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ड्रग्स मामले में बड़ी कार्रवाई: 252 करोड़ के केस में ओरी से एंटी नारकोटिक्स सेल की पूछताछ

मुंबई  बहुचर्चित 252 करोड़ रुपए के ड्रग्स मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ओरहान अवत्रमाणी उर्फ ओरी बुधवार को मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) की घाटकोपर यूनिट पहुंचे। ओरी को ड्रग्स मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके बाद वह निर्धारित समय पर ऑफिस पहुंचे। मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) ने इस बड़े ड्रग्स केस की जांच के सिलसिले में ओरी को दूसरा समन जारी किया था। पहला समन 20 नवंबर को भेजा गया था, लेकिन ओरी ने बताया कि वह 25 नवंबर तक उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। इसके बाद एएनसी ने 21 नवंबर को दूसरा समन जारी कर उन्हें 26 नवंबर को घाटकोपर यूनिट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। ओरी बुधवार को समय पर वहां पहुंचे। इसके बाद उनका बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। ओरी के अलावा अभिनेता शक्ति कपूर के बेटे सिद्धांत कपूर को भी समन जारी किया गया। सिद्धांत 25 नवंबर को अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दोनों से संबंधित जानकारी मुख्य आरोपी के बयानों में सामने आई थी। 252 करोड़ रुपए की ड्रग्स का मामला पिछले साल मार्च से शुरू हुआ। महाराष्ट्र के सांगली जिले में पुलिस ने मेफेड्रोन ड्रग्स बनाने की एक अवैध फैक्ट्री पकड़ी थी। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुई, जिसकी कीमत विदेशी बाजार में करीब 252 करोड़ रुपए थी। जांच में पता चला कि फैक्ट्री मालिक मुख्य आरोपी सुहैल शेख और ताहिर डोला हैं। ये दोनों भारत और विदेशों में रेव पार्टियां आयोजित करते थे। इन पार्टियों में यही मेफेड्रोन और दूसरे नशीले पदार्थ सप्लाई किए जाते थे। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क को ढूंढने में जुटी है।

प्रकृति का कहर: अचानक आई बाढ़-भूस्खलन में इंडोनेशिया में 13 लोगों ने गंवाई जान

जकार्ता इंडोनेशिया में बाढ़ और लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई है। जानकारी के अनुसार, इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा के सात इलाकों और शहरों में बाढ़ और लैंडस्लाइड से 13 लोगों की मौत हो गई है। प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (बीपीबीडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बीपीबीडी के हवाले से बताया कि उत्तरी सुमात्रा में इमरजेंसी हैंडलिंग, इक्विपमेंट और लॉजिस्टिक्स के हेड वाह्युनी पंचसिलावती ने बताया कि मृतकों में दक्षिणी तपनौली रीजेंसी में नौ और केंद्रीय तपनौली रीजेंसी में चार लोग शामिल हैं। सिन्हुआ के अनुसार 22 से 25 नवंबर तक लगातार भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर आ गईं। इसकी वजह से सेंट्रल तपनौली, सिबोल्गा, मंडेलिंग नटाल, साउथ तपनौली, उत्तरी तपनौली, दक्षिणी नियास और पदांगसिडिम्पुआन में बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएं हुई हैं। सिन्हुआ ने अधिकारी के हवाले से बताया कि दक्षिण तपनौली में 37 लोग घायल हुए और तीन लोग लापता हैं, जबकि केंद्रीय तपनौली में नुकसान का डेटा अभी इकट्ठा किया जा रहा है। इन आपदाओं से सैकड़ों घरों, स्कूलों और पब्लिक जगहों को भी नुकसान हुआ और हजारों लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ रहा है। इससे पहले सिन्हुआ ने जानकारी दी थी कि उत्तरी सुमात्रा में लैंडस्लाइड और अचानक आई बाढ़ में चार लोगों की मौत हो गई और 34 लोग घायल हो गए। इसे लेकर प्रांतीय डिजास्टर मैनेजमेंट और मिटिगेशन एजेंसी के हेड तुहता रामाजया सारागिह ने कहा कि मंगलवार को केंद्रीय तपनौली रीजेंसी के एक गांव में भारी बारिश की वजह से लैंडस्लाइड हुआ, जिससे एक घर तबाह हो गया और उसमें रहने वाले चार लोगों की मौत हो गई। उन्होंने फोन पर सिन्हुआ को बताया, "चारों लाशों को मौके से निकाल लिया गया है।" इसके अलावा, अधिकारी के मुताबिक, भारी बारिश के बाद दो नदियों में पानी बढ़ जाने से बटांग टोरू सब-डिस्ट्रिक्ट के कुछ हिस्से अचानक आई बाढ़ में डूब गए, जिससे 34 लोग घायल हो गए। सारागिह ने आगे कहा कि अचानक आई बाढ़ के बाद सभी पीड़ितों को निकाल लिया गया है, और अधिकारियों ने एक फूड एड सेंटर बनाया है।

ट्रेनों में हलाल मीट परोसने की शिकायत पर NHRC सख्त, रेलवे से मांगा जवाब

नई दिल्ली  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हाल ही में रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उस शिकायत पर की गई है जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन में केवल हलाल प्रमाणित मांस का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग ने प्रथमदृष्टया इस प्रथा को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कनूंगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने कहा कि रेलवे में केवल हलाल मांस के प्रयोग का चलन न केवल भोजन विकल्पों को सीमित करता है, बल्कि यह कुछ समुदायों की आजीविका पर भी प्रभाव डालता है। पीठ ने कहा कि इससे विशेष रूप से उन अनुसूचित जाति के हिंदू समुदायों और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के हित प्रभावित होते हैं, जो परंपरागत रूप से मांस व्यापार से जुड़े हैं। एनएचआरसी के नोटिस में कहा गया है- शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसे प्रतीत होते हैं, क्योंकि केवल हलाल मांस बेचने की प्रथा हिंदू एससी समुदायों, अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही, सरकारी एजेंसी के रूप में रेलवे को सभी धार्मिक आस्थाओं से जुड़े लोगों के भोजन के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, जो भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप है। भोजन विकल्पों में भेदभाव का आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रेलवे की यह नीति अनुचित भेदभाव पैदा करती है, क्योंकि इससे वे समुदाय प्रभावित होते हैं जिनकी धार्मिक मान्यताओं में हलाल मांस स्वीकार्य नहीं है। शिकायत में कहा गया कि हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन विकल्प नहीं मिलते। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यह प्रथा संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव-निषेध), 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), 21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है। एनएचआरसी ने 12(ए) के तहत लिया संज्ञान आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। आगे क्या? इस मामले पर अब रेलवे बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि ट्रेनों में मांस की खरीद और प्रमाणन संबंधी नीति क्या है, क्या खाने में विविध विकल्पों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है और क्या केवल हलाल मांस पर निर्भरता वास्तव में भेदभाव या आजीविका पर प्रभाव डालती है।

चुनाव आयोग का सख्त रुख: SC में बोला— SIR को लेकर राजनीतिक दल अनावश्यक भय फैला रहे

नई दिल्ली  चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बिहार, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक दल अनुचित भय और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में SIR की वैधता को चुनौती दी गई है और कुछ पक्षों ने इसे स्थगित करने की मांग की है।   केरल सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के समानांतर SIR चलाने से प्रशासन पर अत्यधिक बोझ पड़ेगा और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की याचिकाएं: अलग-अलग तारीखें तय सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई की भी तारीखें तय की हैं-     तमिलनाडु SIR पर सुनवाई- 4 दिसंबर     पश्चिम बंगाल SIR पर सुनवाई- 9 दिसंबर वाम दल और IUML नेता भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट केरल सरकार के अलावा, CPI(M), CPI, और IUML नेता पी.के. कुन्हलिकुट्टी ने भी SIR की वैधता को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। इन पर अदालत ने 21 नवंबर को नोटिस जारी किया था। बिहार से शुरू हुआ था विवाद ECI ने जून 2025 में सबसे पहले बिहार में SIR शुरू करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, लेकिन अदालत ने प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, जिसके चलते बिहार में SIR पूरा हो चुका है। इसके बावजूद, 27 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने SIR का दायरा बढ़ाते हुए इसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल सहित कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू कर दिया। इसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी SIR को कानूनी चुनौती दी गई, जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर को नोटिस जारी किया था। ECI का रुख: कोई तात्कालिक खतरा नहीं सुप्रीम कोर्ट में ECI ने कहा कि SIR एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग ने यह भी तर्क दिया कि राजनीतिक दल तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित कर रहे हैं और इससे मतदाताओं के बीच अनावश्यक भय पैदा हो रहा है।

पुरानी घटना का हवाला देकर चुनाव आयोग ने चेताया, निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस को पत्र लिखकर चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा के प्रति चिंता जताई है। चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि एसआईआर की ड्यूटी में तैनात चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पत्र में कहा गया, जानकारी में आया है कि 24 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय की सुरक्षा तोड़ी गई। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त, अडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर, जॉइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और डिप्टी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया गया है।   पत्र में आगे कहा गया कि चुनाव आयोग ने पहले ही घटना का संज्ञान लिया है और चीफ इलेक्शन ऑफिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उनके कार्यालय और आवास दोनों की सुरक्षा पुख्ता की जाए। इसके अलावा एसआईआर की प्रक्रिया और डेटा की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त सुरक्षा के उपाय किए जाएं। चुनाव आयोग ने कहा कि निर्देश के बाद क्या कदम उठाए गए इसकी जानकारी 48 घंटे में दी जाए। बता दें कि बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सैकड़ों सदस्यों ने सोमवार को कॉलेज स्क्वायर से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला और सीईओ कार्यालय के सामने धरना दिया था। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस के मानवीय दीवार की तरह खड़े होने के बावजूद उनमें से कुछ ने गेट तोड़ने की कोशिश की। भीड़भाड़ में कुछ प्रदर्शनकारी दफ्तर के अंदर घुस गए और वहीं धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सोमवार रात करीब 11 बजे उस समय गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई, जब केएमसी पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक समूह नारेबाजी करते हुए मौके पर पहुंचा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को डरा-धमकाकर चल रही एसआईआर प्रक्रिया को विफल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। एसआईआर एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक- ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे असली मंशा राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) है। संविधान दिवस के अवसर पर रेड रोड स्थित बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। इससे पहले, उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता ‘‘खतरे में हो’’ और संघवाद को ‘‘ध्वस्त किया जा रहा हो’’, तो लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यवान मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए। बनर्जी ने कहा कि संविधान राष्ट्र की रीढ़ है, जो भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता को कुशलतापूर्वक एक साथ पिरोता है।  

गांव खाली, शहर आबाद: जनसंख्या का 80 फीसदी हिस्सा अब नगरों में बस रहा

नई दिल्ली  दुनिया की कुल आबादी के 80 फीसदी लोग अब शहरों में ही बसते हैं। गांवों की याद सबको सताती है और लोग पुरानी जिंदगी जीना चाहते हैं, लेकिन इस बीच शहरीकरण के आकर्षण का यह आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया की 80 फीसदी आबादी अब शहरी क्षेत्रों में बसी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़े पैमाने पलायन के चलते लोग शहरों में पहुंच गए हैं। इसके अलावा तमाम गांव भी ऐसे हैं, जो अब विकास की दौड़ में बढ़ते हुए शहर में ही तब्दील हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट World Urbanization Prospects 2025 के मुताबिक दुनिया के 81 फीसदी लोग अब शहरों में हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ही यह आंकड़ा महज 55 फीसदी था। रिपोर्ट के अनुसार 45 फीसदी लोग शहरों में बसे हैं तो वहीं 36 फीसदी लोग कस्बों के नागरिक हैं। यह रिपोर्ट पैट्रिक गेरलैंड के नेतृत्व में तैयार की गई है। यही नहीं अनुमान है कि 2050 तक दुनिया के 83 फीसदी लोग शहरों में पहुंच जाएंगे। इस रिपोर्ट को तैयार करने में अलग-अलग देशों के पैरामीटर का भी ख्याल रखा गया है। जैसे जापान में यदि 50 हजार लोगों की आबादी है तो उसे शहर का दर्जा दिया जाता है। लेकिन डेनमार्क में यह आंकड़ा महज 200 लोगों का ही है। इस रिपोर्ट के लिए यह पैमाना तैयार किया गया कि 50 हजार लोगों की आबादी हो और कम से कम प्रति वर्ग किलोमीटर के दायरे में 1500 लोग बसे हों। इसके अलावा कस्बों के लिए यह आंकड़ा 5000 का रखा गया है और प्रति वर्ग किलोमीटर 300 लोगों की आबादी का पैमाना रखा गया। इस तरह दुनिया की कुल 19 फीसदी आबादी ही अब विशुद्ध रूप से गांवों में बसी है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सभी हिस्सों में शहरीकरण बढ़ रहा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों को लेकर रिपोर्ट कहती है कि यहां शिक्षा और रोजगार के लिए लोग मुख्य तौर पर शहरों का रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि शहरीकरण में बिना प्लानिंग के इजाफा होने से कुछ परेशानियां भी आ रही हैं। जैसे शहर का विस्तार हो जाए और सार्वजनिक परिवहन की उसके मुताबिक व्यवस्था ना हो तो रहना मुश्किल होता है। इसके अलावा पलूशन में भी इजाफा हो रहा है क्योंकि निजी वाहनों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। वहीं यदि शहरों को प्लानिंग के साथ बसाया जाए तो वे ज्यादा कारगर होंगे और मानव जीवन के लिए ज्यादा सुविधायुक्त भी साबित होंगे।  

समुद्र में भयंकर रूप धर चुका ‘सेन्यार’ — तटीय इलाकों में बढ़ी सावधानी!

नई दिल्ली  मलक्का जलसंधि पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। यह बुधवार को ही दोपहर बाद इंडोनेशिया के तट से टकरा सकता है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी पर भी कम दबाव का क्षेत्र ऐक्टिल हो गया है जो कि तूफान का रूप ले सकता है। दरअसल इस समय दो मौसमी सिस्टम ऐक्टिव हैं। मलक्का स्ट्रेट के अलावा दक्षिण श्रीलंका के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र तूफान का रूप ले रहा है। इस वजह से ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि मलक्का स्ट्रेट पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान 'सेन्यार' में बदल गया है। यह भारतीय समय के अनुसार शाम को 5:30 बजे तक तट से टकराएगा। बता दें कि मलक्का स्ट्रेट अंडमान सागर से सटा हुआ है। दोनों सिस्टम की वजह से तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, आंध्र प्रदेश और केरल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि सेन्यार चक्रवात का असर अगले 24 घंटे तक देखा जाएगा। बुधवार को ही यह इंडोनेशिया के तट को क्रॉस कर जाएगा। इसके बाद तूफान दक्षिण पश्चिम की ओर मुड़ सकता है। इस दौरान तटीय इलाकों में 70 से 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 26 नवंबर को ही निकोबार द्वीपसमूह पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा 27 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है। 28 नवंबर से मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा। बंगाल की खाड़ी में भी उठ रहा तूफान खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र से कावेरी डेल्टा, तमिलनाडु के दक्षिणी और दक्षिणी तटीय जिलों में भारी बारिश हुई और अगले 24 घंटों में यह चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। आईएमडी ने कहा है कि गुरुवार को ही यह चक्रवाती तूफान में तब्दील होगा। इससे तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों मे भारी बारिश की संभावना है। मंगलवार को तमिलनाडु के स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया गया था।  

अमित शाह की शादी में शिरकत, BJP टाइपिस्ट की बेटी की शादी बनी चर्चा का विषय

 नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP), दोनों के बारे में एक बात समान रूप से कही जाती है कि दोनों ही संगठन अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हैं। इसकी एक झलक हाल ही में देखने को मिली जब भाजपा कार्यालय में वर्षों से टाइपिस्ट की नौकरी कर रहे रामधन की बेटी की शादी में भारत के गृह मंत्री अमित शाह खुद पहुंच गए। इस तस्वीर की खूब चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया में लोग इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए इसे भाजपा की असली ताकत करार दे रहे हैं। 23 अगस्त को नई दिल्ली के द्वारका में संपन्न हुई इस शादी में भाजपा के कई नेताओं ने शिरकत की। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम भी इस शादी में शामिल हुए। उन्होंने भी एक तस्वीर पोस्ट की है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब आरएसएस या भाजपा या फिर किसी दूसरे दल के कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों के यहां उस दल का नेता पहुंचा हो। इससे पहले हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हरियाणा एक शादी समारोह में पहुंचे थे। वह अपने पीएसओ की बेटी को आशीर्वाद देने के लिए पटना से हरियाणा आए थे। जीनत राणा नाम के एक हैंडल ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘इस तस्वीर में पहले नंबर पर खड़े व्यक्ति का नाम रामधन हैं। रामधन जी बीजेपी मुख्यालय में टाइपिस्ट हैं। रामधन जी की बेटी की कल शादी थी, सारे व्यस्तताओं को किनारे करके गृहमंत्री अमित शाह जी ना केवल शादी में शामिल हुए बल्कि एक मुखिया की तरह वहां मौजूद रहकर बारातियों की अगवानी भी की।आपको इस तस्वीर से इस सवाल का जवाब मिल जायेगा की मोदी जी – शाह जी की जोड़ी के लिए उनकी टीम क्यों समर्पित रहती हैं?’

बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना के लॉकर पर कार्रवाई, एजेंसियों का दावा—सोना और कीमती गिफ्ट मिले

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हाल ही में मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस फैसले के आधार पर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी भारतसरकार से की थी. बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की मुश्किलें कम होती नहीं नजर आ रहीं. शेख हसीना की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं. बांग्लादेश के एंटी करप्शन कमीशन (एसीसी) शेख हसीना के खिलाफ अब भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के नए मामले दर्ज करने की तैयारी में है. एसीसी ने शेख हसीना से संबंधित संपत्तियों की जांच तेज कर दी है. बांग्लादेश की सेंट्रल इंटेलिजेंस सेल और नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने हाल ही में शेख हसीना के बैंक लॉकर्स की जांच की थी. बांग्लादेशी एजेंसियों का दावा है कि शेख हसीना के दो लॉकर्स से नौ किलो से अधिक सोने के गहने और पीएम पद पर रहते हुए मिले महंगे गिफ्ट मिले हैं. शेख हसीना के लॉकर्स में सोने के गहने और महंगे गिफ्ट्स के साथ ही कई कीमती वस्तुएं भी मिली हैं. बांग्लादेशी अधिकारियों का यह भी कहना है कि इनमें से कई वस्तुओं को प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए या उसके बाद, घोषित नहीं किया गया था. एसीसी अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच की तैयारी में है. एसीसी की जांच का फोकस आय के स्रोत पर होगा. एजेंसी यह भी देखेगी कि इन संपत्तियों को पूर्व पीएम ने वैध प्रक्रिया के अनुसार अपनी संपत्ति घोषित की थी या नहीं. एसीसी इस बात की भी जांच करेगी कि शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहते क्या किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई थी? सूत्रों की मानें तो एसीसी पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ दो-तीन नए केस दर्ज करने की तैयारी में है. गौरतलब है कि छात्रों के आरक्षण विरोधी आंदोलन के बाद शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी थी. मोहम्मद युनूस की अगुवाई में अंतरिम सरकार के गठन के बाद शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है. बांग्लादेश में हालात ऐसे हैं कि अवामी लीग का लगभग हर प्रमुख नेता किसी न किसी मामले में वित्तीय जांच के दायरे में है. शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले अंतरिम सरकार में खोल दिए गए हैं. पहले से ही मुश्किलों में घिरीं शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं की मुश्किलें नए केस से और बढ़ सकती हैं.

ये देश 16 साल से कम बच्चों पर इंटरनेट बैन! बढ़ते ऑनलाइन खतरे को रोकने बड़ा कदम

नई दिल्ली  दुनियाभर में साइबरबुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और यौन शोषण की घटनाओं में बढ़ोतरी ने कई देशों की सरकारों को चिंतित कर दिया है। इसी को देखते हुए मलेशिया ने अगले साल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट प्रतिबंध लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सरकार का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाना अब बेहद जरूरी हो गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी मलेशिया के संचार मंत्री फाहमी फादजिल ने बताया कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार अब ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों द्वारा अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन कर रही है। मंत्री के अनुसार, यूजर्स की उम्र सत्यापित करने के लिए पहचान पत्र, पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन सिस्टम को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी बनाएगी। नियमों का पालन करना अनिवार्य मलेशिया ने इस साल जनवरी से 80 लाख यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म्स को आयु सत्यापन, कंटेंट सुरक्षा और पारदर्शिता नियमों का पालन करना होगा। उद्देश्य यह है कि बच्चों को एक सुरक्षित डिजिटल स्पेस उपलब्ध कराया जा सके। 10 दिसंबर से ऑस्ट्रेलिया में लागू होगा दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में पहली बार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का कानून बनाया है, जो 10 दिसंबर से लागू होगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में उठा रहे कदम डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। डेनमार्क 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर चुका है, जबकि नॉर्वे ने सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम उम्र 15 साल तय करने का प्रस्ताव रखा है।