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फैमिली आईडी और रिकॉर्ड मिलान के साथ राशन डिपो की स्थिति की होगी जांच, डेटा होगा अपडेट

करनाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रदेशभर में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो का विशेष सत्यापन अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारियों और खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षकों को अगले चार दिनों के भीतर सभी राशन डिपो का रिकॉर्ड सत्यापित कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार से इसकी शुरुआत होगी। सरकार की ओर से इस अभियान का उद्देश्य विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध राशन डिपो से संबंधित जानकारी को पूरी तरह शुद्ध, प्रमाणित और अद्यतन करना है, ताकि भविष्य में सरकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक निर्णय लेने में सही एवं विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग किया जा सके। प्रदेश भर में राशन के करीब 9081 डिपो हैं। इनमें से करीब 9060 मैप भी किए जा चुके हैं। जबकि जिले में करीब 656 राशन डिपो हैं। इनसे करीब 4.72 लाख लोग राशन ले रहे हैं। अब इन सभी की जांच की जाएगी। फैमिली आईडी का भी होगा मिलान सत्यापन के दौरान प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान यानी डिपो की वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित डिपो वर्तमान में सक्रिय, रद्द, निलंबित (या स्वेच्छा से सरेंडर किया जा चुका है। अगर पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसे तत्काल अपडेट किया जाएगा। विभाग ने केवल डिपो की स्थिति की जांच तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। सत्यापन के दौरान प्रत्येक डिपो धारक की परिवार पहचान पत्र, पीपीपी यानी फैमिली आईडी और उसके परिवार के सदस्यों के विवरण का भी मिलान किया जाएगा। इससे विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्तिगत जानकारी की भी पुष्टि हो सकेगी और भविष्य में किसी प्रकार की विसंगति की संभावना कम होगी। चार चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया विभाग ने सत्यापन के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की है। सबसे पहले संबंधित क्षेत्र का खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक यानी आईएफएस अपने अधिकार क्षेत्र के सभी राशन डिपो का भौतिक एवं रिकॉर्ड सत्यापन करेगा और रिपोर्ट तैयार कर संबंधित सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी यानी एएफएसओ को भेजेगा। इसके बाद एएफएसओ रिपोर्ट की जांच कर अपनी टिप्पणियां दर्ज करेगा और उसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के पास भेजेगा। डीएफएससी पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद रिकॉर्ड को स्वीकृत या अस्वीकृत करेगा। जिन रिकॉर्ड को मंजूरी मिलेगी, उन्हें विभाग का क्लीन और प्रमाणित डेटा माना जाएगा, जबकि जिन मामलों में कोई त्रुटि मिलेगी, उन्हें दोबारा सत्यापन के लिए संबंधित निरीक्षक के पास भेज दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सभी अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अगले चार दिनों के भीतर सत्यापन, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर लें। विभाग का मानना है कि शुद्ध और प्रमाणित डेटा उपलब्ध होने से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और भविष्य में योजनाओं के बेहतर संचालन तथा नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होगी। -मुकेश कुमार, खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, करनाल।  

इजरायल में ट्रंप की लोकप्रियता को झटका, सिर्फ 11% लोगों ने माना युद्ध का विजेता

यरुशलम मिडिल-ईस्ट में हालिया संघर्ष के बाद सामने आए एक इजरायली चैनल के सर्वे ने वहां की राजनीति और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चैनल 12 के सर्वे के मुताबिक, बड़ी तादाद में इजरायली नागरिक न तो इस जंग में अपने देश को स्पष्ट विजेता मानते हैं और न ही उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वे ईरान के साथ किसी समझौते में इजरायल के हितों की रक्षा करेंगे।  सर्वे में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिससे इजरायल की घरेलू राजनीति में बढ़ती असंतुष्टि के संकेत मिले हैं।  गुरुवार को पब्लिश हुए एक टेलीविज़न पोल में पाया गया कि बहुत कम इजरायली मानते हैं कि उनका देश ईरान के साथ हुई लड़ाई जीता है, या उन्हें भरोसा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस्लामिक रिपब्लिक के साथ डील करते वक्त उनके हितों का ध्यान रखेंगे। . नेतन्याहू के बर्ताव पर सवाल! चैनल 12 न्यूज़ के मुताबिक, ज़्यादातर इजरायली नागरिकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायल के हितों को नुकसान पहुंचा है. ये आंकड़े उस मजबूत समर्थन से बिल्कुल अलग हैं, जो इजरायली लोग सालों से हर पोल में ट्रंप को देते आए हैं।   हालांकि, अब इस हफ्ते साइन किए गए US-ईरान मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की शर्तों को लेकर पूरे इजरायल में गहरी चिंता है, जबकि ट्रंप और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों की तरफ से हाल ही में इजरायली अधिकारियों की कड़ी सार्वजनिक आलोचना से US-इजरायल संबंधों में दरार का संकेत मिलता है।  चैनल 12 के पोल में यह पूछा गया कि क्या नेतन्याहू के बर्ताव से US-ईरान समझौते में इजरायली हितों को फायदा हुआ या नुकसान; इसमें पाया गया कि 52% लोगों का कहना है कि इससे नुकसान हुआ, जबकि 24% को लगता है कि इससे मदद मिली और बाकी 24% को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।  यह पूछे जाने पर कि क्या वे ईरान के साथ समझौते में इजरायली हितों का ध्यान रखने के लिए ट्रंप पर भरोसा करते हैं? इस पर 71% लोगों ने कहा कि वे ऐसा नहीं करते हैं, जबकि केवल 13% ने कहा कि वे ऐसा करते हैं और अन्य 16% को नहीं पता. ये संख्या पिछले हफ्ते से इस सवाल पर ट्रंप के लिए गिरावट का संकेत देती हैं, जब आंकड़ा 62% से 21% था।  इन सवालों को एक सर्वे के हिस्से के रूप में शामिल किया गया था कि अगर अक्टूबर में आम चुनाव आज होते हैं, तो इजरायल के लोग किसको वोट देंगे, जिसमें दिखाया गया है कि जायोनी विपक्षी दल नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेंगे, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से कम रहेंगे।  ‘बिबी का समर्थन करने की सबसे ज्यादा संभावना’ ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच मौजूदा मतभेद को और साफ करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि वे आने वाले चुनावों में नेतन्याहू का समर्थन 'शायद' करेंगे, लेकिन पहले यह देखना चाहते हैं कि उनके खिलाफ और कौन चुनाव लड़ रहा है।  ट्रंप ने 'कान' (Kan) पब्लिक ब्रॉडकास्टर को फोन पर दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू के निकनेम का इस्तेमाल करते हुए कहा, "मुझे देखना होगा कि कौन चुनाव लड़ रहा है, लेकिन मुझे बिबी बहुत पसंद हैं. सबसे ज्यादा संभावना यही है कि मैं उनका समर्थन करूंगा।  ट्रंप ने आगे कहा, "वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा और समझदारी से काम लेना चाहिए." ऐसा लगता है कि वे लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमलों का जिक्र कर रहे थे, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि वे बिना सोचे-समझे किए गए थे।   

लखनऊ से झांसी तक बेहतर सड़क संपर्क, औद्योगिक विकास और निवेश को मिलेगी रफ्तार

लखनऊ झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारे और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए 106 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों तक आवागमन आसान होगा। परियोजना से क्षेत्र में निवेश, रोजगार, माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, रक्षा गलियारा और बुंदेलखंड औद्योगिक विकास क्षेत्र (बीडा) से बेहतर कनेक्टिविटी देगी। इससे झांसी, जालौन और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क संपर्कता मजबूत होगी। झांसी सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ जाएगी। दिल्ली, लखनऊ, आगरा और पूर्वांचल की ओर आवागमन आसान हो जाएगा। यूपीडा के निविदा दस्तावेजों के अनुसार, पहला खंड 50 किलोमीटर लंबा होगा।   यह जालौन जिले के फूलपुरा के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के चेनज 170+300 से शुरू होकर झांसी जिले के पिपरा गांव तक जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 2262.28 करोड़ रुपये है। दूसरा खंड 56.3 किलोमीटर लंबा होगा, जिसकी अनुमानित लागत 2,739.46 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। पिछले वर्ष ड्रोन सर्वे के दौरान 63 गांवों को चिह्नित किया गया था। परियोजना का महत्व यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। मालवहन और कृषि उत्पादों के परिवहन में भी सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण और रक्षा औद्योगिक गलियारे को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा।   लागत और अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना झांसी लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत करीब 47.05 करोड़ रुपये है। प्रति किलोमीटर लागत के हिसाब से यह उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे महंगा एक्सप्रेसवे है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पहले स्थान पर है, जिसकी प्रति किलोमीटर लागत करीब 64 करोड़ रुपये है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 50 करोड़ रुपये है। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे की प्रति किलोमीटर लागत 33.9 करोड़ रुपये है।  

शिक्षक तबादला प्रक्रिया शुरू, लेकिन नई ट्रांसफर नीति से नाराजगी; शुक्रवार से आवेदन आमंत्रित

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे। पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है। 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है। जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा। नियमों में राहत की मांग शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।  

Punjab Weather Update: बारिश की दस्तक के साथ आंधी-तूफान की चेतावनी, 21 जून तक येलो अलर्ट

लुधियाना  पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में मौसम को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। 22 जून तक येलो अलर्ट जारी रहेगा। इस दौरान गरज चमक के साथ छीटे पड़ने, धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। इससे पहले वीरवार भी मौसम का येलो अलर्ट रहा लेकिन विभिन्न जिलों में दिन में धूप निकली और बीच-बीच में बादल भी हने। इस दौरान हवाएं भी जारी रही। जिला बठिंडा में दिन का तापमान सबसे अधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। खराब मौसम के बीच आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह  मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और बादलों की आवाजाही के कारण अगले कुछ दिनों में तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम विभाग ने किसानों और आम लोगों को मौसम से जुड़े ताजा अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, राज्य के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके बावजूद पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि तापमान अभी भी सामान्य के आसपास बना हुआ है। राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान बठिंडा में 42.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज और बदलेगा तथा बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके बाद पटियाला का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस, पठानकोट और फरीदकोट का तापमान क्रमश 39.5 डिग्री सेल्सियस, रूपनगर का तापमान 39 डिग्री सेल्सियस, फिरोजपुर का तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस, लुधियाना का तापमान 38.6 डिग्री सेल्सियस रहा। चौबीस घंटे में राज्य का औसतन तापमान 1.2 डिगरी सेल्सियस बढ़ा है जोकि सामान्य के नजदीक रहा है। मौसम केंद्र चंडीगढ़ के पूर्वानुमान अनुसार 22 जून तक मौसम का येलो अलर्ट रहेगा। इस दौरान राज्य के कुछ कुछ हिस्सों में गरज चमक के साथ छींटें पड़ने की संभावना है। कुछ जगह पर 40-50 किमी की गति के साथ धूल भरी आंधी भी चल सकती है।  

चंदा चोरी विवाद पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, कहा—SIT जांच सच सामने लाएगी

अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जनपद के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सहित ₹378 करोड़ से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने वहां वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण भी किया. मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल संघर्ष हुआ है, इसलिए कोई भी अयोध्या को बदनाम न करे. किसी के पास चंदा चोरी का कोई सबूत है तो वह एसआईटी को दे, इसकी पूरी जांच और सख्त एक्शन होगा।  अयोध्या को बदनाम करने वालों पर बरसे सीएम सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले लोग केवल बदनाम करने का काम कर रहे हैं. इनका आचरण सबके सामने है, जिन्होंने कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं, श्री राम बोलने पर लाठियां चलवाईं और कोर्ट में प्रभु राम के खिलाफ केस लड़े।  मुख्यमंत्री ने नसीहत दी कि जांच रिपोर्ट आने तक कोई भी इस मामले में बयानबाजी न करे और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करे. उन्होंने भरोसा दिया कि अगर कोई अपराधी है तो वह बचेगा नहीं, यह पूरी तरह कन्फर्म है।  बकौल सीएम योगी- सबको अपनी जिम्मेदारी का दायित्व निभाना होगा. जिम्मेदारी का दायित्व निभायेंगे तभी विकास होगा. सपा जय श्री राम कहने पर गोली चलवाती थी. हमने ट्रस्ट की मांग पर SIT बनवाई. जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा. हां, अगर… किसी के पास कोई सुबूत हो तो SIT को दे. लेकिन बयानबाजी से अयोध्या का अपमान न करे. जनता अपमान करने वालों से सावधान रहे।  बेटियों के लिए पीएसी की 3 नई बटालियन अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों और वीरांगनाओं के प्रति श्रद्धा भाव को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया. उन्होंने घोषणा की कि डबल इंजन की सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई और उदा देवी के सम्मान में कई अभियान शुरू किए हैं. इसी कड़ी में सरकार ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई कोरी और वीरांगना उदादेवी पासी के नाम पर पीएसी की तीन नई बटालियन गठित की हैं. सबसे खास बात यह है कि इन तीनों बटालियन में केवल बेटियों की ही भर्ती की जाएगी। 

लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में जजों की भागीदारी वाले वायरल दावे को लेकर विवाद

नई दिल्ली  भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने ऑनलाइन वायरल हो रही फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। फेक खबर में दावा किया जा रहा था कि इस महीने लंदन में हुए बैडमिंटन टूर्नामेंट में कई दर्जन भारतीय जजों ने भाग लिया।दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को शुक्रवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। क्या है लंदन में जजों के खेलने का पूरा मामला खबरों के मुताबिक, काफी संख्या में न्यायाधीश और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे। 7 जून को लंदन के साउथॉल में भारत और ब्रिटेन के वकीलों के लिए एक 'अंतरराष्ट्रीय' बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि इसका आयोजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक अबंतिका डेका ने किया था। इस कार्यक्रम को भारत के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने भी प्रायोजित किया था। देखते ही देश में शुरू हो गई बहस हालांकि, इस आयोजन की आलोचना के साथ ही देश में एक नया मुद्दा सामने आ गया। वकील प्रशांत भूषण ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवालों की बौछार कर दी थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, 'कानून मंत्रालय द्वारा लंदन में आज भारतीय न्यायाधीशों और वकीलों के बीच एक अद्भुत बैडमिंटन टूर्नामेंट प्रायोजित किया जा रहा है! अन्य प्रायोजक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियां हैं। मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जा रहा है! 150 न्यायाधीश और वकील भाग ले रहे हैं! प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील का क्या हुआ? न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ? घिनौना!' वहीं, सोशल मीडिया पर फिजूलखर्ची को लेकर केंद्र सरकार पर एक से बढ़कर एक आरोप लगने लगे। आज ही होगी सुनवाई शुक्रवार को अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। भारतीय बैडमिंटन संघ ने इस वायरल खबर को ही नकार दिया है। इसी मामले की सुनवाई के निए उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने भी केस की गंभीरता और न्यायाधीशों की शुचिता का ख्याल रखते हुए इस मुकदमे की तत्काल सुनवाई करना तय किया है।  

पटना साइंस कॉलेज समेत प्रमुख संस्थानों में शाम की पढ़ाई शुरू करने का शिक्षा विभाग का प्रस्ताव

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पटना स्थिति एएन कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएम ने अनुग्रह बाबू की जयंती सह कॉलेज के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में घोषणा की। इसके साथ शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि पटना साइंस कॉलेज समेत 10 प्रमुख कॉलेजों में इवनिंग पढ़ाई शुरू होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने पटना साइंस कॉलेज सहित राज्य के 10 प्रमुख महाविद्यालयों में इवनिंग कक्षाओं के संचालन का प्रस्ताव राज्यपाल सचिवालय को भेजा है। इसमें छह कॉलेज पटना व अन्य चार कॉलेज अलग-अलग जिलों में स्थित है। विभाग की ओर से कहा कि इससे बड़ी संख्या में छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिल सकेगा। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य के कुछ प्रमुख महाविद्यालय अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिष्ठा के कारण छात्रों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। ऐसे में इन संस्थानों की उपलब्ध संसाधनों और अधोसंरचना का बेहतर उपयोग करते हुए इवनिंग कॉलेज शुरू किया जाना उपयोगी होगा। इन कॉलेजों में होगी पढ़ाई पटना साइंस कॉलेज, एएन कॉलेज, बीएन कॉलेज, मगध महिला कॉलेज, कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस, जेडी वीमेंस कॉलेज, एमएस कॉलेज मोतिहारी, एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर, टीएनबी कॉलेज भागलपुर और सीएम साइंस कॉलेज दरभंगा में इवनिंग क्लासेज की व्यवस्था जल्द शुरू होगी। यह व्यवस्था शुरू होने से कामकाजी लोगों को पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा और संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा। बिहार में पूर्व में भी इवनिंग पढ़ाई की व्यवस्था चल रही थी। संध्या क्लास में रोजगार परक पढ़ाई को भी शामिल किया जाएगा। महिलाओं को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा। 10 दिनों में एएन कॉलेज कैंपस से हटेगा थाना इधर, एएन कॉलेज स्थिति पुलिस थाना को जल्द शिफ्ट किया जाएगा। इलाके में सुरक्षा प्रबंधों के नजरिए से इस थाना को स्थापित किया गया था। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि दस दिनों में थाने को नए स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ होती है। आम लोगों को चाहिए कि अपनी कमाई का कुछ हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में लगाना चाहिए। सीएम ने कॉलेज की पत्रिका अनुग्रह ज्योति का लोकार्पण भी किया। उन्होने कहा कि सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने की दिशा में काम कर रही है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की भर्ती, संसानों का विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ का कृषि मॉडल बना मिसाल, सीख लेने महाराष्ट्र से पहुंचा विधायकों का प्रतिनिधिमंडल

किसान हितैषी नीतियों ने दिलाई छत्तीसगढ़ को नई पहचान: छत्तीसगढ़ के कृषि विकास मॉडल का अध्ययन करने पहुंचा महाराष्ट्र का विधायक दल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसान हितैषी योजनाओं और कृषि विकास मॉडल का किया अध्ययन छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था की प्रतिनिधिमंडल ने की सराहना रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था, किसानों के हित में संचालित योजनाओं, कृषि क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और यहां की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला एवं संस्कृति के प्रतीक बस्तर आर्ट का स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ कृषि निवेश में सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष में लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है, जो देश में धान खरीदी के सबसे बड़े अभियानों में से एक है। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में लगभग 2700 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी की जाती है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्रों और गोदामों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए पंजीयन से लेकर धान तौल, परिवहन और भुगतान तक की प्रक्रिया को तकनीक आधारित और सरल बनाया गया है। किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री ने कृषक उन्नति योजना सहित राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी में वृद्धि हो रही है। चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के चार जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला समर्थन और प्रशासनिक प्रबंधन अत्यंत प्रभावी एवं अनुकरणीय है। राज्य में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने तथा खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण है। उन्होंने इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक क्षेत्रों में भी ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्यों के बीच अनुभवों और सफल मॉडलों का आदान-प्रदान देश के कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण से राज्यों को एक-दूसरे के सफल अनुभवों से सीखने और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने का अवसर मिलता है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, महाराष्ट्र के विधायक डॉ. परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, राजू कारेमोरे एवं संजय पुराम, छत्तीसगढ़ मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

रुदौली में झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण, विपक्ष पर सीएम योगी का हमला

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जनपद के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सहित ₹378 करोड़ से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. उन्होंने वहां वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा का अनावरण भी किया. मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अयोध्या में चंदा चोरी के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल संघर्ष हुआ है, इसलिए कोई भी अयोध्या को बदनाम न करे. किसी के पास चंदा चोरी का कोई सबूत है तो वह एसआईटी को दे, इसकी पूरी जांच और सख्त एक्शन होगा. अयोध्या को बदनाम करने वालों पर बरसे सीएम सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले लोग केवल बदनाम करने का काम कर रहे हैं. इनका आचरण सबके सामने है, जिन्होंने कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाईं, श्री राम बोलने पर लाठियां चलवाईं और कोर्ट में प्रभु राम के खिलाफ केस लड़े.  मुख्यमंत्री ने नसीहत दी कि जांच रिपोर्ट आने तक कोई भी इस मामले में बयानबाजी न करे और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करे. उन्होंने भरोसा दिया कि अगर कोई अपराधी है तो वह बचेगा नहीं, यह पूरी तरह कन्फर्म है. बकौल सीएम योगी- सबको अपनी जिम्मेदारी का दायित्व निभाना होगा. जिम्मेदारी का दायित्व निभायेंगे तभी विकास होगा. सपा जय श्री राम कहने पर गोली चलवाती थी. हमने ट्रस्ट की मांग पर SIT बनवाई. जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा. हां, अगर… किसी के पास कोई सुबूत हो तो SIT को दे. लेकिन बयानबाजी से अयोध्या का अपमान न करे. जनता अपमान करने वालों से सावधान रहे. बेटियों के लिए पीएसी की 3 नई बटालियन अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रनायकों और वीरांगनाओं के प्रति श्रद्धा भाव को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया. उन्होंने घोषणा की कि डबल इंजन की सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई, महारानी दुर्गावती, अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई और उदा देवी के सम्मान में कई अभियान शुरू किए हैं. इसी कड़ी में सरकार ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, झलकारी बाई कोरी और वीरांगना उदादेवी पासी के नाम पर पीएसी की तीन नई बटालियन गठित की हैं. सबसे खास बात यह है कि इन तीनों बटालियन में केवल बेटियों की ही भर्ती की जाएगी.