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मुंबई में मूसलाधार बारिश का कहर, अंधेरी सबवे बंद, ठाणे सहित कई क्षेत्रों में IMD की चेतावनी

मुंबई  मुंबई में मॉनसून पूरी तरह एक्टिव है. पिछले कई दिनों से लगातार मुंबई में दिन की शुरुआत बारिश के साथ हो रही है. बारिश से हुए जलभराव के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ी है. हालांकि, लोकल ट्रेन सामान्य रूप से चल रही हैं. भारत मौसम विभाग (IMD) ने अंधेरी, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और मुंबई के कई हिस्सों में बारिश को लेकर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।  मुंबई में जारी बारिश की वजह से कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है. सड़कें तालाब बन गई हैं और कई इलाकों में जलभराव की वजह से ट्रैफिक ठप है. वहीं, कुछ जगहों पर बारिश की वजह से सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार सुस्त है।  लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे, मालाड, जोगेश्वरी, कुरला, मुलुंड और कांजुरमार्ग जैसे इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने जलभराव वाले इलाकों से बचने की सलाह दी है।  वहीं, अंधेरी सबवे (अंडरपास) में फिर इतना पानी भर गया है कि आज सुबह 8 बजे के करीब उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं लेकिन मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में इतना जलजमाव होता है कि इसे बंद करना पड़ता है।  मौसम विभाग ने बुधवार, 1 जुलाई को भी मुंबई समेत महाराष्ट्र के अधिकतर इलाकों में मध्यम से बारिश की अनुमान जताया है. आसमान में बादल छाए हैं और कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो रही है. IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक मौसम की यही स्थिति बनी रह सकती है।  1 जुलाई के लिए मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।    बता दें कि मुंबई में इस बार मॉनसून सामान्य तारीख से 13 दिन देर से आया, लेकिन अब पूरी तरह एक्टिव है. शहर के जलाशयों में पानी की भरपाई हो रही है, जो अच्छी खबर है लेकिन भारी बारिश से आम जनजीवन प्रभावित है. मौसम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 5 से 6 जुलाई तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। 

जुलाई के पहले दिन खुशखबरी! पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये सस्ता, ग्राहकों को बड़ी राहत

नई दिल्ली प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज तेल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने देश के आम नागरिकों को राहत देते हुए रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है. नई दरें बुधवार, 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं।  अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए पर आ गया है। नायरा के देशभर में 7 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कम की गईं कीमतें पूरे देश में नयारा (Nayara) के 7000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों  पर लागू होगी.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और दूसरे लोकल टैक्स में अंतर के कारण पंप की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर दिख सकता है।  आज प्राइवेट रिटेलर ने भले ही पेट्रोल-डीजल के दाम घटा दिए हैं, लेकिन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) – ने रिटेल फ्यूल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. ये तीनों कंपनियां मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों को संभालती हैं।  प्रमुख शहरों में अनुमानित कीमतें शहर            पेट्रोल की अनुमानित कीमत     डीजल की अनुमानित कीमत     सरकारी तेल कंपनियों के रेट दिल्ली            97.12 रुपये                                          92.20 रुपये            102.12 और 95.20 रुपये नोएडा            96.96 रुपये                                          87.03 रुपये           101.96 और 90.03 रुपये मुंबई              106.21 रुपये                                       91.50 रुपये            111.21 और 94.50 रुपये 7000 पेट्रोल पंपों पर सस्ता पेट्रोल-डीजल Nayara Energy रूस की रोसनेफ्ट समर्थित फ्यूल कंपनी है. इसने हाल ही  भारत में अपने पेट्रोल पंप की संख्या 7,000 के पार पहुंचाई है और इसके साथ ही ये प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी पेट्रोल-डीजल रिटेल सेलर के रूप में उभरी है. तेल की कीमतों पर बीते कुछ समय में महंगाई की मार से इस कंपनी ने अब अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल प्राइस में 5 रुपये और डीजल प्राइस में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती का तोहफा दिया है।  इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि नायरा के 7,000 से ज्यादा फ्यूल स्टेशनों पर नई कीमतें 1 जुलाई 2026 से लागू कर दी गई हैं. यहां ध्यान रहे कि विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर Petrol-Diesel Price अलग-अलग हो सकती हैं, जो लोकल टैक्स जैसे वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) पर निर्भर करती हैं।  सरकारी तेल कंपनियों की कीमतें स्थिर एक ओर जहां प्राइवेट सेक्टर की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करते हुए लोगों को राहत दी है, तो वहीं सरकारी फ्यूल रिटेलर्स ने अपनी कीमतों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL),  जो मिलकर भारत के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल-पंपों में से 90 फीसदी से ज्यादा का संचालन करती हैं, इनपर फ्यूल प्राइस यथावत बने हुए हैं. राजधानी दिल्ली में, IOC आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है।  जितनी बढ़ोतरी, उतनी ही की कटौती गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran War) से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन के बीच इंटरनेशनल ऑयल प्राइस में तेज उछाल देखने को मिला था. इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा करने के मामले में पहली फ्यूल रिटेलर्स में नायरा एनर्जी भी शामिल थी. बीते 26 मार्च को कंपनी ने अपने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब इतनी ही कटौती भी की है।  नायरा के बाद करीब चार साल तक स्थिर रखने के बाद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बम फोड़ते हुए देशवासियों को झटका दिया था. इंडियन ऑयल से बीपी, एचपी तक ने मई महीने में एक के बाद एक कई बार Petrol-Diesel Price में बढ़ोतरी की थी और इनकी कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके पीछे कंपनियों ने मिडिल ईस्ट युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से बढ़ती लागत का हवाला दिया था।  युद्ध थमने, क्रूड सस्ता होने का असर नायारा एनर्जी गुजरात के वाडिनार में हर साल 20 मिलियन टन क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह कटौती वेस्ट एशिया में तनाव कम होने और एक अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के फिर से खुलने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बाद की गई है. समुद्री रास्ते के खुलने से क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और इससे सप्लाई में रुकावट की चिंता कम हो गई है।     

Crypto Regulation: RBI और संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक, क्रिप्टो के भविष्य पर हो सकता है बड़ा निर्णय

नई दिल्ली क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Regulations) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। इस संबंध में संसदीय वित्त समिति, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाली है। दिल्ली में 2 जुलाई को होने वाली इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को रेगुलेट करने के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी। नोटिस के अनुसार, कमेटी "वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर एक अध्ययन और आगे की राह" विषय पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी। RBI का सतर्क रवैया रेगुलेटर्स के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर चल रही बातचीत के लिए यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि RBI का डिजिटल एसेट्स को लेकर हमेशा से ही सतर्क रवैया रहा है। समय-समय पर RBI गवर्नर्स ने VDA इकोसिस्टम की कमियों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी है। नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था, "स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज़्यादा जोखिम है, इसलिए हम इनके मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।" हालांकि, सेंट्रल बैंक UPI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल लेंडिंग का समर्थन करना जारी रखे हुए है। यह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ आठवीं बैठक होगी। पिछली दो बैठकों में, स्टैंडिंग कमेटी ने भारत में काम कर रहे कई घरेलू और ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंजों से मुलाकात की थी ताकि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझा जा सके। 20 मई को, पैनल ने दिल्ली में क्रिप्टो एक्सचेंज Binance, WazirX और Zebpay के साथ रेगुलेशन के दायरे, VDA इंडस्ट्री के लिए आगे की राह और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की।  इससे पहले, दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी। रेगुलेटर्स ने पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी चिंताओं, इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन और रेमिटेंस से जुड़ी समस्याओं, विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को एक ही पॉलिसी और कानूनी ढांचे के तहत लाने, और ग्लोबल एक्सचेंजों के लिए मौजूदा GST सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सवाल पूछे थे।  

भारत ने जून में खरीदा रिकॉर्ड रूसी कच्चा तेल! ‘इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे’

नई दिल्‍ली जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है।  एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे।  अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया।  कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है।  भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा  भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई।  रूसी तेल से मिली मदद  ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

रेलवे का सख्त नियम, महिला कोच में यात्रा करने वाले पुरुषों पर ₹2500 का जुर्माना

नई दिल्ली  ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है।  ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।   जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा। कितना लगेगा जुर्माना?     अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।      साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा।      वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है।      इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।      रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें।  गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा? अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं।  रेलवे ने सख्त किए नियम रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।  यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है। जमीनी स्तर वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं। रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है? 1 जुलाई, 2026 से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा। क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं? सामान्यतः नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।    

जब सफेद झंडे के बीच हुई बातचीत, फिर भारत ने प्वाइंट 5465 पर लहराया तिरंगा; कारगिल की दिलचस्प कहानी

 कारगिल  कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की।  यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है।  17 हजार फीट पर आमना-सामना जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है।  जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले।  सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए।  मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए।  शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465 बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया।  चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी।  भारत के बेटे झुकना नहीं जानते आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

1 जुलाई से लागू हुए 10 बड़े बदलाव! LPG, पेट्रोल, आधार और आपकी जेब पर सीधा असर

 नई दिल्‍ली जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है।  1. एलपीजी के नियमों में बदलाव  केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है।  2. LPG के दाम में कटौती  मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है।  3. आधार कार्ड अपडेट  Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था।  4. रेलवे के नियम भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं।  5. ITR डेडलाइन  ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है।  6. पासपोर्ट फीस  अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है।  7. क्रेडिट कार्ड के नियम  SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों।  8. कारें हो रहीं महंगी  जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है।  9. पेट्रोल-डीजल के नियम  भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है।  10. ईपीएफओ अपडेट  सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

El Niño Impact: 2032 तक भारत को ₹94 लाख करोड़ का आर्थिक झटका, रिपोर्ट में बड़ा दावा

नई दिल्ली अल-नीनो को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है. अनुमान है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94,55,960 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हो सकता है।  वहीं, पूरी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक नुकसान  का अनुमान है. यह नुकसान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, रोजगार, एनर्जी और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर सकती है और गर्मी बढ़ा सकती है. आने वाले अल-नीनो के दौरान भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई गई है।  भारत पर क्या असर पड़ सकता है? एक इंग्लिश अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार अल-नीनो की वजह से भारत में भीषण गर्मी बढ़ सकती है और मानसून कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा. बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और बिजली की मांग भी बढ़ सकती है. इससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।  2032 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान क्यों? रिसर्चर्स का कहना है कि अल-नीनो का असर केवल उसी साल तक सीमित नहीं रहता. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कई वर्षों तक धीमी रह सकती है. अनुमान है कि 2032 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह नुकसान 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता है. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं।  कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, "हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी 'जी राम जी' कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा।  कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है।  केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए 'जी राम जी' कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके।  दिल्ली में कब दस्तक देगा? यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है।  जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है।  क्या करना होगा?  एकस्पर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. इसके लिए बेहतर वेदर फोरकास्ट, समय पर चेतावनी देने वाले सिस्टम, गर्मी सहने वाली फसलों का विकास, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा. इससे अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज दोनों के असर को कम करने में मदद मिल सकती है।  एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला अल-नीनो केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, खेती और लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी और क्लाइमेट के हिसाब से प्लानिंग बनाना फ्यूचर के नुकसान को कम करने के लिए जरूरी होगा। 

अमरनाथ यात्रा को लेकर हाई अलर्ट, खुफिया एजेंसियों ने आतंकी साजिश की आशंका जताई

श्रीनगर   आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकती है। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है। चौतरफा मुश्किलों से घिरा है पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए इस समय पीओके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि हाल ही में अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किया गया हवाई हमला भी अंदरूनी दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश का हिस्सा था। इस हवाई हमले में 35 लोगों की मौत हुई। अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की आशंका क्यों? भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए कुछ इनपुट से संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान भारत में भी आतंकी हमले की साजिश रच रहा है। इसके लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर के जंगलों में छिपे कुछ आतंकियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं आतंकियों के जरिए अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान, इन आतंकियों को पहलगाम जैसा बड़ा हमले करने के निर्देश देने की कोशिश कर रहा है। अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस ने पूरे मार्ग पर आतंकवाद रोधी तंत्र को और मजबूत किया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे और अत्याधुनिक डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। पंजाब भी निशाने पर? एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, आईएसआई पिछले कुछ समय से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अपने मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही है। अधिकारी का दावा है कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत में जल्द कोई बड़ी आतंकी घटना हो, ताकि पीओके और अन्य क्षेत्रों में बगावत के हालात से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। पीओके के हालात से पाकिस्तान पर बढ़ रहा दबाव खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। वहां के लोग अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान के भीतर भी बड़ी संख्या में लोग पीओके के लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे वहां की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान पर दबाव बढ़ता जा रहा है।   

ट्रंप-मोदी की दोस्ती पर बड़ा खुलासा, सर्जियो गोर बोले- सुबह 6 बजे अचानक किया PM मोदी को फोन

 नई दिल्ली भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलने को लेकर हुए विवाद को खारिज करते हुए कहा कि "लेटरहेड पर लिखे नाम" से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है. अमेरिकी राजदूत ने इस बात को खारिज किया कि भारत-अमेरिका के बीच संबंध कमजोर हो रहे हैं।  US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत आज भी किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज़्यादा सैन्य अभ्यास करता है और रक्षा अधिकारियों के बीच नियमित द्विपक्षीय दौरे होते हैं।  गोर की ये टिप्पणी 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई हैं. 1947 में बनी US पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है, जिसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है।  लेटरहेड से क्या फर्क पड़ता है US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक कमांड' कर दिया गया था. इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने इस यूनिफाइड कमांड का पुराना नाम बहाल कर दिया।   गोर ने कहा, "मैं बस एक बात कहना चाहता हूं क्योंकि नाम बदलने को लेकर बहुत से लोगों ने काफी हंगामा किया था. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या नाम लिखा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है।  अमेरिकी राजदूत ने कहा, "हां, नाम बदला गया; लेकिन हम अभी भी वहां मौजूद हैं. भारत आज भी किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं ज़्यादा मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता ह. हर महीने कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे भारतीय सैनिक यहां आएं या अमेरिकी सैनिक उस क्षेत्र में जाएं। उन्होंने कहा कि अगले दो हफ़्तों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा।  कमजोर नहीं हुए हैं भारत-अमेरिका के संबंध गोर ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हो गए हैं; उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, "तो जो विशेषज्ञ ऑनलाइन बैठकर ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि यह रिश्ता मुश्किल में है, उन्हें असलियत देखनी चाहिए. चाहे व्यापार हो, रक्षा हो या लोगों के बीच आपसी संबंध हों. हर मामले में यह रिश्ता मजबूत स्थिति में है।  गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  भारत में अमेरिकी राजदूत ने एक घटना का जिक्र किया जब ट्रंप ने मियामी से मोदी को फोन करने का फैसला किया; ये तब हुआ था जब ट्रंप वहां 'अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप' (UFC) के मुकाबले देख रहे थे।  भारत में सुबह 6 बज रहे थे, ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन लगाइए… गोर ने बताया, "यह कुछ महीने पहले की बात है. राष्ट्रपति मियामी में UFC कार्यक्रम में थे और हम बैकस्टेज बैठे थे, तभी उन्होंने मुझसे कहा, 'चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं।  गोर ने ट्रंप की बात याद करते हुए कहा, "मैंने कहा सर वहां (भारत में) सुबह के 6 बजे हैं.' उन्होंने कहा, 'वह (मोदी) जाग रहे होंगे. वह (मोदी) मेरी तरह ही हैं।  गोर ने बताया कि जब तक वह नई दिल्ली में कुछ लोगों से बात कर पाते, तब तक ट्रंप UFC के मंच पर पहुंच चुके थे और आखिरकार मोदी के साथ बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई।  गोर ने कहा कि इस घटना से ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच के रिश्ते की असलियत पता चलती है।  अमेरिकी राजदूत गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, "इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि जब आप किसी के दोस्त होते हैं, तो हर चीज पहले से तय करने की ज़रूरत नहीं होती." उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति सच में प्रधानमंत्री को अपना दोस्त मानते हैं।  उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के साथ उनका जुड़ाव उनके पहले कार्यकाल से ही है. भारत से जुड़ी उनकी अच्छी यादें हैं. और यह एक बहुत बड़ा फायदा है।  गोर ने कहा, "अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है." उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो साल दशकों तक चलने वाले द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने के लिए बहुत अहम होंगे।  गोर ने बताया कि ये अगले दो साल रिश्ते को आने वाले कई दशकों के लिए एक नई दिशा देंगे. इसलिए जो भी इसमें शामिल हो रहा है, वह इसे एक लंबे समय के प्रोजेक्ट के तौर पर देखे. यह एक या दो साल का मामला नहीं है, बल्कि हम आज जो बोएंगे, वही हमें आने वाले दशकों तक आगे ले जाएगा।