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ईरान में अंतिम संस्कार जारी, ट्रंप बोले- ‘एक गोली से खत्म हो सकता है नेतृत्व’

 वाशिंगटन  ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को खुली धमकी दी है। ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका सिर्फ 'एक गोली' से वहां जुटे ईरान के बचे हुए सभू नेतृत्व को खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी नेता अब समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चल रहा है। इस शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भारत समेत दुनियाभर के प्रतिनिधि ईरान पहुंचे हुए हैं। नकली आंसू शनिवार को अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को रोते हुए देखा गया। इस पर ट्रंप ने अंतिम संस्कार में ईरानियों के रोने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि लोग खामेनेई से नफरत करते हैं हो सकता है ये नकली आंसू हों। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने खामेनेई के अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यक्रम समाप्त होने तक एक सप्ताह के लिए वार्ता स्थगित करने का निर्णय लिया है। ट्रंप ने कहा कि इस दौरान कोई भी पक्ष दूसरे पर हमला नहीं करेगा। 9 जुलाई को समाप्त होगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम गौरतलब है कि ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार की शुरुआत के लिए 4 जुलाई का दिन चुना। इस दिन अमेरिका अपनी स्वतंत्रता दिवस मनाता है। अंतिम संस्कार की रस्मों में 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर कोम में कार्यक्रम और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शामिल होंगे। यह 9 जुलाई को खामेनेई के गृह नगर, पूर्वोत्तर के पवित्र शहर मशहद में दफनाने के साथ समाप्त होगा। ईरान में लाखों लोगों की भीड़ खामनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लाखों लोग ईरान की सड़कों पर जमा हो रहे हैं। यह अंतिम संस्कार दुनिया भर में सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले आयोजनों में से एक बन गया है। एक सप्ताह की छुट्टी दी इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान को एक अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी दी है। ट्रंप ने कहा , "हमने वेनेजुएला को एक ही दिन में हरा दिया, और ईरान को बुरी तरह से मात दी, वे समझौता करने के लिए बेताब हैं। वे समझौता करना बहुत बुरी तरह से चाहते हैं। हमने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह की छुट्टी दी क्योंकि हम अच्छे लोग हैं।"  

जल संकट और अल-नीनो से पाकिस्तान पर दोहरी मार, भारत बोला- आतंकवाद रुके बिना पानी नहीं

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच जल को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक साल पहले भारत की ओर से सिंधु जल समझौता स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में हालात खराब हैं और मौजूदा अल नीनो संकट से उसकी मुसीबतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से कई बार बयानबाजी भी की जा रही हैं, लेकिन भारत ने दो टूक कहा है कि जब तक आतंकवाद जारी रहेगा पाकिस्तान को जल आपूर्ति बंद रहेगी। वहीं, इस साल पूरी दुनिया गंभीर अल-नीनो से जूझ रही है। इस कारण न केवल तापमान वृद्धि से तमाम देशों को जूझना पड़ रहा है, बल्कि अतिवृष्टि और अल्पवृष्टि का संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में सिंधु जल समझौते के स्थगित होने से पाकिस्तान को न तो भारत से जल मिल रहा है और न ही कोई सूचना। सिंधु बेसिन की नदियों में ज्यादा जल बढ़ने पर उनको छोड़ा जा रहा है और कम होने पर रोका जा रहा है। पाकिस्तान के अपने जल प्रबंधन की नाकामी भी उसकी दिक्कतें बढ़ा रही है, क्योंकि उसके पास जल भंडारण क्षमता बेहद सीमित है। किदवई डॉक्ट्रिन की चर्चा पाकिस्तान में जल संकट इतना है कि उसके नेता अब युद्ध और परमाणु हमले की बात कह रहे हैं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर में मात खा चुके पाकिस्तान को भी पता है कि उसने यदि एक भी गलती की तो भारत का पलटवार उसके लिए बेहद भारी पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान में किदवई डॉक्ट्रिन की काफी चर्चा है जो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के बारे में कुछ स्थितियों का उल्लेख करती है। पलटवार नहीं झेल पाएगा पाकिस्तान पाकिस्तान में इस तरह की कई स्थितियां बन रही हैं, पर वह यह भी जानता है कि भारत को उसके उन ठिकानों का पता है, जहां वह सटीक पलटवार कर उसकी रीढ़ तोड़ सकता है। इसलिए बयान देना अलग बात है, आगे बढ़ना अलग। दूसरी ओर, भारत ने सिंधु बेसिन में काफी तैयारियां की हैं। वह न केवल जल भंडारण बढ़ा रहा, बल्कि अपने क्षेत्रों में अधिकतम उपयोग भी कर रहा है। चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल लाएंगे भारत ने चेनाब पर दुलहस्ती बांध जल विद्युत परियोजना में 70 मीटर ऊंचे व 186 मीटर लंबे बांध में गाद हटाकर और टनल के जरिए ज्यादा भंडारण क्षमता हासिल कर ली है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना पूरी होने पर रावी का अतिरिक्त जल पाक नहीं जा सकेगा, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ व सांबा जिलों में मोड दिया जाएगा। चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल व्यास में लाया जाएगा।

कश्मीर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, शोपियां के बाग में घिरे लश्कर के दो खूंखार आतंकी

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार को भी एनकाउंटर जारी है। सुरक्षा बलों ने शनिवार से ही लश्कर-ए-तैयबा के दो खूंखार आतंकवादियों को घेर रखा है। ये दोनों आतंकी स्थानीय हैं। अभी भी मीमंदर इलाके के एक घने बाग के भीतर घिरे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है ताकि वे भाग न सकें। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया था कि दोनों आतंकी मारे गए हैं, लेकिन रविवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकियों को पकड़ने या उन्हें मार गिराने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है। सुरक्षा बलों की तकनीकी निगरानी के दौरान शुक्रवार को इन दोनों आतंकियों की गतिविधि मीमंदर इलाके में देखी गई थी। शनिवार को जब सेना की एक टीम तलाशी लेते हुए आगे बढ़ी, तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मुठभेड़ में बदल गई। एक A++ श्रेणी का कमांडर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फंसे दोनों आतंकियों की पहचान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासियों के रूप में हुई है। जाकिर गनी: यह लश्कर-ए-तैयबा का एक खूंखार ऑपरेटिव है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने A++ श्रेणी के आतंकवादियों की सूची में रखा है। जाकिर साल 2024 से घाटी में सक्रिय है और कई आतंकी मामलों में वॉन्टेड है। अक्टूबर 2025 में कुलगाम की एक एनआईए (NIA) अदालत ने उसके खिलाफ उद्घोषणा नोटिस भी जारी किया था। लतीफ भट: लतीफ पिछले साल ही इस आतंकी संगठन में शामिल हुआ था और जाकिर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था। विक्टर फोर्स ने संभाला मोर्चा गर्मियों के इस मौसम में बागों के घने पत्तों और पेड़ों के कारण सुरक्षा बलों को ब्लाइंड स्पॉट्स का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने मोर्चा संभाला है। इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात के समय आतंकियों के भागने की कोशिशों को रोकने के लिए पूरे बाग को हाई-बीम लाइटों से रोशन किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार शाम तक सेना ने आस-पास के चार गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया है, जबकि मुख्य घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है। क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन? शोपियां जिला ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल श्रृंखला से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। ऐसे में जाकिर गनी और लतीफ भट जैसे स्थानीय कमांडरों को बेअसर करना लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की नई भर्ती को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल, अंतिम रिपोर्ट मिलने तक दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

कैबिनेट विस्तार पर सस्पेंस: किन नेताओं की लग सकती है लॉटरी? BJP अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम तैयार

नई दिल्ली  मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी नई टीम का खाका तैयार कर चुके हैं. दो जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच एक बहुत अहम बैठक हुई. तीन घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग में सरकार और संगठन के नए चेहरों पर मुहर लगी है. यह रिशफल सिर्फ एक सामान्य बदलाव भर नहीं है. इसके पीछे बहुत बड़ी इलेक्शन रणनीति काम कर रही है. कई दिग्गज मंत्रियों की कुर्सी बदल सकती है. संगठन के कई पुराने नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है. यह सारी कवायद आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही है. खासकर उन राज्यों पर फोकस है जहां पार्टी को अपना दम दिखाना है. एनडीए के सहयोगियों को भी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. आइए जानते हैं कि इस बड़े बदलाव में किन नेताओं के आएंगे ‘बहुत अच्छे दिन।  क्या होगा नितिन नवीन की नई टीम का स्ट्रक्चर और रणनीति? नितिन नवीन महज 45 साल की उम्र में बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. उनकी नई टीम में कई युवा और फ्रेश चेहरे शामिल होने जा रहे हैं. संगठन के इस नए स्ट्रक्चर में अनुभव और नई पीढ़ी का एक शानदार बैलेंस देखने को मिलेगा. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव और केंद्रीय मीडिया टीम में नियुक्तियों पर अंतिम चर्चा हो रही है. इस नई टीम को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. उन राज्यों को सबसे ज्यादा तरजीह मिल रही है जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. पार्टी का पूरा फोकस जमीनी स्तर पर मजबूती लाने पर है।  कैबिनेट फेरबदल में किन दिग्गज मंत्रियों का बदल सकता है विभाग?     कैबिनेट रिशफल को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल बहुत तेज है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई केंद्रीय मंत्रियों को अब संगठन में भेजा जा सकता है. वहीं संगठन के कई दिग्गज नेताओं को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।      मौजूदा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल का नाम फाइनेंस मिनिस्टर के तौर पर सबसे आगे चल रहा है. गोयल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और उनका बैकग्राउंड देश की इकॉनमी को बहुत अच्छे से समझता है।      वहीं मौजूदा फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को एजुकेशन मिनिस्ट्री की कमान मिल सकती है. यह एजुकेशन सेक्टर भी सरकार के लिए बहुत अहम है और यहां बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत है।  क्या अनुराग ठाकुर की कैबिनेट में होगी एक शानदार वापसी? अनुराग सिंह ठाकुर के नाम पर भी दिल्ली में बहुत चर्चा हो रही है. उन्हें फिर से कैबिनेट रैंक के साथ एक बड़ा पोर्टफोलियो दिया जा सकता है. अनुराग का यूथ कनेक्शन उनके फेवर में काम कर रहा है. इसके अलावा पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी रेस में है. सरकार इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए बड़े टेक्नोक्रेट्स पर पूरा भरोसा जता सकती है।  पंजाब से तरुण चुघ को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उन्हें कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है जिससे पंजाब में पार्टी मजबूत हो. जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह भी नए चेहरों को मौका मिलेगा. इसमें हरदीप पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कुछ पुराने मंत्रियों को गवर्नर बनाकर अलग राज्यों में भेजा जा सकता है।  एनडीए सहयोगियों और नए चेहरों को मिलेगा कैबिनेट में बड़ा इनाम! मोदी कैबिनेट में एनडीए सहयोगियों को खुश रखने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राघव चड्ढा का नाम भी चर्चा में है. उन्हें पंजाब के कोटे से कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. इससे पंजाब में बीजेपी का ग्राफ ऊपर जाएगा।  शिवसेना गुट की ताकत भी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते श्रीकांत शिंदे या एकनाथ शिंदे के किसी करीबी नेता को मंत्री पद मिलना लगभग तय है।  जेडीयू चीफ नीतीश कुमार भी केंद्र में अपनी पार्टी के लिए बड़ा रोल चाहते हैं. उनकी डिमांड को देखते हुए जेडीयू का वजन कैबिनेट में बढ़ सकता है।  इसके साथ ही संजय दीना पाटिल को हेल्थ सेक्टर में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. पाटिल को मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर हेल्थ बनाया जा सकता है. बीजेपी संसदीय बोर्ड में होने जा रहा है अहम बदलाव     बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी है. इसमें 11 सदस्य होते हैं और अब इसका भी पूरा पुनर्गठन हो रहा है. कई बड़े नेताओं को इस कोर बोर्ड में एंट्री मिल सकती है. राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का नाम इसमें सबसे आगे है. उनका ऑर्गेनाइजेशनल स्किल बहुत शानदार है और वे महाराष्ट्र के अहम नेता हैं।      पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जीत के रणनीतिकार सुनील बंसल को भी प्रमोट किया जा सकता है. उन्हें नेशनल इलेक्शन प्लानिंग की कमान मिल सकती है. इसके अलावा महाराष्ट्र के नेता देवेंद्र फडणवीस का नाम भी इस लिस्ट में है. उन्हें पश्चिमी भारत के प्रतिनिधित्व के लिए बोर्ड में लाया जा सकता है।  शिवराज सिंह चौहान बनेंगे हिंदी हार्टलैंड के सबसे बड़े डिसीजन मेकर!     संसदीय बोर्ड में मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान के नाम पर भी मुहर लग सकती है. आरएसएस के साथ चर्चा के बाद उनकी दावेदारी बहुत मजबूत हुई है. उन्हें हिंदी पट्टी के राज्यों में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।      जेपी संगठन में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक सिस्टम की तर्ज पर बदलाव होने जा रहा है. टॉप नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी बनाया जा सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह नया बदलाव पूरी तरह से मिशन 2029 को ध्यान में रखकर किया जा रहा है’ .     राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को उत्तर और पश्चिम भारत की कमान मिल सकती है. सर्बानंद सोनोवाल को नॉर्थईस्ट और के लक्ष्मण को दक्षिण भारत की जिम्मेदारी दी जा सकती है।  नेता का नाम संभावित जिम्मेदारी मुख्य कारण नितिन नबीन बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा और फ्रेश चेहरों के साथ संगठन का नया स्ट्रक्चर बनाना. पीयूष गोयल फाइनेंस मिनिस्टर (संभावित) चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते इकॉनमी की गहरी समझ. … Read more

EPFO Alert: 31 लाख निष्क्रिय PF खातों में ₹9,000 करोड़ जमा, ऐसे करें अपना क्लेम

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (EPF Scheme 2026) की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही ईपीएफओ सदस्यों (EOFO Menbers) के लिए एक नए युग की शुरुआत की है. इस बीच इंडिया टुडे को मिली एक सूचना के अधिकार (RTI) से बपड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, इससे पता चला है कि देश में ईपीएफओ के तहत 30.91 लाख निष्क्रिय खाते हैं और इनमें 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लावारिस पड़ी है. ये इतनी बड़ी रकम है कि इससे तीन IIT बन जाएंगे।  इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफ के निष्क्रिय खातों में जमा बिना दावे वाली जमा रकम को लेकर यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब नई ईपीएफ योजना, 2026 लागू हो रही है, जबकि आधार से जुड़े और हाई वैल्यू वाले अकाउंट्स के बारे में अभी तक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  29 जून से प्रभावी नई EPF स्कीम गौरतलब है कि नोटिफाई किए जाने के बाद नई EPF Scheme 2026 बीते 29 जून से प्रभावी है, जिसने ईपीएफ योजना, 1952 का स्थान लिया है. नई योजना का उद्देश्य भविष्य निधि नियमों (EPF Rules) को सरल बनाना और संगठन से जड़ी करीब 8 करोड़ सक्रिय ईपीएफओ सदस्यों के लिए सिस्टम को अधिक डिजिटल बनाना है।  RTI में क्या खुलासा हुआ?  आरटीआई में बताए गए आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें ईपीएफओ ने बताया है कि बीते 31 मार्च 2026 तक 30,91,862 निष्क्रिय ईपीएफ खाते थे, जिनमें लगभग 9,330 करोड़ रुपये की लावारिस राशि जमा थी. बीते फाइनेंशियल ईयर की तुलना में इस आंकड़े में मामूली सुधार ही देखने को मिला है।  इससे पहले 31 मार्च 2025 को निष्क्रिय पीएफ खातों की संख्या 31.83 लाख थी और ये संख्या 31 मार्च 2026 तक लगभग 92,000 की कमी के साथ घटकर एक साल में 30.91 लाख हो गई है. इसके अलावा इन खातों में जमा बिना दावे वाली लावारिस रकम में 851 करोड़ रुपये की कमी आई है, जो 10,181 करोड़ रुपये से कम होकर 9,330 करोड़ रुपये रह गई।  EPF निष्क्रिय खातों में पड़े 9,330 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना पर हुए खर्च करीब 10,169 करोड़ रुपये के बराबर हैं. इसके अलावा बिना दावे वाला ये पैसा केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए 2026-27 में आवंटित राशि के भी लगभग बराबर है।  तीन IIT खड़े हो जाएंगे इतनी रकम में  रिपोर्ट में साल 2014 के सरकारी अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय देश में एक आईआईटी की स्थापना की लागत करीब 1,750 करोड़ रुपये थी. वहीं महंगाई को ध्यान में रखकर देखें, तो साल 2026 में ये लागत करीब 2,934 करोड़ रुपये हो जाती है. इस हिसाब से देखें, तो निष्क्रिय पीएफ खातों में जमा बिना दावे वाली रकम में भारत में 3 आईआईटी खड़े हो सकते हैं. इसके बाद भी करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बच जाएंगे।  RTI में मांगी गई थी ये डिटेल  EPFO के तहत निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या को लेकर इंडिया टुडे ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों के लिए ऐसे खातों और इनमें जमा रकम की सालाना डिटेल मांगी थी. ईपीएफओ की ओर से कहा गया कि वह सिर्फ 2025-2026 की जानकारी ही शेयर कर सकता है. इसके पीछे का कारण बताते हुए संगठन ने कहा कि निष्क्रिय लेखा प्रकोष्ठ (IAC) की स्थापना 2025-26 के दौरान की गई थी और इसके द्वारा पिछले वर्षों की जानकारी नहीं रखी जाती है।  RTI आवेदन में आधार से जुड़े निष्क्रिय खातों का विवरण और इनमें जमा राशि के अलावा ऑटो-सेटलमेंट की जानकारी भी मांगी गई थी. लेकिन ईपीएफओ ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया है. वहीं हाई वैल्यू (5 लाख रुपये से अधिक राशि) वाले निष्क्रिय खातों का भी कोई डेटा मुहैया नहीं कराया गया है। 

समुद्री कटाव से दहला ओडिशा: गंजाम के 17 गांवों का अस्तित्व खतरे में, हजारों परिवार दहशत में

भुवनेश्वर ओडिशा के गंजाम जिले में समुद्री कटाव ने विकराल रूप धारण कर लिया है। समुद्र के लगातार आगे बढ़ने से गंजाम ब्लॉक के पोड़मपेटा गांव समेत दो ग्राम पंचायतों के 17 गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को एक पक्का मकान समुद्र में समा जाने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक समुद्र गांव से करीब एक किलोमीटर दूर था, लेकिन लगातार कटाव के कारण अब वह गांव की सीमा तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि पोड़मपेटा का बड़ा हिस्सा समुद्र में विलीन हो चुका है। कभी करीब 500 घरों वाला यह गांव अब कुछ गिने-चुने मकानों तक सिमट गया है। रोज निगल रहा जमीन स्थानीय लोगों का कहना है कि समुद्र प्रतिदिन कुछ न कुछ जमीन अपने आगोश में ले रहा है। कटाव वाले क्षेत्र से अधिकांश परिवार पलायन कर चुके हैं, लेकिन शेष भूमि भी तेजी से खत्म होती जा रही है। इससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। 17 गांवों पर संकट स्थानीय सर्वेक्षण के मुताबिक पालिबंधा ग्राम पंचायत के नौ और रामगड़ा ग्राम पंचायत के आठ गांव समुद्री कटाव की जद में हैं। इन गांवों के हजारों लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से तट सुरक्षा दीवार, बोल्डर पैकिंग और अन्य स्थायी उपाय करने की मांग की है। आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रभावित गांवों के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे और आगामी चुनावों का बहिष्कार भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री को लिखा पत्र छत्रपुर विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रभावित गांवों को बचाने के लिए तत्काल विशेष पैकेज, तकनीकी सहायता और स्थायी तटीय सुरक्षा परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कई गांवों का नामोनिशान मिट सकता है। समुद्र का बढ़ता कहर अब गंजाम तट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

क्या अमेरिकी सेना बन रही है पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा? डॉक्युमेंट्री में पेंटागन को लेकर बड़ा दावा

वाशिंगटन  वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर बड़े-बड़े देशों और औद्योगिक घरानों को कटघरे में खड़ा किया जाता है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा महा-प्रदूषक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियों में ‘फ्री पास’ यानी पूरी छूट मिली हुई है. प्रसिद्ध खोजी पत्रकार एबी मार्टिन (Abby Martin) की नयी खोजी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘अर्थ्स ग्रेटेस्ट एनिमी’ (Earth’s Greatest Enemy) ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. 120 मिनट की फिल्म ने पुख्ता सबूतों और अविश्वसनीय आंकड़ों के साथ साबित किया है कि अमेरिकी सेना (US Military) और उसका रक्षा मुख्यालय पेंटागन वैश्विक जलवायु संकट को बढ़ाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संस्थागत प्रदूषक है।  140 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक कार्बन फैलाता है पेंटागन लॉरा पोलक (Laura Pollock) की ओर से की गयी फिल्म की समीक्षा के अनुसार, इस डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी रक्षा विभाग और उसकी नौसेना एवं वायुसेना के प्रदूषण फैलाने संबंधी जो आंकड़े पेश किये गये हैं, वे चौंकाने वाले हैं।      विमानों का ईंधन ईकोसाइड : फिल्म में पत्रकार एबी मार्टिन बताती हैं कि औसत अमेरिकी नागरिक अपने पूरे जीवनकाल में (लगभग 40 वर्ष) जितना ईंधन का इस्तेमाल करता है, बोइंग पेगासस (Boeing Pegasus) जैसे अमेरिकी सैन्य टैंकर की सिर्फ एक उड़ान में उतना ईंधन खत्म हो जाता है. अमेरिका ऐसे 600 से अधिक उड़ान टैंकर हवा में उड़ाता है।      140 देशों से भी बड़ा प्रदूषक पेंटागन : अमेरिकी सेना का कुल कार्बन उत्सर्जन दुनिया के 140 देशों के संयुक्त उत्सर्जन से भी कहीं अधिक है. इसके बावजूद वैश्विक जलवायु सम्मेलनों (जैसे COP26) में सैन्य उत्सर्जन के इन आंकड़ों को छिपा लिया जाता है।      लाखों समुद्री जीवों का कत्लेआम : एक डरावना आंकड़ा यह भी है कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) को अपने 5 साल के युद्धाभ्यास और परीक्षणों के दौरान 2.6 मिलियन (26 लाख) से अधिक समुद्री स्तनधारी जीवों (Marine Mammals) को नुकसान पहुंचाने या उन्हें मार डालने की कानूनी छूट मिली हुई है. इतना ही नहीं, इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान छोड़े गये 2.5 लाख से अधिक गोले और प्रदूषण ने वहां की भूमि को स्थायी रूप से बंजर बना दिया है।  जहां-जहां अमेरिकी बेस, वहां-वहां ‘जहरीली मौत’ खोजी पत्रकार एबी मार्टिन और उनके पति माइक प्रिसनर ने इस सच्चाई को उजागर करने के लिए पूरी दुनिया का दौरा किया. वे ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से लेकर अलास्का, हवाई और जापान के ओकिनावा द्वीप तक गये. कैंप लेज्यून और कोरल रीफ को कैसे नुकसान पहुंचा है, यहां जानें।  डॉक्युमेंट्री का संदेश : एक साथ कई मोर्चे पर संघर्ष कर रही है हमारी प्रकृति।  Earths Greatest Enemy: उत्तरी कैरोलिना के कैंप लेज्यून का सच उत्तरी कैरोलिना के ‘कैंप लेज्यून’ में अमेरिकी सेना के ही घरेलू बेस से हुए ईंधन रिसाव, जहरीले कचरे और औद्योगिक अपशिष्टों के कारण स्थानीय अमेरिकी बस्तियों के पानी में जहर घुल गया. फिल्म में उन माताओं का रुदन दिखाया गया है, जिन्होंने इस दूषित पानी के कारण अपने बच्चों को खो दिया।  हवाई और ओकिनावा में कोरल रीफ का विनाश हवाई और ओकिनावा (जापान) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाया जा रहा है. उसके मलबे को समुद्र में फेंककर दुर्लभ कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को हमेशा के लिए दफन किया जा रहा है. जब पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कायक (नावों) के जरिये समुद्र में इसका विरोध किया, तो अमेरिकी स्पीडबोट्स ने उनकी नावें पलट दीं और उन्हें हिरासत में ले लिया।  अमेरिकी नेताओं का पाखंड डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के पाखंड पर भी तीखा प्रहार किया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि एक तरफ तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी और प्रगतिशील प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसी नेता लाइव स्ट्रीम पर कॉप-26 (COP26) के लक्ष्यों को ‘ऐतिहासिक’ बताती हैं, लेकिन जब उनसे सवाल पूछा जाता है कि नेट-जीरो (Net-Zero) के दावों के बीच पेंटागन का बजट और सैन्य खर्च लगातार क्यों बढ़ाया जा रहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता।  अमेरिकी पाखंड का सबसे अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज यह फिल्म सीधे तौर पर व्हाइट हाउस और पेंटागन को कटघरे में खड़ा करती है, जो आम जनता को पर्यावरण बचाने के लिए ‘प्लास्टिक स्ट्रॉ’ छोड़ने और ‘इलेक्ट्रिक कारें’ खरीदने का उपदेश देते हैं, लेकिन खुद खरबों गैलन कच्चा तेल फूंकने वाली अपनी युद्ध मशीनरी के प्रदूषण को आधिकारिक रिकॉर्ड की किताबों से ही गायब रखते हैं. यह डॉक्युमेंट्री पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पूंजीवादी ताकतों द्वारा चलाये जा रहे इस सबसे बड़े पाखंड का एक अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज है। 

केतन मर्डर केस के बीच पुरुष आयोग की मांग फिर गरमाई, BJP सांसद बोले- पुरुषों के अधिकारों पर भी हो ध्यान

नई दिल्ली पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। मंगेतर सिया गोयल की बेवफाई और हत्या की खौफनाक साजिश सामने आने के बाद अब पुरुषों के अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। इसी कड़ी में भाजपा राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को बेहद विचलित करने वाला बताते हुए देश में 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' बनाने की पुरजोर मांग उठाई है। इस मामले में 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को गिरफ्तार किया गया है। सांसद ने शेयर किया अपना पुराना प्राइवेट बिल सांसद मित्तल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 की राज्यसभा कार्यवाही का है, जब उन्होंने पुरुष आयोग बनाने के लिए संसद में एक 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश किया था। मित्तल ने एक्स पर लिखा, "पुणे का केतन अग्रवाल मामला बहुत परेशान करने वाला है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, पूरी और बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए, और सबसे बढ़कर, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मैंने संसद में 'नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल' पेश किया था। हर पीड़ित को न्याय, मदद और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। केतन का मामला यह याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा और एक ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी बात सुनी जा सके। लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना, न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।" बता दें कि अशोक कुमार मित्तल पंजाब से सांसद चुने गए थे। जब उन्होंने यह बिल पेश किया था, तब वे आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा थे। हालांकि, इसी साल अप्रैल में राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले 7 AAP सांसदों के गुट के हिस्से के रूप में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का दावा किया था। क्या है प्राइवेट मेंबर बिल का इतिहास? संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के पास होने की संभावना बहुत कम होती है और यह मुश्किल से ही कभी वोटिंग के चरण तक पहुंच पाता है। इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक सिर्फ 14 प्राइवेट बिल ही कानून का रूप ले पाए हैं। वहीं, साल 1970 के बाद से कोई भी ऐसा बिल संसद के दोनों सदनों से पास नहीं हो सका है। केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब तक क्या-क्या हुआ? पुणे के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी अहम बातें इस प्रकार हैं। 26 वर्षीय पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। 3 जुलाई को पुणे की एक अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को 16 जुलाई तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। लोनावला ग्रामीण पुलिस ने आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती थी, लेकिन दोनों आरोपियों के आधिकारिक रूप से इनकार करने के बाद कोर्ट ने इस अर्जी को भी नामंजूर कर दिया है।

Parliament Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा मानसून सत्र, सरकार ने किया ऐलान

नई दिल्ली  संसद का आगामी मानसून सत्र 2026 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। भारत सरकार की सिफारिश पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने दोनों सदनों की बैठक बुलाने की अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति जी ने मानसून सत्र के आयोजन को मंजूरी दी है। संसद का यह आगामी सत्र 20 जुलाई 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस अवधि के दौरान दोनों सदनों में राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न अहम मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। इस मानसून सत्र की शुरुआत बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत के बाद हो रही है। इस सत्र में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत का असर भी देखने को मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार है। राज्यसभा में नए चुने गए और दोबारा चुने गए सदस्यों के शपथ लेने के बाद संख्या बल सत्ताधारी गठबंधन राजग के पक्ष में और मजबूत हो गया।पिछला सत्र सरकार के लिए निराशाजनक रहा था क्योंकि लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसका मकसद 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना था। सरकार अब विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों को एकसमान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। दरअसल, आबादी के आधार पर सीटों में बढ़ोतरी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक दलों के लिए चिंता का बड़ा विषय रहा है।

केतन मर्डर केस में बड़ा खुलासा! सिया गोयल के Snapchat चैट ने बदली जांच की दिशा

 पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाला सुराग लगा है, जिसने इस पूरी मर्डर मिस्ट्री में एक नया ट्विस्ट ला दिया है. पुलिस की जांच टीम अब आरोपी सिया गोयल के एक कथित स्नैपचैट चैट को खंगाल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या की इस पूरी वारदात को एक गहरी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।  ताजा जानकारी के मुताबिक, यह कथित बातचीत 25 मई की है. इस चैट में आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर अपनी दोस्त से फ्लाइट टिकट बुक करने के बहाने उसका आधार कार्ड मांगती है। सिया ने हिंदी में लिखा, "आधार कार्ड फ्रंट और बैक भेज दे फॉर वेडिंग टिकिट्स, जो होने नहीं वाली पर फिर भी भेज दे।  जांच अधिकारी अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह पूरी बातचीत और हवाई टिकटों की बुकिंग केवल एक दिखावा थी। ऐसा संदेह है कि इस कथित चैट और टिकट अरेंजमेंट्स के जरिए सिया यह दिखाना चाहती थी कि केतन अग्रवाल के साथ उसकी शादी की तैयारियां बिल्कुल सामान्य रूप से चल रही हैं, ताकि केतन की हत्या के बाद किसी को उस पर शक न हो. यह पूरी कवायद मर्डर प्लॉट को छिपाने और जांच भटकाने की एक बड़ी कोशिश हो सकती है।  जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी डिजिटल चैट की कानूनी वैधता उसकी तकनीकी और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी. इसलिए फिलहाल इस चैट को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता।  केतन के परिवार का आरोप केतन के पिता, विशाल देवीचंद अग्रवाल की तरफ़ से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि चेतन और सिया, दोनों ने मिलकर उनके बेटे को एक चट्टान से नीचे धकेल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. केतन 18 जून की सुबह घर से निकला, पुणे-मुंबई हाईवे पर किवाले ब्रिज से सिया को साथ लिया और फिर लोहागढ़ फोर्ट की ओर गया।  उसी दिन दोपहर से पहले सिया गोयल ने अपने चेतन की मां को फ़ोन करके बताया कि वह गलती से लोहागढ़ किले की एक खाई में गिर गया है. स्थानीय लोगों और पुलिस ने उसे खाई में पाया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. FIR के अनुसार, 21 जून को केतन अग्रवाल के पिता और रिश्तेदार उस जगह पर गए जहां वह गिरा था और उन्हें लगा कि उस जगह पर गलती से फिसलने की संभावना बहुत कम थी. परिवार ने आरोप लगाया कि सिया गोयल का फ़ोन लगातार व्यस्त रहता था और वह अक्सर अपने प्रेमी चेतन का ज़िक्र करती थी, जिससे उन्हें शक हुआ कि दोनों के बीच रोमांटिक रिश्ता था।