samacharsecretary.com

Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से संसद सत्र की संभावना, PM-CM पद से जुड़े अहम विधेयक पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बार मॉनसून सत्र तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति में इसपर कोई फैसला नहीं किया गया है। आम तौर पर चार सप्ताह तक मॉनसून सत्र चलता है और इसमें 20 बैठकें होती हैं। हालांकि इस बार बैठकों की संख्या कम भी हो सकती है। बता दें कि पश्चिम बगाल, असम और पुदुच्चेरी में बीजेपी की जीत और कई पार्टियों में चल रही अंदरूनी कलह के बीच यह सत्र हो रहा है। ऐसे में सदन में कई मामलों को लेकर हंगमा होने के भी आसार हैं। टीएमसी के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन करने का ऐलन कर दिया है। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ सात सांसद पहले ही बीजेपी के साथ आ गए हैं। अब एनसीपी (SP) में भी टूट के कयास लगाए जा रहे हैं। टीएमसी और शिवसेना सांसदों पर भी होगा फैसला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को टीएमसी के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों को लेकर भी फैसला करना है। इन सांसदों ने उन्हें अलग गुट की मान्यता देने का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर को दिया है। जानकारों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले भी इसपर फैसला हो सकता है। राज्यसभा में सत्तापक्ष के समीकरण काफी मजबूत हो गए हैं। महिला आरक्षण विधेयक फिर पेश कर सकती है सरकार पिछले सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर गया था। लोकसभा में संख्या कम होने की वजह से निचले सदन में ही विधेयक पारित नहीं हो पाए थे। हालांकि अगर इस बार मॉनसून सत्र से पहले ही स्पीकर फैसला करते हैं तो सत्तापक्ष दोनों सदनों में मजबूत हो सकता है। ऐसे में सरकार महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक 2029 को लोकसभा में पेश कर सकती है। जानकारी के मुताबिक सरकार इन विधेयकों का मसौदा फिर से तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया जा सकता है। दक्षिण के राज्यों का कहना था कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के निर्धारण से उनका प्रतिनिधित्व संसद में कमजोर हो जाएगा। इसी समस्या को टालने के लिए सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने का विधेयक लाया जा सकता है। पीएम-सीएम जेल वाला बिल सरकार इस सत्र में पीएम और सीएम की कुर्सी छीनने वाला बिल भी ला सकती है। बताया जा रहा है कि संशोधन विधेयक के लिए ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं कि सजा होने पर सीएम और पीएम की कुर्सी छीन ली जाए। इसके अलावा कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए अन्य सिफारिशें भी की जा सकती है। एक देश एक चुनाव बिल को पारित कराने के लिए भी सरकार जोर लगा सकती है। इसके अलावा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, एफसीआरए बिल, एंटी डोपिंग बिल भी पेश किया जा सकता है।

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना पर हाईकोर्ट का स्टे, 27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

 उज्जैन  मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर निर्मित होने वाला उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे विवादों से बाहर आने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जावरा से लेकर उज्जैन तक किसानों ने इस सड़क का विरोध किया। मजबूरन सरकार ने इसे सामान्य हाईवे बनाने के साथ किसानों को चार गुना मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि किसानों को चार गुना मुआवजा मिला नहीं है। वहीं अब मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर स्टे दे दिया है। न्यायालय ने गांव मंगरोला, सोडंग और झिरनिया उन्हेल के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस स्टे पर आगामी सुनवाई 27 जुलाई को होगी। भूमि अधिग्रहण के नियमों का नहीं हो रहा पालन- याचिकाकर्ता याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे। जिन पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। अधिवक्ता विशाल चौहान ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। अन्य किसानों के लिए हो सकता है फायदा तीन गांवों के किसानों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाने और स्टे मिलने के बाद अन्य किसानों के लिए भी हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। क्योंकि अब भी क्षेत्र के कई किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं सरकार ने चार गुना मुआवजे की घोषणा की थी, परंतु नागदा-खाचरौद विधानसभा के ही कई किसानों को दोगुना मुआवजा ही दिया गया है। यहीं नहीं किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध करने पर प्रशासनिक और पुलिस अमला उन्हें डरा भी रहा है। जिसके कई वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। ऐसे में वह किसान जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है और जमीन अधिग्रहण हो रही है, वह भी हाईकोर्ट की शरण ले सकते है।

प्रिया, रुचि और कृष्णा… सपा की महिला सांसदों की अपने ही नेताओं से क्यों बढ़ी अदावत?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी एक दशक से सत्ता का वनवास झेल रही है. अखिलेश यादव सूबे की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन पार्टी में अंदरूनी कलह और गुटबाजी कहीं उनकी उम्मीदों पर पानी न फेर दे. विधानसभा चुनावों से पहले जिस तरह सपा में सियासी रार छिड़ी हुई है, उसके चलते ही अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर को विधानसभा के मुख्य सचेतक पद से हटाना पड़ा है।  मुरादाबाद की लोकसभा सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच छिड़ी सियासी अदावत के चलते ही अखिलेश यादव को एक्शन लेना पड़ा है. सपा के सांसद और विधायक के बीच पहला मामला नहीं बल्कि यूपी में तीन सपा के महिला सांसदों की अपने ही इलाके में अपनी ही पार्टी के विधायक के साथ छत्तीस के आंकड़े हैं।  यूपी में चुनावी सरगर्मी के बीच अखिलेश यादव एक तरफ जहां सपा 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दम पर सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही है, लेकिन  जमीनी स्तर पर सपा सांसद और विधायकों की आपसी महत्वाकांक्षाएं और गुटबाजी पार्टी के बने-बनाए खेल को बिगाड़ सकती हैं।  प्रिया सरोज और रागिनी सोनकर में शह-मात जौनपुर की मछलीशहर सीट पर सपा की दो युवा और तेजतर्रार महिला नेताओं के बीच सियासी रार छिड़ी हुई है. मछली शहर की सपा सांसद प्रिया सरोज और स्थानीय विधायक डॉ. रागिनी सोनकर के बीच सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. ये दोनों महिला नेता सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करीबी मानी जाती हैं, लेकिन एक ही क्षेत्र से होने के चलते दोनों के बीच वर्चस्व की जंग को हवा दे दी है।  प्रिया सरोज सपा के दिग्गज नेता तुफानी सरोज की बेटी हैं और 2024 में मछली शहर सीट से सांसद चुनी गई है. रागिनी सोनकर 2022 में मछलीशहर सीट से विधायक चुनी गई और 2024 में वो चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन पार्टी ने प्रिया सरोज को टिकट दे दिया था. इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते जगजाहिर हैं और एक दूसरे पर निशाना साधने का मौका नहीं गंवाती हैं. इतना ही नहीं एक दूसरे के साथ न मंच शेयर करती हैं और न ही अपने-अपने कार्यक्रम में एक दूसरे को बुलाती हैं।  रागिनि सोनकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मौका मिला या पार्टी ने चाहा, तो वह भविष्य में मछलीशहर सीट से ही लोकसभा चुनाव लड़ना पसंद करेंगी. इस पर प्रिया सरोज ने पलटवार करते हुए कहा है कि मछलीशहर उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि है और वह इसे किसी के लिए नहीं छोड़ेंगी।  यह लड़ाई सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात है.माना जा रहा है कि प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज चाहते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मछलीशहर सदर सीट से उनके बेटे धनंजय सरोज चुनाव लड़ें. रागिनी सोनकर इस बात को बाखूबी समझ रही हैं, जिसके चलते ही लोकसभा की दावेदारी ठोककर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रही हैं।  रुचि वीरा और कमाल अख्तर की अदावत मुरादाबाद की मौजूदा सपा सांसद रुचि वीरा और जिले की कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमल अख्तर के बीच 2024 से ही सियासी अदावत छिड़ी हुई है. रुचि वीरा को सपा नेता आजम खान का करीबी माना जाता है. आजम खान और कमाल अख्तर की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. इसके चलते रुचि वीरा और कमाल अख्तर की भी नहीं पटती है. कमाल अख्तर न ही अपने कार्यक्रम में रुचि वीरा को बुलाते हैं और न ही रुचि वीरा अपने कार्यक्रम में कमाल अख्तर को बुलाती हैं।  25 जून को मुरादाबाद में कमाल अख्तर ने पीडीए चौपाल का कार्यक्रम रखा था, जिसमें रुचि वीरा को नहीं बुलाया गया. यही नहीं कार्यक्रम में लगे बैनर में रुचि वीरा तस्वीर भी नहीं थी, जिसको लेकर रुचि वीरा ने सियासी मुद्दा बना दिया. यह बात अखिलेश यादव तक पहुंची तो उन्होंने दोनों ही नेताओं को लखनऊ बुलाया. अखिलेश की मौजूदगी में दोनों ही नेताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई और एक दूसरे पर गुटबाजी का आरोप लगाया।  आजम खान की करीबी होने के चलते अखिलेश यादव ने रुचि वीरा के साथ देते हुए कमाल अख्तर को विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया. कमल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन रुचि वीरा के साथ उनकी सियासी अदावत अभी भी जारी है. इसके पीछे मुरादाबाद की सियासत पर अपना-अपना अधिपत्य जमाने की है, जिसके चलते पार्टी दो गुटों में बंट गई है।  बुंदेलखंड में सपा सांसद और विधायक में कलह बुंदेलखंड में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर तीन सीटें जीतने वाली सपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अंदरूनी कलह में उलझती दिख रही है. गुटबाजी की चलते ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 मई को बांदा की जिला कार्यकारिणी को भंग दिया. अब बांदा-चित्रकूट की सपा सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू से सपा के विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच पिछले हफ्ते जमकर कहासुनी एक कार्यक्रम में हुई।  सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधाक विशंबर सिंह यादव के बीच  'तू-तू मैं-मैं' का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. वायरल वीडियो में सांसद कृष्णा पटेल विधायक पर असहयोग और बेइज्जती करने का आरोप लगाती दिख रही है. इसके जवाब में विधायक विशंभर सिंह यादव उन्हें तमीज में रहने की नसीहत देते नजर आ. सांसद कृष्णा पटेल ने मंच से ही यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत वह पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से कर चुकी हैं।  कृष्णा पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद समेत पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता शामिल हुए. सांसद के पति ने पार्टी के ही लोगों पर उन्हें बदनाम करने व अवैध खनन में संलिप्त होने के मिथ्या आरोप लगाने की बात कही थी. तब से सांसद-विधायक के बीच जंग जारी है. चित्रकूट में जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह पटेल और सदर विधायक अनिल प्रधान के बीच अंदरखाने मनमुटाव है. पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज पटेल का गुट भी अलग है. इसके चलते सियासी वर्चस्व की जंग चल रही है।   

UP News: CM योगी ने बढ़ाया मानसिक दिव्यांग और निराश्रितों का अनुदान, दिए कई अहम निर्देश

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित लोगों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों और हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों की भरण-पोषण अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने के निर्देश दिए हैं।इस निर्णय का उद्देश्य संस्थागत देखभाल पर निर्भर दिव्यांगजनों को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक रूप से दिव्यांग और निराश्रित व्यक्ति पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर आश्रित होते हैं। ऐसे में उनके लिए पौष्टिक भोजन, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पात्र लाभार्थियों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर तथा अन्य आवश्यक सहायक उपकरण समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उन्हें दैनिक जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए मुख्यमंत्री ने श्रवण बाधित बच्चों की शीघ्र पहचान और कॉक्लियर इंप्लांट के बाद उनके प्रभावी पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ-साथ उनके पुनर्वास और शिक्षा की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की समयबद्ध नियुक्ति पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की सभी योजनाओं का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 12.23 लाख से अधिक दिव्यांगजन दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। इसी अवधि में 34,420 पात्र लाभार्थियों को 43,689 सहायक उपकरण वितरित किए गए। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब तक 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इंप्लांट कराया जा चुका है। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में 68 जिलों से 335 बच्चों की पहचान की गई है। इसके अलावा सरकार निश्शुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, विवाह प्रोत्साहन सहायता, दुकान संचालन सहायता तथा रोडवेज बसों में निश्शुल्क यात्रा जैसी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी संचालन कर रही है।  

रिकॉर्ड समय में मरम्मत के बाद तान नदी ब्रिज फिर शुरू, आवागमन बहाल

रायपुर बड़ी राहत : आवाजाही के लिए खुला तान नदी ब्रिज कटघोरा से अंबिकापुर के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-शिवनगर खंड पर गुरसियाँ स्थित तान नदी ब्रिज को मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद आम यातायात के लिए पुनः खोल दिया है। परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए ब्रिज की आवश्यक संरचनात्मक मरम्मत रिकॉर्ड समय में पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही इस मार्ग पर यातायात पुनः पूर्ण क्षमता के साथ सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। पुल की रेलिंग के बचे कार्य को कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्य मरम्मत कार्य पूरा होने से कटघोरा-अंबिकापुर मार्ग पर आवागमन सामान्य हो गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा भारी वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एनएचएआई सुरक्षित, निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

Jaish-e-Mohammed पर ATS की बड़ी कार्रवाई, दो राज्यों से 8 संदिग्धों को दबोचा

 गांधीनगर गुजरात ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) ने आतंक के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 8 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी गुजरात में आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहे थे। इस बारे में जानकारी देते हुए गुजरात एटीएस ने बताया कि इन सभी 8 आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 13, 17, 18, 38, 39 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 148 और 61 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ATS ने इन आठ संदिग्धों को दबोचा ATS ने बताया कि आरोपियों की पहचान अहमद, पिता अब्दुल्ला गाज़ीवाला, इब्राहिम घाघा, पिता मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर, पिता अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुर्रानी, ​​पिता मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौज़ान, पिता इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल, पिता रहमान सावदी और बिलाल मोहम्मद, पिता अम्मार घाघा के रूप में हुई है। इससे एक दिन पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुवार को पुलिस अधिकारी ने बताया कि, इस बाबत तीन आरोपियों को पंजाब से और एक को दिल्ली से पकड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने का काम सौंपा था। दिल्ली में आतंकी गतिविधि को देना चाहते थे अंजाम अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभदीप सिंह उर्फ विशाल (23), गुरजंत सिंह उर्फ ऋषि (22), साजन सिंह उर्फ हनी (28) और गगनप्रीत (24) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि ये आरोपी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके सहयोगियों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। बचने के लिए विदेशी नंबरों का कर रहे थे इस्तेमाल एक अधिकारी ने बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी अपने पाकिस्तानी आकाओं द्वारा मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सशस्त्र कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों से इतने हथियार बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से एक जिगाना पिस्तौल, एक .30 बोर पिस्तौल, नौ कारतूस और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि विशेष प्रकोष्ठ को खुफिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान स्थित आईएसआई एजेंट शहजाद भट्टी अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहा है और इसके लिए उसने पंजाब के युवाओं को भर्ती किया है।

EPFO Portal Update: अब वेबसाइट से नहीं होगा UAN एक्टिवेशन, एक हफ्ते बाद पोर्टल खुला; जानें क्या बदला

 नई दिल्‍ली कई बार डेडलाइन बढ़ाने और 8 दिनों तक लगातार बंद रखने के बाद फाइनली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट को फिर से बहाल कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई सर्विसेज को यूज करने में थोड़ी दिक्‍कत आ सकती है।  EPFO ने अपने पोर्टल पर जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि सर्विस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और मेंबर एक्‍सप्रीएंस को बेहतर बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण डेटाबेस और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. सदस्‍य और नियोक्‍ता सर्विस सही तरीके से शुरू कर दी गई हैं और उपयोग के लिए उपलब्‍ध हैं।  EPFO ने आगे कहा कि क्‍लेम और सर्विस रिक्वेस्‍ट को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से प्रॉसेस किया जाएगा. साथ ही शुरुआती 2 सप्ताह की अवधि के दौरान सटीकता तय करने के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन और अथेंटिफिकेशन जांच भी की जाएगी।  EPFO ने स्पष्ट किया है कि अब UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा पूरी तरह UMANG App पर शिफ्ट कर दी गई है, यानी अगर किसी कर्मचारी को अपना UAN एक्टिवेट करना है या पहली बार UAN बनवाना है, तो उसे अब EPFO पोर्टल की बजाय UMANG ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इस प्रक्रिया में आधार आधारित Face Authentication (FAT) का उपयोग किया जाएगा, जिससे पहचान की पुष्टि अधिक सुरक्षित और आसान होगी। अगर आपका UAN अभी तक एक्टिव नहीं है, तो सबसे पहले अपने मोबाइल में UMANG App डाउनलोड करें। इसके बाद ऐप खोलकर EPFO Services में जाएं। यहां “UAN Services Through Face Auth” के अंदर “UAN Activation” विकल्प चुनें। फिर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। इसके बाद आपका UAN सफलतापूर्वक एक्टिवेट हो जाएगा। पहले EPFO पोर्टल के जरिए सीधे नया UAN बनाया जा सकता था, लेकिन अब यह सुविधा भी वेबसाइट से हटा दी गई है। अगर किसी कर्मचारी का PF अकाउंट है लेकिन अभी तक UAN नहीं बना है, तो वह UMANG App में “UAN Allotment and Activation” विकल्प चुनकर अपना नया UAN प्राप्त कर सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर सत्यापित करना होगा, आवश्यक सदस्य विवरण भरना होगा और आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा। नए EPFO पोर्टल पर UAN Retrieval की प्रक्रिया पहले से कहीं आसान कर दी गई है। अगर आपको अपना UAN याद नहीं है, तो पोर्टल पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और मांगे गए पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके आप आसानी से अपना UAN दोबारा प्राप्त कर सकते हैं। EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है किडेथ क्लेम यानी सदस्य की मृत्यु के बाद क्लेम करने की सुविधा अभी भी यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर उपलब्ध रहेगी। नामांकित व्यक्ति (Nominee) या लाभार्थी पेंशन और अन्य दावों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए और बैंक खाते की जानकारी तैयार रखनी होगी। आवेदन के दौरान मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और जन्म तिथि का प्रमाण जैसे दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे। हर फाइल का साइज 2 MB से कम होना चाहिए और फाइल के नाम में स्पेस नहीं होना चाहिए। UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) भारत सरकार का आधिकारिक मोबाइल ऐप है, जिसके जरिए नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। EPFO की अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं भी अब इसी ऐप के माध्यम से उपलब्ध हैं। इससे कर्मचारियों को EPFO कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और अधिकांश काम घर बैठे मोबाइल से ही पूरे किए जा सकेंगे। EPFO के नए पोर्टल और UMANG ऐप के जरिए सेवाओं को अधिक डिजिटल, सुरक्षित और आसान बनाने की कोशिश की गई है। अगर आप EPF सदस्य हैं, तो अब UAN से जुड़ी सेवाओं के लिए UMANG ऐप का इस्तेमाल करना ही सबसे आसान और आधिकारिक तरीका होगा। ईपीएफओ ने दी ये सलाह सदस्यों और नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वे धैर्य रखें, क्योंकि इस अवधि के दौरान क्‍लेम्‍स और कुछ सेवाओं के प्रॉसेस में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है. सदस्यों से यह भी अनुरोध है कि वे व्यस्त समय के दौरान ऑनलाइन सेवाओं का बार-बार उपयोग करने या बार-बार अनुरोध करने से बचें. EPFO अपने सभी सदस्‍यों के धैर्य और सहयोग की सराहना करता है और अपने सभी सदस्‍यों के लिए सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।  क्‍या-क्‍या चीजें हुईं अपडेट?  ईपीएफओ ने सिर्फ इतनी जानकारी दी है कि सभी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर दिया गया है. हालांकि, उसने इस चीज की जानकारी नहीं दी कि क्‍या-क्‍या नई चीजें शुरू हुई हैं या क्‍लेम या अन्‍य प्रॉसेस अब कितना आसान हो जाएगा? सिर्फ इतना बताया गया है कि मेंटेनेस काम और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है।  एक हफ्ते तक बंद थी साइट  ईपीएफओ की वेबसाइट पिछले 7 दिनों से बंद की गई थी. ईपीएफओ का कहना है कि यह सर्विस इसलिए बंद थी, क्‍योंकि वह जरूरी डेटा और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा था, ताकि सदस्‍यों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।   गौरतलब है कि शुरुआत में, ईपीएफओ ने कहा था कि मेंटेनेस के लिए 28 जून को समाप्त हो जाएगा और सेवाएं 29 जून को फिर से शुरू हो जाएंगी. बाद में उसने समयसीमा में संशोधन किया और डेडलाइन को 1 जुलाई की रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया, और अंत में घोषणा की कि सेवाएं 3 जुलाई, 2026 को फिर से शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज दोपहर बाद ये सेवाएं बहाल की गई हैं। 

PM मोदी के बाद कौन संभाल सकता है कमान? अमित शाह, योगी समेत कई नामों पर सर्वे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 से प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाल रहे हैं। हाल ही में वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह हमेशा चर्चा का मुद्दा रहता है कि भारतीय जनता पार्टी में उनके बाद इस पद को कौन संभाल सकता है। हालांकि, भाजपा नेता पीएम मोदी के ही लगातार नेतृत्व की बात करते रहे हैं। हाल ही में उनके उत्तराधिकारी को लेकर एक पोल किया गया था। लाइव हिन्दुस्तान की तरफ से जून में पोल किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के संभावित उम्मीदवार को लेकर जनता की राय पूछी गई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस रेस में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चल रहे हैं। पोल में शामिल आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने उनके नाम का चुनाव किया है। क्या रहे नतीजे पोल के मुताबिक, 58 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाई। जबकि, 22 प्रतिशत लोग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में थे। 5 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी और 3 फीसदी लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नाम का विकल्प चुना। जबकि, 9 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और नेता के विकल्प का चुनाव किया। PM मोदी के नाम रिकॉर्ड मोदी 10 जून को भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन चुके हैं। वह लगातार 4,399 दिन से इस पद पर हैं और उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में भी 9000 से भी अधिक दिन तक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नौ जून 2024 को शपथ ली थी। बने रहेंगे पीएम बीते साल अप्रैल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मोदी ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा था, 'यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के बारे में सोचने का सही समय नहीं है, क्योंकि 2029 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।' योगी आदित्यनाथ का क्या था जवाब बीते साल पीटीआई से बातचीत में भावी पीएम उम्मीदवार को लेकर आदित्यनाथ से सवाल किया गया था। तब उन्होंने कहा था, 'देखिए, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री हूं। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यहां लगाया है और राजनीति मेरा फुल टाइम जॉब नहीं है। फिलहाल, हम यहां काम कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं योगी हूं।'

राजनाथ सिंह के इस्तीफे की अटकलों के बीच सियासी हलचल, क्या अमित शाह को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

नई दिल्ली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है। आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें? 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है। लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन? कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

8वें वेतन आयोग में ₹69,000 न्यूनतम वेतन की चर्चा, 4.4 फैमिली यूनिट और HRA बढ़ाने की मांग क्यों?

नई दिल्ली 8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है? क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands) इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर 36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA) पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा। 25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA) AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है। मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count) 7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है। फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी। कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी? मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है। डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है। एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है। टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है। AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है। इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।