंने कहा, “दोस्तों, मैं अब हर्ष के साथ नहीं रह सकती क्योंकि हमारे बीच दरारें आने लगी हैं, इरिटेशन होने लगी है और बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो हर्ष बर्दाश्त नहीं कर पाते.” उन्होंने आगे कहा कि ऐसी बातें की जा रही हैं कि हमारे रिश्ते में दरार पड़ गई है और हम अलग हो रहे हैं. “हम बिल्कुल भी अलग नहीं हो सकते” इसके बाद भारती ने साफ किया कि यह सारी खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा, “ऐसी बहुत सारी घटिया न्यूज आ रही हैं जो बिल्कुल गलत हैं. हम दोनों कभी अलग नहीं हो सकते, शायद मर कर भी नहीं.” उन्होंने फैंस को भरोसा दिलाया कि उनके और हर्ष के रिश्ते में किसी तरह की कोई समस्या नहीं है. अफवाह फैलाने वालों पर तंज भारती सिंह ने फेक न्यूज फैलाने वालों पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा, “ये जो न्यूज होती है, वो सुनने में बहुत मजा आता है कि भारती और हर्ष के बीच पड़ी दरार, उनके रिश्ते में आई खटास! हमारे घर में नींबू अच्छे नहीं आ रहे हैं और खटास? व्लॉग में कई बोली गई चीजें होती हैं जो पोर्टल उठा लेते हैं.” “कहीं आप कपिल शर्मा से आगे न निकल जाओ” आखिर में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “आप लोग बहुत फनी हो, मुझे लगता है कि कहीं इन सबसे आप लोग भारती सिंह और कपिल शर्मा से आगे न निकल जाओ.” उनका मतलब था कि जितनी मनगढ़ंत और मजेदार कहानियां ये लोग बनाते हैं, उतने तो हम कॉमेडियन भी नहीं सोच पाते. भारती और हर्ष की प्यारी फैमिली भारती और हर्ष की मुलाकात टीवी शो ‘कॉमेडी सर्कस’ के दौरान हुई थी. हर्ष वहां भारती के लिए स्क्रिप्ट लिखते थे. धीरे-धीरे दोनों दोस्त बने और फिर दोनों को प्यार हो गया. साल 2017 में दोनों ने गोवा में धूमधाम से शादी की थी. आज उनके दो प्यारे बेटे हैं, बड़ा बेटा लक्ष्य (गोला) जिसका जन्म 2022 में हुआ था और छोटा बेटा यशवीर जिसका जन्म साल 2025 में हुआ है. दोनों आज एक बहुत ही खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं.

तेज हवाएं और बारिश बढ़ाएंगी परेशानी, छत्तीसगढ़ में 48 घंटे का मौसम अलर्ट जारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। भीषण गर्मी और उमस के बीच अब प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज आंधी और गरज-चमक का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी और विदर्भ क्षेत्र में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम का असर प्रदेश के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इस बदलाव से तापमान में गिरावट और मौसम में नमी बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। कई जिलों में हुई झमाझम बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान रायपुर, बस्तर, दुर्ग, महासमुंद और आसपास के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। राजधानी रायपुर में शनिवार को 62.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि बस्तर संभाग के कई इलाकों में भी जोरदार बारिश हुई। बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। दिनभर बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से मौसम सुहावना बना रहा। ग्रामीण इलाकों में किसानों ने भी इस बारिश को राहत भरी बताया है। बिलासपुर सबसे गर्म, रायपुर में तापमान गिरा मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं राजधानी रायपुर में न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और बादलों की सक्रियता के कारण अगले कुछ दिनों तक तापमान में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इन मौसम प्रणालियों का दिख रहा असर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और तमिलनाडु के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसके अलावा पश्चिम विदर्भ से मन्नार की खाड़ी तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो लगातार नमी को मध्य भारत और छत्तीसगढ़ की ओर खींच रही है। इसी वजह से प्रदेश में बादलों का घना जमाव, गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। अगले दो दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवाएं, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी। विभाग के अनुसार इस दौरान मौसम अचानक बदल सकता है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से लोगों को खुले क्षेत्रों, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस दौरान बिजली गिरने का खतरा अधिक रहता है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम? राजधानी रायपुर में सोमवार को आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक दिनभर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवा चल सकती है। रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। शाम के समय मौसम में  बदलाव देखने को मिल सकता है। किसानों के लिए राहत, लेकिन सतर्कता जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश गर्मी से राहत देने के साथ-साथ खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचें और बिजली कड़कने के समय सुरक्षित स्थानों पर रहें। मौसम विभाग की अपील मौसम विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि बिजली चमकने के समय खुले स्थानों में न रहें, और पेड़ों तथा बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। तेज बारिश और आंधी के दौरान सुरक्षित जगहों पर शरण लेने की सलाह दी गई है, साथ ही मौसम से जुड़े ताज़ा अपडेट पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। विभाग के अनुसार, प्रदेश में यह बदला हुआ मौसम आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

महिला सुरक्षा से कुपोषण तक एक्शन प्लान तैयार, बस्तर बैठक में शाह ने दिए बड़े निर्देश

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जगदलपुर में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी।  बैठक में राज्यों के विकास के साथ-साथ गंभीर सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में चारों राज्यों में अपराध नियंत्रण, विशेषकर महिलाओं के उत्पीड़न और रेप जैसे मामलों पर जल्द फैसले लेने पर चर्चा की गई। विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर चर्चा मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रहा। बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक खत्म होने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजरें टिकी हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना भविष्य का विजन और बड़ा रोडमैप देश के सामने रखेगी। इसके जरिए सरकार यह साफ संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब केवल संघर्ष या नक्सलवाद की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में यह अंचल पर्यटन, निवेश, तेज विकास और बड़ी प्रशासनिक गतिविधियों के एक नए और मजबूत केंद्र के रूप में उभरेगा, जिसकी शुरुआत इस सफल बैठक से हो चुकी है। वर्चुअल हो सकती थी बैठक- दीपक बैज बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने तंज कसा। बैज के मुताबिक एक तरफ प्रधानमंत्री देश से पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम करने का आह्वान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृहमंत्री और मुख्यमंत्री उनकी बातों को हवा में उड़ा रहे हैं। जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सचिवालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हाईटेक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, तो इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।

Stray Dogs मामले में SC का बड़ा फैसला, बच्चों और मरीजों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है. Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश को बरकरार रखा है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।  मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरे तंत्र का उद्देश्य प्रभावित हुआ।  सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी आज की सुनवाई में सबसे जरूरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 21 के तहत जिंदगी और आजादी के अधिकार में हर नागरिक का यह अधिकार शामिल है कि वह बिना किसी शारीरिक हमले के लगातार डर या सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के खतरे के आजादी से घूम सके और सार्वजनिक जगहों तक पहुंच बना सके।  बेंच ने आगे कहा, 'राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता, जहां ह्यूमन लाइफ के लिए ऐसे खतरे, जिन्हें रोका जा सकता है. ऐसी घटनाएं उन वैधानिक तंत्रों के बावजूद बढ़ती जा रही हैं, जिन्हें विशेष रूप से इन खतरों से निपटने के लिए ही बनाया गया है।  बता दें कि आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को स्वत संज्ञान लिया था.  सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश भी दिया था और इस मामले में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, भारत सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), कुत्तों से प्यार करने वाले लोगों, कुत्तों के काटने से पीड़ित लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, अब मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।  नवंबर 2025 में क्या हुआ? पिछले साल कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर में ले जाएं. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वो मिले थे।  कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगा दी थी, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई थीं  अदालत का फैसला आने के बाद डॉग लवर्स और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ ने इस आदेशों को वापस लेने के लिए याचिकाएं दायर कीं. इनमें से कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने जनवरी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  राज्‍य सरकारों पर तीखी टिप्‍पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं और बढ़ती शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करने का दबाव बढ़ गया है। 

सत्ता का सेमीफाइनल बने निकाय चुनाव, 105 नगर निकायों में पार्टियां झोंकेंगी पूरी ताकत

चंडीगढ़  पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनाव सूबे में सियासी दलों की नब्ज टटोलेंगे। 105 नगर निकायों (नगर निगम, नगर परिषद व नगर पंचायत) के यह चुनाव पंजाब के कुल 117 में से 90 विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे। इन हलकों के शहरी इलाकों के मतदाताओं पर किस दल की कितनी पकड़ है, चुनाव परिणाम के बाद यह तय हो जाएगा।  दरअसल, सभी राजनीतिक दल इन निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखते हुए मैदान में उतरेंगे और जीत के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे, क्योंकि आठ महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से अधिक शहरी मतदाताओं और 90 हलकों की सियासत पर केंद्रित हैं। नामांकन प्रक्रिया खत्म चुनावी प्रक्रिया के तहत नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और अब दलों के जो मतदाता मैदान में हैं, उन्हें जितवाने के लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने अपना काम शुरू कर दिया है। इस दौरान पिछले चुनावों की समीक्षा की जा रही है, तो वहीं वार्डवार मुद्दों की जमीन भी तैयार की जा रही है, क्योंकि कुछ कॉमन मुद्दों के साथ-साथ हर वार्ड के अलग-अलग मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाना है। हालांकि भाजपा और आप अपनी केंद्र व प्रदेश स्तरीय नीतियों व एजेंडे को भी आगे रखेंगी, वहीं कांग्रेस और शिअद के निशाने पर आप सरकार रहेगी। सूबे में शहरी मतदाता अहम क्यों पंजाब में राजनीतिक दलों के लिए शहरी वोटर बहुत अहम माने जाते हैं, खासकर उन सियासी दलों के लिए जिनकी सियासत पंथक एजेंडे से ऊपर सूबे के विकास के इर्द-गिर्द घूमती है। भाजपा इन चुनावों को इसलिए खासा गंभीरता से ले रही है, क्योंकि अधिकतर गैर-सिख आबादी शहरों में ही बसती है, जिसे पंजाब में भाजपा अपनी ताकत मानती है। हालांकि भाजपा ने पिछले दिनों कुछ सिख व पंथक नेताओं को पार्टी में शामिल कर अपना फोकस सिख वोटरों पर भी बढ़ाया है, लेकिन पार्टी का मुख्य सियासी केंद्र गैर-सिख वोटर ही हैं। इसी तरह पंथक पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की स्थिति ग्रामीण सिख वोटरों के बीच ठीक है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस की बात करें तो ये दोनों दल शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी अच्छी पैठ रखते हैं। आप इस वक्त सत्तारूढ़ है, जबकि कांग्रेस विभिन्न धड़ों में बंटी हुई है। मतदाताओं का आशीर्वाद बढ़ाएगा मनोबल निकाय चुनाव में यह बात तो जाहिर है कि जिस दल को मतदाता जीत का आशीर्वाद देंगे, आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसका मनोबल बढ़ेगा। आप के लिए परिणाम यह भी तय करेंगे कि कहीं प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर तो नहीं है, जबकि भाजपा को यह मालूम चल जाएगा कि पंजाब जीतने के लिए उनके प्रयासों और पार्टी की रणनीति को कितनी मजबूती मिली है। कांग्रेस यदि धड़ेबाजी में बंटी रही तो यह चुनाव पार्टी को एक और सबक देंगे, जबकि शिअद को इस बात का आभास हो जाएगा कि शहरी और गैर-सिख मतदाताओं में उनकी पहुंच कितनी है। 

अमरोहा में मुठभेड़ के बाद अपहृत युवक बरामद, दो बदमाश गोली लगने से घायल

अमरोहा यूपी के अमरोहा में रजबपुर पुलिस ने रविवार रात कालाखेड़ा के जंगल में हुई मुठभेड़ के बाद तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से दो दिन पूर्व अगवा किए गए युवक दीपांशु को सकुशल बरामद किया है। घेराबंदी के दौरान बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गए। पकड़े गए बदमाशों ने युवक को असली नोटों के बदले तीन गुना नकली करेंसी देने के जाल में फंसाकर अगवा किया था और परिजनों से पांच लाख रुपये की फिरौती मांग रहे थे। एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि शनिवार शाम रजबपुर क्षेत्र से मुस्तफापुर नवादा निवासी दीपांशु का अपहरण हुआ था। रविवार रात पुलिस को आरोपियों की लोकेशन कालाखेड़ा के जंगल में मिली। पुलिस की जवाबी फायरिंग में विजेंद्र सिंह प्रजापति और धर्मेंद्र घायल हो गए, जबकि उनके तीसरे साथी योगेश पाल को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। गिरोह का चौथा सदस्य झम्मन फरार है। पुलिस ने मौके से घटना में प्रयुक्त कार, दो तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में अपहरण की जो वजह सामने आई वह चौंकाने वाली है। मुख्य आरोपी धर्मेंद्र ने दीपांशु को झांसा दिया था कि उसके पास ऐसे नकली नोट हैं जिन्हें बाजार में कोई नहीं पकड़ सकता। यकीन दिलाने के लिए उसने दीपांशु को 500-500 के तीन असली नोट दिए और उन्हें नकली बताया। शनिवार को धर्मेंद्र ने उसे एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देने का लालच देकर रजबपुर बुलाया और वहीं से उसे अगवा कर लिया। अपहरण के बाद रात भर पी शराब दो गाड़ियां बदलकर घूमते रहे अपहरण के बाद बदमाश दीपांशु को लेकर रातभर घूमते रहे। पुलिस को चकमा देने के लिए उन्होंने रास्ते में गाड़ी बदली और बोलेरो की जगह फ्रोंक्स कार का इस्तेमाल किया। आरोपियों के पास नकदी खत्म हुई तो उन्होंने दीपांशु के गाजियाबाद निवासी दोस्त को डरा-धमकाकर पांच हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने इन पैसों से रातभर शराब पी और उसका भुगतान दीपांशु के ही मोबाइल से किया। फिलहाल पुलिस फरार चौथे आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है। बरेली और बिजनौर के लोग बन चुके थे शिकार मुठभेड़ में गिरफ्तार तीन बदमाशों का फिलहाल कोई अपराधिक रिकार्ड सामने नहीं आया है हालांकि पूछताछ के दौरान तीनों ने इसके पहले बरेली व बिजनौर में दो-तीन युवाओं से एक-दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करना स्वीकार किया है। पुलिस के मुताबिक नकली नोटों का लालच देकर ये गिरोह युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। रकम लेने के बाद नकली नोट देने के लिए समय ले लेते थे और बाद में पूरी रकम हड़प कर लेते थे। क्योंकि, मामला नकली नोटों से जुड़ा होता था लिहाजा पीड़ित शिकायत लेकर पुलिस तक जाने में झिझकते थे। इसी बीच इन लोगों ने अब दिपांशु को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया लेकिन उसने एक लाख रुपये देने से पहले तीन लाख रुपये मांग लिए। इसी जिद पर बात बिगड़ गई। करीब 15 मिनट तक चली बहस के बाद बोलेरो सवार लोगों ने पैसे हड़पने के लिए दिपांशु को अगवा कर लिया। बताया जा रहा है कि फरार आरोपी झम्मन गाजियाबाद में ठेकेदारी करता है। इस काम को अंजाम देने के लिए धर्मेंद्र ने उसकी बोलेरो ली थी लेकिन दिपांशु के अपहरण के बाद जब काफी देर तक फिरौती मिलने की बात नहीं बनी तो झम्मन भांप गया कि पुलिस उनके पीछे पड़ चुकी है लिहाजा मां की तबियत खराब होने का बहाना किया और अपनी बोलेरो ले गया।

आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ सेट फोटो वायरल, AI या असली?

बॉलीवुड एक्ट्रेसेस आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. दावा किया जा रहा है कि यह फोटो कॉमेडियन समय रैना के मशहूर शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ सीजन 2 के सेट की है, जहां दोनों जज की कुर्सी पर बैठी दिख रही हैं. दरअसल, पिछले महीने ही समय रैना ने अपने स्टैंड-अप स्पेशल ‘स्टिल अलाइव’ के दौरान  इस शो के दूसरे सीजन का ऐलान किया था, जिसके बाद से फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अब दोनों एक्ट्रेस की इस वायरल तस्वीर ने इस खास एपिसोड को लेकर दर्शकों का उत्साह बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है. जज की कुर्सी पर नजर आईं आलिया और शरवरी वायरल हो रही इस लीक फोटो में शो के जजों के साथ बॉलीवुड स्टार आलिया भट्ट और शरवरी वाघ दिखाई दे रहे हैं. इस फोटो को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स तुरंत अंदाजा लगाने लगे हैं कि दोनों एक्ट्रेसेस यहां अपनी आने वाली स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ का प्रमोशन करने पहुंची हैं. हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह तस्वीर असली नहीं है, बल्कि इसे एआई की मदद से तैयार किया गया है. इसके अलावा, तेज नजर रखने वाले फैंस ने शो के लोगो पर लगी हथकड़ी और सेट पर रखी नींबू-मिर्ची को भी पहचान लिया है. किस वजह से बंद करना पड़ा था पहला सीजन दरअसल, साल 2025 में इस शो के एक एपिसोड में मशहूर पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया बतौर गेस्ट जज बनकर आए थे. उन्होंने शो के दौरान एक कंटेस्टेंट से बेहद अजीब और अश्लील सवाल पूछ लिया था. इस बयान के बाद पूरे देश में बहुत बड़ा बवाल खड़ा हो गया था. रणवीर अल्लाहबादिया पर अश्लीलता फैलाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई थी. यह मामला मुंबई पुलिस कमिश्नर और राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया था, जिसके बाद रणवीर, अपूर्वा मखीजा और समय रैना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इसी कानूनी कार्रवाई और हंगामे की वजह से समय रैना को अपने यूट्यूब चैनल से इस शो के सारे एपिसोड डिलीट करने पड़े थे.

‘नशे पर लगाम, देश को सलाम’ अभियान के तहत दो अंतर-राज्यीय शराब सप्लायर गिरफ्तार

नई दिल्ली  द्वारका जिला पुलिस ने नशीले पदार्थों और अवैध शराब पर सख्ती करते हुए नया अभियान 'नशे पर लगाम, देश को सलाम' शुरू किया है। अभियान के तहत स्पेशल स्टाफ और एंटी-नारकोटिक्स सेल की टीमों ने संयुक्त कार्रवाई कर दो अंतर-राज्यीय अवैध शराब सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से 3850 क्वार्टर अवैध शराब बरामद की है और दो कारें भी जब्त कर ली हैं। 8 मई को द्वारका जिला पुलिस की टीमों ने दो अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। नजफगढ़ थाना क्षेत्र में यूईआर दीचाऊं डिपो के पास कार से धर्मेंद्र (25 वर्ष, निवासी रोहतक, हरियाणा) को गिरफ्तार किया गया। उसकी कार से 2500 क्वार्टर अवैध शराब बरामद हुई। दूसरी कार्रवाई साईं बाबा मंदिर के पास हुई, जहां अमन (22 वर्ष, निवासी झिलमिल, शाहदरा) को एक कार के साथ 1350 क्वार्टर अवैध शराब के साथ पकड़ा गया। दोनों मामलों में नजफगढ़ पुलिस स्टेशन में दिल्ली आबकारी अधिनियम की धारा 33/38/58 (डी) के तहत अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। नशे पर वार द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह (आईपीएस) के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में अवैध शराब और नशीले पदार्थों की सप्लाई को पूरी तरह रोकना है। डीसीपी ने अपनी टीमों को सख्त निर्देश दिए हैं कि युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज को इस सामाजिक बुराई से मुक्त करने के लिए लगातार अभियान चलाए जाएं। पूछताछ में हुआ खुलासा कार्रवाई इंस्पेक्टर कमलेश कुमार के नेतृत्व में की गई। टीम में हेड कांस्टेबल प्रदीप, सुधीर, जयराम, जितेंद्र यादव, जयभगवान, विकास, गोपाल यादव और अन्य जवान शामिल थे। पूरे ऑपरेशन की देखरेख एसीपी (ऑपरेशंस) सुभाष मलिक ने की। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अवैध शराब को दिल्ली और आसपास के इलाकों में सप्लाई करने की बात स्वीकार की। अमन ने बताया कि माता-पिता के देहांत के बाद आसानी से पैसे कमाने के लिए वह इस धंधे में शामिल हो गया था। नशे पर सख्ती द्वारका जिला पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह अभियान लगातार चलेगा और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।  

बेटी बचाओ अभियान में ढिलाई पर बड़ा एक्शन, स्वास्थ्य विभाग ने 4 अधिकारियों को निलंबित किया

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने प्रदेश में गिरते लिंगानुपात और अवैध भ्रूण लिंग जांच के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में लापरवाही बरतने के आरोप में चार चिकित्सा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने सोमवार को यह कार्रवाई की। निलंबित अधिकारियों में सोनीपत के सीएचसी पुरखास की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. टीना आनंद, यमुनानगर के सीएचसी रादौर के एसएमओ डॉ. विजय परमार, रोहतक के सीएचसी चिड़ी के एसएमओ डॉ. सतपाल और नारनौल के सीएचसी सेहलंग की मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रभा शामिल हैं। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान इन अधिकारियों को क्रमशः रोहतक, अंबाला, झज्जर और रेवाड़ी के सिविल सर्जन कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इनके खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया और उन्होंने राज्य में लिंगानुपात सुधारने से जुड़ी योजनाओं की प्रभावी निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार पिछले कुछ महीनों से अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चला रही है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत लगातार छापेमारी, निगरानी और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार लाया जा सके और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। ये अधिकारी हुए सस्पेंड एसीएम सुमिता मिश्रा द्वारा जारी निलंबन आदेश के तहत जिन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं: SMO डॉ. टीना आनंद SMO विजय परमार SMO सतपाल MO प्रभा

डब्ल्यूएफआई विवाद के बीच विनेश फोगाट मामला कोर्ट में, नोटिस पर 6 जुलाई तक फैसला

 नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग को लेकर पहलवान विनेश फोगाट को तुरंत शामिल होने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि दूसरे पक्ष (डब्ल्यूएफआई) को सुने बिना उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में भाग लेने की अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति ने मामले की सुनवाई करते हुए डब्ल्यूएफआई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। डब्ल्यूएफआई को मिले निर्देश अदालत ने डब्ल्यूएफआई को निर्देश दिया कि विनेश को जारी कारण बताओ नोटिस पर छह जुलाई तक निर्णय लेकर उसे रिकार्ड पर पेश किया जाए। कोर्ट ने विनेश को कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब दाखिल करने की भी अनुमति दी। सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मातृत्व अवकाश पर गई महिला खिलाड़ियों की रैंकिंग और स्थिति सुरक्षित रखी जाती है, लेकिन डब्ल्यूएफआई की नई नीति के तहत उन्हें ट्रायल से बाहर कर दिया गया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि विनेश को एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाए। इस पर अदालत ने कहा कि आपको पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। दूसरे पक्ष को सुने बिना अदालत ऐसी राहत कैसे दे सकती है, मामले में प्रतिस्पर्धी हित हैं। एक तरफ आपका पक्ष है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय हित भी जुड़ा हुआ है। जो दिख रहा है उससे कहीं अधिक है विनेश की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि नौ मई को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और अगले ही दिन गोंडा में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया गया। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक है। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह जुलाई को तय की है। डब्ल्यूएफआई ने विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित किया है। डब्ल्यूएफआई का कहना है कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों पर एंटी-डोपिंग नियमों के तहत छह माह की अनिवार्य नोटिस अवधि लागू होती है। हालांकि, प्रतिबंध के बावजूद विनेश गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में पहुंची थीं।