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MINI India का नया धमाका! Cooper S JCW GP Inspired Edition हुई लॉन्च, फीचर्स ने खींचा ध्यान

मुंबई  प्रीमियम हैचबैक निर्माता कंपनी MINI India ने इस महीने की शुरुआत में अपनी MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन की बुकिंग शुरू की थी, और अब कंपनी ने इस कार को भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस स्पेशल ए़डिशन को 58.90 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है।  भारतीय बाज़ार के लिए इस कार की सिर्फ़ 30 यूनिट्स ही सीमित रखी गई हैं. यह स्पेशल एडिशन MINI GP से इंस्पायर्ड है और विक्ट्री एडिशन के बाद MINI Cooper S पर बेस्ड दूसरा स्पेशल एडिशन है, जिसे भारतीय बाजार में पेश किया गया है।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का डिजाइन GP इंस्पायर्ड एडिशन को एक्सक्लूसिव लेजेंड ग्रे एक्सटीरियर शेड में फिनिश किया गया है, जिसके कंट्रास्ट में चिली रेड रूफ और मिरर कैप्स हैं. इसमें GP-इंस्पायर्ड बोनट और साइड स्ट्राइप्स भी हैं, जो रेड और ग्रे कलर में फिनिश किए गए हैं, और कार के C-पिलर पर '1/30' बैजिंग है।  MINI ने John Cooper Works के लिए कई खास कॉस्मेटिक चीज़ें भी जोड़ी हैं, जिसमें स्पॉइलर एक्सटेंशन, फ्रंट और रियर विंगलेट, साइड स्कर्ट और रियर डिफ्यूज़र शामिल हैं. इसके अलावा, हैचबैक में 17-इंच के JCW स्प्रिंट स्पोक अलॉय व्हील हैं, जिन्हें चिली रेड कलर में फिनिश किए गए GP-इंस्पायर्ड व्हील हब कैप के साथ जोड़ा गया है।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंटीरियर कार के इंटीरियर की बात करें तो, केबिन में इस एडिशन के लिए कई खास एलिमेंट्स दिए गए हैं. इनमें इल्यूमिनेटेड GP-इंस्पायर्ड डोर सिल्स, '1/30' फ्लोर मैट और JCW-स्पेसिफिक डोर लॉक पिन दिए गए हैं।  कंपनी ने इस हैचबैक में वेस्किन और कॉर्ड अपहोल्स्ट्री कॉम्बिनेशन में फिनिश की गई JCW स्पोर्ट सीट्स, JCW डैशबोर्ड ट्रिम और पैडल शिफ्टर्स के साथ एक नया JCW स्टीयरिंग व्हील दिए गए हैं।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन के फीचर्स फीचर्स की बात करें तो, स्पेशल एडिशन में 9.4-इंच का सर्कुलर OLED टचस्क्रीन, एक हेड-अप डिस्प्ले, एक हारमन कार्डन साउंड सिस्टम, वायरलेस एप्पल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो और कनेक्टेड कार टेक जैसे फीचर्स मिलते हैं. वहीं, सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कार में कई एयरबैग, ABS, डायनामिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग और एक रियर-व्यू कैमरा मिलते हैं।  MINI Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन का इंजन Cooper S JCW GP इंस्पायर्ड एडिशन में 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 204 hp का पावर और 300 Nm का टॉर्क देता है. इसे 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है. इस इंजन की बदौलत यह हैचबैक 6.6 सेकंड में 0-100 kmph की स्पीड पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 242 kmph बताई गई है। 

KKR ने मुंबई इंडियंस को रौंदा, ईडन गार्डन्स में मिली दमदार जीत

नई दिल्ली  गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुंबई इंडियंस को हरा दिया है। इस जीत के साथ कोलकाता प्लेऑफ की रेस में बनी हुई है। मुंबई की बल्लेबाजी मुकाबले में फ्लॉप रही और 20 ओवर में 147 रन ही बना सकी, जिसकी वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कोलकाता ने मुकाबले में जीत के साथ ही मुंबई से अपना बदला पूरा कर लिया है। इससे पहले वानखेड़े में खेले गए मुकाबले में मुंबई ने कोलकाता को हराया था और अब केकेआर ने उस हार का बदला ले लिया है। अजिंक्य रहाणे की कप्तानी वाली टीम ने मैच में 4 विकेट से जीत हासिल की। पावरप्ले में चौका कोलकाता ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया, जो कारगर साबित हुआ। कप्तान अजिंक्य रहाणे ने स्पिनर अनुकूल रॉय से गेंदबाजी की शुरुआत कराई, हालांकि पहला कमाल तीसरा ओवर डालने आए कैमरन ग्रीन ने किया। उन्होंने पहले शानदार फॉर्म में चल रहे रयान रिकल्टन (06) व उसके बाद नमन धीर (00) को पवेलियन लौटाकर मुंबई को दोहरा झटका दिया। इसके बाद तेज गेंदबाज सौरभ दुबे ने रोहित शर्मा (15) व सूर्यकुमार यादव (15) को आउट कर मुंबई की परेशानी बढ़ा दी। मुंबई ने इस सत्र में पहली बार पावरप्ले में चार विकेट गंवाए और इसमें मात्र 46 रन ही जोड़ पाई। मुंबई का इस सत्र में यह दूसरा न्यूनतम स्कोर भी है। सबसे कम स्कोर चेन्नई के विरुद्ध 104 रन का है। रोहित, सूर्या, हार्दिक सब फ्लॉप कोलकाता के गेंदबाजों के आगे रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, रयान रिकल्टन व हार्दिक पांड्या जैसे धाकड़ बल्लेबाजों की एक न चल पाई। पुछल्ले बल्लेबाज कॉर्बिन बॉश ने अगर 18 गेंदों पर अविजित 32 रनों की पारी न खेली होती तो मुंबई 140 का आंकड़ा भी पार न कर पाती। मुंबई का कोई बल्लेबाज अर्धशतक तक न जड़ पाया। मुंबई की पारी में मात्र 11 चौके व आठ छक्के लगे। बारिश ने रोक दी थीं सांसें कोलकाता में बुधवार दोपहर तक कड़ी धूप निकली हुई थी लेकिन शाम होते-होते आसमान में काले बादल घिरने लगे और बारिश शुरू हो गई। इससे कोलकाता खेमा चिंता में पड़ गया था। कारण बारिश के कारण मैच रद होने पर अंक बांटने पड़ते, जिसका मतलब था, उसका खिताबी दौड़ से बाहर हो जाना। इससे पहले ईडन में पंजाब के विरुद्ध मैच बारिश के कारण धुल चुका था। बारिश के कारण शाम 4.30 बजे तक ईडन की पिच समेत पूरे ग्राउंड को ढंककर रखा गया था। बारिश हालांकि थोड़ी देर बाद रुक गई और मैच निर्धारित समय पर ही शुरू हुआ, हालांकि आठ ओवर का खेल समाप्त होते ही फिर से बारिश शुरू हो गई। कोलकाता टीम फिर चिंता में पड़ गई क्योंकि वह बहुत बेहतर स्थिति में थी। उस वक्त तक मुंबई के 57 रन पर चार विकेट गिर चुके थे, हालांकि इस बार भी बारिश थोड़ी देर में ही रुक गई। करीब एक घंटे के व्यवधान के बाद रात 9.15 बजे खेल फिर शुरू हुआ और ओवर में कोई कटौती नहीं की गई। कोलकाता के गेंदबाजों का कमाल इस 'करो या मरो' का मैच खेलने उतरी कोलकाता नाइट राइडर्स ने सधी हुई गेंदबाजी के बूते मुंबई इंडियंस को आठ विकेट पर 147 रनों पर रोक दिया। कैमरन ग्रीन, सौरव दुबे व कार्तिक त्यागी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो -दो विकेट चटकाए, वहीं सुनील नरेन वरुण चक्रवर्ती ने भी बेहद किफायती गेंदबाजी की। नरेन ने एक विकेट चटकाया। कोलकाता की खराब शुरुआत एमआई के द्वारा दिए गए 148 रनों लक्ष्य के जवाब में कोलकाता ने भी खराब शुरुआत की। सलामी बल्लेबाज फिन एलन (08), जो शानदार फॉर्म में थे, वे पहले ही ओवर में आउट हो गए। इसके बाद अजिंक्य रहाणे और सीजन का पहला मैच खेल रहे मनीष पांडे ने मोर्चा संभाला। दोनों पारी को आगे बढ़ा रहे थे लेकिन कॉर्बिन बॉश ने रहाणे (21) को अपना शिकार बनाया। केकेआर ने पावरप्ले में 2 विकेट के नुकसान पर 51 रन बना लिए थे। कोलकाता ने जीता मुकाबला मनीष पांडे सीजन का पहला मुकाबला खेल रहे थे और संकट में फंसी कोलकाता के वो संकटमोचक बने। पांडे अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर से और 45 रन बनाकर आउट हो गए। उन्हें जसप्रीत बुमराह ने मैदान से बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद रोवमैन पॉवेल (40) रन बनाकर आउट हो गए। केकेआर ने मैच में 4 विकेट से जीत हासिल की और प्लेऑफ की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है। कोलकाता के लिए रिंकू सिंह ने विनिंग शॉट खेला और 9 रन बनाकर नाबाद रहे। पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के लिए मुश्किलें बढ़ी पंजाब किंग्स की टीम भी 13 अंकों पर है और कोलकाता के भी उतने ही अंक हो गए हैं। ऐसे में पंजाब को उम्मीद होगी कि कोलकाता अपना आखिरी मैच हारे या फिर उनका रन रेट केकेआर से बेहतर रहे। इसके अलावा राजस्थान की किस्मत उनके हाथों में है लेकिन उन्हें अपना आखिरी मैच जीतना होगा। अगर उन्हें जीत नहीं मिलती है, तो उम्मीद करनी होगी कि कोलकाता और पंजाब दोनों ही अपना आखिरी मैच हारें।  

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करना कितना आसान? आवारा कुत्तों के लिए सुविधाओं पर उठी बहस

 नई दिल्ली आवारा कुत्तों को लेकर दिए गए फैसले ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक संस्थानों और जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था. यानी कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने को कहा है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत में इतने शेल्टर होम हैं,  जहां सभी कुत्तों को शिफ्ट किया जा सके. अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह आदेश जमीन पर कैसे लागू होगा? तो समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर हकीकत है क्या? भारत में कितने आवारा कुत्ते हैं? वैसे भारत में आधिकारिक रुप से सरकार की ओर से इसे लेकर कोई आंकड़ा शेयर नहीं किया गया है. लेकिन, कई सर्वे  के आधार पर बताया जाता है कि भारत में करीब 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते हैं. यह आंकड़ा देश में स्ट्रे डॉग्स की वास्तविक स्थिति का सबसे व्यापक अनुमान माना जाता है. इसके अलावा, अगर कुल आवारा पशुओं की बात की जाए, तो संख्या करीब 2.04 करोड़ तक पहुंच जाती है, जिसमें गाय, बकरी और अन्य पशु भी शामिल हैं. हालांकि इनमें कुत्ते सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं।  इंडिया डेटा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 20.6 लाख, ओडिशा में 17.3 लाख, महाराष्ट्र में 12.8 लाख, राजस्थान में 10 लाख, मध्य प्रदेश में 10 लाख, कर्नाटक में 10 लाख, पश्चिम बंगाल में 10 लाख और आंध्र प्रदेश में 8.6 लाख आवारा कुत्ते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि देश के कई बड़े राज्यों में स्ट्रे डॉग्स की आबादी बहुत अधिक है।  कितने डॉग शेल्टर हैं? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर मौजूद हैं? भारत में लगभग 3,345 एनिमल शेल्टर होने का अनुमान है. लेकिन इनमें सिर्फ डॉग शेल्टर ही नहीं, बल्कि गौशालाएं और अन्य पशु आश्रय भी शामिल हैं. यानी वास्तविक डॉग शेल्टर की संख्या इससे काफी कम हो सकती है. बीएमसी ने बताया था कि मुंबई में 90,000 से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स के लिए केवल 8 शेल्टर होम थे. दिल्ली में एमसीडी के पास लगभग 20 एनिमल कंट्रोल सेंटर हैं, जिन्हें पूरी तरह आधुनिक शेल्टर नहीं माना जाता।  क्या पॉसिबल हो पाएगा? सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि अगर सभी स्ट्रे डॉग्स को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक जगहों से हटाकर शेल्टर में रखा जाए, तो इसके लिए एक विशाल और महंगा सिस्टम बनाना पड़ेगा. इसके लिए कुत्तों की पहचान और पकड़, उन्हें शेल्टर तक पहुंचाना, नसबंदी और टीकाकरण, लंबे समय तक देखभाल, लगातार रिकॉर्ड और निगरानी का काम करना होगा. ऐसे में अगर एक कुत्ते पर औसतन 40 रुपये प्रतिदिन का भोजन खर्च माना जाए, तो केवल खाने का सालाना खर्च ही 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।  कोर्ट में भी ये कहा गया था कि अगर भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए, और एक शेल्टर में औसतन 200 कुत्ते रखे जाएं, तो देश को 77,000 से ज्यादा शेल्टर की जरूरत पड़ेगी. अब नए शेल्ट होम बनाने के लिए हजारों एकड़ जमीन, लाखों कर्मचारियों की जरूरत और हजारों करोड़ रुपये का निवेश की जरुरत होगी।   कुत्ते के काटने के कितने केस? साल 2024 में भारत में 37.17 लाख डॉग बाइट केस दर्ज किए गए थे. इसमें 54 संदिग्ध रेबीज़ मौतें रिपोर्ट हुईं. यह डेटा NCDC द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एकत्र किया गया है और संसद में प्रस्तुत किया गया। 

सूर्यास्त्र रॉकेट का सफल परीक्षण, पाकिस्तान में 300 KM तक बढ़ी भारत की स्ट्राइक क्षमता

बेंगलुरु  भारतीय रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने का एक और शानदार उदाहरण सामने आया है. पुणे स्थित निजी क्षेत्र की कंपनी Nibe Limited ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में सूर्यास्त्र (Suryastra) रॉकेट्स का सफल फायरिंग डेमोन्स्ट्रेशन पूरा कर लिया है. कंपनी ने 150 और 300 किलोमीटर रेंज वाली दोनों रॉकेट्स का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण भारतीय सेना द्वारा कंपनी को दिए गए प्रोक्योरमेंट ऑर्डर का हिस्सा है।  सूर्यास्त्र रॉकेट्स की खासियतें      रेंज: 150 किमी और 300 किमी     CEP (Circular Error Probable): 150 किमी रेंज वाली रॉकेट का CEP मात्र 1.5 मीटर और 300 किमी रेंज वाली रॉकेट का CEP मात्र 2 मीटर.     प्रकार: प्रिसीजन गाइडेड रॉकेट      उद्देश्य: जमीन पर सटीक हमला      विशेषता: बेहद उच्च सटीकता, जिससे छोटे-से-छोटे टारगेट को भी नष्ट किया जा सकता है. 1.5 से 2 मीटर का CEP दुनिया के बेहतरीन रॉकेट सिस्टम्स में गिना जाता है. इसका मतलब है कि रॉकेट अपने लक्ष्य से औसतन सिर्फ 1.5-2 मीटर की दूरी पर गिरती है, जो युद्ध में बहुत बड़ी ताकत है।  ITR चांदीपुर में किए गए इन फायरिंग ट्रायल्स में दोनों रॉकेट्स ने अपने टारगेट्स को बेहद सटीकता से भेदा. परीक्षण के दौरान सभी सिस्टम्स – गाइडेंस, नेविगेशन, प्रोपल्शन और कंट्रोल पूरी तरह सफल रहे।  Nibe Limited ने इसे भारतीय रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर बताया है. कंपनी ने कहा कि ये रॉकेट्स पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं. भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार विकसित किए गए हैं।  क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि? भारतीय सेना को अब लंबी दूरी की सटीक हमला करने वाले रॉकेट्स मिलेंगे. दुश्मन के ठिकानों, आर्टिलरी पोजीशन्स, कमांड सेंटर्स और अन्य महत्वपूर्ण टारगेट्स को सुरक्षित दूरी से नष्ट किया जा सकेगा. इससे रक्षा आयात पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में निर्यात की भी संभावनाएं बढ़ेंगी।  Nibe Limited रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी है. कंपनी पहले से ही विभिन्न रक्षा प्रोजेक्ट्स में काम कर रही है. सूर्यास्त्र रॉकेट का सफल परीक्षण कंपनी की क्षमता को और मजबूत करता है।  ये रॉकेट्स भारतीय सेना की फायरपावर को काफी बढ़ाएंगे. खासकर सीमा पर तनाव की स्थिति में लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता से सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त मिलेगी. 300 किमी रेंज वाली रॉकेट दुश्मन के गहरे इलाकों तक पहुंचने में सक्षम होगी। 

भोजशाला परिसर को लेकर बड़ा फैसला, हिंदुओं को मिला पूर्ण पूजा अधिकार

धार  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने धार स्थित भोजशाला परिसर में हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा के लिए पूरी अनुमति दे दी है। एएसआई ने 16 मई को जारी आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने अपने 15 मई के फैसले में भोजशाला को संरक्षित स्मारक और देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना है। एएसआई के आदेश में कहा गया है कि अदालत ने यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज से जुड़े संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करता है। आदेश के मुताबिक, राजा भोज से जुड़े साहित्य और स्थापत्य संदर्भ इस बात की ओर संकेत करते हैं कि यहां सरस्वती मंदिर मौजूद था। एएसआई के शोध में भी इस बात का समर्थन मिला है। 2003 का पुराना आदेश रद एएसआई ने अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने अप्रैल 2003 में जारी उस पुराने निर्देश को रद कर दिया है, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर रोक और परिसर में मुस्लिम नमाज की अनुमति दी गई थी। नए आदेश के अनुसार, भोजशाला को संस्कृत शिक्षा का केंद्र और देवी वाग्देवी का मंदिर मानते हुए हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना के लिए 'बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश' का अधिकार दिया गया है। धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद का विषय रही है और इस मामले को लेकर कई कानूनी लड़ाइयां भी चली हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 25-26 मई को होगी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा, उज्जैन में तैयारियां तेज

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत उज्जैन में 25-26 मई को शिप्रा तीर्थ परिक्रमा भोपाल में होगा 27 मई से 2 जून तक सदानीरा समागम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जन अभियान बना जल गंगा संवर्धन अभियान शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में लोक गायिका मैथिली ठाकुर और भारतीय नौसेना बैंड की होगी मनमोहक प्रस्तुति सदानीरा समागम में 9 देशों के राजदूत और प्रमुख कॉर्पोरेट प्रतिनिधि होंगे शामिल नदी, तालाब और जल संरचनाओं के संरक्षण पर होगा राष्ट्रीय विमर्श उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जल आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में नदी, तालाब और पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' अब व्यापक जनभागीदारी के साथ एक जन अभियान का रूप ले चुका है। इस अभियान में प्रदेश में अब तक 1 लाख 81 हजार 763 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा उज्जैन में 25-26 मई को 'शिप्रा तीर्थ परिक्रमा' का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर सहित कई लोकप्रिय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही, वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल में भारत भवन में 27 मई से 2 जून तक 'सदानीरा समागम' का आयोजन किया जा रहा है। उज्जैन में गंगा दशमी के पावन पर्व पर होगी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार और महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि उज्जैन में गंगा दशमी के अवसर पर होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण आयोजन है। 25 मई को शुरू होने वाली यह परिक्रमा रामघाट से प्रारंभ होकर नृसिंहघाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम शनि मंदिर से होते हुए दत्त अखाड़ा घाट पहुंचेगी। यात्रा के पहले दिन श्रद्धालु यहां रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, गंगा दशमी के अवसर पर यह परिक्रमा रणजीत हनुमान मंदिर, भैरवगढ़, सिद्धवट, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका और गोपाल मंदिर से होते हुए पुनः रामघाट पर पहुंचकर संपन्न होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस परिक्रमा के दौरान माँ शिप्रा को 300 फीट की चुनरी अर्पित की जाएगी। उज्जैन में 25-26 मई को आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत रामघाट पर पंडित ढोली बुआ द्वारा नारद कथा गायन परंपरा पर आधारित 'हरिकथा' का आयोजन 17 मई से प्रतिदिन सायं 7:30 बजे किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, दत्त अखाड़ा घाट पर आयोजित भजन संध्या में इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं साथी तथा जबलपुर की लोक गायिका संजो बघेल एवं साथियों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। 26 मई को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) के बैंड की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर एवं साथियों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भारत भवन में 'सदानीरा समागम' का शुभारंभ न्यासी सचिव तिवारी ने बताया कि भारत भवन में 27 मई से 2 जून 2026 तक 'सदानीरा समागम' का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 मई को शाम 7 बजे इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। इस अवसर पर इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञान समूह के समूह निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। सात दिवसीय समागम के माध्यम से जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति और पंचमहाभूतों (जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि) पर केंद्रित एक राष्ट्रीय विमर्श आयोजित होगा। इस आयोजन में देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, कलाकार, पर्यावरणविद् और नीति-निर्माता शामिल होंगे। यह पहला अवसर है जब इसरो , जेके ट्रस्ट, एचयूएल फाउंडेशन, जेके सीमेंट, जेएसडब्ल्यू, टाटा ट्रस्ट, एमडीएल, आईजीआरएमएस, हीरो फ्यूचर एनर्जीस, ओएनजीसी, हिन्दुस्तान पावर, वेदांता ग्रुप और टाटा संस जैसी बड़ी कंपनियों व संस्थाओं के प्रतिनिधि जल संरक्षण के विषय पर एक मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। इस समारोह में फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, वेनेजुएला, मैक्सिको, सूरीनाम, इक्वाडोर, साइप्रस और नेपाल सहित नौ देशों के राजनयिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले रहा है। सदानीरा समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूतों पर आधारित विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसमें देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे इसरो, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, आईआईएम बोधगया और विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों के सीएसआर (CSR) प्रमुख हिस्सा लेंगे।समारोह के दौरान प्रतिदिन शाम को नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इनमें भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, गोवर्धन लीला, गंगा यात्रा, अमृतमय, नदी गीत, पानी नामा, लघुशंका नगर, जल प्रवाह, नर्मदे हर, स्वानलेक, क्रिटिकल पॉइंट और 'नर्मदा हर कंकर शंकर' जैसी प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही, दक्षिण कोरिया की 'मूट डांस कंपनी' की प्रस्तुति विशेष रूप से आयोजित की जा रही है। दर्शकों को क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ने के लिए मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और बघेलखंड की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। 'सदानीरा समागम' में प्रवाह फिल्म समारोह और जल केंद्रित प्रदर्शनियां होगी प्रमुख आकर्षण समागम में 28 मई से 2 जून तक भारत भवन के 'अभिरंग' सभागार में 'प्रवाह फिल्म समारोह' का आयोजन किया जाएगा। इसमें जल केंद्रित विषयों पर आधारित हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं की 15-15 डॉक्यूमेंट्री और डॉक्यू-ड्रामा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फिल्मों में प्रमुख रूप से 'जल संकट', 'गंगा नदी', 'जल डाकू', 'जब हर एक बूंद मायने रखती है', 'खतरे में नदियाँ' और 'आखिरी बूंद' शामिल हैं। इसके साथ ही, परिसर में 'जल, जंगल, जीवन' पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें देश भर के कलाकार भाग लेंगे। सदानीरा समागम के दौरान जल पर केंद्रित 4 विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें 'लघु चित्रों में जल', 'भूगर्भीय जल स्रोत', 'मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान' और 'जलचर: जलीय जीवन के प्राणतत्व' शामिल हैं। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद , बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, भोपाल सहयोग कर रहे हैं। जल और संस्कृति आधारित 6 पुस्तकों का होगा विमोचन समारोह में … Read more

ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना को झटका, हाईकोर्ट ने लगाया स्टे; मुआवजे पर नया आदेश

इंदौर/उज्जैन   मध्य प्रदेश में स्थित इंदौर और उज्जैन के बीच बनाए जाने वाले ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट ने इसमें जिन किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, उनकी जमीनों का कब्जा लेने पर रोक लगा दी है। साथ ही, जिन किसानों ने मुआवजा ले भी लिया है और वे अपना मुआवजा वापस करते हैं तो उनकी जमीन अधिग्रहण पर भी स्टे लागू कर दिया जाएगा। अभिभाषक पूनम महाजन ने बताया, सरकार ने इंदौर से उज्जैन के बीच सिंहस्थ को लेकर 48.1 किलोमीटर का फोरलेन रास्ता बनाने की योजना बनाई है, जिसे ग्रीन फील्ड कॉरिडोर नाम दिया गया है। पितृ-पर्वत से शुरू होकर ये रास्ता सीधे चिंतामण गणेश मंदिर के पास उज्जैन बायपास तक बनना है। इससे इंदौर-उज्जैन के बीच की दूरी केवल 30 मिनट में ही पूरी होने का दावा किया गया है। इसके तहत इंदौर की हातोद तहसील में आने वाले ग्राम सागवाल की 16.496 हेक्टेयर जमीन भी अधिग्रहित की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन अधिग्रहण के खिलाफ नाराज किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप : जारी नोटिफिकेशन में सिर्फ एक्सपर्ट ग्रुप की राय ही दी इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि किसानों की जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कानूनी रूप से गलत है। जमीन अधिग्रहण के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसमें केवल एक्सपर्ट ग्रुप की राय को ही जारी किया गया है, जबकि नोटिफिकेशन में सामाजिक संग्रहात रिपोर्ट की समरी को नोटिफिकेशन में दिया जाना था। इसके साथ ही अन्य कई कानूनी गड़बडि़यां की गई हैं। सरकार बोली कोई उल्लंघन नहीं किया, किसानों ने मय फोटे के साक्ष्य दिए इस याचिका के दायर होने के बाद राज्य के महाधिवक्ता ने 13 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में बयान दिया था कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कानून के सभी प्रावधानों का पालन करेगी। इसका उल्लंघन करते हुए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। बावजूद किसानों की जमीनों को अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी फोटो सहित जानकारी कोर्ट के समक्ष रखकर मांग की थी कि कोर्ट इस पर स्टे जारी करे अन्यथा किसानों के याचिका दायर करने का कोई अर्थ नहीं रहेगा। महाधिवक्ता बोले- कुछ किसान मुआवजा ले चुके हैं और अन्य भी तैयार महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि, याचिका दायर करने वाले किसानों के मामले में जो भी कार्यवाही की जाएगी, वो कानून के मुताबिक ही की जाएगी। साथ ही बताया कि याचिका दायर करने वाले कुछ किसान पहले ही मुआवजा ले चुके हैं और कुछ अन्य भी मुआवजा लेने को तैयार हैं। जो केस लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजा राशि वापस करनी होगी- कोर्ट कोर्ट ने माना, चूंकि कोर्ट में याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अगर इस बीच जमीनों का कब्जा ले लिया जाता है तो इसकी संभावना ज्यादा है कि, उस स्थिति में याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रहेगा। इसके चलते जिन्होंने मुआवजा प्राप्त नहीं किया है, उनकी जमीन की जो स्थिति है उसे वैसे ही रखा जाएगा और जिन्होंने मुआवजा प्राप्त कर लिया है, किंतु जो इस केस को लड़ना चाहते हैं उन्हें मुआवजे की राशि वापस करनी होगी। जिस तारीख से वो पैसा वापस करेंगे, उस तारीख से उनकी जमीन पर स्टे रहेगा। बावजूद कोई यदि मुआवजा लेने का इच्छुक है तो वो ऐसा कर सकता है। उस स्थिति में सरकार तय कानून के हिसाब से आगे की कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगी।  

मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अलर्ट मोड पर, विधायकों की निगरानी तेज

भोपाल प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें इसी वर्ष जून में रिक्त हो रही हैं। इन सीटों पर निर्वाचन के लिए अधिसूचना शीघ्र जारी होने की आशा है। चुनाव नजदीक आते ही क्राॅस वोटिंग को लेकर कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। कारण, चार विधायक भी खिसक गए तो कांग्रेस के हाथ से सीट निकल जाएगी। क्रॉस वोटिंग को लेकर मंथन बता दें कि विधायकों के संख्या बल की दृष्टि से दो सीटें भाजपा को मिलनी तय हैं। बची एक सीट वर्तमान की स्थिति में कांग्रेस के खाते में जाएगी, पर कुछ राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्राॅस वोटिंग या अनुपस्थित रहने की वजह से मप्र में भी पार्टी को डर सता रहा है। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने गुपचुप तरीके से ऐसे विधायकों पर नजर रखना शुरू कर दिया है, जो क्रास वोटिंग कर सकते हैं। विधायकों की अनुपस्थिति बनी चुनौती दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता शून्य किए जाने के बाद अब कांग्रेस के 64 सदस्य विधानसभा में हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता शून्य करने संबंधी निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो लगा दी है, लेकिन वह चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। दलबदलुओं पर नजर बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं निर्मला सप्रे के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर सुनवाई चल रही है।सप्रे वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद कई बार भाजपा के मंच पर नजर आ चुकी हैं, हालांकि वह कई बार कह चुकी हैं कि कांग्रेस से त्याग पत्र नहीं दिया है। वह पार्टी में ही हैं। ऐसे में कांग्रेस इस वोट को अपने पक्ष में नहीं मान रही है। हालांकि, पार्टी सूत्रों ने बताया कि हाल ही में प्रदेश पदाधिकारियों ने सप्रे से बात कर पार्टी के पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया है। इस तरह मल्होत्रा और सप्रे को हटा दें तो कांग्रेस के पास चार अतिरिक्त वोट ही हैं। इस कारण पार्टी का डर बढ़ा हुआ है।  

लंदन म्यूजियम की मूर्ति जैसी दिखती है ‘मां वाग्देवी’, 26 कलाकारों ने मिलकर बनाया था अद्भुत स्वरूप

ग्वालियर  मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर कोर्ट ने इसे मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (सरस्वती) की मुख्य अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 सालों से ग्वालियर में ही कड़ी सुरक्षा के बीच रखी हुई है। साल 2011 की बसंत पंचमी पर इस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी, लेकिन उस समय उपजे सांप्रदायिक और प्रशासनिक विवाद के बाद इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था। अब कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद ग्वालियर के मूर्तिकार के घर में भी उम्मीद का दीया जल उठा है। लंदन म्यूजियम वाली 'ओरिजिनल' मूर्ति का हूबहू रूप ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे ने मां वाग्देवी की इस प्रतिमा और उसकी बनावट से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया।     लंदन म्यूजियम जैसी हूबहू बनावट: धार की मूल वाग्देवी प्रतिमा वर्तमान में लंदन के म्यूजियम में रखी हुई है। ग्वालियर में तैयार की गई यह मूर्ति हूबहू उसी डाइमेंशन (आकार) और बनावट में बनाई गई है।     अष्टधातु से निर्माण: यह प्रतिमा पवित्र अष्टधातु (आठ अलग-अलग धातुओं के मिश्रण) से बनाई गई है, जिसका धार्मिक रूप से बेहद खास महत्व है।     वजन और ऊंचाई: साढ़े 3 फीट ऊंची और करीब सवा फीट चौड़ी इस भव्य प्रतिमा का कुल वजन 250 किलोग्राम (ढाई क्विंटल) से भी अधिक है।     लागत और कारीगर: साल 2011 में इस मूर्ति को बनाने में करीब ढाई से तीन लाख रुपए की लागत आई थी। मूर्तिकार प्रभात राय के साथ कुल 26 कलाकारों की टीम ने महज 35 से 40 दिनों की दिन-रात की मेहनत के बाद इसे तैयार किया था। आरएसएस नेता ने दिया था ऑर्डर मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज ने बताया कि साल 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी ने उन्हें इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया था। “2011 में जब मूर्ति बनकर तैयार हुई और इसे धार भेजने की तैयारी थी, तभी वहां धार्मिक और प्रशासनिक विवाद भड़क गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोकने का आदेश दिया। उस समय विवाद इतना बढ़ा कि लगभग दो हफ्तों तक 2 से 5 पुलिसकर्मी हमारे घर पर सुरक्षा में तैनात रहे। इसके बाद भी साल 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस प्रोटेक्शन के साये में ही 2 से 3 दिन के लिए मूर्ति रखी जाती थी।” अब मौन धारण किया नवल किशोर ने ग्वालियर आरएसएस पदाधिकारी लोकेंद्र मिश्रा ने बताया कि 2011 के बाद आरएसएस प्रचारक नवल किशोर अब वर्तमान में चेतन दास जी महाराज बन गए हैं और अभी महेश्वर में है। उन्होंने अब मौन धारण कर लिया हैं। ऐसे में मूर्ति का अब आगे क्या होगा इसके बारे में से नवल किशोरी बता सकते थे लेकिन अब मूर्ति का क्या होगा इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। भावुक हो गए मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज का कहना है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद से वे भी बेहद उत्साहित हैं। हालांकि फिलहाल अभी किसी पक्ष या प्रशासन ने उनसे मूर्ति ले जाने के लिए संपर्क नहीं किया है, क्योंकि सभी कोर्ट के लिखित आदेश और उसकी कानूनी बारीकियों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अगर भविष्य में भी कोई इस मूर्ति को लेने नहीं आता है, तो मैं इसे बेहद खुशी और गर्व के साथ अपने पास रखूंगा, क्योंकि यह भारत के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत हिस्सा है।” मूल प्रतिमा को स्थापति करने की हो रही तैयारी धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदू पक्ष लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने कहा कि वर्तमान में लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से उसका विशेष महत्व है। सुमित चौधरी ने बताया कि आंदोलन के दौरान जिन-जिन मूर्तियों का उपयोग किया गया, उन सभी मूर्तियों की “मुक्ति” कराकर उन्हें सम्मानपूर्वक स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भोजशाला में हिंदू महासभा द्वारा रखी गई मूर्ति को लेकर भी आगे प्रक्रिया की जाएगी। ग्वालियर की मूर्ति की सिर्फ चर्चा सुमित चौधरी ने स्पष्ट किया कि ग्वालियर में रखी प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर फिलहाल केवल चर्चा चल रही है। अभी इस विषय पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह केवल योजना स्तर पर विचाराधीन है। सुमित चौधरी का कहना है कि प्रतिमा स्थापना को लेकर न्यायालय का आदेश पहले ही आ चुका है। कोर्ट ने शासन और प्रशासन को प्रतिमा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन और मांग पत्र भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें कोर्ट के आदेश के पालन की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजा गया है। हिंदू पक्ष ने मांग की है कि लंदन में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को जल्द भारत लाकर भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए। सुमित चौधरी ने कहा कि एएसआई केवल परिसर की देखरेख और संरक्षण का कार्य करता है। प्रतिमा स्थापना का निर्णय पूरी तरह कोर्ट के आदेश के अनुसार ही होगा। उन्होंने कहा कि मूर्ति आएगी तो कोर्ट के आदेश से ही आएगी, इसमें एएसआई के हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं उठता।

ईंधन कीमतों की मार, क्विक डिलीवरी कंपनियां बढ़ा सकती हैं चार्ज

मुंबई  देश में 10 मिनट वाले क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सर्विस का यूज लगभग अब हर घर में होने लगा है, लेकिन बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों का असर अब इन कंपनियों के ऊपर भी पड़ने वाला है. हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ऊंचे क्रूड ऑयल दामों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है. इससे डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव पड़ेगा और प्लेटफॉर्म्स को लागत बढ़ानी पड़ सकती है।  फ्यूल बढ़ोतरी का डिलीवरी पर असर क्विक कॉमर्स में ऐवरेज डिलीवरी लागत 35-50 रुपये प्रति ऑर्डर है, जबकि फूड डिलीवरी में यह 55-60 रुपये के आसपास होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, Eternal (Zomato) के लिए ऐवरेज डिलीवरी लागत करीब 45 रुपये और Swiggy के लिए 55 रुपये प्रति ऑर्डर है. डिलीवरी लागत में फ्यूल की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, यानी एक ऑर्डर पर 9-10 रुपये फ्यूल का खर्च आता है।  फिलहाल 4 प्रतिशत बढ़ोतरी से प्रति ऑर्डर 0.44 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर फ्यूल के दाम और बढ़कर 10 रुपये प्रति लीटर हो गए तो यह प्रभाव 1-1.2 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच सकता है. इससे कंपनियों की कमाई (EBITDA) पर 4-12 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है, अगर लागत ग्राहकों पर नहीं डाली गई।  Eternal और Swiggy पर क्या असर? Eternal (जिसमें Blinkit शामिल है) और Swiggy दोनों ही फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स पर निर्भर हैं. FY27 में Eternal के करीब 2.7 अरब और Swiggy के 1.4 अरब ऑर्डर आने का अनुमान है. Swiggy पर असर ज्यादा हो सकता है क्योंकि वह अभी क्विक कॉमर्स में ब्रेकईवन यानी नो प्रॉफिट, नो लॉस की राह पर है।  दूसरी ओर, Eternal की स्थिति बेहतर मानी जा रही है. उसका बड़ा स्केल, ज्यादा एड आय और प्रीमियम ग्राहक आधार इसे लागत बढ़ाने में मदद करेगा. कंपनियां अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा ग्राहक चार्ज बढ़ाकर, कुछ खुद उठाएंगी और कुछ डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर दबाव डालकर संभालने की कोशिश करेंगी।  ग्राहकों और डिलीवरी वर्कर्स पर प्रभाव बढ़ती लागत से 10 मिनट डिलीवरी का कन्वीनियंस महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कंपनियां डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज बढ़ा सकती हैं. डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कमाई प्रभावित होने से वे ज्यादा पेमेंट की मांग कर सकते हैं, जिससे पूरा सिस्टम प्रभावित होगा।  हालांकि, एलारा कैपिटल का कहना है कि थोड़े समय बाद यह कंट्रोल में रहेगा. लंबे समय में कंपनियां दक्षता बढ़ाकर, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाकर और बेहतर प्लानिंग से इस चुनौती से निपट सकती हैं. फ्यूल दामों में बढ़ोतरी अब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए नई चुनौती बनकर आ रही है।