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सोशल मीडिया निगरानी बढ़ी: चुनाव आयोग ने सियासी विज्ञापनों व प्रत्याशियों के खातों के लिए दिए निर्देश

 नई दिल्ली चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और जम्मू-कश्मीर समेत छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसी बीच आयोग ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर 2025 को आदेश दिए हैं कि सभी राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दल, साथ ही चुनाव में भाग लेने वाले प्रत्याशी, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रचार करने से पहले मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से अपने राजनीतिक विज्ञापनों का पूर्व-सत्यापन कराएं। विज्ञापन और सोशल खातों का पूर्व-सत्यापन चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, किसी भी राजनीतिक विज्ञापन को इंटरनेट या सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले एमसीएमसी की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। बता दें कि, सभी राज्य और जिले में एमसीएमसी बनाई गई है जो विज्ञापनों की जांच करेगी और दिशानिर्देशों के अनुसार पूर्व-सत्यापन करेगी। भ्रामक समाचार पर निगरानी मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी संदिग्ध मामलों जैसे 'पेड न्यूज' पर भी कड़ी नजर रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी। वहीं चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी नामांकन दाखिल करते समय चुनाव आयोग को देना होगा। चुनावी खर्च का विवरण भी साझा करना अनिवार्य इसके साथ ही चुनावी खर्च का विवरण भी साझा किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, राजनीतिक दलों को सोशल मीडिया और इंटरनेट प्रचार पर हुए खर्च का विवरण चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के अंदर देना होगा। इसमें इंटरनेट कंपनियों को भुगतान, विज्ञापन सामग्री तैयार करने का खर्च और सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन का खर्च शामिल होगा। कुल मिलाकर चुनाव आयोग का यह कदम डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आयोग का उद्देश्य है कि राजनीतिक प्रचार ईमानदारी और नियमों के अनुरूप हो।

PAK सेना ने 15 मिनट की मुठभेड़ में टेके घुटने, तालिबान हथियार ले उड़े

काबुल  तालिबानी लड़ाके और पाकिस्तानी की सेनाओं के बीच एक बार फिर से भीषण जंग हो रही है. दोनों सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित स्पिन बोल्डक में लड़ाई लड़ रही हैं. आज सुबह लगभग 4 बजे स्पिन बोल्डक क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच भारी लड़ाई शुरू हो गई. सोशल मीडिया पर जारी किए गए बॉर्डर में स्पिन बोल्डक-चमन सीमा का क्रॉसिंग दिखाई दे रहा है. स्पिन बोल्डक अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर स्थित है. यह उत्तर में कंधार शहर और दक्षिण में पाकिस्तान के चमन और क्वेटा शहर से एक राजमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है. पश्चिमी-चमन सीमा क्रॉसिंग शहर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है.  अफ़गान तालिबान का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिकों के साथ भिडंत के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों को सरेंडर के लिए मजबूर कर दिया और उनके हथियार ज़ब्त कर लिए गए.  एक और वीडियो में दिखाया गया है कि लड़ाई के 15 मिनट के अंदर ही तालिबानियों ने पाकिस्तानियों के हथियार जब्त कर लिए. स्पिन बोल्डक जिले के सूचना प्रमुख अली मोहम्मद हकमल ने टोलो न्यूज़ को बताया कि जारी लड़ाई में हल्के और भारी दोनों तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है. अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी तोपखाने की गोलाबारी से आम लोगों के घर तबाह हो गए हैं, जिससे कई निवासियों को इलाक़े से भागना पड़ा है.  अफगानिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े कबीर हकमाल ने कहा है कि, 'स्पिन बोल्डक क्षेत्र में तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच भीषण झड़पें हुई हैं. कई सूत्रों ने हताहतों की पुष्टि की है और बताया है कि कई स्थानीय घर नष्ट हो गए हैं. पाकिस्तानी सेना कथित तौर पर डूरंड रेखा से सटे इलाकों को निशाना बनाने के लिए भारी हथियारों और हवाई शक्ति का इस्तेमाल कर रही है. दोनों पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.' AFGEYE नाम की न्यूज एजेंसी ने कहा है कि कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक गेट पर आज तड़के अफगान सुरक्षा बलों और पाकिस्तानियों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गईं. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हताहत होने की पुष्टि हुई है. एक दूसरे यूजर ने लिखा है कि अफगान सेना ने स्पिन बोल्डक में डूरंड रेखा पर पाकिस्तान की चौकियों को नष्ट कर दिया है और दर्जनों पाकिस्तानी सैनिकों को ज़िंदा पकड़ लिया है. उन्होंने बड़ी संख्या में हल्के और भारी हथियारों के साथ-साथ टैंक भी ज़ब्त कर लिए हैं और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान में स्थानांतरित कर दिया है. पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच हालिया टकराव  11-12 अक्टूबर की रात को अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला बोला. तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 25 चौकियां कब्जे में लीं, जबकि पाकिस्तान के अनुसार 23 उसके सैनिक मारे गए और 200 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए.  यह लड़ाई डुरंड लाइन के आस-पास हो रही है. ये वो जगह है जहां पर पाकिस्तान अफगानिस्तान पर टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को पनाह देने का आरोप लगाता है. पाकिस्तान टीटीपी पर अपने यहां हमलों का आरोप लगाता रहता है.  जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान ने कंधार और हेलमंद में ड्रोन हमले किए. तनाव के बीच दोनों देशों ने सीमा बंद कर दी है जिससे व्यापार ठप हो गया और हजारों वाहन फंस गए हैं. 

MP में बच्चों की मौत से जुड़ा कोल्ड्रिफ, भारत में तीन कफ सिरप के इस्तेमाल पर अलर्ट

नई दिल्ली विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत के कई राज्यों में प्रतिबंधित तीन ब्रांड के जहरीले कफ सिरप के बारे में स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। संगठन ने अधिकारियों से आग्रह किया कि तीनों प्रतिबंधित सिरप में से किसी के मिलने पर एजेंसी को सूचित करें। डब्ल्यूएचओ के परामर्श में उस संदिग्ध कोल्ड्रिफ कफ सिरप का भी जिक्र है, जिसे लेने से कथित तौर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की जान गई।   स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि प्रभावित दवाइयां कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश टीआर और रिलाइफ के विशिष्ट बैच का निर्माण क्रमशः श्रीसन फार्मास्युटिकल्स, रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स और शेप फार्मा करती है। ये जहरीले कफ सिरप संभावित रूप से जानलेवा बीमारी का भी कारण बन सकते हैं। भारत के स्वास्थ्य प्राधिकरण, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने डब्ल्यूएचओ को बताया कि पिछले हफ्ते भारत में 5 साल से कम उम्र के 17 बच्चों की ये सिरप पीने से मौत हो गई थी। सीडीएससीओ ने कहा कि इनमें से कोई भी दूषित दवा भारत से निर्यात नहीं की गई है और अवैध निर्यात का कोई सबूत नहीं है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह सिरप भारत में जोखिम भरे हैं और इनसे गंभीर-जान पर खतरा पैदा करने वाली बीमारी हो सकती हैं। सिरप में पाया गया था डायथिलीन ग्लाइकॉल गौरतलब है कि दूषित दवा के प्रयोगशाला परीक्षणों में डायथिलीन ग्लाइकॉल के मिलावट की पुष्टि हुई थी जो एक जहरीला रसायन है और बड़े पैमाने पर विषाक्तता की घटनाओं से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक डीके मौर्य ने बताया था कि इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48% से ज्यादा पाई गई, जबकि स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है। यह मात्रा बेहद खतरनाक है। कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली कंपनी पर लग गया ताला? कई राज्यों ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने अब तमिलनाडु में मिलावटी कफ सिरप कोल्ड्रिफ बनाने वाली श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी का न सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस पूरी तरह से रद्द कर दिया है साथ ही कंपनी को बंद करने का आदेश भी दिया गया है। इसस पहले कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को मध्य प्रदेश के एक विशेष जांच दल ने गिरफ्तार भी किया था। प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के एक मामले में श्रीसन फार्मास्युटिकल्स और उसके कुछ अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी भी की है।  

RBI ने दी डिजिटल पेमेंट्स को नई दिशा, छोटे लेन-देन के नियमों में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश के प्रमुख बैंकों ने RBI के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वे ₹100 से कम के छोटे डिजिटल लेन-देन पर SMS अलर्ट भेजना बंद करना चाहते हैं। बैंक इसके लिए RBI की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि UPI और अन्य डिजिटल तरीकों से होने वाले छोटे लेन-देन में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण ग्राहकों को लगातार SMS अलर्ट मिल रहे हैं, जिससे उन्हें Notification Fatigue हो रही है। लगातार अलर्ट आने से ग्राहक महत्वपूर्ण और बड़े लेन-देन के अलर्ट को भी नजरअंदाज करने लगे हैं, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है। नए प्रस्ताव के तहत ग्राहकों को केवल बड़े या एक निर्धारित संख्या/मूल्य से अधिक के लेन-देन के लिए ही SMS अलर्ट भेजे जाएंगे। जानकार सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव पिछले महीने सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के आंतरिक विचार-विमर्श के बाद RBI को भेजा गया है। बैंकों ने इसके साथ ही धोखाधड़ी की आशंका को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों की एक सूची भी प्रस्तुत की है। ग्राहकों को मिलेगा ऑप्शन वर्तमान में RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को ग्राहकों को SMS अलर्ट देना जरुरी है। नए प्रस्ताव में ग्राहक को यह ऑप्शन दिया जाएगा कि वे ₹100 से कम के लेन-देन के लिए SMS अलर्ट बंद करना चाहते हैं या नहीं। जिन ग्राहकों को अलर्ट की जरूरत होगी, वे ऐप नोटिफिकेशन या ईमेल अलर्ट के जरिए से अलर्ट प्राप्त करना जारी रख सकते हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि एक SMS भेजने पर लगभग ₹0.20 की लागत आती है, जो ग्राहक से वसूली जाती है। बैंकों का मानना है कि इस बदलाव से तकनीक का बेहतर उपयोग होगा और ग्राहकों को वास्तविक उपयोग के अनुसार ही शुल्क लिया जाना चाहिए।

21वीं किस्त से जुड़ी अहम खबर: जानिए, क्या पति और पत्नी दोनों ले सकते हैं इस योजना का लाभ?

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पीएम किसान सम्मान स्कीम साल 2019 में शुरू की थी। इस योजना के तहत सरकार किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह राशि किसानों के बैंक खाते में तीन किस्तों में ट्रांसफर की जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त 2 हजार रुपये की होती है। किस्तें 4 महीने के अंतराल पर दी जाती हैं। अब तक सरकार ने इस योजना की 21 किस्तें जारी कर दी हैं। 21वीं किस्त के पैसे फिलहाल पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित लगभग 27 लाख किसानों के खातों में भेजे गए हैं। बाकी किसानों को यह किस्त कब मिलेगी, इस बारे में किसानों में उत्सुकता बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिवाली से पहले 21वीं किस्त जारी हो सकती है, लेकिन संभावना कम दिखाई दे रही है। संभव है कि यह किस्त अगले महीने जारी की जाए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस स्कीम का पति-पत्नी दोनों लाभ ले सकती हैं या नहीं? कई किसानों के मन में सवाल होता है कि अगर पति-पत्नी दोनों एक ही परिवार में आवेदन करें, तो क्या दोनों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के नियमों के अनुसार, एक परिवार में केवल एक सदस्य ही योजना का लाभ ले सकता है। यह सदस्य वही होगा जिसके नाम पर कृषि भूमि पंजीकृत है। यानी परिवार में पति और पत्नी दोनों एक साथ लाभ नहीं ले सकते, केवल भूमि के मालिक को ही राशि मिलती है। लाभ लेने के लिए जरूरी प्रक्रिया पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को e-KYC और भूलेखों का सत्यापन कराना जरूरी है। इसके बिना योजना की किस्तें खाते में ट्रांसफर नहीं की जा सकतीं। सरकार किसानों को सलाह देती है कि वे योजना में आवेदन करते समय सभी दस्तावेज सही और अपडेट रखें, ताकि आर्थिक सहायता समय पर मिल सके।

सहारा केस: सिब्बल ने जताई आपत्ति, कहा टुकड़ों में बिक्री से नुकसान; सुप्रीम कोर्ट बोले- देखेंगे!

नई दिल्ली सहारा इंडिया ग्रुप चाहता है कि उसकी प्रॉपर्टीज एक साथ बेच दी जाएं. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान Sahara India Commercial Corporation Ltd (SICCL) ने यही गुहार लगाई. ग्रुप ने विभिन्न संपत्तियों जिनमें अंबी वैली (महाराष्ट्र) और सहारा शहर (लखनऊ) जैसी हाई-वैल्यू प्रॉपर्टीज शामिल हैं, को Adani Properties Pvt Ltd को बेचने की अनुमति मांगी है. कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि किन प्रॉपर्टीज पर विवाद है और किन पर नहीं. चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने केंद्र सरकार, SEBI और अमिकस क्यूरी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी. ‘अंबी वैली’ से ‘सहारा शहर’ तक, 88 प्रॉपर्टीज की सूची, पर कई पर विवाद     सहारा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि समूह अपनी संपत्तियां बेचकर बकाया राशि चुकाने की योजना बना रहा है. उनके मुताबिक, इन संपत्तियों की वैल्यू लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये है. सिब्बल ने कहा, ‘इनमें 88 प्रॉपर्टीज शामिल हैं. इन्हें एक साथ बेचना जरूरी है. टुकड़ों में बेचने से खरीदार नहीं मिलेंगे.’     SEBI की ओर से कहा गया कि सहारा इन प्रॉपर्टीज को बेच सकता है, बशर्ते बिक्री मार्केट रेट के 90% से कम पर न हो. SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट अनुमति देती है, तो उन्हें किसी प्रस्ताव की अलग से जांच करने की आवश्यकता नहीं.     वहीं, एडवोकेट मुकुल रोहतगी, जो Adani Properties Pvt Ltd की ओर से पेश हुए, ने कहा कि कंपनी सभी प्रॉपर्टीज खरीदने को तैयार है. उन्होंने कहा, ‘अगर इसे हिस्सों में बेचा गया तो मुकदमेबाजी कभी खत्म नहीं होगी. हम सब कुछ, सभी क्लेम्स के साथ लेने को तैयार हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले अधिकार तय करो, फिर बिक्री होगी     सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि फिलहाल किसी बिक्री पर अनुमति देने से पहले सभी पक्षों के अधिकारों को क्रिस्टलाइज करना जरूरी है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘कुछ प्रॉपर्टीज पर कई दावेदार हैं, कुछ पर मुकदमे चल रहे हैं. पहले यह साफ होना चाहिए कि कौन सी प्रॉपर्टी विवादित है और कौन सी नहीं.’     सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन (अमिकस क्यूरी) ने कहा कि कुछ जमीनें ऐसी हैं जिन्हें बेचा ही नहीं जा सकता, क्योंकि वे ‘वेटलैंड्स (जल क्षेत्र)’ हैं. इस पर सीजेआई गवई ने कहा, ‘अगर कोई वेटलैंड खरीदे भी तो वहां निर्माण संभव नहीं होगा.’     कोर्ट ने अमिकस को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत चार्ट तैयार करें, जिसमें यह दर्ज हो कि कौन सी संपत्तियां विवादित हैं, किन पर हक तय हो चुका है, और किन पर ‘शैडो ऑफ डाउट’ है. केंद्र, SEBI और सहारा, तीनों को जवाब दाखिल करने का निर्देश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र की ओर से पेश हुए, ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है और सरकार को भी अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए. इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि वित्त मंत्रालय (MoF) को भी पार्टी बनाया जाए ताकि केंद्र सरकार इस पर अपना रुख साफ कर सके. सिब्बल ने बताया कि सहारा ने हाल ही में SEBI–Sahara फंड से 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि कुछ कोऑपरेटिव सोसायटीज के भुगतान किए जा सकें. लेकिन अन्य वकीलों ने दावा किया कि अभी भी करीब 9000 करोड़ रुपये का डेफिसिट है. अदालत ने कहा कि सहारा को पहले कर्मचारियों के दावों और बकाया राशि की स्थिति स्पष्ट करनी होगी. ‘एक साथ बिक्री जरूरी’, सिब्बल की दलील, कोर्ट ने कहा ‘देखेंगे’ कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि संपत्तियों को ‘एक बास्केट में’ बेचना ही व्यवहारिक विकल्प है. उन्होंने कहा, ‘अगर एक-एक करके बेचा गया तो निवेशक पीछे हट जाएंगे, जैसा पहले वर्सोवा प्रोजेक्ट में हुआ था.’ जस्टिस गवई ने कहा कि अदालत यह तय करेगी कि प्रॉपर्टीज को एकमुश्त (en bloc) बेचा जाए या अलग-अलग (piecemeal). सीनियर एडवोकेट अरविंद दातर ने सुझाव दिया कि जिन प्रॉपर्टीज पर कोई विवाद नहीं है, उन्हें पहले बेचा जा सकता है और बाकी पर अलग सुनवाई हो.  

अब US पासपोर्ट उतना ताकतवर नहीं! रैंकिंग में गिरावट, मलेशिया से हुई बराबरी

वाशिंगटन अमेरिका की साख को बड़ा झटका लगा है. Henley Passport Index के ताजा आंकड़ों में अमेरिकी पासपोर्ट 20 साल में पहली बार दुनिया के टॉप 10 सबसे पावरफुल पासपोर्ट्स की लिस्ट से बाहर हो गया है. अब यह 12वें पायदान पर पहुंच गया है और मलेशिया के साथ टाई हो गया है. कभी नंबर 1 पर रहा अमेरिकी पासपोर्ट अब सिर्फ 180 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल एंट्री देता है. यह गिरावट ग्लोबल सॉफ्ट पावर में अमेरिका के कमजोर होते प्रभाव का संकेत मानी जा रही है. वहीं, एशिया-पैसिफिक देशों ने एक बार फिर पासपोर्ट पावर में बाजी मार ली है. सिंगापुर और साउथ कोरिया ने दिखाया दम, एशिया की पासपोर्ट ताकत हावी Henley Passport Index के मुताबिक, सिंगापुर अब दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट है, जो 193 देशों में वीजा-फ्री एंट्री देता है. दूसरे नंबर पर साउथ कोरिया (190 डेस्टिनेशंस) और तीसरे पर जापान (189) हैं. वहीं, यूरोप के पारंपरिक पावरहाउस देशों – जर्मनी, इटली और स्पेन – भी टॉप 5 में शामिल हैं. इस बीच, अमेरिका का दो पायदान नीचे खिसककर 12वें स्थान पर पहुंचना ग्लोबल ट्रैवल फ्रीडम की रैंकिंग में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. क्यों गिरा अमेरिकी पासपोर्ट का रुतबा?     अमेरिकी पासपोर्ट की गिरावट के पीछे कई कारण हैं – खासकर उसकी विदेश नीति और वीजा-रिक्रिप्रोसिटी की कमी.     ब्राजील ने हाल ही में अमेरिका के नागरिकों के लिए वीजा-फ्री एंट्री खत्म की क्योंकि अमेरिका ने ब्राजीलियनों के लिए वैसी छूट नहीं दी.     चीन और वियतनाम की नई वीजा-फ्री लिस्ट में भी अमेरिका को शामिल नहीं किया गया.     इसके अलावा, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार और सोमालिया जैसे देशों ने नए ई-वीजा सिस्टम लागू किए, जिससे अमेरिकी पासपोर्ट की पहुंच और घट गई. ‘ओपननेस’ में अमेरिका पीछे, दुनिया जवाब दे रही है उसी अंदाज में डेटा दिखाता है कि अमेरिकी नागरिकों को भले ही 180 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलती हो, मगर खुद अमेरिका सिर्फ 46 देशों के नागरिकों को बिना वीजा एंट्री देता है. Henley Openness Index में अमेरिका 77वें स्थान पर है. इसका मतलब साफ है कि अमेरिका जितना बंद होता जा रहा है, उतना ही बाकी देश भी उसके नागरिकों के लिए अपने दरवाजे बंद कर रहे हैं. यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया के बाद दुनिया में सबसे बड़ी ‘रीसिप्रोकल गैप’ है. चीन ने दिखाई ग्रोथ, अमेरिका से आगे बढ़ा कूटनीतिक पासपोर्ट गेम जहां अमेरिका की रैंक नीचे जा रही है, वहीं चीन ने पासपोर्ट पावर में जबरदस्त उछाल दर्ज की है. 2015 में 94वें स्थान पर रहा चीन अब 2025 में 64वें नंबर पर पहुंच गया है. पिछले 10 सालों में चीन ने 37 नए देशों में वीजा-फ्री एंट्री हासिल की है. चीन अब 76 देशों को वीजा-फ्री एक्सेस देता है, यानी अमेरिका से 30 ज्यादा. हाल ही में उसने रूस को भी इस लिस्ट में जोड़ा है. यह कदम साफ दिखाता है कि बीजिंग अपने ‘ट्रैवल डिप्लोमेसी’ कार्ड को बखूबी इस्तेमाल कर रहा है, जबकि वाशिंगटन अपनी ‘ओपननेस पॉलिसी’ में पिछड़ रहा है. अमेरिकियों में बढ़ी ‘दूसरी सिटिजनशिप’ की होड़ US पासपोर्ट की गिरती ताकत का असर अब अमेरिकियों के व्यवहार पर भी दिखने लगा है. Henley & Partners की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अमेरिकी नागरिक ‘इन्वेस्टमेंट माइग्रेशन प्रोग्राम्स’ में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बना रहे हैं. साल की तीसरी तिमाही तक अमेरिकियों के एप्लिकेशन पिछले पूरे साल की तुलना में 67% ज्यादा रहे. यह ट्रेंड बताता है कि कई अमेरिकी अब वैकल्पिक नागरिकता या रेसिडेंसी के जरिए अपनी ‘ट्रैवल फ्रीडम’ वापस पाना चाहते हैं.  

दिल्ली-उत्तर भारत में बदलेंगे मौसम के मिज़ाज, IMD ने ठंड और बारिश को लेकर जारी किया बड़ा अलर्ट

नई दिल्ली देश के उत्तरी इलाकों में हल्की सर्द हवा बहने लगी है और दिवाली की चमक के साथ ही ठंड की आहट भी साफ सुनाई देने लगी है। भारतीय मौसम विभाग के ताज़ा अनुमान के मुताबिक, इस बार दिवाली के तुरंत बाद दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में ठिठुरन तेज़ी से बढ़ सकती है। अभी आसमान साफ़ है और बारिश का कोई संकेत नहीं है, लेकिन तापमान में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हो चुकी है — और ये शुरुआत है एक लंबी सर्दी की। दिल्ली-NCR में तापमान गिरा, सुबह-शाम महसूस हो रही सर्दी मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में दिन का तापमान अभी 30-31 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि रात का पारा घटकर 18-19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ये आंकड़े मौसमी औसत से कुछ कम हैं और अगले कुछ दिनों में और भी नीचे जा सकते हैं। दिल्ली में सोमवार को न्यूनतम तापमान 19°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.6 डिग्री नीचे है। लगातार चौथे दिन राजधानी का पारा 20°C से नीचे बना हुआ है — यानी सर्दी ने धीरे-धीरे शहर में अपने कदम जमा लिए हैं। त्योहारी सीज़न के बाद बढ़ेगा प्रदूषण का खतरा सर्दी की दस्तक के साथ दिल्ली की हवा में ज़हर घुलना भी शुरू हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक सोमवार शाम तक दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 189 दर्ज किया गया — जो कि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। सर्दियों में तापमान घटने के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ना आम बात है, और विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में हालात और बिगड़ सकते हैं। दक्षिण भारत में हो सकती है भारी बारिश जहां उत्तर भारत में सर्दी दस्तक दे रही है, वहीं देश के दक्षिणी हिस्सों में अभी भी बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक: तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, और लक्षद्वीप में 15 से 18 अक्टूबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन इलाकों में 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने की भी आशंका है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा, मराठवाड़ा, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र और गोवा में भी 15 अक्टूबर को गरज के साथ बारिश हो सकती है। पश्चिम बंगाल में मानसून ने कह दिया अलविदा इस बीच, बंगाल से दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक विदाई हो चुकी है। अब राज्य में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहेगा। कोलकाता में सोमवार को अधिकतम तापमान 31°C और न्यूनतम 24°C दर्ज किया गया, जो इस समय के लिए सामान्य है। आईएमडी ने अगले कुछ दिनों तक यहां आंशिक बादल रहने की संभावना जताई है, लेकिन बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है। क्या कहना है मौसम विभाग का? अगले 7 दिनों तक उत्तर भारत में मौसम शांत और सूखा रहेगा। दिवाली के बाद तापमान में गिरावट और हवा में नमी बढ़ेगी, जिससे कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है। वहीं, दक्षिण भारत को भारी बारिश और तेज हवाओं के लिए तैयार रहना होगा।  अब वक़्त है रज़ाई निकालने का! त्योहारों की रौनक के बीच सर्दी ने चुपचाप दस्तक दे दी है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुबह-शाम की गुलाबी ठंड जल्द ही कंबल और स्वेटर निकालने पर मजबूर कर देगी। दूसरी तरफ, दक्षिण भारत में बारिश की बूंदें अब भी मौसम को भीगा रही हैं।  

NHAI की बड़ी योजना: नेशनल हाईवे की फोटो भेजो, पैसों की गारंटी ₹1,000!

नई दिल्ली क्या कभी आपने किसी टोल प्लाजा पर गंदे टॉयलेट देखकर नाराज़गी महसूस की है? अगर हां, तो अब यही नाराज़गी आपके लिए इनाम का जरिया बन सकती है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए एक अनोखी योजना की शुरुआत की है, जिसमें यात्रियों को गंदे टॉयलेट की रिपोर्टिंग करने पर ₹1,000 का FASTag रिचार्ज इनाम के तौर पर दिया जाएगा। 31 अक्टूबर 2025 तक चलेगा ये खास ऑफर NHAI की यह पहल देशभर के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू होगी और इसकी अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2025 तय की गई है। इस मुहिम का मकसद है-हाईवे यात्रियों को साफ-सुथरे वॉशरूम उपलब्ध कराना और जिम्मेदार नागरिकों को इसमें भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना। कैसे मिलेगा इनाम? जानिए प्रक्रिया इस स्कीम के तहत कोई भी यात्री यदि किसी गंदे टॉयलेट को देखता है तो वह ‘मार्ग यात्री’ मोबाइल ऐप के जरिए उस टॉयलेट की जियो-टैग की गई, टाइम-स्टैम्प्ड असली तस्वीर अपलोड कर सकता है। इसके साथ यात्रियों को अपने नाम, मोबाइल नंबर, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और लोकेशन की जानकारी भी देनी होगी। रिपोर्ट की गई शिकायत की AI और मैन्युअल जांच की जाएगी। अगर रिपोर्ट सही पाई जाती है तो संबंधित वाहन नंबर पर ₹1,000 का FASTag रिचार्ज क्रेडिट कर दिया जाएगा। इन नियमों का रखें ध्यान वरना इनाम नहीं मिलेगा इस योजना को लेकर कुछ सख्त नियम भी तय किए गए हैं: एक वाहन को केवल एक बार इनाम मिलेगा। यानी योजना की पूरी अवधि में कोई भी गाड़ी सिर्फ एक बार रिवॉर्ड के लिए पात्र होगी। एक टॉयलेट पर एक दिन में केवल एक इनाम मिलेगा – अगर कई लोग उसी टॉयलेट की शिकायत करते हैं, तो सबसे पहले सही रिपोर्ट भेजने वाले को ही इनाम मिलेगा। केवल एनएचएआई द्वारा संचालित टॉयलेट्स पर यह स्कीम लागू होगी। ढाबों, पेट्रोल पंपों या अन्य निजी जगहों पर बने टॉयलेट्स इस योजना के दायरे में नहीं आते। एडिट की गई, पुरानी या दोहराई गई फोटो अमान्य होंगी। सिर्फ ऐप से खींची गई असली, स्पष्ट और जियो-टैग्ड तस्वीरें ही स्वीकार की जाएंगी। शिकायत नहीं, अब जिम्मेदारी बनाएं इनाम का जरिया इस स्कीम के जरिए NHAI हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को स्वच्छ और उपयोगी बनाना चाहता है। अब यात्रियों को न केवल सफाई के लिए आवाज उठाने का मौका मिल रहा है, बल्कि उन्हें इसके लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। तो अगली बार जब आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करें और किसी टोल प्लाजा पर गंदा वॉशरूम देखें, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें। ‘मार्ग यात्री’ ऐप खोलिए, रिपोर्ट कीजिए और कमाइए ₹1,000 का रिचार्ज!  

पाकिस्तान पर जीत का एलान? तालिबान के दावों और अफगानों के प्रचंड नारे से बढ़ी कड़वाहट

काबुल  पाकिस्तान के साथ खूनी जंग में तालिबानी लड़ाकों ने खुद को विजेता घोषित कर दिया है. अफगानिस्तान के कई शहरों में जनता तालिबानी लड़ाकों के साथ सड़क पर जश्न मना रही है. अफगानिस्तान के आम शहरियों ने कहा है कि अफगानिस्तान की सरजमीं पर पाकिस्तानियों की बुरी नजर बर्दाश्त नहीं है. अफगानिस्तान के खोस्त, नंगरहार, पकीता, पंजशीर और काबुल में इस लड़ाई को पाकिस्तानियों को अफगानियों का जवाब बताया जा रहा है.  अफगानिस्तान की अंग्रेजी वेबसाइट टोलो न्यूज के अनुसार अफगानिस्तान की अवाम का कहना है कि पाकिस्तान के साथ टकराव में उनकी सेना की बहादुरी सराहनीय है और अफ़ग़ानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाली पाकिस्तान की कार्रवाई उनके लिए असहनीय है. अफगानी सेना और तालिबानी लड़ाकों का समर्थन करने के लिए कई शहरों में युवा और कबीलाई नेता जमा हुए. कुनार निवासी दाऊद खान हमदर्द ने कहा, "अगर पाकिस्तान ने हमारे क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया होता, तो अफगानिस्तान को उनके खिलाफ इस तरह के हमले करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता." नंगरहार निवासी मोहम्मद नादेर ने कहा, "हमारी सीमाएं अन्य पड़ोसियों के साथ भी लगती हैं, फिर भी उनके साथ हमारे संबंध खराब नहीं हुए हैं. इससे पता चलता है कि समस्या हमारे साथ नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ है, क्योंकि वह हमेशा से समस्याओं का स्रोत रहा है." कबायली बुज़ुर्गों,मजहबी विद्वानों ने घोषणा की कि मुल्क के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन उन्हें बर्दाश्त और वे इसके विरुद्ध कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं. कुनार के एक कबायली बुज़ुर्ग तवोस खान अखुंदज़ादा ने कहा, "अफगानिस्तान साम्राज्यों का कब्रिस्तान है. पाकिस्तान को अफगानिस्तान के इतिहास से सीख लेनी चाहिए और अफगानों को परेशान करना बंद करना चाहिए."पक्तिया निवासी मुस्लिम हैदरी ने कहा, "इस्लामिक अमीरात और अफगानिस्तान के लोगों का अपनी जमीन और क्षेत्र के एक-एक इंच की रक्षा करना वैध अधिकार है." अफगान की सुरक्षा पर कमेंट करने वाले एक हैंडल ने लिखा, "डूरंड रेखा पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हालिया "बदला" अभियान में तालिबान बलों की जीत का जश्न मनाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं. तालिबान लड़ाके झड़पों के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों से कथित तौर पर ज़ब्त किए गए हथियार भी दिखाते नजर आ रहे हैं.  अफगान डिफेंस के एक हैंडल ने लिखा, "अफगान फोर्सेज द्वारा पाकिस्तान को करारी शिकस्त दिए जाने के बाद अफगानी लोग अपने सैनिकों के सम्मान में एकत्रित होकर खुशी का जश्न मना रहे हैं." तालिबान के हमले में 58 सैनिक हुए ढेर, बौखलाए मुनीर ने बुलाई इमर्जेंसी मीटिंग अफगान तालिबान के एक के बाद एक हमलों ने पाकिस्तान की सेना को हिला दिया है. इन हमलों के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में सोमवार देर रात आपातकालीन उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई. सीएनएन-न्यूज18 को शीर्ष खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह बैठक डूरंड लाइन (Durand Line) के पास पाकिस्तानी चौकियों पर हुए तालिबान के हमलों के बाद बुलाई गई थी. इन हमलों ने पाक सेना की खुफिया और सीमा सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया है. बैठक में कॉर्प्स कमांडर पेशावर लेफ्टिनेंट जनरल उमर अहमद बुखारी, दक्षिणी कमांड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम अहमद खान, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद अवाइस, DG ISI आसिम मलिक, DGMI मेजर जनरल वाजिद अजीज और DGMO मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्लाह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आसिम मुनीर बेहद नाराज नजर आए और उन्होंने अपने कमांडरों से सख्त लहजे में पूछा, ‘पहले से खुफिया जानकारी क्यों नहीं थी? यह इंटेलिजेंस फेल्योर कैसे हुआ? कंटिजेंसी प्लान कहां था?’ मुनीर ने दिया बड़ा आदेश सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ने इसे बड़ी रणनीतिक विफलता बताते हुए हर अधिकारी से जवाब मांगा कि तालिबान की इस व्यापक कार्रवाई का कोई पूर्व संकेत क्यों नहीं मिला और फौरन जवाबी कार्रवाई की तैयारी क्यों नहीं थी? उन्होंने सभी वरिष्ठ कमांडरों को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें, जिसमें सभी कमियां, कारण और सुधारात्मक कदम स्पष्ट रूप से बताए जाएं. साथ ही, उन्होंने आदेश दिया कि सीमा क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए और ‘किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए हर मोर्चे पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय’ किए जाएं. तालिबान के हमले से थर्राया पाकिस्तान मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान अब ‘युद्ध की स्थिति में है. अंदरूनी और बाहरी दोनों मोर्चों पर.’ उन्होंने सवाल किया- ‘हम कब तक एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ बने रहेंगे जबकि हमारे जवान और नागरिक लगातार कुर्बान हो रहे हैं? अब वक्त है सख्त कदम उठाने का.’ खुफिया सूत्रों के अनुसार, तालिबान ने सात अलग-अलग मोर्चों अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दिर, चितराल, वजीरिस्तान (खैबर पख्तूनख्वा) और बहराम चाह व चमन (बलूचिस्तान) से भारी आर्टिलरी से हमला किया. इन हमलों ने पाकिस्तानी चौकियों को अचानक निशाना बनाया और सेना को चौंका दिया. क्यों भिड़े 'बिरादर' अफगानिस्तान और पाकिस्तान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल की भिड़ंत डुरंज लाइन पर 11-12 अक्टूबर 2025 की रात हुई. इसका मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा 9-10 अक्टूबर को काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में हवाई हमले थे. अफगानिस्तान पर राज कर रहे तालिबान ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया. पाकिस्तान ने इन हमलों को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर कार्रवाई कहा. पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि इन्हें अफगानिस्तान में पनाह मिलता है.  पाकिस्तानी हमले के जवाब में तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में 25 पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला किया. पाकिस्तान ने कहा कि इस हमले में उन्होंने 200 तालिबान लड़ाकों को मार गिराया और उसके 23 सैनिक मारे गए. जबकि तालिबान का दावा है कि 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. अभी दोनों देशों के बीच व्यापार बंद है और टेंशन चरम पर है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई कभी भी शुरू हो सकती है.