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वित्तीय वर्ष की शुरुआत में महंगाई का झटका, कमर्शियल LPG की कीमत ₹195.5 बढ़ी

 नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष का सीधा असर अब जनता की जेब पर पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दामों में 195.50 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है. बुधवार से लागू हुई इन नई कीमतों ने व्यापारियों और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक, दिल्ली में अब 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है।  इससे पहले, 1 मार्च को 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।  'कीमतों 50 फीसदी की बढ़ोतरी…' कमर्शियल गैस के दामों में बढ़ोतरी से घर पर खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है. घरेलू कुकिंग गैस (LPG) की कीमतें, जिनमें आखिरी बार 7 मार्च को 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, अभी भी वैसी ही बनी हुई हैं. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है।  क्या घरेलू सिलेंडर की बढ़ी कीमत हालांकि कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है। कंपनियों ने 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह सिलेंडर अभी भी 913 रुपये में मिल रहा है। घरेलू गैस के दाम आखिरी बार 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ाए गए थे। कितनी हुई कीमत कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी नई कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी 114.5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। कोलकाता में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 2208 रुपये का हो गया। मुंबई में 2031 रुपये की कीमत हो गई। वहीं चेन्नई में 2246.50 रुपये में यह सिलेंडर मिलेगा। पटना में इसकी कीमत 2365 हो गई। पहले भी बढ़े थे दाम बता दें कि इससे पहले पिछले महीने भी घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई थी। उस समय घरेलू सिलेंडर पर 60 रुपये और कमर्शियल पर 114.50 रुपये महंगा हुआ था। इस बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को इंटरनेशनल बेंचमार्क और एक्सचेंज रेट के आधार पर ATF और LPG की कीमतों में बदलाव करती हैं।  पश्चिम एशिया में जंग की वजह से एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावट आने के बाद से ग्लोबल तेल की कीमतों में लगभग 50 फीसदी की तेज़ी आई है।  पिछले साल मार्च में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से, इनकी कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं; दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर है।  दिल्ली में इतना है सिलिंडर का रेट सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में अब 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी कीमतों में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, यानी मात्र एक महीने के अंतराल में व्यापारिक गैस के दाम 300 रुपये से अधिक बढ़ चुके हैं। खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं कमर्शियल गैस के महंगे होने से रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की लागत बढ़ जाएगी। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाहर खाना और अन्य खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों में फिलहाल किसी बदलाव की खबर नहीं है।  

फीस चुकाने के लिए MBA छात्र ने बेची किडनी, 9 लाख का सौदा हुआ 3.5 लाख में

देहरादून देहरादून के एक नामी कॉलेज में एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा छात्र अपनी फीस जमा करने को किडनी बेचने को तैयार हो गया। उसने ऑपरेशन करवाकर किडनी निकलवा तो ली, लेकिन उसके साथ धोखाधड़ी हो गई। पुलिस को उसने बताया कि पहले नौ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था, लेकिन बाद में यह लोग छह लाख ही देने को तैयार हुए। ऑपरेशन होने के बाद खाते में 3.50 लाख रुपये ही दिए। उसने पुलिस से बकाया पैसा दिलाने की भी मांग की। कानपुर डीसीपी वेस्ट जोन एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि आयुष कुमार बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। वह देहरादून में एमबीए कर रहा है। उसने पुलिस को बताया कि परिवार में मां, छोटा भाई और बहन है। पिता ने किसी कारण से आत्महत्या कर ली थी। इसके चलते पढ़ाई छूटने के डर से वह किडनी बेचने को तैयार हो गया। किडनी रैकेट के संपर्क में कैसे आया किडनी रैकेट के संपर्क में कैसे आया, पुलिस के इस सवाल पर उसने बताया कि पांच से छह माह पूर्व टेलीग्राम पर किडनी डोनर ग्रुप से जुड़ा। वह पहले लोन लेकर फीस देना चाहता था लेकिन लोन मिला नहीं। इसके बाद किडनी डोनेट करने का निर्णय लिया। उसे डॉक्टर अफजल, डॉ. वैभव कानपुर लेकर आए थे। डीसीपी ने बताया कि आयुष साइबर अपराध से भी जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ पुलिस को साक्ष्य मिले हैं। उसने कई म्यूल अकाउंट बनवाए हैं। ऐसे में अपराधियों से उसकी साठगांठ की डिटेल खंगाली जा रही है। लखनऊ-नोएडा के अस्पताल रडार पर एसीपी आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच के दौरान लखनऊ और नोएडा के कुछ अस्पतालों की बारे में जानकारी मिली है। यहां से केस बिगड़ने के बाद मरीजों को लखनऊ और नोएडा के बड़े अस्पतालों में भेजा जाता था। साफ है कि इन अस्पतालों की भी अवैध किडनी कारोबार में भूमिका है। जांच चल रही है। डॉक्टर दंपति समेत छह धरे किडनी की खरीद-फरोख्त और अवैध ट्रांसप्लांट के रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार किया है। अभी दो और डॉक्टरों समेत चार लोगों की पुलिस को तलाश है।

भारत की शक्ति में इजाफा: भारतीय नौसेना को मिले 3 ब्रह्मोस मिसाइल से लैस घातक जहाज

मुंबई  हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति के बीच भारत की समुद्री ताकत को एक बड़ा बढ़ावा मिला है। भारतीय नौसेना को सोमवार को कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) से एक ही दिन में तीन नए जहाज प्राप्त हुए हैं। इनमें दो युद्धपोत (एक स्टेल्थ फ्रिगेट सहित) और एक बड़ा सर्वेक्षण पोत शामिल हैं। इन तीनों पोतों के नाम दूनागिरी, अग्रेय और संशोधक हैं। तीनों जहाजों की मुख्य विशेषताएं 1. दूनागिरी (स्टील्थ फ्रिगेट) यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित नीलगिरि श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है, जिसे पिछले 16 महीनों में नौसेना को सौंपा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जुलाई, 2022 को कोलकाता के GRSE में इस प्रोजेक्ट को लॉन्च किया था। यह 149 मीटर लंबा और 6,670 टन वजनी गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। मारक क्षमता की बात करें तो यह ब्रह्मोस एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस है। यह हवा, सतह और पानी के नीचे बहु-आयामी ऑपरेशनों को अंजाम देने में सक्षम है। वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए इस जहाज के निर्माण में 75% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है और 200 से अधिक MSME इसमें शामिल रहे हैं। पिछले अनुभवों के आधार पर इसके निर्माण की अवधि को नीलगिरि के 93 महीनों के मुकाबले घटाकर 80 महीने कर दिया गया। 2. अग्रय (एंटी-सबमरीन वारफेयर शिप) यह आठ 'अरनाला' श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट्स (ASW-SWCs) में से चौथा जहाज है। इसका मुख्य उद्देश्य नौसेना की पनडुब्बी रोधी, माइन-वॉरफेयर और तटीय निगरानी क्षमताओं को बढ़ाना है। 77 मीटर लंबा यह वॉटरजेट-संचालित युद्धपोत अत्याधुनिक लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार (SONAR) से लैस है। 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। 3. संशोधक (लार्ज सर्वे वेसल) संशोधक एक विशाल सर्वेक्षण पोत है, जिसे तटीय और गहरे पानी के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण के लिए डिजाइन किया गया है। इसका विस्थापन लगभग 3400 टन और कुल लंबाई 110 मीटर है। इसका मुख्य काम बंदरगाहों के रास्तों का सर्वेक्षण करना और नेविगेशनल मार्गों (समुद्री रास्तों) का सटीक निर्धारण करना है। इसके अलावा, यह रक्षा और नागरिक इस्तेमाल के लिए समुद्र विज्ञान और भूभौतिकीय डेटा भी एकत्र करेगा। यह डेटा अधिग्रहण प्रणाली, ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), DGPS लॉन्ग-रेंज पोजिशनिंग सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसे अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस है। यह पोत 30 अक्टूबर 2018 को चार सर्वेक्षण जहाजों के लिए हुए एक कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है। इसी क्लास के पिछले तीन जहाज- INS संधायक, INS निर्देशक और INS इक्षक क्रमशः फरवरी 2024, दिसंबर 2024 और नवंबर 2025 में कमीशन किए जा चुके हैं। इसमें भी लागत के हिसाब से 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री लगी है। GRSE की अन्य परियोजनाएं GRSE वर्तमान में नौसेना के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है।     एक प्रोजेक्ट 17A एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट     चार ASW-SWC     चार नेक्स्ट-जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPVs) इसके अलावा, शिपयार्ड 30 अन्य जहाजों का निर्माण कर रहा है, जिनमें से 13 निर्यात के लिए हैं। GRSE पांच नेक्स्ट-जेनरेशन (अगली पीढ़ी के) कार्वेट के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण अनुबंध को अंतिम रूप देने के भी उन्नत चरण में है।

ईरान ने होर्मुज में टोल वसूली को दी मंजूरी, अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर बैन

तेहरान  ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान की संसद ने होर्मुज पर टोल लगाने वाले ‘कानून’ को मंजूरी दे दी है. जी हां, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नई प्रबंधन योजना को मंजूरी दी है. इसमें जहाजों पर टोल और कुछ देशों पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इस मंजूरी के बाद अब होर्मुज से अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर बैन लग गया है. इस तरह अब ईरान ने दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने का फैसला किया है. यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी है।  इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, इस नए प्लान में रणनीतिक जलमार्ग यानी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए रियाल आधारित टोल सिस्टम लागू किया गया है. इसका मतलब है कि  होर्मुज से गुजरने पर सभी जहाजों को टोल देना होगा. इस प्लान में समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और होर्मुज से गुजरने के वित्तीय नियमों से जुड़ी बातें भी शामिल हैं।  अमेरिकी-इजरायली जहाजों पर बैन IRIB के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी और इजरायली जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगाया गया है और उन देशों पर भी प्रतिबंध बढ़ाया गया है, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं. साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को फिर से मजबूत किया है और ओमान के साथ मिलकर इसके प्रबंधन के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है।  ईरान के इस कदम से खलबली ईरान का यह कदम दुनिया में खलबली मचाने वाला है. यह कदम पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिकी-इजरायली गठबंधन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच उठाया गया है, जो अब दूसरे महीने में है. इससे तेहरान की ओर से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक यानी होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश का संकेत मिलता है. अब तक जो हालात हैं, उससे साफ है कि होर्मुज पर ईरान का एकक्षत्र राज है।  अमेरिका रहा है होर्मुज पर फेल इसी बीच अमेरिका अब तक होर्मुज खोलने में विफल रहा है. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से स्थापित करना चाहता है ताकि जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र रूप से हो सके. उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है और हम देख रहे हैं कि रोजाना ज्यादा से ज्यादा जहाज गुजर रहे हैं, क्योंकि अलग-अलग देश फिलहाल ईरानी शासन के साथ समझौते कर रहे हैं. समय के साथ अमेरिका जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से हासिल करेगा और वहां जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र होगी, चाहे वह अमेरिकी एस्कॉर्ट के जरिए हो या बहुराष्ट्रीय एस्कॉर्ट के जरिए। 

एयरपोर्ट पर महिला से बरामद हुआ 83 लाख का सोना, कैप्सूल में छिपाकर लाया था

अहमदाबाद कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) की एक टीम ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश से सोने की तस्करी कर रही एक महिला यात्री को गिरफ्तार किया और 83.29 लाख रुपये का सोना जब्त किया. कुआलालंपुर से फ्लाइट नंबर AK-91 से अहमदाबाद पहुंची इस महिला ने कस्टम अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए अपने गुप्तांग में काले टेप में लिपटी दो अंडाकार कैप्सूल छिपा रखी थीं, जिनमें सोने का तरल रासायनिक पेस्ट मिला।  कस्टम एयर इंटेलिजेंस यूनिट (एआईयू) को मिली विशिष्ट सूचना और एपीआईएस प्रोफाइलिंग के आधार पर फ्लाइट नंबर AK-91 से कुआलालंपुर से अहमदाबाद पहुंची तब महिला पर नजर रखी गई. टर्मिनल-2 पर उतरने के बाद जब महिला ग्रीन चैनल से बाहर निकलने वाली थी, तभी अधिकारियों ने उसे रोककर पूछताछ शुरू की. शुरुआती पूछताछ में महिला ने संतोषजनक जवाब नहीं दिए और उससे गहन पूछताछ की गई।  काले टेप में लिपटी दो अंडाकार कैप्सूल बरामद हुई जिसमें जांच के दौरान महिला के गुप्तांग से काले टेप में लिपटी दो अंडाकार कैप्सूल बरामद हुई. इन कैप्सूलों में तरल रसायनों के साथ मिश्रित सोने का पेस्ट भरा हुआ था, जिसका कुल वजन 643.28 ग्राम था. इसके बाद विशेषज्ञों की उपस्थिति में शुद्धिकरण प्रक्रिया की गई और इनसे 999.0 शुद्धता का 553.07 ग्राम (24 कैरेट) सोना प्राप्त किया गया. जब्त किए गए सोने का बाजार मूल्य 83,29,234 रुपये और कर मूल्य 75,58,393 रुपये आंका गया है।  यात्री ने सीमा शुल्क विभाग को सूचित किए बिना और शुल्क से बचने के इरादे से अपने शरीर में सोना छिपाकर तस्करी करने का प्रयास किया था, इसलिए सोना जब्त कर लिया गया है और महिला को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है. वर्तमान में यह पता लगाने के लिए आगे की जांच तेज कर दी गई है, कि क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तस्करी के पीछे कोई अन्य गिरोह भी काम कर रहा है। 

बॉम्बे IIT की खोज ने एलपीजी संकट में दी राहत, जानिए कैसे है ये तकनीकी खोज खास

मुंबई  इन दिनों एलपीजी सिलिंडर क्राइसिस की परेशानी से सभी जूझ रहे हैं। लेकिन आईआईटी बॉम्बे, इस मुश्किल हालात में एलपीजी की कमी को बिल्कुल भी महसूस नहीं कर रहा है। इस खोज की बदौलत बॉम्बे आईआईटी के कैंपस में किचन के चूल्हे लगातार जल रहे हैं। यह खोज, बायोमास गैसिफिकेशन टेक्नोलॉजी, जिसमें गिरी हुई पत्तियों का इस्तेमाल करके कुकिंग गैस बनाई जाती है। बता दें आईआईटी बॉम्बे ने इस तकनीक को पेंटेंट भी करा रखा है। 2014 से चल रहा शोध संस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस बारे में पोस्ट भी किया गया है। इसके मुताबिक यह इनोवेशन दशकों के रिसर्च का परिणाम है। यह रिसर्च साल 2014 में, केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के नेतृत्व में शुरू हुई थी। महाजनी ने  बताया कि तब आईआईटी बॉम्बे के हरे-भरे मैदान में काफी ज्यादा सूखी पत्तियां गिरी रहती थीं। इन पत्तियों को डिस्पोज करना एक बड़ा टास्क हुआ करता था। इन सूखी पत्तियों को ठिकाने लगाने का रास्ता ढूंढते-ढूंढते हम गैसिफायर तक पहुंच गए। आसान नहीं था सफर इस पोस्ट में आगे बताया गया है कि यह यात्रा इतनी आसान नहीं है। शुरुआती ट्रायल्स में काफी ज्यादा धुआं हो रहा था। इसके चलते किचन स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसके मुताबिक एक बड़ी बाधा, क्लिंकर बनाने की थी। ठोस अवशेष के चलते ट्रैडिशन सिस्टम जाम हो जाते थे। इन असंतुलनों के बावजूद, टीम ने टेक्नोलॉजी पर काम करना जारी रखा। 2016 तक, उन्होंने एक पेटेंट प्राप्त गैसीफायर विकसित कर लिया। इसके बाद चीजें काफी आसान हो गईं। अब सफलतापूर्वक लागू साल 2017 में, ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संदीप कुमार इस प्रोजेक्ट में शामिल हुए और एक बेहतर बर्नर डिजाइन पर काम किया। संस्थान की लिविंग लैब पहल ने कैंपस में टेस्टिंग की अनुमति दी। इससे टीम को सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सही करने और यूजर्स के बीच भरोसे को फिर से स्थापित करने में मदद मिली। निरंतर परीक्षण और सुधार के एक साल के बाद और आगे कुछ काम के बाद, 2024 तक यह सिस्टम स्टाफ कैंटीन में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया। अब मेस में भी लगाने का प्लान आज आलम यह है कि कैंटीन में एलपीजी का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी तक कम हो चुका है। इसकी थर्मल एफिशिएंसी 60 फीसदी तक है और उत्सर्जन बहुत कम होता है। इस तकनीक ने न केवल ईंधन की लागत घटाई है बल्कि यह सुनिश्चित भी किया है कि अगर एलपीजी की आपूर्ति बाधित हो जाए, तो खाना पकाने का काम सहज रूप से जारी रह सके। इस सिस्टम से सालाना करीब आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है। पोस्ट में कहा गया है कि हॉस्टल की मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे एलपीजी की खपत में काफी कमी आ सकती है। इससे सालाना 50 लाख तक की बचत हो सकती है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी: 8वें वेतन आयोग से भत्तों और पेंशन में भारी बढ़ोतरी

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की मंजूरी मिलने के बाद सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद अहम अपडेट सामने आया है. वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इसकी समय-सीमा और प्रक्रिया को लेकर जानकारी साझा की है. संसद में बोलते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. जब तक रिपोर्ट नहीं आती है तब तक इसकी संभावना लगाना कि इसे कब से लागू किया जाएगा, सही नहीं है. 8वें वेतन आयोग को लेकर कई लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी हैं जैसे इसके लागू होने से किन लोगों को फायदा मिलेगा, बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी या भत्तों और पेंशन किस तरह से बांटे गए हैं. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए जानते हैं इसका जवाब. कितनी बढ़ सकती है सैलरी? सैलरी में बढ़त की बात करें, तो इसे लेकर अभी तक कोई ऑफिशियल नोटिस नहीं आई है. लेकिन शुरुआती अनुमानों से बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के मैनेजिंग डायरेक्‍टर और मुख्य विजन अधिकारी प्रतीक वैद्य ने कहा कि 6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी. वहीं, 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आसपास बढ़ोतरी हुई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्टर है. भत्तों में भी होगा इजाफा सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में भी संशोधन किया जा सकता है. इससे कर्मचारियों की लाइफस्टाइल और सेविंग्स दोनों में सुधार होगा. नए उम्मीदवारों को क्या फायदा मिलेगा? जो युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए 8वां वेतन आयोग एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है.  नई हायरिंग में बढ़ी हुई सैलरी और बेहतर सुविधाएं मिलने से सरकारी नौकरी पहले से ज्यादा आकर्षक बन जाएगी. बेसिक सैलरी में होगी बढ़ोतरी बेसिक सैलरी (Basic Pay) में, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने से न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है (मान लेते है कि ₹18,000 से बढ़कर ₹41,000 तक) हो सकती है. पेंशनर्स को भी मिलेगा लाभ सिर्फ वर्तमान कर्मचारी ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

जनगणना 2026: 1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी, जानें कौन-से 33 सवाल होंगे आपसे पूछे

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। 2027 जनगणना का पहला चरण क्या होगा केंद्र सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी कर पहले फेज का फ्रेमवर्क बना दिया है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेज हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर बेस्ड होगा. जनगणना अधिकारी घरों की गिनती करेंगे और उनकी रहन-सहन से जुड़ी जानकारियां दर्ज करेंगे. भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक इसका मकसद यह है कि देश की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक डेटा तैयार हो. इससे सरकार को विकास योजनाएं ज्यादा टारगेटेड तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।  33 सवालों में क्या क्या शामिल रहेगा? इस बार पूछे जाने वाले सवाल घर की संरचना और परिवार की स्थिति को लेकर होंगे. मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस चीज की है, घर में कितने सदस्य रहते हैं और कितने विवाहित जोड़े हैं, यह दर्ज किया जाएगा. घर का मुखिया पुरुष है या महिला और वह किस सामाजिक वर्ग से है. यह भी पूछा जाएगा।  सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा. पीने का पानी, शौचालय, बिजली, रसोई गैस, इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की उपलब्धता दर्ज होगी. परिवार के पास साइकिल, बाइक, कार जैसे साधन हैं या नहीं, यह भी जानकारी ली जाएगी. यहां तक कि रोजमर्रा में किस तरह का अनाज ज्यादा खाया जाता है. यह भी नोट किया जाएगा।  जवाब न देने पर क्या होगा? जनगणना एक लीगल प्रोसेस है और जानकारी देना नागरिक कर्तव्य माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से इनकार करता है या गलत सूचना देता है. तो जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ता. नागरिकता तय करने के लिए अलग कानून और प्रोसेस लागू होती है।  जनगणना का मकसद किसी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं है. असल मकसद यह समझना है कि देश के किस हिस्से में किन सुविधाओं की जरूरत है. सही जानकारी मिलने पर ही स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य योजनाओं का बजट सही ढंग से तय किया जा सकता है. इसलिए सहयोग देना आपके इलाके के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है।  जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी– शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।

पश्चिमी विक्षोभ का डबल अटैक, दिल्ली से लेकर राजस्थान और यूपी तक बदलेगा मौसम, ओलावृष्टि की चेतावनी

 दिल्ली देश के 15 से अधिक राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है. अप्रैल महीने की शुरुआत होने जा रही है और आमतौर पर इस समय कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ने लगती है. लेकिन इस बार झुलसाने वाली गर्मी की बजाय आसमान से झमाझम बारिश हो रही है. करीब पूरे मार्च महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश और बादलों का असर देखने को मिला. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों तक मौसम का यही बदला हुआ रुख बना रह सकता है. उत्तर, पूर्वोत्तर, पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदल रहा मौसम भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दो दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने और कई चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के कारण देश भर में मौसम का मिजाज बदल गया है. इसके कारण कई इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जारी है. आईएमडी के मुताबिक उत्तर भारत के मौसम पर इस समय कई सिस्टम एक साथ असर डाल रहे हैं. उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी है और इसका असर उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंच रहा है. इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ बने हुए हैं, जिनसे मौसम में अस्थिरता बढ़ गई है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक भी निचले स्तरों पर ट्रफ सक्रिय हैं. पूर्वोत्तर भारत में बिहार से मणिपुर तक, मेघालय और असम के रास्ते पूर्व-पश्चिम गर्त (ट्रफ) बना हुआ है. जम्मू कश्मीर में बारिश और 50 किमी की रफ्तार से तेज हवा मौसम विभाग के अनुसार 3 और 4 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख समेत कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इस दौरान गरज-चमक, बिजली और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 3 से 5 अप्रैल के बीच हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हिमाचल प्रदेश में 5 अप्रैल तक बारिश का अनुमान शिमला मौसम कार्यालय ने अनुमान जाहिर किया है कि राज्य में पांच अप्रैल तक बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने बताया कि दो अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है. इसके कारण हिमाचल प्रदेश में भी मौसम बदलेगा. मौसम विभाग ने इस दौरान बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, बिजली कड़कने और गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी दी है. आईएमडी ने येलो अलर्ट जारी किया है. दिल्ली समेत पंजाब हरियाणा में बारिश मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 3 से 5 अप्रैल के दौरान बारिश और तेज हवा का नया दौर दिख सकता है. 31 मार्च को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हल्की से लेकर मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इस दौरान कही-कही गरज-चमक के साथ छीटें भी पड़ने की संभावना है. कुछ इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. उत्तर प्रदेश में बारिश के आसार उत्तर प्रदेश के आगरा और अलीगढ़ जिलों में सोमवार को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग का अनुमान है कि आज (31 मार्च) को भी कई इलाकों में बारिश हो सकती है. विभाग ने बारिश को लेकर 24 घंटे का अलर्ट भी जारी किया था. हालांकि यूपी में कई जगहों पर मौसम शुष्क बना रहा. बीते 24 घंटों के दौरान बांदा प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं प्रयागराज में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस रहा. राजस्थान के कई इलाकों में आंधी-बारिश की चेतावनी नये पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजस्थान के कई इलाकों में मौसम का मूड बिगड़ा हुआ है. सोमवार को राजधानी जयपुर सहित कई इलाकों में सोमवार दोपहर बाद तेज हवाएं चलीं और कई स्थानों पर बूंदाबांदी हुई. मौसम विज्ञान केंद्र-जयपुर के अनुसार राज्य में फिलहाल हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. आईएमडी ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक परिसंचरण तंत्र सक्रिय है, जिसके असर से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. एक और दो अप्रैल को कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी के आसार हैं जबकि अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. इसके अलावा तीन से पांच अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में आंधी और बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है. झारखंड के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तूफानी हवा का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक आज (31 मार्च) को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. राज्य के पांच जिले बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, दुमका और पाकुड़ में ओलावृष्टि के लिए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. जबकि बाकी के 19 जिलों में गरज के साथ बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. आईएमडी के अनुसार 2 और 3 अप्रैल को झारखंड के दक्षिणी और मध्य जिलों में हल्की बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और बिजली कड़कने का अनुमान है. रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया- आसमान में तीन अप्रैल तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे. बिहार में गरज चमक के साथ बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है. कुछ इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पूर्व बिहार के सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा, दक्षिण-पूर्व बिहार के भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया और जमुई, दक्षिण-पश्चिम बिहार के बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ (कैमूर), औरंगाबाद और अरवल जिलों में मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता … Read more

टेनिस स्टार लिएंडर पेस अब बीजेपी के साथ, किरेन रिजिजू और सुकांत मजूमदार ने दिलाई सदस्यता

 दिल्ली खेल की दुनिया में तिरंगे का मान बढ़ाने वाले महान टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने सोमवार को राजनीति के ‘कोर्ट’ पर अपनी नयी पारी की शुरुआत की. नयी दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष डॉ सुकांत मजूमदार की मौजूदगी में पेस ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ली. बंगाल चुनाव 2026 से ठीक पहले इस ‘बंगाली आइकॉन’ की बीजेपी में एंट्री ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. माइकल मधुसूदन दत्त के वंशज अब ‘कमल’ के साथ लिएंडर पेस का भाजपा में शामिल होना केवल एक खिलाड़ी का दल बदलना नहीं है. इसके गहरे सांस्कृतिक मायने हैं. पेस बंगाल के महान कवि माइकल मधुसूदन दत्त के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. बीजेपी में शामिल होने के बाद पेस भावुक हो गये. उन्होंने कहा- मैं एक गौरवशाली बंगाली विरासत में जन्मा हूं. मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल में अपार क्षमताएं हैं और हम मिलकर राज्य को नयी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं. सुकांत मजूमदार ने पेस को बताया बंगाल का सपूत केंद्रीय मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार ने पेस को ‘बंगाल का सपूत’ बताया. कहा कि उनका भाजपा में आना बंगाल के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा पेस के जरिये बंगाल के शहरी और शिक्षित मतदाताओं में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है. सुकांत मजूमदार ने कहा- पेस का साथ आना बंगाल में भाजपा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा. मिशन ओलिंपिक और युवाओं पर फोकस लिएंडर पेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने भविष्य के लक्ष्यों का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य देश के कोने-कोने में खेल सुविधाओं को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि जब भारत ओलिंपिक की मेजबानी करेगा, तब हमें दुनिया के सामने अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्ति दिखानी होगी. लिएंडर पेस ने ‘खेलो इंडिया’ योजना की तारीफ करते हुए कहा कि वे युवाओं को सशक्त बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करेंगे. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने लिएंडर पेस को दिलायी भाजपा की सदस्यता. किरेन रिजिजू ने याद किये पुराने दिन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पार्टी में लिएंडर पेस का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के दिनों से ही लिएंडर युवाओं के लिए प्रेरणा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह पेस ने टेनिस कोर्ट पर भारत को जीत दिलायी, वैसी ही एक ‘बड़ी पारी’ वे अब सार्वजनिक जीवन और राजनीति में खेलेंगे.