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साइबर अपराध पर शिकंजा: जामताड़ा पुलिस ने दबोचे 2 बड़े आरोपी, बरामद 10 लाख

जामताड़ा झारखंड के जामताड़ा में करमाटांड़ थाना क्षेत्र के सामुकपोखर और राजाबांध गांव में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 बड़े साइबर अपराधियों को 9 लाख 91 हजार रुपए नकद के साथ गिरफ्तार किया है। अपराधियों के पास से 2 लैपटॉप, 5 मोबाइल, 6 सिम कार्ड और 6 एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। जामताड़ा एसपी राजकुमार मेहता ने प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार रितेश कुमार मंडल और पवन मंडल मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और असम के लोगों को टारगेट कर साइबर अपराध को अंजाम देते थे। ये दोनों युवक करमाटांड़ थाना क्षेत्र के मट्टांड और सुखलतांड गांव के रहने वाले हैं और उनका साइबर अपराध में लंबा आपराधिक इतिहास है। कई मामलों में वे वांछित भी थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह गिरफ्तारी करमाटांड़ थाना क्षेत्र में अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता है। इन दोनों अपराधियों के डिजिटल उपकरण और नकदी बरामद होने से साइबर अपराध में हो रही घटकों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साइबर अपराधियों के खिलाफ सतकर्ता बनाए रखने का आश्वासन दिया है ताकि आम जनता ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी से बच सकें।  

सोनभद्र में झारखंड का कुख्यात नक्सली दबोचा गया, सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में था सक्रिय

रांची उत्तर प्रदेश के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने झारखंड के कुख्यात, 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को सोनभद्र जिले में गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएस ने पांच लाख रुपये के इनामी नक्सली उमेश खरवार उर्फ नगीना उर्फ डॉक्टर को मंगलवार की शाम सोनभद्र जिले में झारखंड की सीमा के नजदीक गिरफ्तार किया। अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि विगत 14 सितंबर को पलामू में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में खरवार भी पकड़ा गया था, लेकिन वह किसी तरह बचकर भाग निकला था। उन्होंने बताया कि झारखंड एटीएस को पता लगा था कि खरवार उत्तर प्रदेश में कहीं छुपा है। यह जानकारी उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटीएस को दी जिसके आधार पर एटीएस ने मोबाइल सर्विलांस एवं अन्य माध्यमों से जानकारी ली और मंगलवार को सोनभद्र जिले में झारखंड की सीमा पर स्थित गांव से खरवार को गिरफ्तार कर लिया।  

नीतीश सरकार ने दिया तोहफ़ा, इस महीने समय से पहले होगा वेतन भुगतान

पटना बिहार में विधान सभा का चुनाव होना है और इसकी अधिसूचना जारी होने में अब गिन कर दिन बच गए हैं।  इससे पहले हिन्दुओं का महापर्व दुर्गापूजा चल रहा है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ी घोषणा की है। यह घोषणा राज्यकर्मियों के लिए है।   मुख्यमंत्री नीतीश सरकार ने दुर्गापूजा को ध्यान में रखते हुए उनके सितंबर महीने के वेतन का भुगतान समय से पहले करने का ऐलान किया है। यह भुगतान आज यानी गुरुवार से शुरु हो जाएगा। सरकार के इस फैसले से राज्यकर्मियों ने एक बड़ी राहत की साँस ली है। क्यों कि राज्यकर्मी कर्मचारी अपने वेतन के इंतजार में बैठे हुए थे, इस घोषणा के बाद वह काफी खुश हैं। बिहार सरकार के इस घोषणा के बाद राज्यभर के कर्मचारियों में उत्साह और खुशी का माहौल है। इस संबंध में कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार से पहले वेतन मिलने से उनकी तैयारियों में आसानी होगी। अब पूरा परिवार एक साथ दुर्गापूजा की तैयारी करेंगे। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर वित्त विभाग ने यह आदेश जारी करते हुए आज गुरुवार से सितंबर महीने का वेतन भुगतान शुरू करने का निर्देश दिया है, क्यों कि बिहार सरकार का यह निर्णय दुर्गापूजा को ध्यान में रखकर लिया गया है।इसको लेकर वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर के द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। जारी किए गए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारी के साथ-साथ हाईकोर्ट, विधानसभा, विधान परिषद और राजभवन के कर्मियों को भी सितंबर का वेतन समय से पहले दिया जाएगा। इसके लिए आदेश की प्रति सभी कोषागार पदाधिकारियों को भेज दी गई है।

EOU की कार्रवाई: बिहार के इंजीनियर के पास करोड़ों की संदिग्ध संपत्ति बरामद

समस्तीपुर  बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में समस्तीपुर के विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद के छह ठिकानों पर छापेमारी की. कार्रवाई में फ्लैट, शॉपिंग मॉल निवेश, जमीन और संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं. प्रारंभिक जांच में 77% से अधिक संपत्ति अवैध पाई गई है.  बिहार में आय से अधिक संपत्ति (DA) मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बुधवार को समस्तीपुर के विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद के छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. कार्रवाई में गोरखपुर और वाराणसी में जमीन की खरीद, समस्तीपुर के शॉपिंग मॉल में निवेश और दानापुर स्थित फ्लैट के दस्तावेज मिले हैं. वहीं, सीवान में उनके पैतृक आवास और एक लॉकर से जुड़ी जानकारी भी ईओयू को हाथ लगी है. फ्लैट और बैंक खातों से जुड़े अहम सबूत दानापुर स्थित कश्यप ग्रीन सिटी में उनके फ्लैट से जमीन से संबंधित कागजात, बीमा रसीदें, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और वाहन संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए. ईओयू ने बताया कि विवेकानंद की पत्नी बॉबी के नाम पर सीवान एसबीआई में एक लॉकर भी मिला है, जिसकी तलाशी अभी ली जानी है. जांच में यह भी सामने आया कि विवेकानंद ने एचडीएफसी बैंक में मेसर्स आया इंटर प्राइजेज और मेसर्स ग्रेस इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवेलपर्स के नाम पर खाते खोले थे. इन खातों में उनकी पत्नी का पैन कार्ड जुड़ा हुआ है. संदिग्ध बैंक लेनदेन का खुलासा जांच में पाया गया कि एचडीएफसी बैंक में ललन सिंह और विसर्जन सिंह के नाम से भी खाते खोले गए थे, जिनसे विवेकानंद का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी लिंक था. इन खातों में उनके पदस्थापन स्थलों से नगद और यूपीआई के माध्यम से बड़ी रकम जमा की जाती थी. बाद में यह धनराशि उनके खुद के, पत्नी के या संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खातों में ट्रांसफर की गई.  77% से अधिक की संदिग्ध संपत्ति प्रारंभिक जांच में विवेकानंद की कुल वैध आय 2.74 करोड़ रुपये पाई गई है, जबकि उनकी संपत्तियां 4.87 करोड़ रुपये से अधिक की हैं. यानी उन्होंने अपनी आय से करीब 77.84% अधिक संपत्ति अर्जित की है. ईओयू का मानना है कि दस्तावेजों के पूर्ण मूल्यांकन के बाद यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. पैतृक और खरीदी गई संपत्तियां विवेकानंद सीवान के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के संठी गांव के रहने वाले हैं. इसके अलावा उन्होंने रसीदचक में एक चार मंजिला मकान भी खरीदा है. जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2009 में सहायक विद्युत अभियंता के रूप में सेवा शुरू की थी और अब तक सहरसा, दलसिंगसराय, हाजीपुर, मोतिहारी, पूर्णिया, छपरा, रोहतास और पटना में तैनात रह चुके हैं. ईओयू की आगे की कार्रवाई ईओयू की टीम अब तक मिले दस्तावेजों का विस्तृत आकलन कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़ी कड़ियां जोड़ने के बाद विवेकानंद के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी. 

मुजफ्फरपुर सबसे आगे, लेकिन इन विधानसभा सीटों पर महिलाओं को नहीं मिली जीत

पटना बिहार की 45 विधानसभा सीटों पर अबतक एक भी महिला नहीं चुनी गई हैं। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा जिले में ही ऐसी सीटों की संख्या सबसे अधिक हैं। मुजफ्फरपुर की 11 विधानसभा क्षेत्रों में से आठ सीटों पर एक भी महिला नहीं जीती है। दूसरी तरकफ दरभंगा और समस्तीपुर में भी आठ सीटों से अब तक किसी महिला को विधान सभा की दहलीज तक जाने का मौका नहीं मिला है। राष्ट्रीय दलों ने टिकट देने में अनदेखी की तो निर्दलीय भी इन महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन, कड़े संघर्ष के बाद भी जीत हासिल नहीं कर सकी। बिहार में मतदान करने में भले ही महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, मगर आज भी टिकट मिलने के मामले में वे पीछे हैं। इस कारण इसकी भागीदारी कम है। सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी नहीं मिल पाता टिकट: राजनीति की जानकार डॉ.तारण राय, डॉ. पूनम सिंह समेत अन्य महिलाएं कहती हैं कि सभी राजनीतिक दलों में महिला मोर्चा की सक्रिय भागीदारी रहती है। इनमें कार्यकर्ता के तौर पर महिलाओं की मुख्य भूमिका होती है, क्योंकि महिला वोटर मतदान केंद्रों पर अधिक पहुंचती हैं। मगर विडंबना यह कि कार्यकर्ता के रूप में मेहनत करने वाली महिलाओं को टिकट देने में सभी दल पीछे हो जाते हैं। यह स्थिति तब है जब इन क्षेत्रों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से लगातार अधिक रहा है। वर्षों से लड़ रही हैं चुनाव, मगर नहीं मिली जीत डॉ. तारण राय कहती हैं कि मुजफ्फरपुर की आठ, पूर्वी चंपारण की छह, शिवहर की एक, सीतामढ़ी की तीन, समस्तीपुर और दरभंगा की आठ-आठ,पश्चिम चंपारण की चार और मधुबनी की सात सीटें ऐसी हैं जहां से महिलाओं को कभी जीत नहीं मिली। इन इलाकों में महिलाएं वर्षों से चुनाव लड़ती रही हैं, संघर्ष करती रही हैं। उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर की 11 में से आठ सीटों पर आज तक कोई महिला विधायक नहीं बनी। इसमें मुजफ्फरपुर, औराई, मीनापुर, बरुराज, कांटी, साहेबगंज, कुढ़नी और सकरा जैसी सीट हैं। यह हाल तब है जब इन इलाकों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत कहीं अधिक है। 2020 में इन इलाकों में महिलाओं का वोटिंग 62.5 % था, जबकि 55%पुरुषों ने ही मतदान किया था। मधुबनी की मधुबनी, हरलाखी, बिस्फी, खजौली, झंझारपुर, लौकहा और राजनगर सीट महिला नेतृत्व से वंचित रही हैं। इन इलाकों में महिलाओं के मत का प्रतिशत पुरुषों से 5% अधिक रहा है। पूर्वी चंपारण की 12 सीटों में से छह सीटें रक्सौल, सुगौली, हरसिद्धि, पीपरा, मोतिहारी और मधुबन से भी अबतक कोई महिला विधायक नहीं बनी है। सीतामढ़ी की तीन प्रमुख सीटें सीतामढ़ी, रीगा और सुरसंड पर आज तक महिला उम्मीदवार सफल नहीं हो सकी हैं।

दरभंगा से अजमेर तक चलेगी नई अमृत भारत ट्रेन, मिथिलांचल में खुशियों की लहर

दरभंगा बिहार में मिथिला क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुये केंद्र सरकार ने दरभंगा से अजमेर के बीच अमृत भारत ट्रेन के परिचालन की मंजूरी दे दी है। यह जानकारी दरभंगा के सांसद एवं रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद दी। सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि रेल मंत्री ने सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कर ट्रेन सेवा शुरू करने का आश्वासन दिया है। साथ ही दरभंगा को रेलवे कनेक्टिविटी का केंद्रबिंदु बनाने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। 335 करोड़ रुपये की लागत से दरभंगा रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय रूप में विकसित करने की परियोजना की प्रगति पर चर्चा करते हुये सांसद ठाकुर ने रेल मंत्री को निर्माण कार्यों की धीमी गति पर समस्तीपुर मंडल के डीआरएम को निर्देश देने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य में देरी पर संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों पर मंत्रालय स्तर से कारर्वाई हो सकती है। सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि मुलाकात के दौरान दरभंगा से मुजफ्फरपुर और सहरसा तक नई रेल लाइन, शीशो स्टेशन पर वाशिंग पिट, मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स और दरभंगा से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और अहमदाबाद के लिये आधुनिक ट्रेनों के संचालन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सांसद श्री ठाकुर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मिथिला क्षेत्र में रेलवे की बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। अमृत भारत ट्रेन सेवा की स्वीकृति को उन्होंने मिथिला के लिये यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में 'एक वरदान' बताया है।  

बिहार की महिलाओं के खाते में 26 सितंबर को आएंगे 10,000 रुपये, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत ट्रांसफर करेंगे PM मोदी

पटना बिहार सरकार ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रत्येक परिवार की एक पात्र महिला को स्वरोजगार मुहैया कराने के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी। योजना की विधिवत शुरुआत 26 सितंबर को होने जा रही है। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑनलाइन जुडे़ंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। 75 लाख महिलाओं के खाते में आएंगे 10,000 रुपये इसमें राज्य की 75 लाख महिलाओं के बैंक खाते में 10-10 हजार रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से ट्रांसफर की जायेगी। इन महिलाओं के बीच साढ़े सात हजार करोड़ रुपये का वितरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम को आयोजित करने को लेकर ग्रामीण विकास विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इसे लेकर सभी जिलों के जिलाधिकारी को पत्र जारी किया है। इसमें खासतौर से यह निर्देश दिया गया है कि इस मौके पर संकुल स्तरीय संघ ग्राम संगठन स्तर पर इसे उत्सव के तौर पर मनाया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर को उत्सव के तौर पर मनाने एवं जन-जन तक इसकी जानकारी पहुंचाने के साथ ही महिला समूहों एवं सामुदायिक संगठनों को जागरूक करने के उदेश्य से राज्य मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर भी इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जीविका स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों की सहभागिता होगी। योजना का लाभ लेने के लिए अब तक शहरी और ग्रामीण इलाकों की एक करोड़ 11 लाख 66 हजार महिलाओं ने आवेदन किया है। अब तक एक करोड़ 11 लाख 66 हजार महिलाओं ने किया आवेदन  योजना का लाभ लेने के लिए अब तक शहरी और ग्रामीण इलाकों की एक करोड़ 11 लाख 66 हजार महिलाओं ने आवेदन किया है। इस कार्यक्रम की रूपरेखा निर्धारित की गई है। सभी 38 जिला मुख्यालय में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें जन प्रतिनिधि के अलावा जिला स्तरीय अधिकारी एवं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कम से कम एक हजार महिलाएं भाग लेंगी। सभी 534 प्रखंड मुख्यालय में बीडीओ (प्रखंड विकास पदाधिकारी) की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम होगा। इसमें प्रखंड स्तरीय जन प्रतिनिधि, अधिकारी और एसएचजी से जुड़ी 500 महिलाएं भाग लेंगी।जीविका के सभी 1680 संकुल स्तरीय संघ पर भी इस कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें संकुल स्तरीय जीविका समूह की 200 महिलाएं शामिल होंगी। जीविका के सभी 70 हजार ग्राम संगठन स्तर पर भी इस कार्यक्रम के लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई है। इसमें एसएचजी से जुड़ी 100 महिलाएं भाग लेंगी। महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त करना योजना का मुख्य उद्देश्य योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को समान रूप से लाभ पहुंचाना है। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा गया है जिससे अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें। इसका लाभ लेने के लिए सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से अब तक एक करोड़ सात लाख जीविका दीदियों ने आवेदन किया है। इसके अतिरिक्त 1 लाख 40 हजार से अधिक महिलाओं ने समूह से जुड़ने के लिए आवेदन किया है। निर्धारित प्रावधान के मुताबिक, किसी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं ही इसका लाभ ले सकती हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना ने ग्रामीण और शहरी, हर वर्ग की महिलाओं में नई उम्मीद जगाई है। ग्रामीण क्षेत्र के अलावा शहरी इलाके की महिलाएं भी बड़ी संख्या में इसका लाभ लेने के लिए इसमें रूचि दिखा रही हैं। अब तक शहरी इलाकों में कार्यरत चार लाख 66 हजार जीविका दीदियों ने इसके तहत आवेदन किया है। इसके साथ ही जीविका के अंतर्गत संचालित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ने के लिए चार लाख चार हजार से ज्यादा शहरी महिलाओं ने भी आवेदन किया है।

बिहार जाने वाली बसों का किराया कम हुआ, दिल्ली-हरियाणा-UP-बंगाल रूट पर टिकट में बड़ी राहत

पटना बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की त्योहारी सीजन सेवा के तहत पर्व स्पेशल बसों से दिल्ली, गुरुग्राम, अंबाला, कोलकाता, लखनऊ जैसे शहरों से बिहार आना-जाना काफी सस्ता हो गया है। राज्य सरकार पर्व स्पेशल बसों के किराया पर भारी सब्सिडी दे रही है, जिससे सफर का खर्च एक तिहाई तक कम हो गया है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के दौरान हवाई किराया बढ़ने और ट्रेन में टिकट की सदाबहार किल्लत के कारण सरकार ने कई शहरों से एसी और नॉन एसी बसों को चलाने का फैसला किया है। बीएसआरटीसी ने बसों की समय सारिणी (टाइम टेबल) के साथ असली किराया, उसमें दी जा रही सब्सिडी और पैसेंजर द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि की लिस्ट भी जारी कर दी है। बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव है और वोटरों को लुभाने के लिए सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कई वर्गों के लिए एक के बाद एक नकद सहायता राशि की स्कीम शुरू कर रही है। पहले से चल रही योजनाओं में मदद की राशि बढ़ाई जा रही है। बस किराया पर सब्सिडी को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। पर्व स्पेशल बसें 20 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेंगी। छठ 28 अक्टूबर को ही है लेकिन चुनाव को ध्यान में रखते हुए योजना में वापसी के लिए 30 नवंबर तक का समय कवर कर लिया गया है ताकि वोटर चाहे तो मतदान के बाद लौटे। दिल्ली-NCR, चंडीगढ़ से दशहरा, दिवाली, छठ में बिहार, BSRTC बसों की टिकट बुकिंग 1 सितंबर से खुलेगी उदाहरण के लिए किशनगंज से दिल्ली का निर्धारित किराया एससी स्लीपर के लिए 3247 रुपये है लेकिन इसमें सरकार की तरफ से 992 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। एक पैसेंजर को इस बस से किशनगंज आने या किशनगंज से दिल्ली जाने के लिए मात्र 2255 रुपये ही देने होंगे। यह मूल किराया में 30 परसेंट से ऊपर की छूट है। बिहार के अलग-अलग जिलों से दिल्ली, गुरुग्राम, कोलकाता, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अंबाला, सिलीगुड़ी, रांची समेत अन्य शहरों के लिए बस किराए में अलग-अलग सब्सिडी है और कुछ में यह मदद 37-38 फीसदी तक जा रही है।

रांची में एनसीबी की बड़ी कार्रवाई, नशा तस्करों की 48.6 लाख की संपत्ति सील

रांची,  नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) रांची ज़ोनल यूनिट ने बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो ने तस्करों की अवैध कमाई पर सीधी चोट करते हुए करीब 48.6 लाख रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा हेरफेर अधिनियम (साफेमा) के तहत की गई है और सक्षम प्राधिकरण ने इसे मंजूरी भी दे दी है। यह मामला पिछले साल 8 अगस्त को सामने आया था। उस समय एनसीबी को गुप्त सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में डोडा (पोपी स्ट्रॉ) की खेप ले जाई जा रही है। टीम ने मांडर स्थित हेसमी टोल प्लाज़ा पर एक वाहन को रोका। तलाशी में 4,317 किलो से ज़्यादा डोडा बरामद हुआ। इस ऑपरेशन में मास्टरमाइंड मोहम्मद इमरान आलम समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क से जुड़े हैं, जिसकी डोर राजस्थान तक फैली हुई है। यही नेटवर्क लगातार बिहार और झारखंड में नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था। एनसीबी अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी की रणनीति सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, अब तस्करों की अवैध संपत्तियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके। साफेमा के तहत संपत्ति फ्रीज करना उसी दिशा में उठाया गया अहम कदम है। बताया गया कि जांच अभी जारी है और आरोपियों से जुड़ी अन्य संपत्तियों की भी छानबीन की जा रही है। एजेंसी ने साफ कर दिया है कि आगे भी ऐसी कार्रवाइयां होती रहेंगी। ब्यूरो ने आम लोगों से अपील की है कि वे नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सहयोग करें। अगर किसी को नशीले पदार्थों की बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले तो राष्ट्रीय नशा विरोधी हेल्पलाइन 1933 पर सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।  

मोदी सरकार ने बिहार के लिए रेलवे और हाईवे विकास परियोजनाओं को दी मंजूरी

पटना  चुनावी साल में बिहार को केंद्र सरकार से एक और बड़ा तोहफा मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कुल 6 अहम फैसलों पर मुहर लगी. इन फैसलों पर करीब 94,916 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. रेलवे, सड़क, शिक्षा, जहाजरानी और रिसर्च जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी इन योजनाओं का सीधा फायदा बिहार और देश के बाकी हिस्सों को मिलेगा. रेलवे कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने खुशी की सौगात दी है. उन्हें प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस देने का फैसला हुआ है, जिस पर 1,866 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बिहार में बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेल लाइन डबलिंग परियोजना को मंजूरी दी गई है. इस पर 2,192 करोड़ रुपये खर्च होंगे. रेलवे का यह कदम न सिर्फ यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही को भी दोगुना कर देगा. इसके अलावा साहेबगंज-बेतिया एनएच-139W को चार लेन बनाने पर 3,822 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से सीमांचल और उत्तर बिहार के लोगों को तेज रफ्तार कनेक्टिविटी मिलेगी. चार-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्‍ट से पटना और बेतिया के बीच संपर्क को बेहतर बनाया जाएगा. इससे उत्तर बिहार के वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों तक जुड़ जाएंगे. मेड‍िकल, स्‍वास्‍थ्‍य से लेकर शिपबिल्डिंग प्रोजेक्‍ट पास     केंद्र ने मेडिकल कॉलेज और मेडिकल शिक्षा विस्तार पर 15,034 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है. इससे बिहार सहित देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और बेहतर होने की उम्मीद है.     इसके साथ ही सीएसआईआर की क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास योजना पर 2,277 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे देश में रिसर्च और इनोवेशन को नई उड़ान मिलेगी.     कैबिनेट ने शिपबिल्डिंग और समुद्री विकास सुधारों के लिए सबसे बड़ा पैकेज द‍िया है. इस पर 69,725 करोड़ रुपये खर्च क‍िए जाएंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की समुद्री ताकत और वैश्विक व्यापार में पकड़ मजबूत होगी. मरीन सिक्‍योरिटी नेशनल सिक्‍योरिटी का एक बहुत बड़ा ह‍िस्‍सा है और सरकार लगातार इसे बेहतर करने की कोश‍िश कर रही है. बिहार को एक साल में कई सौगात बीते एक साल में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए कई योजनाओं पर मुहर लगाई है. रेलवे लाइन अपग्रेडेशन, नई सड़कों और पुलों के निर्माण, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर लगातार निवेश हो रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 12 महीनों में बिहार के लिए करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं को मंजूरी मिली है. इनमें सड़क, रेलवे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट प्रमुख हैं. क्यों अहम है बिहार? बिहार में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. इसल‍िए सरकार का फोकस बिहार पर ज्‍यादा है. बिहार की राजनीति हमेशा से दिल्ली की राजनीति को प्रभावित करती रही है. राज्य में विधानसभा की 243 सीटें हैं और यहां का चुनाव सीधा-सीधा राष्ट्रीय राजनीति का रुख तय करता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार चाहती है कि 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विकास की बड़ी तस्वीर जनता के सामने रखी जाए.  2024–25 में जिन योजनाओं को मंजूरी मिली है, जैसे रेलवे लाइन डबलिंग, हाईवे चौड़ीकरण, मेडिकल कॉलेज विस्तार, बिजली और शिक्षा योजनाएं—इनका फायदा सरकार चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर दिखा सकती है. लोग जब नई सड़क, बेहतर अस्पताल या कॉलेज बनते देखते हैं तो यह सरकार की छवि पर असर डालता है.