samacharsecretary.com

अब संभलकर चलाएं वाहन! जम्मू में कल से से लागू होंगे नए नियम

जम्मू  केवल एक दिन शेष रहने के कारण सोमवार को सुबह से ही जम्मू शहर में ई-रिक्शा और ई-ऑटो चालकों की खूब हलचल रही। विभिन्न बाजारों और वर्कशॉप्स पर चालक अपने वाहनों पर रंगीन कोड नंबर प्लेटें और स्ट्रिप्स लगवाने में व्यस्त नजर आए। दुकानों पर प्लेट लगवाने वालों की भीड़ लगी रही। जिला प्रशासन की नई जोन व्यवस्था 29 अक्तूबर से लागू होनी है। पहले यह नियम 23 अक्तूबर से लागू होना था, लेकिन त्योहारों और चालकों की तैयारियों को देखते हुए प्रशासन ने इसे कुछ दिन बढ़ाकर 29 अक्तूबर तय किया। उपायुक्त जम्मू डॉ. राकेश मिन्हास के आदेश के अनुसार, जिले को छह जोनों में बांटा गया है। ज़ोन-1 (दक्षिण जम्मू): गुलाबी रंग ज़ोन-2 (उत्तर जम्मू): नीला रंग ज़ोन-3 (अखनूर): पीला रंग ज़ोन-4 (आर.एस.पुरा): लाल रंग ज़ोन-5 (मढ़): हरा रंग ज़ोन-6 (नगरोटा): काला रंग हर ई-वाहन को अपने जोन के रंग और नंबर के साथ प्लेट लगाना अनिवार्य है। नई व्यवस्था को लेकर चालकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुंदन लाल, एक ई-रिक्शा चालक, ने कहा, “अगर प्रशासन को यह सिस्टम लागू करना था, तो पहले बताया जाना चाहिए था। हममें से कई लोगों ने हाल ही में ई-ऑटो खरीदे हैं। पहले हमें रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी जगहों से सवारियां मिल जाती थीं, लेकिन अब जोन से बाहर नहीं जा पाएंगे तो ईएमआई चुकाना मुश्किल हो जाएगा। मंजीत सिंह, एक ई-ऑटो चालक, ने कहा, “हम रोजाना स्कूल के बच्चों को छोड़ते हैं, जिनमें से कई दूसरे जोन में रहते हैं। जोन प्रतिबंध लागू होने पर आमदनी में कमी आ सकती है और खर्च निकालना कठिन हो जाएगा।” राकेश कुमार, एक अन्य चालक, ने सवाल उठाया, “हमारे पास ई-रिक्शा के अलावा कोई दूसरा वाहन नहीं है। अगर कभी आपात स्थिति में किसी को अस्पताल ले जाना पड़े और वह अस्पताल दूसरे जोन में हो, तो हम कैसे ले जाएंगे?” क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) जसमीत सिंह ने कहा कि जोन व्यवस्था का मकसद ट्रैफिक सुधारना और चालकों की रोजी-रोटी सुरक्षित रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी ई-रिक्शा या ई-ऑटो चालक को आपातकाल में किसी मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए अपने जोन से बाहर जाना पड़े, तो ऐसे सही मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होगी।

पुतिन के निर्देश पर रूस ने किया ‘बुरेवेस्तनिक’ का परीक्षण, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल से वैश्विक चिंता

मॉस्को  दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है. यह बात किसी से छिपी नहीं है. यह ऐसा वक्त है कि अगर दुनिया के कुछ चुनिंदा देश चाह लें तो कुछ पलों में ही पूरी मानवता संकट में पड़ सकती है. कुछ ऐसा ही किया है रूस ने. यूक्रेन के साथ जंग में उलझे रूस ने रविवार को एक ऐसे हथियार का परीक्षण किया जिसको दिल्ली-मुंबई जैसे किसी आबादी वाले इलाके पर दाग दिया जाए तो वह पल भर में आग का गोला बन जाएगा. हजारों लाखों लोग पल भर में काल के गाल में समा जाएंगे. दरअसल, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को घोषणा की कि रूस ने अपनी परमाणु-संचालित क्रूज मिसाइल ‘बुरेवेस्तनिक’ का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्ते और खराब हुए हैं. पुतिन ने कहा कि इस हथियार को जल्द ही तैनात करने की तैयारी की जाएगी. उन्होंने दावा किया कि यह मिसाइल दुनिया में किसी अन्य देश के पास नहीं है और यह दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को आसानी से चकमा दे सकती है. रूस के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव ने बताया कि इस परीक्षण के दौरान मिसाइल करीब 15 घंटे तक हवा में रही और लगभग 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की. हर सुरक्षा कवच को भेदने में सक्षम सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यह मिसाइल हवाई और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम है. पुतिन ने यह भी कहा कि अब इस हथियार के उपयोग के तरीकों पर विचार किया जाएगा और इसे तैनात करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा. इस बीच, रूस के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने बताया कि इस सफल परीक्षण की जानकारी और हाल के युद्धक्षेत्र के अपडेट अमेरिकी प्रशासन को उनके अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए. यह परीक्षण उस समय हुआ जब अमेरिका ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए, जो ट्रम्प प्रशासन द्वारा रूस के खिलाफ अब तक की सबसे ठोस कार्रवाइयों में से एक है. साथ ही, पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन भी रद्द हो गया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. रूस ने पिछले सप्ताह पुतिन की निगरानी में एक रणनीतिक परमाणु बल अभ्यास भी किया. क्रेमलिन ने कहा कि इस अभ्यास में सैन्य कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम की तैयारियों और कर्मचारियों के कौशल का परीक्षण किया गया, जिसमें सभी लक्ष्य हासिल किए गए. इधर, रूस की राजधानी मॉस्को में रविवार रात से सोमवार सुबह तक ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा. मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर की हवाई रक्षा प्रणालियों ने दर्जनों ड्रोनों को मार गिराया. इन हमलों के कारण मॉस्को के दो हवाई अड्डों, ज़ुकोव्स्की और डोमोडेडोवो, पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोक दी गईं. आपातकालीन सेवाएं मलबे को हटाने में जुटी हैं. दूसरी ओर, रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेन के हमलों में छह नागरिक घायल हो गए. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इनमें से तीन बेलगोरोद शहर में और तीन दोरोलोश गांव में घायल हुए. यूक्रेन पर रूस के हमले तेज रूस ने शनिवार से रविवार की रात यूक्रेन पर 100 से अधिक ड्रोन हमले किए. इन हमलों में कीव में ऊंची इमारतों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई लोग सो रहे थे. यूक्रेन के आंतरिक मंत्री इहोर क्लिमेंको ने बताया कि कीव में हुए हवाई हमलों में एक 19 साल की लड़की और उसकी 46 साल की मां समेत तीन लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा 33 लोग घायल हुए, जिनमें सात बच्चे शामिल हैं. कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने कहा कि घायलों में एक चार साल का बच्चा भी है. आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया. शनिवार रात को कीव के डेसनियान्स्की क्षेत्र में एक नौ मंजिला इमारत में आग लग गई, जहां से 13 लोगों को सुरक्षित निकाला गया.  

भारतीय नौसेना को मिलेगी बड़ी ताकत, ISRO 2 नवंबर को लॉन्च करेगा सबसे भारी सैटेलाइट

बेंगलुरु  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 2 नवंबर 2025 को अपनी शक्तिशाली LVM3 रॉकेट से CMS-03 कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्च करेगा. यह LVM3 का 5वीं ऑपरेशनल फ्लाइट (LVM3-M5) होगी. CMS-03 भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह होगा, जिसका वजन लगभग 4,400 किलोग्राम है.  यह उपग्रह समुद्री इलाकों और भारतीय भूमि पर संचार सेवाएं देगा. पिछला LVM3 मिशन ने चंद्रयान-3 को चांद पर भेजा था, जहां भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग की थी. LVM3 रॉकेट: भारत की 'बाहुबली' लॉन्च व्हीकल LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) ISRO की सबसे ताकतवर रॉकेट है, जिसे 'बाहुबली' भी कहा जाता है. यह तीन चरणों वाली मध्यम-भारी लिफ्ट रॉकेट है, जो भारी उपग्रहों को अंडाकार जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में भेज सकती है. क्यों खासः LVM3 भारत की स्वदेशी तकनीक का प्रतीक है. यह 4 टन तक के उपग्रह GTO में भेज सकती है, जो PSLV या GSLV Mk-II से ज्यादा है. पहले विदेशी रॉकेट्स पर निर्भरता थी, लेकिन अब ISRO खुद बड़े उपग्रह लॉन्च करता है. विकास: 2000 के दशक में शुरू. पहली सफल फ्लाइट 2014 में. अब तक 7 सफल मिशन.  पिछला मिशन: LVM3-M4 ने जुलाई 2023 में चंद्रयान-3 लॉन्च किया. विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की. इससे भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बना. LVM3 की मुख्य स्पेसिफिकेशन्स      ऊंचाईः 43.5 मीटर (14 मंजिल ऊंचा.)     लिफ्ट-ऑफ वजनः 640 टन (एक बड़े हाथी का 800 गुना वजन)     चरणः 3 (2 सॉलिड बूस्टर + 1 लिक्विड कोर + 1 क्रायोजेनिक अपर)     बूस्टर इंजनः S200 (सॉलिड फ्यूल, 205 टन HTPB ईंधन)     कोर स्टेजः L110 (लिक्विड फ्यूल, Vikas इंजन)     अपर स्टेजः CE-20 (क्रायोजेनिक, LOX/LH2 फ्यूल)     पेलोड फेयरिंगः 5 मीटर व्यास (उपग्रह को ढकने वाला ढक्कन)     GTO पेलोड क्षमताः 4 टन (CMS-03 जैसा भारी उपग्रह आसानी से.)     लॉन्च साइटः श्रीहरिकोटा (सतीश धवन स्पेस सेंटर) यह रॉकेट उड़ान के दौरान अलग-अलग चरणों में काम करता है. पहले दो मिनट में बूस्टर जलते हैं. फिर कोर स्टेज. आखिर में अपर स्टेज उपग्रह को सही कक्षा में छोड़ता है. पूरी उड़ान 20-25 मिनट की होती है. CMS-03 उपग्रह: भारत का सबसे भारी संचार सैटेलाइट CMS-03 (कम्युनिकेशन सैटेलाइट-03) एक मल्टी-बैंड संचार उपग्रह है, जो GSAT-7R या GSAT-N2 के नाम से भी जाना जाता है. यह भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया है (रक्षा मंत्रालय द्वारा फंडेड), जो समुद्री इलाकों में सुरक्षित संचार देगा. वजन 4,400 किलोग्राम का यह उपग्रह भारत से GTO में लॉन्च होने वाला सबसे भारी संचार सैटेलाइट होगा. क्या करेगा? यह Ka-बैंड हाई-थ्रूपुट (HTS) तकनीक से काम करेगा. 40 बीम्स (सिग्नल कवरेज एरिया) के साथ 70 Gbps (गीगाबिट प्रति सेकंड) स्पीड देगा. भारतीय महासागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भारतीय भूमि पर सेवाएं – जैसे वॉयस, डेटा, वीडियो कॉल, नेविगेशन और सैन्य कम्युनिकेशन. कब तक काम करेगा: 14-15 साल. GEO (36,000 किमी ऊंचाई) में स्थापित होगा, जहां से हमेशा एक ही जगह दिखेगा. तकनीक: एडवांस ट्रांसपोंडर (सिग्नल भेजने वाले), सोलर पैनल (बिजली के लिए) और बैटरी. यह मौसम-रोधी और सुरक्षित है. दुश्मन जैमिंग से बचेगा. महत्व: नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और तट रक्षकों को रीयल-टाइम कनेक्टिविटी. आपदा प्रबंधन, मछली पकड़ने और पर्यटन में भी मदद. LVM3-M5 मिशन: पूरी डिटेल्स स्टेप बाय स्टेप     यह मिशन LVM3 का 5वां ऑपरेशनल फ्लाइट है. कुल 8वां लॉन्च (टेस्ट सहित).     लॉन्च डेट: 2 नवंबर 2025, सुबह (सटीक समय जल्द घोषित).     लॉन्च साइट: श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश. रॉकेट को 26 अक्टूबर 2025 को असेंबल करके लॉन्च पैड पर ले जाया गया.     उद्देश्य: CMS-03 को GTO में प्लेस करना. फिर उपग्रह अपने इंजन से GEO पहुंचेगा. फ्लाइट सीक्वेंस     लिफ्ट-ऑफ: S200 बूस्टर जलेंगे, रॉकेट 126 किमी ऊंचाई पर पहुंचेगा.     स्टेज सेपरेशन: 2 मिनट बाद बूस्टर अलग, L110 कोर चलेगा.     अपर स्टेज: CE-20 इंजन उपग्रह को 5,325 मीटर/सेकंड स्पीड देगा.     पेलोड डिप्लॉयमेंट: 20 मिनट में उपग्रह अलग, पैराशूट से नीचे आएगा (अगर जरूरी).     टीम: ISRO के 500+ वैज्ञानिक. चेयरमैन वी. नारायणन के नेतृत्व में.     चुनौतियां: मौसम, इंटीग्रेशन टेस्ट. लेकिन LVM3 की सफलता दर 100% है. मिशन का महत्व: भारत के लिए क्यों बड़ा कदम?     तकनीकी: भारत अब भारी उपग्रह खुद लॉन्च कर सकता है, विदेशी मदद कम.     रणनीतिक: नौसेना की ताकत बढ़ेगी, समुद्री सीमाओं पर नजर.     आर्थिक: NSIL (New Space India Ltd) के जरिए कॉमर्शियल लॉन्च, 10,000 करोड़+ कमाई.     भविष्य: अगला LVM3 US का BlueBird-6 सैटेलाइट लॉन्च करेगा. फिर गगनयान, इंडियन स्पेस स्टेशन.  

ट्रंप के फैसलों के बीच पीएम मोदी की दूरी — जानिए असली कारण

नई दिल्ली कभी मंच साझा करते हुए ‘दो मजबूत नेताओं’ की दोस्ती का प्रतीक माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अब रिश्तों की गर्माहट noticeably कम हो गई है। न अमेरिका में आमने-सामने मुलाकात, न किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा उपस्थिति बस औपचारिक बधाइयों और प्रशंसाओं का सिलसिला जारी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों के बीच यह दूरी क्यों बढ़ रही है?   निमंत्रण पर ‘ना’ और बढ़ती खामोशी इस साल जून में ट्रंप ने पीएम मोदी को कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका रुकने का निमंत्रण दिया, मगर मोदी ने वह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शर्म अल-शेख सम्मेलन के लिए भी आमंत्रण आया — जो ट्रंप की मध्यपूर्व शांति पहल का जश्न था पर प्रधानमंत्री ने इसमें भी शिरकत नहीं की और भारत की ओर से एक जूनियर मंत्री को भेजा गया। अब जब ट्रंप मलेशिया में हो रहे आसियान शिखर सम्मेलन में पहुंचे, मोदी ने वहां भी वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। यह पिछले एक दशक में दूसरा मौका है जब प्रधानमंत्री ने आसियान मंच पर भौतिक उपस्थिति दर्ज नहीं की। आगामी नवंबर में जब दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन होगा, ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे उसमें शामिल नहीं होंगे। यानि, दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल बाद ही संभव दिख रही है।  अब ट्रंप मलेशिया में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में हैं, जिसमें पीएम मोदी ने भाग नहीं लिया, बल्कि वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए. यह पिछले दस वर्षों में सिर्फ दूसरी बार है, जब उन्होंने आसियान सम्मेलन में उपस्थिति नहीं दर्ज की. और अब नवंबर में प्रधानमंत्री दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जाने वाले हैं, जहां G20 शिखर सम्मेलन आयोजित होगा. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि वे उस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. इसका मतलब है कि दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल तक नहीं होगी. पिछली बार उनकी मुलाकात फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में हुई थी. कई लोगों को यह दूरी कुछ अजीब लग रही है. क्वाड शिखर सम्मेलन की तारीख को लेकर भी अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. कभी दो ‘मजबूत नेताओं’ के बीच हाई-प्रोफाइल ‘ब्रोमांस’ कहा जाने वाला रिश्ता अब एक अजीब कूटनीतिक दूरी में बदल गया है. अब मुलाकातें कम हो गई हैं. हाल ही में दोनों नेताओं के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हुई है, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. इस बीच सार्वजनिक बयानों में गर्मजोशी बनी हुई है. पीएम मोदी ट्रंप की ‘शांति प्रयासों’ की प्रशंसा करते हैं और ट्रंप उन्हें ‘अच्छा दोस्त’ कहते हैं, लेकिन सतह के नीचे यह रिश्ता कुछ तनावपूर्ण दिखाई देता है. तो सवाल है कि आखिर दोनों एक-दूसरे से बच क्यों रहे हैं? पुरानी नज़दीकी कैसे बन गई दूरी 2019-2020 के दौरान मोदी-ट्रंप के रिश्ते बहुत सार्वजनिक रूप से मजबूत दिखाई देते थे. ‘हाउडी मोदी!’ और ‘नमस्ते ट्रंप!’ जैसे विशाल आयोजनों ने इस दोस्ती की झलक पूरी दुनिया को दिखाई. दोनों नेता बड़े वादे करते थे… भारत-अमेरिका व्यापार बढ़ाना, रक्षा सहयोग गहरा करना, ऊर्जा समझौते करना. भारत के लिए ट्रंप एक ऐसे सहयोगी थे, जिनके साथ नई दिल्ली अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत करना चाहती थी, जबकि अमेरिका के लिए भारत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार था. जब ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति पद संभाला, तो पीएम मोदी ने फरवरी में उनसे मुलाकात की. दोनों ने अगली मुलाकात भारत में क्वाड शिखर सम्मेलन के दौरान करने का वादा किया, लेकिन मई आते-आते रिश्तों में दरारें दिखने लगीं. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया था. हालांकि पीएम मोदी ने सार्वजनिक रूप से इस दावे को खारिज कर दिया. जून तक आते-आते दोनों के रिश्ते में तनाव और बढ़ गया. रिश्ते में खटास के प्रमुख कारण 1. ट्रेड और टैरिफ: अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार असंतुलन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया गया है और अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र में प्रवेश की मांग कर रहा है. मोदी ने साफ कहा है कि भारत समझौता नहीं करेगा. 2. रूसी तेल का खेल: भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है. अमेरिका चाहता है कि भारत इसे कम करे. यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है. हाल ही में भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के उस दावे को खारिज किया कि भारत ‘लगभग शून्य’ स्तर तक रूसी तेल खरीद घटा देगा. 3. कूटनीतिक छवि: दोनों नेताओं के अपने घरेलू राजनीतिक आधार हैं जो उन्हें ताकतवर छवि बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं, न कि समझौता करने के लिए. 4. रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठजोड़: भारत हमेशा यह रेखांकित करता है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलेगा, किसी एक देश के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ेगा. इन सभी तत्वों ने एक गर्मजोशी भरे रिश्ते को कठिन बना दिया है. क्या मोदी ट्रंप से मुलाकात टाल रहे हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी असहज या अनुचित माहौल में बैठक से बचना चाहते हैं. जैसे 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (कुआलालंपुर) में उन्होंने वर्चुअल रूप से शामिल होना चुना, जिसे व्यापक रूप से ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात से बचने के रूप में देखा गया. ट्रंप ने अपनी यात्रा के दौरान फिर से यह दावा दोहराया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराया और भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला है, जबकि भारतीय अधिकारियों ने ऐसे किसी भी फोन कॉल या बातचीत से इनकार किया. ऐसी स्थितियों में सार्वजनिक विरोधाभास से दोस्ती की छवि कमजोर पड़ती है. पीएम मोदी यह दिखाना चाहते हैं कि भारत किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा. ट्रंप से मिलना और वहां किसी ‘समझौते’ का संकेत देना, घरेलू राजनीति के लिहाज से मोदी के लिए असुविधाजनक हो सकता है. उसी तरह, ट्रंप भी ऐसी बैठक में दिलचस्पी नहीं रखते जहां उन्हें कोई ‘स्पष्ट जीत’ दिखाई न दे. इसलिए भारत का यह रवैया (बहुत जल्दी मुलाकात न करना) एक रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने की कोशिश है. शर्म अल-शेख समिट में क्यों नहीं गए मोदी पीएम मोदी ने शर्म अल-शेख समिट में शामिल होने के लिए अमेरिकी न्योते … Read more

सरकार की नई पहल: ‘Bharat Taxi’ से मिलेगी सस्ती और भरोसेमंद राइड, खत्म होगी Ola-Uber की मनमानी

नई दिल्ली कई सालों से भारतीय टैक्सी बाजार कुछ निजी ऐप-आधारित कंपनियों के इर्द-गिर्द घूम रहा था. यात्रियों के पास विकल्प कम थे और ड्राइवरों के लिए मुनाफे की गुंजाइश और भी कम. लेकिन अब हालात बदलने वाले हैं. केंद्र सरकार ने भारत टैक्सी (Bharat Taxi) नाम से देश की पहली सहकारी टैक्सी सेवा लॉन्च की है, जो सीधे तौर पर ओला और ऊबर जैसी निजी कंपनियों को चुनौती देने के लिए तैयार है. यह पहल केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय और नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) और सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड – भारत टैक्सी – ने एक समझौता ज्ञापन (MoU पर हस्ताक्षर किया है. इस योजना का उद्देश्य ड्राइवरों को उनकी कमाई पर पूरा स्वामित्व देना है, साथ ही यात्रियों को एक भरोसेमंद और सरकारी निगरानी वाली सेवा मुहैया कराना है. इस योजना के साथ सरकार यात्रियों को एक भरोसेमंद, पारदर्शी और किफायती विकल्प देने का दावा कर रही है. तो आइये विस्तार से जानें क्या है भारत टैक्सी सर्विस-  निजी टैक्सी सेवाओं की मनमानी का जवाब पिछले कुछ वर्षों में ऐप-बेस्ड टैक्सी सेवाओं को लेकर शिकायतों की बाढ़ आई. कभी गाड़ियों की साफ-सफाई पर सवाल, तो कभी अचानक बढ़ा किराया या बुकिंग रद्द होने की झंझट. ड्राइवरों की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं रही, उन्हें अपनी कमाई का लगभग 25 फीसदी हिस्सा कमीशन के रूप में कंपनियों को देना पड़ता था. भारत टैक्सी इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में पहला ठोस कदम है. ‘नो कमीशन’ मॉडल: ड्राइवरों की पूरी कमाई उन्हीं की भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां किसी तरह का कमीशन नहीं लिया जाएगा. ड्राइवरों को सिर्फ एक सदस्यता शुल्क देना होगा, जो दैनिक, साप्ताहिक या मासिक हो सकता है. इस तरह, हर यात्रा की पूरी कमाई ड्राइवर की जेब में जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे लाखों ड्राइवरों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा. एक और ख़ास बात ये है कि, इस सर्विस से जुड़ने वाले वाहन चालकों को ड्राइवर नहीं बल्कि 'सारथी' कहा जाएगा. दिल्ली से शुरू होगा सफर, जल्द पहुंचेगा देशभर में भारत टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट नवंबर में दिल्ली से शुरू होगा. शुरुआती चरण में 650 वाहन और उनके मालिक-ड्राइवर इस सेवा का हिस्सा बनेंगे. अगर यह सफल रहा, तो दिसंबर से इसका विस्तार देश के अन्य प्रमुख शहरों में किया जाएगा. पहले ही चरण में करीब 5,000 ड्राइवर (जिनमें महिलाएं भी शामिल होंगी) जुड़ने जा रहे हैं. 2030 तक एक लाख ड्राइवरों का नेटवर्क सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक भारत टैक्सी को सभी प्रमुख मेट्रो शहरों में स्थापित करने का है. 2030 तक यह प्लेटफॉर्म एक लाख से अधिक ड्राइवरों को जोड़ते हुए ज़िला मुख्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बनाएगा. यह सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि सहकारिता की नई क्रांति मानी जा रही है. ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ की जिम्मेदारी भारत टैक्सी किसी निजी कंपनी की तरह नहीं, बल्कि एक सहकारी उद्यम के रूप में काम करेगी. इसका संचालन ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ द्वारा किया जाएगा, जिसे जून 2025 में 300 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ स्थापित किया गया था. इस परियोजना की निगरानी के लिए बनी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता अमूल के एमडी जयेन मेहता कर रहे हैं, जबकि एनसीडीसी के डिप्टी एमडी रोहित गुप्ता उपाध्यक्ष हैं. सरकार का दावा है कि यह मॉडल ड्राइवरों को स्वामित्व, पारदर्शिता और सम्मान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा. ट्रांसपैरेंसी और भरोसे का नया ट्रांसपोर्ट मॉडल भारत टैक्सी केवल एक टैक्सी ऐप नहीं, बल्कि ड्राइवरों और यात्रियों के बीच भरोसे का पुल बनने जा रही है. सरकार का लक्ष्य एक ऐसा परिवहन इकोसिस्टम बनाना है, जहां तकनीक, सहकारिता और पारदर्शिता तीनों मिलकर देश की सड़कों पर नई दिशा तय करें. अगर यह प्रयोग सफल हुआ, तो भारत टैक्सी आने वाले वर्षों में न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए “कोऑपरेटिव मोबिलिटी” का आदर्श मॉडल बन सकती है. अमित शाह ने किया था ऐलान गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इसी साल मार्च में लोकसभा में सहकारी कैब सर्विस को शुरू करने का ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि, "जल्द ही ओला और उबर जैसा एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म आने वाला है. उन्होंने कहा कि इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा."

चुनाव आयोग : SIR के जरिए वोटर लिस्ट में बदलाव, हर योग्य मतदाता को शामिल किया जाएगा

नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशभर में SIR की घोषणा की. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है. इस चरण में मतदाता सूची के अपडेशन, नए वोटरों के नाम जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने का काम किया जाएगा. दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'आज हम यहां स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दूसरे चरण की शुरुआत के ऐलान के लिए मौजूद हैं. मैं बिहार के मतदाताओं को शुभकामनाएं देता हूं और उन 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई और इसे सफल बनाया.' दूसरे चरण में इन 12 राज्यों में होगा SIR दूसरे चरण में चुनाव आयोग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR करा रहा है. इन 12 राज्यों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप शामिल हैं.  उन्होंने आगे बताया कि आयोग ने देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. मुख्य चुनाव आयुक्त का बड़ा संदेश: 12 राज्यों में शुरू होगा SIR मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने छठ पर्व की शुभकामनाओं के साथ बिहार के मतदाताओं को धन्यवाद दिया. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम की घोषणा करते हुए कहा कि बिहार के पहले चरण के बाद अब 12 राज्यों में ‘SIR’ (स्पेशल इंटीग्रेटेड रिवीजन) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. CEC ने बिहार में इस प्रक्रिया की सफलता पर जोर दिया और बताया कि SIR से बनी मतदाता सूची पर मतदाताओं की ओर से ‘जीरो अपील’ दर्ज की गई है, जो इस प्रणाली की सटीकता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करता है. CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस अभ्यास के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार दौरा करेंगे, ताकि नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जा सके और किसी भी गलती को सुधारा जा सके. ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'BLO घर-घर जाकर Form-6 और Declaration Form एकत्र करेंगे, नए मतदाताओं को फॉर्म भरने में मदद करेंगे और उन्हें ERO (Electoral Registration Officer) या AERO (Assistant ERO) को सौंपेंगे.' मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि फेज-2 की ट्रेनिंग मंगलवार से शुरू होगी. साथ ही सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEOs) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEOs) को निर्देश दिया गया है कि वे अगले दो दिनों के भीतर राजनीतिक दलों से मिलकर SIR प्रक्रिया की जानकारी दें. उन्होंने बताया कि आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि मतदाताओं- खासकर बुजुर्गों, बीमार, दिव्यांग (PwD), गरीब और कमजोर वर्गों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए लोगों की तैनाती की जाएगी ताकि उन्हें अधिकतम सहायता मिल सके ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मतदान केंद्र (polling station) में 1200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे. बिहार के वोटर्स का किया धन्यवाद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- मैं बिहार के मतदाताओं को शुभकामनाएं देता हूं और उन 7.5 करोड़ मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई और इसे सफल बनाया.' उन्होंने आगे बताया कि आयोग ने देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. अब तक 8 बार हुआ SIR अब तक देश में 1951 से 2004 के बीच आठ बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हुआ है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राजनीतिक दलों ने कई मौकों पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया है. आज रात फ्रीज कर दी जाएगी लिस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस चरण में जिन राज्यों में SIR होगा, वहां मतदाता सूची आज रात फ्रीज कर दी जाएगी. क्यों जरूरी है SIR? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा- कई कारण हैं जिनकी वजह से SIR जैसी प्रक्रिया की जरूरत है. इनमें बार-बार पलायन शामिल है, जिसके कारण मतदाताओं का एक से ज़्यादा जगहों पर पंजीकरण हो जाता है, मृत मतदाताओं का नाम नहीं हटाया जाता और किसी विदेशी का गलत तरीके से सूची में शामिल होना शामिल है.' क्या होगी पात्रता? मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता के लिए पात्रता को भी स्पष्ट किया, जिसके अनुसार वोट देने के लिए व्यक्ति का भारत का नागरिक होना, कम से कम 18 वर्ष की आयु पूरी करना. निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और किसी भी कानून के तहत अयोग्य न होना आवश्यक है, जो कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 में निहित है. 12 राज्यों/UTs की वोटर लिस्ट आज रात होगी फ्रीज मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने घोषणा की कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की मतदाता सूची आज रात से फ्रीज कर दी जाएगी. जहां ‘स्पेशल इंटीग्रेटेड रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया शुरू की जानी है. यह कदम इन क्षेत्रों में विस्तृत SIR अभ्यास शुरू करने से पहले मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण है. अब तक 8 बार हुआ SIR अब तक देश में 1951 से 2004 के बीच आठ बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हुआ है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राजनीतिक दलों ने कई मौकों पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता का मुद्दा उठाया है. आज रात फ्रीज कर दी जाएगी लिस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस चरण में जिन राज्यों में SIR होगा, वहां मतदाता सूची आज रात फ्रीज कर दी जाएगी.

‘मोन्था’ का प्रकोप: 28 अक्टूबर को सबसे खतरनाक दौर, 15 जिलों में अलर्ट

विशाखापट्टनम  दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बन रहा गहराता दबाव अब ‘चक्रवाती तूफान मोन्था’ का रूप लेने जा रहा है। मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम आज यानी 27 अक्टूबर को पूरी तरह से साइक्लोन में तब्दील हो जाएगा। फिलहाल इसका केंद्र विशाखापट्टनम से करीब 830 किलोमीटर पूर्व में है, लेकिन इसकी दिशा ने मौसम विशेषज्ञों को चौंका दिया है — क्योंकि यह गुजरात की ओर न बढ़कर दक्षिण भारत के तटीय इलाकों की ओर मुड़ रहा है। इस बदलाव के चलते अगले 24 घंटे के लिए आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के तटीय हिस्सों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है, जबकि कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कैसी है तूफान की मौजूदा स्थिति ‘मोन्था’ पिछले तीन घंटे में लगभग 16 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। 27 अक्टूबर की सुबह तक इसका केंद्र — चेन्नई से लगभग 600 किमी दक्षिण-पूर्व, काकीनाडा से 680 किमी, विशाखापट्टनम से 710 किमी, और गोपालपुर (ओडिशा) से करीब 850 किमी दक्षिण में स्थित था। अगले 12 घंटे में यह सिस्टम और सशक्त होकर पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ेगा और धीरे-धीरे गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है।  28 अक्टूबर को चरम पर पहुंचेगा ‘मोन्था’ मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान सोमवार रात या मंगलवार सुबह तक भीषण रूप धारण करेगा और 28 अक्टूबर की शाम या रात को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के पास मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच तट से टकरा सकता है। लैंडफॉल के समय हवाओं की रफ्तार 90 से 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने और मूसलाधार बारिश की संभावना है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन की पूरी तैयारी कर ली है — राहत दलों को सक्रिय कर दिया गया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी दी गई है। तमिलनाडु और आंध्र में अलर्ट मोड आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, विजयनगरम और काकीनाडा जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। तटीय गांवों को खाली कराया जा रहा है, जबकि काकीनाडा और आसपास के इलाकों में 20–30 सेंटीमीटर तक बारिश की संभावना है। लोगों को सुरक्षित साइक्लोन शेल्टरों में भेजा जा रहा है और प्रशासन ने जरूरी आपूर्ति — जैसे पानी, दूध और सब्ज़ियां — घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था की है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों से बीच एरिया से पूरी तरह दूर रहने की अपील की गई है। ओडिशा के 15 जिलों में भी हाई अलर्ट ओडिशा सरकार ने पहले से ही आपदा से निपटने की तैयारी कर रखी है। राज्य में 5 NDRF और 24 ODRAF टीमें सक्रिय हैं, जबकि 15 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। 128 डिजास्टर एक्शन यूनिट्स, 99 फायर सर्विस टीमों और 5000 बचावकर्मियों को फील्ड में तैनात किया गया है। स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र 30 अक्टूबर तक बंद रखे गए हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि “हर जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।” जरूरी हेल्पलाइन नंबर (Emergency Contacts) राष्ट्रीय आपात नंबर: 112 राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष: 1070 आपात राहत हेल्पलाइन (आंध्र प्रदेश): 1800 425 0101  चेतावनी और एहतियात मौसम विभाग ने सलाह दी है कि अगले तीन दिनों तक तटीय राज्यों के निवासी सतर्क रहें, और किसी भी परिस्थिति में समुद्र के किनारे या खुले इलाकों में न जाएं। मछुआरों से विशेष अपील की गई है कि वे 30 अक्टूबर तक समुद्र में न उतरें।  

लोकतंत्र का महापर्व करीब: चुनाव आयोग आज खोलेगा SIR की तारीखों का पिटारा

नई दिल्ली अगले दो-तीन सालों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) आज देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम की घोषणा करेगा। ECI ने इसकी तारीखों का ऐलान करने के लिए आज शाम सवा 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। SIR के तहत देश भर में मतदाता सूचियों को शुद्ध और विश्वसनीय बनाया जाएगा। पहले चरण में 5 राज्यों पर फोकस बताया जा रहा है कि SIR के पहले चरण में उन 5 राज्यों को शामिल किया जाएगा जहां अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं:     असम     केरल          तमिलनाडु     पुडुचेरी     पश्चिम बंगाल ECI की घोषणा में करीब 10 से 15 राज्यों को शामिल किया जा सकता है जिनमें अगले 2-3 सालों में विधानसभा चुनाव होने हैं। निकाय चुनाव के बाद होगा SIR: ECI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन राज्यों में निकाय चुनाव होने हैं वहां SIR निकाय चुनाव के बाद होगा ताकि चुनावी ड्यूटी में व्यस्त कर्मचारी इस कार्य को पर्याप्त समय दे सकें। SIR के तहत कैसे अपडेट होगी वोटर लिस्ट? विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को त्रुटि रहित बनाना है। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।     मृत वोटरों को हटाना: मृत वोटरों के नाम हटाए जाएंगे।     नए वोटरों का पंजीकरण: नए वोटरों का डाटा जुटाकर उनका पंजीकरण (Registration) किया जाएगा और उनके नाम जोड़े जाएंगे।     डुप्लीकेसी खत्म: डुप्लीकेट वोटरों की पहचान करके उनके नाम हटाए जाएंगे।     स्थानांतरण अपडेट: उन वोटरों के नाम भी अपडेट किए जाएंगे जो स्थान शिफ्ट या ट्रांसफर हो चुके हैं।     डेटा सत्यापन: BLOs वोटर लिस्ट में शामिल नामों, EPIC नंबर्स, पते और मोबाइल नंबर जैसी सभी जानकारियों की पुष्टि करेंगे। इस विस्तृत सर्वे के बाद नए वोटर कार्ड जारी किए जाएंगे और एक फाइनल वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी जो आगामी चुनावों के लिए शुद्ध और विश्वसनीय होगी। ECI और CEO की बैठकें भारतीय चुनाव आयोग की टीम ने देशभर में SIR का फॉर्मेट फाइनल करने से पहले सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) से मुलाकात की थी। सभी CEOs को पिछली SIR के तहत अपडेट हुई वोटर लिस्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। उदाहरण के लिए दिल्ली (2008), उत्तराखंड (2006) और बिहार (हाल ही में) की फाइनल वोटर लिस्ट वेबसाइट पर उपलब्ध है।  

भारत-चीन के बीच हवाई सफर का नया अध्याय, कोलकाता से उड़ी पहली फ्लाइट

कोलकाता कई दौर की बैठकों और 5 साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवा फिर से शुरू हो गई है। इंडिगो एयरलाइंस की एक उड़ान के साथ ही दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के लिए यह सेवा दोबारा बहाल हुई है। कोलकाता से चीन के लिए पहली उड़ान इंडिगो के विमान 6E1703 ने रविवार रात 10:07 बजे कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से चीन के ग्वांगझू  के लिए उड़ान भरी। यह फ्लाइट ग्वांगझू बैयुन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर स्थानीय समयानुसार सुबह 4:05 बजे पहुंचेगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर ने इस ऐतिहासिक उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सेवा शुरू होने की पुष्टि की।    विस्तार योजना और उद्देश्य इस सेवा को फिर से शुरू करने का मुख्य उद्देश्य व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाना है जो पिछले 5 वर्षों से ठप पड़ी थी।     कोलकाता-ग्वांगझू रूट: इंडिगो इस रूट पर अब प्रतिदिन नॉन-स्टॉप उड़ानें संचालित करेगा।          आगामी रूट्स:         दिल्ली और ग्वांगझू के बीच अतिरिक्त उड़ानें 10 नवंबर से शुरू होंगी।         शंघाई-दिल्ली रूट पर उड़ानें 9 नवंबर से फिर से शुरू होंगी। इस कदम से दोनों देशों के बीच यात्रियों और माल ढुलाई की आवाजाही में बड़ी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।  

मुख्य न्यायाधीश गवई ने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस सूर्य कांत का नाम आगे बढ़ाया

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई के रिटायरमेंट के बाद अगले सीजेआई को चुने जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। खबर है कि सीजेआई गवई ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस सूर्य कांत का नाम आगे बढ़ा दिया है। गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के बाद पद संभाला था। सीजेआई गवई ने केंद्र सरकार से जस्टिस कांत के नाम की सिफारिश की है। वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस कांत भारत के 53वें सीजेआई बन जाएंगे। सरकार जल्द ही इसके संबंध में अधिसूचना जारी कर सकती है। जस्टिस कांत करीब 14 महीने तक इस पद पर रहेंगे और 9 फरवरी 2027 में रिटायर होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई गवई जल्द ही सिफारिश पत्र की एक कॉपी जस्टिस कांत को भी सौंप देंगे। दरअसल, केंद्र सरकार ने जस्टिस गवई से अपना उत्तराधिकारी चुनने के लिए कहा था। अखबार से बातचीत में सीजेआई ने जस्टिस कांत को कमान संभालने के लिए हर मामले में उपयुक्त बताया था। दस फरवरी 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 1981 में हरियाणा के हिसार स्थित सरकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1984 में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 1984 में हिसार जिला न्यायालय से अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और अगले वर्ष पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में कामकाज शुरू किया। वर्ष 2000 में वे हरियाणा के महाधिवक्ता बने और 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया। उसी वर्ष वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। बाद में वे 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए और 2019 में उन्हें उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया गया। उच्चतम न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका निभाई, जिनमें अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को संवैधानिक ठहराने वाले संविधान पीठ के निर्णय में उनकी भागीदारी भी शामिल है। उन्होंने संविधान, मानवाधिकार और लोकहित से जुड़े एक हजार से अधिक निर्णयों में योगदान दिया है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के पदेन कार्यकारी अध्यक्ष हैं और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, रांची के विजिटर भी हैं।