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8वें वेतन आयोग में ₹69,000 न्यूनतम वेतन की चर्चा, 4.4 फैमिली यूनिट और HRA बढ़ाने की मांग क्यों?

नई दिल्ली 8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है? क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands) इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर 36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA) पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा। 25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA) AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है। मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count) 7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है। फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी। कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी? मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है। डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है। एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है। टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है। AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है। इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।

राजनाथ सिंह के इस्तीफे की अटकलों के बीच सियासी हलचल, क्या अमित शाह को मिलेगी नई जिम्मेदारी?

नई दिल्ली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है। आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें? 2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है। लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन? कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

RBI ने Crypto को लेकर जताई चिंता, संसदीय समिति से कानूनी मान्यता नहीं देने की सिफारिश

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है।  देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा समिति की बैठक में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह' विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है।  विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है।  आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, 'इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं।  पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा।  संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। 

क्या पनामा नहर बनेगी दूसरा होर्मुज? चीन की बढ़ती गतिविधियों पर ट्रंप का बड़ा अलर्ट

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाते हुए कहा है कि चीन पनामा नहर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वे अमेरिका को सर्वोपरि रखते हैं और वो इसके लिए कोई भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. इस बार उन्होंने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन को वॉर्निंग दी है, वो भी दुनिया के कुछ अहम जलमार्गों में से एक पनामा नहर को लेकर।  ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बताते हुए चेतावनी दी कि यह अमेरिका-चीन के बीच नया तनाव का केंद्र बन सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नॉर्थ डकोटा में एक कार्यक्रम में चीन पर निशाना साधते हुए कहा – ‘चीन पनामा नहर पर कब्जा करने की फिराक में है।. हम इसे कभी नहीं होने देंगे. यह हमारा बनाया हुआ है और हम इसे वापस लेंगे अगर जरूरी हुआ.’ डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर को दुनिया की सबसे महंगी और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली संपत्तियों में से एक बताया।  पनामा नहर क्यों इतनी महत्वपूर्ण?     पनामा नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला 82 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है. हर साल हजारों जहाज इसके रास्ते गुजरते हैं, जिसमें वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा शामिल है. यह मार्ग जहाजों को हजारों मील की दूरी बचाता है. अमेरिका इसका सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जबकि चीन दूसरा सबसे बड़ा।      अगर चीन इसका नियंत्रण हासिल कर लेता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसका दबदबा बढ़ जाएगा. ट्रंप का कहना है कि चीनी कंपनियां नहर के दोनों छोर पर बंदरगाहों का संचालन कर रही हैं, जो रणनीतिक खतरा है. अमेरिका इसे अपने पश्चिमी गोलार्द्ध में चीनी घुसपैठ मानता है।  ट्रंप वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को परफेक्ट मानते हैं, जहां उन्होंने निकोलस मादुरो की सरकार को उखाड़ फेंकने में सफलता पाई. अब वे ईरान पर भी इसी तरह दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं. ट्रंप ने इसी वजह से चीन पर निशाना साधा है. उन्होंने ईरान पर भी तंज कसा और कहा-     ‘ईरान कुछ-कुछ वेनेजुएला जैसा हो रहा है, जो पहले मुनाफे वाली थी. हमने वेनेजुएला को काबू में कर लिया और ईरान के साथ भी वैसा ही कर रहे हैं।  क्या पनामा नहर बन रहा नया होर्मुज? अगर ये मामला गर्माया तो पनामा नहर होर्मुज की खाड़ी की तरह नया संघर्ष का केंद्र बन सकता है. होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, जहां ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव हमेशा रहता है. पनामा नहर भी वैश्विक व्यापार का चोकप्वाइंट है. अगर यहां अमेरिका-चीन की टक्कर बढ़ी तो व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है।  ट्रंप का आक्रामक रुख दिखाता है कि अमेरिका अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में किसी भी विदेशी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा. हालांकि चीन के खिलाफ सीधे लड़ना या उसे उकसाना अमेरिका के लिए इतना आसान नहीं होगा लेकिन ट्रंप के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए कुछ कहा नहीं जा सकता है।  इस नहर का सीधा समंदर से कनेक्‍शन नहीं है, बल्कि गाटुन लॉक में जहाजों को पानी भरकर 26 मीटर तक ऊंचा उठाया जाता है और फिर उसे दूसरी तरफ समंदर में उतारा जाता है. इस नहर से जहाजों को तीन चरण में रास्‍ता पार कराया जाता है. अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली इस नहर को इंजीनियरिंग का कमाल कहा जाता है. इसमें 3 लॉक बनाए गए हैं, जिससे जहाज को गुजारा जाता है और प्रशांत महासागर से निकालकर अटलांटिक महासागर में भेजा जाता है।  पनामा नहर पर अमेरिका ने कैसे किया कब्जा?     पनामा नहर की कहानी 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ी है. 1901 से 1909 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति रहे थियोडोर रूजवेल्ट ने इसे अमेरिका की बड़ी महत्वाकांक्षा बनाया. फ्रांस पहले इसकी असफल कोशिश कर चुका था।      1903 में रूजवेल्ट ने कोलंबिया (जिसका हिस्सा पनामा था) से समझौता करने की कोशिश की, लेकिन कोलंबिया ने मना कर दिया. तब रूजवेल्ट ने पनामा के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया. अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी में पनामा अलग हो गया।      नई पनामा सरकार से हाए बुनाउ वरीला संधि (Hay-Bunau-Varilla Treaty) के तहत अमेरिका को 10 मील चौड़ी पट्टी मिल गई. अमेरिका ने 10 मिलियन डॉलर एकमुश्त और सालाना किराया दिया. 1904 से 1914 तक निर्माण चला. रूजवेल्ट खुद 1906 में साइट पर गए और खुदाई मशीन पर खड़े होकर तस्वीर खिंचवाई।      1914 में पनामा नहर खुली और रूजवेल्ट ने गर्व से कहा था कि मैंने नहर बनवाई. अमेरिका ने साल 1999 तक नहर पर पूर्ण नियंत्रण रखा. जिम्मी कार्टर के समय टॉरिजोस कार्टर ट्रीटी के तहत पनामा को सौंप दिया गया, लेकिन न्यूट्रैलिटी की गारंटी ली गई।  ट्रंप का दावा ऐतिहासिक अमेरिकी गौरव और वर्तमान परिस्थितियों पर टिका है. वे कहते हैं कि अमेरिका ने नहर बनाई, उसमें खून-पसीना बहाया, इसलिए उसका हक भी अमेरिका का है. चीन की बढ़ती मौजूदगी को वे आर्थिक और रणनीतिक खतरा मानते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पनामा नहर पर अमेरिका-चीन टकराव बढ़ सकता है, हालांकि इसे कूटनीति से ठीक किया जा सकता है. अगर तनाव बढ़ा तो वैश्विक व्यापार, तेल और सामान की कीमतों पर असर पड़ेगा. ट्रंप का यह बयान न सिर्फ पनामा बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव बहाल करने की उनकी बड़ी रणनीति का हिस्सा लगता है। 

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम रघुवंशी को SC से राहत, बहस में केतन और सिया पर क्या कहा गया?

इंदौर  इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है। मेघालय सरकार का तर्क- सोनम के फरार होने का खतरा, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। पहले भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और यह मामला केवल गिरफ्तारी के दौरान हुई एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है। मेघालय सरकार का तर्क है कि यदि सोनम बाहर रही तो उसके फरार होने का खतरा बना रहेगा। सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए। उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है? मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है। हाईकोर्ट से भी राज्य सरकार की अपील खारिज वहीं, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक) शिलांग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शिलांग कोर्ट ने सोनम को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा। सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा? सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है? सोनम अगली सुनवाई तक जमानत पर रहेंगी सोनम के वकील ने यह भी दलील दी कि मामले में अब कोई बरामदगी बाकी नहीं है. उन पर पहले से ही सख्त शर्तें लागू हैं और वह शिलॉन्ग में रह रही हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. अदालत ने यह भी माना कि सोनम लंबे समय से जेल में थीं और कानून का सिद्धांत है कि "जमानत नियम है और जेल अपवाद." हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल सोनम की जमानत बरकरार रहेगी। 

बच्चों की सेहत को लेकर सख्ती, स्कूलों के पास Sting की बिक्री पर महाराष्ट्र सरकार ने लगाई रोक

 मुंबई  महाराष्ट्र में स्कूल परिसर के अंदर स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में भी इन ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। मॉनसून सत्र के दौरान, श्रीगोंडा-नगर निर्वाचन क्षेत्र के बीजेपी विधायक विक्रम पचपुते ने यह सवाल उठाया था। इसके बाद, मंत्री नरहरि झिरवल ने पूरे राज्य में स्कूल क्षेत्रों में स्टिंग ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए। स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, भले ही वे नियमों का पालन करते हों, लेकिन बच्चे इनकी लत का शिकार हो सकते हैं। बोतल पर ही लिखा होता है कि यह ड्रिंक छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं है। इसे छोटे बच्चों को नहीं बेचा जाना चाहिए। विक्रम पचपुते ने विधानसभा में कहा कि स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स शराब से भी ज़्यादा हानिकारक हैं। यह मानते हुए कि स्कूल परिसर में स्टिंग बेची जा रही है, मंत्री नरहरि झिरवल ने सदन को आश्वासन दिया कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों के साथ-साथ स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।. एफएसएसएआई ने गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावों के लिए छह एनर्जी ड्रिंक ब्रांडों- रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, पेप्सिको की एड्रेनालाईन रश एनर्जी ड्रिंक, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कैम्पा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी और कोका-कोला समर्थित मॉन्स्टर एनर्जी- को नोटिस जारी किया था। 'एनर्जी ड्रिंक' की कोई खाद्य श्रेणी FSSAI का कहना है कि भारत में फिलहाल "एनर्जी ड्रिंक" की कोई आधिकारिक खाद्य श्रेणी तय नहीं है, फिर भी कंपनियां अपने उत्पादों को इसी नाम से बेच रही हैं. इसके अलावा "शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है", "फोकस बढ़ाता है", "कमजोरी दूर करता है" और "एनर्जी लेवल बढ़ाता है" जैसे दावों पर भी नियामक ने आपत्ति जताई है. उसके मुताबिक, खाद्य उत्पादों के लिए इस तरह के साइंटिफिक दावे कानून के अनुरूप नहीं हैं।  एनर्जी ड्रिंक थकान दूर नहीं थोड़ी देर के लिए दबा देती है! स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से एनर्जी ड्रिंक को लेकर चिंता जताते रहे हैं. उनका कहना है कि इनमें मौजूद कैफीन और चीनी की अधिक मात्रा शरीर को वास्तविक ऊर्जा नहीं देती, बल्कि कुछ समय के लिए थकान को दबा देती है. अधिक मात्रा में या लगातार इनका सेवन करने से बच्चों और युवाओं में दिल की समस्या, नींद की समस्या, बेचैनी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। 

Ketan Murder Case: जांच में नया मोड़, सिया-चेतन के कथित कोड वर्ड चैट की पड़ताल; पुलिस ने बरामद किया दूसरा फोन

 पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब पुलिस ने अदालत से मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. हालांकि कोर्ट ने इसे नामंजूर करते हुए दोनों आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि दोनों आपस में बातचीत के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, जिनका मतलब और उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।  मामले की जानकारी देते हुए जांच अधिकारी मनोज पवार ने बताया कि जांच के दौरान चेतन से घटनाक्रम की आमने-सामने पड़ताल की गई, जबकि सिया से उसके पासपोर्ट और अन्य पहलुओं पर पूछताछ की गई. इसी बीच गुरुवार सुबह सिया का दूसरा मोबाइल फोन भी जब्त किया गया. इससे पहले दोनों आरोपियों के एक-एक मोबाइल फोन पहले ही पुलिस अपने कब्जे में ले चुकी थी।  पुलिस के अनुसार, डिजिटल जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन बातचीत के दौरान कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते थे. अब दूसरे मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के जरिए इन कोड वर्ड्स का मतलब, उनके इस्तेमाल का उद्देश्य और हत्या की साजिश से उनका संबंध पता लगाया जाएगा. इसी वजह से दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई है।  सरकारी पक्ष की ओर से पेश वकील ने बताया कि नया मोबाइल मिलने के बाद दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया, उनका सही अर्थ केवल सिया और चेतन ही बता सकते हैं. इसलिए जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोनों का आमना-सामना कराना आवश्यक है।  पुलिस ने सीन किया था री-क्रिएट इससे पहले गुरुवार सुबह पुलिस सिया गोयल को पुणे के लुल्लानगर स्थित उस स्थान पर भी लेकर गई, जहां उसने और चेतन ने कथित तौर पर लोहागढ़ किले से केतन अग्रवाल को धक्का देने की रिहर्सल की थी. पुलिस का दावा है कि मई महीने में दोनों ने हत्या की योजना को अंजाम देने से पहले वहां अभ्यास किया था. सिया ने मौके पर उस स्थान की पहचान भी की।  जांच के दौरान पुलिस ने सिया के घर से घटना वाले दिन पहने गए कथित कपड़े भी बरामद किए हैं. इसके अलावा दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए भी अदालत से अनुमति मांगी गई है. पुलिस का कहना है कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध में बाधा बनने के कारण केतन अग्रवाल की कथित तौर पर हत्या की गई थी। 

भीषण बस हादसे से दहला पाकिस्तान, ओवरलोडेड बस खाई में गिरी; 40 यात्रियों की जान गई

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया है. यहां यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में गिर गई. अधिकारियों के मुताबिक हादसा उस समय हुआ जब बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले के दाना सर इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा में प्रवेश कर रही थी. मिल रही जानकारी के मुताबिक घटना में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि अब तक 8 लोगों के जख्मी होने की खबर है।  बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने घटना के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि हादसे में जख्मी हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. दुर्घटना के तुरंत बाद इलाके में बचाव अभियान शुरू कर दिया गया. बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने भी राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सके. ट्रिब्यून एक्सप्रेस के मुताबिक बस क्वेटा से रवाना हुई थी, जिसके खराब होने के बाद यात्रियों को दूसरी बस में बिठाया गया, जिससे वो ओवरलोड हुई और हादसा हुआ।  घटना की जांच जारी शेरानी के डिप्टी कमिश्नर हजरत वाली काकर ने बताया- ‘घायलों को निकालकर नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. मरने वालों की लाशों को निकालने और शिफ्ट करने का काम जारी है.’ डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि बस क्वेटा से 36 यात्रियों के साथ रवाना हुई थी, लेकिन रास्ते में एक दूसरी बस खराब हो जाने के कारण कुछ और यात्री इस बस में सवार हो गए थे. इससे बस पर सवारियों की संख्या बढ़ गई थी. प्रशासन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस की तेज रफ्तार या सड़क की खराब स्थिति हादसे की वजह हो सकती है. बलूचिस्तान की पहाड़ी सड़कें अक्सर खतरनाक होती हैं और यहां बस व ट्रक दुर्घटनाएं आम हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आई।  घायलों को इलाज के लिए क्वेटा और अन्य नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है. पाकिस्तान में सड़क सुरक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है. हर साल सैकड़ों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। खराब सड़कें, ओवरलोडेड वाहन, ड्राइवरों की लापरवाही और खराब मौसम अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनते हैं. अभी गुरुवार इसी इलाके में मौजूद एक पर्यटन स्थल पर नाव पलट जाने की वजह से एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। 

BAT-BMS App पर गिरी गाज, ई-रिक्शा बंद करने वाला ऐप Play Store से हटाया गया

नई दिल्ली सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को बंद करने वाले ऐप BAT BMS App को Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. इस कार्रवाई के तहत दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं. आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से (रिमोट के जरिए) बंद करने के लिए किया जा रहा था.  सुरक्षा और संभावित गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी।  हाल ही में सोशल मीडिया पर BAT BMS App से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए हैं. इनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे थे, जिससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाओं और चालकों की बढ़ती शिकायतों के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।  क्या है BAT BMS App? कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगी होती है. इन बैटरियों के अंदर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है. यह बताता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं है.  कुछ सस्ती, खासकर चीन में बनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है।  अगर इस ब्लूटूथ पर पासवर्ड या सुरक्षा लॉक नहीं लगाया गया हो, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ सकता है. BAT-BMS ऐप इसी ब्लूटूथ कनेक्शन का इस्तेमाल करके बैटरी के सिस्टम तक पहुंच सकता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा रिस्क माना जा रहा है।  क्या है ब्लूटूथ कनेक्शन की रेंज? इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति सड़क किनारे, पास खड़े वाहन या बाइक से भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जोड़ने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में ई-रिक्शा अचानक बंद हो सकता है और चालक को ये भी समझ ही नहीं आता कि रिक्शा में क्या दिक्कत आई है।  हालांकि, अच्छी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, इसलिए उन पर इस तरह का रिस्क नहीं माना जाता है. यह रिस्क ज्यादातर से कम कीमत वाली और बाद में लगाई गई (आफ्टरमार्केट) बैटरियों में देखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में किया जाता है। 

Ketan Agrawal Murder Case: सिया गोयल के कथित इशारे का VIDEO वायरल, पुलिस सुरक्षा के बीच बढ़ी चर्चा

पुणे  पुणे में अपने ही मंगेतर की बेरहमी से हत्या की साजिश रचने वाली सिया गोयल को अपने किए का जरा भी अफसोस नहीं है। यह बातें लोग सिया गोयल के हाल ही में सामने आए वीडियो को देख कर कह रहे हैं। सिया गोयल ने पुलिस की कस्टडी में ही कैमरे की तरफ एक भद्दा और अश्लील इशारा किया है। वीडियो में सिया गोयल पुलिस घेरे के बीच ही ‘मिडिल फिंगर’ दिखाती नजर आ रही है। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग उसकी इस हरकत को देख दंग रह गए हैं। गौरतलब है कि बीते 18 जून को सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी संग मिलकर पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। सिया और केतन की इसी साल फरवरी में सगाई हुई थी और दोनों की शादी नवंबर में तय हुई थी। लेकिन इससे पहले ही सिया गोयल ने साजिश रची। सिया ने जांच के दौरान अपना जुर्म कबूल लिया है और कहा है कि वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी और इसीलिए उसे रास्ते से हटाने के लिए चेतन संग मिलकर मार डाला। फिलहाल दोनों पुलिस कस्टडी में हैं। इस दौरान ही सिया ने कैमरे की तरफ यह अश्लील इशारा किया। वीडियो में क्या? जानकारी के मुताबिक जब पुणे पुलिस सिया को उसके मार्केट यार्ड स्थित घर से जांच के बाद बाहर ला रही थी, तब उसने वहां तैनात कैमरों को देखकर मिडिल फिंगर दिखाई। 12 सेकेंड की इस वीडियो में सिया काले रंग की टी-शर्ट में दिखाई देती है। वहीं उसका चेहरा स्कार्फ से ढका हुआ था। पुलिस उसे घर की सीढ़ियों से नीचे लेकर आ रही होती है। जैसे ही सिया घर से बाहर निकलती है और कैमरों को देखती है, वह अश्लील इशारा करती है। वीडियो को देख लोग हैरान रह गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सिया गोयल की उम्र के साथ साथ हरकतें भी बच्चों वाली है। वहीं कुछ लोग उसकी हिम्मत को देखकर दंग रह गए हैं। एक यूजर ने लिखा, “इसकी हिम्मत को देखो। बिल्कुल पछतावा नहीं है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “सिया को सच में कुछ मानसिक परेशानी है। चाहे वो चेतन हो या केतन, उन्हें एक दिन मुसीबत में पड़ना ही था। हैरानी इस बात की है कि केतन के परिवार को ये पहले क्यों नहीं दिखा।” जांच जारी इस बीच पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ने गुरुवार को लोहगढ़ किले के पहाड़ी इलाके के आसपास की जांच की है और सभी जगहों को मार्क भी किया है। जांच के तहत सिया गोयल को भी दोबारा किले पर ले जाया गया। सबूत के तौर पर पुलिस ने सिया के उन कपड़ों को भी जब्त कर लिया है जो उसने घटना के दिन पहने थे। इस बीच आगे की जांच के लिए पुलिस ने लोनावला में सिया गोयल के घर भी गई। जानकारी के मुताबिक हत्या की कड़ियों को जोड़ने वाले सबूत तलाशने के लिए उसके कमरे की तलाशी ली गई। सिया गोयल का होगा लाई डिटेक्टर टेस्ट इस बीच इस बात का खुलासा अब तक नहीं हो पाया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी में से केतन को धक्का किसने दिया। खबर है कि इसका पता लगाने के लिए अब पुलिस दोनों का झूठ पकड़ने वाला परीक्षण यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की भी तैयारी कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस को उनके बयानों में गड़बड़ी का आभास हुआ है और इस कारण ही दोनों की साइंटिफिक टेस्टिंग कराने का फैसला लिया गया है। 'ऐसा मत करो' की सलाह देने का दावा सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया है कि युवक ने दोनों को  योजना पर आगे नहीं बढ़ने की सलाह दी थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसे योजना की कितनी जानकारी थी और घटना के बाद उसकी आरोपियों से क्या बातचीत हुई. सूत्रों का यह भी कहना है कि केतन की मौत के बाद चेतन सबसे पहले इसी युवक से मिला था. वहीं सिया ने भी उससे संपर्क किया था. पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है।  रिहर्सल वाले स्थान पर पहुंची पुलिस पुणे ग्रामीण पुलिस गुरुवार सुबह सिया गोयल को उस स्थान पर लेकर गई, जहां पुलिस के अनुसार उसने और चेतन ने कथित तौर पर पहले से अभ्यास किया था कि लोहागढ़ किले पर किसी व्यक्ति को चट्टान से कैसे धक्का दिया जा सकता है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह स्थान पुणे के लुल्लानगर इलाके में एक क्लब के पास स्थित है. जांच के दौरान सिया ने उस जगह की पहचान की, जहां कथित तौर पर यह रिहर्सल हुई थी. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह कथित रिहर्सल मई महीने में किस तारीख को हुई थी और उस समय वहां कौन-कौन मौजूद था।  पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया  जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस ने वडगांव मावल अदालत में सिया गोयल और चेतन चौधरी का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी है. पुलिस का कहना है कि अदालत की प्रक्रिया पूरी होने और आरोपियों की सहमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी. पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए जांच एजेंसियां पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच सामंजस्य की जांच करना चाहती हैं।  पुलिस ने सिया के पुणे स्थित घर की तलाशी के दौरान वे कपड़े भी बरामद किए हैं, जिन्हें पुलिस के अनुसार उसने 18 जून को पहना था. इन कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उपलब्ध अन्य सबूतों से उनका मिलान किया जा सके. जांच अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में बड़ी मात्रा में तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए हैं. इनमें मोबाइल फोन का डेटा, लोकेशन, कॉल डिटेल, चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं. इन सभी की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि घटनाक्रम की सटीक टाइमलाइन तैयार की जा सके।