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स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग पार करना पड़ेगा भारी, अमृतसर में AI कैमरे रखेंगे नजर

अमृतसर अमृतसर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सावधान रहने का समय आ गया है। अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने आज से ऑनलाइन चालान प्रणाली को लागू कर दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों और प्रमुख चौकों पर लगे लगभग 1300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी। आज से उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से ऑनलाइन चालान जारी किया जाएगा। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अमनदीप कौर ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले परीक्षण आधार पर शुरू किया गया था औ अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक सिग्नलों पर निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे ही अपने वाहन रोकें। यातायात पुलिस के अनुसार यदि कोई वाहन चालक स्टॉप लाइन पार करता है या जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करता है तो उसका ऑनलाइन चालान स्वतः दर्ज हो जाएगा। 1300 हाईटैक कैमरे रखेंगे नजर शहर में स्थापित तकरीबन 1300 कैमरे आधुनिक कैमरे दूर से ही वाहन नंबर पढ़ने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे पूरी चालान प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संचालित की जा सकेगी। यातायात पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही चौकों पर लगने वाले जाम और अव्यवस्था को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जानें किन 7 चौको पर शुरू हुआ ई-चालान अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में यह प्रणाली शहर के कुछ प्रमुख चौकों पर लागू की जाएगी। इनमें नोवेल्टी चौक, क्रिस्टल चौक, न्यू रियाल्टो चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, भंडारी पुल और क्वींस रोड क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने के कारण नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और स्टॉप लाइन तथा जेब्रा क्रॉसिंग का सम्मान करें, ताकि अनावश्यक चालान से बचा जा सके।

MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा सस्पेंस, कमलनाथ या किसी बाहरी चेहरे पर दांव लगाएगी कांग्रेस?

भोपाल  मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है। यह सीट दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से मना कर चुके हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ को राज्यसभा भेजा सकता है। बुधवार को नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की तीन सीटें हो रही हैं खाली मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी की हैं। जनवरी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि वह मध्य प्रदेश से जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की एकमात्र सीट खाली कर देंगे। उम्मीदवारों की है लंबी सूची प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए एआईसीसी के पास उम्मीदवारों की एक लंबी सूची है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, पूर्व राज्यसभा सांसद बी के हरिप्रसाद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। कांग्रेस की आएंगी पांच सीटें वहीं, इस रेस में कमलनाथ का नाम शामिल होता है तो इससे चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि राज्यसभा की कुल 26 सीटें खाली होने के बावजूद कांग्रेस के हिस्से में केवल पांच सीटें ही आएंगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही है। ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस में नहीं मिला कोई पद दरअसल, 2022-23 में कमलनाथ को कथित रूप से एआईसीसी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव मिला था। 2024 में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को बीजेपी में जाने की चर्चा हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस में उन्हें कोई पद नहीं मिला है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके हैं। अपनी सीट उन्होंने बेटे के लिए छोड़ दी थी लेकिन 2024 में नकुलनाथ चुनाव हार गए। माना जा रहा है प्रबल दावेदार वहीं, दिग्विजय सिंह के बाद मध्य प्रदेश के कमलनाथ ही कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनके नाम पर उम्मीद की जा सकती है कि क्रॉस वोटिंग न हो। इसी साल मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस के लिए क्रॉस-वोटिंग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को शायद ही 61 विधायकों का समर्थन मिल पाए। दो विधायक हैं वोट से वंचित मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है। तीसरी एमलए निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दल बदल का मामला लंबित है। ऐसे में हो सकता है कि वह भी वोट न दें। एमपी से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास इस आंकड़े से सिर्फ तीन वोट अधिक हैं। इसलिए स्थिति नाजुक है। बीजेपी के पास हैं 165 विधायक वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। ऐसे में दो सीटों पर उनकी जीत पक्की है। इसके बाद उनके पास 49 विधायक बचते हैं। राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी होती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर चुनाव करवाने का मौका भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! अपने बूथ पर ही पिछड़े TMC नेता, EC रिपोर्ट ने खोली पोल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मजबूत किलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि टीएमसी के प्रमुख 36 नेताओं में से केवल 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाए हैं। टीएमसी 22 दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज कर सके। भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का दबदबा भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। यह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं। ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन बूथ संख्या 207 पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट बचाने के लिए नाकाफी रहा। ममता केवल 54 बूथों पर 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ ऐसे थे जहां उन्हें 80% से अधिक वोट मिले। 3 मंत्रियों को नहीं मिला 15% बूथों पर भी समर्थन टीएमसी के चार प्रमुख चेहरे और मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन टीएमसी मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज की। अपने ही घर में घिरे नेता आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता अपने घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिली। कुल मिलाकर, अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट जीत पाए। भाजपा की रणनीति रही सफल आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक जीत दर्ज की। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे सीट जीतने में कामयाब रहे। भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हरा दिया, जबकि सिकदार केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे। जीत का बड़ा अंतर जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हारे, उनमें से 16 सीटों पर आधे से अधिक पोलिंग बूथों में भाजपा उम्मीदवार और टीएमसी उम्मीदवार के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का फासला था। दूसरी तरफ, टीएमसी के जो 14 प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) शामिल हैं। ये दोनों नेता अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर भाजपा से 10% से अधिक वोटों से पिछड़ने के बावजूद अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए सबसे एकतरफा और बड़ी जीत गोलपोखर में मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर में सबीना यास्मिन की सीटों पर दर्ज की गई।

गौतम गंभीर का भी होगा रिप्लेसमेंट! टीम इंडिया में जल्द दिख सकते हैं कई बड़े बदलाव

नई दिल्ली इस साल सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स में क्रिकेट भी खेला जाएगा, लेकिन इन खेलों में भारत की जो टी20 टीम जाएगी उसके कप्तान सूर्यकुमार यादव नहीं होंगे। इन खेलों के लिए बीसीसीआई ने जो संभावित क्रिकेटरों की लिस्ट दी है उसमें सूर्यकुमार का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में वैभव सूर्यवंशी का नाम जरूर है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, वैभव ने आईपीएल-2026 में शानदार खेल दिखाया है और 16 मैचों में 776 रन बनाए हैं। उनकी टीम राजस्थान रॉयल्स का सफर शुक्रवार को गुजरात टाइटंस के दूसरे क्वालिफायर में हार के बाद खत्म हो गया। हालांकि, इस प्रदर्शन के बाद उनको भारतीय टीम में जल्दी मौका देने की मांग उठ रही है। संभावित खिलाड़ियों की लिस्ट में वैभव के अलावा श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, यशस्वी जायसवाल के नाम भी शामिल हैं। भारतीय बोर्ड 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के लिए टीम इंडिया का एलान जल्द ही कर सकता है। 30 क्रिकेटरों में से चुनी जाएगी टीम बीसीसीआई ने इन खेलों के लिए कुल 30 खिलाड़ियों की लिस्ट सौंपी है जिसमें से 15 खिलाड़ी चुने जाएंगे। ये लिस्ट आयोजकों को भेजी जा चुकी है। 2023 में जब एशियन गेम्स हुए थे तब ऋतुराज गायकवाड़ ने भारतीय टीम की कप्तानी की थी और गोल्ड मेडल दिलाया था। उस टीम के नौ सदस्य भी लिस्ट में है जिनमें गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। लक्ष्मण होंगे कोच इन खेलों के लिए सिर्फ कप्तानी में बदलाव देखने को नहीं मिलेगा बल्कि कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव होगा। टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर एशियान गेम्स में नहीं जाएंगे। उनकी जगह बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में काम कर रहे वीवीएस. लक्ष्मण हेड कोच की जिम्मेदारी निभाएंगे। गंभीर का नाम लिस्ट में नहीं है। उनकी जगह लक्ष्मण को जगह मिली है। एशियाई खेलों में 24 सितंबर से तीन अक्टूबर के बीच क्रिकेट का आयोजन होगा। एशियन गेम्स से पहले भी टीम में आ सकते हैं वैभव वैभव ने आईपीएल में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए वह एशियन गेम्स से पहले भी टीम में आ सकते हैं। भारत को 26 जून से आयरलैंड का दौरा करना है और टी20 सीरीज खेलनी है। बहुत संभावना है कि वैभव इस टीम का हिस्सा हों। इस सीरीज के बाद भारत को इंग्लैंड, जिम्बाब्वे के खिलाफ भी सीरीज खेलनी है। एशियन गेम्स के लिए चुने गए संभावित क्रिकेटर: ईशान किशन, वरुण चक्रवर्ती, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, अभिषेक शर्मा, अनुकूल रॉय, अर्शदीप सिंह, अक्षर पटेल, आयुष बडोनी, ध्रुव जुरेल, हार्दिक पंड्या, हर्ष दुबे, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद, कुलदीप यादव, नीतीश रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, रवि बिश्नोई, रिंकू सिंह, ऋतुराज गायकवाड़, संजू सैमसन, शाहबाज अहमद, शिवम दुबे, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी, विप्रज निगम, वॉशिंगटन सुंदर, यशस्वी जायसवाल, यश ठाकुर।

सावधान! नए LPG नियम लागू होते ही कैंसिल हो सकता है आपका सिलेंडर कनेक्शन

 नई दिल्‍ली एशिया संकट को देखते हुए कस्‍टमर्स को कोई दिक्‍कत नहीं आए, इसलिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं. इसी में से एक बदलाव 1 जून से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आपका सिलेंडर कनेक्‍शन कैंसिल हो सकता है।  दरअसल, देश में PNG का कनेक्‍शन बढ़ रहा है और सरकार द्वारा निर्देश देने के बावजूद LPG सिलेंडर का उपयोग कम नहीं हो रहा है. पीएनजी कनेक्‍शन मार्च तक 6.5 लाख नए कनेक्शन लगे हैं, लेकिन वास्‍तवकि आपूर्ति 18 फीसदी कम थी।  इससे पता चलता है कि कई परिवारों ने वास्‍तव में स्विच किए बिना ही कनेक्‍शन ले लिया है, जबकि सरकार ने कहा है कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा. हालांकि, इसके बावजूद ही लोग पीएनजी का कनेक्‍शन ले रहे हैं, लेकिन एलपीजी को सरेंडर नहीं कर रहे हैं।  पिछले एक दशक में एलपीजी यूजर्स की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.5 करोड़ हो गई है, जबकि पीएनजी यूजर्स की संख्या केवल 1.64 करोड़ ही बनी हुई है. इस स्थिति में सरकार जल्‍द से जल्‍द बदलाव चाहती है और जून शुरू होने से पहले ही कड़े नियम लागू होने जा रहे हैं।  एक फैमिली, एक कनेक्‍शन नियम संशोधित नियम के तहत जिन परिवारों के पास पहले से ही PNG कनेक्‍शन हैं, उन्‍हें अपने एलपीजी कनेक्‍शन सरेंडर करने पड़ सकते हैं. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू सिलेंडरों के दुरुप्रयोग, जमाखोरी और कलाबाजारी को रोकने के लिए पीएनजी और एलपीजी दोनों का एक साथ उपयोग करने वाले घरों की पहचान करना शुरू कर दिया है।  एक ही एड्रेस पर दोनों कनेक्‍शन रखना संशोधित एलपीजी नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जा रहा है, जिन लोगों के इलाके में पीएनजी का इंफ्रा है, उन्‍हें तय समय के भीतर पीएनजी पर स्विच न करने पर एलपीजी आपूर्ति बंद या खुद रद्द होने का सामना करना पड़ सकता है।    LPG कनेक्‍शन ट्रांसफर पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्‍शन बंद करने के लिए कहा है, जिस कारण सरकार ने इन कस्‍टमर्स को अपना एलपीजी कनेक्‍शन बहाल करने की अनुमति दी है. इससे यूजर्स को बाद में उन सेक्‍टर्स में जाने पर भी एलपीजी कनेक्‍शन फिर एक्टिव करने की सुविधा मिलती है, जहां पीएनजी कनेक्‍शन उपलब्‍ध नहीं है।  जून से ही नहीं भरा जाएगा एलपीजी सिलेंडर इस महीने से, पीएनजी पाइपलाइनों वाले क्षेत्रों में स्थित घरों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक करने या रिफिल करने से रोका जा रहा है. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और ओएमसी ने अब अपने डिजिटल डेटाबेस को पूरी तरह से यूनिफाइड कर दिया है. वहीं पीएनजी कनेक्‍शन विस्‍तार के लिए 30 जून तक समय बढ़ा दिया गया है।  गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए डेडलाइन  आपूर्ति की कमी और दुरुपयोग को कंट्रोल करने के लिए शहरी यूजर्स के लिए एलपीजी रिफिल की लॉक-इन पीरियड 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण यूजर्स के लिए 45 दिनों तक कर दी गई है।  कनेक्शन, सब्सिडी नियम परिवारों को हर साल केवल 12 रियायती घरेलू सिलेंडर ही मिलते रहेंगे. अतिरिक्त सिलेंडरों का शुल्क मार्केट वैल्‍यू के अनुसार लिया जाएगा. नया एलपीजी कनेक्शन लेने पर अब संशोधित जमा राशि और सेटअप शुल्क लागू होंगे, जिनमें रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क शामिल हैं। 

‘विवाहित बेटी परिवार का हिस्सा है तो तलाकशुदा क्यों नहीं?’ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह साफ कर दिया है कि तलाकशुदा बेटी भी पिता के परिवार का हिस्सा होती है और संपत्ति में भी उसका अधिकार है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ होम गार्ड्स के डायरेक्टर जनरल के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट की तलाकशुदा बेटी को फैमिली पेंशन के लिए उनकी नॉमिनी मानने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट कहा है कि सरकारी कर्मचारी की तलाकशुदा बेटी को परिवार के सदस्य का दर्जा देने से इनकार करना, समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस विशाल धागत ने कहा कि जब एक शादीशुदा बेटी परिवार का सदस्य हो सकती है, तो एक तलाकशुदा बेटी क्यों नहीं हो सकती? यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता मृतक सरकारी कर्मचारी पर आश्रित थी तो फैमिली पेंशन के उसके आवेदन को मंजूर किया जाए। बेंच ने होमगार्ड्स डीजी से 90 दिन के अंदर इस संबंध में एक आदेश पारित करने को कहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, होम गार्ड्स डीजी ने याचिकाकर्ता ज्योति श्रीवास्तव को उनके पिता शंकरलाल श्रीवास्तव की फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी मानने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के मुताबिक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी के परिवार का हिस्सा नहीं होती है। याचिकाकर्ता के पिता शंकरलाल श्रीवास्तव का 2017 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी तलाकशुदा बेटी ज्योति ने फैमिली पेंशन पाने के लिए आवेदन किया था। होम गार्ड्स डीजी ने 16 दिसंबर 2021 को ज्योति के आवेदन को खारिज कर दिया था। डीजी के आदेश में कहा गया था कि पेंशन नियमों के अनुसार, एक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी पर आश्रित नहीं होती है। इसके बाद ज्योति ने होमगार्ड्स डीजी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बेटियों को समान व्यवहार मिलना चाहिए जस्टिस धागत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “पेंशन नियम 1976 के प्रावधानों को देखने पर यह पाया गया कि तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, विवाहित बेटियों को 1976 के पेंशन नियमों के नियम 44(5) के तहत परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है।” बेंच ने कहा कि अविवाहित बेटी, विवाहित बेटी या तलाकशुदा बेटी के बीच कोई अंतर नहीं है। ऐसा करना अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बेंच ने कहा कि यदि एक विवाहित बेटी को परिवार के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है, तो तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखने का कोई कारण नहीं है। जज ने कहा कि एक तलाकशुदा बेटी के साथ भी 1976 के नियमों के नियम 44(5) में बताई गई बेटियों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

ट्रंप परिवार का राजस्थान दौरा, चार्टर प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगी बेटी और दामाद

जैसलमेर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बोलस के साथ आज रविवार को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचेंगी। यह शाही जोड़ा चार्टर प्लेन से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। उनके इस हाई-प्रोफाइल और निजी दौरे को देखते हुए पर्यटन नगरी में सुरक्षा का अलर्ट जारी।  अपनी इस यात्रा के दौरान टिफनी ट्रंप जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करेंगी। वे यहां के विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (जैसलमेर फोर्ट), पटवों की हवेली और खूबसूरत गड़ीसर लेक देखने जाएंगी। सोमवार को उनका यहां से रवाना होने का कार्यक्रम है। अक्षरधाम और ताजमहल की खूबसूरती देखी भारत घूमने आईं टिफनी ट्रंप और उनके पति माइकल बोलस ने अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से की। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। टिफनी ने मंदिर की भव्यता और अद्भुत शिल्पकला की सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए जमकर तारीफ की। इसके बाद शनिवार को वह आगरा पहुंचीं, जहां उन्होंने दुनिया के सात अजूबों में शामिल 'ताजमहल' का दीदार किया। बॉर्डर का जिला होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, रूट डायवर्जन की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर जैसलमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा जिला होने और हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनके रुकने वाले संभावित स्थानों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। खुफिया एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यटन कारोबारियों में भारी उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की इस यात्रा से जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होटल व्यवसायियों और गाइडों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कारोबारियों का मानना है कि टिफनी ट्रंप के इस दौरे से वैश्विक स्तर पर जैसलमेर के पर्यटन को एक नई और बड़ी पहचान मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद आने वाले दिनों में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। स्वर्ण नगरी अपने पारंपरिक अंदाज 'पधारो म्हारे देस' के साथ इस खास विदेशी मेहमान के भव्य स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के एक और दामाद आ चुके हैं जैसलमेर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर नवंबर 2018 में जैसलमेर में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए थे। वह डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प के पति हैं। जारेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और तत्कालीन वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार) 22 से 25 नवंबर, 2018 को जैसलमेर रहे थे। वे सम रोड स्थित होटल सूर्यगढ़ में उद्योगपति संजय हिंदुजा की पत्नी अनु हिंदुजा के भाई नितिन संपाल की हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने जैसलमेर आए थे। जारेड कुशनर की सुरक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट्स कई दिन पहले ही जैसलमेर पहुंच गए थे। स्थानीय राजस्थान पुलिस और सीक्रेट सर्विस ने मिलकर होटल सूर्यगढ़ को एक किले में तब्दील कर दिया था।

MP सरकार में बदलाव की आहट, किन मंत्रियों पर गिरेगी गाज और कौन बनेगा नया चेहरा?

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) की तस्वीर बदलने जा रही है। जून के अंत तक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल (Major Cabinet Reshuffle) होना लगभग तय है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 5-6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो 7-8 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कैबिनेट में पहली बार बदलाव होने जा रहा है। कैबिनेट में इस समय मोहन यादव समेत कुल 31 सदस्य हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) कई बार दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातों के दौरान कैबिनेट में फेरबदल की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। 19 मई को मोहन यादव की मुलाकात जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई थी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी बुलाए गए थे। मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी शाह से मुलाकात हुई। वह पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में कैबिनेट के नए स्वरूप पर विस्तार से बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच कभी भी पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है और इसके तुरंत बाद शपथग्रहण होगा। कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा? कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं। भाजपा के पूर्व महासचिव रह चुके कैलाश विजयवर्गीय को जब विधनसभा चुनाव में उतारा गया था तो उन्हें संभावित मुख्यमंत्रियों की सूची में भी प्रमुखता से गिना जा रहा था, लेकिन बाजी मोहन यादव की लगी जो कहीं रेस में नहीं दिख रहे थे। और किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी मोहन यादव कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, उनमें सबसे प्रबल नाम विजय शाह का है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री को लेकर पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखी टिप्पणियां की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज्य मंत्री राधा सिंह, शहरी प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हो सकते हैं। नए चेहरों को मिल सकता है मौका कैबिनेट विस्तार में कई नए विधायकों और नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा है. पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए नामों का चयन कर सकती है. सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से कुछ नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके अलावा महिला, युवा और आदिवासी वर्ग को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर भी भाजपा विचार कर सकती है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है. इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला लिया जा सकता है. पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को और मजबूत बनाना है. ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कैबिनेट फेरबदल से कई नए राजनीतिक संदेश और समीकरण सामने आने की संभावना है।  किन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा सागर जिले से आने वाले विधायकों शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। महिला और आदिवासी समुदाय को भी साधने की कोशिश होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुराने कुछ मंत्रियों को हटाकर जहां नए चेहरों को जगह दी जाएगी, वहीं विभागों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा। कुछ मंत्रियों से मौजूदा विभाग लेकर नए मंत्रालय दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की है और इसी आधार पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

MP का डिंडौरी बना जल संरक्षण का मॉडल, 55 जिलों को पछाड़ देश में हासिल किया दूसरा स्थान

 डिंडौरी मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल डिंडौरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है. राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों के अनुसार डिंडौरी ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. साथ ही मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रथम स्थान हासिल कर जिले ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।  ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें जल संरक्षण का महत्व समझाया। उन्हें बताया गया कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने दो गांवों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं। यहां हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। जिला प्रशासन की इस पहल को देशभर में जनभागीदारी आधारित जल प्रबंधन के प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. डिंडौरी की यह उपलब्धि न केवल जल संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है. डिंडौरी जिले में शासन के निर्देशानुसार संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' एवं 'जन भागीदारी अभियान' के तहत जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं. जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं, नदियों, नालों, हैंडपंपों, ट्यूबवेल, बावड़ियों और तालाबों के आसपास व्यापक जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं, जिससे वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर बढ़ाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।  गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया। इसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे तथा घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। जमुना खैरवार ने बताया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। लेकिन सरपंच और अधिकारियों द्वारा यह समझाने पर कि थोड़ी मेहनत से पानी कैसे बचाया जा सकता है और धरती को रिचार्ज किया जा सकता है। उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बच सके। आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने बताया कि 'मां की बगिया' योजना के तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति (ड्रिप इरिगेशन) से पानी दिया जा रहा है। पेड़ों को टपक पद्धति से पानी देना का काम शुरू किया आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर कहती है कि ‘मां की बगिया’ के पांच हितग्राही है। एक बगिया में 15 नींबू और 35,आम के पेड़ लगवाए है। पानी को बचाने और पेड़ो को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया। इसके बाद उनको टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ो को पानी देने के बारे में बताया। अब हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई कर रहे हैं। जनभागीदारी से जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, अब पौधरोपण की तैयारी जनपद सदस्य धर्म सिंह धुर्वे, उपसरपंच रघु परस्ते बताते है कि गांव में चार तालाब, 12 स्टॉप डैम पहले से है। ग्रामीणों की मदद से इनका जीर्णोद्धार कराया है। 4पहाड़ियों मद लगभग साढ़े तीन सौ कंट्रूल ट्रेंच खुदवाए है। हैंड पंप के पास सोखता पिट और लीज फिट बनवाया गया ताकि निस्तार का पानी सीधे जमीन के नीचे जाए। अब बारिश में पहाड़ियों में भी जनभागीदारी से ही पौधरोपण करवाना है। पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अब स्वयं हमको उठानी पड़ेगी। ग्रामीण खुद के खर्चे से बना रहे जल संरचनाएं, टीम कर रही निगरानी अमरपुर जनपद के भाखा मॉल ग्राम पंचायत में लगभग 928 आवास है। 55 ग्रामीणों ने रेन वाटर सोखता गढ्ढा, 262 कंट्रूल ट्रेंच, 8 तालाबों का जीर्णोद्धार, 13 लीज फिट, 7 हितग्राहियों ने ‘एक बगिया मां’ के नाम पर आम नीबू के पौधे लगाकर टपकना, हांडी और स्लाइन बोतल के जरिए पौधों को पानी दे रहे है। एसिस्टेंट इंजीनियर प्रियंका ने बताया कि शुरुआती दौर में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष नहीं समझ रहे थे। चौपाल लगाकर जल के महत्व को समझाया और उसे धरती के नीचे समाहित करने की नसीहत दी। अब धीरे धीरे ग्रामीण अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं। भौगोलिक स्थिति ऐसी,वाटर टेबिल कम ,17 प्रतिशत सिंचित रकबा कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जिले की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है, लोग पठार और छोटे छोटे टोले में रहते है। जल शक्ति मंत्रालय ने वीडियो कांफ्रेंस की बैठक में मार्च के महीने में जन सहयोग से जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए निर्देशित किया था। जिले के अधिकारियों की बैठक कर प्लानिंग की। इसके बाद गांव गांव जाकर पानी चौपाल, रात्रि चौपाल लगाकर प्रेरित किया। इस कार्य में सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों का सहयोग मिला है। आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू जिला 6 लाख 89 हजार 113 जल संरचनाएं बनाकर पहले स्थान पर है। जबकि डिंडौरी दूसरे स्थान पर है। जल संरचनाओं के निर्माण से होगा फायदा, बड़ी संरचना बने तो बेहतर चंद्र विजय कालेज में भूगोल की प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि गौतम कहती है कि जिले की भौगोलिक स्थिति पठारी और उबड़ खाबड़ है। पथरीला होने के चलते पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है। छोटी छोटी जल संरचनाओं के निर्माण से कुछ फायदा तो होगा। बारिश का पानी सीधे नदी नालों में न जाकर रुक रुक कर जाएगा। हालांकि जिले में बड़ी संरचना बनने पर ही पानी की समस्या से पूर्णत निजात मिल सकेगी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित अभियान के अंतर्गत पहाड़ी एवं बंजर भूमि पर कंटूर ट्रेंच निर्माण, नदी-नालों में बोरी बंधान, ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सोखता टैंक तथा शासकीय और अर्धशासकीय भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग … Read more

खुल सकता है होर्मुज का रास्ता, तेल बाजार में खुशी की लहर; डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंचा क्रूड

नई दिल्‍ली  खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्‍द ही खत्‍म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्‍द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्‍ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्‍ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्‍द ही खत्‍म हो जाएगा।  ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्‍यादा की गिरावट दिख रही है. डब्‍ल्‍यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्‍ताह का सबसे निचला स्‍तर है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्‍यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है।  फिर सस्‍ता हो जाएगा क्रूड ग्‍लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्‍ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्‍द ही कच्‍चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्‍लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्‍व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्‍लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है।  भारत को सबसे बड़ी राहत होर्मुज जलडमरूमध्‍य का रास्‍ता खुलता है तो सबसे ज्‍यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्‍सा ईंधन इसी रास्‍ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्‍वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्‍ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्‍ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।  होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्‍चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्‍तेमाल यूरिया व अन्‍य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्‍क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्‍ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्‍होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्‍ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्‍तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।